जकार्ता, योग्याकार्ता और बाली में लड़कों को कैंसर से बचाव के दायरे में लाया गया
इंडोनेशिया जकार्ता, योग्याकार्ता और बाली में लड़कों के लिए ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) का मुफ्त टीकाकरण शुरू कर रहा है। इससे उन बच्चों को सुरक्षा मिलेगी जिन्हें आगे चलकर वायरस से जुड़े कैंसर हो सकते हैं या जो दूसरों तक संक्रमण पहुंचा सकते हैं। इस पायलट कार्यक्रम में स्कूल टीकाकरण योजना के तहत आम तौर पर 10 से 11 वर्ष की आयु के पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है।
विषय-सूची
- जकार्ता, योग्याकार्ता और बाली में लड़कों को कैंसर से बचाव के दायरे में लाया गया
- स्कूलों तक कैसे पहुंच रहा है विस्तार
- लड़कों को भी सुरक्षा क्यों जरूरी है
- किशोरावस्था से पहले कार्यक्रम क्यों शुरू होता है
- पायलट आगे बढ़ने के बीच लड़कियों का टीकाकरण घटा
- सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों की राय
- टीकाकरण और जांच से अलग-अलग पीढ़ियों को लाभ
- मुख्य बातें
इस विस्तार से पहले 2023 में देशभर में लड़कियों के लिए एचपीवी टीकाकरण शुरू किया गया था। बाली के करंगासेम में लड़कों के लिए मुफ्त टीकाकरण सितंबर 2026 की शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्री के 2026 के आदेश संख्या 839 के तहत शुरू हुआ। इस आदेश में लड़कों के लिए पायलट कार्यक्रम तय किया गया है। योग्याकार्ता ने स्कूल-आयु के बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम, जिसे बुलान इमुनिसासी आनाक सेकुलाह (BIAS) या स्कूली बच्चों का टीकाकरण माह कहा जाता है, के तहत अगस्त में शुरुआत की घोषणा की थी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इंडोनेशिया में एचपीवी से जुड़े सर्वाइकल कैंसर से हर साल करीब 22,000 महिलाओं की मौत होती है। लड़कों को भी जोखिम है: दुनिया भर में 2022 में लगभग 95,000 पुरुषों में एचपीवी-संबंधी कैंसर का पता चला और इनमें से 44,000 की मौत हुई।
लड़कों का टीकाकरण इस कार्यक्रम के दो परस्पर जुड़े उद्देश्य पूरे करता है। इससे उन्हें एचपीवी से होने वाली बीमारियों से सुरक्षा मिल सकती है और ऐसे वायरस का प्रसार घटाने में मदद मिल सकती है, जो सर्वाइकल कैंसर के अधिकांश मामलों के लिए जिम्मेदार है। गर्भाशय ग्रीवा, गर्भाशय का निचला हिस्सा है, जो उसे योनि से जोड़ता है।
स्कूलों तक कैसे पहुंच रहा है विस्तार
BIAS के जरिए स्वास्थ्य अधिकारियों को एक ही शैक्षणिक वर्ष में बच्चों तक पहुंचने का स्थापित माध्यम मिलता है। लड़कों का पायलट पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों पर केंद्रित है, जबकि राष्ट्रीय कार्यक्रम में लड़कियों को मुफ्त टीकाकरण देना जारी है। पायलट में जकार्ता, योग्याकार्ता का विशेष क्षेत्र और बाली शामिल हैं।
करंगासेम स्वास्थ्य कार्यालय के प्रमुख डॉ. आई गुस्ती बागुस पुत्रा पर्तामा ने कहा कि जिले का कार्यक्रम मंत्री के आदेश के अनुरूप है और इसमें पांचवीं कक्षा के, यानी लगभग 11 वर्ष के लड़कों को शामिल किया गया है। उन्होंने टीकाकरण को उन संक्रमणों से शुरुआती सुरक्षा बताया, जो आगे चलकर शरीर के कुछ अंगों में कैंसर का कारण बन सकते हैं।
योग्याकार्ता में इसकी घोषणा 30 जुलाई, 2026 को शहर के संचार, सूचना-विज्ञान और एन्क्रिप्शन विभाग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई। योग्याकार्ता नगर स्वास्थ्य कार्यालय में संक्रामक रोगों की रोकथाम, नियंत्रण और टीकाकरण की प्रमुख डॉ. एंडांग श्री रहायु ने कहा कि पांचवीं कक्षा के लड़के और लड़कियों को स्कूलों के माध्यम से मुफ्त टीका दिया जाएगा।
यह नीति कई चरणों में विकसित हुई है:
- 2023: इंडोनेशिया ने देशभर में लड़कियों के लिए एचपीवी टीकाकरण शुरू किया।
- 20 अप्रैल, 2026: स्वास्थ्य मंत्री बुडी गुनादी सादिकिन ने कहा कि उसी वर्ष लड़कों को भी टीकाकरण में शामिल किया जाएगा।
- 30 जुलाई, 2026: योग्याकार्ता के अधिकारियों ने BIAS के जरिए अगस्त में शुरुआत की घोषणा की।
- सितंबर 2026 की शुरुआत: करंगासेम में लड़कों के लिए मुफ्त एचपीवी टीकाकरण शुरू हुआ।
यह विस्तार अभी तीन प्रांतों में पायलट कार्यक्रम तक सीमित है। पूरे इंडोनेशिया में लड़कों के लिए मुफ्त टीकाकरण शुरू करने की तारीख घोषित नहीं की गई है।
लड़कों को भी सुरक्षा क्यों जरूरी है
एचपीवी त्वचा और शरीर के कुछ हिस्सों की अंदरूनी नम परत को संक्रमित कर सकता है। इसके कुछ प्रकार जननांगों पर मस्से पैदा करते हैं, जबकि अन्य संक्रमण लंबे समय तक बने रहने पर कैंसर का कारण बन सकते हैं। टीकाकरण का उद्देश्य यह प्रक्रिया शुरू होने से पहले संक्रमण रोकना है।
एंडांग ने पुरुषों में गुदा, लिंग और ऑरोफैरिंक्स के कैंसर को जोखिमों में गिनाया। ऑरोफैरिंक्स कैंसर गले के मध्य भाग को प्रभावित करता है, जिसमें टॉन्सिल के आसपास का क्षेत्र और जीभ का आधार शामिल हैं। इस विस्तार से लड़कों को सीधे उनके स्वास्थ्य के लिए लाभकारी सुरक्षा मिलती है।
एंडांग ने कहा कि पुरुषों में एचपीवी बिना लक्षणों के मौजूद रह सकता है और वे आगे चलकर इसे अपने यौन साथियों तक पहुंचा सकते हैं। स्वास्थ्य मंत्री बुडी गुनादी सादिकिन ने भी अप्रैल में विस्तार पर चर्चा करते हुए यही बात कही थी: सर्वाइकल कैंसर का भार महिलाओं पर पड़ता है, जबकि संक्रमण पुरुषों से फैल सकता है।
अधिक बच्चों का टीकाकरण करने से लोगों के बीच वायरस फैलने के अवसर कम हो सकते हैं। एंडांग ने इसे सामुदायिक प्रतिरक्षा का निर्माण बताया, यानी व्यापक सुरक्षा से संक्रमण फैलने की आशंका घटती है। उन्होंने इस दावे को भी खारिज किया कि एचपीवी टीकाकरण सिर्फ महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ा है या इसका संबंध यौन रुझान से है। इसका उद्देश्य दोनों लिंगों में बीमारी रोकना है।
किशोरावस्था से पहले कार्यक्रम क्यों शुरू होता है
स्वास्थ्य मंत्रालय की टीकाकरण निदेशक डॉ. इंद्री योग्यास्वारी ने कहा कि प्राथमिक विद्यालय में टीका लगाने से वयस्क होने पर टीका लगाने की तुलना में अधिक मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा होती है। कम उम्र में टीका देने से एचपीवी के संपर्क में आने से पहले ही सुरक्षा विकसित हो सकती है।
इंद्री के मुताबिक, 9 से 14 वर्ष की आयु के बीच दी गई एक खुराक 88 से 90 प्रतिशत तक सुरक्षा दे सकती है। उन्होंने बताया कि 20 वर्ष की आयु के बाद टीकाकरण शुरू करने पर, दो खुराकों के बावजूद, सुरक्षा करीब 60 प्रतिशत रहती है। ये मंत्रालय द्वारा बताए गए सुरक्षा के आंकड़े हैं; स्कूली कार्यक्रम का व्यावहारिक उद्देश्य कम उम्र के बच्चों तक पहुंचना है।
टीका शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को वायरस पहचानने और उसके संपर्क में आने पर प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करता है। एचपीवी के मामले में संपर्क से पहले बचाव कार्यक्रम का मुख्य आधार है। पांचवीं कक्षा में टीकाकरण का समय मंत्रालय द्वारा बताई गई आयु-सीमा के भीतर आता है और स्कूलों के माध्यम से टीका देना भी संभव बनाता है।
पायलट प्रांतों में लड़कों के माता-पिता को अब स्कूल के जरिए मुफ्त टीकाकरण का अवसर मिल रहा है, जो पहले मुख्य रूप से लड़कियों के लिए था। करंगासेम के स्वास्थ्य कार्यालय ने माता-पिता से बच्चों की भागीदारी में सहयोग करने की अपील की है, ताकि पात्र बच्चों को समय रहते सुरक्षा मिले और जिले में अधिक लक्षित आबादी तक पहुंचा जा सके।
पायलट आगे बढ़ने के बीच लड़कियों का टीकाकरण घटा
मंत्रालय के मुताबिक, पांचवीं कक्षा की लड़कियों में एचपीवी टीके की एक खुराक का कवरेज 83.5 प्रतिशत है, जबकि 2025 में यह 90.8 प्रतिशत था। यानी 7.3 प्रतिशत अंक की गिरावट आई है। सीधे शब्दों में कहें तो अब हर 100 पात्र लड़कियों में लगभग 84 को टीका लगा है, जबकि पहले यह संख्या करीब 91 थी।
मंत्रालय के अनुसार, तीन पायलट प्रांतों में लड़कों का टीकाकरण कवरेज 88 प्रतिशत है। यह लड़कियों के नवीनतम आंकड़े से 4.5 प्रतिशत अंक अधिक है, हालांकि लड़कों का आंकड़ा केवल पायलट प्रांतों का है, जबकि लड़कियों का आंकड़ा राष्ट्रीय कार्यक्रम को दर्शाता है। इन नवीनतम प्रतिशतों की रिपोर्टिंग अवधि नहीं बताई गई।
इंडोनेशिया के सर्वाइकल कैंसर रोकथाम प्रयासों में लड़कियां अहम बनी हुई हैं। लड़कों तक पहुंच बढ़ने से सुरक्षा के दायरे में एक और समूह जुड़ता है, जबकि लड़कियों के कवरेज में गिरावट का मतलब है कि अधिक पात्र छात्राएं अपने शैक्षणिक वर्ष के लिए निर्धारित टीके से वंचित हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, टीके की सुरक्षा को लेकर गलत सूचना और अफवाहें टीकाकरण के लक्ष्य तक पहुंचने में बाधा हैं। इसलिए स्कूलों और स्वास्थ्य कार्यालयों के सामने दो जुड़े हुए काम हैं: पात्र बच्चों को खुराक देना और उन चिंताओं का जवाब देना, जिनके कारण परिवार भागीदारी से पीछे रह सकते हैं।
सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों की राय
टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाओं की राष्ट्रीय समिति के प्रमुख प्रो. हिन्की हिंद्रा इरावान सतारी ने कहा कि सरकारी कार्यक्रम में इस्तेमाल किया जाने वाला एचपीवी टीका सुरक्षित है और कठोर क्लिनिकल परीक्षणों से गुजर चुका है।
उन्होंने कहा कि टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिक्रियाएं आम तौर पर हल्की होती हैं। इनमें इंजेक्शन की जगह दर्द या चक्कर आना शामिल हो सकता है और ये आमतौर पर अपने आप ठीक हो जाती हैं। इन अपेक्षित प्रतिक्रियाओं की जानकारी से परिवारों को समझने में मदद मिलती है कि खुराक के बाद बच्चे को क्या महसूस हो सकता है।
टीकाकरण के बाद प्रतिकूल घटना उस स्वास्थ्य समस्या को कहते हैं, जो टीका लगने के बाद होती है और जिसके आकलन की जरूरत पड़ सकती है। ऐसी घटनाओं की निगरानी टीका सुरक्षा संबंधी काम का हिस्सा है। सार्वजनिक चिंताओं से निपटने के दौरान मंत्रालय जिस विशेषज्ञ निगरानी का उल्लेख करता है, वह हिन्की की समिति देती है।
एंडांग की टिप्पणियां एक और बाधा पर भी ध्यान देती हैं: टीका किन लोगों के लिए है, इसे लेकर गलत धारणाएं। लड़कों को शामिल करने से यह बात अधिक स्पष्ट होती है कि टीके का उद्देश्य दोनों लिंगों में एचपीवी संक्रमण और उससे जुड़ी बीमारियों को रोकना है, न कि सिर्फ लड़कियों को सेवा देना।
टीकाकरण और जांच से अलग-अलग पीढ़ियों को लाभ
स्वास्थ्य मंत्रालय ने 30 वर्ष की महिलाओं के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम के तहत सर्वाइकल कैंसर की जांच भी शामिल की है। इससे स्कूली बच्चों के टीकाकरण के साथ बचाव का एक और रास्ता मिलता है।
टीकाकरण का उद्देश्य उन संक्रमणों को रोकना है, जो वर्षों बाद बीमारी का कारण बन सकते हैं। सर्वाइकल जांच से जोखिम के संकेतों या गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में बदलाव का पता लगाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर महिलाओं को आगे की जांच और उपचार मिल सके। दोनों सेवाएं कैंसर के विकास के अलग-अलग चरणों को संबोधित करती हैं।
इंडोनेशिया में सर्वाइकल कैंसर से हर साल करीब 22,000 मौतों का अनुमान, अप्रैल में विस्तार की घोषणा के दौरान इस्तेमाल किए गए हर 25 मिनट में एक मौत के वर्णन से मेल खाता है। यह संख्या बताती है कि वयस्क महिलाओं के लिए सेवाओं के साथ-साथ आज के बच्चों को सुरक्षा देने की कोशिश क्यों की जा रही है।
करंगासेम के अधिकारियों ने लड़कों के पायलट कार्यक्रम को 2030 तक सर्वाइकल कैंसर खत्म करने के इंडोनेशिया के लक्ष्य से जोड़ा है। जन स्वास्थ्य के संदर्भ में, उन्मूलन का अर्थ किसी बीमारी को बहुत कम स्तर तक घटाना है। इस लक्ष्य के लिए लगातार उच्च टीकाकरण कवरेज, जांच की सुविधा और इलाज की जरूरत वाली महिलाओं को देखभाल देना आवश्यक है।
तत्काल बदलाव स्पष्ट हैं: तीन प्रांतों में लड़कों को मुफ्त स्कूली टीकाकरण में शामिल किया जा रहा है, लड़कियां देशभर में इसके लिए पात्र बनी हुई हैं और 30 वर्ष की महिलाओं के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम में सर्वाइकल जांच शामिल की गई है। भविष्य में बीमारी और मौतें घटाने के लिए हर सेवा में लोगों की भागीदारी बनाए रखना अहम है।
मुख्य बातें
- जकार्ता, योग्याकार्ता और बाली में लड़कों के लिए मुफ्त एचपीवी टीकाकरण का पायलट कार्यक्रम चल रहा है, जिसमें पांचवीं कक्षा के विद्यार्थी शामिल हैं।
- करंगासेम में स्वास्थ्य मंत्री के 2026 के आदेश संख्या 839 के तहत सितंबर 2026 की शुरुआत में लड़कों का टीकाकरण शुरू हुआ।
- मंत्रालय के मुताबिक, पायलट प्रांतों में लड़कों का टीकाकरण कवरेज 88 प्रतिशत और देशभर में पांचवीं कक्षा की लड़कियों का कवरेज 83.5 प्रतिशत है।
- लड़कियों का कवरेज 2025 के 90.8 प्रतिशत से 7.3 प्रतिशत अंक घटा है।
- एचपीवी टीकाकरण लड़कों को वायरस से जुड़े कैंसर से बचा सकता है और संक्रमण का प्रसार घटाने में मदद कर सकता है।
- इंडोनेशिया बचपन के टीकाकरण के साथ 30 वर्ष की महिलाओं के लिए मुफ्त स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम के तहत सर्वाइकल जांच भी कर रहा है।






