पंप पर ऊंचे दाम से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव
श्रीलंका की सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन ने 2 नवंबर, 2026 से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए। अक्टूबर में महंगाई दर 8.3% पहुंचने के कुछ ही दिन बाद हुई इस बढ़ोतरी से परिवहन और कारोबारी लागत भी बढ़ेगी। ऊर्जा मंत्री अनुर करुणातिलका के मुताबिक, देश का ईंधन आयात खर्च पिछले साल के मुकाबले करीब 50% अधिक है।
विषय-सूची
- पंप पर ऊंचे दाम से घरेलू बजट पर बढ़ा दबाव
- वाहन चालकों को अब कितना देना होगा
- सरकार के मुताबिक ईंधन महंगा क्यों हुआ
- महंगाई पहले ही लक्ष्य से ऊपर थी
- ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी दूसरे दामों तक कैसे पहुंचती है
- ब्याज दरों में बदलाव अपने आप तय नहीं होता
- सब्सिडी उपभोक्ताओं को राहत देती है, लेकिन सरकारी धन खर्च होता है
- लागत वसूली की अगली परीक्षा बजट में
- मुख्य बातें
संशोधित दरों के अनुसार 92 ऑक्टेन पेट्रोल 424 रुपये प्रति लीटर और ऑटो डीजल 397 रुपये प्रति लीटर मिलेगा। मिट्टी के तेल का दाम 285 रुपये प्रति लीटर पर अपरिवर्तित है, इसलिए इसका इस्तेमाल करने वालों पर ताजा बढ़ोतरी का असर नहीं पड़ेगा।
इस बदलाव से श्रीलंका की आर्थिक बहाली पर दो तरह का दबाव सामने आता है: आयातित ऊर्जा का भुगतान करने की लागत और पहले से महंगाई झेल रहे परिवारों पर बढ़ता बोझ। पंप पर दाम बढ़ने से सरकारी पेट्रोलियम आपूर्तिकर्ता अपनी लागत की भरपाई कर सकता है। वहीं, वाहन चालकों और कारोबारों को रोजाना इस्तेमाल होने वाले ईंधन के लिए अधिक भुगतान करना होगा।
अक्टूबर की महंगाई दर लगातार चौथे महीने केंद्रीय बैंक की लक्ष्य सीमा से ऊपर रही। नवंबर की यह बढ़ोतरी अब कीमतों पर दबाव का एक और संभावित कारण बन सकती है। हालांकि, सार्वजनिक परिवहन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि डीजल के दाम में 5 रुपये की बढ़ोतरी के बाद बस किराये तुरंत नहीं बढ़ेंगे।
वाहन चालकों को अब कितना देना होगा
सीपीसी ने पेट्रोल और डीजल की चार श्रेणियों के दाम बढ़ाए हैं। बढ़ोतरी की मात्रा ईंधन के अनुसार अलग-अलग है:
- 92 ऑक्टेन पेट्रोल: 10 रुपये की बढ़ोतरी; दाम 414 से बढ़कर 424 रुपये प्रति लीटर।
- 95 ऑक्टेन पेट्रोल: 15 रुपये की बढ़ोतरी; दाम 475 से बढ़कर 490 रुपये प्रति लीटर।
- ऑटो डीजल: 5 रुपये की बढ़ोतरी; दाम 392 से बढ़कर 397 रुपये प्रति लीटर।
- सुपर डीजल: 15 रुपये की बढ़ोतरी; दाम 528 से बढ़कर 543 रुपये प्रति लीटर।
- मिट्टी का तेल: 285 रुपये प्रति लीटर पर अपरिवर्तित।
20 लीटर 92 ऑक्टेन पेट्रोल खरीदने वाले वाहन चालक का बिल 200 रुपये बढ़कर कुल 8,480 रुपये हो जाएगा। 100 लीटर ऑटो डीजल खरीदने वाले कारोबार को 500 रुपये अधिक, यानी कुल 39,700 रुपये देने होंगे। ये उदाहरण घोषित मूल्य बदलावों पर आधारित हैं और मानते हैं कि खरीदी गई मात्रा समान रहेगी।
सरकार के मुताबिक ईंधन महंगा क्यों हुआ
ऊर्जा मंत्री अनुर करुणातिलका ने इस बढ़ोतरी की वजह मध्य पूर्व में तनाव और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को बताया। 2 नवंबर की शाम एक लाइव राजनीतिक चर्चा में उन्होंने कहा कि ईंधन आयात खर्च पिछले साल के स्तर से करीब 50% अधिक है।
50% की बढ़ोतरी का मतलब है कि पहले 100 रुपये का आयात बिल समान खर्च की तुलना में अब करीब 150 रुपये का होगा। मंत्री का आंकड़ा कुल खर्च से जुड़ा है, यानी आयात के लिए श्रीलंका कितना भुगतान करता है; यह हर लीटर की कीमत में बताई गई बढ़ोतरी नहीं है।
सितंबर तक श्रीलंका का ऊर्जा आयात बिल करीब 4.5 अरब अमेरिकी डॉलर पहुंच गया था। अंतरराष्ट्रीय लागत बढ़ने से सरकार के सामने यह तय करने की चुनौती है कि कितना बोझ उपभोक्ताओं पर डाला जाए और कितना सरकारी धन से पूरा किया जाए।
करुणातिलका ने बंदरगाह पहुंचने पर ईंधन को उसकी आयात कीमत पर बेचने के विपक्ष के प्रस्तावों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा तरीका अपनाने वाला कोई देश ज्ञात नहीं है। उनका तर्क था कि आयात लागत ऊंची रहने पर सरकार कीमतें पूरी तरह नहीं घटा सकती और न ही काफी अधिक राहत दे सकती है।
बंदरगाह पर ईंधन पहुंचने के समय चुकाई गई कीमत, उसे वाहन चालकों तक पहुंचाने की कुल लागत का केवल एक हिस्सा है। ईंधन की ढुलाई, भंडारण और वितरण पर भी खर्च होता है, जबकि कर और सब्सिडी अंतिम पंप कीमत को प्रभावित करते हैं। राजनीतिक बहस इस बात पर है कि इन लागतों का बोझ ग्राहकों और सरकार के बीच कैसे बांटा जाए।
महंगाई पहले ही लक्ष्य से ऊपर थी
जनगणना और सांख्यिकी विभाग के अनुसार, अक्टूबर में कोलंबो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर सालाना महंगाई दर 8.3% रही, जो सितंबर के 8.0% से अधिक है। केंद्रीय बैंक का लक्ष्य महंगाई को 5% पर रखना है और इसकी स्वीकार्य सीमा 3% से 7% है। अक्टूबर का आंकड़ा इस ऊपरी सीमा से 1.3 प्रतिशत अंक अधिक था।
अक्टूबर में महंगाई में बढ़ोतरी से यह भी पता चला कि दबाव पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं था। सूचकांक में मासिक बढ़ोतरी का 87% हिस्सा परिवहन, रेस्तरां और होटलों से आया। वहीं, सालाना खाद्य महंगाई 8.8% पर पहुंच गई, जो मई 2023 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
सीसीपीआई कोलंबो के परिवारों द्वारा खरीदी जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की एक टोकरी की लागत में बदलाव मापता है। 8.3% सालाना महंगाई का अर्थ है कि इस मापी गई टोकरी की लागत एक साल पहले के मुकाबले 8.3% अधिक थी। हर परिवार के खर्च का तरीका अलग होने के कारण उन्हें कीमतों में अलग-अलग बढ़ोतरी का अनुभव होता है।
अक्टूबर में सूचकांक सितंबर के 209.1 से बढ़कर 209.9 हो गया, यानी महीने के दौरान करीब 0.4% की वृद्धि हुई। 2 नवंबर का ईंधन मूल्य संशोधन इन आंकड़ों में शामिल अवधि के बाद हुआ है और आगे कीमतों में होने वाले बदलावों में इसका असर दिखाई देगा।
मुख्य तारीखों से पता चलता है कि दबाव कैसे बढ़ता गया:
- 2026 की शुरुआत: सरकार ने सार्वभौमिक ईंधन सब्सिडी के रूप में 57 अरब रुपये दिए, जिसमें डीजल की कीमत में 100 रुपये प्रति लीटर की कटौती शामिल थी।
- 1 अक्टूबर: ईंधन की कीमतों में पहले किया गया संशोधन लागू हुआ।
- 30 अक्टूबर: आंकड़ों में अक्टूबर की सालाना महंगाई दर 8.3% दर्ज हुई।
- 2 नवंबर: सीपीसी की पेट्रोल और डीजल की ताजा बढ़ी हुई कीमतें लागू हुईं और उसी शाम ऊर्जा मंत्री ने सरकार का पक्ष बताया।
- 12 नवंबर: 2027 का बजट पेश किया जाना निर्धारित है।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी दूसरे दामों तक कैसे पहुंचती है
परिवहन कंपनियां, किसान और विनिर्माता सामान ढोने, मशीनें चलाने और उत्पादों की आपूर्ति करने के लिए ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए डीजल महंगा होने से खेतों से बाजार तक खाद्य सामग्री पहुंचाने या तैयार सामान दुकानों तक लाने की लागत बढ़ सकती है।
बढ़ती लागत का सामना कर रहे कारोबारों के पास कई विकल्प होते हैं। वे बिक्री के दाम बढ़ा सकते हैं, कम मुनाफा स्वीकार कर सकते हैं या दूसरे खर्च घटा सकते हैं। जिन कंपनियों के पास नया खर्च वहन करने की गुंजाइश कम है, वे इसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाल सकती हैं। इससे पंप पर हुई शुरुआती बढ़ोतरी के अलावा भी कीमतें बढ़ सकती हैं।
छोटे और मझोले उद्यमों तथा अनौपचारिक सेवा प्रदाताओं पर खास दबाव पड़ सकता है, क्योंकि ईंधन पर खर्च होने वाला पैसा उनकी दूसरी कारोबारी जरूरतों के लिए उपलब्ध नकदी कम कर देता है। उदाहरण के लिए, बढ़ोतरी के बाद भी समान शुल्क लेने वाले डिलीवरी संचालक के पास ईंधन खरीदने के बाद उस भुगतान से कम रकम बचेगी।
सार्वजनिक परिवहन अधिकारियों ने संकेत दिया है कि ऑटो डीजल की ताजा कीमत बढ़ने के बाद बस किराये तुरंत नहीं बढ़ेंगे। फिलहाल अतिरिक्त ईंधन खर्च ऑपरेटरों को ही उठाना होगा। दूसरे कारोबार कब और कितनी कीमतें बदलेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
पेट्रोल पर अधिक खर्च करने वाले परिवारों के पास भोजन, सेवाओं और अन्य खरीदारी के लिए कम पैसा बचेगा, जब तक कि उनकी आमदनी न बढ़े। इस तरह ईंधन की ऊंची लागत कुछ कीमतों को बढ़ा सकती है, जबकि अर्थव्यवस्था के अन्य हिस्सों में खर्च कमजोर कर सकती है।
ब्याज दरों में बदलाव अपने आप तय नहीं होता
केंद्रीय बैंक के गवर्नर नंदलाल वीरसिंघे ने पिछले सप्ताह एक निवेशक मंच पर कहा था कि मौद्रिक नीति में बदलाव का फैसला करने से पहले अधिकारी महंगाई के स्रोत का आकलन करेंगे। वे यह भी देखेंगे कि क्या इसका असर भविष्य की कीमतों की उम्मीदों और मांग पर पड़ रहा है।
ब्याज दरें कर्ज लेने की लागत को प्रभावित करती हैं। ऊंची दरें आमतौर पर कर्ज और खर्च को हतोत्साहित करती हैं। जब मांग अर्थव्यवस्था की आपूर्ति क्षमता से अधिक हो, तो इससे कीमतों में बढ़ोतरी धीमी हो सकती है। लेकिन इससे श्रीलंका द्वारा आयातित तेल के लिए चुकाई जाने वाली अंतरराष्ट्रीय कीमत सीधे कम नहीं होती।
इसलिए केंद्रीय बैंक को यह देखना होगा कि ईंधन से पैदा हुआ झटका ऊर्जा और उससे जुड़ी लागतों तक सीमित रहता है या अर्थव्यवस्था में कीमतों को अधिक समय तक बढ़ाता है। महंगाई की उम्मीदें मायने रखती हैं, क्योंकि कारोबार कीमतें तय करते समय और कामगार वेतन बढ़ोतरी मांगते समय भविष्य की जीवनयापन लागत के अनुमान पर भी विचार कर सकते हैं।
केंद्रीय बैंक ने सितंबर की बैठक में अपनी ओवरनाइट पॉलिसी दर अपरिवर्तित रखी थी। उसका घोषित अनुमान था कि 2027 की पहली तिमाही तक महंगाई ऊंचे एकल अंकों में रहेगी और फिर 5% के लक्ष्य की ओर बढ़ेगी। ईंधन की ताजा कीमत बढ़ोतरी से नीति निर्माताओं को आकलन के लिए एक और लागत बदलाव मिला है।
सब्सिडी उपभोक्ताओं को राहत देती है, लेकिन सरकारी धन खर्च होता है
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर कम करने के लिए सरकार पहले ही सार्वजनिक धन की बड़ी राशि खर्च कर चुकी है। 2026 की शुरुआत में दिए गए 57 अरब रुपये के अलावा, उसने अंतिम तिमाही तक डीजल पर 70 रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी जारी रखने के लिए बाद में 41 अरब रुपये और देने की प्रतिबद्धता जताई।
इन दोनों राशियों का कुल योग दी गई या देने की प्रतिबद्धता वाली सहायता के रूप में 98 अरब रुपये है। पहले के 57 अरब रुपये के कार्यक्रम में डीजल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर घटाना शामिल था। 2 नवंबर को अपने बयान में करुणातिलका ने 57 अरब रुपये के आवंटन का जिक्र उपभोक्ताओं को राहत देने की सरकार की कोशिश के हिस्से के रूप में किया।
सार्वभौमिक ईंधन सब्सिडी से संबंधित ईंधन खरीदने वाले सभी लोगों, यानी परिवारों और कारोबारों, के लिए कीमत घटती है। किसानों या परिवहन ऑपरेटरों जैसे खास समूहों को लक्षित सहायता देने के लिए पात्र लोगों की पहचान करने वाली भरोसेमंद जानकारी चाहिए। ऐसी जानकारी में कमी के कारण सरकार सीमित समूहों तक मदद पहुंचाने में सक्षम नहीं रही है।
सब्सिडी से ईंधन बिल का एक हिस्सा खरीदार के बजाय सरकारी बजट पर चला जाता है। ईंधन कर घटाने से भी सरकार का राजस्व कम होता है। दोनों उपाय उपभोक्ताओं पर तत्काल दबाव कम कर सकते हैं, लेकिन इससे अन्य खर्चों के लिए सार्वजनिक धन कम बचता है या कहीं और बचत करनी पड़ती है।
लागत वसूली की अगली परीक्षा बजट में
2022 में संप्रभु ऋण चूक के बाद श्रीलंका ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के विस्तारित निधि सुविधा कार्यक्रम के संरचनात्मक मानकों के तहत ईंधन की कीमतें उसकी लागत के अनुरूप तय करने की प्रतिबद्धता जताई थी। इसका एक उद्देश्य सीपीसी जैसे सरकारी उपक्रमों को लागत से कम कीमत पर बेचने के कारण घाटा जमा करने से रोकना है।
नवंबर का संशोधन इस नीति के अनुरूप है, जबकि सब्सिडी जारी रहना उपभोक्ताओं का बोझ सीमित करने की सरकार की कोशिश दिखाता है। पंप कीमतों के जरिए अधिक रकम वसूलने से आपूर्तिकर्ता और सरकारी वित्त पर दबाव कम होता है, लेकिन लोगों और कारोबारों का तत्काल खर्च बढ़ जाता है।
2027 का बजट 12 नवंबर को पेश किया जाना तय है और यह अगली बड़ी राजकोषीय घटना होगी। यह ऐसे समय आएगा जब महंगाई लक्ष्य से ऊपर है, ईंधन आयात बिल बढ़ गया है और राहत पर पहले ही काफी खर्च किया जा चुका है। राजस्व और खर्च से जुड़े फैसले इन परस्पर विरोधी जरूरतों के बीच लिए जाएंगे।
मुख्य बातें
- सीपीसी ने 2 नवंबर, 2026 से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए; मिट्टी का तेल 285 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है।
- 92 ऑक्टेन पेट्रोल अब 424 रुपये प्रति लीटर और ऑटो डीजल 397 रुपये प्रति लीटर है।
- अक्टूबर की महंगाई 8.3% रही, जो लगातार चौथे महीने केंद्रीय बैंक की 7% की ऊपरी सीमा से अधिक है।
- ऊर्जा मंत्री अनुर करुणातिलका के मुताबिक, ईंधन आयात खर्च पिछले साल से करीब 50% अधिक है।
- सरकारी ईंधन राहत में पहले दिए गए 57 अरब रुपये और अंतिम तिमाही के लिए प्रतिबद्ध 41 अरब रुपये शामिल हैं।
- सार्वजनिक परिवहन अधिकारियों के मुताबिक, बस किराये तुरंत नहीं बढ़ेंगे।
- 2027 का बजट 12 नवंबर को पेश किया जाना तय है।






