काठमांडू में बनी थेरेपी से एक किशोर का इलाज
रक्त कैंसर से पीड़ित 17 वर्षीय मरीज को काठमांडू के महाराजगंज स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में नेपाल की पहली स्थानीय रूप से निर्मित CAR-T सेल थेरेपी दी गई है। डॉक्टर अंजन श्रेष्ठ और प्रसून उपाध्याय ने बताया कि 27 सितंबर को संशोधित प्रतिरक्षा कोशिकाएं दिए जाने के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और शुरुआती संकेत उत्साहजनक हैं।
विषय-सूची
- काठमांडू में बनी थेरेपी से एक किशोर का इलाज
- उपचार प्रतिरक्षा कोशिकाओं को कैंसर के खिलाफ कैसे सक्रिय करता है
- डॉक्टरों ने अब तक क्या देखा है
- 2022 की पहल से पहले इन्फ्यूजन तक
- प्रयोगशाला अध्ययन में क्या सामने आया
- स्थानीय निर्माण भी व्यापक आपूर्ति शृंखला पर निर्भर
- पहला उपचार निःशुल्क, लेकिन लागत की बड़ी चुनौती
- विशेषज्ञों की निगरानी उपचार का हिस्सा क्यों है
- नेपाल का अनुभव दूसरे देशों के लिए क्या मायने रखता है
- मुख्य बिंदु
सेंटर फॉर रीजनरेटिव मेडिसिन नेपाल, जिसे CRM Nepal के नाम से जाना जाता है, ने यह उपचार तैयार किया और मरीज की आर्थिक कठिनाई तथा देश में इस पहले उपचार के महत्व को देखते हुए इसे निःशुल्क दिया। टीम की योजना उपचार पर प्रतिक्रिया और कैंसर के पूरी तरह खत्म होने की स्थिति का आकलन करने के लिए किशोर की एक साल तक निगरानी करने की है।
इस उपचार के पीछे प्रयोगशाला में कई वर्षों का विकास, निर्माण की तैयारी और अस्पताल के विशेषज्ञों के साथ काम शामिल है। नेपाल के औषधि प्रशासन विभाग ने 2026 में देश में निर्मित CD19 CAR-T उत्पाद को चिकित्सकीय उपयोग की मंजूरी दी। इसके निर्धारित उपयोगों में बी-सेल एक्यूट लिम्फोब्लास्टिक ल्यूकेमिया और डिफ्यूज लार्ज बी-सेल लिम्फोमा शामिल हैं। ये रक्त कैंसर के दो प्रकार हैं।
पात्र मरीजों के लिए स्थानीय उत्पादन से भारत या चीन जैसे देशों में जाने के बजाय नेपाल में ही उपचार पाने का रास्ता खुलता है। यह उपचार अधिक परिवारों की पहुंच में आएगा या नहीं, यह लागत, वित्तपोषण और अस्पतालों की इसे सुरक्षित रूप से देने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
उपचार प्रतिरक्षा कोशिकाओं को कैंसर के खिलाफ कैसे सक्रिय करता है
CAR-T थेरेपी टी कोशिकाओं से शुरू होती है। ये श्वेत रक्त कोशिकाएं प्रतिरक्षा प्रणाली को खतरों से लड़ने में मदद करती हैं। मरीज के रक्त से टी कोशिकाएं लेकर प्रयोगशाला में उनके जीन में बदलाव किया जाता है, ताकि वे कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद किसी खास लक्ष्य को पहचान सकें।
संशोधित कोशिकाओं की संख्या बढ़ाई जाती है और फिर इन्फ्यूजन के जरिए मरीज को वापस दी जाती हैं। CAR का अर्थ है काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर। यह जोड़ा गया रिसेप्टर टी कोशिकाओं को उनका लक्ष्य ढूंढने में मदद करता है। नेपाल के उत्पाद में यह लक्ष्य CD19 है, जो रक्त कैंसर से जुड़ी कुछ कोशिकाओं पर पाया जाने वाला एक मार्कर है।
अस्पताल की टीम का नेतृत्व कर रहे रक्त और कैंसर विशेषज्ञ डॉ. श्रेष्ठ ने कहा कि कीमोथेरेपी के बाद बीमारी लौटने या दवाओं का असर बंद होने पर यह उपचार उपयोगी हो सकता है। किशोर को हुए रक्त कैंसर का सटीक निदान सार्वजनिक नहीं किया गया।
डॉक्टरों ने अब तक क्या देखा है
डॉ. श्रेष्ठ और डॉ. उपाध्याय ने बताया कि इन्फ्यूजन से पहले किशोर की सावधानीपूर्वक तैयारी की गई और उसके बाद कड़ी निगरानी रखी गई। CRM Nepal ने शुरुआती प्रतिक्रिया को उत्साहजनक बताया, जबकि वैज्ञानिक संजीवन गौतम ने मरीज के रक्त में CAR-T कोशिकाओं की संख्या में आशाजनक वृद्धि की जानकारी दी।
उपचार का पूरा असर जानने के लिए डॉक्टर आने वाले साल में मरीज की निगरानी करेंगे। परिवार के लिए तत्काल यह महत्वपूर्ण बदलाव है कि अब उन्हें ऐसी थेरेपी उपलब्ध हुई है, जिसके लिए पहले विदेश में इलाज तलाशना पड़ता। साथ ही, शिक्षण अस्पताल में मरीज की निगरानी जारी रहेगी।
डॉक्टरों की घोषणा के अंग्रेजी विवरण में इन्फ्यूजन की तारीख 27 सितंबर बताई गई। नेपाली विवरण में नेपाल के कैलेंडर की तारीख असोज 11 दी गई थी, न कि 11 अक्टूबर। कैलेंडर के इस अंतर को स्पष्ट रखने से कार्यक्रम के विकासक्रम में उपचार की सही तारीख तय करने में मदद मिलती है।
2022 की पहल से पहले इन्फ्यूजन तक
अमेरिका में रह रहे नेपाली इम्यूनोलॉजिस्ट गौतम 2022 से इस पहल पर काम कर रहे हैं। CRM Nepal ने योगदान देने वाले व्यापक समूह का श्रेय दिया, जिसमें प्रोफेसर ओम कुर्मी, डॉ. सुधांशु केसी, आनुवंशिकीविद् बलराम गौतम, लुका गत्तिनोनी और डॉ. दिलीप शर्मा शामिल हैं।
टी-फिटनेस में फंक्शनल इम्यून सेल मॉड्यूलेशन विभाग के प्रोफेसर और निदेशक तथा परियोजना समन्वयक गत्तिनोनी ने बताया कि उपचार की घोषणा से तीन साल पहले वे एक अंतरराष्ट्रीय बैठक के लिए नेपाल आए थे। लिंक्डइन पर एक पोस्ट में उन्होंने अपने पूर्व पोस्टडॉक्टोरल शोधकर्ता गौतम, CRM Nepal और अस्पताल की टीम को बधाई दी।
शुरुआत से इस प्रयास को सहयोग देना मेरे लिए सौभाग्य की बात रही है।
कार्यक्रम के मुख्य चरण बताते हैं कि विशेषज्ञता जुटाने से लेकर मरीज के उपचार तक काम कैसे आगे बढ़ा:
- 2022: गौतम ने विकास पहल में योगदान देना शुरू किया।
- 2023: काठमांडू में दो दिन के सम्मेलन में चिकित्सक, वैज्ञानिक, नियामक और सरकारी अधिकारी सेलुलर थेरेपी पर चर्चा के लिए एकत्र हुए।
- प्रयोगशाला में विकास: CRM Nepal ने स्वस्थ दाताओं की टी कोशिकाओं का उपयोग करके स्थानीय निर्माण क्षमता का परीक्षण किया।
- 2026: औषधि प्रशासन विभाग ने CD19 CAR-T उत्पाद को चिकित्सकीय उपयोग की मंजूरी दी। यह मंजूरी 7 मार्च तक मिलने की सूचना दी गई थी।
- 27 सितंबर: त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में पहले मरीज को स्थानीय रूप से निर्मित थेरेपी दी गई।
मंजूरी के बाद बताए गए अगले चरण में नेपाल भर के डॉक्टरों के सहयोग से इसे चिकित्सा सेवाओं में लागू करना शामिल था। पहला इन्फ्यूजन इस प्रयास की ठोस शुरुआत है।
प्रयोगशाला अध्ययन में क्या सामने आया
जर्नल फॉर इम्यूनोथेरेपी ऑफ कैंसर में प्रकाशित अकादमिक लेख विकासशील देशों में CAR-T सेल थेरेपी: हमें और कितना इंतजार करना चाहिए? नेपाल के कार्यक्रम के पीछे की वैज्ञानिक तैयारी का दस्तावेजीकरण करता है। इसमें यह जांचने के लिए तैयार किए गए व्यवहार्यता अध्ययन का वर्णन है कि क्या स्थानीय प्रयोगशालाएं ये कोशिकाएं बना सकती हैं।
शोधकर्ताओं ने स्वस्थ दाताओं की टी कोशिकाओं का इस्तेमाल कर तीन बैच तैयार किए। तीनों बैच निर्माण संबंधी सभी मानकों पर खरे उतरे। उत्पादों में 25% से 58% कोशिकाओं में जोड़ा गया CAR रिसेप्टर मौजूद था। शोधकर्ताओं ने इस माप को CAR पॉजिटिविटी कहा।
प्रयोगशाला परीक्षणों में निर्मित कोशिकाओं ने CD19 वाली कोशिकाओं को नष्ट किया और इंटरफेरॉन-गामा सहित प्रतिरक्षा संकेत देने वाले प्रोटीन जारी किए। शोधकर्ताओं ने अलग-अलग दाताओं की कोशिकाओं में वृद्धि और उत्पाद की क्षमता के समान पैटर्न भी दर्ज किए। सरल शब्दों में, प्रयोगशाला ऐसी संशोधित कोशिकाएं बना सकी जो संख्या में बढ़ीं और अपने निर्धारित लक्ष्य पर असरदार रहीं।
अध्ययन में नेपाल और विदेशों से प्राप्त सामग्री का इस्तेमाल किया गया। भारत से ली गई सामग्री में सेल कल्चर के पदार्थ, इंटरल्यूकिन-2 और सक्रियण बीड्स शामिल थे, जबकि एंटीबॉडी और आनुवंशिक संशोधन के लिए सामग्री अमेरिका से आई थी। मरीजों का उपचार शुरू करने से पहले इस काम ने निर्माण के लिए एक व्यावहारिक आधार तैयार किया।
स्थानीय निर्माण भी व्यापक आपूर्ति शृंखला पर निर्भर
CRM Nepal के अकादमिक विवरण में काठमांडू में एक केंद्रीय निर्माण और वितरण प्रणाली की योजना बताई गई। इस मॉडल में अस्पताल ल्यूकाफेरेसिस प्रक्रिया के जरिए मरीज की कोशिकाएं एकत्र करते हैं। इस प्रक्रिया में रक्त से चुनी हुई श्वेत रक्त कोशिकाएं अलग की जाती हैं। फिर एकत्र कोशिकाओं को निर्माण केंद्र तक पहुंचाया जाता है।
केंद्र मानक प्रक्रियाओं के अनुसार कोशिकाओं में बदलाव करता है और उनकी संख्या बढ़ाता है, फिर तैयार उत्पाद इन्फ्यूजन के लिए अस्पताल को वापस भेजता है। उपचार देने, मरीज की देखभाल करने और उसकी प्रतिक्रिया पर नजर रखने की जिम्मेदारी अस्पताल की टीमों की रहती है।
अध्ययन के समय CRM Nepal अच्छी विनिर्माण प्रक्रिया के मानकों को पूरा करने के लिए बनाई जा रही दो सुविधाओं पर काम कर रहा था। इन मानकों में चिकित्सा उत्पाद बनाने की प्रक्रियाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उत्पादन में एकरूपता बनाए रखना और दूषण को नियंत्रित करना है।
इसलिए नेपाल में निर्माण का मतलब सिर्फ ऐसी प्रयोगशाला होना नहीं है जो कोशिकाओं में बदलाव कर सके। इसके लिए कोशिकाओं का समन्वित संग्रह, परिवहन, उत्पादन, परीक्षण और अस्पताल में देखभाल जरूरी है। तैयार थेरेपी स्थानीय रूप से बनने पर भी इस प्रक्रिया में आयातित सामग्री का इस्तेमाल जारी रहता है।
पहला उपचार निःशुल्क, लेकिन लागत की बड़ी चुनौती
पहले मरीज की कोशिकाएं निःशुल्क देने के CRM Nepal के फैसले से उस परिवार के सामने मौजूद एक बड़ी वित्तीय बाधा दूर हुई। हालांकि, पहले के अकादमिक अध्ययन में नियोजित कार्यक्रम के लिए प्रति मरीज करीब US$40,000 की लागत का अनुमान लगाया गया था।
शोधकर्ताओं के अनुसार, अनुमानित लागत का बड़ा हिस्सा आयातित अभिकर्मकों पर खर्च होना था। इन सामग्रियों का उपयोग कोशिकाओं को विकसित करने, उनमें बदलाव करने और उनकी जांच करने में होता है। आपूर्ति विकसित देशों के साथ-साथ चीन और भारत से आने की उम्मीद थी। अध्ययन के अनुसार, निर्माण की सटीक लागत तय होने के करीब आने पर निर्धारित की जाएगी।
CRM Nepal ने सरकार, अस्पतालों, निजी संगठनों और अकादमिक केंद्रों के सहयोग से गैर-लाभकारी आधार पर उत्पादन चलाने का प्रस्ताव रखा। इस दृष्टिकोण में पहुंच बढ़ाने के लिए वित्तपोषण को निर्माण जितना ही अहम माना गया है।
जिन परिवारों को पहले विदेश में उपचार पर विचार करना पड़ता था, उन्हें अब घर के करीब एक विकल्प मिल सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय यात्रा और दूसरे देश में इलाज की व्यवस्था की जरूरत घट सकती है। फिर भी, प्रति मरीज US$40,000 की अनुमानित लागत सीमित साधनों वाले मरीजों के लिए वित्तीय सहायता को बड़ी चिंता बनाती है।
विशेषज्ञों की निगरानी उपचार का हिस्सा क्यों है
CAR-T थेरेपी से गंभीर प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं, क्योंकि संशोधित प्रतिरक्षा कोशिकाएं शरीर के भीतर सक्रिय होती हैं। CRM Nepal के अकादमिक विवरण में इन समस्याओं को पहचानने और स्थापित दिशानिर्देशों के अनुसार संभालने के लिए नर्सों और गहन देखभाल के चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने की योजना बताई गई।
एक चिंता साइटोकाइन रिलीज सिंड्रोम की है। यह सूजन संबंधी प्रतिक्रिया है, जो सक्रिय प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बड़ी मात्रा में संकेत देने वाले प्रोटीन छोड़ने पर हो सकती है। इसकी स्थिति में टोसीलिज़ुमैब और कॉर्टिकोस्टेरॉइड देने की योजना थी। इन दवाओं का इस्तेमाल सूजन संबंधी प्रतिक्रिया कम करने के लिए किया जाता है।
दूसरी चिंता इम्यून इफेक्टर सेल-एसोसिएटेड न्यूरोटॉक्सिसिटी सिंड्रोम नाम की तंत्रिका संबंधी प्रतिक्रिया है। कार्यक्रम में तंत्रिका संबंधी लक्षणों की करीबी निगरानी और जरूरत पड़ने पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड देने की योजना बताई गई। इसमें रक्त कोशिकाओं की कम संख्या के लिए सहायक उपचार, जैसे वृद्धि कारक और रक्ताधान, की योजना भी शामिल थी।
तैयारी में गहन देखभाल इकाई में भर्ती के प्रोटोकॉल, महत्वपूर्ण शारीरिक संकेतों की जांच और मरीज का लगातार आकलन भी शामिल था। त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में किशोर की विशेष निगरानी इन्फ्यूजन के साथ की जाने वाली चिकित्सकीय देखभाल का हिस्सा है, कोई वैकल्पिक अंतिम चरण नहीं।
नेपाल का अनुभव दूसरे देशों के लिए क्या मायने रखता है
गत्तिनोनी ने पहले उपचार को नेपाल से परे महत्व रखने वाली उपलब्धि बताया। उनके संदेश ने स्थानीय कार्यक्रम को कम संसाधन वाले देशों में उन्नत कैंसर देखभाल उपलब्ध कराने की व्यापक चुनौती से जोड़ा।
CAR-T थेरेपी अपने मरीजों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे अन्य निम्न और मध्यम आय वाले देशों के लिए नेपाल अब एक मॉडल बन सकता है।
अकादमिक अध्ययन इस लक्ष्य के पीछे के व्यावहारिक सबक बताता है: वैज्ञानिकों, चिकित्सकों और नियामकों को शुरुआती चरण में साथ लाना; निर्माण क्षमता विकसित करना; जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना; और मरीजों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना। 2023 में काठमांडू सम्मेलन में नियमन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग समेत इन सभी मुद्दों पर एक साथ चर्चा हुई थी।
कैंसर के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. बिष्णुदत्त पौडेल ने भी स्थानीय निर्माण की इस उपलब्धि का स्वागत किया।
"मैं हैरान हूं। नेपाल में CAR-T कोशिकाओं का उत्पादन कैंसर उपचार में एक बड़ी उपलब्धि है," डॉ. बिष्णुदत्त पौडेल ने कहा।
नेपाल को अब प्रयोगशाला में उत्पादन, नियामक मंजूरी और अस्पताल में पहले इन्फ्यूजन का अनुभव हासिल है। इस पहले उपचार को अधिक मरीजों के लिए सेवा में बदलने के लिए इन सभी व्यवस्थाओं को लगातार काम करना होगा, साथ ही भरोसेमंद वित्तपोषण और लंबे समय तक चिकित्सकीय निगरानी भी जरूरी होगी।
मुख्य बिंदु
- रक्त कैंसर से पीड़ित 17 वर्षीय मरीज को त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में नेपाल की पहली स्थानीय रूप से निर्मित CAR-T थेरेपी दी गई।
- डॉक्टरों ने इन्फ्यूजन की तारीख 27 सितंबर बताई और मरीज की स्थिति स्थिर होने के साथ शुरुआती संकेत उत्साहजनक बताए।
- उपचार का पूरा असर जानने के लिए एक साल तक मरीज की निगरानी की जाएगी।
- नेपाल के औषधि प्रशासन विभाग ने 2026 में CRM Nepal के CD19 CAR-T उत्पाद को चिकित्सकीय उपयोग की मंजूरी दी।
- पहले के प्रयोगशाला व्यवहार्यता अध्ययन में तीनों उत्पाद निर्माण संबंधी मानकों पर खरे उतरे।
- पहला उपचार निःशुल्क दिया गया, जबकि पहले के कार्यक्रम में प्रति मरीज करीब US$40,000 लागत का अनुमान लगाया गया था।
- पहुंच बढ़ाने के लिए निर्माण क्षमता, अस्पतालों में विशेषज्ञ देखभाल, आयातित आपूर्ति और वित्तीय सहायता जरूरी है।






