अमेरिकी वार्ताओं के बीच प्रभाव की होड़ तेज, म्यांमार के राजनीतिक दलों से संपर्क बढ़ा रहा चीन

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China Courts Myanmar Parties as US Talks Add to Battle for Influence

बीजिंग ने पूछा, म्यांमार में चीन की भूमिका को कैसे देखते हैं लोग

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने यांगून में नौ राजनीतिक दलों से मुलाकात कर पूछा कि म्यांमार के लोग चीन को किस नजर से देखते हैं। यह ऐसे समय हुआ है जब वॉशिंगटन और म्यांमार के सैन्य नेतृत्व के बीच सीधा संपर्क फिर शुरू होने के बीच बीजिंग अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।

विषय-सूची
  1. बीजिंग ने पूछा, म्यांमार में चीन की भूमिका को कैसे देखते हैं लोग
  2. यांगून की वार्ता में कौन शामिल हुआ?
  3. दलीय कूटनीति का पुराना इतिहास
  4. वॉशिंगटन ने खोला एक और संपर्क मार्ग
  5. अवरुद्ध राजमार्ग ने कूटनीति को रोजमर्रा के कारोबार से जोड़ा
  6. बड़े निवेश के सामने बंटा हुआ देश
  7. चीन विरोधी सशस्त्र बलों से क्यों संपर्क रखता है
  8. ठगी के गिरोहों पर कार्रवाई भी सुरक्षा की मांग
  9. जनता का असंतोष आधिकारिक मित्रता के दावे को चुनौती देता है
  10. मुख्य बातें

अंतरराष्ट्रीय संपर्क विभाग के अधिकारी पेंग श्यूबिन के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने चीन के प्रति जनता के रुख, द्विपक्षीय संबंधों की चुनौतियों और सहयोग की प्राथमिकताओं के बारे में पूछा। प्रतिभागियों ने शांति, अर्थव्यवस्था, कृषि सहायता और म्यूज़–मांडले राजमार्ग फिर खोलने पर भी चर्चा की। यह अहम मार्ग म्यांमार के वाणिज्यिक केंद्रों को चीनी सीमा से जोड़ता है।

इस बैठक में बीजिंग की नीति को आकार देने वाले तीन दबाव सामने आए: सेना को चीन के समर्थन से उपजा असंतोष, व्यापार और निवेश में बाधा, और अमेरिका की बढ़ती भागीदारी की संभावना। चीन के सैन्य नेताओं, राजनीतिक दलों और जातीय सशस्त्र संगठनों तक संपर्क हैं। इससे उसे ऐसे देश की घटनाओं को प्रभावित करने के कई रास्ते मिलते हैं, जहां युद्ध के चलते सत्ता बंटी हुई है।

बीजिंग की प्रतिबद्धताएं इन दलीय संपर्कों से आगे तक जाती हैं। म्यांमार के विदेश मंत्रालय की ओर से प्रकाशित 17 जून का संयुक्त बयान बताता है कि 15 से 19 जून 2026 तक चीन की राजकीय यात्रा के दौरान मिन आंग ह्लाइंग राष्ट्रपति थे। बयान में म्यांमार के आम चुनाव के लिए चीन का समर्थन और परिवहन, ऊर्जा तथा सुरक्षा की बड़ी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने संबंधी समझौतों का उल्लेख है।

यांगून की चर्चाओं में इन औपचारिक वादों के साथ एक तात्कालिक चिंता भी शामिल रही: क्या म्यांमार के लोग मानते हैं कि चीन की भागीदारी से उन्हें फायदा हो रहा है? प्रतिभागियों ने बताया कि कुछ दलों ने प्रतिनिधिमंडल से कहा कि जनता के कुछ वर्ग चीन को लेकर संदेह में हैं या उसके विरोधी हैं। उन्होंने बीजिंग से अपनी सहायता अधिक स्पष्ट रूप से दिखाने का आग्रह किया। यांगून बैठक की सटीक तारीख या राजमार्ग फिर खोलने की समयसीमा नहीं बताई गई।

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यांगून की वार्ता में कौन शामिल हुआ?

इन नौ दलों में सेना की समर्थक यूनियन सॉलिडैरिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी (यूएसडीपी) के साथ नेशनल यूनिटी पार्टी, पीपुल्स पार्टी, पीपुल्स पायनियर पार्टी, शान एंड नेशनलिटीज डेमोक्रेटिक पार्टी, अराकान फ्रंट पार्टी, कायिन पीपुल्स पार्टी, यूनिटी एंड डेवलपमेंट पार्टी और न्यू चिनलैंड कांग्रेस पार्टी शामिल थीं।

इनमें से अधिकतर ने सेना की हालिया चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, जिसकी व्यापक आलोचना सेना की सत्ता बनाए रखने के तरीके के रूप में हुई। उनकी भागीदारी उन्हें बीजिंग के लिए उपयोगी संपर्क बनाती है, क्योंकि अधिकारी चुनाव को अधिक टिकाऊ शासन व्यवस्था में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।

नेशनल डेमोक्रेटिक फोर्स के हत आंग क्यॉ और शान नेशनलिटीज लीग फॉर डेमोक्रेसी के साई क्यॉ न्यून्त भी शामिल हुए। सैन्य चुनावी रोडमैप को ठुकराने के बाद दोनों दल भंग कर दिए गए थे। एक दल के नेता ने बताया कि दोनों लोगों को अलग-अलग निमंत्रण मिले थे और वे अपने भंग हो चुके संगठनों का प्रतिनिधित्व करने के बजाय व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए।

प्रतिभागियों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने चर्चा के पांच व्यापक विषय रखे। जनता के रुख और द्विपक्षीय चुनौतियों के अलावा उसने सहयोग, शांति, आर्थिक हालात और घरेलू मामलों पर राय मांगी। इन बातचीत से बीजिंग को सरकारी अधिकारियों के साथ औपचारिक बैठकों से परे राजनीतिक विचार जानने का मौका मिला, हालांकि बैठक में राजनीतिक हस्तियों का एक सीमित समूह ही शामिल था।

दलीय कूटनीति का पुराना इतिहास

चीन के अंतरराष्ट्रीय संपर्क विभाग ने इनमें से कई दलों के साथ वर्षों से संबंध बनाए रखे हैं। 29 जुलाई को प्रकाशित उसकी जुलाई 2024 की बैठक संबंधी जानकारी के अनुसार, उपमंत्री सुन हाइयान ने 25 जुलाई को बीजिंग में म्यांमार के एक दलीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की थी।

उल्लेख किए गए प्रतिभागियों में यूएसडीपी, पीपुल्स पार्टी, अराकान फ्रंट पार्टी और शान एंड एथनिक डेमोक्रेटिक पार्टी शामिल थीं। सुन ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं केंद्रीय समिति के तीसरे पूर्ण अधिवेशन पर चर्चा की। यह पार्टी की वरिष्ठ स्तर की बैठक थी। उन्होंने सीमा पर करीबी सहयोग और शांति की अपील की।

म्यांमार के प्रतिनिधियों ने चीन के अंतरराष्ट्रीय बुनियादी ढांचा कार्यक्रम बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत सहयोग का समर्थन किया और म्यांमार की शांति प्रक्रिया में बीजिंग की भूमिका के लिए उसका आभार जताया। कई दलों की बार-बार भागीदारी दिखाती है कि यांगून की बैठक राजनीतिक संपर्क के एक जारी माध्यम का हिस्सा है।

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वॉशिंगटन ने खोला एक और संपर्क मार्ग

यांगून बैठक वाले महीने की शुरुआत में अमेरिकी अधिकारियों ने टोक्यो में म्यांमार के सैन्य अधिकारियों के प्रतिनिधियों से दूसरे दौर की बातचीत की। इससे पहले सितंबर में अमेरिकी विदेश मंत्रालय के खुफिया और अनुसंधान मामलों के सहायक मंत्री बताए गए माइकल वेंस ने मिन आंग ह्लाइंग से बातचीत के लिए नेपीडॉ का दौरा किया था।

प्रतिभागियों ने कहा कि चीनी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी बातचीत का जिक्र नहीं किया। इसके बावजूद कुछ दल प्रतिनिधियों ने चीन से संपर्क को प्राथमिकता देने की बात कही, क्योंकि वह म्यांमार का पड़ोसी है। वॉशिंगटन की नीति में बदलाव चाहे जो हों, भौगोलिक निकटता के कारण सीमा-पार व्यापार और सुरक्षा में बीजिंग की लगातार भूमिका बनी रहती है।

अमेरिकी प्रभाव को लेकर चिंता पहले की चीनी कूटनीतिक गतिविधियों के दौरान भी रही है। दौरों के एक पिछले सिलसिले में पेंग ने 16 अप्रैल 2023 को नेपीडॉ में पूर्व सैन्य शासक थान श्वे और पूर्व राष्ट्रपति थेइन सेन से मुलाकात की थी। चीनी दूत देंग शिजुन ने उसी साल फरवरी और मार्च में मिन आंग ह्लाइंग से मुलाकात की थी। इससे पहले वह जातीय सशस्त्र संगठनों को युन्नान में एक साथ लाए थे।

पूर्व सैन्य अधिकारियों के संगठन थायनिंगा इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज के कार्यकारी निदेशक थेइन तुन ऊ ने उन शुरुआती संपर्कों को वॉशिंगटन के साथ प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में बताया:

मुख्य बात यह है कि चीन-म्यांमार संबंध इसी आधार पर आगे बढ़ते रहेंगे।

उनकी यह टिप्पणी अमेरिकी कानून के बाद आई थी, जिसने लोकतांत्रिक ताकतों को तकनीक और सहायता देने की मंजूरी दी थी, लेकिन घातक हथियारों को इसमें शामिल नहीं किया गया था। इन ताकतों में विपक्षी नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट और जातीय सशस्त्र संगठन शामिल थे। हाल के अमेरिकी संपर्कों ने एक नया पहलू जोड़ा है: सैन्य नेतृत्व के साथ सीधी बातचीत।

अवरुद्ध राजमार्ग ने कूटनीति को रोजमर्रा के कारोबार से जोड़ा

यांगून बैठक में म्यूज़–मांडले राजमार्ग फिर खोलने को ठोस प्राथमिकता के रूप में उठाया गया। दलों के नेताओं ने चीन से मार्ग फिर खोलने में मदद मांगी और व्यापार नीति तथा कृषि के लिए तकनीकी सहायता पर चर्चा की।

पीपुल्स पायनियर पार्टी की अध्यक्ष सॉ हान ए ने इस मांग और बीजिंग की प्रतिक्रिया के बारे में कहा:

हमने चीन से निवेश बढ़ाने और जल्द से जल्द व्यापार मार्ग फिर खोलने को कहा। बीजिंग ने पुष्टि की कि वह अधिक नियमित आदान-प्रदान चाहता है।

म्यांमार के सैन्य अधिकारियों ने उत्तरी शान के प्रमुख व्यापार मार्गों पर नियंत्रण खोने के बाद चीनी आयात पर लगभग पूरी तरह रोक लगा दी। इन पाबंदियों का मकसद जातीय सशस्त्र संगठनों को उनके क्षेत्र से गुजरने वाले सामान पर वसूले जाने वाले करों से वंचित करना है। व्यापारियों और ग्राहकों को भी सामान की उपलब्धता घटने का सामना करना पड़ रहा है।

यह मार्ग दिखाता है कि केवल सीमा चौकी पर नियंत्रण से व्यापार बहाल नहीं हो सकता। सामान को अलग-अलग सशस्त्र बलों के कब्जे वाले इलाकों से गुजरना पड़ता है और यात्रा के दौरान सुरक्षा तथा अनुमति की जरूरत होती है। इससे पहले सीमा बंद होने के बाद जातीय सशस्त्र संगठनों पर चीनी दबाव के बीच सेना ने क्यौकमे और ह्सीपॉ समेत रणनीतिक कस्बों पर फिर कब्जा किया था।

जून 2026 के संयुक्त बयान में मांडले–म्यूज़ रेलवे को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी है। राजमार्ग फिर खोलने से व्यापार की तात्कालिक समस्या दूर हो सकती है; रेलवे बनाने के लिए कहीं लंबी अवधि तक निरंतर सहयोग की जरूरत होगी।

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बड़े निवेश के सामने बंटा हुआ देश

इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजी एंड पॉलिसी–म्यांमार (आईएसपी-म्यांमार) ने अपने पहले के शोध में चीन-म्यांमार आर्थिक गलियारे की 35 परियोजनाओं को निर्माणाधीन गिना था। इनमें सड़कें, रेलवे, बंदरगाह, विशेष आर्थिक क्षेत्र और शहरी विकास परियोजनाएं शामिल थीं।

आईएसपी-म्यांमार ने फरवरी 2021 से अप्रैल 2022 के बीच 4 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश भी दर्ज किया, जिसमें चीनी निवेश की हिस्सेदारी दो-तिहाई से अधिक थी। स्टिमसन सेंटर के बाद के एक आकलन में मई 2021 के 2.5 अरब डॉलर के चीनी निवेश को आखिरी बड़ा निवेश बताया गया और कहा गया कि उसके बाद तीन साल से अधिक समय तक कोई उल्लेखनीय चीनी निवेश नहीं आया। शुरुआती आंकड़े तख्तापलट के बाद निवेश में चीन की बड़ी हिस्सेदारी दिखाते हैं, जबकि बाद का आकलन बताता है कि प्रमुख नई निवेश प्रतिबद्धताओं का प्रवाह फिर धीमा पड़ गया।

26 अगस्त 2024 को प्रकाशित स्टिमसन सेंटर के विश्लेषण के लेखक म्यांमार के विद्वान थांट आंग हैं, जिन्हें विक्टर पेंग के नाम से भी जाना जाता है। इसमें कहा गया कि गृहयुद्ध, घटते व्यापार और क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेश करना लगातार मुश्किल हो रहा था।

दांव पर लगी परियोजनाओं में रखाइन राज्य का क्यौकफ्यू बंदरगाह और विशेष आर्थिक क्षेत्र, सागाइंग की लेटपदाउंग तांबे की खान, अय्यारवाडी की मी लिन ग्याइंग ऊर्जा परियोजना और न्यू यांगून सिटी शामिल हैं। क्यौकफ्यू बीजिंग के लिए खास तौर पर अहम है, क्योंकि यहां से हिंद महासागर तक पहुंच मिलती है।

जून 2026 का बयान बंदरगाह और आर्थिक गलियारे के साथ तेल और गैस पाइपलाइन, बिजली संपर्क, खनन और कृषि के लिए समर्थन दोहराता है। इसमें प्रत्यक्ष युआन–क्यात निपटान का व्यापक इस्तेमाल भी प्रस्तावित है, जिससे दोनों देशों की मुद्राओं में व्यापार भुगतान हो सकेगा। इन प्रतिबद्धताओं को चालू बुनियादी ढांचे में बदलना उन इलाकों के हालात पर निर्भर करेगा जहां लड़ाई जारी है।

चीन विरोधी सशस्त्र बलों से क्यों संपर्क रखता है

विस्तृत भूभाग गंवाने के बावजूद म्यांमार की सेना के नियंत्रण में राज्य का अहम बुनियादी ढांचा है। स्टिमसन के विश्लेषण में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, समुद्री बंदरगाह, यांगून और अन्य आर्थिक रूप से अहम इलाके ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से बीजिंग अधिकारियों के वरिष्ठ नेताओं से संपर्क बनाए हुए है।

जातीय सशस्त्र संगठन और अन्य प्रतिरोधी बल उस क्षेत्र पर नियंत्रण रखते हैं जो चीन की सीमा सुरक्षा और व्यापार के लिए अहम है। 30 मई 2024 की स्पेशल एडवाइजरी काउंसिल फॉर म्यांमार की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए विश्लेषण में कहा गया कि प्रतिरोधी बलों का चीन की सीमा से लगे 18 में से 11 टाउनशिप पर पूरा नियंत्रण था। उस समय यह उन टाउनशिप का करीब 61 प्रतिशत था।

इसलिए बीजिंग के पास दोनों पक्षों से बात करने के व्यावहारिक कारण हैं। सैन्य नेता उन संस्थानों पर नियंत्रण रखते हैं जिनके जरिए अंतरराष्ट्रीय समझौते लागू होते हैं, जबकि सशस्त्र समूह यह प्रभावित कर सकते हैं कि सड़कें, सीमा चौकियां और आस-पास के कारोबार चलेंगे या नहीं।

चीन के दबाव का असर सैन्य घटनाक्रम पर भी पड़ा है। शान स्टेट रिस्टोरेशन काउंसिल के अध्यक्ष जनरल यावद सेर्क ने फरवरी 2026 में जारी हवाई हमलों और चुनावों के बीच आम नागरिकों की पीड़ा पर बात की। उनकी चिंताएं उन समुदायों के लिए दांव पर लगी बातों को दिखाती हैं जो कूटनीतिक बैठकों और नई राजनीतिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ जारी युद्ध में जी रहे हैं।

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ठगी के गिरोहों पर कार्रवाई भी सुरक्षा की मांग

ऑनलाइन धोखाधड़ी के गिरोहों ने म्यांमार की अस्थिरता को चीनी नागरिकों के लिए सीधे चिंता का विषय बना दिया है। आपराधिक गिरोहों ने लोगों को भर्ती किया या तस्करी कर पहरे वाले परिसरों में पहुंचाया, जहां कर्मचारी फर्जी निवेश, ऑनलाइन रिश्तों और जुए की योजनाओं के जरिए पीड़ितों को ठगते हैं।

स्टिमसन के विश्लेषण में 2023 में म्यांमार के ठगी कारोबार में 1,20,000 लोगों के काम करने और इस उद्योग से सालाना 15.3 अरब डॉलर की कमाई होने का अनुमान दिया गया। यह उस साल म्यांमार के सकल घरेलू उत्पाद का करीब एक-चौथाई था। सकल घरेलू उत्पाद किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापता है; यह तुलना आपराधिक कारोबार के अनुमानित पैमाने को बताती है।

चीन ने मई 2023 में सैन्य अधिकारियों से ठगी केंद्रों को खत्म करने की मांग की। उसी साल बाद में थ्री ब्रदरहुड अलायंस ने उत्तरी म्यांमार में अपने बड़े अभियान ऑपरेशन 1027 के उद्देश्यों में इन केंद्रों को खत्म करना भी शामिल किया।

उत्तर में दबाव बढ़ने से ये कारोबार थाई सीमा के पास श्वे कोक्को समेत अन्य जगहों पर चले गए। इस इलाके पर कर्नल सॉ चित तू के नेतृत्व वाली करेन नेशनल आर्मी का नियंत्रण है। इसके सैन्य और व्यावसायिक महत्व ने इन परिसरों को बंद करने की कोशिशों को जटिल बना दिया।

बाद में चीन ने इस अभियान को अपनी अदालतों तक पहुंचाया। 29 जनवरी से 2 फरवरी 2026 के बीच ठगी गिरोह के नेताओं को मृत्युदंड दिया गया। इस मामले में मिंग और बाई आपराधिक गिरोहों के 15 सदस्य शामिल थे। जून के संयुक्त बयान में ऑनलाइन धोखाधड़ी, मानव तस्करी, अवैध जुए और अन्य अपराधों के खिलाफ आगे सहयोग करने तथा चीनी नागरिकों और परियोजनाओं की सुरक्षा का वादा किया गया है।

जनता का असंतोष आधिकारिक मित्रता के दावे को चुनौती देता है

फरवरी 2021 के तख्तापलट के बाद से म्यांमार में लगातार सैन्य सरकारों को चीन के समर्थन, जिसमें हथियार, तकनीक और कूटनीतिक मदद शामिल है, ने लोगों में गुस्सा बढ़ाया है। 2024 में यह नाराजगी और बढ़ी, जब बीजिंग ने उत्तरी शान में सेना की स्थिति को खतरा पहुंचाने वाले अभियानों को रोकने के लिए जातीय सशस्त्र संगठनों पर दबाव डाला।

देशव्यापी युद्धविराम समझौते की वर्षगांठ के एक समारोह में जातीय स्वायत्तता को लेकर देंग शिजुन की अपील की आलोचना हुई। आलोचकों ने कहा कि उत्तरी शान के इलाकों पर पहले से नियंत्रण रखने वाले सशस्त्र संगठनों पर चीन का प्रभाव है। बीजिंग दखलंदाजी के आरोपों को खारिज करता है और अपनी भूमिका को शांति तथा सहयोग के समर्थन के रूप में पेश करता है।

विपक्षी नेशनल यूनिटी गवर्नमेंट जारी अस्थिरता की एक अलग व्याख्या पेश करती है। उसके राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता क्यॉ ज़ॉ ने कहा कि चीन की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के लिए सैन्य शासन का अंत जरूरी है:

जब तक जुंटा है, म्यांमार में शांति नहीं होगी।

यांगून में शामिल दलों ने बीजिंग के सामने एक और जवाब रखा: अधिक स्पष्ट सहायता और निवेश, तथा व्यापार फिर शुरू करना। उनकी मांगें जनमत को ऐसे नतीजों से जोड़ती हैं जिन्हें लोग महसूस कर सकें, जैसे सामान तक पहुंच, कृषि उत्पाद बेचने के अवसर और सुरक्षित परिवहन।

कई तारीखें दिखाती हैं कि आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी ये चिंताएं एक-दूसरे के साथ कैसे विकसित हुई हैं:

  • फरवरी 2021: सेना ने सत्ता पर कब्जा किया, जिसके बाद देशव्यापी संघर्ष बढ़ा।
  • मई 2023: चीन ने सैन्य अधिकारियों से ठगी केंद्रों को खत्म करने की मांग की।
  • 2023 के आखिर में: ऑपरेशन 1027 ने उत्तरी सीमा के अहम इलाकों पर नियंत्रण की स्थिति बदल दी।
  • 25 जुलाई 2024: सुन हाइयान ने बीजिंग में म्यांमार के राजनीतिक दलों से मुलाकात की।
  • 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में: सेना ने उन इलाकों में चुनाव कराए जहां मतदान आयोजित किया जा सका।
  • 17 जून 2026: चीन और म्यांमार ने बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और राजनीतिक सहयोग से जुड़ी प्रतिबद्धताएं जारी कीं।

अब बीजिंग को म्यांमार से जुड़े अपने अलग-अलग संबंधों से उठने वाली मांगों का सामना करना पड़ रहा है: अधिकारी निवेश और मान्यता चाहते हैं, राजनीतिक दल व्यापार बहाल करने की मांग कर रहे हैं और समुदाय सुरक्षा तथा आजीविका चाहते हैं। कई पक्षों तक पहुंच चीन को प्रभाव देती है, जबकि जारी संघर्ष के कारण इन मांगों को पूरा करना मुश्किल है।

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मुख्य बातें

  • चीन के प्रतिनिधिमंडल ने यांगून में म्यांमार के नौ राजनीतिक दलों से मुलाकात कर जनता के रुख, सहयोग और घरेलू मामलों के बारे में पूछा।
  • दलों के नेताओं ने निवेश, कृषि सहायता और म्यूज़–मांडले राजमार्ग फिर खोलने की मांग की।
  • सैन्य प्रतिनिधियों के साथ अमेरिका का फिर शुरू हुआ संपर्क, चीन के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों के साथ कूटनीति का एक और माध्यम जोड़ता है।
  • जून 2026 का संयुक्त बयान प्रमुख गलियारा परियोजनाओं, व्यापार सहयोग और सीमा-पार अपराध के खिलाफ मजबूत कार्रवाई का समर्थन करता है।
  • चीन सैन्य अधिकारियों और उन सशस्त्र संगठनों, दोनों से संपर्क बनाए हुए है जो उसके हितों के लिए अहम इलाकों पर नियंत्रण रखते हैं।
  • बीजिंग के सैन्य समर्थन को लेकर जनता में असंतोष, मित्रता और विकास के उसके वादों के लिए चुनौती बना हुआ है।
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