योग्याकार्ता में डेंगू की दर 76% कम दर्ज, यूजीएम ने वोल्बाचिया के विस्तार का अध्ययन शुरू किया

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Yogyakarta Records 76% Lower Dengue Incidence as UGM Studies Wolbachia Expansion

पांच साल की निगरानी में लंबे समय तक सुरक्षा के संकेत

शहर भर में वोल्बाचिया हस्तक्षेप लागू किए जाने के बाद पांच साल की निगरानी में योग्याकार्ता में डेंगू के मामले इंडोनेशिया के जावा द्वीप के उन शहरों की तुलना में 76 प्रतिशत कम रहे, जहां यह हस्तक्षेप नहीं किया गया था। यह निष्कर्ष अब SHIELD परियोजना को दिशा दे रहा है। इसमें अध्ययन किया जा रहा है कि इंडोनेशिया मच्छरों से जुड़ा यह हस्तक्षेप कैसे बढ़ा सकता है और समय के साथ इसके लाभ कैसे बनाए रख सकता है।

विषय-सूची
  1. पांच साल की निगरानी में लंबे समय तक सुरक्षा के संकेत
  2. मच्छरों से जुड़ा यह हस्तक्षेप कैसे काम करता है
  3. योग्याकार्ता के शुरुआती परीक्षण में क्या मापा गया
  4. नतीजों में कई अलग-अलग प्रतिशत क्यों हैं
  5. साक्ष्य कैसे विकसित हुए
  6. चार टीमें विस्तार के अलग-अलग पहलुओं का अध्ययन करेंगी
  7. सेमारंग अध्ययन के लिए एक और परिस्थिति मुहैया कराता है
  8. डेंगू के मामले अब भी क्यों हो सकते हैं
  9. जनता की चिंताएं और देशव्यापी चुनौती
  10. एक नजर में

SHIELD की सह-प्रधान अन्वेषक और मोनाश यूनिवर्सिटी की केटी एंडर्स ने कहा कि वोल्बाचिया-युक्त मच्छरों को छोड़े जाने के सात साल बाद तक भी योग्याकार्ता में इसका असर दिखाई दिया। 2023 और 2024 की निगरानी में स्थानीय एडीज एजिप्टी मच्छरों की 89 प्रतिशत आबादी में यह जीवाणु पाया गया।

ये आंकड़े कार्यक्रम के दो जुड़े पहलुओं को दर्शाते हैं: क्या वोल्बाचिया मच्छरों में स्थापित रहता है और क्या इससे डेंगू से बीमार पड़ने वाले लोगों की संख्या घटती है। SHIELD इन दोनों पहलुओं के साथ लागत, स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन और अत्यधिक गर्मी के प्रभावों का भी अध्ययन करेगा।

गदजाह माडा यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर ट्रॉपिकल मेडिसिन के नेतृत्व में यह परियोजना इंडोनेशिया के पांच शहरों में हुए क्रियान्वयन से सबक ले रही है। इसकी प्रधान अन्वेषक डॉ. चित्रा इंद्रियानी ने कहा कि इसका उद्देश्य देश और दुनिया में विस्तार के लिए रणनीतियां तैयार करना है। इसकी उद्घाटन बैठक 22 अक्टूबर, 2026 को हुई।

मच्छरों से जुड़ा यह हस्तक्षेप कैसे काम करता है

वोल्बाचिया एक जीवाणु है, जो कई कीटों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। योग्याकार्ता में शोधकर्ताओं ने wMel नामक एक स्ट्रेन एडीज एजिप्टी मच्छरों में पहुंचाया। यह स्ट्रेन मूल रूप से फल-मक्खियों से प्राप्त किया गया था। एडीज एजिप्टी वह मच्छर है जो लोगों के बीच डेंगू फैलाता है।

मच्छर के शरीर में वोल्बाचिया डेंगू वायरस के विकसित होने की क्षमता में बाधा डालता है। इसलिए यह जीवाणु रखने वाला मच्छर काटने से वायरस फैलाने में कम सक्षम होता है। मादा मच्छर वोल्बाचिया को अपनी संतानों तक पहुंचा सकती हैं, जिससे मच्छरों को छोड़ने के बाद यह स्थानीय आबादी में फैल सकता है।

इसलिए योग्याकार्ता का तरीका मच्छरों की संख्या घटाने के बजाय बीमारी फैलाने की उनकी क्षमता बदलने पर केंद्रित है। इसका असर बने रहने के लिए जरूरी है कि मच्छरों की आबादी में वोल्बाचिया आम बना रहे। इसी वजह से शोधकर्ता इसे छोड़े जाने के वर्षों बाद भी इसकी मौजूदगी मापते रहते हैं।

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यूजीएम के कीटविज्ञानी वारसितो तंतोविजोयो ने विश्वविद्यालय की नवंबर 2023 की व्याख्या में बताया कि योग्याकार्ता में इस्तेमाल किए गए मच्छरों को आनुवंशिक रूप से तैयार नहीं किया गया था। शोधकर्ताओं ने मच्छरों के जीन में बदलाव किए बिना एडीज एजिप्टी में यह जीवाणु पहुंचाया था।

योग्याकार्ता के शुरुआती परीक्षण में क्या मापा गया

11 मई, 2020 को Gates Open Research में प्रकाशित एक अध्ययन पहले किए गए प्रयोग का विस्तृत विवरण देता है। योग्याकार्ता परीक्षण अध्ययन के अनुसार, 2016 और 2017 में सात महीनों के दौरान 13 से 15 चरणों में हर दो सप्ताह पर मच्छर छोड़े गए।

यह हस्तक्षेप पांच वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में किया गया, जहां करीब 65,000 लोग रहते थे। शोधकर्ताओं ने शहर के दूसरी ओर तीन वर्ग किलोमीटर का ऐसा तुलना क्षेत्र चुना, जहां हस्तक्षेप नहीं किया गया था और करीब 34,000 लोग रहते थे। मच्छर छोड़ने से पहले समुदाय के लोगों को इससे जोड़ा गया।

हस्तक्षेप के बाद के 24 महीनों में निगरानी के दौरान हस्तक्षेप वाले क्षेत्र में डेंगू के 34 मामले और तुलना क्षेत्र में 53 मामले दर्ज हुए। अध्ययन में अस्पताल में भर्ती डेंगू मरीजों की सूचनाओं का इस्तेमाल किया गया। आबादी के आकार और निगरानी अवधि को ध्यान में रखने पर, प्रति 100,000 व्यक्ति-वर्ष में मामले 26 बनाम 79 थे।

व्यक्ति-वर्ष में निगरानी में शामिल लोगों की संख्या और उनकी निगरानी की अवधि, दोनों को जोड़ा जाता है। उदाहरण के लिए, दो साल तक निगरानी में रहे 50,000 लोग 100,000 व्यक्ति-वर्ष के बराबर होते हैं। इससे शोधकर्ता अलग-अलग आबादी वाले क्षेत्रों की तुलना कर सकते हैं।

सांख्यिकीय मॉडल के अनुसार, इस हस्तक्षेप से डेंगू की दर में अनुमानित 73 प्रतिशत कमी आई। इसका 95 प्रतिशत विश्वास अंतराल 49 से 86 प्रतिशत तक था, जो अनुमान में अनिश्चितता को दर्शाता है। छह महीने और के आंकड़ों को शामिल करने वाले एक खोजपरक विश्लेषण में 76 प्रतिशत कमी का अनुमान आया, जिसका विश्वास अंतराल 60 से 86 प्रतिशत था।

नतीजों में कई अलग-अलग प्रतिशत क्यों हैं

योग्याकार्ता से जुड़े अक्सर उद्धृत आंकड़े अलग-अलग आकलनों से आए हैं। शुरुआती अध्ययन में अपनी मुख्य अनुवर्ती अवधि के दौरान 73 प्रतिशत कमी का अनुमान लगाया गया। बाद में पूरे शहर की निगरानी में पाया गया कि पांच साल के दौरान जावा के तुलना शहरों की अपेक्षा डेंगू की दर 76 प्रतिशत कम थी। यूजीएम ने पहले के शोध का भी हवाला दिया है, जिसमें डेंगू के मामले 77 प्रतिशत कम और अस्पताल में भर्ती होने की दर 86 प्रतिशत कम पाई गई थी।

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2020 के अध्ययन में हस्तक्षेप वाले एक क्षेत्र की तुलना बिना हस्तक्षेप वाले क्षेत्र से की गई और समय के साथ आए बदलावों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ता इसे अर्ध-प्रयोगात्मक पद्धति कहते हैं: हस्तक्षेप के असर का अनुमान लगाने के लिए उन्होंने व्यवस्थित तुलना की, लेकिन दोनों क्षेत्रों को मच्छर छोड़ने के लिए यादृच्छिक रूप से नहीं चुना गया था।

बाद के आंकड़े बड़े पैमाने पर लागू किए गए कार्यक्रम और लंबी निगरानी अवधि से जुड़े हैं। हर आंकड़े के साथ संबंधित अध्ययन अवधि और तुलना समूह का उल्लेख करने से यह समझने में मदद मिलती है कि एक छोटे क्षेत्र में हस्तक्षेप से लेकर पूरे शहर की निगरानी तक साक्ष्य कैसे विकसित हुए।

89 प्रतिशत का आंकड़ा एक अलग चीज मापता है: 2023 और 2024 में नमूने में शामिल एडीज एजिप्टी मच्छरों में से कितनों में वोल्बाचिया था। इस माप में शामिल हर 100 मच्छरों में से करीब 89 में यह जीवाणु था। शोधकर्ता इस आंकड़े पर मानव बीमारी के साथ नजर रखते हैं, क्योंकि मच्छरों में लंबे समय तक बना बदलाव ही इस हस्तक्षेप से सुरक्षा जारी रहने की बुनियाद है।

साक्ष्य कैसे विकसित हुए

योग्याकार्ता का अनुभव मच्छर छोड़ने, असर का आकलन करने और कई वर्षों तक निगरानी जारी रखने का सिलसिला रहा है। SHIELD इसी क्रम पर आगे बढ़ता है, न कि ऐसे नए हस्तक्षेप से जिसकी स्थानीय प्रभावशीलता का पता न हो।

  • 2016 और 2017: शोधकर्ताओं ने योग्याकार्ता के पांच वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में सात महीनों तक wMel-युक्त मच्छर छोड़े।
  • 11 मई, 2020: Gates Open Research ने अध्ययन प्रकाशित किया, जिसमें मुख्य विश्लेषण के दौरान डेंगू की दर में अनुमानित 73 प्रतिशत कमी दर्ज की गई।
  • 27 नवंबर, 2023: यूजीएम ने शोधकर्ताओं के सार्वजनिक चिंताओं पर जवाब प्रकाशित किए। इनमें सुरक्षा और डेंगू के जारी मामलों से जुड़े सवाल भी शामिल थे।
  • 2023 और 2024: निगरानी में स्थानीय एडीज एजिप्टी आबादी के 89 प्रतिशत मच्छरों में वोल्बाचिया पाया गया।
  • 22 अक्टूबर, 2026: इंडोनेशिया के पांच शहरों में क्रियान्वयन से मिले सबक का अध्ययन करने के लिए SHIELD की उद्घाटन बैठक हुई।

एंडर्स ने कहा कि मच्छर छोड़े जाने के सात साल बाद तक भी सुरक्षा का असर दिखाई दिया। जावा के दूसरे शहरों से तुलना के लिए इस्तेमाल किए गए पांच साल और मच्छरों को छोड़े जाने के बाद से बीती अवधि, निगरानी की अलग-अलग समय-सीमाएं हैं।

चार टीमें विस्तार के अलग-अलग पहलुओं का अध्ययन करेंगी

SHIELD का पूरा नाम Scaling Health Interventions for Effective Long-term Dengue Control है। इसकी चार कार्य-समूह टीमें इस काम को व्यावहारिक क्रियान्वयन, मच्छर जीवविज्ञान, मानव बीमारी और आर्थिक विश्लेषण में बांटती हैं।

क्रियान्वयन अनुसंधान समूह उन परिस्थितियों की पहचान करेगा जो कार्यक्रम को लागू करने में मददगार या बाधक हैं। इसमें वे घटक भी शामिल होंगे जिनसे कार्यक्रम प्रभावी बनता है। कीटों का अध्ययन करने वाला कीटविज्ञान समूह जांचेगा कि वोल्बाचिया मच्छरों की आबादी में स्थापित होकर बना रहता है या नहीं, और अत्यधिक गर्मी में इसका क्या असर होता है।

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महामारी विज्ञान समूह अलग-अलग विशेषताओं वाले क्षेत्रों में डेंगू के प्रसार और सार्वजनिक स्वास्थ्य में आए बदलावों का आकलन करेगा। महामारी विज्ञान आबादी में बीमारी के फैलने और उसके स्वरूप का अध्ययन है। अलग-अलग जगहों की तुलना से टीम को विभिन्न स्थानीय परिस्थितियों में हस्तक्षेप के असर का आकलन करने में मदद मिलेगी।

मॉडलिंग समूह लाभ और लागत का विश्लेषण करेगा और टीकाकरण समेत डेंगू से निपटने के अन्य उपायों के साथ इस हस्तक्षेप को जोड़ने की संभावनाएं देखेगा। मॉडल आंकड़ों और मान्यताओं के आधार पर अलग-अलग रणनीतियों की तुलना करते हैं, ताकि अधिकारी संसाधन लगाने से पहले उनके असर का आकलन कर सकें।

चित्रा ने कहा कि पांच शहरों से मिले सबक का उद्देश्य इंडोनेशिया और अन्य जगहों पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम लागू करने में मदद करना है। SHIELD के पूरा होने की तारीख और विस्तार की समय-सारणी घोषित नहीं की गई है। इसलिए कहां और कैसे विस्तार किया जाए, इस पर फैसलों के लिए परियोजना से मिले क्रियान्वयन, स्थायित्व, स्वास्थ्य प्रभावों और लागत से जुड़े निष्कर्ष जरूरी होंगे।

सेमारंग अध्ययन के लिए एक और परिस्थिति मुहैया कराता है

इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय में संबंधित वेक्टर-जनित रोग कार्य दल के प्रमुख डॉ. फद्जार सूर्या एम. सिलालाही के अनुसार, सेमारंग में भी वोल्बाचिया की स्थापित आबादी के साथ डेंगू के मामलों में गिरावट का रुझान दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि मामले घटने के दौरान वोल्बाचिया-युक्त मच्छरों का अनुपात 60 प्रतिशत से ऊपर बना रहा।

योग्याकार्ता की निगरानी में 2023 और 2024 के दौरान यह अनुपात 89 प्रतिशत दर्ज हुआ। दोनों शहर SHIELD को अध्ययन के लिए व्यावहारिक अनुभव देते हैं: कार्यक्रम लागू होने के बाद मच्छरों की आबादी की निगरानी की जा सकती है, जबकि बीमारी की निगरानी से पता चलता है कि स्थानीय निवासियों में क्या हो रहा है।

SHIELD का लक्ष्य सिर्फ एक आंकड़े को दोहराना नहीं है। इसकी टीमें जांचेंगी कि वोल्बाचिया को लंबे समय तक स्थापित रखने के लिए कौन-सी परिस्थितियां अनुकूल हैं, अलग-अलग जगहों पर नतीजे कैसे बदलते हैं और कार्यक्रमों की लागत कितनी है। स्थानीय अधिकारियों के लिए ये व्यावहारिक सवाल हैं, जिन्हें तय करना होता है कि मच्छर छोड़ने का आयोजन कैसे हो, निगरानी कैसे जारी रखी जाए और वोल्बाचिया को मौजूदा सेवाओं के साथ कैसे जोड़ा जाए।

डेंगू के मामले अब भी क्यों हो सकते हैं

यूजीएम के सेंटर फॉर ट्रॉपिकल मेडिसिन के शोधकर्ता डॉ. रिरिस आंदोनो अहमद ने विश्वविद्यालय की नवंबर 2023 की सार्वजनिक व्याख्या में संक्रमण के जारी रहने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि वोल्बाचिया स्थानीय स्तर पर संक्रमण को कम करता है, जबकि कुछ लोग ऐसे इलाकों में यात्रा के दौरान डेंगू की चपेट में आ सकते हैं जहां यह हस्तक्षेप नहीं हुआ है।

योग्याकार्ता के लोग अलग-अलग मोहल्लों और शहरों के बीच आते-जाते रहते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति का घर का पता और वह जगह अलग-अलग हो सकती है, जहां उसे किसी संक्रमित मच्छर ने काटा हो। रिरिस ने कहा कि ज्यादा आवाजाही वाले इलाकों में यह बात खास तौर पर अहम है।

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एंडर्स ने यह भी कहा कि वोल्बाचिया को डेंगू से निपटने की एकीकृत रणनीति का हिस्सा बने रहना चाहिए। घरों के लिए इसका मतलब है कि मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने के उपाय जारी रखे जाएं। इंडोनेशिया के 3M Plus अभियान में पानी के बर्तनों को खाली करना, जमा पानी को ढकना और फेंकी हुई ऐसी चीजों को पुनर्चक्रित करना शामिल है जिनमें पानी भर सकता है और मच्छर पनप सकते हैं।

SHIELD वोल्बाचिया के साथ टीकाकरण को एक अन्य संभावित उपाय के रूप में भी देखेगा। दोनों तरीके अलग-अलग स्तर पर काम करते हैं: वोल्बाचिया मच्छरों की डेंगू फैलाने की क्षमता कम करता है, जबकि टीकाकरण मानव प्रतिरक्षा प्रणाली के जरिए काम करता है।

जनता की चिंताएं और देशव्यापी चुनौती

यूजीएम की सार्वजनिक चर्चा में सुरक्षा के सवालों पर भी बात हुई। वारसितो ने कहा कि मच्छरों को काटने देने के लिए स्वेच्छा से आगे आए शोधकर्ताओं की जांच की गई थी और उनके शरीर में वोल्बाचिया नहीं पाया गया। विश्वविद्यालय ने यह भी बताया कि मच्छर छोड़ने वाले इलाकों के निवासियों के रक्त के नमूनों की जांच में वोल्बाचिया नहीं मिला।

रिरिस ने बताया कि सिंगापुर में मच्छर छोड़ने की अलग रणनीति अपनाई जाती है। वोल्बाचिया-युक्त नर मच्छर छोड़ने का उद्देश्य मच्छरों की संख्या कम करना है: जब ऐसे नर बिना वोल्बाचिया वाली मादाओं के साथ प्रजनन करते हैं, तो उनसे बने अंडों से बच्चे नहीं निकलते। इसके विपरीत, योग्याकार्ता में वायरस का प्रसार घटाने और मच्छरों की संतानों के जरिए बने रहने की वोल्बाचिया की क्षमता का इस्तेमाल किया जाता है।

श्रीलंका को लेकर सवाल भी यूजीएम की टीम तक पहुंचे थे। इनमें यह दावा शामिल था कि कार्यक्रम लागू होने के बाद डेंगू के मामले 300 प्रतिशत बढ़ गए। रिरिस ने जवाब दिया कि वहां मच्छर छोड़ने का कार्यक्रम सिर्फ 20 वर्ग किलोमीटर में चला था, जबकि जिस बढ़ोतरी की चर्चा थी, वह पूरे देश से जुड़ी थी। बीमारी के रुझानों का आकलन करते समय हस्तक्षेप का भौगोलिक दायरा मायने रखता है।

इंडोनेशिया में डेंगू का बोझ इस विस्तार संबंधी शोध को जरूरी बनाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, देश में 2025 में डेंगू से 703 लोगों की मौत हुई, जो वैश्विक कुल का करीब 17 प्रतिशत था। उस साल डेंगू से होने वाली मौतों के मामले में इंडोनेशिया दुनिया में दूसरे स्थान पर रहा। यह हिस्सा दुनिया भर में हुई ऐसी करीब हर छह मौतों में से एक के बराबर है।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए शोध का व्यावहारिक लक्ष्य यह पता लगाना है कि योग्याकार्ता में संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने के मामले घटने से जुड़े तरीके से दूसरी जगहों पर लंबे समय तक सुरक्षा कैसे दी जा सकती है। इन फैसलों को दिशा देने के लिए SHIELD मच्छर निगरानी, बीमारी पर नजर रखने और कार्यक्रम लागू करने से जुड़े काम को एक ही परियोजना में जोड़ता है।

एक नजर में

  • पूरे योग्याकार्ता में कार्यक्रम लागू होने के बाद पांच साल के दौरान वहां डेंगू की दर जावा के तुलना शहरों से 76 प्रतिशत कम रही।
  • 2023 और 2024 की निगरानी में स्थानीय एडीज एजिप्टी मच्छरों के 89 प्रतिशत में वोल्बाचिया पाया गया।
  • 2020 में प्रकाशित पहले के एक परीक्षण में मुख्य विश्लेषण के दौरान डेंगू की दर में 73 प्रतिशत कमी का अनुमान लगाया गया था।
  • यूजीएम की SHIELD परियोजना इंडोनेशिया के पांच शहरों में क्रियान्वयन का अध्ययन करेगी। इसमें स्थायित्व, स्वास्थ्य प्रभाव, लागत और टीकाकरण के साथ संयोजन शामिल हैं।
  • वोल्बाचिया संक्रमण का जोखिम घटाता है, जबकि मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर नियंत्रण और रोकथाम के अन्य उपाय डेंगू से सुरक्षा का हिस्सा बने रहते हैं।
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