10 किलोमीटर की दूरी पर मिलीं दो वस्तुएं
इंडोनेशिया के मध्य कालीमंतन में एक तेल पाम बागान में 19 और 20 अक्टूबर, 2026 को मिलीं दो बड़ी धातु की वस्तुओं के चीनी झूच्वे-2ई रॉकेट का मलबा होने का संदेह है। यह बात राष्ट्रीय अनुसंधान एवं नवाचार एजेंसी (BRIN) ने कही। दूसरी वस्तु, करीब चार मीटर चौड़ा गुंबदनुमा हिस्सा, पहली वस्तु से लगभग 10 किलोमीटर दूर मिला।
विषय-सूची
- 10 किलोमीटर की दूरी पर मिलीं दो वस्तुएं
- बागान के कर्मचारियों को क्या मिला
- BRIN ने मलबे को रॉकेट से कैसे जोड़ा
- प्रक्षेपण से लेकर मलबा मिलने तक
- झूच्वे-2ई अंतरिक्ष में क्या लेकर गया
- रॉकेट का ढांचा धरती पर वापस क्यों आता है
- गिरने की जगह का अनुमान लगाना मुश्किल क्यों है
- मिनेसोटा में भी ऐसी ही खोज
- इंडोनेशिया में पहले हुई मलबे की घटनाएं
- मुख्य बिंदु
BRIN के विश्लेषण के अनुसार, संदिग्ध रॉकेट का ढांचा 18 अक्टूबर को लगभग 17:36 पश्चिमी इंडोनेशियाई समय (WIB) पर सम्पित के पास से उत्तर से दक्षिण की ओर गुजरा। उस दोपहर स्थानीय लोगों ने धमाके और गड़गड़ाहट की आवाज सुनी। अगले दिन सुबह बागान के कर्मचारियों को फटी हुई धातु मिली।
BRIN के वरिष्ठ खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी शोधकर्ता थॉमस दजामालुद्दीन ने कहा कि संभवतः दोनों वस्तुएं एक ही रॉकेट से आई थीं। संदिग्ध ढांचे पर ट्रैकिंग नंबर NORAD 101070 और अंतरराष्ट्रीय पहचान संख्या 2026-234L दर्ज है। ये पहचान शोधकर्ताओं को इसे कक्षा में मौजूद अन्य वस्तुओं से अलग पहचानने में मदद करती हैं।
पहले मलबे को आगे की पहचान के लिए पांगकलान बुन स्थित इस्कंदर एयर बेस ले जाया गया है। दूसरी वस्तु मिलने की जगह को पुलिस ने घेर दिया। BRIN के अनुसार, वस्तुओं के आकार, सामग्री और निशानों की रॉकेट के विनिर्देशों से तुलना करने वाली भौतिक जांच अभी बाकी है, जिससे उनकी पहचान की पुष्टि हो सके।
बागान के कर्मचारियों को क्या मिला
कोटावारिंगिन तिमुर जिले में PT Agro Bukit के किलोमीटर 26 स्थित बागान में जांच तब शुरू हुई जब एक कर्मचारी ने ब्लॉक G38-39 से गुजरते समय पहली वस्तु देखी। उसने बागान के एक पर्यवेक्षक को इसकी जानकारी दी।
यह जगह मेंताया हिलिर उतारा उपजिले के नताई बारू गांव के रोंगकांग गांव-टोले और मेंतावा बारू केतापांग उपजिले के पासिर पुति गांव की सीमा के निकट है। पहले मलबे का आकार करीब चार गुणा तीन मीटर आंका गया। इसकी सतह जली हुई लग रही थी, धातु फटी हुई थी और केबल अब भी जुड़ी थीं।
उसी कंपनी के बागान में 20 अक्टूबर को मिली दूसरी वस्तु की सतह घुमावदार और गुंबद के आकार की थी तथा उसका रंग फीका पीला था। रिवेट्स की कतारें, केबल और धातु के हिस्से अब भी दिख रहे थे। यह बिखरे हुए तेल पाम के पत्तों के बीच पड़ी थी।
थॉमस ने कहा कि टूटकर बिखरने वाले रॉकेट के बाहरी ढांचे और आंतरिक हिस्से, जिनमें ईंधन टैंक भी शामिल हैं, उसकी उड़ान के आखिरी मार्ग पर कई जगहों पर गिर सकते हैं। लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर हुई इन खोजों से यह संभावना मेल खाती है कि मलबा एक साथ गिरने के बजाय कई जगहों पर पहुंचा।
BRIN ने मलबे को रॉकेट से कैसे जोड़ा
लोगों द्वारा आवाज सुने जाने के समय कालीमंतन के ऊपर से गुजर सकने वाली वस्तुओं के कक्षीय मार्गों का BRIN ने पता लगाया। थॉमस ने कहा कि झूच्वे-2ई रॉकेट के ढांचे का आखिरी दर्ज मार्ग द्वीप के ऊपर से दक्षिण की ओर था और 18 अक्टूबर को लगभग 17:36 WIB पर वह सम्पित के पास था।
BRIN ने जिन स्थानीय लोगों की रिपोर्टों का इस्तेमाल किया, उनमें गड़गड़ाहट का समय करीब 17:30 WIB बताया गया। बागान के अन्य कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों ने करीब 18:00 बजे धमाके की आवाज सुनी थी। समय के इन अनुमानित स्मरणों के अनुसार, आवाज उसी दोपहर के दौरान सुनाई दी जब रॉकेट का मार्ग दर्ज किया गया था।
थॉमस ने कहा कि उड़ान-पथ और बताई गई आवाज के बीच मेल ही इन वस्तुओं को झूच्वे-2ई से जोड़ने का मुख्य कारण है। BRIN के विश्लेषण में यह मार्ग रॉकेट के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश से पहले की आखिरी कक्षा भी पाया गया।
धातु पर एक और सुराग मिला: 2ZQE31-20-15 240256KY का निशान। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय परिवहन सुरक्षा समिति (KNKT) ने इस कोड के एक हिस्से और झूच्वे-2ई नाम के बीच समानता देखी और फिर BRIN के वैमानिकी एवं अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के साथ समन्वय किया। जांच में इन निशानों और कक्षीय साक्ष्यों को साथ रखकर देखा जाएगा।
प्रक्षेपण से लेकर मलबा मिलने तक
संदिग्ध मलबा झूच्वे-2ई Y4 मिशन के प्रक्षेपण के चार दिन बाद इंडोनेशिया पहुंचा। यह रॉकेट 14 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिमी चीन के दोंगफेंग से प्रक्षेपित हुआ था। इसे बीजिंग समयानुसार 19:40 बजे उड़ान के लिए रवाना किया गया और यह 10 उपग्रह लेकर गया। सभी उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षाओं में स्थापित करने के बाद मिशन को सफल घोषित किया गया।
घटनाओं का क्रम उस प्रक्षेपण को बाद में मिली वस्तुओं से जोड़ता है:
- 14 अक्टूबर, 2026: झूच्वे-2ई Y4 दस उपग्रहों के साथ दोंगफेंग से प्रक्षेपित हुआ।
- 18 अक्टूबर: कोटावारिंगिन तिमुर के ऊपर लोगों ने धमाके और गड़गड़ाहट की आवाज सुनी। BRIN के अनुसार, संदिग्ध रॉकेट का ढांचा लगभग 17:36 WIB पर सम्पित के पास था।
- 19 अक्टूबर: बागान के एक कर्मचारी को PT Agro Bukit के ब्लॉक G38-39 में धातु का पहला बड़ा टुकड़ा मिला।
- 20 अक्टूबर: लगभग चार मीटर व्यास की दूसरी वस्तु पहली जगह से करीब 10 किलोमीटर दूर मिली।
- 21 अक्टूबर: थॉमस ने बताया कि दोनों वस्तुएं संभवतः एक ही रॉकेट के टुकड़े हैं, जो उसके आखिरी मार्ग पर बिखर गए।
हाजी असान सम्पित हवाई अड्डे पर नागरिक उड्डयन प्रकाशन टीम के प्रभारी अधिकारी ज़करुदिएन ने कहा कि मिली वस्तुओं की जानकारी KNKT और BRIN के साथ साझा की गई है। हवाई अड्डे के कर्मियों ने बागान में हुई खोज की जांच में मदद की, जबकि पहले मलबे को पड़ोसी कोटावारिंगिन बारात जिले के एयर बेस भेजा गया।
झूच्वे-2ई अंतरिक्ष में क्या लेकर गया
चीनी वाणिज्यिक अंतरिक्ष कंपनी लैंडस्पेस ने झूच्वे-2ई को दो चरणों वाला रॉकेट बनाया। इसके चरण, यानी हिस्से, अंतरिक्ष तक पहुंचने की उड़ान के अलग-अलग भाग पूरे करते हैं। यह ईंधन के रूप में तरल मीथेन और दहन में मदद के लिए तरल ऑक्सीजन का इस्तेमाल करता है। इस संयोजन को मेथालॉक्स कहा जाता है।
14 अक्टूबर के मिशन के 10 उपग्रहों में से आठ ADAspace की स्टार कंप्यूट परियोजना के दूसरे समूह का हिस्सा थे। कंपनी 2,800 कंप्यूटिंग उपग्रहों का नेटवर्क बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसका उद्देश्य कंप्यूटिंग उपकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का बुनियादी ढांचा अंतरिक्ष में स्थापित करना है।
इन आठ उपग्रहों को सूर्योदय से सूर्यास्त तक की कक्षा के लिए बनाया गया था। इनमें शक्तिशाली कंप्यूटर, लेजर संचार उपकरण और कम रोशनी में काम करने वाले कैमरे थे। उनकी नियोजित गतिविधियों में कक्षा में आधारभूत AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के प्रयोग भी शामिल थे। ये ऐसे मॉडल होते हैं जिन्हें बड़ी मात्रा में जानकारी देकर प्रशिक्षित किया जाता है और जो कई तरह के कामों में मदद कर सकते हैं।
ADAspace ने 10,000 वाट की शक्ति पर काम करने वाली तरल शीतलन प्रणाली और गर्मी को अंतरिक्ष में छोड़ने के लिए खुलने वाले बड़े पैनलों का परीक्षण करने की भी योजना बनाई थी। कंप्यूटर काम करते समय गर्मी पैदा करते हैं, इसलिए उपग्रहों पर उन्हें चलाने के लिए शीतलन जरूरी है। परियोजना का पहला समूह मई 2025 में प्रक्षेपित हुआ था और तीसरा समूह 2026 के लिए निर्धारित था।
रॉकेट का ढांचा धरती पर वापस क्यों आता है
थॉमस ने बताया कि काम पूरा होने के बाद रॉकेट के हिस्से कक्षा में बने रह सकते हैं। कक्षा पृथ्वी के चारों ओर लगातार घूमता हुआ मार्ग है: कोई वस्तु इतनी तेजी से आगे बढ़ती है कि गुरुत्वाकर्षण उसे नीचे खींचता है, फिर भी वह ग्रह के चारों ओर घूमती रहती है।
वायुमंडल के बेहद विरल अंश खिंचाव पैदा करते हैं। यह प्रतिरोध कक्षा में घूम रही वस्तु की ऊर्जा धीरे-धीरे कम करता है। उसकी कक्षा नीचे आती जाती है और फिर वह अधिक घने वायुमंडल में पहुंचती है। इस्तेमाल न किए गए रॉकेट का ढांचा इस प्रक्रिया में आखिरकार जमीन की ओर लौट सकता है।
वायुमंडल के साथ तेज गति से होने वाली क्रिया अत्यधिक गर्मी पैदा करती है। धातु और दूसरी सामग्री जल सकती हैं, पिघल सकती हैं या छोटे टुकड़ों में टूट सकती हैं। कुछ हिस्से गर्मी का सामना करते हुए बच जाते हैं और पृथ्वी की सतह तक पहुंचते हैं।
थॉमस ने कहा कि दोबारा वायुमंडल में प्रवेश के दौरान तेज रोशनी भी दिखाई दे सकती है और वायुमंडल में आघात तरंगें बनने से धमाका या गड़गड़ाहट सुनाई दे सकती है। उनकी यह व्याख्या कोटावारिंगिन तिमुर के ऊपर सुनाई दी आवाज को बड़े टुकड़ों के नीचे आने के दौरान बच जाने की संभावना से जोड़ती है। उन्होंने बागान में मिले संदिग्ध मलबे को रॉकेट के ढांचे और उसके आंतरिक हिस्सों, जिनमें ईंधन टैंक भी हैं, के टुकड़े बताया।
गिरने की जगह का अनुमान लगाना मुश्किल क्यों है
BRIN किसी वस्तु का कक्षीय मार्ग फिर से तय कर सकता है, लेकिन यह अनुमान लगाना कहीं कठिन है कि बच गए टुकड़े ठीक कब और कहां जमीन से टकराएंगे। थॉमस ने कहा कि उड़ान-पथ का पता लगाया जा सकता है, जबकि सटीक टक्कर का समय और जगह विश्वसनीय रूप से बताना मुश्किल है।
दोबारा वायुमंडल में प्रवेश के दौरान टूटने वाला ढांचा अपने आखिरी मार्ग पर कई जगहों पर टुकड़े गिरा सकता है। कोटावारिंगिन तिमुर में मिली दोनों वस्तुएं जांचकर्ताओं को कक्षीय मार्ग से तुलना के लिए वास्तविक जगहें उपलब्ध कराती हैं। इसके साथ स्थानीय लोगों के अनुभवों और धातु पर बने निशानों को भी देखा जा सकता है।
थॉमस ने कहा कि इंडोनेशिया में पहले भी सोवियत संघ या रूस, चीन और अमेरिका से आए अंतरिक्ष मलबे गिरे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से गिरने वाला ज्यादातर मलबा महासागरों, जंगलों और रेगिस्तानों में पहुंचता है। बागान में हुई खोज से यह प्रक्रिया ऐसी जगह सामने आई है जहां लोग काम करते हैं। इसलिए वस्तुओं को सुरक्षित करने और उनकी जांच के लिए स्थानीय स्तर पर समन्वय जरूरी है।
मिनेसोटा में भी ऐसी ही खोज
झूच्वे-2ई के एक अलग मिशन को मिनेसोटा के मक्के के खेत में मिली एक बड़ी वस्तु से भी जोड़ा गया है। वह रॉकेट 15 सितंबर, 2026 को प्रक्षेपित हुआ था और उसने 10 छ्येनफान संचार उपग्रह कक्षा में स्थापित किए थे। इसके बाद रॉकेट के ऊपरी चरण का इंजन कक्षा से बाहर निकलने के लिए चलाया गया। उड़ान करीब 75 से 80 मिनट चली और रॉकेट ने पृथ्वी का पूरा चक्कर नहीं लगाया।
बाद में एक किसान को स्कॉट टाउनशिप में करीब 11 फुट, यानी 3.35 मीटर व्यास की गोल धातु की वस्तु मिली। यह आकार रॉकेट के ऊपरी चरण के बताए गए व्यास के बराबर था। स्टीवंस काउंटी शेरिफ कार्यालय ने कहा कि उसके अधिकारियों ने वस्तु मिलने की पुष्टि की और वे राज्य तथा संघीय एजेंसियों के साथ काम कर रहे हैं।
शेरिफ कार्यालय ने एक सार्वजनिक बयान में आगे की कार्रवाई के बारे में बताया:
शेरिफ कार्यालय कई राज्य और संघीय एजेंसियों के साथ मिलकर मलबे के मालिक की पहचान करने, उसे सूचित करने और खेत से मलबा हटाने की योजना बनाने पर काम कर रहा है।
मिनेसोटा मिशन में रॉकेट के चरण को कक्षा से बाहर लाने के लिए इंजन चलाया गया था। इंडोनेशिया के मामले में थॉमस ने वायुमंडलीय खिंचाव को इस्तेमाल न किए गए रॉकेट के हिस्सों के लौटने का कारण बताया। दोनों घटनाएं एक ही रॉकेट परिवार को कृषि भूमि पर मिले बड़े टुकड़ों से जोड़ती हैं, लेकिन इनके प्रक्षेपण और समय-क्रम अलग हैं।
सितंबर में भेजे गए उपग्रह एक अलग परियोजना का हिस्सा थे। छ्येनफान ने 2024 से अब तक 258 उपग्रह प्रक्षेपित किए थे और उसका शुरुआती लक्ष्य 1,296 उपग्रहों का था। यह नियोजित कुल संख्या का लगभग पांचवां हिस्सा है। सम्पित से जुड़ा अक्टूबर का मिशन 10 उपग्रहों में ADAspace के आठ कंप्यूटिंग उपग्रह लेकर गया था।
इंडोनेशिया में पहले हुई मलबे की घटनाएं
मध्य कालीमंतन में पहले भी चीनी रॉकेट का मलबा मिला है। 4 जनवरी, 2021 को इसके दक्षिणी तट पर लॉन्ग मार्च 8 के पेलोड आवरण का एक हिस्सा मिला था। थॉमस ने इसे 22 दिसंबर, 2020 को प्रक्षेपित रॉकेट का हिस्सा बताया। यह जानकारी मलबा बरामद करने वाली टीम और चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन से मिली थी।
यह आवरण मजबूत प्लास्टिक सामग्री से बना था, जो समुद्र में तैर सकती है। 2022 में पश्चिम कालीमंतन के सांग्गाउ में लॉन्ग मार्च 5B का मलबा मिला। BRIN के खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी शोधकर्ता रोरॉम प्रियातिकांतो ने 1 अगस्त, 2022 को इसकी पुष्टि की थी।
अप्रैल 2026 में बैंटन और लांपुंग के ऊपर एक चमकीली वस्तु के टुकड़ों में टूटने से लोगों का ध्यान इस ओर गया। थॉमस ने इसे हिंद महासागर की ओर भारत की दिशा से आ रहे चीनी CZ-3B रॉकेट का मलबा बताया।
सम्पित की जांच से इंडोनेशिया में ऐसी घटनाओं के रिकॉर्ड में बरामद धातु, निर्माण संबंधी निशान और दर्ज कक्षीय मार्ग जुड़ गए हैं। बागान में मिली वस्तुओं के मामले में अब ठोस काम करना है: सुरक्षित रखे गए टुकड़े की जांच करना, उसके निर्माण की तकनीकी जानकारी से तुलना करना और पता लगाना कि रॉकेट के कौन से हिस्से जमीन तक पहुंचे।
मुख्य बिंदु
- 19 और 20 अक्टूबर, 2026 को मध्य कालीमंतन में PT Agro Bukit के बागान से धातु की दो बड़ी वस्तुएं मिलीं।
- दूसरी वस्तु करीब चार मीटर चौड़ी थी और पहली खोज की जगह से लगभग 10 किलोमीटर दूर मिली।
- BRIN ने संदिग्ध झूच्वे-2ई रॉकेट के ढांचे का आखिरी मार्ग 18 अक्टूबर को लगभग 17:36 WIB पर सम्पित के पास दर्ज किया।
- संदिग्ध ढांचा NORAD 101070 और अंतरराष्ट्रीय पहचान संख्या 2026-234L के तहत दर्ज है।
- पहले मलबे को इस्कंदर एयर बेस ले जाया गया, जबकि दूसरी खोज की जगह को पुलिस ने घेर दिया।
- पहचान की पुष्टि के लिए मलबे के आकार, सामग्री और निशानों की भौतिक जांच जरूरी है।






