12 मामले अभियोजकों और राष्ट्रपति पद को जांच के दायरे में लाते हैं
दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली ने 5 नवंबर, 2026 को पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल के कार्यकाल में कथित तौर पर गढ़े गए अभियोजन मामलों की जांच को अधिकृत करने वाले विधेयक पर बहस शुरू की। प्रस्तावित विशेष अभियोजक 309 लोगों तक की टीम बना सकता है और 200 दिनों तक काम कर सकता है। इसके अधिकार क्षेत्र के 12 मामलों में से आधे राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से जुड़े हैं।
विषय-सूची
- 12 मामले अभियोजकों और राष्ट्रपति पद को जांच के दायरे में लाते हैं
- विधेयक संसद में कैसे पहुंचा
- दोनों पार्टियां उद्देश्य को अलग-अलग क्यों देखती हैं
- ली से कौन-से मामले जुड़े हैं?
- उत्तर कोरिया को भुगतान और प्रांतीय खर्च
- ली के मुकदमे क्यों निलंबित हुए
- क्या आरोप अब भी वापस लिए जा सकते हैं?
- बड़ी टीम, जांच शक्तियों पर विवाद
- जांचकर्ता कौन चुनेगा?
- मुख्य बातें
विपक्षी पीपल पावर पार्टी (PPP) की आपत्तियों के बीच संसद अध्यक्ष चो जोंग-सिक ने पूर्ण सत्र में विधेयक पेश किया। PPP ने शाम करीब 4 बजे फिलिबस्टर शुरू कर दिया। संसद में बहुमत रखने वाली सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक पार्टी (DP) ने 24 घंटे बाद इस देरी की रणनीति खत्म करने और शुक्रवार, 6 नवंबर को मतदान कराने की योजना बनाई।
मुख्य विवाद यह है कि क्या अभियोजकों के कदाचार की जांच राष्ट्रपति के खिलाफ आपराधिक मामलों को खत्म करने का रास्ता भी खोल सकती है। DP ने विशेष अभियोजक को अभियोग रद्द करने की स्पष्ट अनुमति देने वाला प्रावधान हटा दिया, लेकिन संसदीय समिति की समीक्षा में आपराधिक प्रक्रिया कानून के तहत एक संभावित रास्ता अब भी मौजूद पाया गया।
विधेयक में आरोपों की जांच की जाएगी कि अभियोजकों ने राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने के लिए सबूत गढ़े, झूठी गवाही दिलवाई या अन्य तरीकों से अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। इसके दायरे में राष्ट्रीय खुफिया सेवा और बोर्ड ऑफ ऑडिट एंड इंस्पेक्शन के कथित दुरुपयोग भी शामिल हैं। यह सरकारी निकाय सार्वजनिक खर्च और प्रशासन की जांच करता है।
ली के लिए दांव पर संपत्ति विकास, फुटबॉल क्लब को दान, उत्तर कोरिया को भुगतान और प्रांतीय खर्च से जुड़े मामले हैं। अभियोजकों के लिए प्रस्तावित जांच का अर्थ होगा कि ध्यान इस बात पर जाएगा कि उन्होंने ये मामले कैसे तैयार किए और आगे बढ़ाए। मूल आपराधिक आरोपों और जांच में कदाचार के आरोपों, दोनों पर विवाद है।
विधेयक संसद में कैसे पहुंचा
डेमोक्रेटिक पार्टी ने पहली बार अप्रैल में यह प्रस्ताव पेश किया था। उपसमिति और नेशनल असेंबली की कानून एवं न्यायपालिका समिति ने 4 नवंबर को इसे मंजूरी दी, जिससे अगले दिन पूरे सदन में बहस का रास्ता साफ हुआ।
PPP के फिलिबस्टर से अपेक्षित मतदान गुरुवार से टलकर शुक्रवार दोपहर तक पहुंच गया। फिलिबस्टर के जरिए सांसद किसी फैसले को धीमा करने के लिए बहस लंबी खींच सकते हैं। DP ने कहा कि वह 24 घंटे बाद इस रणनीति को खत्म करने के लिए संबंधित संसदीय नियमों का इस्तेमाल करेगी।
विधेयक की प्रगति की प्रमुख तारीखें:
- अप्रैल 2026: डेमोक्रेटिक पार्टी ने विशेष अभियोजक का प्रस्ताव पेश किया।
- 4 नवंबर: उपसमिति और कानून एवं न्यायपालिका समिति ने विधेयक को मंजूरी दी।
- 5 नवंबर: अध्यक्ष चो जोंग-सिक ने इसे पूरी असेंबली के सामने रखा और PPP ने शाम करीब 4 बजे फिलिबस्टर शुरू किया।
- 6 नवंबर: DP ने फिलिबस्टर खत्म कर दोपहर में मतदान कराने की योजना बनाई।
PPP ने बड़े पैमाने पर खुले मैदान में विरोध प्रदर्शन की भी योजना बनाई। यहां वर्णित समय तक संसद से विधेयक पारित होने की घोषणा नहीं हुई थी और प्रस्तावित जांच शुरू होने की कोई तारीख नहीं बताई गई थी।
दोनों पार्टियां उद्देश्य को अलग-अलग क्यों देखती हैं
राष्ट्रपति कार्यालय ने इस प्रस्ताव को उन अभियोजकों की जांच का तरीका बताया, जिन्हें अन्यथा अपने ही सहकर्मियों के आचरण की जांच करनी पड़ सकती है। राजनीतिक मामलों के वरिष्ठ राष्ट्रपति सचिव होंग इक-प्यो ने संसदीय बजट समिति की बैठक में यह पक्ष रखा:
"विधेयक का उद्देश्य विशेष अभियोजक से उन आरोपों की जांच कराना है कि पिछली सरकार के दौरान अभियोजकों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया और राजनीतिक मकसद से जांच की। इसकी वजह यह है कि अभियोजकों के लिए अपने ही सहकर्मियों की जांच करना कठिन है," उन्होंने कहा।
PPP का तर्क है कि इस जांच से ली के खिलाफ आपराधिक आरोप हटाने में मदद मिलेगी और मामलों की सुनवाई कर रही अदालतों पर दबाव पड़ेगा। पार्टी के संसदीय दल के नेता जोंग जॉम-सिक ने उसी दिन पहले पार्टी की बैठक में यह आपत्ति जताई:
"अभियोग रद्द करने वाले विशेष अभियोजक का विधेयक संवैधानिक इतिहास में संसद के खिलाफ सबसे खराब असंवैधानिक तख्तापलट है," उन्होंने कहा।
"यह मुकदमों में दखल देने वाली सबसे खराब विशेष अभियोजक जांच है, जो न्यायपालिका पर बरी करने का फैसला देने का दबाव बनाती है, जबकि पहले ही तय कर लिया गया है कि ज्यादातर विचाराधीन मामले गढ़े हुए अभियोग हैं," उन्होंने कहा।
यह मतभेद सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि अभियोजकों की जांच होनी चाहिए या नहीं। सवाल यह भी है कि उनकी जांच कौन करेगा, उस जांचकर्ता के पास कौन-सी शक्तियां होंगी और निष्कर्ष उस राष्ट्रपति से जुड़े अभियोजनों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं जो विशेष अभियोजक की नियुक्ति करेगा।
ली से कौन-से मामले जुड़े हैं?
विधेयक के 12 में से छह मामले ली से संबंधित हैं, यानी प्रस्तावित जांच के मामलों की संख्या का आधा। ये मुख्य रूप से उनके राष्ट्रपति बनने से पहले सोंगनाम के मेयर और ग्योंगगी प्रांत के गवर्नर रहने के समय से जुड़े हैं।
इन मामलों में डेजांग-दोंग, विरी और बैख्योन-दोंग विकास परियोजनाओं से जुड़े आरोप; विकास परियोजनाओं के बारे में कथित झूठे बयान; सोंगनाम एफसी से जुड़े कथित तृतीय-पक्ष रिश्वत मामले; स्सांगबांगवूल समूह के जरिए उत्तर कोरिया को कथित भुगतान; किम जिन-सोंग से जुड़े कथित रूप से झूठी गवाही दिलवाने के मामले; और ग्योंगगी प्रांत के कॉरपोरेट क्रेडिट कार्ड के कथित दुरुपयोग के आरोप शामिल हैं।
विकास परियोजनाओं से जुड़े मामलों में अभियोजकों ने आरोप लगाया कि सोंगनाम के मेयर रहते हुए ली ने निजी डेवलपरों को अनुचित लाभ दिए। बैख्योन-दोंग मामले के अभियोग में आरोप लगाया गया कि उनसे सोंगनाम डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को 20 अरब वॉन का नुकसान हुआ। यह शहर की सार्वजनिक विकास कंपनी है।
सोंगनाम एफसी का मामला कथित तौर पर हुए एक अलग लेन-देन से जुड़ा है। अभियोजकों ने ली पर कंपनियों को प्रशासनिक लाभ देने के बदले फुटबॉल क्लब को 13.35 अरब वॉन का दान दिलवाने का आरोप लगाया। कानूनी सवाल यह है कि क्या आधिकारिक फैसलों को अनुचित तरीके से किसी तीसरे पक्ष, इस मामले में क्लब, को दिए गए धन से जोड़ा गया।
प्रस्तावित विशेष अभियोजक जांच करेगा कि इन मामलों को तैयार करते समय अभियोजकों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग तो नहीं किया। इससे मौजूदा आरोपों के केंद्र में मौजूद वित्तीय और प्रशासनिक फैसलों के साथ-साथ जांचकर्ताओं का आचरण भी जांच के दायरे में आएगा।
उत्तर कोरिया को भुगतान और प्रांतीय खर्च
स्सांगबांगवूल मामले में कंपनी के पूर्व अध्यक्ष किम सोंग-ताए पर उत्तर कोरिया को 8 मिलियन डॉलर भेजने का आरोप है। अभियोजकों ने कथित भुगतानों को दो हिस्सों में बांटा: ग्योंगगी के स्मार्ट फार्म प्रोजेक्ट के लिए 5 मिलियन डॉलर और प्रांत के गवर्नर रहते हुए ली की प्रस्तावित यात्रा से जुड़े 3 मिलियन डॉलर।
क्रेडिट कार्ड मामले में जुलाई 2018 से अक्टूबर 2021 के बीच प्रांतीय संसाधनों के कथित निजी इस्तेमाल की जांच है। अभियोजकों ने ली पर सरकारी वाहन का निजी इस्तेमाल करने और भोजन तथा लॉन्ड्री जैसे खर्चों का भुगतान प्रांतीय बजट से करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, इससे 106.53 मिलियन वॉन का गबन हुआ।
ये आरोप सार्वजनिक अधिकारों के अलग-अलग इस्तेमाल से जुड़े हैं: विकास संबंधी फैसले, कारोबारियों के साथ संबंध, विदेशों में भुगतान और रोजमर्रा के सरकारी खर्च। विधेयक इन सभी को एक ऐसी जांच के दायरे में लाता है जिसका ध्यान जांचकर्ताओं के तरीकों और मंशा पर है।
ली के मुकदमे क्यों निलंबित हुए
जून 2025 में राष्ट्रपति बनने के बाद ली के आपराधिक मुकदमे निलंबित कर दिए गए। दक्षिण कोरिया के संविधान का अनुच्छेद 84 राष्ट्रपति को पद पर रहते हुए आपराधिक अभियोजन से छूट देता है, सिवाय विद्रोह या देशद्रोह के मामलों में। मुकदमों का निलंबन इसी संवैधानिक संरक्षण के चलते हुआ।
उनकी अचानक हुए चुनाव में जीत दिसंबर 2024 में यून की ओर से मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश और उसके बाद उन्हें पद से हटाए जाने से पैदा हुए राजनीतिक संकट के बाद हुई। ली ने राष्ट्रपति पद संभाला तो डेमोक्रेटिक पार्टी के पास नेशनल असेंबली का नियंत्रण भी था। इससे उनकी पार्टी को कानून आगे बढ़ाने के लिए जरूरी वोट मिले, जबकि उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाहियां रुकी हुई थीं।
झूठी गवाही दिलवाने का मामला उन मुकदमों से अलग प्रक्रियात्मक चरण में पहुंच चुका था जिनमें पहले फैसले का इंतजार था। सुनवाई के बाद ली को बरी कर दिया गया था और मामला अपील के चरण में था। अपील में उच्च अदालत से पहले के फैसले की समीक्षा करने को कहा जाता है।
आरोप वापस लेने के विवाद में यह अंतर अहम है। जिस मामले में अभी पहला फैसला नहीं आया है, उसकी कानूनी स्थिति उस मामले से अलग होती है जिसमें अदालत बरी कर चुकी हो और अपील पर फैसला बाकी हो।
क्या आरोप अब भी वापस लिए जा सकते हैं?
DP ने शुरुआत में विशेष अभियोजक को अभियोग रद्द करने का स्पष्ट अधिकार देने की मांग की थी। पार्टी के भीतर और बाहर से आलोचना के बाद उसने यह प्रावधान हटा दिया। अभियोग वह औपचारिक आरोप है जिसके जरिए आपराधिक मामला अदालत में जाता है।
इसके बावजूद कानून एवं न्यायपालिका समिति की समीक्षा में कहा गया कि आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम की ऐसी व्याख्या की जा सकती है जिससे अदालत का पहला फैसला आने से पहले अभियोजन वापस लेने की अनुमति मिल जाए। समीक्षा में यह भी सिफारिश की गई कि जिन मामलों में राष्ट्रपति आरोपी हों, उनमें इस अधिकार को स्पष्ट रूप से बाहर रखने पर विचार किया जाए।
PPP ने एक दूसरी संभावना भी जताई: विशेष अभियोजक के निष्कर्षों का इस्तेमाल न्याय मंत्रालय या अभियोजन पक्ष आरोप हटाने के लिए कर सकता है। इसलिए उसकी आपत्ति विशेष अभियोजक के सीधे अधिकारों के साथ-साथ उन फैसलों पर भी है जो जांच के नतीजे मिलने के बाद अन्य प्राधिकारी कर सकते हैं।
अभियोग रद्द करने का स्पष्ट प्रावधान हटाने से विधेयक की भाषा का दायरा सीमित हुआ, लेकिन इसके बाकी प्रावधान मौजूदा कानून के साथ कैसे लागू होंगे, इस पर विवाद बना हुआ है। आरोपियों, अभियोजकों और अदालतों के लिए व्यावहारिक सवाल यह है कि निष्कर्षों पर कौन-सा प्राधिकारी कार्रवाई कर सकता है और मामले के किस चरण में।
बड़ी टीम, जांच शक्तियों पर विवाद
विशेष अभियोजक की टीम में 309 लोग तक हो सकते हैं। इसमें नियमित पदों से अस्थायी तौर पर नियुक्त 20 अभियोजक और 210 सरकारी कर्मचारी शामिल होंगे। इन दोनों समूहों में कुल 230 पद होंगे, यानी अधिकतम टीम का करीब तीन-चौथाई।
न्याय मंत्रालय ने अभियोजकों की नियुक्ति पर सवाल उठाया, क्योंकि आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम में संशोधनों ने उनकी जांच करने की शक्तियां हटा दी थीं। विधेयक में एक पूरक प्रावधान है जो नियुक्त अभियोजकों को पुराने कानून के तहत जांच और पर्यवेक्षण की शक्तियां इस्तेमाल करने की अनुमति देता है।
यह प्रावधान व्यापक बदलावों के बावजूद विशेष जांच को वे शक्तियां देगा जिनका इस्तेमाल पहले अभियोजक करते थे। इसलिए कर्मचारियों की नियुक्ति पर विवाद कानूनी अधिकारों को लेकर भी है: सबूत कौन जुटा सकता है, जांच का निर्देश कौन दे सकता है और दूसरों की निगरानी कौन कर सकता है।
काम करने की अधिकतम अवधि 200 दिन होगी: तैयारी के लिए 20 दिन और जांच के लिए अधिकतम 180 दिन। कुल अवधि का दसवां हिस्सा तैयारी में लगेगा। इस समयसीमा में टीम को कर्मचारियों की व्यवस्था करने और 12 मामलों की जांच करनी होगी, हालांकि उनके विषय और प्रक्रियात्मक इतिहास में काफी अंतर है।
जांचकर्ता कौन चुनेगा?
ली, डेमोक्रेटिक पार्टी, पीपल पावर पार्टी और छोटी रीबिल्डिंग कोरिया पार्टी की ओर से सुझाए गए तीन उम्मीदवारों में से विशेष अभियोजक चुनेंगे। इस प्रक्रिया में सत्तारूढ़ और विपक्षी, दोनों पार्टियां शामिल होंगी, जबकि अंतिम चयन राष्ट्रपति करेंगे।
इस व्यवस्था में ली विवाद के केंद्र में दो भूमिकाएं निभाएंगे: जांचकर्ता चुनने की जिम्मेदारी वाला राष्ट्रपति और उन छह मामलों के आरोपी जिनकी जांच वही अधिकारी करेगा। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया भी जांच की स्वतंत्रता पर बहस का हिस्सा है, साथ ही जांचकर्ता के कानूनी अधिकार भी।
बाकी छह मामले ज्यादातर पूर्व राष्ट्रपति मून जे-इन के प्रशासन के दौरान की घटनाओं से जुड़े हैं। इनमें मून के पूर्व दामाद को नौकरी देने, पश्चिमी सागर में एक दक्षिण कोरियाई अधिकारी की हत्या और मून के राष्ट्रपति रहने के दौरान उत्तर कोरियाई मछुआरों को वापस भेजने से जुड़े आरोप शामिल हैं।
इस तरह विधेयक ली के अभियोजन से आगे बढ़कर पिछली डेमोक्रेटिक सरकार से जुड़े फैसलों और लोगों की जांच तक पहुंचेगा। अभियोजन सेवा के अलावा इसमें खुफिया और लेखा-परीक्षा प्राधिकरण भी जांच के दायरे में आएंगे।
अगर विधेयक पारित होकर नियुक्ति होती है, तो ली के पद संभालने के बाद यह सातवीं स्वतंत्र विशेष अभियोजक जांच होगी। इससे पहले की जांचों में यून की मार्शल लॉ लागू करने की नाकाम कोशिश, उनकी पत्नी से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और जून के स्थानीय चुनावों में मतपत्रों की कमी जैसे मामले शामिल थे।
तत्काल अगला कदम 6 नवंबर को प्रस्तावित मतदान था। व्यापक विवाद इस बात पर केंद्रित था कि क्या अंतिम कानून जांचकर्ताओं को स्पष्ट अधिकार देगा और साथ ही राष्ट्रपति के खिलाफ आरोप वापस लेने के विवादित रास्तों को स्पष्ट करेगा।
मुख्य बातें
- नेशनल असेंबली ने 5 नवंबर, 2026 को विशेष अभियोजक विधेयक पर बहस शुरू की। PPP के फिलिबस्टर के बाद 6 नवंबर को मतदान की योजना थी।
- प्रस्तावित जांच में 12 मामले शामिल हैं: छह राष्ट्रपति ली जे-म्युंग से और छह ज्यादातर मून जे-इन प्रशासन से जुड़े हैं।
- DP ने अभियोग रद्द करने का स्पष्ट अधिकार हटा दिया, लेकिन समिति की समीक्षा में आपराधिक प्रक्रिया अधिनियम के तहत एक संभावित रास्ता सामने आया।
- ली DP, PPP और रीबिल्डिंग कोरिया पार्टी की ओर से सुझाए गए तीन उम्मीदवारों में से विशेष अभियोजक चुनेंगे।
- टीम में 309 लोग तक हो सकते हैं और तैयारी के 20 दिनों सहित वह 200 दिन काम कर सकती है।
- राष्ट्रपति कार्यालय का कहना है कि जांच अभियोजन पक्ष के दुरुपयोग की पड़ताल करेगी; PPP का कहना है कि इससे ली के आपराधिक मामले खत्म करने में मदद मिल सकती है।






