एसपीएफ जांच में खामियों से उपभोक्ताओं का भरोसा डगमगाने के बाद ऑस्ट्रेलिया सनस्क्रीन की जांच सख्त करने की योजना बना रहा है

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Australia Plans Tougher Sunscreen Testing After SPF Failures Shake Consumer Trust

बिक्री के लिए तैयार उत्पादों की बार-बार होगी एसपीएफ जांच

ऑस्ट्रेलिया में सनस्क्रीन आपूर्तिकर्ताओं को उत्पादों को बिक्री के लिए सूचीबद्ध करने से पहले उनके सुरक्षा संबंधी दावों के समर्थन में साक्ष्य देना होगा और उनकी निर्धारित शेल्फ लाइफ के दौरान बार-बार जांच करानी होगी। चिकित्सीय वस्तु प्रशासन (टीजीए) ने 27 अक्टूबर, 2026 को घोषित सुधारों के तहत यह प्रस्ताव रखा है।

विषय-सूची
  1. बिक्री के लिए तैयार उत्पादों की बार-बार होगी एसपीएफ जांच
  2. सनस्क्रीन पर भरोसे में कमी की वजह क्या रही?
  3. तैयार सनस्क्रीन की जांच क्यों जरूरी है
  4. नतीजों की जांच कौन करेगा?
  5. प्लास्टिक प्लेटों पर जांच भी मानव परीक्षण के साथ होगी
  6. प्रयोगशालाओं के लिए सख्त होंगी आवश्यकताएं
  7. कॉस्मेटिक और प्राथमिक सनस्क्रीन के नियम अलग होंगे
  8. एसपीएफ लेबल की बाद में समीक्षा होगी
  9. जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुरक्षा जारी रखने की अपील की
  10. मुख्य बातें

ये प्रस्ताव उपभोक्ता समूह चॉइस (CHOICE) की जून 2025 की जांच के बाद आए हैं। जांच में 20 में से 16 सनस्क्रीन अपने विज्ञापित सन प्रोटेक्शन फैक्टर यानी एसपीएफ के स्तर पर खरे नहीं उतरे। अल्ट्रा वायलेट की लीन स्क्रीन स्किनस्क्रीन पर एसपीएफ 50+ का लेबल था, लेकिन जांच में इसका एसपीएफ 4 निकला और 2025 में इसे स्वेच्छा से बाजार से वापस मंगा लिया गया। इसके बाद इसी मूल फॉर्मूले वाले 19 अन्य उत्पाद भी वापस मंगाए गए।

टीजीए चाहता है कि कंपनियां उस तैयार सनस्क्रीन की जांच करें जिसे उपभोक्ता खरीदते हैं, न कि केवल उसके मूल फॉर्मूले की जांच पर निर्भर रहें। प्रयोगशालाओं के लिए मान्यता संबंधी आवश्यकताएं सख्त होंगी, जबकि कुछ कॉस्मेटिक उत्पादों के एसपीएफ दावों पर सीमा लगाई जाएगी।

एक अहम असहमति अब भी बनी हुई है: कंपनियां अपने जांच नतीजे गोपनीय रूप से जमा करेंगी और नियामक का कहना है कि उत्पादों के दुकानों तक पहुंचने से पहले वह नियमित रूप से इन आंकड़ों की जांच नहीं करेगा। चॉइस नतीजों को सार्वजनिक करने, उनकी नियमित पड़ताल और नियामक द्वारा स्वयं जांच कराने की मांग कर रहा है।

टीजीए ने मार्च से मई 2026 तक चली परामर्श प्रक्रिया के बाद ये प्रस्ताव तैयार किए। इसमें निर्माताओं, प्रयोगशालाओं, स्वास्थ्य पेशेवरों, उपभोक्ता समूहों, शिक्षाविदों और अन्य प्रतिभागियों से लगभग 120 जवाब मिले। इन्हें चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा; कुछ उपायों के लिए आगे और परामर्श या कानून में बदलाव की जरूरत होगी।

खरीदारों के लिए प्रस्तावित बदलाव का मकसद सीधा है: बोतल पर लिखे एसपीएफ नंबर के पीछे अधिक मजबूत साक्ष्य हो। आपूर्तिकर्ताओं को बिकने वाले सनस्क्रीन की जांच कराने और यह साबित करने की जिम्मेदारी उठानी होगी कि वह अपनी शेल्फ लाइफ के दौरान प्रभावी बना रहता है।

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सनस्क्रीन पर भरोसे में कमी की वजह क्या रही?

चॉइस की जांच में शामिल 20 उत्पादों में से 80 प्रतिशत अपने एसपीएफ दावों पर खरे नहीं उतरे। इनमें कई महंगे उत्पाद थे। इससे उन उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ी जिन्होंने भरोसेमंद सुरक्षा की उम्मीद में अधिक कीमत चुकाई थी।

एसपीएफ पराबैंगनी विकिरण से सुरक्षा को मापता है, जो सनबर्न का कारण बनता है और मुख्य रूप से यूवीबी किरणों से जुड़ा है। नियंत्रित जांच की परिस्थितियों में अधिक एसपीएफ का मतलब अधिक सुरक्षा है। यह रेटिंग इस बात पर निर्भर करती है कि जांच में निर्धारित मात्रा में लगाने पर उत्पाद कैसा प्रदर्शन करता है, न कि केवल इस पर कि उसके लेबल पर कौन-से तत्व लिखे हैं।

टीजीए की मुख्य चिकित्सा सलाहकार प्रोफेसर रॉबिन लैंगहम ने कहा कि जांच में एसपीएफ के कम नतीजों के कई संभावित कारण सामने आए:

हमारी जांच में एसपीएफ के कम नतीजों के पीछे कई संभावित कारण सामने आए हैं, कोई एक कारण नहीं।

एक साल से अधिक समय में उठाए गए कदम इस प्रकार हैं:

  • जून 2025: चॉइस ने जांच के नतीजे प्रकाशित किए। इसमें 20 में से 16 सनस्क्रीन अपने लेबल पर दिए एसपीएफ से कम पाए गए।
  • 2025 के दौरान: एसपीएफ 50+ के लेबल के बावजूद एसपीएफ 4 पाए जाने के बाद अल्ट्रा वायलेट की लीन स्क्रीन स्किनस्क्रीन को स्वेच्छा से वापस मंगाया गया। इसी मूल फॉर्मूले वाले 19 अन्य उत्पाद भी वापस मंगाए गए।
  • मार्च से मई 2026: टीजीए ने सनस्क्रीन नियमन में बदलावों पर जनता से सुझाव मांगे।
  • 27 अक्टूबर, 2026: लगभग 120 जवाबों के बाद नियामक ने उन सुधारों की घोषणा की जिन्हें वह विकसित करेगा।

जांच विवाद के बारे में टीजीए ने अभी अपनी पूरी पड़ताल के नतीजे प्रकाशित नहीं किए हैं। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि हर प्रस्तावित आवश्यकता बाजार में पहले से बिक रहे सनस्क्रीन पर कैसे लागू होगी या इन्हें पूरी तरह लागू करने की समय-सीमा क्या होगी।

तैयार सनस्क्रीन की जांच क्यों जरूरी है

मूल फॉर्मूला वह आधारभूत मिश्रण होता है जिससे सनस्क्रीन उत्पाद तैयार किया जाता है। तैयार उत्पाद की जांच का मतलब है उस फॉर्मूलेशन को परखना जिसे उपभोक्ता वास्तव में खरीदते हैं, जिसमें उस संस्करण में मौजूद सभी तत्व शामिल हैं।

प्रस्तावित नियमों के तहत, आपूर्तिकर्ताओं को टीजीए के साथ सनस्क्रीन सूचीबद्ध करते समय एसपीएफ जांच के नतीजे देने होंगे। उन्हें उत्पाद की शेल्फ लाइफ के दौरान समय-समय पर उसकी जांच भी करानी होगी। फिलहाल कंपनियों को एसपीएफ जांच के आंकड़े केवल तभी देने होते हैं जब नियामक उनसे मांगे।

बार-बार जांच से बिक्री से पहले की जांच से अलग एक सवाल का जवाब मिलेगा: क्या उत्पाद समय के साथ अपना दावा किया गया सुरक्षा स्तर बनाए रखता है? उपभोक्ता के इस्तेमाल के दौरान सनस्क्रीन को उसकी बताई गई शेल्फ लाइफ के भीतर प्रभावी होना चाहिए, केवल फॉर्मूला तैयार करते समय नहीं।

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लैंगहम ने बदलावों का मकसद बताया:

इसका मकसद एसपीएफ दावों को अधिक भरोसेमंद बनाना, अपने उत्पादों के लिए आपूर्तिकर्ताओं की जिम्मेदारी मजबूत करना और चिंता सामने आने पर टीजीए को साक्ष्य तक तेजी से पहुंच देना है।

शिकायत या प्रयोगशाला की अप्रत्याशित जांच के नतीजे से पड़ताल शुरू होने पर साक्ष्य तक तेज पहुंच अहम होगी। नियामक के पास पहले से जमा आंकड़े होंगे, उसे पहले आपूर्तिकर्ता से उन्हें मांगना नहीं पड़ेगा।

नतीजों की जांच कौन करेगा?

टीजीए के प्रस्ताव के तहत आपूर्तिकर्ताओं को अधिक जानकारी देनी होगी, लेकिन व्यवस्था में उत्पादों के पीछे मौजूद साक्ष्यों की बड़ी जिम्मेदारी कंपनियों पर ही रहेगी। बाजार में उत्पाद सूचीबद्ध करने से पहले नतीजे जमा करना अनिवार्य होगा, लेकिन बिक्री से पहले उनकी नियमित जांच का प्रस्ताव नहीं है।

चॉइस के उपभोक्ता प्रभाव निदेशक एंडी केली ने तैयार उत्पादों की जांच और नतीजे नियामक को देने की आवश्यकताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कंपनियों के आंकड़े जमा करने के बाद क्या होता है, इस मामले में अब भी कमी है।

केली ने साक्ष्यों की पड़ताल में उपभोक्ताओं और नियामक की अधिक सक्रिय भूमिका की मांग की:

पारदर्शिता और सार्वजनिक सुरक्षा के हित में हमारा मानना है कि ये नतीजे सभी के लिए उपलब्ध होने चाहिए और टीजीए को जांच के नतीजों की नियमित निगरानी करनी चाहिए, साथ ही अनुपालन जांच का अपना कार्यक्रम भी चलाना चाहिए।

टीजीए ने नतीजे सार्वजनिक करने पर विचार किया, लेकिन गोपनीयता, बौद्धिक संपदा और अत्यधिक तकनीकी आंकड़ों की गलत व्याख्या की आशंका का हवाला दिया। उसके प्रस्ताव के तहत नतीजे गोपनीय रहेंगे।

इसलिए उपभोक्ताओं को अपने दावों के समर्थन के लिए आपूर्तिकर्ताओं और चिंता सामने आने पर जांच के लिए नियामक पर निर्भर रहना होगा। चॉइस की अनुपालन जांच की मांग से टीजीए द्वारा शुरू की जाने वाली जांच भी जुड़ जाएगी, जबकि कंपनियां अपने स्तर पर साक्ष्य जुटाकर जमा करती रहेंगी।

प्लास्टिक प्लेटों पर जांच भी मानव परीक्षण के साथ होगी

टीजीए मौजूदा इन विवो पद्धति के साथ इन विट्रो नामक प्रयोगशाला जांच की अनुमति देने का भी प्रस्ताव कर रहा है। ये शब्द बताते हैं कि माप कहां किया जाता है: जीवित शरीर के बाहर या किसी जीवित व्यक्ति पर।

मौजूदा इन विवो जांच में स्वयंसेवकों की त्वचा पर सनस्क्रीन लगाकर पराबैंगनी विकिरण वाली कृत्रिम धूप में उनकी सुरक्षा मापी जाती है। प्रस्तावित इन विट्रो पद्धति में प्लास्टिक प्लेटों पर फैलाए गए सनस्क्रीन की जांच की जाएगी और उपकरणों से पराबैंगनी रोशनी के साथ उसकी प्रतिक्रिया मापी जाएगी।

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नियामक ने कहा कि मानव परीक्षणों के नतीजों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। नतीजों में अंतर होने से निर्माताओं और नियामकों के लिए भरोसेमंद एसपीएफ दावा तय करना कठिन हो सकता है।

मैक्वेरी विश्वविद्यालय में औषधीय रसायन विज्ञान विशेषज्ञ प्रोफेसर नियाल व्हीट सनस्क्रीन के प्रदर्शन पर भरोसा बढ़ाने के लिए इन विट्रो स्पेक्ट्रोस्कोपिक जांच शुरू करने के समर्थन में हैं। स्पेक्ट्रोस्कोपिक जांच में प्रकाश के माप से नमूने के व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। वह इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की भी सिफारिश करते हैं, ताकि उद्योग को नई पद्धतियां अपनाने का समय मिले। व्हीट ने बताया कि वह सनस्क्रीन उत्पाद बनाने वाली एक स्किनकेयर कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी हैं।

व्यवस्था में मानव परीक्षण भी जारी रहेगा। टीजीए का कहना है कि प्लेट वाली पद्धति हर फॉर्मूलेशन या पानी में टिके रहने की जांच के लिए उपयुक्त नहीं हो सकती। आपूर्तिकर्ताओं को संबंधित सनस्क्रीन और उसके बारे में किए गए दावों के लिए उपयुक्त जांच पद्धति उपलब्ध करानी होगी।

प्रयोगशालाओं के लिए सख्त होंगी आवश्यकताएं

फिलहाल टीजीए एसपीएफ जांच करने वाली प्रयोगशालाओं का नियमन या उन्हें मान्यता नहीं देता। वह ऑस्ट्रेलिया में आपूर्ति किए जाने वाले सनस्क्रीन की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता संबंधी सख्त आवश्यकताएं प्रस्तावित कर रहा है।

मान्यता इस बात का औपचारिक आकलन है कि कोई प्रयोगशाला खास जांच करने में सक्षम है या नहीं। सनस्क्रीन के मामले में इससे लेबल पर दिए दावे के पीछे साक्ष्य जुटाने वाली जांच प्रक्रिया की एक अतिरिक्त पड़ताल होगी।

चॉइस की जांच में अपने दावों पर खरे नहीं उतरने वाले आधे से अधिक सनस्क्रीन के लिए विदेश की ऐसी प्रयोगशाला का इस्तेमाल किया गया था, जिसके नतीजों पर सवाल उठे। प्रस्तावित मान्यता की आवश्यकताएं ऑस्ट्रेलियाई बाजार के लिए उत्पादों की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं पर लागू होंगी।

टीजीए मानता है कि सख्त आवश्यकताओं से जांच की लागत बढ़ सकती है और उपयुक्त प्रयोगशाला सेवाएं हासिल करना कठिन हो सकता है। उत्पादों की अधिक बार जांच से इन सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी।

ऑस्ट्रेलिया जन स्वास्थ्य संघ के मुख्य कार्यकारी टेरी स्लेविन ने जांच को एकसमान और भरोसेमंद बनाने के प्रयासों का स्वागत किया, लेकिन कहा कि बदलावों से सनस्क्रीन की कीमतें नहीं बढ़नी चाहिए। उनकी चिंता प्रयोगशालाओं की गुणवत्ता के साथ-साथ उत्पाद की किफायत से भी जुड़ी है: परिवारों के लिए ऐसा सनस्क्रीन उपलब्ध होना चाहिए जिसका वे नियमित इस्तेमाल कर सकें।

कॉस्मेटिक और प्राथमिक सनस्क्रीन के नियम अलग होंगे

कुछ कॉस्मेटिक उत्पादों पर फिलहाल चिकित्सीय वस्तु के रूप में सूचीबद्ध हुए बिना एसपीएफ 50+ तक के सुरक्षा दावे किए जा सकते हैं। टीजीए का प्रस्ताव है कि कॉस्मेटिक सनस्क्रीन के एसपीएफ दावों पर सीमा लगाई जाए, ताकि खरीदारों को उनकी भूमिका अधिक स्पष्ट हो।

प्राथमिक सनस्क्रीन का मुख्य उद्देश्य पराबैंगनी विकिरण से बचाव करना होता है। कॉस्मेटिक सनस्क्रीन का कोई दूसरा मुख्य उद्देश्य होता है, जैसे मेकअप कवरेज देना या त्वचा को नम रखना; धूप से सुरक्षा उसका गौण काम होता है।

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एडिलेड विश्वविद्यालय की शोधकर्ता डॉ. हिलेरी बोमन-स्मार्ट ने कहा कि स्वास्थ्य उत्पादों और स्किनकेयर के बीच की सीमा को लेकर उपभोक्ता खरीदारी के समय असमंजस में पड़ सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट अंतर तय करने की मांग की, ताकि खरीदार उन उत्पादों को पहचान सकें जिनका मकसद धूप से सार्थक सुरक्षा देना है।

नियामक कुछ खास सनस्क्रीन तत्वों के लिए गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताएं भी तैयार करेगा। इसकी समीक्षा में अच्छी विनिर्माण पद्धति से जुड़े दिशानिर्देश शामिल होंगे, जो बताते हैं कि निर्माता अपने उत्पादों का लगातार एकसमान उत्पादन और नियंत्रण कैसे करें।

तत्वों के मानक और विनिर्माण संबंधी दिशानिर्देश उन चरणों पर ध्यान देते हैं जो तैयार सनस्क्रीन के प्रयोगशाला तक पहुंचने से पहले आते हैं। उत्पाद की जांच के साथ मिलकर ये उपाय सनस्क्रीन के निर्माण और उसके प्रदर्शन, दोनों पर निगरानी रखेंगे।

एसपीएफ लेबल की बाद में समीक्षा होगी

टीजीए एसपीएफ लेबल में बदलावों पर आगे समीक्षा और परामर्श करेगा। चर्चा में मौजूदा अंकीय प्रणाली की जगह कम, मध्यम, उच्च और बहुत उच्च जैसी श्रेणियां अपनाने के विकल्प भी शामिल थे।

लेबलिंग की कोई नई व्यवस्था अभी नहीं अपनाई गई है। फिलहाल सुधार कार्यक्रम का जोर जांच, तत्वों की गुणवत्ता, विनिर्माण की जिम्मेदारियों और कॉस्मेटिक उत्पादों तथा प्राथमिक सनस्क्रीन के बीच अंतर पर है।

एसोसिएट प्रोफेसर अन्ना वांग ने कहा कि लगाए गए सनस्क्रीन की मात्रा और दोबारा लगाने की आवृत्ति, एसपीएफ के नतीजों में छोटे अंतर से अधिक मायने रख सकती है। रोजमर्रा के इस्तेमाल में उत्पाद कितनी सुरक्षा देता है, यह उसकी जांच में सामने आए प्रदर्शन और इस्तेमाल के तरीके, दोनों पर निर्भर करता है।

अंकों की जगह श्रेणियां लगाने से पैकेजिंग पर सुरक्षा बताने का तरीका बदल जाएगा। इस बदलाव पर फैसला लेने से पहले टीजीए और सुझाव मांगेगा।

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सुरक्षा जारी रखने की अपील की

टीजीए के अनुसार, त्वचा कैंसर की घटनाएं दुनिया में सबसे अधिक ऑस्ट्रेलिया में होती हैं। चॉइस के मुताबिक अनुमान है कि ऑस्ट्रेलिया के हर तीन में से दो लोगों को अपने जीवनकाल में त्वचा कैंसर का पता चलेगा। इसलिए भरोसेमंद सनस्क्रीन जन स्वास्थ्य की बड़ी चिंता है।

बीमारी का बोझ अलग-अलग इलाकों में भी अलग है। प्रोफेसर ली किंग्समैन ने बताया कि विक्टोरिया के लॉडन माली क्षेत्र में मेलेनोमा की दर राज्य के औसत से 63 प्रतिशत अधिक है। बीमारी का बोझ जिन समुदायों पर ज्यादा है, वहां भरोसेमंद और किफायती सुरक्षा विशेष रूप से जरूरी है।

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क्यूआईएमआर बर्खोफर के कैंसर नियंत्रण समूह के विशिष्ट वैज्ञानिक प्रोफेसर डेविड व्हाइटमैन सख्त जांच और विनिर्माण पर अधिक निगरानी के समर्थन में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश सनस्क्रीन अब भी सनबर्न रोकने में अत्यधिक प्रभावी हैं और जब यूवी सूचकांक 3 या उससे अधिक रहने का पूर्वानुमान हो, तब रोजाना सनस्क्रीन लगाने से त्वचा कैंसर का जोखिम घटता है।

स्लेविन ने ऑस्ट्रेलियाई लोगों से व्यापक सुरक्षा उपायों के साथ सनस्क्रीन का इस्तेमाल जारी रखने की अपील की। इन उपायों में छाया में रहना, सुरक्षात्मक कपड़े और टोपी पहनना तथा धूप का चश्मा लगाना शामिल है। उन्होंने बाहर जाने से 20 मिनट पहले खुली त्वचा पर सही मात्रा में सनस्क्रीन लगाने की सलाह भी दी।

इन सुधारों का मकसद सुरक्षा संबंधी दावों को अधिक भरोसेमंद बनाना और इस रोजमर्रा के स्वास्थ्य उपाय को सुलभ बनाए रखना है। अभी यह तय होना बाकी है कि नई आवश्यकताएं कितनी जल्दी लागू होंगी, प्रयोगशालाओं की क्षमता और लागत का प्रबंधन कैसे होगा और क्या टीजीए अपनी नियमित जांच बढ़ाएगा।

मुख्य बातें

  • लगभग 120 जवाब मिलने के बाद टीजीए ने 27 अक्टूबर, 2026 को सनस्क्रीन में सुधारों का प्रस्ताव घोषित किया।
  • चॉइस की जून 2025 की जांच में 20 में से 16 उत्पाद अपने विज्ञापित एसपीएफ से कम पाए गए।
  • आपूर्तिकर्ताओं को तैयार उत्पादों की जांच करनी होगी, सूचीबद्ध करने से पहले नतीजे जमा करने होंगे और शेल्फ लाइफ के दौरान फिर से जांच करानी होगी।
  • नतीजे गोपनीय रहेंगे और उत्पादों के दुकानों तक पहुंचने से पहले टीजीए की नियमित जांच का प्रस्ताव नहीं है।
  • नियामक अतिरिक्त जांच पद्धतियां, प्रयोगशालाओं के लिए सख्त मान्यता और कुछ खास तत्वों के गुणवत्ता मानक प्रस्तावित कर रहा है।
  • कॉस्मेटिक उत्पादों के एसपीएफ दावों पर सीमा लगेगी, जबकि एसपीएफ लेबल में व्यापक बदलावों पर बाद में परामर्श होगा।
  • जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ छाया, सुरक्षात्मक कपड़ों, टोपी और धूप के चश्मे के साथ सनस्क्रीन का इस्तेमाल जारी रखने की अपील करते हैं।
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