दाइयों की कमी के बीच प्रशिक्षण की राह में नई बाधा
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान को अनुमानित 18,000 और दाइयों की ज़रूरत है। महिलाओं को चिकित्सा प्रशिक्षण में शामिल होने से रोकने वाले तालिबान के निर्देश अब उन बचे-खुचे रास्तों में से एक को बंद करने का खतरा पैदा कर रहे हैं, जिस पर गर्भवती महिलाएं तत्काल निर्भर हैं।
विषय-सूची
- दाइयों की कमी के बीच प्रशिक्षण की राह में नई बाधा
- चिकित्सा प्रशिक्षण पर पाबंदियों का असर
- पाबंदियां कैसे बढ़ती गईं
- स्वास्थ्यकर्मियों ने काम पर जाते समय खतरे की बात कही
- हालिया प्रतिबंध से पहले ही देखभाल बिगड़ रही थी
- अफ़ग़ानिस्तान ने उल्लेखनीय प्रगति की थी
- एक दाई का प्रशिक्षण एक से अधिक मरीजों के काम आता है
- पैसा और दवाइयां इसी संकट का हिस्सा हैं
- पाबंदी वापस लेने की मांग में शिक्षा और इलाज पर ज़ोर
- मुख्य बातें
यह खतरा कक्षा से बाहर तक फैला है। अफ़ग़ानिस्तान के कई हिस्सों में महिलाओं को पुरुष चिकित्सकों से इलाज कराने पर पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। महिला स्वास्थ्यकर्मियों से भी पुरुष रिश्तेदार के साथ यात्रा करने की मांग की जाती है, जिससे उनके लिए अस्पतालों और क्लीनिकों तक पहुंचना मुश्किल होता है। इलाज कराने की कोशिश में गर्भवती मरीजों को भी ऐसी ही शर्तों का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए किसी गंभीर जटिलता से जूझ रही महिला को एक साथ दो बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है: उसका इलाज करने के लिए महिला पेशेवरों की कमी, और उपलब्ध पुरुष पेशेवरों तक पहुंच पर पाबंदियां। नर्सों और दाइयों के प्रशिक्षण पर रोक से इस कमी को दूर करना और कठिन हो सकता है।
प्रतिबंध पर प्रकाशित खबरों में उद्धृत विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक, प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु दर 620 है। इस माप में गर्भावस्था और प्रसव से जुड़ी मौतों की तुलना जीवित जन्म लेने वाले शिशुओं की संख्या से की जाती है। यह ऐसे देश की तस्वीर पेश करता है जहां हालिया पाबंदियों से पहले ही मातृत्व देखभाल पर गंभीर दबाव था।
2023 में प्रकाशित शोध ने दर्ज किया कि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद देखभाल की स्थिति कितनी तेज़ी से बिगड़ी। स्वास्थ्यकर्मियों ने उत्पीड़न, वेतन न मिलने, दवाइयों की कमी और काम पर पहुंचने में मुश्किलों के बारे में बताया। प्रशिक्षण पर लगी पाबंदियां एक लंबे समय तक रहने वाला खतरा बढ़ाती हैं: ऐसी महिलाओं की संख्या घटेगी जो नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की जगह ले सकें या उन समुदायों की सेवा कर सकें जहां पहले से ही कुशल मदद की कमी है।
चिकित्सा प्रशिक्षण पर पाबंदियों का असर
नर्सिंग और दाईगिरी में डिप्लोमा देने वाले चिकित्सा संस्थान तालिबान द्वारा महिलाओं को विश्वविद्यालयों से बाहर किए जाने के बाद भी शिक्षा और रोज़गार का रास्ता बने हुए थे। संस्थानों को महिलाओं की कक्षाएं बंद करने के निर्देश मिले और औपचारिक सार्वजनिक घोषणा से पहले ही छात्राओं को लौटा दिया गया।
स्वीडिश कमेटी फॉर अफ़ग़ानिस्तान, जो स्वास्थ्य सेवाओं और पेशेवर प्रशिक्षण को सहयोग देने वाला एक सहायता संगठन है, ने इस प्रतिबंध को तालिबान के जन स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा घोषित निर्णय बताया। संगठन ने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की।
पाबंदियों से जुड़ी खबरों के साथ दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, स्वास्थ्य डिप्लोमा देने वाले करीब 10 सरकारी और 150 निजी संस्थानों में लगभग 35,000 महिलाओं ने दाखिला लिया था, जबकि करीब 17,000 महिलाओं के प्रभावित होने का अनुमान था। इन आंकड़ों में शामिल लोगों के समूहों का अंतर, गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे प्रशिक्षण का हिसाब और स्थानीय स्तर पर दी गई छूट की सीमा स्पष्ट नहीं है।
खबरों के मुताबिक, कुछ इलाकों में स्थानीय तालिबान अधिकारियों की सहमति से महिलाओं के छोटे समूह निजी तौर पर चलाए जा रहे पाठ्यक्रमों में जाना जारी रखे हुए हैं। इन कक्षाओं से उन छात्राओं को सीमित अवसर मिलता है, जबकि संस्थानों के व्यापक नेटवर्क को महिलाओं को पढ़ाना बंद करने के निर्देश मिले हैं।
पाबंदियां कैसे बढ़ती गईं
चिकित्सा प्रशिक्षण पर प्रतिबंध ऐसे फैसलों की कड़ी के बाद आया है जिन्होंने शिक्षा, रोज़गार और सार्वजनिक जीवन तक पहुंच सीमित कर दी। हर पाबंदी स्वास्थ्य पेशेवर बनने के अलग-अलग चरण को प्रभावित करती है: स्कूल पूरा करने से लेकर पेशे की पढ़ाई करने और काम पर जाने तक।
- अगस्त 2021: तालिबान सत्ता में लौटा, जिसके बाद स्वास्थ्य वित्तपोषण बाधित हुआ और महिलाओं पर पाबंदियां फिर बढ़ीं।
- मार्च 2022: स्कूल फिर खोलने का वादा करने के बाद भी तालिबान ने लड़कियों के लिए माध्यमिक शिक्षा पर रोक जारी रखी।
- दिसंबर 2022: महिलाओं को विश्वविद्यालयों से बाहर कर दिया गया और तालिबान ने गैर-सरकारी तथा मानवीय सहायता संगठनों में महिलाओं के काम करने पर रोक लगा दी।
- 12 जून, 2023: शोधकर्ताओं ने सत्ता परिवर्तन के बाद मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य देखभाल की बिगड़ती स्थिति दर्ज करने वाले निष्कर्ष प्रकाशित किए।
- इसके बाद चिकित्सा संस्थानों पर लगी पाबंदियों ने नर्सिंग और दाईगिरी के उन पाठ्यक्रमों को निशाना बनाया जिनमें महिलाएं पढ़ाई जारी रखे हुए थीं।
विश्वविद्यालयों से बाहर किए जाने से चिकित्सा डिग्रियों तक पहुंच सीमित हुई। डिप्लोमा पाठ्यक्रम रोकने से कार्यबल के एक और ज़रूरी हिस्से पर असर पड़ता है: उन नर्सों और दाइयों पर जो गर्भावस्था, प्रसव और बच्चे के जन्म के बाद के हफ्तों में देखभाल करती हैं।
दिसंबर 2022 में रोज़गार पर पाबंदियां लगने के बाद तालिबान के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा था कि स्वास्थ्य क्षेत्र को छूट दी गई है। शोधकर्ताओं ने दर्ज किया कि यह आश्वासन लिखित नहीं था और इसका अर्थ स्पष्ट नहीं था, जिससे स्वास्थ्य संगठनों को बदलते निर्देशों के बीच काम करना पड़ा।
स्वास्थ्यकर्मियों ने काम पर जाते समय खतरे की बात कही
नैन्सी ग्लास, राबिया जलालज़ई, पॉल स्पीगल और लियोनार्ड रुबेनस्टीन ने इन दबावों का अध्ययन मातृ स्वास्थ्य पर अपने अध्ययन में किया। यह शोध 12 जून, 2023 को Conflict and Health पत्रिका में प्रकाशित हुआ। शोध नवंबर 2021 से अप्रैल 2022 के बीच किया गया और सर्वेक्षण तथा साक्षात्कार फरवरी से अप्रैल 2022 के बीच हुए।
टीम ने काम कर रहे 131 अफ़ग़ान स्वास्थ्यकर्मियों का सर्वेक्षण किया, जिनमें 80% महिलाएं थीं, और 10 विस्तृत साक्षात्कार किए। प्रतिभागियों को पेशेवर और सहायता नेटवर्क के ज़रिए सुविधानुसार चुना गया, यानी इसमें भागीदारी इस बात पर निर्भर थी कि किस तक पहुंचा जा सकता था और कौन शामिल होने को तैयार था। निष्कर्ष इन स्वास्थ्यकर्मियों के अनुभव बताते हैं, न कि देश की स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यापक जनगणना।
महिला स्वास्थ्यकर्मियों में 73.3% ने कहा कि काम पर आते-जाते समय वे हमेशा सुरक्षित महसूस नहीं करती थीं। असुरक्षित यात्रा की बात कहने वालों में 81% ने पुरुष साथी के बिना यात्रा करने पर तालिबान द्वारा उत्पीड़न का हवाला दिया।
मह्रम वह पुरुष रिश्तेदार होता है जो इन पाबंदियों के तहत किसी महिला के साथ जाता है। ऐसे साथी को अनिवार्य करने से स्वास्थ्यकर्मी का काम पर जाना उसकी अपनी उपलब्धता के साथ-साथ किसी दूसरे व्यक्ति की उपलब्धता पर भी निर्भर हो जाता है। शोधकर्ताओं ने उन मामलों का भी ज़िक्र किया जिनमें महिला कर्मचारियों को बिना साथी यात्रा करने पर पीटा गया था।
क्लीनिक को कर्मचारियों की नियमित मौजूदगी चाहिए, खासकर तब जब मरीजों को तत्काल मदद की ज़रूरत हो। यात्रा पर पाबंदियों से कोई योग्य स्वास्थ्यकर्मी अपने मरीजों तक नहीं पहुंच पाती, भले ही वह नौकरी में हो और काम करने को तैयार हो।
हालिया प्रतिबंध से पहले ही देखभाल बिगड़ रही थी
सर्वेक्षण में शामिल करीब हर 10 में से 4 स्वास्थ्यकर्मियों ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता घटने की बात कही। करीब 43.8% ने बताया कि तालिबान के सत्ता में आने से पहले की तुलना में देखभाल की स्थिति बदतर या बहुत बदतर थी, जबकि 30.2% ने कहा कि काम की बदली हुई परिस्थितियों ने गुणवत्तापूर्ण देखभाल देने की उनकी क्षमता को नुकसान पहुंचाया।
स्वास्थ्यकर्मियों ने बीमारियों का बढ़ता दबाव भी बताया। सर्वेक्षण में 26.2% ने प्रसूति और नवजात शिशुओं की जटिलताओं में बढ़ोतरी की बात कही, और 57.1% ने बच्चों में कुपोषण बढ़ने की सूचना दी। प्रसूति संबंधी जटिलताएं गर्भावस्था या प्रसव के दौरान होने वाली गंभीर समस्याएं हैं, जिनमें तेज़ी से इलाज की ज़रूरत पड़ सकती है।
साक्षात्कारों में इन प्रतिशतों के पीछे की व्यावहारिक स्थिति सामने आई। शोधकर्ताओं ने ऐसे केंद्र का वर्णन किया जहां प्रशिक्षित दाई नहीं थी, और कर्मचारियों के उन अनुभवों का ज़िक्र किया जिन्होंने ज़रूरी दवाइयों के बिना मरीजों की मदद करने की कोशिश की। कोई इमारत खुली रह सकती है, लेकिन सही कर्मचारी या इलाज न होने पर वहां बहुत सीमित देखभाल ही मिल सकती है।
गर्भवती महिलाओं के लिए ये समस्याएं एक ही यात्रा के दौरान जुड़ सकती हैं: परिवहन ढूंढना, अनुमति या साथ जाने वाला व्यक्ति तय करना, स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना और फिर यह जानना कि वहां ज़रूरी देखभाल देने वाला कोई है या नहीं। दूरदराज़ के समुदायों पर दबाव खास तौर पर अधिक है, क्योंकि अस्पतालों और अन्य सेवाओं तक पहुंचना कठिन है।
अफ़ग़ानिस्तान ने उल्लेखनीय प्रगति की थी
अफ़ग़ानिस्तान का पिछला स्वास्थ्य रिकॉर्ड बताता है कि अब कितनी बड़ी प्रगति खतरे में है। 2023 के अध्ययन में मातृ मृत्यु दर 2000 में प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर लगभग 1,450 मौतों से घटकर 2017 में 638 होने का आंकड़ा दिया गया, यानी करीब 56% की कमी।
इस प्रगति के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार निवेश, दाइयों की भर्ती और प्रशिक्षण, तथा अफ़ग़ान संस्थानों, अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं और देखभाल देने वाले संगठनों के बीच सहयोग जुड़ा था। अगस्त 2021 में सरकार बदलने से पहले 2,000 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र काम कर रहे थे।
अध्ययन में शिशु मृत्यु दर 2001 में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 88 मौतों से घटकर 2020 में 45 होने का आंकड़ा भी दिया गया। इसी अवधि में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौतें प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 125 से घटकर 58 हो गईं।
देखभाल तक पहुंच में असमानता बनी हुई थी। शोधकर्ताओं द्वारा उद्धृत आंकड़ों के अनुसार, 2018 में एक-तिहाई से अधिक महिलाओं ने कुशल स्वास्थ्यकर्मी की मदद के बिना बच्चे को जन्म दिया। ग्रामीण महिलाओं को गरीबी, परिवहन, इलाज के लिए अनुमति और अपर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ा।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का बाद का अनुमान, प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर 620 मातृ मौतें, और 2017 के लिए अध्ययन में दिया गया 638 का आंकड़ा, दोनों ही भारी बोझ दर्शाते हैं, हालांकि वे अलग-अलग अनुमानों और अवधियों से जुड़े हैं। हालिया पाबंदियां ऐसे स्वास्थ्य तंत्र में लागू हुई हैं जहां सुधार के वर्षों बाद भी प्रशिक्षित कर्मचारियों की ज़रूरत थी।
एक दाई का प्रशिक्षण एक से अधिक मरीजों के काम आता है
स्वीडिश कमेटी फॉर अफ़ग़ानिस्तान ने कहा कि 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने से पहले उसने 450 दाइयों को प्रशिक्षित करने में मदद की थी। उसका काम दिखाता है कि गर्भावस्था और प्रसव के दौरान महिलाओं की सेवा कर सकने वाला कार्यबल तैयार करने के लिए कितने निवेश की ज़रूरत होती है।
दाई गर्भावस्था के दौरान कुशल देखभाल देती है, प्रसव में सहायता करती है, माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल करती है और पहचानती है कि मरीज को कब अतिरिक्त चिकित्सा मदद की ज़रूरत है। इस कार्यबल को बनाए रखने के लिए प्रशिक्षण, निगरानी में अभ्यास और रोज़गार में छात्रों की लगातार आमद ज़रूरी है।
अफ़ग़ान स्वास्थ्य सेवा को सहयोग देने का अनुभव रखने वाले संगठन ने चिकित्सा शिक्षा पर प्रतिबंध को कड़े शब्दों में बताया:
"प्रशिक्षित महिला स्वास्थ्यकर्मियों की नई पीढ़ी के बिना अनगिनत जिंदगियां खतरे में पड़ जाएंगी," संगठन ने चेतावनी दी।
संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि अफ़ग़ानिस्तान को 18,000 और दाइयों की ज़रूरत है, जो पहले से मौजूद कमी को दर्शाता है। नई छात्राओं को योग्यता हासिल करने से रोकने पर दबाव और बढ़ेगा, क्योंकि मौजूदा कर्मचारी नौकरी छोड़ेंगी, कहीं और चली जाएंगी या सेवानिवृत्त होंगी। जिन समुदायों में दाई नहीं है, वहां दाई मिलने की संभावना और घटेगी, जबकि व्यस्त स्वास्थ्य केंद्रों के पास भर्ती के लिए कम लोग होंगे।
पैसा और दवाइयां इसी संकट का हिस्सा हैं
2023 के अध्ययन में स्वास्थ्यकर्मियों ने तालिबान की पाबंदियों के साथ-साथ वित्तीय बाधाओं का भी ज़िक्र किया। सत्ता परिवर्तन के बाद दानदाता वित्तपोषण, प्रतिबंधों और बैंकिंग संबंधी पाबंदियों में बदलाव से उस स्वास्थ्य तंत्र में धन का प्रवाह बाधित हुआ जो बाहरी सहायता पर काफी निर्भर है।
सर्वेक्षण में शामिल 89.8% स्वास्थ्यकर्मियों को अगस्त 2021 के बाद से कुछ वेतन मिला था, लेकिन 57% ने कहा कि उन्हें बकाया वेतन का आधा या उससे कम मिला। अनियमित वेतन से कर्मचारियों के लिए अपने परिवारों का भरण-पोषण करना मुश्किल हुआ और नौकरी जारी रखना कठिन बना।
ज़रूरी दवाइयां भी कम होती जा रही थीं: 46.6% प्रतिभागियों ने उनकी उपलब्धता में गिरावट की बात कही। साक्षात्कार में शामिल लोगों ने ज़रूरी सामान के बिना गंभीर रूप से बीमार मरीजों का इलाज करने की कोशिश से जुड़ी परेशानी बताई।
शोधकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और मानवीय सहायता संगठनों के ज़रिए मिलने वाले वित्तपोषण सहित अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए आपातकालीन अंतरराष्ट्रीय सहायता दर्ज की। उन्होंने उन परियोजनाओं को लेकर अनिश्चितता का भी ज़िक्र किया जो हर महीने मिलने वाली मंज़ूरी और धन पर निर्भर थीं।
शिक्षा फिर शुरू करने से महिलाएं प्रशिक्षण जारी रख सकेंगी। नियमित वेतन, दवाइयां, कामकाजी स्वास्थ्य केंद्र और सुरक्षित यात्रा उस प्रशिक्षण को सुलभ देखभाल में बदलने में मदद करेंगे। मरीजों को इन सभी सेवाओं के एक साथ काम करने की ज़रूरत है।
पाबंदी वापस लेने की मांग में शिक्षा और इलाज पर ज़ोर
स्वीडिश कमेटी फॉर अफ़ग़ानिस्तान ने तालिबान से प्रतिबंध तत्काल वापस लेने और महिला चिकित्सा शिक्षा में निवेश करने की अपील की। संगठन ने स्वास्थ्य सेवा में काम कर रही अफ़ग़ान महिलाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की भी मांग की।
यूरोपीय संघ ने पाबंदियां वापस लेने तथा शिक्षा और बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की। जर्मनी की तत्कालीन विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक ने इस फैसले की निंदा की और अफ़ग़ान महिलाओं को समर्थन देने का वादा किया।
इस फैसले का असर उन छात्राओं पर तुरंत पड़ता है जिनके पाठ्यक्रम बंद हो गए हैं, और उन मरीजों पर लंबे समय तक रहेगा जिनका वे इलाज कर सकती थीं। नर्सिंग या दाईगिरी की योग्यता पूरी करने से रोकी गई महिला रोज़गार का अवसर खोती है; कुशल कर्मचारियों की प्रतीक्षा कर रहे समुदाय एक संभावित देखभालकर्ता खो देते हैं।
अफ़ग़ानिस्तान में मातृ देखभाल का संकट अब पहले से मौजूद कमी के साथ उन पाबंदियों को जोड़ता है जो तय करती हैं कि कौन प्रशिक्षण ले सकता है, कौन यात्रा कर सकता है और किसे इलाज मिल सकता है। चिकित्सा पेशे में आने का रास्ता बहाल करना एक अहम दबाव कम करेगा। क्लीनिक तक की यात्रा में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना, चाहे वे कर्मचारी हों या मरीज, एक और ज़रूरी कदम है।
मुख्य बातें
- महिलाओं के चिकित्सा प्रशिक्षण पर तालिबान की पाबंदियों से भविष्य में नर्सों और दाइयों की उपलब्धता खतरे में है।
- संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि अफ़ग़ानिस्तान को 18,000 और दाइयों की ज़रूरत है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन के उद्धृत अनुमान के मुताबिक, प्रति 100,000 जीवित जन्मों पर मातृ मृत्यु दर 620 है।
- 2023 में प्रकाशित शोध में सर्वेक्षण के स्वास्थ्यकर्मियों के बीच असुरक्षित यात्रा, उत्पीड़न, अनियमित वेतन और ज़रूरी दवाइयों की कमी दर्ज की गई।
- महिलाओं का पुरुष चिकित्सकों से इलाज कराने पर पाबंदी और पुरुष साथी की अनिवार्यता, देखभाल तक पहुंच में और बाधाएं पैदा करती हैं।
- सहायता संगठनों और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों ने प्रशिक्षण पर लगी पाबंदियां वापस लेने की मांग की है।






