सेवानिवृत्ति से पहले लगभग सात साल का कार्यकाल पाने वाले नए अदालत प्रमुख
मनीला, फिलीपींस: राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने सुप्रीम कोर्ट के एसोसिएट जस्टिस रोडिल वी. ज़लामेदा को फिलीपींस का 28वां मुख्य न्यायाधीश चुना है। ज़लामेदा पहले मंडलुयोंग के अभियोजक रह चुके हैं। उनके फैसलों में पूर्व प्रथम महिला इमेल्डा मार्कोस को बरी करना और रेड-टैगिंग की धमकियों का सामना कर रहे लोगों की सुरक्षा करने वाला फैसला शामिल है।
विषय-सूची
- सेवानिवृत्ति से पहले लगभग सात साल का कार्यकाल पाने वाले नए अदालत प्रमुख
- पांच नाम, जिनमें दो अधिक वरिष्ठ न्यायाधीश भी शामिल
- कालूकान के छात्र से अभियोजक और न्यायाधीश तक
- नियुक्ति तक पहुंचाने वाले अहम पड़ाव
- इमेल्डा मार्कोस को बरी करने वाले फैसले पर नजर
- रेड-टैगिंग से जुड़ी धमकियों पर फैसला
- सरकारी धन और संवैधानिक विवादों पर उनके मत
- जनता पर असर से आंकी जाने वाली सुधार योजना
- गेसमुंडो की सेवानिवृत्ति से क्या बदलेगा
- मुख्य बिंदु
राष्ट्रपति के संचार कार्यालय के सचिव लिनो कायेतानो ने गुरुवार, 5 नवंबर को इस चयन की घोषणा की। ज़लामेदा मुख्य न्यायाधीश अलेक्जेंडर गेसमुंडो की जगह लेंगे, जो 6 नवंबर को 70 वर्ष की अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु पूरी कर रहे हैं।
63 वर्षीय ज़लामेदा का जन्म 2 अगस्त 1963 को हुआ था। उनकी नियुक्ति से उन्हें अगस्त 2033 तक, यानी न्यायपालिका का नेतृत्व करने के लिए लगभग सात साल का संभावित कार्यकाल मिल सकता है। घोषणा में उनके शपथ ग्रहण की तारीख नहीं बताई गई।
मुख्य न्यायाधीश के रूप में यह मार्कोस का पहला चयन है। ज़लामेदा ऐसे संस्थान के प्रमुख होंगे जो अहम संवैधानिक विवादों पर फैसला करता है, आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि की समीक्षा करता है और देशभर की अदालतों के प्रशासन की निगरानी करता है।
कायेतानो ने इस चयन को न्याय व्यवस्था के कई स्तरों पर ज़लामेदा के अनुभव पर आधारित फैसला बताया। राष्ट्रपति भवन में हुई प्रेस वार्ता में संचार सचिव ने राष्ट्रपति को सौंपी गई जिम्मेदारी का वर्णन किया:
मुख्य न्यायाधीश का चयन संविधान के तहत राष्ट्रपति को सौंपी गई सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है।
पांच नाम, जिनमें दो अधिक वरिष्ठ न्यायाधीश भी शामिल
ज़लामेदा को न्यायिक और बार परिषद (ज्यूडिशियल एंड बार काउंसिल) की ओर से अनुशंसित पांच उम्मीदवारों में से चुना गया। यह परिषद न्यायिक नियुक्तियों के उम्मीदवारों की जांच करती है। अन्य उम्मीदवार वरिष्ठ एसोसिएट जस्टिस मार्विक लियोनेन और एसोसिएट जस्टिस अल्फ्रेडो बेंजामिन कागियोआ, जापर दिमाम्पाओ तथा जोस मिदास मार्केज़ थे।
पूर्व राष्ट्रपति बेनिग्नो एक्विनो तृतीय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त लियोनेन और कागियोआ, दोनों ज़लामेदा से अधिक वरिष्ठ थे। पूर्व राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते द्वारा नियुक्त छांटे गए न्यायाधीशों में ज़लामेदा सबसे वरिष्ठ थे।
दुतेर्ते ने 6 अगस्त 2019 को ज़लामेदा को सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया था। मुख्य न्यायाधीश चुने जाने से पहले वे अदालत में सीट नंबर 7 पर थे।
कायेतानो ने कहा कि न्यायिक संस्थानों में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए अनुभवी और सिद्धांतनिष्ठ नेतृत्व कितना अहम है, इस पर मार्कोस ने विचार किया था। नियुक्ति की आलोचना के जवाब में राष्ट्रपति भवन ने कई राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में ज़लामेदा की सेवाओं का भी उल्लेख किया।
कालूकान के छात्र से अभियोजक और न्यायाधीश तक
ज़लामेदा का जन्म कालूकान शहर में हुआ और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ द ईस्ट में पढ़ाई की। उन्होंने 1979 में इसके कालूकान परिसर से हाई स्कूल पूरा किया और 1983 में मनीला परिसर से राजनीति विज्ञान की डिग्री हासिल की।
एटेनियो दे मनीला यूनिवर्सिटी में उन्होंने शैक्षणिक छात्रवृत्ति पर कानून की पढ़ाई की, डीन की सूची में जगह बनाई और छात्र कानूनी प्रकाशनों के लिए काम किया। उन्होंने 1987 में कानून की डिग्री पूरी की और 1988 में बार परीक्षा पास की।
उनका करियर माकाती क्षेत्रीय ट्रायल कोर्ट में शाखा क्लर्क के रूप में शुरू हुआ। शाखा क्लर्क किसी खास अदालत शाखा के कामकाज और रिकॉर्ड संभालने में मदद करता है। इससे ज़लामेदा को न्यायिक व्यवस्था में मामलों की प्रक्रिया का शुरुआती अनुभव मिला।
उन्होंने 1990 से 1995 तक निजी प्रैक्टिस की, फिर सरकारी सेवा में लौटकर सरकारी अभियोजक बने। 2002 में, 39 वर्ष की उम्र में, वे मंडलुयोंग शहर के अभियोजक बने और 2008 तक इस पद पर रहे।
मंडलुयोंग शहर सरकार ने सार्वजनिक सेवा के लिए 2010 में उन्हें उलिरांग मंडालेनो सम्मान दिया। उनके पेशेवर अनुभव में निजी कानूनी काम, अभियोजन और न्यायिक कार्य शामिल हैं, जिनमें कानूनी विवाद को अलग-अलग पक्षों से देखा जाता है।
नियुक्ति तक पहुंचाने वाले अहम पड़ाव
ज़लामेदा सितंबर 2008 में अपील न्यायालय में शामिल हुए और वहां 11 साल तक सेवा दी। बाद में उन्होंने इसकी 17वीं डिवीजन की अध्यक्षता की। अपील न्यायालय निचली अदालतों और अन्य निकायों के फैसलों की समीक्षा करता है और देखता है कि कानून का सही इस्तेमाल हुआ या नहीं।
अपील न्यायालय में लंबे समय तक काम करने के बाद 2019 में वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। न्यायाधीश पद के उम्मीदवारों के लिए अदालत की ओर से शुरू की गई लिखित परीक्षा देने वाले वे पहले आवेदक भी थे।
न्याय व्यवस्था में उनके आगे बढ़ने की प्रमुख तारीखें ये हैं:
- 1987 और 1988: एटेनियो से कानून की डिग्री पूरी की और अगले वर्ष बार परीक्षा पास की।
- 1995: सरकारी अभियोजक के रूप में सरकारी सेवा में लौटे।
- 2002: मंडलुयोंग शहर के अभियोजक बने।
- सितंबर 2008: अपील न्यायालय में शामिल हुए।
- 6 अगस्त 2019: दुतेर्ते ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त किया।
- 5 नवंबर: गेसमुंडो के उत्तराधिकारी के रूप में मार्कोस की पसंद घोषित किए गए।
इमेल्डा मार्कोस को बरी करने वाले फैसले पर नजर
ज़लामेदा ने सुप्रीम कोर्ट की प्रथम डिवीजन के उस फैसले का लेखन किया था, जिसमें राष्ट्रपति की मां इमेल्डा मार्कोस को स्विस फाउंडेशनों से जुड़े भ्रष्टाचार के सात मामलों में बरी किया गया। इस फैसले ने नवंबर 2018 के सैंडिगनबायन न्यायालय के फैसले को पलट दिया था, जिसमें कुल 77 साल तक की जेल की सजा सुनाई गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष उचित संदेह से परे अपराध साबित करने में विफल रहा। आपराधिक मामले में इस मानक के तहत ऐसा ठोस सबूत होना चाहिए जिससे आरोपी के अपराध करने को लेकर कोई उचित संदेह न बचे। सैंडिगनबायन वह अदालत है जो सरकारी अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई करती है।
प्रथम डिवीजन के अन्य सदस्यों ने भी बरी किए जाने के फैसले का समर्थन किया। फिर भी फैसले के लेखक के रूप में ज़लामेदा की भूमिका जांच का अहम विषय बन गई है, क्योंकि उन्हें चुनने वाले राष्ट्रपति बरी हुई पूर्व प्रथम महिला के बेटे हैं।
नियुक्ति की आलोचना पर सवाल पूछे जाने पर कायेतानो ने फिदेल वी. रामोस, ग्लोरिया मैकापागल-अरोयो, एक्विनो और दुतेर्ते समेत लगातार कई प्रशासनों के दौरान ज़लामेदा के अनुभव का हवाला दिया। राष्ट्रपति भवन ने उनके पेशेवर रिकॉर्ड और निष्पक्षता पर अपने भरोसे को रेखांकित किया।
कायेतानो ने आने वाले मुख्य न्यायाधीश से राष्ट्रपति की अपेक्षाएं भी बताईं:
राष्ट्रपति को विश्वास है कि जस्टिस ज़लामेदा मुख्य न्यायाधीश की जिम्मेदारियां ईमानदारी, निष्पक्षता और कानून के शासन के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के साथ निभाएंगे।
रेड-टैगिंग से जुड़ी धमकियों पर फैसला
ज़लामेदा ने 2024 में डेदुरो बनाम मेजर जनरल विनोया मामले का फैसला भी लिखा था। यह फैसला रेड-टैगिंग और जीवन, स्वतंत्रता या सुरक्षा के लिए खतरे का सामना कर रहे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा था।
रेड-टैगिंग का मतलब किसी व्यक्ति या संगठन को कम्युनिस्ट विद्रोहियों से जुड़ा बताना है। ऐसे आरोप व्यक्ति को खतरे में डाल सकते हैं, जिनमें सशस्त्र समूहों या सरकारी एजेंटों की धमकियां शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेड-टैगिंग, बदनाम करना, ठप्पा लगाना और संबंधों के आधार पर दोषी ठहराना किसी व्यक्ति के अधिकारों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं और रिट ऑफ एम्पारो जारी करने का आधार बन सकते हैं। एम्पारो की कार्यवाही ऐसे खतरों का सामना कर रहे व्यक्ति को अदालत से सुरक्षा मांगने का रास्ता देती है।
कम्युनिस्ट संबंधों के आरोप झेल रहे लोगों के लिए यह फैसला अदालत से सुरक्षा के कदम उठाने की मांग करने का कानूनी रास्ता देता है। व्यक्तिगत सुरक्षा पर इसका जोर इसे ज़लामेदा के लिखे सबसे महत्वपूर्ण अधिकार-संबंधी फैसलों में शामिल करता है।
सरकारी धन और संवैधानिक विवादों पर उनके मत
ज़लामेदा के रिकॉर्ड में अनियोजित विनियोजन को लेकर सहकर्मियों से असहमति भी शामिल है। ये बजट प्रावधान हैं जिनके तहत धन जारी करना कुछ शर्तों, जैसे अतिरिक्त फंड उपलब्ध होने, पर निर्भर करता है; इनके लिए सामान्य खर्च अधिकार पर्याप्त नहीं होता।
अपने असहमति मत में उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस को राष्ट्रीय व्यय कार्यक्रम में शामिल न किए गए नए कार्यक्रम, गतिविधियां और परियोजनाएं प्रस्तावित करने से रोका नहीं गया था। राष्ट्रीय व्यय कार्यक्रम कार्यपालिका की ओर से प्रस्तावित राष्ट्रीय बजट है। इस विवाद का संबंध इस बात से है कि सरकार की खर्च योजनाओं को बदलने की विधायकों की गुंजाइश कितनी है।
फिलीपीन हेल्थ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन के 60 अरब पेसो के धन से जुड़े मुकदमे में ज़लामेदा ने माना कि राष्ट्रीय खजाने में धन का हस्तांतरण असंवैधानिक था। उनका यह भी मत था कि सरकार को फिर भी सद्भावना से काम करने वाला माना जा सकता है। यह एक अलग सवाल से जुड़ा है: क्या हस्तांतरण को मंजूरी देते समय अधिकारियों को लगा था कि वे कानून के मुताबिक काम कर रहे हैं।
ज़लामेदा ने उपराष्ट्रपति सारा दुतेर्ते के खिलाफ 2025 की महाभियोग शिकायत को असंवैधानिक घोषित करने वाले सर्वसम्मत फैसले का समर्थन किया। उन्होंने उस सर्वसम्मत फैसले का भी समर्थन किया जिसमें कहा गया कि फिलीपींस अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के साथ सहयोग करने के लिए बाध्य है।
उनके अन्य मतों में सीनेटर रोनाल्ड डेला रोजा के आईसीसी वारंट के खिलाफ अस्थायी रोक के अनुरोध को खारिज करने, समलैंगिक विवाह से जुड़ी याचिका खारिज करने और कांग्रेस को राजनीतिक वंशवाद के खिलाफ कानून बनाने का निर्देश देने वाले फैसले का समर्थन शामिल है।
जनता पर असर से आंकी जाने वाली सुधार योजना
मुख्य न्यायाधीश पद के लिए सार्वजनिक साक्षात्कार में ज़लामेदा ने न्यायिक सुधार का अपना दृष्टिकोण रखा। उन्होंने सुधारों को चरणों में लागू करने का प्रस्ताव दिया, जिसकी शुरुआत संस्थागत प्राथमिकताएं तय करने और मापे जा सकने वाले मानदंड निर्धारित करने से होगी।
उन्होंने कहा कि इन बदलावों का जनता पर पड़ने वाला असर देखकर सफलता का आकलन होना चाहिए। व्यावहारिक रूप से, कोई मानदंड संस्थान को एक तय परिणाम देता है, जिससे वह व्यापक सुधार के वादे पर निर्भर रहने के बजाय अपनी प्रगति जांच सकता है।
उनके प्रस्तावित दृष्टिकोण में अदालतों का इस्तेमाल करने वाले लोगों के अनुभव को सफलता का पैमाना बनाया गया है। चयन प्रक्रिया में पेश किए गए विवरणों में सुधारों को चरणबद्ध करने और नतीजों का आकलन करने पर जोर था, न कि किसी पूरी हो चुकी योजना की घोषणा पर।
राष्ट्रपति भवन ने ज़लामेदा को योग्य मानने का कारण बताते हुए उनके पिछले पदों को उस संस्थान की समझ से जोड़ा, जिसका वे नेतृत्व करेंगे:
हमारी न्याय व्यवस्था के अलग-अलग स्तरों पर उनके अनुभव से उन्हें अदालतों और उनकी सेवा पाने वाले लोगों की व्यापक समझ मिली है।
गेसमुंडो की सेवानिवृत्ति से क्या बदलेगा
गेसमुंडो के 70वें जन्मदिन पर सेवानिवृत्त होने से नेतृत्व का बदलाव शुरू होगा। 1987 के संविधान के अनुच्छेद आठ, धारा 11 में न्यायाधीशों के लिए 70 वर्ष की अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु तय की गई है। गणराज्य अधिनियम 910 न्यायपालिका के सदस्यों के लिए सेवानिवृत्ति लाभ और पेंशन का प्रावधान करता है।
ज़लामेदा का 70वां जन्मदिन 2 अगस्त 2033 को होगा। लगभग सात साल के संभावित कार्यकाल से उन्हें अपने प्रस्तावित चरणबद्ध सुधार लागू करने और उनके नतीजों का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय मिल सकता है।
मुख्य न्यायाधीश के रूप में वे सुप्रीम कोर्ट का नेतृत्व करेंगे और न्यायिक एवं बार परिषद की अध्यक्षता करेंगे। परिषद की भूमिका इस पद को भावी न्यायिक उम्मीदवारों की जांच से सीधे जोड़ती है, जबकि उनकी प्रशासनिक जिम्मेदारियां व्यापक अदालत व्यवस्था तक फैली होंगी।
मुकदमा लड़ने वालों, वकीलों, अभियोजकों और अदालत कर्मचारियों के लिए इस बदलाव का मतलब न्यायिक प्रशासन का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का बदलना है। मार्कोस के लिए यह मुख्य न्यायाधीश का अपना पहला चयन पूरा करता है। राष्ट्रपति भवन ने सार्वजनिक रूप से इस चयन को निष्पक्षता, अनुभव और अदालतों पर भरोसे से जोड़ा है।
मुख्य बिंदु
- मार्कोस ने पांच उम्मीदवारों की सूची में से रोडिल ज़लामेदा को फिलीपींस का 28वां मुख्य न्यायाधीश चुना।
- वे अलेक्जेंडर गेसमुंडो की जगह लेंगे, जो 6 नवंबर को 70 वर्ष की अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु पूरी कर रहे हैं।
- ज़लामेदा 11 साल तक अपील न्यायालय में सेवा देने के बाद 6 अगस्त 2019 को सुप्रीम कोर्ट में शामिल हुए।
- उन्होंने इमेल्डा मार्कोस को भ्रष्टाचार के सात मामलों में बरी करने वाला फैसला और रेड-टैगिंग तथा अदालत से सुरक्षा से जुड़ा डेदुरो फैसला लिखा।
- उन्होंने मापे जा सकने वाले मानदंडों और जनता पर असर के आकलन के साथ चरणबद्ध न्यायिक सुधारों का प्रस्ताव दिया।
- 2 अगस्त 1963 को जन्मे ज़लामेदा अगस्त 2033 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु तक सेवा कर सकते हैं।






