पद संभालने के एक साल बाद, 40 ट्रिलियन येन का उधारी लक्ष्य दबाव में
जापान की सरकार अगले वार्षिक बजट में नए बॉन्ड जारी करने की राशि करीब 40 ट्रिलियन येन तक सीमित रखने की कोशिश कर रही है। साथ ही उसे प्रस्तावित खाद्य कर कटौती, रणनीतिक उद्योगों में निवेश और रक्षा बजट बढ़ाने के लिए धन जुटाना है। यह चुनौती ऐसे समय आई है जब प्रधानमंत्री साने ताकाइची 21 अक्टूबर, 2026 को पद पर अपने पहले साल की वर्षगांठ मना रही हैं। इस दौरान मुद्रा और बॉन्ड बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।
विषय-सूची
- पद संभालने के एक साल बाद, 40 ट्रिलियन येन का उधारी लक्ष्य दबाव में
- जुलाई से अक्टूबर के बीच क्या बदला?
- येन और बॉन्ड यील्ड एक साथ क्यों अहम हैं
- ताकाइची ने रीफ्लेशन का ठप्पा खारिज किया
- अमेरिका का दबाव बढ़ा रहा है जल्द फैसले की जरूरत
- रक्षा विस्तार के लिए स्थायी वित्तपोषण जरूरी
- खाद्य कर राहत और निवेश के लिए धन की होड़
- बैंक ऑफ जापान के सामने महंगाई की अपनी परीक्षा
- बॉन्ड की रिकॉर्ड मांग से थोड़ी राहत
- मुख्य बातें
ताकाइची सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में येन करीब 151 प्रति डॉलर था, जो जुलाई के आखिर में गिरकर लगभग 164 तक पहुंच गया। यह करीब चार दशकों का इसका सबसे कमजोर स्तर था। जापान की बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड, यानी 10 साल के लिए सरकार को उधार देने पर निवेशकों को मिलने वाला प्रतिफल, करीब 1.6% से बढ़कर सितंबर के आखिर में 3.115% हो गया। यह लगभग 30 साल का उच्चतम स्तर था।
ताकाइची इस दावे को खारिज करती हैं कि उनकी नीतियों के कारण ये बदलाव हुए। उनके मंत्री अब राजकोषीय स्थिरता का भरोसा अधिक दे रहे हैं। इसका मतलब है कि समय के साथ सरकारी खर्च, राजस्व और उधारी का स्तर संभालने योग्य बना रहे। निवेशक अब बजट संबंधी फैसलों का इंतजार कर रहे हैं, जिनसे पता चलेगा कि ये आश्वासन उनकी प्रमुख नीति, यानी जिम्मेदार और सक्रिय राजकोषीय खर्च, के साथ कैसे तालमेल बिठाते हैं।
विश्वास लौटने के संकेत दिख रहे हैं। 20 अक्टूबर को 20 साल में परिपक्व होने वाले सरकारी बॉन्ड की नीलामी में रिकॉर्ड मांग रही। फिर भी कई बड़ी पहलों के लिए धन जुटाने का तरीका तय नहीं हुआ है। बैंक ऑफ जापान का 30 अक्टूबर का नीतिगत फैसला सरकारी खर्च, महंगाई और ब्याज दरों के बीच संबंध की एक और परीक्षा होगा।
जुलाई से अक्टूबर के बीच क्या बदला?
कैबिनेट कार्यालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, सरकार ने आर्थिक और राजकोषीय नीति परिषद की सिफारिशों के बाद 21 जुलाई को अपनी 2026 की आर्थिक नीति संबंधी दिशानिर्देश अपनाए। दस्तावेज़ का उपशीर्षक 2026 को जिम्मेदार और सक्रिय राजकोषीय नीति का पहला साल बताता है और जापान की महत्वाकांक्षाओं को साकार करने का आह्वान करता है।
इस नीति-खाके की तैयारी के दौरान, एक मसौदे की भाषा को बैंक ऑफ जापान की ब्याज दरें बढ़ाने से हतोत्साहित करने वाला माना गया। इससे जापानी सरकारी बॉन्ड की बिकवाली शुरू हुई। निवेशकों को चिंता हुई कि महंगाई से पहले ही परिवारों पर दबाव है, फिर भी सरकार अधिक खर्च और आसान मौद्रिक नीति, दोनों जारी रखना चाहती है।
मुख्य घटनाक्रम कई महीनों में सामने आए:
- 21 जुलाई: कैबिनेट ने वार्षिक आर्थिक और राजकोषीय नीति दिशानिर्देशों को मंजूरी दी।
- जुलाई का आखिरी हिस्सा: येन 164 प्रति डॉलर के करीब पहुंचा और जापान तथा अमेरिका ने मिलकर येन खरीद की।
- 1 सितंबर: अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि उन्होंने जापान से रीफ्लेशनरी नीति समाप्त करने का आग्रह किया है।
- सितंबर का आखिरी हिस्सा: जापान की बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड 3.115% तक पहुंची।
- 19 अक्टूबर: ताकाइची ने संसद में अपनी आर्थिक नीतियों की आलोचना खारिज की और बॉन्ड जारी करने पर नियंत्रण का वादा किया।
- 20 अक्टूबर: 20 साल में परिपक्व होने वाले सरकारी बॉन्ड की नीलामी में रिकॉर्ड मांग रही।
- 30 अक्टूबर: बैंक ऑफ जापान अगला नीतिगत फैसला और संशोधित आर्थिक अनुमान घोषित करेगा।
राजकोषीय नीति से जुड़े अगले बड़े फैसले 2026 के अंत में होंगे। उस समय सरकार अप्रैल 2027 में शुरू होने वाले वित्त वर्ष का बजट और पांच साल की नई रक्षा खर्च योजना तैयार करेगी।
येन और बॉन्ड यील्ड एक साथ क्यों अहम हैं
येन कमजोर होने से आयातित ईंधन, खाद्य पदार्थ और कच्चा माल जापानी मुद्रा में महंगे हो जाते हैं। आयात की बढ़ी लागत परिवारों के बिल और कारोबार के खर्च में दिख सकती है, जिससे वेतन वृद्धि की क्रय शक्ति घटती है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से एक अलग दबाव पैदा होता है: सरकार के लिए नई उधारी महंगी हो जाती है और अर्थव्यवस्था के दूसरे क्षेत्रों में वित्तपोषण की लागत भी प्रभावित होती है।
बॉन्ड की कीमतें और यील्ड विपरीत दिशा में चलती हैं। जब निवेशक मौजूदा बॉन्ड बेचते हैं, तो उनकी कीमत गिरती है और नए खरीदार को मिलने वाला प्रतिफल बढ़ जाता है। निवेशक इस ऊंचे प्रतिफल की मांग इसलिए कर सकते हैं क्योंकि उन्हें अधिक महंगाई, ज्यादा बॉन्ड जारी होने या केंद्रीय बैंक की ऊंची ब्याज दरों की आशंका होती है।
जापान को इन तीनों चिंताओं का सामना है। ताकाइची की खर्च और कर योजनाओं पर कड़ी नजर है। वहीं वैश्विक महंगाई का बढ़ता दबाव और बैंक ऑफ जापान की आगे ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों ने भी यील्ड को ऊपर धकेला है।
दाइवा सिक्योरिटीज के मुख्य अर्थशास्त्री तोरू सुहीरो का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात जापान की उधारी लागत को समझने में मदद करते हैं। 2026 की शुरुआत से अगस्त तक जापानी और अमेरिकी यील्ड के संबंध के आधार पर उन्होंने अनुमान लगाया कि तुलनीय अमेरिकी यील्ड 5.07% होने पर जापान की बेंचमार्क यील्ड करीब 3.36% होती। उनके विश्लेषण में जापान की वास्तविक यील्ड 2.93% थी, यानी 0.43 प्रतिशत अंक कम। उनका आकलन है कि राजकोषीय स्थिति को लेकर अत्यधिक चिंता कम हुई है, हालांकि आने वाले बजट फैसलों में अब भी जोखिम हैं।
ताकाइची ने रीफ्लेशन का ठप्पा खारिज किया
ताकाइची ने 19 अक्टूबर को संसद में आलोचना का सीधा जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने उन दावों का जिक्र किया जिनमें कमजोर मुद्रा और ऊंची ब्याज दरों को उनके नाम से जोड़ा गया था:
अब तक मेरी कई बातों के लिए आलोचना हुई है, जैसे 'ताकाइची का कमजोर येन' और 'ताकाइची की ऊंची ब्याज दरें'।
इसके बाद उन्होंने अपने रिकॉर्ड के इस वर्णन को खारिज किया:
मैं इन दावों को पूरी तरह खारिज करती हूं।
उनकी सरकार का कहना है कि मजबूत अर्थव्यवस्था और टिकाऊ सार्वजनिक वित्त येन में विश्वास बहाल करने में मदद करेंगे। वित्त मंत्री सत्सुकी कटायामा ने कहा है कि ताकाइची रीफ्लेशन समर्थक नहीं हैं। आर्थिक नीति मंत्री मिनोरू किउची ने भी सितंबर में कहा था कि जापान को अब रीफ्लेशनरी नीति की जरूरत नहीं है।
रीफ्लेशन का मतलब है मांग को बढ़ावा देने और कीमतें बढ़ाने के लिए सरकारी खर्च तथा आसान मौद्रिक नीति का इस्तेमाल। सरकार की हालिया भाषा में इस बात पर अधिक जोर है कि ऐसे निवेश किए जाएं जिनसे जापान की उत्पादन क्षमता बढ़े, न कि केवल लोगों और कंपनियों को अधिक खर्च करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
दाइ-इची लाइफ एसेट मैनेजमेंट इकोनॉमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के मुख्य अर्थशास्त्री और आर्थिक नीति परिषद के निजी क्षेत्र के सदस्य तोशिहिरो नागाहामा का कहना है कि निवेशकों ने इस मंशा को गलत समझा है। उनका कहना है कि परिषद में मौद्रिक नीति पर चर्चा नहीं हुई और ताकाइची ने अधिकारियों को बजट अनुरोधों की कड़ी जांच करने का निर्देश दिया है।
नोमुरा रिसर्च इंस्टीट्यूट के कार्यकारी अर्थशास्त्री और बैंक ऑफ जापान के पूर्व नीति बोर्ड सदस्य ताकाहिदे किउची का आकलन अलग है। उनका मानना है कि राजकोषीय जोखिमों की धारणा पर बाजार की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। उन्हें केंद्रीय बैंक के स्वतंत्र फैसलों के प्रति अधिक सम्मान और बॉन्ड जारी करने पर अंकुश लगाने की मंशा दिखती है, लेकिन उनका कहना है कि बजट से पता चलेगा कि राजकोषीय नीति वास्तव में बदली है या नहीं।
अमेरिका का दबाव बढ़ा रहा है जल्द फैसले की जरूरत
वॉशिंगटन की भागीदारी ने जापान की नीतिगत बहस को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है। बेसेंट को चिंता थी कि जापानी परिसंपत्तियों की बिकवाली अमेरिकी सरकारी बॉन्ड तक फैल सकती है, खासकर तब जब येन कमजोर होने पर जापानी संस्थान या अधिकारी विदेशों में अपनी हिस्सेदारी बेचें।
दोनों सरकारों ने 1998 के बाद पहली संयुक्त येन खरीद कार्रवाई की। इस हस्तक्षेप के बाद अगले सोमवार तक मुद्रा सुधरकर करीब 155.23 प्रति डॉलर पर पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह करीब 164 थी। इस कार्रवाई से निवेशकों को आगे भी समन्वित कदम उठाए जाने की संभावना पर विचार करने का कारण मिला।
इसके बाद बेसेंट ने बैंक ऑफ जापान से ब्याज दरें पहले बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने 1 सितंबर को कहा कि उन्होंने जापान से रीफ्लेशनरी नीति समाप्त करने को कहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी 22 सितंबर को ताकाइची के साथ बैठक में येन की कमजोरी को लेकर चिंता जताई।
मुद्रा की खरीद से उसकी मांग बढ़ती है और येन तेजी से मजबूत हो सकता है। लेकिन निवेशकों के फैसलों को लंबे समय तक प्रभावित करने वाले कारक ब्याज दरें, महंगाई और सरकारी वित्त पर भरोसा भी हैं। इसलिए जापान की सरकार अपनी नीतियों और निवेशकों की उनकी समझ, दोनों पर काम करने की कोशिश कर रही है। इसमें अंग्रेजी में अधिक जानकारी उपलब्ध कराना भी शामिल है।
रक्षा विस्तार के लिए स्थायी वित्तपोषण जरूरी
कटायामा ने कहा है कि रक्षा खर्च में अनुमानित बढ़ोतरी के वित्तपोषण पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। मंगलवार को वित्त मंत्री ने इस काम को दिशा देने वाले सिद्धांत बताए:
इसके वित्तपोषण के तरीके पर हम जरूरी कदमों पर विचार करेंगे, राजकोषीय स्थिरता का उचित ध्यान रखते हुए और वित्तपोषण के स्थिर स्रोत सुनिश्चित करते हुए।
प्रशासन के अधिकारियों के अनुमानों के मुताबिक, 2026 के अंत में प्रस्तावित नई रक्षा योजना के तहत पांच साल में कुल 70 ट्रिलियन से 80 ट्रिलियन येन खर्च हो सकता है। इसका सालाना औसत 14 ट्रिलियन से 16 ट्रिलियन येन होगा, हालांकि हर साल का अंतिम आवंटन और योजना का दायरा अभी तय नहीं हुआ है।
पिछले वित्त वर्ष में जापान ने रक्षा और व्यापक सुरक्षा गतिविधियों पर करीब 11 ट्रिलियन येन, यानी सकल घरेलू उत्पाद का 1.9%, खर्च किया। इस आंकड़े में तटरक्षक बल के अभियान जैसे खर्च भी शामिल थे। सरकार रक्षा खर्च को अंततः जीडीपी के 3.5% तक बढ़ाने पर भी विचार कर रही है, लेकिन इस स्तर को अंतिम खर्च लक्ष्य के रूप में अभी नहीं अपनाया गया है।
वित्तपोषण के विकल्पों में कॉरपोरेट कर में एक और बढ़ोतरी पर चर्चा हो रही है। कर बढ़ाने से नियमित खर्च के लिए नियमित राजस्व मिल सकता है, लेकिन इसकी राजनीतिक कीमत भी होती है। पूर्व प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा के रक्षा वित्तपोषण पैकेज में शामिल आयकर वृद्धि को बार-बार टाला गया और यह 2027 में लागू होनी है।
राजकोषीय बहस के साथ जापान की सैन्य भूमिका पर व्यापक चर्चा भी जारी है। घातक हथियारों के निर्यात पर पाबंदियां ढीली करने के सरकार के अप्रैल के फैसले के बाद मई में युद्ध-विरोधी प्रदर्शन हुए। इनमें टोक्यो की एक सभा भी शामिल थी, जिसमें अनुमानित 50,000 लोग जुटे। कटायामा का कहना है कि रक्षा खर्च के फैसले जापान के अपने स्वतंत्र आकलन के आधार पर होंगे।
खाद्य कर राहत और निवेश के लिए धन की होड़
प्रस्तावित बजट में खाद्य पदार्थों पर उपभोग कर को दो साल के लिए घटाना और रणनीतिक उद्योगों में 14 साल तक चलने वाला निवेश कार्यक्रम भी शामिल है। दोनों के लिए रक्षा प्रतिबद्धताओं के साथ धन जुटाना होगा, जिससे नए बॉन्ड जारी करने की राशि करीब 40 ट्रिलियन येन रखने का लक्ष्य हासिल करना कठिन हो जाता है।
सुहीरो उन चार फैसलों की पहचान करते हैं जिन पर निवेशकों की नजर रहेगी: खाद्य कर कटौती का वित्तपोषण कैसे होगा, मौजूदा वित्त वर्ष के लिए दूसरे पूरक बजट का आकार क्या होगा, 2027 का मूल बजट कितना होगा और कई वर्षों के लिए सरकार की राजकोषीय दिशा क्या होगी।
ऊर्जा सब्सिडी से खर्च की एक और जरूरत पैदा हो सकती है। 18 अक्टूबर को सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के उप महासचिव कोइची हागिउदा ने साल के अंत में बिजली और गैस बिलों के लिए सहायता देने पर विचार करने की मांग की। गर्मियों की सब्सिडी अक्टूबर से समाप्त हो गई थी। आरक्षित निधि से सहायता फिर शुरू की जा सकती है, जबकि बड़े पैकेज के लिए पूरक बजट की जरूरत पड़ सकती है।
सुहीरो का मानना है कि 10 ट्रिलियन से 15 ट्रिलियन येन का विकास निवेश बाजारों को स्वीकार्य हो सकता है, बशर्ते पूरक बजट में रखे गए खर्च को सालाना मूल बजट में शामिल किया जाए। यह उनका आकलन है, सरकार की घोषित धनराशि नहीं।
तामा विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर अकियो माकाबे का कहना है कि विश्वास बहाल करने के लिए नीतिगत फैसलों का सरकार के वादों से मेल खाना जरूरी है। वह 5 अक्टूबर को ताकाइची के नीतिगत भाषण के बाद भी येन के कमजोर रहने और यील्ड बढ़ने की ओर इशारा करते हैं। उनका कहना है कि परिवारों को इसका असर आयात कीमतों, गिरवी ऋण की दरों और पेंशन तथा बीमा निवेश से मिलने वाले रिटर्न में बदलाव के रूप में दिख सकता है।
बैंक ऑफ जापान के सामने महंगाई की अपनी परीक्षा
बैंक ऑफ जापान के गवर्नर काज़ुओ उएदा ने संसद को बताया कि अंतर्निहित महंगाई बैंक के 2% लक्ष्य के करीब है। अंतर्निहित महंगाई से आशय कीमतों के उस अधिक स्थायी रुझान से है, जिसे नीति निर्माता कुछ खास वस्तुओं की अस्थायी कीमतों में बदलाव से अलग पहचानने की कोशिश करते हैं।
उएदा ने मध्य पूर्व के संघर्ष से जुड़ी कच्चे माल की ऊंची लागत, श्रम बाजार में कम उपलब्धता और अर्थव्यवस्था में मध्यम सुधार का जिक्र किया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मजबूत वैश्विक मांग भी जापान के निवेश और निर्यात को सहारा दे रही थी, साथ ही कीमतों पर दबाव बढ़ा रही थी।
गवर्नर ने चेतावनी दी कि ब्याज दरों में बदलाव टालने से अत्यधिक महंगाई की आशंका बढ़ सकती है और लंबे समय की उधारी लागत ऊपर जा सकती है:
जब अंतर्निहित महंगाई 2% के करीब पहुंच रही है और वित्तीय स्थितियां अब भी अनुकूल हैं, तब उचित रूप से नीतिगत दर में बदलाव न करने से महंगाई लक्ष्य से अधिक होने की बाजार की चिंता बढ़ सकती है और दीर्घकालिक ब्याज दरें ऊपर जा सकती हैं।
उएदा ने यह भी कहा कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने वाला निवेश समय के साथ महंगाई को कम कर सकता है। इससे सरकार के इस दावे का व्यावहारिक महत्व बढ़ जाता है कि उसका खर्च आपूर्ति बढ़ाएगा: नई उत्पादन क्षमता विकसित होने में समय लगता है, जबकि खर्च से मांग जल्दी बढ़ सकती है।
बाजारों को उम्मीद थी कि सितंबर में बढ़ोतरी के बाद बैंक 30 अक्टूबर को अपनी नीतिगत दर 1.25% पर स्थिर रखेगा और दिसंबर में इसे 1.5% तक बढ़ा सकता है। 20 अक्टूबर की बॉन्ड नीलामी के समय बाजार में लगाई गई कीमतों के मुताबिक अक्टूबर की बैठक में दर बढ़ने की संभावना केवल करीब 6.2% थी।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मौद्रिक सख्ती जारी रखने और कई वर्षों के लिए राजकोषीय ढांचा बनाने का आग्रह किया है। उसके एशिया और प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्णा श्रीनिवासन ने अतिरिक्त खर्च और कर कटौतियों के वित्तपोषण को लेकर अनिश्चितता को राजकोषीय चिंता का एक स्रोत बताया।
बॉन्ड की रिकॉर्ड मांग से थोड़ी राहत
20 अक्टूबर की नीलामी में पेश किए गए बॉन्ड की मात्रा से 5.84 गुना बोलियां मिलीं। पिछली नीलामी में यह अनुपात 4.01 और उससे पहले के 12 महीनों का औसत 3.73 था। नतीजे के बाद 20 साल में परिपक्व होने वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 0.06 प्रतिशत अंक तक गिरकर 3.710% रह गई।
बीएनपी पारिबा एसेट मैनेजमेंट के वरिष्ठ बॉन्ड रणनीतिकार रयुतारो किमुरा ने घरेलू निवेशकों की मांग में सुधार का कारण ऊंची यील्ड और राजकोषीय चिंताओं में कमी को बताया। फुकोकु म्यूचुअल लाइफ इंश्योरेंस ने कहा कि विदेशी बॉन्ड से कुछ और निवेश येन वाले बॉन्ड में स्थानांतरित करने की गुंजाइश है।
जापानी जीवन बीमा कंपनियां करीब 2.5 ट्रिलियन डॉलर की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करती हैं, जिनमें से लगभग एक चौथाई विदेशों में निवेशित है। उनके निवेश फैसले जापान की उधारी लागत और विदेशी बाजारों, दोनों के लिए अहम हैं। अक्टूबर में उद्धृत वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जापानी निवेशकों ने 2026 के दौरान शुद्ध आधार पर 5 ट्रिलियन येन से अधिक के विदेशी बॉन्ड बेचे। जीवन बीमा कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 289 अरब येन थी, जो कुल का 6% से कम है।
एसएमबीसी निक्को सिक्योरिटीज में वित्तीय बाजारों के प्रमुख केइता मात्सुमोतो का कहना है कि यील्ड बढ़ने के साथ बीमा कंपनियां सावधानी से जापानी बॉन्ड खरीद रही हैं। डॉयचे बैंक के रणनीतिकार शोकी ओमोरी को भी विदेशी निवेशों की व्यापक बिकवाली के बजाय सीमित खरीद की उम्मीद है। मजबूत नीलामी से सरकार को राहत मिली है, जबकि 30 अक्टूबर का केंद्रीय बैंक फैसला और दिसंबर के बजट विकल्प तय करने में मदद करेंगे कि निवेशक किन शर्तों पर उधार देना जारी रखते हैं।
मुख्य बातें
- ताकाइची की सरकार कर राहत, औद्योगिक निवेश और रक्षा विस्तार के लिए धन जुटाते हुए नए बॉन्ड जारी करने की राशि करीब 40 ट्रिलियन येन रखने का लक्ष्य रखती है।
- जुलाई में येन 164 प्रति डॉलर के करीब पहुंचा, जबकि सितंबर में बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड 3.115% तक पहुंच गई।
- रक्षा खर्च के वित्तपोषण पर फैसला नहीं हुआ है; कॉरपोरेट कर में संभावित बढ़ोतरी पर चर्चा जारी है।
- 20 अक्टूबर को 20 साल में परिपक्व होने वाले बॉन्ड की नीलामी में रिकॉर्ड मांग रही, जो निवेशकों की लौटती दिलचस्पी का संकेत है।
- बैंक ऑफ जापान का अगला नीतिगत फैसला 30 अक्टूबर को होना है। वार्षिक बजट और नई रक्षा योजना 2026 के अंत में आने की उम्मीद है।






