समन्वित न्यायिक कार्रवाई
चीन ने म्यांमार के कानूनविहीन सीमावर्ती इलाकों से संचालित दो शक्तिशाली आपराधिक परिवारों के नेतृत्व को निशाना बनाते हुए व्यापक स्तर पर मृत्युदंड दिए हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी और मानव तस्करी के खिलाफ बीजिंग के अभियान में अभूतपूर्व तेजी का संकेत मिलता है। एक सप्ताह से भी कम समय में चीनी अधिकारियों ने कुख्यात मिंग और बाई परिवारों के 15 सदस्यों को मृत्युदंड दिया। इन आपराधिक गिरोहों पर जबरन श्रम, यातना और दुनिया भर के लोगों को निशाना बनाने वाली परिष्कृत ऑनलाइन ठगी योजनाओं के जरिए अरबों डॉलर कमाने वाले औद्योगिक पैमाने के ठगी केंद्र चलाने का आरोप था।
विषय-सूची
चीन के सर्वोच्च जन न्यायालय की मंजूरी के बाद वेनझोउ और शेनझेन की अदालतों द्वारा दिए गए ये मृत्युदंड म्यांमार के ठगी केंद्रों के संचालकों के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर न्यायिक कार्रवाई हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के अनुसार, वैश्विक आपराधिक कारोबार का हिस्सा रहे इन केंद्रों से सालाना 40 अरब डॉलर की कमाई होती है। यहां मानव तस्करी के जरिए लाए गए लाखों लोगों को जेल जैसी परिस्थितियों में रखा जाता है और उनसे रोमांस के नाम पर निवेश की ठगी कराई जाती है। इस तरह की योजनाओं को “पिग बुचरिंग” अभियान कहा जाता है।
29 जनवरी से 2 फरवरी, 2026 के बीच चीनी सरकारी मीडिया ने दो अलग-अलग चरणों में इन मृत्युदंडों की घोषणा की। पहले मिंग परिवार के आपराधिक गिरोह के 11 सदस्यों को निशाना बनाया गया, फिर बाई परिवार के गिरोह के चार अन्य नेताओं को मृत्युदंड दिया गया। इन सजाओं की तेजी और अंतिमता दिखाती है कि बीजिंग म्यांमार के गृहयुद्ध से प्रभावित सीमावर्ती इलाकों में फल-फूल रहे आपराधिक नेटवर्क को खत्म करने के लिए दृढ़ है। वहीं, मानवाधिकार संगठन चीन की न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और शेष तस्करी पीड़ितों के भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं।
मिंग परिवार: सीमा पर हिंसा
29 जनवरी को पूर्वी झेजियांग प्रांत की वेनझोउ इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने मिंग परिवार के आपराधिक गिरोह के 11 प्रमुख सदस्यों को मृत्युदंड दिया। इनमें म्यांमार की सत्तारूढ़ सैन्य सरकार के साथ गठबंधन करने वाले कोकांग बॉर्डर गार्ड फोर्स के नेता मिंग गुओपिंग और उनकी बेटी मिंग झेनझेन शामिल थीं। परिवार के मुखिया मिंग शुएचांग म्यांमार की संसद के सदस्य रह चुके थे। 2023 के अंत में गिरफ्तारी के बाद हिरासत में रहते हुए उन्होंने आत्महत्या कर ली थी।
अदालत ने पाया कि मिंग गिरोह ने 2015 से म्यांमार के कोकांग स्वायत्त क्षेत्र में कई ठिकाने बनाए थे, खासकर लौक्काई, शियुआनज़ी और चिनश्वेहॉ इलाके में। अपने चरम पर इस संगठन ने कुख्यात क्राउचिंग टाइगर विला परिसर और अन्य केंद्रों में 10,000 लोगों को काम पर रखा था। दूरसंचार धोखाधड़ी और अवैध जुए के जरिए उसने 10 अरब युआन (1.4 अरब डॉलर) से अधिक की कमाई की।
सितंबर 2025 में सुनाई गई मृत्युदंड की सजा के खिलाफ दो आरोपियों की अपील के बाद मामले की समीक्षा करने वाले सर्वोच्च जन न्यायालय के अनुसार, मिंग परिवार ने अपने प्रभाव और हथियारों तक पहुंच का इस्तेमाल आपराधिक वित्तपोषकों को सशस्त्र सुरक्षा देने के लिए किया और नियंत्रण बनाए रखने के लिए व्यवस्थित रूप से घातक हिंसा का सहारा लिया। अदालत ने पुष्टि की कि गिरोह ने जानबूझकर श्रमिकों की हत्या की, उन्हें घायल किया और गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखा। इसके चलते 14 चीनी नागरिकों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए।
अक्टूबर 2023 की एक बेहद हिंसक घटना में, आरोप है कि मिंग परिवार के लोगों ने बंदी बनाए गए चीनी नागरिकों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाते समय उन पर गोलीबारी की। अधिकारियों को आसन्न छापे की सूचना मिल चुकी थी और बंदियों को छुड़ाए जाने से रोकने के लिए चार लोगों की हत्या कर दी गई। चीनी सरकारी प्रसारक सीसीटीवी के मुताबिक, गोलीबारी के समय गिरोह बंदूकधारियों की निगरानी में श्रमिकों को साइबर ठगी केंद्र से ले जा रहा था। अदालत ने इन अपराधों को “बेहद जघन्य” और “विशेष रूप से गंभीर परिस्थितियों वाला” बताया।
बाई गिरोह: नशीले पदार्थ और औद्योगिक स्तर की ठगी
चार दिन बाद, 2 फरवरी को दक्षिणी गुआंगदोंग प्रांत की शेनझेन इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने बाई परिवार के आपराधिक गिरोह के चार अन्य नेताओं को मृत्युदंड दिए जाने की घोषणा की। एक सप्ताह से भी कम समय में म्यांमार स्थित ठगी संचालकों के खिलाफ यह मृत्युदंड की दूसरी कार्रवाई थी। मृत्युदंड पाने वालों में बाई यिंगकांग शामिल थे, जबकि परिवार के कथित मुखिया बाई सुओचेंग की नवंबर 2025 में दोषसिद्धि के बाद बीमारी से मौत हो गई थी।
बाई गिरोह ने चीन की सीमा से लगे उसी कोकांग क्षेत्र में औद्योगिक पार्क बनाए थे। अदालत के अनुसार, इसने समानांतर आपराधिक साम्राज्य चलाते हुए पीड़ितों से 29 अरब युआन (4.2 अरब डॉलर) से अधिक की ठगी की। दूरसंचार धोखाधड़ी और अवैध जुए के अलावा बाई संगठन अपहरण, जबरन वसूली, देह व्यापार के लिए मजबूर करने और बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थ बनाने में शामिल था। इसमें लगभग 11 टन मेथामफेटामाइन का उत्पादन भी शामिल था।
सर्वोच्च जन न्यायालय के अनुसार, उनकी आपराधिक गतिविधियों के कारण छह चीनी नागरिकों की मौत हुई और अन्य लोग घायल हुए। दिसंबर 2025 में गुआंगदोंग प्रांतीय उच्च जन न्यायालय द्वारा आरोपियों की अपील खारिज किए जाने के बाद सर्वोच्च जन न्यायालय ने मृत्युदंड की मंजूरी दी। अदालत ने कहा कि गिरोह के अपराधों का पैमाना और उनकी क्रूरता “समाज के लिए बहुत बड़ा खतरा” थी।
बाई परिवार ने कोकांग की राजधानी लौक्काई में खुद को एक प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित किया था। वहां उन्होंने साइबर ठगी के साथ-साथ विशाल कैसीनो परिसरों और रेड लाइट इलाकों का संचालन किया। उनके औद्योगिक पार्क किलेबंद परिसरों की तरह काम करते थे, जहां तस्करी के जरिए लाए गए श्रमिकों को हथियारबंद पहरेदारों की लगातार निगरानी में रखा जाता था।
ठगी परिसरों के भीतर
इन मृत्युदंडों का निशाना एक ऐसे आपराधिक उद्योग के शीर्ष लोग हैं जिसने दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों को साइबर धोखाधड़ी के वैश्विक केंद्रों में बदल दिया है। अक्सर किलेबंद औद्योगिक पार्क कहे जाने वाले ठगी परिसर कॉल सेंटर और हिरासत केंद्र, दोनों की तरह काम करते हैं। तस्कर मुख्य रूप से चीन और अन्य एशियाई देशों से लोगों को आकर्षक तकनीकी नौकरियों का झूठा वादा करने वाले विज्ञापनों के जरिए भर्ती करते हैं। म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में पहुंचने पर श्रमिकों के पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते हैं और उन्हें कड़ी निगरानी वाले केंद्रों में बंद कर दिया जाता है।
इन परिसरों के भीतर तस्करी के शिकार लोगों को परिष्कृत ठगी योजनाएं चलाने के लिए मजबूर किया जाता है। इनमें खास तौर पर “पिग बुचरिंग” ठगी शामिल है, जिसमें रोमांस के नाम पर धोखे को क्रिप्टोकरेंसी निवेश योजनाओं के साथ जोड़ा जाता है। श्रमिक दुनिया भर के पीड़ितों के साथ ऑनलाइन झूठे रिश्ते बनाते हैं और धीरे-धीरे उनका भरोसा जीतने के बाद उन्हें बचत चुराने के लिए बनाए गए फर्जी निवेश मंचों की ओर ले जाते हैं। वित्तीय लक्ष्य पूरा न कर पाने वालों को शारीरिक प्रताड़ना और यातना दी जाती है या दूसरे आपराधिक गिरोहों को बेच दिया जाता है। भागने की कोशिशों का अंजाम अक्सर मौत होता है।
यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस का अनुमान है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के ये ठगी अभियान सालाना 43 अरब डॉलर से अधिक चुराते हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय ने चेतावनी दी है कि यह उद्योग दुनिया भर में फैल रहा है और दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, मध्य पूर्व तथा प्रशांत द्वीपों तक पहुंच चुका है। इंटरपोल ने इन अभियानों को लोगों की आपूर्ति करने वाले मानव तस्करी नेटवर्क के विस्तार पर खास चिंता जताई है। अनुमान है कि दुनिया भर के ठगी केंद्रों में लाखों लोग काम कर रहे हैं। इनमें से कई कोविड-19 महामारी के बाद क्षेत्र में फंस गए थे।
परिसरों के भीतर श्रमिक जेल जैसी परिस्थितियों की जानकारी देते हैं। वित्तीय लक्ष्य पूरा न कर पाने वालों को हथियारबंद पहरेदार नियमित रूप से प्रताड़ित करते हैं और यातना देते हैं। मिंग और बाई परिवारों ने अपने अभियानों पर नियंत्रण रखने के लिए खास तौर पर घातक हिंसा का इस्तेमाल किया। सर्वोच्च जन न्यायालय ने पुष्टि की कि उन्होंने ठगी के अभियानों में शामिल लोगों की जानबूझकर हत्या की, उन पर हमले किए और उन्हें गैरकानूनी ढंग से हिरासत में रखा।
कोकांग का आपराधिक तंत्र
मिंग और बाई परिवार उन “चार परिवारों” में से दो हैं, जिन्होंने वर्षों तक कोकांग की आपराधिक अर्थव्यवस्था पर दबदबा बनाए रखा। इनके साथ लियू और वेई गिरोह भी शामिल थे। इन संगठनों ने स्वायत्त क्षेत्र में बिना रोकटोक काम किया। स्थानीय मिलिशिया और म्यांमार की सैन्य सरकार से अपने गहरे संबंधों का फायदा उठाकर उन्होंने एक समानांतर व्यवस्था कायम की, जिस पर संगठित अपराध का शासन था।
कोकांग की राजधानी लौक्काई अनियमित कैसीनो, रेड लाइट इलाकों और साइबर ठगी केंद्रों के लिए बदनाम हो गई। यहां ऐसी धुंधली कानूनी स्थिति में कारोबार चलता था, जहां चीनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की पहुंच सीमित थी और म्यांमार की केंद्रीय सत्ता कमजोर बनी हुई थी। परिवार के सदस्य स्थानीय सरकार और मिलिशिया ढांचों में आधिकारिक पदों पर थे, जिससे उनके आपराधिक कारोबार को राजनीतिक संरक्षण और सशस्त्र सुरक्षा दोनों मिलती थी।
फरवरी 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद शुरू हुए म्यांमार के गृहयुद्ध की उथल-पुथल के बीच ठगी उद्योग फला-फूला। सीमावर्ती इलाकों में केंद्रीय शासन के ढहने पर आपराधिक गिरोहों ने सत्ता के खालीपन का फायदा उठाकर अपने अभियान बढ़ाए। उन्होंने महामारी के दौरान सीमा बंद होने और आर्थिक उथल-पुथल के चलते फंसे मजबूर प्रवासियों को भर्ती किया। कोकांग की स्वायत्त स्थिति और चीनी सीमा से उसकी नजदीकी ने इन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कारोबारों के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा कीं।
चीनी सरकारी मीडिया के अनुसार, मिंग परिवार ने म्यांमार की सत्तारूढ़ सैन्य सरकार के साथ गठबंधन करने वाली कोकांग बॉर्डर गार्ड फोर्स में अपनी स्थिति का खास तौर पर इस्तेमाल ठगी परिसरों को सशस्त्र सुरक्षा देने के लिए किया। आपराधिक गिरोहों और स्थानीय मिलिशिया के इस संबंध ने जबरन श्रम और हिंसा पर निर्भर होने के बावजूद इस उद्योग को वर्षों तक खुलेआम चलने दिया।
सीमा पार बीजिंग की कार्रवाई
बीजिंग की आक्रामक न्यायिक कार्रवाई से पहले म्यांमार और पड़ोसी देशों पर ठगी परिसरों को खत्म करने का दबाव कई वर्षों से बढ़ रहा था। नवंबर 2023 में चीनी अधिकारियों ने मिंग परिवार के सदस्यों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए और उनकी गिरफ्तारी के लिए 14,000 से 70,000 डॉलर तक के इनाम घोषित किए। इस समन्वित कार्रवाई के चलते ठगी के संदिग्ध हजारों संचालकों को चीन वापस भेजा गया। इनमें 2025 में अकेले म्यांमार के म्यावाडी शहर से लौटाए गए 7,600 से अधिक चीनी नागरिक शामिल हैं।
ये मृत्युदंड क्षेत्रीय सहयोग के व्यापक प्रयासों के अनुरूप हैं। इनमें फरवरी में ठगी के संदिग्धों को वापस भेजने के लिए चीन, म्यांमार और थाईलैंड के बीच शुरू हुए संयुक्त अभियान शामिल हैं। मृत्युदंडों के बारे में पूछे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि बीजिंग सीमा पार अपराधों से निपटने के प्रयास तेज करता रहेगा।
कुछ समय से चीन सीमा पार दूरसंचार और ऑनलाइन धोखाधड़ी के अपराधों से निपटने तथा ऑनलाइन जुए और दूरसंचार धोखाधड़ी की समस्या खत्म करने के लिए म्यांमार और अन्य देशों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इन प्रयासों के उल्लेखनीय परिणाम मिले हैं। चीन अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन सहयोग को और गहरा करना जारी रखेगा, दूरसंचार धोखाधड़ी, ऑनलाइन जुए और अन्य संबंधित सीमा पार अपराधों से निपटने के प्रयास तेज करेगा और जुए तथा ठगी की समस्याओं को खत्म करेगा।
इन सजाओं की कठोरता अपराधों के पैमाने और ऐसे अभियानों को रोकने के चीन के संकल्प, दोनों को दर्शाती है। एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, चीन हर साल किसी भी अन्य देश से अधिक लोगों को मृत्युदंड देता है। कानूनी मामलों के जानकारों का कहना है कि इन घोषणाओं को सार्वजनिक करना और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों के नेतृत्व को खास तौर पर निशाना बनाना एक रणनीतिक संदेश देने का प्रयास है, जिसका मकसद दूसरे गिरोहों को ऐसे काम से रोकना है।
वैश्विक असर और मानव तस्करी
मिंग और बाई आपराधिक नेटवर्क पर तत्काल असर से आगे, ये मृत्युदंड साइबर ठगी केंद्रों को संगठित अपराध और मानवाधिकारों के उल्लंघन के रूप में संबोधित करने की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय जरूरत को उजागर करते हैं। यह उद्योग स्थानीय अभियानों से बढ़कर वैश्विक खतरा बन गया है। अब आपराधिक समूह चीनी भाषी लोगों से आगे बढ़कर कई भाषाओं में ठगी कर रहे हैं, जिससे उत्तरी अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया के लोग प्रभावित हो रहे हैं।
यह मामला म्यांमार की जारी अस्थिरता से पैदा हुई जटिल भू-राजनीतिक चुनौतियों को भी रेखांकित करता है। गृहयुद्ध जारी रहने के बीच आपराधिक गिरोहों को बिना शासन वाले सीमावर्ती इलाकों में अनुकूल माहौल मिला है। इससे कानून प्रवर्तन में ऐसी खामियां पैदा हुई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए अभूतपूर्व सीमा पार न्यायिक सहयोग की जरूरत है। प्रतिबंधित प्रिंस समूह के प्रमुख और कथित ठगी सरगना चेन झी को इस साल की शुरुआत में कंबोडिया से चीन प्रत्यर्पित किया जाना, इन नेटवर्कों के खिलाफ बीजिंग के अभियान के बढ़ते दायरे को दिखाता है।
म्यांमार, कंबोडिया और लाओस के परिसरों में अब भी बंदी बनाए गए हजारों तस्करी पीड़ितों के लिए इन दो परिवारों का खात्मा उम्मीद तो जगाता है, लेकिन उनकी तत्काल रिहाई की कोई गारंटी नहीं देता। मानवाधिकार संगठन क्षेत्रीय सरकारों पर दबाव बना रहे हैं कि वे आपराधिक मुकदमों के साथ पीड़ितों को बचाने को भी प्राथमिकता दें और यह सुनिश्चित करें कि धोखाधड़ी वाले काम के लिए मजबूर किए गए लोगों को सजा के बजाय संरक्षण मिले।
संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय ने अप्रैल 2025 में चेतावनी दी थी कि चीनी और दक्षिण-पूर्व एशियाई गिरोह इन अभियानों से हर साल अरबों डॉलर कमा रहे हैं और यह उद्योग दुनिया भर में फैलने के संकेत दे रहा है। चीन में दिए गए मृत्युदंड गंभीर आपराधिक सजाओं के जरिए इस रुझान को रोकने की एक सरकार की कोशिश को दर्शाते हैं। हालांकि, अरबों डॉलर के वैश्विक उद्योग के खिलाफ ऐसे उपाय कितने कारगर होंगे, यह अब भी अनिश्चित है।
मुख्य बातें
- चीन ने 29 जनवरी और 2 फरवरी, 2026 को अलग-अलग घोषणाओं में म्यांमार स्थित दो आपराधिक परिवारों के 15 सदस्यों को मृत्युदंड दिया
- मिंग परिवार के 11 लोगों को मृत्युदंड दिया गया, जिनमें मिंग गुओपिंग और मिंग झेनझेन शामिल थे; मुखिया मिंग शुएचांग की हिरासत में मौत हो गई थी
- बाई परिवार के चार लोगों को मृत्युदंड दिया गया; सजा सुनाए जाने के बाद मुखिया बाई सुओचेंग की बीमारी से मौत हो गई थी
- दूरसंचार धोखाधड़ी, जुए और नशीले पदार्थों की तस्करी से अपराध की कुल कमाई 5.6 अरब डॉलर से अधिक थी
- इन अभियानों के चलते कम से कम 20 चीनी नागरिकों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए
- म्यांमार के कोकांग क्षेत्र के ठगी परिसरों में तस्करी के जरिए लाए गए श्रमिकों से वैश्विक साइबर धोखाधड़ी कराई जाती थी, जिसका अनुमानित सालाना कारोबार 40 से 43 अरब डॉलर है
- प्रांतीय उच्च न्यायालयों द्वारा अपील खारिज किए जाने के बाद चीन के सर्वोच्च जन न्यायालय ने मृत्युदंडों को मंजूरी दी
- बीजिंग ने ठगी केंद्रों को खत्म करने और हजारों संदिग्धों को वापस भेजने के लिए म्यांमार और थाईलैंड के साथ सीमा पार सहयोग तेज किया है






