किशोरों के इलाज में 54% की वृद्धि, मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर
दक्षिण कोरिया में नवीनतम वार्षिक आंकड़ों के अनुसार करीब 19.4 लाख लोगों ने अवसाद या चिंता संबंधी विकारों के लिए अस्पतालों में इलाज कराया। सबसे तेज वृद्धि बच्चों और किशोरों में दर्ज की गई। 10 से 19 वर्ष की आयु के मरीजों की संख्या 2021 के 81,710 से बढ़कर 125,930 हो गई, यानी 54.1% की वृद्धि। वहीं, नौ वर्ष या उससे कम उम्र के मरीजों की संख्या 50.4% बढ़ी।
विषय-सूची
- किशोरों के इलाज में 54% की वृद्धि, मरीजों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर
- बच्चों और 30 से 39 वर्ष के लोगों में सबसे तेज वृद्धि
- मरीजों में करीब दो तिहाई महिलाएं
- आबादी के सर्वेक्षणों में इलाज के रिकॉर्ड से अलग तस्वीर
- मनोचिकित्सकीय सेवाओं पर अवसाद और चिंता से आगे की मांग
- अस्पताल से छुट्टी के बाद देखभाल भी चुनौती
- मदद तक पहुंच पर जनमानस और परिवारों की जरूरतों का असर
- मुख्य बिंदु
स्वास्थ्य बीमा समीक्षा एवं मूल्यांकन सेवा (HIRA) ने ये आंकड़े पीपल पावर पार्टी के सांसद बेक जोंग-हॉन के कार्यालय को उपलब्ध कराए। मरीजों की कुल संख्या 1,938,516 रही, जो 2021 के 1,628,899 से अधिक है। यानी 309,617 और लोगों ने इलाज कराया। यह 19% की वृद्धि और अब तक दर्ज किया गया सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा है।
मरीजों की सबसे बड़ी संख्या अब भी बुजुर्गों की थी। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के 628,638 लोगों ने इलाज कराया, यानी इलाज कराने वालों में करीब हर तीसरा व्यक्ति इसी आयु वर्ग का था। आंकड़े सेवाओं के सामने दो तरह की जरूरतें दिखाते हैं: युवाओं में इलाज की तेजी से बढ़ती मांग और अधिक उम्र के लोगों में पहले से मौजूद बड़ा मरीज समूह।
कोरिया यूनिवर्सिटी अनम अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर ली हून-जुंग ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा कलंक कम होने और मनोवैज्ञानिक बाधाएं घटने से उन युवाओं को मदद लेने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है, जो पहले मनोचिकित्सकीय देखभाल से बचते थे। उन्होंने आबादी में अवसाद और चिंता की व्यापकता मापने के लिए अलग-अलग सर्वेक्षण कराने की अपील की।
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सांख्यिकी 2023 से इस तस्वीर का एक और पहलू सामने आता है। सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि भावनात्मक परेशानी, स्क्रीनिंग के परिणाम और अस्पतालों में इलाज के रुझान अलग-अलग हो सकते हैं। इन आंकड़ों को साथ देखने पर अस्पतालों के बाहर मानसिक स्वास्थ्य का नियमित आकलन करने और सुलभ इलाज उपलब्ध कराने, दोनों की जरूरत दिखती है।
बच्चों और 30 से 39 वर्ष के लोगों में सबसे तेज वृद्धि
2021 की तुलना में किशोर मरीजों की संख्या 44,220 बढ़ी। नौ वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों में यह संख्या 5,442 से बढ़कर 8,187 हो गई, यानी 2,745 की वृद्धि। दोनों समूहों में बढ़ोतरी सभी आयु वर्गों की कुल 19% वृद्धि से कहीं तेज थी।
वयस्कों में 30 से 39 वर्ष के लोगों की संख्या सबसे तेजी से बढ़ी। इस आयु वर्ग के मरीजों की संख्या 234,330 से बढ़कर 320,664 हो गई। इसमें 86,334 लोगों, यानी 36.8% की वृद्धि हुई। यह बढ़ोतरी 20 से 29 वर्ष के लोगों में दर्ज 15.2% से दोगुने से भी अधिक थी।
2021 के बाद कुल वृद्धि में 30 से 39 वर्ष के लोगों की हिस्सेदारी करीब 28% रही। यह सभी आयु वर्गों में 309,617 की कुल बढ़ोतरी में इस समूह के 86,334 अतिरिक्त मरीजों के आधार पर निकाला गया है। किशोरों की संख्या में तेज वृद्धि ने ध्यान खींचा, जबकि 30 से 39 वर्ष के लोगों की बढ़ोतरी से मरीजों की संख्या में अधिक इजाफा हुआ।
बेक ने स्कूलों और स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर बच्चों और किशोरों के लिए शुरुआती हस्तक्षेप सहित प्रभावी मानसिक स्वास्थ्य नीतियां बनाने की अपील की। इससे चिकित्सा संस्थानों में इलाज के साथ-साथ युवाओं के रोजमर्रा के जीवन से जुड़े स्थानों पर भी सहायता उपलब्ध हो सकेगी।
मरीजों में करीब दो तिहाई महिलाएं
अवसाद या चिंता का इलाज कराने वालों में महिलाओं की संख्या 1,243,621 थी, जबकि पुरुषों की संख्या 694,895 रही। इस तरह कुल मरीजों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 64% थी। हर एक पुरुष मरीज के मुकाबले लगभग 1.8 महिला मरीज थीं।
नींद संबंधी विकारों के इलाज में भी वृद्धि हुई। सालाना मरीजों की संख्या 1,281,695 रही, जो 2021 से 24.7% अधिक है। यह अवसाद और चिंता के मरीजों में दर्ज 19% वृद्धि से तेज थी। लोगों का एक से अधिक बीमारी के लिए इलाज हो सकता है, इसलिए नींद संबंधी विकारों के आंकड़े को अवसाद और चिंता के आंकड़े में जोड़ने के बजाय उसके साथ अलग से देखना चाहिए।
अगली रिपोर्टिंग अवधि के अगस्त तक 16.7 लाख से अधिक लोग अवसाद या चिंता का इलाज करा चुके थे। वार्षिक और अगस्त के आंकड़ों को पिछले वर्ष और इस वर्ष का बताया गया, लेकिन संसदीय आंकड़ों के विवरण में उनके कैलेंडर वर्ष स्पष्ट नहीं किए गए।
आंकड़ों में कई अलग-अलग अवधि शामिल हैं:
- 2021: HIRA ने अवसाद या चिंता का इलाज कराने वाले 1,628,899 मरीज दर्ज किए।
- 2022: एक राष्ट्रीय वयस्क सर्वेक्षण में PHQ-9 स्क्रीनिंग प्रश्नावली से अवसाद के लक्षण मापे गए।
- 2023: राष्ट्रीय आंकड़ों में मनोचिकित्सकीय इलाज, अस्पताल में भर्ती, दोबारा भर्ती और बिस्तरों की संख्या दर्ज की गई।
- नवीनतम वार्षिक आंकड़ा: अवसाद और चिंता का इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या 1,938,516 तक पहुंची। अगली रिपोर्टिंग अवधि के अगस्त तक 16.7 लाख से अधिक लोगों ने इलाज कराया था।
आबादी के सर्वेक्षणों में इलाज के रिकॉर्ड से अलग तस्वीर
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य केंद्र की राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सांख्यिकी 2023 में चिकित्सा रिकॉर्ड और आबादी के सर्वेक्षणों को एक साथ रखा गया है। ये माप अलग-अलग व्यावहारिक सवालों का जवाब देते हैं: कितने लोगों ने इलाज कराया, कितने लोगों ने परेशानी महसूस होने की बात कही और कितने लोग किसी सर्वेक्षण में अवसाद के लक्षणों के तय मानदंडों पर खरे उतरे।
12 से 18 वर्ष के किशोरों में 26% ने बताया कि 2023 में उन्हें कम से कम लगातार दो सप्ताह तक उदासी या निराशा महसूस हुई, जिससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई। यह दर 2022 में 28.7% और 2021 में 26.8% थी। 2022 और 2023 के बीच इसमें 2.7 प्रतिशत अंक की गिरावट आई, जबकि इलाज के रिकॉर्ड की लंबी अवधि की तुलना में किशोर मरीजों की संख्या बढ़ती दिखी।
किशोरों का सर्वेक्षण HIRA के आंकड़ों से अलग आयु सीमा और अवधि को कवर करता है। इसकी खासियत यह है कि यह युवाओं से उनके अनुभवों के बारे में पूछता है, जबकि इलाज के रिकॉर्ड उन लोगों को गिनते हैं जिन्होंने चिकित्सा सेवा ली। दोनों को साथ देखने से अधिकारी भावनात्मक परेशानी और सेवाओं के उपयोग, दोनों पर नजर रख सकते हैं।
19 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वयस्कों में रोगी स्वास्थ्य प्रश्नावली-9 (PHQ-9) के तय मानदंड पर खरे उतरने वालों का अनुपात 2018 में 4.3%, 2020 में 5.7% और 2022 में 5% था। यह प्रश्नावली अवसाद के लक्षणों के बारे में पूछती है। इन आंकड़ों में 27 में से कम से कम 10 अंक को तय मानदंड माना गया।
वयस्कों के आंकड़ों को उम्र के हिसाब से समायोजित किया गया, ताकि आबादी की आयु संरचना में बदलाव का तुलनाओं पर कम असर पड़े। आसान शब्दों में, इससे शोधकर्ताओं को अलग-अलग वर्षों की अधिक एकसमान आधार पर तुलना करने में मदद मिलती है। अलग-अलग व्यापकता सर्वेक्षण कराने की ली की अपील इसी जरूरत को पूरा करती है: यह मापना कि बीमारी कितनी व्यापक है और कितने लोग इलाज के लिए आगे आते हैं।
मनोचिकित्सकीय सेवाओं पर अवसाद और चिंता से आगे की मांग
राष्ट्रीय रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में मनोचिकित्सकीय चिकित्सा संस्थानों में मनोचिकित्सकीय निदान कोड के तहत 2,679,525 लोगों ने इलाज कराया। इन कोड में अवसाद और चिंता से कहीं अधिक स्थितियां शामिल हैं। निदान के आधार पर रिपोर्ट में गंभीर अवसादग्रस्तता विकार का इलाज कराने वाले 502,193 लोगों का उल्लेख किया गया।
अस्पताल में भर्ती के आंकड़े काम के बोझ का एक और पहलू दिखाते हैं। 2023 में रिपोर्ट में शामिल स्थितियों के लिए 15 वर्ष या उससे अधिक आयु के 119,897 लोगों को मनोचिकित्सकीय चिकित्सा संस्थानों में भर्ती किया गया। इसमें डिमेंशिया शामिल नहीं था। अस्पताल में भर्ती मरीजों के निदान संबंधी आंकड़ों में गंभीर अवसादग्रस्तता विकार वाले 15,436 लोग थे।
अस्पताल में भर्ती मरीजों में 50 से 59 वर्ष के लोग सबसे बड़ा आयु समूह थे, जिनकी संख्या 30,727 थी। 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के 23,748 और 60 से 64 वर्ष के 16,256 मरीज थे। ये आंकड़े दिखाते हैं कि मध्य और अधिक उम्र के वयस्कों के बीच अस्पतालों में इलाज की मांग काफी है, जबकि कम उम्र के समूहों में इलाज की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
मनोचिकित्सकीय बिस्तरों की संख्या 2022 के अंत में 71,564 से घटकर 2023 के अंत में 67,634 रह गई। यह 3,930, यानी करीब 5.5% की कमी है। इसलिए सेवाओं की योजना बनाते समय कई तरह की क्षमता पर ध्यान देना होगा: इलाज चाहने वालों के लिए अपॉइंटमेंट, भर्ती की जरूरत वाले लोगों के लिए अस्पताल में इलाज और घर लौटने के बाद सहायता।
अस्पताल से छुट्टी के बाद देखभाल भी चुनौती
राष्ट्रीय रिपोर्ट में 2023 में मध्यम या उससे गंभीर अवसादग्रस्तता के दौर या बार-बार होने वाले अवसादग्रस्तता विकार के इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी पाए 6,830 मरीजों का आगे का हाल दर्ज किया गया। बार-बार होने वाले अवसाद का अर्थ है कि पहले का दौर खत्म होने के बाद व्यक्ति को फिर अवसाद का दौरा पड़ता है।
सात दिनों के भीतर 377 मरीज, यानी 5.5%, दोबारा अस्पताल में भर्ती हुए। 30 दिनों के भीतर यह संख्या 723, यानी 10.6% थी। 90 दिनों तक 953 मरीज, यानी 14%, फिर से भर्ती हो चुके थे। यह अंतिम आंकड़ा उस समूह में अस्पताल से छुट्टी पाए करीब हर सात में से एक मरीज के बराबर है।
दोबारा भर्ती होने वालों में से बड़ी संख्या उसी अस्पताल में लौटी। सात, 30 और 90 दिनों के भीतर उसी अस्पताल में दोबारा भर्ती होने की दर क्रमशः 4.5%, 9.1% और 12.2% थी। रिपोर्ट में मूल अस्पताल में लौटने और दूसरे अस्पताल में भर्ती होने के आंकड़े अलग-अलग रखे गए हैं, जिससे सेवाओं को यह देखने में मदद मिलती है कि मरीजों के अस्पताल से छुट्टी पाने के बाद क्या होता है।
परिवारों के लिए अस्पताल से छुट्टी का मतलब अस्पताल की निगरानी से वापस रोजमर्रा की दिनचर्या में लौटना है। दोबारा भर्ती के आंकड़े देखभाल में निरंतरता को नीतिगत चर्चा का ठोस हिस्सा बनाते हैं। इसके साथ यह सवाल भी अहम है कि पहली बार मदद लेने वालों तक कैसे पहुंचा जाए।
मदद तक पहुंच पर जनमानस और परिवारों की जरूरतों का असर
गायिका ली ह्यो-री ने हाल ही में JTBC के मनोरंजन कार्यक्रम लव वॉर में मनोचिकित्सक से मिलने के अपने अनुभव के बारे में बात की। शराब को लेकर विवाद का सामना कर रहे एक जोड़े को साथ में परामर्श लेने की सलाह देते हुए उन्होंने बताया कि वह भी मनोचिकित्सक के पास जाती हैं और रोजमर्रा की जिंदगी ठीक चलने पर भी अपनी मानसिक स्थिति की जांच करती हैं।
उनकी टिप्पणियां प्रोफेसर ली के बताए बदलाव को दर्शाती हैं: कुछ लोगों के लिए मनोचिकित्सकीय देखभाल लेना आसान हो रहा है। ली ने युवाओं में घटती बाधाओं को सकारात्मक बताया, क्योंकि जो लोग पहले इलाज से बचते थे, वे अब मदद ले रहे हो सकते हैं।
स्वास्थ्य एवं कल्याण मंत्रालय के 2021 के मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण में पाया गया कि 27.8% वयस्कों ने जीवन में कभी न कभी मानसिक विकार का अनुभव किया था। जीवनकाल से जुड़ा यह माप कई अन्य स्थितियों और अवसाद तथा चिंता के इलाज की सालाना संख्या से कहीं लंबी अवधि को कवर करता है। इससे पता चलता है कि वयस्कों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयां कितनी व्यापक हैं।
पारिवारिक परिस्थितियों में भी सहायता की जरूरत अधिक हो सकती है। कोरिया जनसंख्या, स्वास्थ्य एवं कल्याण संघ के शोध, जिसकी जानकारी जून 2025 में दी गई, में पाया गया कि प्रसव के बाद पहले 12 सप्ताह के भीतर जुड़वां बच्चों की 39.5% माताओं में अवसाद था। सर्वेक्षण में जुड़वां बच्चों का पालन-पोषण कर रहे या उनके जन्म की प्रतीक्षा कर रहे 459 जोड़े शामिल थे। माता-पिता ने सहायता की तीव्र जरूरत भी जताई: 94.7% ने कहा कि एक बच्चे वाले परिवारों की तुलना में जुड़वां बच्चों वाले परिवारों को अधिकारियों से अधिक मदद की जरूरत है।
मनोचिकित्सकीय देखभाल में दवाएं, परामर्श, मनोवैज्ञानिक चिकित्सा और रोजमर्रा की दिनचर्या से जुड़ी सलाह शामिल हो सकती है। इलाज के बढ़ते आंकड़े, स्कूलों और समुदायों से जुड़े प्रस्ताव तथा परिवारों और दोबारा अस्पताल में भर्ती होने के प्रमाण, कई चरणों में जरूरत दिखाते हैं: इलाज तक पहुंचना, उचित देखभाल पाना और उसके बाद सहायता जारी रखना।
मुख्य बिंदु
- अवसाद और चिंता का इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या रिकॉर्ड 1,938,516 पर पहुंची, जो 2021 से 19% अधिक है।
- 10 से 19 वर्ष के मरीजों की संख्या 54.1% बढ़ी, जबकि नौ वर्ष या उससे कम उम्र के मरीजों में 50.4% की वृद्धि हुई।
- वयस्कों में 30 से 39 वर्ष के लोगों की संख्या सबसे तेजी से, 36.8% बढ़ी। 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग सबसे बड़ा मरीज समूह बने रहे।
- मरीजों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 64% थी। नींद संबंधी विकारों का इलाज 2021 से 24.7% बढ़ा।
- राष्ट्रीय सर्वेक्षण भावनात्मक परेशानी को इलाज के रिकॉर्ड से अलग मापते हैं, जिससे आबादी के मानसिक स्वास्थ्य और देखभाल तक पहुंच, दोनों का आकलन करने में मदद मिलती है।
- 2023 में मनोचिकित्सकीय बिस्तरों की संख्या 3,930 घटी। अवसाद के इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी पाए एक समूह में 14% मरीज 90 दिनों के भीतर दोबारा अस्पताल में भर्ती हुए।
- बेक ने स्कूलों और समुदायों की भागीदारी के साथ शुरुआती हस्तक्षेप की अपील की, जबकि प्रोफेसर ली ने अवसाद और चिंता की व्यापकता मापने के लिए अलग-अलग सर्वेक्षण कराने का आग्रह किया।






