प्रबोवो के दो साल पूरे होने पर इंडोनेशिया के छात्रों ने जीवनयापन की लागत और जंगल की आग पर कार्रवाई की मांग की

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Indonesia Students Demand Action on Living Costs and Wildfires as Prabowo Marks Two Years

प्रदर्शनों में घरेलू मुश्किलों को बढ़ते आग संकट से जोड़ा गया

राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के कार्यकाल के दो साल पूरे होने पर 20 अक्टूबर, 2026 को इंडोनेशिया भर में छात्रों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने जरूरी चीजों को सस्ता करने, रोजगार के अधिक अवसर देने और जंगल की आग पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने जकार्ता में 9,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया, जहां अधिकारियों के मुताबिक 26 प्रदर्शन आयोजित होने थे।

विषय-सूची
  1. प्रदर्शनों में घरेलू मुश्किलों को बढ़ते आग संकट से जोड़ा गया
  2. शहरों में छात्रों की मांगें
  3. धुंध से स्वास्थ्य के साथ-साथ कमाई भी प्रभावित
  4. कितनी भूमि जल चुकी है?
  5. चेतावनियों, जांच और प्रदर्शनों का एक सप्ताह
  6. आग बुझाने के आदेश और जमीनी हकीकत
  7. जांचकर्ताओं ने कंपनियों और संदिग्धों की पहचान की
  8. जकार्ता और प्रांतीय अधिकारियों में जिम्मेदारी को लेकर मतभेद
  9. क्षेत्रीय सहायता को लेकर विरोधाभासी बयान
  10. स्मारक पर प्रदर्शन के बाद ग्रीनपीस कार्यकर्ता रिहा
  11. मुख्य बातें

ये प्रदर्शन जंगल की आग पर नजर रखने वाली संस्था नुसंतारा एटलस के इस अनुमान के एक दिन बाद हुए कि जनवरी से सितंबर के बीच 1,916,588 हेक्टेयर भूमि जल चुकी थी। 13 अक्टूबर तक आग से प्रभावित सात प्रांतों में सांस की गंभीर बीमारियों के 283,000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके थे। इससे आर्थिक असंतोष के बीच शुरू हुए प्रदर्शनों में सार्वजनिक स्वास्थ्य का आपातकाल भी एक मुद्दा बन गया।

जकार्ता, बांडुंग, योग्याकार्ता, पेकनबारू और मकास्सर में रैलियां हुईं। छात्रों ने मांग की कि आग को राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए, आग लगाने के लिए जिम्मेदार कंपनियों पर मुकदमा चलाया जाए और शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा अधिक किफायती बनाई जाए। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की मजबूत सुरक्षा की भी मांग की।

20 अक्टूबर, 2024 को उपराष्ट्रपति जिब्रान राकाबुमिंग राका के साथ पदभार संभालने वाले प्रबोवो ने आग पर चर्चा के लिए 19 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों को मर्देका पैलेस बुलाया था। राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ लिस्त्यो सिगित प्रबोवो ने कहा कि राष्ट्रपति ने हवाई अभियान तेज करने, बेहतर समन्वय और कंपनियों से संभावित संबंध वाले 98 मामलों की तेज जांच के आदेश दिए।

इस वर्षगांठ के मौके पर कई दबाव एक साथ सामने आए: नौकरी पाने में संघर्ष कर रहे स्नातक, बढ़ती कीमतों का सामना करते परिवार और ऐसे समुदाय जहां धुएं से स्कूल, परिवहन और रोजाना की कमाई प्रभावित हुई है। प्रभावित इलाकों के निवासियों ने आग को स्वास्थ्य संकट और आजीविका के लिए खतरा, दोनों बताया।

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शहरों में छात्रों की मांगें

सैकड़ों विश्वविद्यालयी छात्र जकार्ता के तुगु तानी स्मारक के आसपास जुटे। दर्जनों अन्य लोगों ने मध्य जकार्ता में अर्जुना विजया प्रतिमा के पास भी प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की और आपात स्थिति से निपटने के प्रशासन के तरीके की आलोचना की।

नौ विश्वविद्यालयों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘सदार’ नामक गठबंधन ने प्रोक्लामासी स्मारक पर शुरुआती प्रदर्शन किया। इसके बाद पश्चिमी इंडोनेशिया समयानुसार दोपहर 3 बजे तुगु तानी में एक और रैली होनी थी। इसमें इंडोनेशिया विश्वविद्यालय, बांडुंग प्रौद्योगिकी संस्थान, पदजादजारन विश्वविद्यालय, डिपोनेगोरो विश्वविद्यालय, गदजाह मादा विश्वविद्यालय, एयरलांगा विश्वविद्यालय और ब्राविजया विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि शामिल थे।

इंडोनेशिया विश्वविद्यालय के छात्र कार्यकारी बोर्ड के सामाजिक और राजनीतिक समन्वयक हफीज हर्नांदा ने बताया कि गठबंधन ने इंडोनेशिया की स्वतंत्रता से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल को क्यों चुना।

हमने प्रोक्लामासी स्मारक इसलिए चुना क्योंकि यह उन संस्थापकों की याद दिलाता है जिन्होंने इंडोनेशिया की स्थापना की थी, लेकिन आखिरकार इंडोनेशिया वैसा नहीं है जैसा उन्होंने सोचा था।

बांडुंग में छात्रों ने अधिक रोजगार और कीमतों में स्थिरता की मांग की। जकार्ता में वक्ताओं ने दूरदराज के इलाकों में शिक्षा सुविधाओं की असमानता और नौकरी खोजते स्नातकों की मुश्किलों का मुद्दा भी उठाया। उनकी मांगों में शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती को लेकर हुए पहले के छात्र प्रदर्शनों की चिंताएं भी शामिल थीं। ये प्रदर्शन 2025 में सरकार के मुफ्त भोजन कार्यक्रम पर बहस के बीच हुए थे।

सेमारांग राजकीय विश्वविद्यालय के छात्र गठबंधन की अध्यक्ष सेप्तिया लिनासारी ने आर्थिक असमानता को असंतोष का प्रमुख कारण बताया। प्रदर्शनों में सार्वजनिक खर्च के बंटवारे पर शिकायतों को रोजगार, सस्ती सेवाओं और घरेलू खर्चों में बढ़ोतरी से राहत की तात्कालिक मांगों से जोड़ा गया।

धुंध से स्वास्थ्य के साथ-साथ कमाई भी प्रभावित

मध्य कालीमंतान का पलंगकराया दिखाता है कि पर्यावरण और आर्थिक मांगें क्यों एक साथ जुड़ गई हैं। निवासियों ने लगातार खांसी, घरों में घुसते धुएं और बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहकों से वंचित होते कारोबारों की बात कही।

सड़क किनारे पेय पदार्थ बेचने वाली 40 वर्षीय विक्रेता मेल्सी ने बताया कि उनके परिवार की आय पर कितना दबाव है।

यह धुंध सचमुच बहुत खराब है। बिक्री ठप है। कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन आमदनी नहीं है।

29 वर्षीय गृहिणी सिफ्रा ने कहा कि उनके पति और दो बच्चे एक महीने से खांस रहे हैं। उन्होंने बताया कि धुआं घर में घुसता है और उन्हें खुद भी बदन दर्द, खांसी और सर्दी हो गई है।

13 अक्टूबर तक पलंगकराया में सांस की गंभीर बीमारियों के 11,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए थे। ग्रीनपीस के अनुमान के मुताबिक, पिछले दो महीनों के दौरान इंडोनेशियाई बोर्नियो और सुमात्रा में करीब 4 करोड़ लोग धुएं की धुंध के संपर्क में आए।

प्रभावित इलाकों में उड़ानें बाधित हुईं और स्कूल बंद रहे। परिवारों के लिए इसके असर आपस में जुड़े हैं: बीमारी से खर्च और देखभाल की जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, जबकि कारोबार घटने से भोजन और दूसरी जरूरी चीजों के लिए कम पैसे बचते हैं।

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कितनी भूमि जल चुकी है?

नुसंतारा एटलस का अनुमान है कि 2026 के पहले नौ महीनों में 1,916,588 हेक्टेयर भूमि आग में जल गई। यह 2019 की इसी अवधि के उसके अनुमान से 38% अधिक है। संस्था के संस्थापक और भू-दृश्य पारिस्थितिकीविद् डेविड गावो ने कहा कि वास्तविक आंकड़ा इससे अधिक हो सकता है, क्योंकि घनी धुंध के कारण कभी-कभी उपग्रह तस्वीरें ढक जाती हैं।

सरकार का प्रकाशित आंकड़ा जुलाई के अंत तक 202,000 हेक्टेयर था। वानिकी मंत्रालय के प्रवक्ता रिसतियांतो प्रिबादी ने कहा कि अधिकारी जली हुई भूमि का कुल क्षेत्रफल निकाल रहे हैं और एटलस के अनुमान की "आसानी से पुष्टि नहीं की जा सकती"। सरकार और निगरानी संस्था के आंकड़े अलग-अलग समयावधियों के हैं।

एक छोटा आंकड़ा पहले ही आलोचना का केंद्र बन चुका था। 12 अक्टूबर को प्रबोवो ने आपात स्थिति से निपटने में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि 639 हेक्टेयर क्षेत्र में आग बुझाने का काम जारी है। 14 अक्टूबर को राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (बीएनपीबी) और वानिकी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह आंकड़ा उन स्थानों का था जहां दमकलकर्मी काम कर रहे थे। देशभर में अब भी जल रही भूमि का ताजा कुल आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया गया था।

अल नीनो से जुड़े भीषण शुष्क मौसम के दौरान सुमात्रा, कालीमंतान और पापुआ में आग लगी है। अल नीनो जलवायु की ऐसी स्थिति है जो इंडोनेशिया में असामान्य रूप से शुष्क हालात ला सकती है। पर्यावरण अभियानकर्ताओं ने जंगलों की कटाई और पीटलैंड से पानी निकालने को भी कारण बताया। पीट आंशिक रूप से सड़ी वनस्पति से बनी जमीन होती है; पानी निकालकर इसे सुखाने पर यह जमीन के नीचे तक जल सकती है और इसे बुझाना मुश्किल होता है।

इससे वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचा है। 9 अक्टूबर तक पश्चिम कालीमंतान में आग से खतरे में पड़े 46 ओरंगुटान को अधिकारियों और संरक्षणवादियों ने बचाया था। पलंगकराया के एक पुनर्वास केंद्र में रह रहे 47 अन्य ओरंगुटान के धुएं की धुंध से बीमार होने की खबर थी।

चेतावनियों, जांच और प्रदर्शनों का एक सप्ताह

वर्षगांठ पर हुए प्रदर्शन से पहले अधिकारियों के बयान, कार्रवाई की घोषणाएं और स्थानीय प्रदर्शन लगातार हुए। घटनाक्रम दिखाता है कि आग के पैमाने और उससे निपटने के तरीके पर विवादों के साथ-साथ आपात कार्रवाई की मांगें भी कैसे तेज हुईं।

  • 12 अक्टूबर: प्रबोवो ने आग से निपटने की कार्रवाई पर चर्चा करते हुए कहा कि 639 हेक्टेयर क्षेत्र में आग बुझाई जा रही है।
  • 13 अक्टूबर: कंपनियों से संबंध वाले मामलों में नौ लोगों को संदिग्ध घोषित किया गया और प्रभावित सात प्रांतों में सांस की बीमारियों के मामले 283,000 से अधिक हो गए।
  • 14 अक्टूबर: बीएनपीबी और वानिकी मंत्रालय ने 639 हेक्टेयर के आंकड़े का मतलब स्पष्ट किया। भ्रष्टाचार-रोधी जांचकर्ताओं ने आपात राहत कोष मामले में बीएनपीबी के कार्यालयों पर छापा भी मारा।
  • 15 अक्टूबर: बीएनपीबी प्रमुख सुहारयांतो को पद से हटाया गया। विदेश मंत्री अरमानाता नासिर ने कहा कि प्रबोवो ने विदेशी सहायता को मंजूरी दी है।
  • 19 अक्टूबर: पलंगकराया में छात्रों ने प्रदर्शन किया और प्रबोवो ने जंगल की आग पर चर्चा के लिए महल में बैठक की।
  • 20 अक्टूबर: बड़े शहरों में प्रदर्शन फैल गए, जबकि ग्रीनपीस के कार्यकर्ता जकार्ता के वेलकम स्मारक पर चढ़ गए।

आपात राहत कोष के कथित गबन के संबंध में पांच लोगों पर आरोप लगाए गए। इनमें सुहारयांतो का भाई भी शामिल था, जो उनके सलाहकार के तौर पर काम करता था। इस जांच से सार्वजनिक बहस में भ्रष्टाचार का मामला भी जुड़ गया कि आपात स्थिति का सामना कर रहे समुदायों तक संसाधन पहुंच रहे हैं या नहीं।

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आग बुझाने के आदेश और जमीनी हकीकत

लिस्त्यो ने कहा कि प्रबोवो ने सशस्त्र बलों, पुलिस, बीएनपीबी, स्थानीय सरकारों और समुदायों को समन्वय बेहतर करने और हवाई अभियान तेज करने का निर्देश दिया। चीफ ऑफ स्टाफ का कार्यालय कार्रवाई की निगरानी करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि कानून-प्रवर्तन के कदम सबूतों और लागू नियमों के अनुरूप हों।

राजनीतिक और सुरक्षा मामलों के समन्वय मंत्री डुडुंग अब्दुराचमन ने 19 अक्टूबर की चर्चाओं में हिस्सा लिया। आपदा प्रबंधन और सरकारी समन्वय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। महल में प्रवेश से पहले डुडुंग ने कहा कि वह राष्ट्रपति को जंगल की आग रोकने के उपायों पर मंत्रालयों के साथ हुई पिछली बैठक की जानकारी देंगे।

बीएनपीबी के प्रवक्ता बेर्टोन पांजाइतान ने कहा कि स्वयंसेवकों समेत 60,000 से अधिक दमकलकर्मी देशभर में तैनात किए गए हैं। उन्होंने बताया कि पानी गिराने और कृत्रिम वर्षा कराने के लिए 49 विमान उपलब्ध हैं, हालांकि धुंध के कारण इनमें से कई को बीच-बीच में उड़ान रोकनी पड़ी। कृत्रिम वर्षा के जरिए उपयुक्त बादलों से बारिश कराने की कोशिश की जाती है।

आग बुझाने का काम जानलेवा भी साबित हुआ है। पूर्वी जावा के ब्रोमो तेंगर सेमेरू राष्ट्रीय उद्यान में आग की लपटों से घिरी एक टीम के एक स्वयंसेवी दमकलकर्मी घायल हो गए और अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। उद्यान अधिकारियों ने कहा कि वह उस टीम के पांचवें सदस्य थे जिनकी मौत हुई।

लंबुंग मंगकुरात विश्वविद्यालय के छात्र कार्यकारी बोर्ड के प्रमुख सात्रिया बिन अगाथा जकार्ता के प्रदर्शन में कालीमंतान की चिंताएं लेकर आए। उन्होंने समन्वय की आलोचना की और आग लगातार जलते रहने की बात कही।

हर घंटे, चाहे सुबह हो या रात, आग जलती ही रहती है।

जांचकर्ताओं ने कंपनियों और संदिग्धों की पहचान की

डुडुंग ने कहा कि पुलिस ने जंगल और भूमि में लगी आग से जुड़े उल्लंघनों के संदेह में 97 कंपनियों की पहचान की है। पुलिस ने कंपनियों से संबंधित आग के 98 मामलों की रिपोर्ट अलग से दर्ज की। इनकी जांच आपराधिक जांच एजेंसी (बारेस्क्रिम) और 10 क्षेत्रीय पुलिस कार्यालय कर रहे हैं।

वरिष्ठ आयुक्त पिपित सुबियांतो, जो बारेस्क्रिम के अधिकारी हैं, ने कहा कि 13 अक्टूबर तक कंपनियों से संबंध वाले मामलों में नौ लोगों को संदिग्ध घोषित किया गया था। इनमें से सात पश्चिम कालीमंतान में थे और बाकी दो मध्य तथा दक्षिण कालीमंतान में।

कंपनियों से संबंधित 98 मामलों की रिपोर्ट में से 33 पश्चिम कालीमंतान की थीं, यानी लगभग एक तिहाई। इसके बाद दक्षिण सुमात्रा में 17 और मध्य कालीमंतान में 14 मामले दर्ज किए गए। पुलिस ने व्यक्तिगत आरोपियों से जुड़े 273 मामलों की रिपोर्ट में 223 संदिग्धों के नाम भी दर्ज किए। इनकी जांच 12 क्षेत्रीय पुलिस कार्यालय कर रहे हैं।

वानिकी मंत्रालय ने कहा कि उसने सितंबर में पांच कंपनियों के परमिट रद्द किए, जिनकी रियायतों का कुल क्षेत्रफल 92,464 हेक्टेयर था। 20 अक्टूबर को मंत्रालय ने सात प्रांतों में 12,926 हेक्टेयर जली भूमि के संबंध में 32 कंपनियों पर प्रशासनिक प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इसके साथ ही 125 व्यक्तियों और कंपनियों से जुड़े संदिग्ध आपराधिक मामलों का भी जिक्र किया।

परमिट पर प्रतिबंध और आपराधिक जांच अलग-अलग प्रक्रियाओं के तहत चलती हैं। परमिट रद्द होने से किसी कंपनी की कामकाज की अनुमति समाप्त हो जाती है, जबकि आपराधिक मामला मुकदमे और सजा तक पहुंच सकता है। सुबियांतो ने कहा कि जंगल की आग से जुड़े कानूनों का उल्लंघन करने के दोषियों को 10 से 12 साल की जेल हो सकती है। उन्होंने लोगों से आग लगाकर भूमि साफ करना बंद करने का आग्रह किया।

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जकार्ता और प्रांतीय अधिकारियों में जिम्मेदारी को लेकर मतभेद

मध्य कालीमंतान के अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय सरकार को अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि 2020 के रोजगार सृजन कानून के बाद वन क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दिए जाने वाले अधिकतर परमिट उसके नियंत्रण में हैं।

प्रांत की पर्यावरण एजेंसी के प्रमुख जोनी हार्ता ने कहा कि विवादित वन-क्षेत्र परमिट प्रांतीय सरकार ने जारी नहीं किए थे। उन्होंने जकार्ता से वनरोपण राजस्व बंटवारे की योजना के तहत बकाया राशि जारी करने की मांग भी की और कहा कि स्थानीय संसाधन पर्याप्त नहीं हैं।

वानिकी मंत्रालय के प्रवक्ता रिसतियांतो प्रिबादी ने कहा कि आग पर नियंत्रण की जिम्मेदारी केंद्र और क्षेत्रीय सरकारों, कानून-प्रवर्तन एजेंसियों, कारोबारों और समुदायों के बीच साझा है। जिम्मेदारी इस बात पर निर्भर करती है कि आग कहां लगी, भूमि की स्थिति क्या है, वहां किस तरह की व्यावसायिक गतिविधि चल रही है और कौन से परमिट लागू हैं।

पीटलैंड संस्था पंताउ गाम्बुत के वरिष्ठ अभियानकर्ता पुत्रा सप्तियां ने कहा कि भूमि के इस्तेमाल का निर्धारण करने का अधिकार प्रांतों के पास है और कानून तोड़ने वाली कंपनियों का कामकाज रोका जा सकता है। 19 अक्टूबर को मध्य कालीमंतान के गवर्नर कार्यालय के बाहर छात्रों ने प्रांतीय सरकार से कड़ी कार्रवाई और राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग की।

गवर्नर आगुस्तियार सबरान ने प्रदर्शनकारियों की बात सुनी और कहा कि वह प्रार्थना के बाद लौटेंगे, लेकिन जवाब देने के लिए वापस नहीं आए। अन्य जगहों के निवासियों ने भी प्रबोवो से स्थानीय पुलिस और सैन्य अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया, जब आग काबू से बाहर फैल जाए। उनका तर्क था कि छोटे स्तर पर लगी आग का समय रहते पता लगाने और उसे रोकने के लिए इन अधिकारियों के पास पर्याप्त कर्मचारी हैं।

क्षेत्रीय सहायता को लेकर विरोधाभासी बयान

धुंध सीमाओं के पार फैलने पर मलेशिया और सिंगापुर ने सहायता की पेशकश की। विदेश मंत्री अरमानाता ने 15 अक्टूबर को कहा कि प्रबोवो ने विदेशी मदद को मंजूरी दे दी है और बीएनपीबी तकनीकी स्तर पर चर्चा कर रही है। डुडुंग ने 19 अक्टूबर को कहा कि राष्ट्रीय आपदा घोषित होने तक सहायता रोकी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि मलेशिया तीन विमान और 52 कर्मी भेजेगा। उनकी तैनाती कब होगी, यह स्पष्ट नहीं था।

मलेशिया के उपप्रधानमंत्री अहमद जाहिद हमीदी ने प्रस्तावित सहायता पैकेज का विवरण दिया था। इसमें बॉम्बार्डियर सीएल-415एमपी अग्निशमन विमान, तीन हेलीकॉप्टर और करीब 50 कर्मी शामिल थे। प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने धुंध से निपटने की तैयारी और समन्वय बेहतर करने के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के जरिए क्षेत्रीय सहयोग तंत्र बनाने का प्रस्ताव भी रखा।

सिंगापुर की राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी ने कहा कि अस्वास्थ्यकर वायु गुणवत्ता वाले लगातार दिनों की संख्या 2015 के धुंध संकट के दौरान दर्ज संख्या से अधिक हो गई है। उसकी प्रणाली के तहत, अगर प्रदूषक मानक सूचकांक किसी भी समय 100 से ऊपर जाता है तो उस दिन को इस श्रेणी में रखा जाता है।

एजेंसी ने तीन कंपनियों को चेतावनी दी। इससे पहले उसने इंडोनेशिया की सात कंपनियों को नोटिस भेजकर अग्निशमन दल तैनात करने, आग लगाना रोकने और कार्रवाई की योजना सौंपने का निर्देश दिया था। सिंगापुर के वरिष्ठ मंत्री के. शनमुगम ने इंडोनेशिया की ओर से सहायता स्वीकार किए जाने का स्वागत किया और चेताया कि आग के लिए जिम्मेदार कंपनियों की जांच होगी।

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स्मारक पर प्रदर्शन के बाद ग्रीनपीस कार्यकर्ता रिहा

ग्रीनपीस के कार्यकर्ता 20 अक्टूबर को जकार्ता के होटल इंडोनेशिया चौराहे पर स्थित वेलकम स्मारक पर चढ़ गए और जलवायु संकट को जीवनयापन की लागत से जोड़ते बैनर प्रदर्शित किए। पुलिस और सैन्यकर्मियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर उनसे नीचे उतरने को कहा। कुछ अधिकारी उनसे बात करने के लिए आसपास के तालाब को पार करके गए।

पुलिस ने कहा कि स्मारक से छह कार्यकर्ताओं को उतारा गया, जिनमें एक महिला को चिकित्सकीय सहायता की जरूरत थी। शुरुआती खबरों में पूछताछ के लिए ले जाए गए लोगों की संख्या कम से कम आठ बताई गई थी; बाद की खबरों में घटनास्थल पर हिरासत में लिए गए 11 लोगों का जिक्र था, जिनमें ग्रीनपीस के छह कार्यकर्ता और बचाव दल के पांच सदस्य व पत्रकार शामिल थे।

जकार्ता कानूनी सहायता संस्थान के वकालत प्रमुख अलिफ फौजी नुरविदियास्तोमो ने कहा कि छह कार्यकर्ताओं को रात करीब 8:30 बजे जाने दिया गया। ग्रीनपीस ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में किसी आपराधिक गतिविधि के सबूत नहीं मिलने के कारण उन्हें रिहा किया गया। उनके कानूनी प्रतिनिधि डैनियल विनार्ता ने हिरासत में लेने के आधार पर सवाल उठाए।

ग्रीनपीस की जलवायु न्याय अभियानकर्ता जेनी सिरैत ने कहा कि पर्यावरणीय आपदाएं आजीविका के लिए खतरा हैं, कमाई घटाती हैं और खाद्य कीमतें बढ़ाती हैं। उनकी बात छात्रों की मांगों और कालीमंतान के निवासियों के अनुभवों से मेल खाती थी।

दूसरी ओर, योग्याकार्ता की क्षेत्रीय विधायी परिषद की इमारत के पास झड़पों के बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। अशांति के दौरान पुलिस के एक ट्रक को आग लगाए जाने की भी खबर थी। जकार्ता में परिवहन अधिकारियों ने यातायात प्रबंधन के चार क्षेत्र तैयार किए और यात्रियों, खासकर गाम्बिर रेलवे स्टेशन जाने वालों को रास्ते में बदलाव और जाम की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह दी।

मुख्य बातें

  • 20 अक्टूबर को इंडोनेशिया के बड़े शहरों में छात्रों ने रोजगार, सस्ती जरूरी चीजों, आग पर कार्रवाई और नागरिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
  • नुसंतारा एटलस के अनुमान के मुताबिक जनवरी से सितंबर तक 1,916,588 हेक्टेयर भूमि जली, जो 2019 की इसी अवधि से 38% अधिक है।
  • 13 अक्टूबर तक प्रभावित सात प्रांतों में सांस की गंभीर बीमारियों के 283,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए।
  • अधिकारियों ने 97 कंपनियों की पहचान की और कंपनियों से संबंधित आग के 98 मामलों की रिपोर्ट दर्ज की। वानिकी मंत्रालय ने परमिट रद्द करने और अन्य प्रतिबंधों की घोषणा की।
  • 60,000 से अधिक दमकलकर्मी तैनात किए गए, लेकिन धुंध के कारण हवाई अभियानों के लिए जरूरी विमानों को बीच-बीच में उड़ान रोकनी पड़ी।
  • जकार्ता के स्मारक पर प्रदर्शन के बाद ग्रीनपीस के छह कार्यकर्ताओं को 20 अक्टूबर की शाम रिहा कर दिया गया।
  • मलेशिया और सिंगापुर ने सहायता की पेशकश की, जबकि इंडोनेशियाई अधिकारियों के बयान इस बात पर अलग-अलग थे कि विदेशी सहायता कब शुरू हो सकती है।
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