भर्ती सुधार से अस्पतालों और दफ्तरों में नियुक्तियां अटकीं
बांग्लादेश के सरकारी कार्यालयों में प्रस्तावित करीब 100,000 अस्थायी नौकरियों की भर्ती अटकी हुई है। संशोधित आउटसोर्सिंग नीति विभागों को सीधे कर्मचारियों के साथ अनुबंध करने की अनुमति देती है, लेकिन सार्वजनिक खरीद कानून में इसकी प्रक्रिया का प्रावधान नहीं है। अटकी भर्ती में स्वास्थ्य संस्थानों के लिए करीब 20,000 सेवा कर्मचारी और लोक निर्माण विभाग के तहत सरकारी इमारतों तथा कार्यालयों के लिए 5,000 कर्मचारी शामिल हैं।
विषय-सूची
- भर्ती सुधार से अस्पतालों और दफ्तरों में नियुक्तियां अटकीं
- संशोधित नीति में क्या बदलाव है
- विभाग नई व्यवस्था क्यों नहीं अपना पा रहे
- भर्ती का लंबित बोझ कहां केंद्रित है
- नीति यहां तक कैसे पहुंची
- खरीद प्राधिकरण को क्यों है चिंता
- निजी क्षेत्र की भागीदारी और आईआईएफसी का विकल्प
- कर्मचारियों और सेवा प्रदाताओं ने अलग-अलग जोखिम बताए
- भर्ती फिर शुरू होने से पहले किन फैसलों की जरूरत
- मुख्य बातें
ये पद 16 से 20 वेतन ग्रेड के हैं और इनमें अस्पतालों की सफाई, प्रयोगशाला में सहायता, मरीजों की ट्रॉलियां ले जाना तथा सार्वजनिक परिसरों का रखरखाव जैसे काम शामिल हैं। मंत्रालयों को कर्मचारियों की जरूरत है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि वे न तो निजी सेवा प्रदाताओं के साथ पुरानी व्यवस्था के जरिए और न ही व्यक्तिगत कर्मचारियों के साथ अनुबंध की नई प्रक्रिया से आगे बढ़ सकते हैं।
वित्त प्रभाग ने 21 सितंबर को बांग्लादेश सार्वजनिक खरीद प्राधिकरण (बीपीपीए) से जरूरी कानूनी बदलाव करने को कहा। 14 अक्टूबर को दिए जवाब में खरीद प्राधिकरण ने चेतावनी दी कि व्यक्तियों के साथ सीधे अनुबंध करने से आउटसोर्सिंग की बुनियादी संरचना बदल जाएगी और वित्तीय, प्रशासनिक तथा संविदात्मक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इस गतिरोध का विवरण 21 अक्टूबर, 2026 को अद्यतन एक रिपोर्ट में दिया गया।
इस विवाद में भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी दो परस्पर विरोधी चिंताएं सामने आई हैं। कर्मचारी भर्ती के लिए निजी सेवा प्रदाताओं को दी जाने वाली रकम और वेतन से होने वाली कटौतियों से राहत चाहते हैं। वहीं, खरीद अधिकारी कर्मचारियों के चयन, अनुबंध लागू कराने और सेवाओं में कमी रहने पर जिम्मेदारी तय करने के लिए कारगर व्यवस्था चाहते हैं।
मरीजों और सरकारी कार्यालयों में आने वाले लोगों के लिए तत्काल समस्या व्यावहारिक है: संस्थाएं उन सफाई कर्मचारियों, सहायकों और अन्य सहयोगी कर्मचारियों की भर्ती नहीं कर पा रही हैं, जिनकी उन्हें जरूरत है। स्वास्थ्य संस्थानों और लोक निर्माण विभाग में मिलाकर करीब 25,000 प्रस्तावित पद हैं। यह 100,000 पदों का लगभग एक चौथाई है।
संशोधित नीति में क्या बदलाव है
वित्त मंत्रालय के 2025 की आउटसोर्सिंग नीति संबंधी नोटिस में आधिकारिक प्रकाशन की तारीख 16 अप्रैल, 2025 दर्ज है। 21 सितंबर को किए गए संशोधन और पत्राचार का संबंध इस नीति के तहत विभागों द्वारा सेवाएं हासिल करने के तरीके में बाद में किए गए बदलावों से है।
पुरानी व्यवस्था में सरकारी कार्यालय प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के जरिए निजी सेवा प्रदाता चुनता था। कार्यालय कंपनी के साथ अनुबंध करता था और कंपनी कर्मचारी उपलब्ध कराती थी। ये कर्मचारी सरकारी परिसरों में सेवा प्रदाता के कर्मचारी के रूप में काम करते थे।
संशोधित व्यवस्था में भर्ती की इस प्रक्रिया से निजी सेवा प्रदाताओं को हटा दिया गया है। इसके बजाय मंत्रालय, प्रभाग और विभाग सीधे व्यक्तियों से सेवाएं हासिल करेंगे। वे वित्त प्रभाग से स्वीकृत एक विशेष संस्थान आईआईएफसी के जरिए भी सेवाएं ले सकते हैं।
वित्त प्रभाग ने कहा कि इस बदलाव के उद्देश्यों में सरकारी कामकाज तेज करना, कम समय में सेवाएं हासिल करना, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना, सार्वजनिक खर्च घटाना तथा सेवा की गुणवत्ता सुधारना शामिल हैं। प्रस्तावित कानूनी बदलावों का मकसद खरीद व्यवस्था के तहत सीधे अनुबंध करना संभव बनाना है।
विभाग नई व्यवस्था क्यों नहीं अपना पा रहे
सार्वजनिक खरीद अधिनियम, 2006 और सार्वजनिक खरीद नियम, 2025 सरकारी खरीद के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करते हैं। खरीद से आशय उस प्रक्रिया से है जिसके जरिए सार्वजनिक संस्थाएं सरकारी धन से वस्तुएं, काम या सेवाएं खरीदती हैं।
वित्त प्रभाग के 21 सितंबर के पत्र में कहा गया कि आउटसोर्सिंग इस ढांचे में भौतिक सेवा के रूप में शामिल है। हालांकि, कानून में व्यक्तियों से सीधे ये सेवाएं हासिल करने की प्रस्तावित पद्धति शामिल नहीं है। इसलिए विभागों के पास 16 से 20 वेतन ग्रेड में अस्थायी नियुक्तियों के लिए संबंधित खरीद प्रक्रिया नहीं है।
नीति यह बता सकती है कि मंत्रालय क्या करना चाहता है, जबकि खरीद कानून तय करता है कि कार्यालय किस तरह पैसा खर्च कर सकता है और अनुबंध कर सकता है। यहां नई नीति और खरीद प्रक्रिया में तालमेल नहीं रह गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस अंतर के कारण वे संशोधित व्यवस्था को लागू नहीं कर पाए हैं।
विभागों को निजी सेवा प्रदाताओं के जरिए कर्मचारी जुटाने के लिए पहले से चल रही निविदाओं पर भी निर्देश चाहिए। संशोधन में यह स्पष्ट नहीं है कि इन निविदाओं का क्या होगा। कई विभागों ने स्पष्टीकरण मांगने के लिए वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा है। इससे व्यापक कानूनी असहमति के साथ तत्काल बदलाव की समस्या भी जुड़ गई है।
भर्ती का लंबित बोझ कहां केंद्रित है
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय के संस्थानों में करीब 20,000 सेवा कर्मचारियों की भर्ती के प्रस्ताव हैं। प्रभावित पदों में अस्पताल के सफाई कर्मचारी, प्रयोगशाला सहायक, ट्रॉली अटेंडेंट और अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा एवं परिवार कल्याण प्रभाग के संयुक्त सचिव आसिब अहसान ने कहा कि उनके प्रभाग ने वित्त मंत्रालय से पूछा है कि जारी निविदाओं के मामले में क्या किया जाए। कई हजार कर्मचारियों को दैनिक वेतन पर रखा जाना था, लेकिन नीति स्पष्ट न होने के कारण भर्ती आगे नहीं बढ़ सकी।
लोक निर्माण विभाग में सरकारी आवासों और कार्यालयों की सफाई तथा अन्य सेवाओं के लिए करीब 5,000 कर्मचारियों के प्रस्ताव हैं। रेलवे, समाज कल्याण और कृषि मंत्रालयों में भी भर्ती संबंधी ऐसी ही कठिनाइयां सामने आई हैं।
कुल करीब 100,000 प्रस्तावित कर्मचारियों में से 20,000 के आधार पर देखें तो लंबित भर्ती का लगभग पांचवां हिस्सा स्वास्थ्य संस्थानों से जुड़ा है। लोक निर्माण विभाग का हिस्सा 5% है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि समस्या किसी एक मंत्रालय तक सीमित नहीं है। इसमें जनता को दी जाने वाली सेवाएं और सरकारी परिसरों का रखरखाव, दोनों शामिल हैं।
नीति यहां तक कैसे पहुंची
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, बांग्लादेश ने 2008 में अपनी पहली आउटसोर्सिंग नीति लागू की थी। सरकार ने सहयोगी काम की कुछ श्रेणियों को हासिल करने का तरीका बदलकर वेतन, भत्तों और पेंशन पर बढ़ते खर्च को कम करने की कोशिश की।
2009 से उस समय तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों के रूप में वर्णित पदों पर सीधी सरकारी भर्ती की जगह अस्थायी आउटसोर्सिंग व्यवस्था लागू हुई। नीति के तहत मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों के साथ अनुबंध करना जरूरी था। व्यक्तिगत कर्मचारियों के साथ अनुबंध और इस व्यवस्था के तहत किसी व्यक्ति के नाम पर नियुक्ति पत्र जारी करना प्रतिबंधित था।
- 2008: सरकार ने अपनी पहली आउटसोर्सिंग नीति लागू की।
- 2009: प्रभावित सहयोगी पदों पर सीधी भर्ती की जगह अस्थायी आउटसोर्सिंग व्यवस्था शुरू हुई।
- 2018: नीति में संशोधन किया गया।
- 16 अप्रैल, 2025: वित्त मंत्रालय ने 2025 की आउटसोर्सिंग नीति संबंधी नोटिस प्रकाशित किया।
- 21 सितंबर: वित्त प्रभाग ने बाद का संशोधन जारी किया और खरीद कानून तथा नियमों में बदलाव का अनुरोध किया।
- 14 अक्टूबर: बीपीपीए ने सीधे अनुबंध, निजी क्षेत्र की भागीदारी और क्रियान्वयन को लेकर चिंताएं जताईं।
- 21 अक्टूबर, 2026: बताया गया कि भर्ती का लंबित बोझ करीब 100,000 प्रस्तावित अस्थायी पदों को प्रभावित कर रहा है।
नवीनतम बदलाव ने पुरानी व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता को उलट दिया है: अनुबंध सरकारी कार्यालय और सेवा प्रदाता के बीच होता था, न कि कार्यालय और काम करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के बीच। बीपीपीए की आपत्तियां मुख्य रूप से इसी बदलाव के नतीजों पर केंद्रित हैं।
खरीद प्राधिकरण को क्यों है चिंता
बीपीपीए ने कहा कि आउटसोर्सिंग का एक उद्देश्य सरकारी कार्यालयों और सेवा कर्मचारियों के बीच सीधे संविदात्मक संबंध से बचना था। दूसरा उद्देश्य भविष्य में इन कर्मचारियों को सरकारी बजट से वेतन पाने वाले नियमित पदों पर लाने की मांगों से पैदा होने वाली वित्तीय और प्रशासनिक जटिलताओं को सीमित करना था।
सेवा प्रदाता वाली व्यवस्था में सरकार कंपनी से सेवा खरीदती है और कंपनी अपने कर्मचारियों के लिए जिम्मेदार रहती है। सीधे अनुबंध करने पर कार्यालय और कर्मचारी के बीच संबंध बदल जाएगा। तब सार्वजनिक संस्थाओं को वे संविदात्मक जिम्मेदारियां उठानी पड़ेंगी, जो पहले सेवा प्रदाता संभालता था।
बीपीपीए ने यह भी सवाल उठाया कि क्या अलग-अलग सेवा कर्मचारियों में सार्वजनिक खरीद कानून के तहत निर्धारित अनुबंधों का पालन करने और उन्हें लागू करने के लिए जरूरी कौशल होंगे। उसकी चिंता काम करने वाले व्यक्ति के चयन के साथ-साथ अनुबंध की जिम्मेदारियां संभालने के व्यावहारिक काम को लेकर भी है।
प्राधिकरण ने कहा कि कर्मचारियों के चयन, संविदात्मक दायित्व और निजी क्षेत्र की भागीदारी की एक साथ समीक्षा होनी चाहिए। दायित्व से आशय अनुबंध के तहत जिम्मेदारी से है, जिसमें यह तय करना भी शामिल है कि कोई शर्त पूरी न होने पर जवाबदेह कौन होगा। इन फैसलों से तय होगा कि कार्यालय भरोसेमंद सेवा की मांग कैसे कर सकता है और कर्मचारी रोजगार की शर्तें कैसे समझ सकता है।
निजी क्षेत्र की भागीदारी और आईआईएफसी का विकल्प
बीपीपीए ने चेतावनी दी कि निजी सेवा प्रदाताओं को बाहर रखने से मौजूदा सेवा उद्योग को नुकसान पहुंच सकता है और सरकारी खरीद में समान भागीदारी को लेकर सवाल उठ सकते हैं। उसने कहा कि खरीद प्रक्रिया से निजी क्षेत्र को बाहर करना खरीद ढांचे और अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के विपरीत हो सकता है।
प्राधिकरण ने सरकारी स्वामित्व वाले संस्थानों से खरीद से जुड़ा एक और मुद्दा उठाया। सार्वजनिक खरीद नियम, 2025 के नियम 99(1)(b) के तहत, सीधे अनुबंध के जरिए भौतिक सेवाएं देने वाले सरकारी स्वामित्व के संस्थान को अपने ही कर्मचारियों का इस्तेमाल करना होगा।
इस शर्त के चलते ऐसे संस्थान के जरिए देशव्यापी व्यवस्था की योजना में कर्मचारियों की उपलब्धता अहम हो जाती है। बीपीपीए ने कहा कि संस्थान के कार्यबल, संगठनात्मक क्षमता और हितों के संभावित टकराव पर विचार करना होगा।
इसलिए आईआईएफसी का विकल्प चर्चा में अपने संचालन संबंधी सवाल भी लेकर आता है। बांग्लादेश भर के कार्यालयों को सेवाएं देने वाले संस्थान को अनुबंधित काम पूरा करने के लिए कर्मचारी और प्रबंधन क्षमता चाहिए। बीपीपीए ने वित्त प्रभाग और अन्य पक्षों से सीधे भर्ती के प्रस्ताव के साथ इन जरूरतों पर भी चर्चा करने को कहा।
कर्मचारियों और सेवा प्रदाताओं ने अलग-अलग जोखिम बताए
निजी कंपनियों के जरिए काम पर रखे गए कर्मचारियों ने शिकायत की है कि सेवा प्रदाता उन्हें सरकारी कार्यालयों में काम देने से पहले बड़ी रकम मांगते हैं और फिर हर महीने उनके वेतन का एक हिस्सा काट लेते हैं। उन्होंने सरकारी संस्थाओं से सीधे नियुक्त करने की मांग की है।
इन शिकायतों से पता चलता है कि सेवा प्रदाता को हटाने का विचार कर्मचारियों को क्यों आकर्षित करता है: इससे नौकरी पाने की प्रक्रिया और वेतन संभालने वाले पक्ष में बदलाव हो सकता है। इन शिकायतों में कथित भर्ती भुगतान या मासिक कटौतियों की कोई रकम नहीं बताई गई है।
निजी सेवा प्रदाताओं का तर्क है कि वे प्रशिक्षण और निगरानी देते हैं तथा समस्याएं होने पर कर्मचारियों को जवाबदेह ठहराने का तरीका मुहैया कराते हैं। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में कर्मचारियों की ये जिम्मेदारियां संभालने की क्षमता सरकारी कार्यालयों में नहीं है।
बांग्लादेश आउटसोर्सिंग मैनपावर प्रोवाइडर सोसाइटी के अध्यक्ष अबू तालेब ने कहा कि निजी कंपनियों ने सरकारी संस्थानों में 500,000 से अधिक कर्मचारियों को काम पर रखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सीधे भर्ती करने से अधिकारियों के बीच अव्यवस्था, अनियमितताएं और भ्रष्टाचार बढ़ सकता है तथा सार्वजनिक संस्थाओं की क्षमता पर दबाव पड़ सकता है। कर्मचारियों की संख्या और भविष्य के बारे में उनके अनुमान सेवा प्रदाताओं के प्रतिनिधि के दावे हैं।
दोनों पक्षों की बातों में अलग-अलग जिम्मेदारियों पर जोर है। कर्मचारी नौकरी पाने और उसे बनाए रखने के लिए किए जाने वाले भुगतान पर ध्यान देते हैं। सेवा प्रदाता इस बात पर जोर देते हैं कि कर्मचारियों को प्रशिक्षण कौन देगा, उन पर निगरानी कौन रखेगा और अनुशासन कौन लागू करेगा। नई व्यवस्था में इन जिम्मेदारियों का बंटवारा करना होगा और विभागों को भर्ती का कानूनी रास्ता भी देना होगा।
भर्ती फिर शुरू होने से पहले किन फैसलों की जरूरत
वित्त प्रभाग ने खरीद कानून और नियमों में बदलाव की मांग की है, ताकि विभाग व्यक्तियों से सीधे आउटसोर्सिंग सेवाएं ले सकें। बीपीपीए ने अगले कदम तय करने से पहले वित्त प्रभाग, प्राधिकरण और संबंधित पक्षों के बीच संयुक्त चर्चा का अनुरोध किया है।
तत्काल फैसलों में यह तय करना शामिल है कि जारी निविदाओं का क्या होगा, व्यक्तियों का चयन कैसे किया जाएगा, वे किस तरह के अनुबंध पर हस्ताक्षर करेंगे और उनके काम का प्रबंधन कौन करेगा। व्यापक समीक्षा में निजी सेवा प्रदाताओं की भागीदारी और सेवाएं देने के लिए इस्तेमाल होने वाले किसी भी सरकारी संस्थान की क्षमता भी शामिल है।
अंतिम सहमति, कानूनी संशोधनों या अटकी भर्ती फिर शुरू होने के लिए कोई तारीख नहीं दी गई है। हजारों कर्मचारियों की जरूरत वाले विभाग इसलिए आगे के निर्देशों और ऐसी खरीद प्रक्रिया पर निर्भर हैं जिसे वे लागू कर सकें।
मुख्य समस्या साफ है: बांग्लादेश ने सहयोगी सेवाएं हासिल करने का नया तरीका प्रस्तावित कर दिया, लेकिन उसे लागू करने के लिए जरूरी कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था पूरी नहीं की। जब तक यह व्यवस्था तय नहीं होती, काम की जरूरत वाले संस्थानों में करीब 100,000 प्रस्तावित अस्थायी पद अटके रहेंगे।
मुख्य बातें
- बांग्लादेश की सरकारी संस्थाओं में 16 से 20 वेतन ग्रेड के करीब 100,000 प्रस्तावित अस्थायी पदों पर भर्ती अटकी है।
- लंबित भर्ती में स्वास्थ्य सेवाओं के करीब 20,000 कर्मचारी और लोक निर्माण विभाग के 5,000 कर्मचारी शामिल हैं।
- संशोधित नीति कर्मचारियों के साथ सीधे व्यवस्था की अनुमति देती है, लेकिन वित्त प्रभाग का कहना है कि खरीद कानून में इसके अनुरूप बदलाव जरूरी हैं।
- बीपीपीए ने अनुबंध, भविष्य के कर्मचारी खर्च, निजी क्षेत्र की भागीदारी और संस्थागत क्षमता को लेकर चिंताएं जताई हैं।
- कर्मचारियों ने भर्ती शुल्क और वेतन कटौती के आरोप लगाए हैं, जबकि सेवा प्रदाता प्रशिक्षण और निगरानी में अपनी भूमिका का बचाव करते हैं।
- विभागों को मौजूदा निविदाओं पर अब भी निर्देश चाहिए और भर्ती फिर शुरू करने की कोई तारीख घोषित नहीं की गई है।






