महाराष्ट्र में सूखा राहत का दायरा बढ़कर 305 तालुकों तक, दिवाली से पहले 5,000 रुपये देने का वादा

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Maharashtra Promises Rs 5,000 Before Diwali as Drought Relief Expands to 305 Talukas

सूखा राहत के दायरे में 40 और तालुके शामिल

महाराष्ट्र प्रभावित किसानों के बैंक खातों में दिवाली से पहले सीधे 5,000 रुपये जमा करेगा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 अक्टूबर 2026 को मुंबई में यह घोषणा की। इससे पहले सरकार ने सूखा प्रभावित क्षेत्रों की सूची बढ़ाकर राज्य के 358 में से 305 तालुके कर दी थी। यह भुगतान केंद्र से मिलने वाली संभावित सहायता के एवज में अग्रिम राशि है। इसका उद्देश्य फसल नुकसान के आकलन और प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रहने के दौरान किसानों तक मदद पहुंचाना है।

विषय-सूची
  1. सूखा राहत के दायरे में 40 और तालुके शामिल
  2. 5,000 रुपये के भुगतान का मतलब
  3. सूखा राहत की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी
  4. मैदानी निरीक्षण से तय होगा आगे का मुआवजा
  5. राहत के 12 उपायों में क्या शामिल है
  6. कर्ज वसूली पर रोक और शिक्षा शुल्क में राहत
  7. पेयजल और चारे के लिए जल्द कदम जरूरी
  8. किसान और विपक्षी नेता अधिक सहायता क्यों चाहते हैं
  9. मुआवजे की मांग और अगले प्रदर्शन की तारीखें
  10. मुख्य बातें

40 और तालुके जुड़ने से सूखा घोषित क्षेत्र का हिस्सा बढ़कर करीब 85.2% हो गया है। पहले सूची में 265 तालुके थे, जो कुल का 74% थे। तालुका जिले के भीतर एक प्रशासनिक उपखंड होता है। विस्तार के बाद राज्य की सूखा राहत की सभी 12 मानक रियायतें नए शामिल क्षेत्रों में भी लागू होंगी। इनमें फसल ऋण का पुनर्गठन, भू-राजस्व में रियायत, बिजली में राहत तथा पेयजल और पशुधन के लिए सहायता शामिल हैं।

फडणवीस ने कहा कि पहले की घोषणा से बाहर रह गए क्षेत्रों की शिकायतों की अधिकारियों द्वारा जांच के बाद एक पूरक सरकारी शासनादेश जारी किया गया है। कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने बदलाव की जानकारी दी:

शुरुआत में 265 तालुकों में सूखा घोषित किया गया था। शिकायतों का आकलन करने के बाद 40 और तालुके जोड़े गए, जिससे कुल संख्या 305 हो गई। सूखा राहत की सभी 12 मानक रियायतें अब इन तालुकों में भी लागू हैं।

यह घोषणा फसल को हुए भारी नुकसान के संकेतों और अधिक सहायता की बढ़ती मांग के बीच आई है। केंद्र की 11 सदस्यीय आकलन टीम ने व्यापक नुकसान देखा, जिसमें कुछ क्षेत्रों में फसल की उपज शून्य रही। किसान संगठनों और विपक्षी नेताओं का कहना है कि 5,000 रुपये खेती की लागत, घरेलू जरूरतों और बकाया कर्ज के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

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5,000 रुपये के भुगतान का मतलब

फडणवीस ने इस राशि को त्योहार से पहले मिलने वाली तात्कालिक सहायता बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र से सहायता मिलने के बाद आगे और मदद दी जाएगी। पूर्ण प्रशासनिक आकलन और केंद्र की जांच प्रक्रिया में समय लगता है और उन्हें दिवाली से पहले कानूनी तौर पर पूरा नहीं किया जा सकता।

इसलिए सरकार दो मोर्चों पर काम कर रही है: तात्कालिक जरूरतों के लिए शुरुआती बैंक हस्तांतरण और नुकसान का आकलन कर आगे की सहायता तय करने की लंबी प्रक्रिया। महाराष्ट्र ने केंद्र से अंतरिम तौर पर सूखा राहत के लिए 17,500 करोड़ रुपये मांगे हैं। यह मांगी गई राशि है। अगले चरण में फसल नुकसान, चारे की कमी और संभावित जल संकट का ब्योरा देने वाला विस्तृत ज्ञापन तैयार किया जाएगा।

पहले की घोषणाओं में प्रति हेक्टेयर के हिसाब से सहायता देने का वादा किया गया था, यानी क्षतिग्रस्त खेत के क्षेत्रफल के आधार पर भुगतान। 14 अक्टूबर की घोषणा में इसके बजाय प्रत्येक प्रभावित किसान के लिए 5,000 रुपये की निश्चित शुरुआती राशि तय की गई है। खेतों के निरीक्षण और सर्वेक्षण के बाद फसल नुकसान की सहायता अलग सरकारी फैसले से तय की जाएगी।

सरकार ने भुगतान की सटीक तारीख, फसल मुआवजे की अंतिम दर या केंद्र से सहायता मिलने की पक्की तारीख नहीं बताई है। तत्काल समय-सीमा दिवाली से पहले की है। वहीं अधिकारियों ने आकलन पूरा करने और अंतिम ज्ञापन जमा करने के लिए क्रमशः 20 अक्टूबर और 23 अक्टूबर की तारीखें लक्ष्य के रूप में तय की हैं।

सूखा राहत की प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ी

खरीफ मौसम में बारिश की कमी के बाद महाराष्ट्र की शुरुआती घोषणा में राज्य के 36 में से 32 जिलों के 265 तालुके शामिल थे। खरीफ फसलें आम तौर पर मानसून के आसपास बोई जाती हैं और बढ़वार के महीनों में बारिश पर काफी निर्भर होती हैं। अगस्त और सितंबर में बारिश के लंबे अंतराल से कई क्षेत्रों में खड़ी फसलें क्षतिग्रस्त हुईं।

फडणवीस ने वाशिम जिले के मंगरुलपीर तालुका के मोहगव्हाण में प्रभावित खेतों का दौरा किया। इनमें किसान अनिल भगरे और अब्दुल नईम शेख रहीम के खेत भी शामिल थे। सितंबर के दौरे के दौरान उन्होंने कहा था कि पहला सूखा आदेश Trigger-1 नामक आकलन चरण के आधार पर जारी होगा और शुरुआत में छूटे क्षेत्रों पर बाद में Trigger-3 के तहत विचार किया जा सकेगा।

  • 24 सितंबर: फडणवीस ने वाशिम में क्षतिग्रस्त फसलों का निरीक्षण किया और दिवाली से पहले सीधे सहायता देने का वादा किया।
  • 25 सितंबर: उन्होंने कहा कि सूखे की पहली घोषणा का आदेश उसी दिन जारी किया जाएगा।
  • 12 अक्टूबर: फडणवीस ने कहा कि प्रभावित तालुकों और गांवों में जिन किसानों की फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उन्हें मदद मिलेगी। उन्होंने फसल नुकसान को राहत का मुख्य आधार बताया।
  • 14 अक्टूबर: सरकार ने 5,000 रुपये के अग्रिम भुगतान की घोषणा की और तालुकों की संख्या 265 से बढ़ाकर 305 करने की पुष्टि की।
  • 20 अक्टूबर और 23 अक्टूबर से पहले: अधिकारियों ने क्रमशः फसल नुकसान का आकलन पूरा करने और केंद्र को अंतिम ज्ञापन सौंपने का लक्ष्य रखा।

फडणवीस ने कहा कि अक्टूबर की अधिसूचना से राहत सामान्य समय-सारणी से पहले दी जा रही है। आम तौर पर सूखे की घोषणा नवंबर के अंत तक और सहायता दिसंबर में दी जाती है। राहत प्रक्रिया सितंबर की शुरुआती घोषणा के साथ शुरू हो चुकी थी, जिसके बाद अक्टूबर में इसका विस्तार किया गया।

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मैदानी निरीक्षण से तय होगा आगे का मुआवजा

जिला कलेक्टरों को क्षतिग्रस्त खेतों का निरीक्षण कराने के निर्देश दिए गए हैं। निरीक्षण के साथ तस्वीरें और सटीक GPS निर्देशांक भी दर्ज किए जाएंगे। इन निरीक्षणों से पंचनामे तैयार होंगे, जो मौके पर अधिकारियों ने जो देखा उसका औपचारिक रिकॉर्ड होते हैं। रिपोर्ट कृषि आयुक्त के माध्यम से सरकार तक पहुंचाई जानी है।

केंद्र की टीम ने तीन दिन तक सर्वेक्षण किया। इसका नेतृत्व केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव मुक्तानंद अग्रवाल ने किया। सदस्यों ने मराठवाड़ा, विदर्भ और पश्चिमी महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों के प्रभावित गांवों का जायजा लिया। इनमें अहिल्यानगर और सोलापुर जिले भी शामिल थे। टीम के एक सदस्य ने कुछ क्षेत्रों में उपज शून्य रहने की बात कही। उन्होंने जलाशयों में घटते पानी और पशुओं के पीने के पानी को लेकर चिंता भी जताई।

फडणवीस ने कहा कि कई जगह करीब दो महीने तक बारिश न होने के बाद सोयाबीन को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। कपास, तूर और गन्ना भी प्रभावित हुए हैं। तूर एक दलहन फसल है, जिससे दाल बनाई जाती है। दाल कई भारतीय परिवारों के भोजन का अहम हिस्सा है।

फडणवीस ने चेताया कि पानी की कमी से किसानों की रबी या गर्मियों की फसलों के जरिए आय की भरपाई करने की क्षमता भी सीमित हो सकती है। रबी मानसून के बाद का फसल मौसम है। खरीफ फसल खोने के बाद किसान आम तौर पर अगली फसल से कमाई की कोशिश कर सकता है, लेकिन यह विकल्प पर्याप्त जमा पानी या सिंचाई पर निर्भर करता है।

राहत के 12 उपायों में क्या शामिल है

महाराष्ट्र के मानक सूखा राहत उपाय खेती के कर्ज, सरकारी शुल्क, शिक्षा खर्च, रोजगार, भोजन, पानी और पशुचारे से जुड़ी कई जरूरतों को एक साथ पूरा करने के लिए हैं। इन्हें सभी 305 तालुकों तक बढ़ाने से पहली घोषणा के दायरे से बाहर रहे क्षेत्रों के लोगों को भी लाभ मिलेगा।

सूखे के शुरुआती आदेश के साथ घोषित उपायों में शामिल थे:

  • भू-राजस्व में रियायत, फसल ऋण का पुनर्गठन और कृषि से जुड़े कर्ज की वसूली पर रोक।
  • बिजली बिल में रियायत और जिन गांवों को पानी की कमी से प्रभावित घोषित किया गया है, वहां कृषि पंपों का बिजली कनेक्शन न काटने की सुरक्षा।
  • स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफ करना।
  • रोजगार गारंटी योजना के नियमों में ढील, ताकि अधिक काम शुरू किया जा सके।
  • जरूरत पड़ने पर पेयजल टैंकर, किसानों और कृषि मजदूरों के लिए अनाज की आपूर्ति तथा चारे की व्यवस्था।
  • जल संरक्षण के काम और पीने के पानी तथा पशुओं के पानी की योजना।

फसल ऋण का पुनर्गठन करने से भुगतान की समय-सारणी बदल जाती है और कर्जदार को चुकाने के लिए अधिक समय मिलता है। खेती से होने वाली कमाई पर दबाव के दौरान भू-राजस्व और शुल्क में रियायतें दूसरे खर्च घटाती हैं। खेती में काम कम होने पर रोजगार गारंटी योजना के काम से मजदूरी मिल सकती है। इसलिए यह पैकेज जमीन के मालिकों के साथ कृषि मजदूरों के लिए भी अहम है।

राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि जरूरत पड़ने पर बुनियादी ढांचे और जिला योजना के लिए रखे गए धन को सूखा राहत की ओर मोड़ा जा सकता है। उन्होंने जल भंडारण संरचनाओं को मजबूत करने और गर्मियों से पहले पानी की आपूर्ति सुरक्षित रखने के काम की भी जानकारी दी।

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कर्ज वसूली पर रोक और शिक्षा शुल्क में राहत

फडणवीस ने कहा कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और क्रेडिट सोसायटियों को किसानों से जबरन वसूली न करने, उन्हें परेशान न करने और उन पर जरूरत से ज्यादा दबाव न डालने की सख्त चेतावनी दी गई है। सरकार निजी बैंकों और वित्तीय संस्थानों तक भी इसी तरह की सुरक्षा बढ़ाने पर काम कर रही है।

उन्होंने कहा कि कर्ज राहत के तय भुगतानों के लिए 3.5 लाख अतिरिक्त किसानों, यानी 350,000 लोगों की प्रमाणित सूची तैयार की गई है। इन भुगतानों की प्रक्रिया सूखा राहत उपायों के साथ जारी है। सूची का आकार प्रशासनिक काम को और जरूरी बनाता है, क्योंकि किसानों को अगली बुवाई के मौसम के लिए कर्ज की जरूरत है।

सरकार ने 1992 के उस शासनादेश की शर्तें हटा दी हैं, जिसके तहत किसानों के बच्चों की शिक्षा शुल्क माफी सीमित थी। फडणवीस ने कहा कि अब यह छूट सभी प्रभावित क्षेत्रों में लागू होगी। शुरुआती राहत पैकेज में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों की परीक्षा फीस माफी भी शामिल थी।

बिजली बिल बकाया होने पर किसानों को जबरन वसूली से भी बचाया जाएगा। मौजूदा राज्य नीति के तहत 7.5 हॉर्सपावर तक की क्षमता वाले कृषि पंपों को मुफ्त बिजली मिलती है। शुरुआती सूखा राहत उपायों में इससे अधिक क्षमता वाले पंपों के लिए भी रियायतें दी गई थीं। हॉर्सपावर पंप की मोटर की शक्ति बताने की इकाई है।

पेयजल और चारे के लिए जल्द कदम जरूरी

मराठवाड़ा में पानी का दबाव बढ़ रहा है। फडणवीस ने कहा कि निगरानी वाले कुओं में भूजल स्तर तीन मीटर से नीचे चला गया है। इसके चलते अक्टूबर और नवंबर में जरूरत पड़ने पर जल्दी टैंकर भेजने की तैयारी की जा रही है। टैंकरों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए उन्हें GPS से ट्रैक किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के अनुसार पेयजल आपूर्ति बचाने के लिए करीब 16,000 अवैध जल कनेक्शन काटे गए हैं। उन्होंने कहा कि अनधिकृत तरीके से पानी निकालने के मामलों में सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी। इस प्रयास में पानी की कमी वाले क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के साथ मौजूदा आपूर्ति की सुरक्षा के कदम भी शामिल हैं।

फडणवीस ने क्षेत्र के चारे के भंडार का अनुमान 90 दिन से लेकर सात महीने तक बताया। केंद्र की टीम के साथ बैठक के दौरान उन्होंने कहा था कि अलग-अलग जिलों में भंडार 90 से 120 दिनों तक चल सकता है। ये आंकड़े क्षेत्रों में दबाव के अलग-अलग स्तर दिखाते हैं। कुछ जिलों में भंडार बहुत कम समय तक चलने की आशंका है।

सिंचाई या बांध के पानी की सुविधा वाले किसानों से रबी ज्वार और चारे की फसलें लगाने का आग्रह किया गया है। ज्वार, जिसे सोरघम भी कहते हैं, से अनाज और पशुओं को खिलाने के लिए चारा मिलता है। सरकार ने कटे हुए चारे को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है। MSP सरकार द्वारा तय खरीद मूल्य होता है।

फडणवीस ने पानी उपलब्ध वाले क्षेत्रों में चारे का उत्पादन बढ़ाने, उसकी खरीद और भंडारण करने तथा जरूरत पड़ने पर दूसरे राज्यों से चारा मंगाने की योजना भी बताई। ये व्यवस्थाएं इसलिए अहम हैं क्योंकि फसल नष्ट होने से परिवार की आमदनी कम हो जाने पर भी पशुओं को रोज चारा देना पड़ता है।

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किसान और विपक्षी नेता अधिक सहायता क्यों चाहते हैं

5,000 रुपये के अग्रिम भुगतान की घोषणा के बाद हिंगोली के गोरेगांव अतिरिक्त तहसील कार्यालय के बाहर प्रदर्शन हुआ। किसानों ने कुल 5,000 रुपये के नोट बिखेरे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। यह प्रदर्शन घोषित भुगतान और किसानों के बताए खर्च के बीच के अंतर को लेकर नाराजगी दिखाता है।

शिवसेना (यूबीटी) के विधायक कैलास पाटिल ने इस भुगतान को "अपमान और मजाक" बताया। पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह व्यापक सहायता के अपने पहले के वादे से पीछे हट रही है। कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने कुंभ मेले और शक्तिपीठ एक्सप्रेसवे समेत खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए।

विधायक रोहित पवार ने किसानों को कम से कम 1 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर और कृषि मजदूरों को 25,000 रुपये देने की मांग की। उन्होंने किसानों के लिए तत्काल 30,000 से 35,000 रुपये और हर मजदूर परिवार के लिए 10,000 रुपये के अग्रिम भुगतान की मांग भी की।

पवार के अनुसार खेती की लागत 30,000 से 50,000 रुपये प्रति हेक्टेयर है। उनके आंकड़ों के मुताबिक, एक हेक्टेयर में खेती करने वाले किसान के लिए 5,000 रुपये का अग्रिम भुगतान खेती की लागत का करीब 10% से 16.7% ही पूरा करेगा। उनका हिसाब उत्पादन खर्च से जुड़ा है, जबकि सरकार का भुगतान आगे की सहायता तय होने से पहले दी जाने वाली एक निश्चित अग्रिम राशि है।

पूर्व मंत्री हर्षवर्धन पाटिल ने भी प्रति हेक्टेयर 1 लाख रुपये देने की मांग की और राज्य से सीधे सहायता देने के लिए कर्ज लेने का आग्रह किया। असहमति तत्काल मदद की राशि और व्यापक पैकेज परिवारों तक कितनी जल्दी पहुंचेगा, दोनों मुद्दों पर है।

मुआवजे की मांग और अगले प्रदर्शन की तारीखें

अखिल भारतीय किसान सभा ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बीमित रकम के बराबर मुआवजे की मांग की है। यह राष्ट्रीय फसल बीमा योजना है। बीमित रकम बीमा पॉलिसी के तहत फसल को मिलने वाले कवर का मूल्य होती है। संगठन चाहता है कि छोटी निश्चित राशि देने के बजाय इसी रकम को मुआवजे का आधार बनाया जाए।

संयुक्त बयान में अशोक धावले, जे.पी. गावित, अजित नवले, यशवंत झाडे और उमेश देशमुख समेत नेताओं ने कहा कि 5,000 रुपये से बीज, उर्वरक, कीटनाशक और मजदूरी का बुनियादी खर्च भी पूरा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कर्ज राहत में देरी से किसानों के लिए नए मौसम का ताजा ऋण लेना मुश्किल हो रहा है।

संगठन ने नमो शेतकरी महासन्मान निधि योजना की नौवीं और दसवीं किस्त का तत्काल भुगतान मांगा है। उसका अनुमान है कि करीब 89 लाख पात्र किसान परिवारों के 3,590 करोड़ रुपये बकाया हैं। किसान नेताओं ने इन भुगतानों के समय को भी अपनी आलोचना का एक अहम मुद्दा बनाया है।

किसान 26 अक्टूबर से अहिल्यानगर के अकोले से मुंबई तक वाहनों के काफिले निकालने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद 27 अक्टूबर से आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन सत्याग्रह होगा। सत्याग्रह अहिंसक विरोध का एक तरीका है। उनकी मांगों में सूखा मुआवजा, कर्ज माफी, फसल बीमा और वन अधिकार शामिल हैं।

सरकार के सामने तत्काल चुनौती दिवाली से पहले वादे के मुताबिक अग्रिम राशि पहुंचाने की है। इसके बाद आगे की राहत के लिए जरूरी आकलन और धन संबंधी फैसले करने होंगे। 14 अक्टूबर की बैठक में कैबिनेट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सरकार प्रमुख के तौर पर 25 वर्ष पूरे करने पर बधाई देने का अलग प्रस्ताव भी पारित किया। इसकी शुरुआत 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति से हुई थी।

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मुख्य बातें

  • महाराष्ट्र ने अपने 358 में से 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया है। यह कुल का करीब 85.2% है।
  • फडणवीस ने केंद्र से मिलने वाली संभावित सहायता के एवज में दिवाली से पहले हर प्रभावित किसान को 5,000 रुपये देने का वादा किया।
  • सूखा राहत के सभी 12 मानक उपाय अब अतिरिक्त 40 तालुकों में भी लागू हैं।
  • राज्य ने केंद्र से 17,500 करोड़ रुपये मांगे हैं और 20 अक्टूबर तक फसल आकलन पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
  • राहत में कर्ज वसूली से सुरक्षा, शिक्षा शुल्क में छूट, बिजली रियायतें, पानी के टैंकर और चारे की व्यवस्था शामिल हैं।
  • किसान संगठन अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं और 26 अक्टूबर से प्रदर्शन की योजना है। 27 अक्टूबर से सत्याग्रह शुरू होगा।
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