सरकारी सेवा नियमों के तहत आठ अधिकारियों पर कार्रवाई
बांग्लादेश ने सात पुलिस अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया है। इनमें ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच के पूर्व प्रमुख मोहम्मद हारुन-उर-रशीद भी शामिल हैं। एक अन्य अधिकारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भेजने का आदेश दिया गया है। गृह मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को इन फैसलों की घोषणा की। बर्खास्तगी की प्रभावी तारीखें मार्च 2018 तक पीछे जाती हैं।
विषय-सूची
- सरकारी सेवा नियमों के तहत आठ अधिकारियों पर कार्रवाई
- हारुन को क्यों किया गया बर्खास्त
- अनुपस्थिति से बर्खास्तगी तक के चरण
- फरहाना तस्किन का मामला कनाडा जाने की छुट्टी से शुरू हुआ
- पढ़ाई की छुट्टी के बाद मोनीरुज्जमान सरकार नहीं लौटे
- दो वरिष्ठ अधिकारियों ने आराम या बीमारी का हवाला दिया
- छुट्टी और इस्तीफे के अनुरोध खारिज होने के बाद दो बर्खास्तगियां
- काजी मिजानुर रहमान को अनिवार्य सेवानिवृत्ति क्यों मिली
- प्रभावी तारीखों का क्या मतलब है
- मुख्य बिंदु
हारुन ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) में अपराध एवं संचालन के अतिरिक्त आयुक्त के पद पर अंतिम बार कार्यरत थे। उन्हें 6 अगस्त 2024 से प्रभावी रूप से बर्खास्त किया गया। मंत्रालय ने कहा कि वह उस तारीख से बिना अनुमति अनुपस्थित रहे और उनसे संपर्क करने की बार-बार की गई कोशिशों का जवाब नहीं दिया।
बर्खास्त किए गए छह अन्य अधिकारी हैं: एमडी अनिसुर रहमान, श्यामल कुमार मुखर्जी, तारिक बिन राशिद, एसएम जहांगीर हसन, फरहाना तस्किन और एमडी मोनीरुज्जमान सरकार। काजी मिजानुर रहमान को विभागीय जांच में विवाहेतर संबंध से जुड़ा कदाचार का आरोप सही पाए जाने के बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भेजा गया।
अनुशासनात्मक कार्रवाई के ये आठ फैसले सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2018 के तहत जांच, बांग्लादेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) से परामर्श और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लिए गए। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ सचिव मंज़ूर मोर्शेद चौधरी ने राष्ट्रपति की ओर से अधिसूचनाओं पर हस्ताक्षर किए।
इन मामलों की परिस्थितियां अलग-अलग हैं: कुछ अधिकारी विदेश यात्रा या पढ़ाई से लौटे नहीं, कुछ ने बीमारी या आराम का हवाला दिया लेकिन ड्यूटी पर वापस नहीं आए, जबकि एक अधिकारी का इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया। दो बर्खास्तगियां 2018 और 2019 में शुरू हुई अनुपस्थिति से जुड़ी हैं, जबकि अन्य पांच 2024 और 2025 की तारीखों से प्रभावी हैं। इन आदेशों के साथ पुलिस के कई पदों और तैनाती से जुड़े अनुशासनात्मक मामले समाप्त हुए।
हारुन को क्यों किया गया बर्खास्त
डीएमपी में अतिरिक्त आयुक्त के रूप में काम करते समय हारुन पुलिस उपमहानिरीक्षक के पद पर थे। इससे पहले वह डिटेक्टिव ब्रांच का नेतृत्व कर चुके थे। यह मेट्रोपॉलिटन पुलिस की वह इकाई है जो जासूसी कार्य और आपराधिक जांच के लिए जिम्मेदार है।
मंत्रालय ने कहा कि हारुन 6 अगस्त 2024 से सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना अनुपस्थित रहने लगे। अधिकारियों ने उनके वर्तमान और स्थायी पते तथा ईमेल के जरिये संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वह काम पर नहीं लौटे।
इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर विभागीय कार्रवाई का अनुरोध किया। कार्यवाही 15 अप्रैल 2026 को शुरू हुई। अनुपस्थिति का कारण बताने के लिए जारी शुरुआती नोटिस का हारुन ने लिखित जवाब नहीं दिया और न ही अतिरिक्त समय मांगा।
22 जून को नियुक्त जांच अधिकारी ने 6 अगस्त को रिपोर्ट सौंपी। जांच में 2018 के नियमों के नियम 3(ग) के तहत कर्तव्य छोड़ने का आरोप सही पाया गया। इस सेवा प्रक्रिया में कर्तव्य छोड़ने का अर्थ है बिना अनुमति ड्यूटी त्याग देना।
20 अगस्त को जारी दूसरे नोटिस का भी हारुन ने जवाब नहीं दिया। पीएससी ने 1 अक्टूबर को बर्खास्तगी की सिफारिश की और राष्ट्रपति ने 25 अक्टूबर को फैसले को मंजूरी दी। अंतिम बर्खास्तगी से पहले हारुन निलंबित थे।
अनुपस्थिति से बर्खास्तगी तक के चरण
हारुन के मामले में उनकी अनुपस्थिति शुरू होने की तारीख और अधिकारियों द्वारा जांच कर दंड को मंजूरी देने की तारीखें अलग-अलग हैं। बर्खास्तगी की घोषणा अक्टूबर 2026 में हुई, लेकिन यह अगस्त 2024 से प्रभावी की गई।
मंत्रालय के विवरण के अनुसार घटनाक्रम इस प्रकार रहा:
- 6 अगस्त 2024: हारुन बिना अनुमति अनुपस्थित रहने लगे; बर्खास्तगी इसी तारीख से प्रभावी है।
- 15 अप्रैल 2026: पुलिस मुख्यालय के अनुरोध के बाद विभागीय कार्यवाही शुरू हुई।
- 22 जून 2026: जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।
- 6 अगस्त 2026: जांच रिपोर्ट सौंपी गई।
- 20 अगस्त 2026: स्पष्टीकरण मांगने के लिए दूसरा नोटिस जारी हुआ।
- 1 अक्टूबर 2026: पीएससी ने बर्खास्तगी की सिफारिश की।
- 25 अक्टूबर 2026: राष्ट्रपति ने फैसले को मंजूरी दी।
- 31 अक्टूबर 2026: मंत्रालय ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा की।
स्पष्टीकरण मांगने वाला नोटिस कर्मचारी को दंड दिए जाने से पहले आरोपों का जवाब देने का अवसर देता है। मंत्रालय के अनुसार, हारुन ने किसी भी नोटिस का जवाब नहीं दिया।
फरहाना तस्किन का मामला कनाडा जाने की छुट्टी से शुरू हुआ
डीएमपी के प्रशासन-यातायात उत्तर विभाग की पूर्व सहायक आयुक्त फरहाना तस्किन 15 फरवरी 2018 को अपने पति से मिलने के लिए 42 दिन की छुट्टी लेकर कनाडा गई थीं।
बाद में उन्होंने बीमारी का हवाला देते हुए 36 दिन की अतिरिक्त छुट्टी मांगी और कनाडा के एक संस्थान में तीन साल का लेखांकन पाठ्यक्रम करने के लिए अध्ययन अवकाश का आवेदन दिया। गृह मंत्रालय ने अध्ययन अवकाश का आवेदन खारिज कर उन्हें बांग्लादेश लौटकर ड्यूटी पर आने का निर्देश दिया।
अनुशासनात्मक अधिसूचना में कहा गया कि 28 मार्च 2018 को, जब उन्हें लौटना था, वह काम पर उपस्थित नहीं हुईं। अनुपस्थिति शुरू होने के करीब सात साल बाद, 17 फरवरी 2025 को विभागीय मामला दर्ज किया गया।
जांच में कर्तव्य छोड़ने का आरोप सही पाया गया। फरहाना ने स्पष्टीकरण मांगने वाले दूसरे नोटिस का भी जवाब नहीं दिया। पीएससी की सलाह और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद उनकी बर्खास्तगी 28 मार्च 2018 से प्रभावी की गई। सातों बर्खास्तगियों में यह सबसे पुरानी प्रभावी तारीख है।
पढ़ाई की छुट्टी के बाद मोनीरुज्जमान सरकार नहीं लौटे
डीएमपी के एक अन्य पूर्व सहायक आयुक्त एमडी मोनीरुज्जमान सरकार 2012 में किंग्स्टन विश्वविद्यालय में अपराधशास्त्र में पीएचडी करने के लिए ब्रिटेन गए थे। अपराधशास्त्र में अपराध, उसके कारणों और समाज की प्रतिक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है।
कई बार छुट्टी बढ़ाए जाने के बाद उनकी स्वीकृत अनुपस्थिति जारी रही। इसमें 19 अक्टूबर 2017 से 30 जून 2019 तक बिना वेतन की छुट्टी भी शामिल थी। इसके बाद उन्होंने 1 जुलाई 2019 से 30 जून 2021 तक दो और वर्ष की छुट्टी मांगी।
गृह मंत्रालय ने उनका अनुरोध खारिज कर उन्हें बांग्लादेश लौटकर अपने कार्यस्थल पर फिर से ड्यूटी संभालने का निर्देश दिया। अनुशासनात्मक जांच के निष्कर्षों के अनुसार, इसके बजाय वह विदेश में ही रहे।
5 अक्टूबर 2020 को विभागीय मामला शुरू हुआ। जांचकर्ताओं ने कदाचार और कर्तव्य छोड़ने के आरोप सही पाए। स्पष्टीकरण मांगने वाले दूसरे नोटिस का भी उन्होंने जवाब नहीं दिया। उनकी बर्खास्तगी 1 जुलाई 2019 से प्रभावी है, यानी स्वीकृत छुट्टी की अंतिम अवधि समाप्त होने के तुरंत बाद से।
फरहाना और मोनीरुज्जमान, दोनों शुरुआत में अनुमति लेकर विदेश गए थे। उनके विभागीय मामलों का आधार स्वीकृत छुट्टी समाप्त होने और मंत्रालय के लौटने के निर्देश के बाद ड्यूटी पर वापस न आना था।
दो वरिष्ठ अधिकारियों ने आराम या बीमारी का हवाला दिया
पर्यटक पुलिस के पूर्व अतिरिक्त पुलिस उपमहानिरीक्षक श्यामल कुमार मुखर्जी को 1 जनवरी 2025 को राजशाही रेंज के डीआईजी कार्यालय से संबद्ध किया गया था। विभागीय विवरण के अनुसार, वह 22 जनवरी को वहां पहुंचे और उसी दिन तीन सप्ताह आराम के लिए प्रस्थान रिपोर्ट जमा की।
यह अवधि खत्म होने के बाद वह वापस नहीं आए। 3 जुलाई 2025 को कार्यवाही शुरू हुई और जांच में कर्तव्य छोड़ने का आरोप सही पाया गया। उनकी बर्खास्तगी 22 जनवरी 2025 से प्रभावी है। मुख्य निष्कर्ष यह था कि मांगी गई आराम की अवधि के बाद भी वह अनुपस्थित रहे।
राजशाही रेंज के पूर्व डीआईजी एमडी अनिसुर रहमान को रिवर पुलिस में संबद्ध किया गया था और उन्होंने 27 अगस्त 2024 को उस इकाई में कार्यभार संभाला। 17 फरवरी 2025 को उन्होंने बीमारी का हवाला देते हुए रिपोर्ट जमा की।
मंत्रालय ने कहा कि उनकी रिपोर्ट में छुट्टी का प्रकार या अवधि और उनके ठहरने की जगह नहीं बताई गई थी। उन्होंने जरूरी सहायक दस्तावेज भी नहीं दिए और बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद ड्यूटी पर नहीं लौटे।
जांच में अनिसुर के खिलाफ कदाचार और कर्तव्य छोड़ने, दोनों आरोप सही पाए गए। उनकी बर्खास्तगी 17 फरवरी 2025 से प्रभावी है। उनके मामले में अधूरी छुट्टी रिपोर्ट, दस्तावेज न देना और ड्यूटी पर लगातार उपस्थित न होना मुख्य मुद्दे थे।
छुट्टी और इस्तीफे के अनुरोध खारिज होने के बाद दो बर्खास्तगियां
रिवर पुलिस के तांगाइल क्षेत्र के पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एसएम जहांगीर हसन 8 अक्टूबर 2024 को विदेश यात्रा के लिए 15 दिन की छुट्टी लेकर रवाना हुए थे।
बाद में उन्होंने 60 दिन की छुट्टी बढ़ाने का अनुरोध किया। अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया, लेकिन वह काम पर नहीं लौटे। विभागीय जांच में कर्तव्य छोड़ने का आरोप सही पाया गया और उनकी बर्खास्तगी 23 अक्टूबर 2024 से प्रभावी है।
लक्ष्मीपुर के पूर्व पुलिस अधीक्षक और बाद में सरदाह स्थित बांग्लादेश पुलिस अकादमी से संबद्ध तारिक बिन राशिद ने 2 नवंबर 2024 से 15 दिन की आराम और मनोरंजन छुट्टी ली थी। उन्हें 17 नवंबर को लौटना था।
छुट्टी के दौरान तारिक ने बीमारी का हवाला दिया और राजारबाग केंद्रीय पुलिस अस्पताल की चिकित्सकीय सलाह पर 21 दिन आराम किया। उन्होंने अकादमी को डॉक्टर का पर्चा भेजा, लेकिन ड्यूटी पर वापस नहीं आए। विभागीय विवरण के अनुसार, उनके ज्ञात पते और ईमेल पर संपर्क करने की कोशिशों का कोई जवाब नहीं मिला।
बाद में तारिक ने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा-पत्र जमा किया। अधिकारियों ने इसे खारिज कर दिया। जांचकर्ताओं ने नियम 3(ख) और 3(ग) के तहत कदाचार और कर्तव्य छोड़ने के आरोप सही पाए। उनकी बर्खास्तगी 17 नवंबर 2024 से प्रभावी है।
जहांगीर के मामले में छुट्टी बढ़ाने का अनुरोध कभी मंजूर नहीं हुआ। तारिक का इस्तीफा खारिज होने के बाद भी उनकी सेवा संबंधी जिम्मेदारियां बनी रहीं। लगातार अनुपस्थिति की जांच के बाद दोनों मामलों में बर्खास्तगी हुई।
काजी मिजानुर रहमान को अनिवार्य सेवानिवृत्ति क्यों मिली
काजी मिजानुर रहमान का मामला लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के बजाय निजी आचरण से जुड़ा था। वह दिनाजपुर में आपराधिक जांच विभाग में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्यरत थे और इससे पहले डीएमपी के तेजगांव यातायात क्षेत्र में सहायक आयुक्त रह चुके थे।
विभागीय आरोप का संबंध बरिशाल मेट्रोपॉलिटन पुलिस के एक कांस्टेबल की पत्नी के साथ विवाहेतर संबंध से था। मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, अप्रैल 2022 में फेसबुक के जरिये दोनों की जान-पहचान हुई थी।
रिकॉर्ड के एक सारांश में अदालत की ऐसी टिप्पणियों का उल्लेख था, जिनमें संबंध को सहमति से बना बताया गया था। विभागीय जांच में पाया गया कि उनके आचरण से पुलिस बल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा। नियम 3(ख) के तहत कदाचार का आरोप सही पाया गया।
पीएससी की सलाह और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिकारियों ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश दिया। यह आदेश 25 अक्टूबर का था। अनिवार्य सेवानिवृत्ति का अर्थ है कि नियोक्ता अधिकारी को सेवा छोड़ने के लिए कहता है, बजाय इसके कि अधिकारी खुद सेवानिवृत्ति का समय चुनें। मिजानुर के लिए यही दंड चुना गया, जबकि अन्य सात अधिकारियों को बर्खास्तगी के आदेश मिले।
प्रभावी तारीखों का क्या मतलब है
मंत्रालय ने प्रत्येक बर्खास्तगी के लिए पहले की प्रभावी तारीख तय की। फरहाना का आदेश 28 मार्च 2018 और मोनीरुज्जमान का 1 जुलाई 2019 से लागू होता है। बाकी पांच बर्खास्तगियां 6 अगस्त 2024 से 17 फरवरी 2025 के बीच की तारीखों से प्रभावी हैं।
इस तरह सात में से पांच बर्खास्तगियां, यानी करीब 71%, 2024 या 2025 में शुरू हुई अनुपस्थिति से जुड़ी हैं। बाकी दो बहुत पहले शुरू हुई विदेश में रहने की अवधि से संबंधित हैं। अक्टूबर 2026 की घोषणा से आठ साल से भी अधिक पहले से फरहाना की बर्खास्तगी प्रभावी है।
इन तारीखों से पता चलता है कि अनुशासनात्मक फैसलों में वर्षों के अंतराल पर शुरू हुए मामलों को एक साथ शामिल किया गया है। फरहाना के विभागीय मामले की शुरुआत फरवरी 2025 में हुई, जबकि मोनीरुज्जमान का मामला अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ था। हारुन के खिलाफ कार्यवाही अप्रैल 2026 में शुरू हुई।
घोषणाओं में यह वित्तीय विवरण नहीं दिया गया है कि पहले की प्रभावी तारीखों का वेतन, पेंशन या सेवा के अन्य लाभों पर क्या असर होगा। आगे की कार्यवाही के लिए अगली सुनवाई की तारीख या समय-सीमा भी नहीं बताई गई है। जांच, पीएससी से परामर्श और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद तत्काल सेवा संबंधी परिणाम सात बर्खास्तगियां और एक अनिवार्य सेवानिवृत्ति है।
मुख्य बिंदु
- गृह मंत्रालय ने 31 अक्टूबर 2026 को सात पुलिस अधिकारियों की बर्खास्तगी और एक को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की घोषणा की।
- डिटेक्टिव ब्रांच के पूर्व प्रमुख मोहम्मद हारुन-उर-रशीद को बिना अनुमति अनुपस्थित रहने के कारण 6 अगस्त 2024 से प्रभावी रूप से बर्खास्त किया गया।
- बर्खास्त किए गए अन्य अधिकारी हैं: अनिसुर रहमान, श्यामल कुमार मुखर्जी, तारिक बिन राशिद, जहांगीर हसन, फरहाना तस्किन और मोनीरुज्जमान सरकार।
- विदेश में छुट्टी के बाद वापस न लौटने के कारण फरहाना की बर्खास्तगी 28 मार्च 2018 और मोनीरुज्जमान की 1 जुलाई 2019 से प्रभावी है।
- विवाहेतर संबंध से जुड़े कदाचार के आरोप की जांच में पुष्टि होने के बाद काजी मिजानुर रहमान को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई।
- ये कार्रवाइयां 2018 की सेवा नियमावली के तहत विभागीय जांच, पीएससी से परामर्श और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद की गईं।






