तीन भारतीय AI मॉडल स्थानीय भाषाओं और निजी कंप्यूटिंग पर केंद्रित
भारत ने IndiaAI Mission के तहत देश में विकसित तीन कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल पेश किए हैं: Soket Labs का EKA-1 और ZenteiQ के Dhir 2B तथा Dhir 5B। नवंबर 2026 की इस घोषणा में देश के AI कार्यक्रम की दो प्राथमिकताएं एक साथ आई हैं: भारतीय भाषाओं में काम करने वाला सॉफ्टवेयर और ऐसे उपकरण जो लगातार इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी उपयोगी काम कर सकें।
विषय-सूची
- तीन भारतीय AI मॉडल स्थानीय भाषाओं और निजी कंप्यूटिंग पर केंद्रित
- EKA-1 किन कामों के लिए बनाया गया है
- भारतीय भाषाओं के समर्थन के दो अलग दायरे
- Dhir मॉडल छोटे क्यों हैं
- इंटरनेट के बिना काम करने का क्या मतलब है
- स्थानीय इस्तेमाल के लिए बने मॉडल क्लाउड कंप्यूटिंग से विकसित हुए
- लोग इन मॉडलों तक कैसे पहुंच सकते हैं
- संस्थानों और उपयोगकर्ताओं के लिए क्या बदलेगा
- मुख्य बातें
EKA-1 में 26.3 अरब पैरामीटर हैं और यह अंग्रेजी तथा भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी 22 भाषाओं को सपोर्ट करता है। छोटे Dhir मॉडल में क्रमशः दो अरब और पांच अरब पैरामीटर हैं और वे अंग्रेजी तथा 10 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं। इनके डेवलपर दस्तावेजों से जुड़े सवालों के जवाब देने से लेकर गणित, प्रोग्रामिंग और संस्थागत काम में मदद करने तक के उपयोग बताते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने मंत्रालय और IndiaAI के अधिकारियों के साथ लॉन्च में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि देश में विकसित मॉडल भारत की तकनीकी स्वतंत्रता को मजबूत कर सकते हैं और सरकार, उद्योग, अनुसंधान, शिक्षा तथा साइबर सुरक्षा के काम में मदद कर सकते हैं।
इसका सबसे तात्कालिक व्यावहारिक लाभ यह है कि AI कहां चलेगा, इस पर अधिक विकल्प मिलेंगे। कोई संगठन अपने कंप्यूटरों पर मॉडल चला सकता है, जबकि कुछ मोबाइल ऐप अनुरोधों को सीधे फोन पर संसाधित कर सकते हैं। संवेदनशील दस्तावेजों से जुड़े संस्थानों को इससे अपनी कंप्यूटिंग व्यवस्था के भीतर जानकारी रखते हुए AI इस्तेमाल करने का तरीका मिल सकता है।
शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप, कंपनियों और आम लोगों के लिए इन मॉडलों की पहुंच AIKosh के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है। ZenteiQ की एक मुफ्त मोबाइल ऐप भी पेश करने की योजना है। इस तरह घोषणा में वे बुनियादी मॉडल भी शामिल हैं जिन पर डेवलपर आगे काम कर सकते हैं और लोगों के सीधे इस्तेमाल के लिए प्रस्तावित रास्ता भी।
EKA-1 किन कामों के लिए बनाया गया है
Soket Labs ने EKA-1 को गणित, कोडिंग और तर्क संबंधी कामों के लिए विकसित किया है। तर्क से आशय जानकारी पर विचार करके जवाब तक पहुंचने से है। मुख्य कार्यकारी अभिषेक उप्परवाल ने बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता वाले क्षेत्र बताया। उनके अनुसार, मॉडल को भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
फाउंडेशन मॉडल ऐसा AI सिस्टम होता है जिसे व्यापक स्तर पर प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि उससे कई तरह के ऐप बनाए जा सकें। डेवलपर इसके इर्द-गिर्द अधिक विशिष्ट उपकरण बना सकते हैं, जैसे वित्तीय दस्तावेजों से जुड़े सवालों के जवाब देने वाली सेवा या प्रोग्रामर को कोड लिखने में मदद करने वाला सॉफ्टवेयर। EKA-1 का उद्देश्य यह बुनियादी क्षमता देना है, न कि केवल एक सीमित, तय काम करना।
मॉडल के 26.3 अरब पैरामीटर वे आंतरिक संख्यात्मक मान हैं जिन्हें प्रशिक्षण के दौरान समायोजित किया जाता है। इनकी मदद से सिस्टम पैटर्न पहचानता और जवाब तैयार करता है। पैरामीटर की संख्या मॉडल का आकार बताती है, लेकिन उपयोगकर्ताओं को किसी खास काम के लिए भाषा की गुणवत्ता, जवाबों की सटीकता, गति और आवश्यक कंप्यूटिंग संसाधनों पर भी विचार करना होता है।
EKA-1 के प्रशिक्षण में इस्तेमाल टोकन की घोषित संख्या करीब 7.5 ट्रिलियन है। टोकन वे हिस्से हैं जिनमें टेक्स्ट को प्रोसेसिंग के लिए बांटा जाता है; वे कभी पूरे शब्द और कभी शब्दों के हिस्से हो सकते हैं। एक अन्य प्रकाशित आंकड़े में यह संख्या 7.5 लाख करोड़ टोकन बताई गई है, जो 75 ट्रिलियन के बराबर है। इससे प्रशिक्षण की कुल मात्रा को लेकर बड़ा अंतर सामने आता है।
भारतीय भाषाओं के समर्थन के दो अलग दायरे
अंग्रेजी और अनुसूचित सभी 22 भारतीय भाषाओं के लिए EKA-1 का समर्थन, देश में इसकी प्रस्तावित भूमिका का अहम हिस्सा है। एक व्यापक विवरण में इसकी पहुंच 100 से अधिक भारतीय और विदेशी भाषाओं के साथ-साथ प्रोग्रामिंग भाषाओं तक बताई गई है। अनुसूचित भाषाओं का आंकड़ा भारत में इसके घोषित भाषा-समर्थन को दर्शाता है, जबकि बड़ा आंकड़ा व्यापक दायरा बताता है।
Dhir 2B और Dhir 5B को अंग्रेजी तथा 10 भारतीय भाषाओं का समर्थन करने वाला बताया गया है। उनका छोटा आकार और भाषाओं का अपेक्षाकृत सीमित घोषित दायरा, दस्तावेजों, भाषाओं और उपलब्ध उपकरणों के आधार पर संस्थानों को EKA-1 से अलग विकल्प देता है।
किसी विद्यार्थी या सरकारी कर्मचारी के लिए भाषा-समर्थन यह तय कर सकता है कि AI उपकरण रोजमर्रा के काम में उपयोगी होगा या नहीं। कार्यालय या कक्षा में इस्तेमाल होने वाली भाषा स्वीकार करने वाला दस्तावेज सहायक, सवाल पूछने से पहले उन्हें अंग्रेजी में अनुवाद करने की जरूरत घटा सकता है। हालांकि, लॉन्च के विवरणों में हर भाषा के प्रदर्शन के परिणाम या तीनों मॉडलों की तुलनीय सटीकता के आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
Dhir मॉडल छोटे क्यों हैं
ZenteiQ के मुख्य कार्यकारी प्रोफेसर शशिकुमार गणेशन ने Dhir 2B और Dhir 5B को कॉम्पैक्ट मॉडल बताया और लॉन्च के समय उनके आकार के बारे में कहा:
हमने दो छोटे मॉडल लॉन्च किए हैं। हम इन्हें कॉम्पैक्ट मॉडल कहते हैं... हमने दो अरब और फिर पांच अरब पैरामीटर वाला मॉडल लॉन्च किया है...
EKA-1 में Dhir 5B से करीब 5.3 गुना और Dhir 2B से लगभग 13.2 गुना अधिक पैरामीटर हैं। ये तुलना घोषित आंकड़ों 26.3 अरब, पांच अरब और दो अरब पर आधारित हैं। छोटे मॉडलों के पैरामीटर स्टोर करने के लिए आमतौर पर कम मेमोरी की जरूरत होती है, इसलिए वे सीमित संसाधनों वाले उपकरणों के लिए विकल्प हो सकते हैं।
ZenteiQ का कहना है कि उसके मॉडल सीधे मोबाइल उपकरणों और अलग-अलग कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर चल सकते हैं। गणेशन ने इस प्रस्तावित अनुभव को इस तरह बताया कि लोगों को हर अनुरोध किसी दूरस्थ सेवा पर भेजे बिना AI उपलब्ध हो:
हम इन मॉडलों को अपने मोबाइल उपकरण पर ही चला सकते हैं... उपयोगकर्ताओं को क्लाउड पर जाए बिना AI समाधान अपने हाथों में मिल सकते हैं, पहली बात...
Dhir मॉडल दस्तावेजों से जानकारी हासिल करने, सवालों के जवाब देने और नियमित काम में मदद करने के लिए बनाए गए हैं। रक्षा संगठन, सरकारी विभाग, औद्योगिक कंपनियां और शैक्षणिक संस्थान इनके प्रस्तावित उपयोगकर्ताओं में शामिल हैं।
इंटरनेट के बिना काम करने का क्या मतलब है
क्लाउड के जरिए इस्तेमाल की जाने वाली AI सेवा आम तौर पर अनुरोध को कहीं और मौजूद कंप्यूटरों तक भेजती है। वे कंप्यूटर उसे प्रोसेस करके जवाब लौटाते हैं। मॉडल को स्थानीय रूप से चलाने पर यह प्रोसेसिंग फोन या संगठन के अपने उपकरणों पर होती है। जरूरी सॉफ्टवेयर और मॉडल इंस्टॉल होने के बाद, उपयुक्त काम लाइव इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी किए जा सकते हैं।
कृष्णन ने सुरक्षित कंप्यूटर नेटवर्क में, इंटरनेट पहुंच के बिना, इन मॉडलों के काम करने की संभावना पर जोर दिया। ऐसे नेटवर्क सरकारी कार्यालयों और अन्य संवेदनशील संस्थानों के लिए प्रासंगिक हैं, जहां बाहरी सेवाओं से कनेक्शन सीमित रखे जाते हैं। उदाहरण के लिए, स्थानीय दस्तावेज सहायक कर्मचारियों को आंतरिक सामग्री खोजने में मदद कर सकता है, जबकि प्रोसेसिंग संगठन के भीतर ही रहती है।
कमजोर या रुक-रुककर मिलने वाली कनेक्टिविटी वाले इलाकों में भी ZenteiQ का उपकरण-आधारित तरीका उपयोगी हो सकता है। हर अनुरोध के लिए लोगों की भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भरता कम होगी। EKA-1 के बारे में भी कहा गया है कि वह मोबाइल फोन पर कुछ काम कर सकता है, हालांकि मोबाइल पर इस्तेमाल के सबसे मजबूत दावे कॉम्पैक्ट Dhir मॉडलों को लेकर हैं।
जानकारी को उपकरण पर रखने से उसके मालिक को इस पर अधिक नियंत्रण मिलता है कि प्रोसेसिंग कहां होती है। संगठन को फिर भी फाइलों तक पहुंच का प्रबंधन करना, अपने उपकरणों को सुरक्षित रखना और तय करना होता है कि ऐप किन दस्तावेजों का उपयोग कर सकता है। इसलिए निजता इस बात पर निर्भर करती है कि पूरा ऐप किस तरह लागू किया गया है, साथ ही इस पर भी कि मॉडल स्थानीय रूप से चल सकता है या नहीं।
स्थानीय इस्तेमाल के लिए बने मॉडल क्लाउड कंप्यूटिंग से विकसित हुए
Dhir मॉडल Google Cloud की टेन्सर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) की मदद से विकसित किए गए। ये AI में होने वाली बड़ी मात्रा की गणनाओं के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष प्रोसेसर हैं। बताया गया है कि ये मॉडल ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) का इस्तेमाल करने वाले सिस्टम पर भी चल सकते हैं।
प्रशिक्षण और रोजमर्रा का इस्तेमाल अलग-अलग चरण हैं। प्रशिक्षण में बड़ी मात्रा में सामग्री प्रोसेस करके मॉडल के आंतरिक मानों को समायोजित किया जाता है। तैयार मॉडल से सवाल का जवाब लेना इन्फरेंस कहलाता है। डेवलपर प्रशिक्षण के दौरान शक्तिशाली क्लाउड उपकरण इस्तेमाल कर सकते हैं और बाद में ऐसा मॉडल उपलब्ध करा सकते हैं जो स्थानीय हार्डवेयर पर इन्फरेंस करे।
IndiaAI Mission ने दोनों डेवलपर को कम दरों पर कंप्यूटिंग संसाधन और शोध खर्च के लिए सहायता दी। इस मदद से फाउंडेशन मॉडल बनाने की एक बड़ी व्यावहारिक लागत का समाधान होता है: उनके प्रशिक्षण और विकास के लिए पर्याप्त कंप्यूटिंग क्षमता जुटाना।
कृष्णन ने इस पहल को तकनीकी और रणनीतिक स्वायत्तता से जोड़ा। व्यावहारिक रूप से, देश में विकास से भारतीय संगठनों को स्थानीय भाषाओं और संस्थागत जरूरतों के अनुरूप बने मॉडलों का एक और स्रोत मिलता है, जिन्हें वे अपने नियंत्रण वाले ढांचे पर चला सकते हैं।
लोग इन मॉडलों तक कैसे पहुंच सकते हैं
शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, स्टार्टअप, कारोबारों और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए AIKosh को घोषित पहुंच मंच बनाया गया है। डेवलपर के लिए फाउंडेशन मॉडल तक पहुंच से खास दस्तावेजों या कामों के अनुरूप ऐप बनाने का अवसर मिलता है। संस्थानों को अगला कदम यह तय करना होगा कि उनके उपकरणों, भाषाओं और जानकारी से जुड़े नियमों के लिए कौन-सा परिनियोजन उपयुक्त है।
ZenteiQ अपनी मोबाइल ऐप Play Store और iOS पर मुफ्त उपलब्ध कराने की योजना बना रही है। गणेशन ने यह भी कहा कि कंपनी नौ अरब पैरामीटर वाला मॉडल पेश करने की तैयारी में है, जिससे उसकी रेंज Dhir 2B और Dhir 5B से आगे बढ़ेगी।
घोषणा में मोबाइल ऐप या प्रस्तावित नौ अरब पैरामीटर वाले मॉडल की रिलीज तारीख नहीं दी गई है। समर्थित फोन कॉन्फिगरेशन, मेमोरी की जरूरत, डाउनलोड का आकार और मॉडल के लाइसेंस की शर्तें भी स्पष्ट नहीं हैं। सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने या उसके आधार पर कुछ बनाने का फैसला करने वालों के लिए ये विवरण अहम होंगे।
लॉन्च मंगलवार को हुआ बताया गया, जो 2026 में 3 नवंबर था, जबकि 4 नवंबर को भी अनावरण की तारीख बताया गया। दोनों विवरणों के अनुसार तीनों मॉडलों का परिचय उसी सप्ताह हुआ।
संस्थानों और उपयोगकर्ताओं के लिए क्या बदलेगा
सरकारी विभागों और कारोबारों के पास अब भाषा और दस्तावेजों से जुड़े कामों के लिए विचार करने को तीन अतिरिक्त घरेलू मॉडल हैं। आकार के लिहाज से उनके विकल्प अलग हैं: EKA-1 में पैरामीटर अधिक हैं और घोषित भाषा-समर्थन का दायरा व्यापक है, जबकि Dhir मॉडल कॉम्पैक्ट रूप से काम करने पर केंद्रित हैं, जिनमें मोबाइल उपकरणों पर इस्तेमाल भी शामिल है।
Soket Labs ने बैंकिंग और साइबर सुरक्षा को खास लक्ष्य बताया है। Dhir के प्रमुख उपयोगों में दस्तावेजों से जानकारी खोजना और आंतरिक सामग्री के बारे में सवालों के जवाब देना शामिल है। स्कूल, शोधकर्ता और सार्वजनिक संस्थाएं भी इन क्षमताओं के आधार पर ऐप बना सकती हैं और अपने काम के अनुरूप मॉडल तथा कंप्यूटिंग व्यवस्था चुन सकती हैं।
अगले ठोस कदम AIKosh के जरिए व्यापक पहुंच, प्रस्तावित मुफ्त मोबाइल ऐप और ZenteiQ का नियोजित बड़ा मॉडल हैं। उपयोगकर्ताओं के लिए इन प्रणालियों का व्यावहारिक मूल्य इस बात से तय होगा कि वे उनकी भाषाओं, दस्तावेजों और उपकरणों पर कितनी अच्छी तरह काम करती हैं।
मुख्य बातें
- भारत ने नवंबर 2026 में IndiaAI Mission के तहत EKA-1, Dhir 2B और Dhir 5B पेश किए।
- EKA-1 में 26.3 अरब पैरामीटर हैं और यह अंग्रेजी तथा अनुसूचित सभी 22 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है।
- Dhir 2B और Dhir 5B अंग्रेजी तथा 10 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करते हैं और इन्हें मोबाइल उपकरणों सहित कॉम्पैक्ट रूप से चलाने के लिए बनाया गया है।
- स्थानीय प्रोसेसिंग से सीमित इंटरनेट पहुंच वाले संस्थानों और कमजोर कनेक्टिविटी वाली जगहों पर दस्तावेजों से जुड़े काम में मदद मिल सकती है।
- IndiaAI Mission ने डेवलपर को कंप्यूटिंग संसाधन और शोध खर्च के लिए सहायता दी।
- AIKosh घोषित पहुंच मंच है; ZenteiQ की मुफ्त मोबाइल ऐप और नौ अरब पैरामीटर वाले मॉडल की योजना है।






