ग्यारह कंपनियां नेपाल के बिजली बाजार में प्रवेश चाहती हैं
नेपाल निजी बिजली कारोबारियों को शुरुआती मंजूरी देने की तैयारी कर रहा है। 11 कंपनियां पहले ही आशय पत्र मांग चुकी हैं और सरकार दशैं से पहले दस्तावेज जारी करने की दिशा में काम कर रही है। ऊर्जा, जलस्रोत तथा सिंचाई मंत्री बिराज भक्त श्रेष्ठ का कहना है कि नीतिगत व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। इसके साथ ही बिजली खरीद समझौतों में बदलाव और भारत के साथ बिजली कारोबार के संपर्क को बढ़ाने पर भी काम चल रहा है।
विषय-सूची
- ग्यारह कंपनियां नेपाल के बिजली बाजार में प्रवेश चाहती हैं
- बजट के वादे को कानूनी प्रक्रिया का साथ
- भारत के नियम निजी निर्यात की दिशा तय करेंगे
- ग्रिड इस्तेमाल करने के लिए कारोबारियों को कितना देना होगा
- बिजली खरीद समझौते उपयोगी आपूर्ति को प्राथमिकता देंगे
- 27 परियोजनाओं को समयसीमा में राहत
- पारेषण विस्तार से संयंत्र खरीदारों से जुड़ेंगे
- भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा भी सुधारों का हिस्सा
- सिंचाई और बाढ़ के बाद बहाली भी एजेंडे में
- मुख्य बातें
बुधवार को काठमांडू में मंत्रालय की एक बैठक में, नेपाल के कैलेंडर के अनुसार आशोज 28 को, श्रेष्ठ ने छह महीने के कामकाज की समीक्षा की। उन्होंने कुल 540.47 मेगावाट की 27 जलविद्युत परियोजनाओं के वाणिज्यिक संचालन की समयसीमा बढ़ाने और भारत के साथ बिजली आयात क्षमता 1,000 मेगावाट से बढ़ाकर 1,400 मेगावाट तथा निर्यात क्षमता 1,100 मेगावाट से बढ़ाकर 1,650 मेगावाट करने के समझौते की घोषणा की।
निजी कंपनियों को खरीदार ढूंढ़ने और बिजली बेचने का रास्ता मिलेगा, जिससे उन्हें अपना उत्पादन खरीदने के लिए सिर्फ नेपाल विद्युत प्राधिकरण (एनईए) पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मंत्रालय उत्पादन, पारेषण, कारोबार और घरेलू खपत को एक साथ जोड़ने की कोशिश कर रहा है, ताकि बिजली संयंत्रों में किया गया निवेश ऐसी बिजली में बदले जो भुगतान करने वाले ग्राहकों तक पहुंच सके।
तत्काल कदम आशय पत्र (एलओआई) या अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करना है। पूर्ण कारोबार लाइसेंस के लिए बिजली अधिनियम में संशोधन और उससे जुड़ी नियामकीय व्यवस्थाएं जरूरी हैं। इसके बाद कंपनियों को पारेषण नेटवर्क तक पहुंच, वाणिज्यिक समझौतों और निर्यात के लिए सीमा पार बिजली कारोबार के नियमों के तहत मंजूरी की जरूरत होगी।
श्रेष्ठ का लक्ष्य दशैं से पहले शुरुआती दस्तावेज जारी करने का है। बिजली खरीद समझौतों पर आगे के फैसले कुछ दिनों में आने की उम्मीद है। अंतिम लाइसेंस और निर्यात की मंजूरी कब तक मिलेगी, इसकी कोई तारीख घोषित नहीं की गई है। एनईए बोर्ड के सदस्य अंशु किरण शाही का अनुमान है कि निजी निर्यात के लिए कानूनी और तकनीकी काम में कम से कम एक से दो साल लग सकते हैं।
बजट के वादे को कानूनी प्रक्रिया का साथ
वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले ने वित्त वर्ष 2026/27 का राष्ट्रीय बजट पेश करते हुए 29 मई, 2026 को अंतरराष्ट्रीय बिजली कारोबार में निजी क्षेत्र की भागीदारी की घोषणा की थी। श्रेष्ठ की तैयारियां अब कंपनियों को इस बाजार में काम करने का रास्ता देने के लिए जरूरी व्यावहारिक कदमों से जुड़ी हैं।
नेपाल कई वर्षों से इस बदलाव की दिशा में काम कर रहा है। मई 2022 में ऊर्जा मंत्रालय बिजली अधिनियम, 1992 में संशोधन की मांग कर रहा था, क्योंकि यह कानून निजी बिजली कारोबार की अनुमति नहीं देता था। कानून मंत्रालय ने पारेषण निर्देश और दिशानिर्देशों के जरिए आगे बढ़ने की पिछली कोशिश खारिज कर दी थी, क्योंकि कानून में इसके लिए जरूरी अधिकार नहीं था।
मौजूदा बिजली कानूनों में संशोधन और एकीकरण विधेयक की धारा 29 में नेपाली निजी कंपनियों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिजली कारोबार की अनुमति देने का प्रावधान था। उस समय यह विधेयक जुलाई 2020 के मध्य से राष्ट्रीय सभा में कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहा था। मंत्रालय ने संशोधन का एक दूसरा रास्ता और अध्यादेश लाने पर भी विचार किया था।
नीति कई चरणों से होकर आगे बढ़ी है:
- फरवरी 2021: भारत ने ऐसी प्रक्रिया लागू की जिसके तहत वहां बिजली बेचने की इच्छुक नेपाली कंपनियों को नेपाल से निर्यात लाइसेंस लेना होगा।
- मई 2022: प्रस्तावित निर्देश वाला रास्ता खारिज होने के बाद नेपाल के ऊर्जा मंत्रालय ने कानूनी संशोधनों पर काम किया।
- जून 2025: विद्युत नियामक आयोग ने ग्रिड तक खुली पहुंच के लिए निर्देश का मसौदा मंजूर किया।
- 29 मई, 2026: राष्ट्रीय बजट में अंतरराष्ट्रीय बिजली कारोबार में निजी क्षेत्र की भागीदारी की घोषणा की गई।
- दशैं से पहले: श्रेष्ठ संभावित निजी कारोबारियों को शुरुआती दस्तावेज जारी करने का लक्ष्य रख रहे हैं।
बिजली अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया संसद में आगे बढ़ी है। बिजली विकास विभाग बिना किसी अधिकतम सीमा या कोटे के एलओआई आवेदन स्वीकार कर रहा है, जबकि सरकार न्यूनतम पूंजी, बैंक गारंटी और वाणिज्यिक शर्तों को अंतिम रूप दे रही है। एनईए की एक सहायक कंपनी को कारोबार की मंजूरी मिल चुकी है और निजी कंपनियां अपने लिए लाइसेंस का रास्ता तलाश रही हैं।
भारत के नियम निजी निर्यात की दिशा तय करेंगे
नेपाल की निर्यात योजनाओं, जिनमें बांग्लादेश को प्रस्तावित बिक्री भी शामिल है, के लिए भारत अहम है, क्योंकि बिजली को भारत के पारेषण नेटवर्क से होकर गुजरना होगा। इसलिए निजी कारोबारियों को नेपाल और भारत, दोनों में ऐसी व्यवस्थाएं करनी होंगी जिनमें कारोबारी कंपनी की मान्यता, नेटवर्क तक पहुंच और लेनदेन की अनुमति शामिल है।
शाही का कहना है कि भारत के मौजूदा नियम एनईए को नेपाल की अधिकृत बिजली कारोबार इकाई के रूप में मान्यता देते हैं। नेपाली निजी कंपनियों को भारत में बिजली बेचने या भारत के रास्ते किसी दूसरे देश तक भेजने से पहले औपचारिक मान्यता लेनी होगी। उनका कहना है कि यह पहुंच हासिल करने के लिए दोनों सरकारों के बीच बातचीत जरूरी होगी।
मंत्रालय ने भारतीय समकक्षों के साथ शुरुआती बातचीत शुरू कर दी है। इस बीच, संभावित कारोबारी एलओआई प्रक्रिया के जरिए खरीदारों की पहचान और वाणिज्यिक योजनाएं तैयार कर सकते हैं। कारोबार के लिए बिजली की मात्रा, पारेषण क्षमता, ग्रिड तक पहुंच और सीमा पार मंजूरी पर अलग-अलग फैसलों के साथ ऐसे समझौते भी जरूरी होंगे जिनमें बिजली का खरीदार और भुगतान की गारंटी तय हो।
निजी कंपनियां पहले भी ऐसी योजनाएं बना चुकी हैं जो इन मंजूरियों पर निर्भर थीं। नेपाल पावर एक्सचेंज लिमिटेड ने 10 जनवरी, 2022 को भारत की मणिकरण पावर लिमिटेड के साथ एक समझौता किया था। इसके तहत मणिकरण ने निर्यात लाइसेंस मिलने की शर्त पर 500 मेगावाट बिजली खरीदने और निवेश साझेदार बनने पर सहमति दी थी।
नेपाल के स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ (आईपीपीएएन) के तत्कालीन उपाध्यक्ष गणेश कार्की ने बताया था कि विदेशी ग्राहकों के साथ बातचीत में लाइसेंस क्यों अहम था:
अगर हमारे पास निर्यात लाइसेंस नहीं होगा, तो विदेशी खरीदार हम पर भरोसा नहीं करेंगे,
नेपाल इंफ्रास्ट्रक्चर बैंक ने भी 2022 में बिजली कारोबार के लिए सहायक कंपनी का प्रस्ताव रखा था और भारतीय तथा बांग्लादेशी कंपनियों के साथ साझेदारी पर चर्चा की थी। मौजूदा लाइसेंसिंग तैयारियां कई वर्षों से चली आ रही एक वाणिज्यिक जरूरत को पूरा करती हैं: कंपनियां बिजली बेचने के लिए बातचीत करने और अपने उत्पादन के लिए बाजार ढूंढ़ने की जिम्मेदारी लेने का अधिकार चाहती हैं।
ग्रिड इस्तेमाल करने के लिए कारोबारियों को कितना देना होगा
विद्युत नियामक आयोग ने वित्त वर्ष 2026/27 के लिए ग्रिड तक पहुंच का शुल्क मध्यम और लंबी अवधि की पहुंच के लिए 413,000 नेपाली रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह और अल्पकालीन पहुंच के लिए 0.57 नेपाली रुपये प्रति यूनिट तय किया है। एक यूनिट का मतलब एक किलोवाट घंटा है, यानी एक किलोवाट बिजली खींचने वाला उपकरण एक घंटे में जितनी बिजली इस्तेमाल करता है।
इन शुल्कों को व्हीलिंग चार्ज कहा जाता है। ये पारेषण नेटवर्क से बिजली ले जाने की लागत चुकाते हैं। कोई निजी उत्पादक और ग्राहक बिक्री का समझौता कर सकते हैं और हर लेनदेन के लिए अलग लाइन बनाने के बजाय उनके बीच बिजली पहुंचाने के लिए मौजूदा ग्रिड का इस्तेमाल कर सकते हैं।
जून 2025 के मसौदे में इससे कम शुल्क प्रस्तावित था: अल्पकालीन पहुंच के लिए 39 पैसा प्रति यूनिट और मध्यम तथा लंबी अवधि की पहुंच के लिए 283,842 नेपाली रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह। बाद की दरें, दोनों ही मामलों में, करीब 46 प्रतिशत अधिक हैं। ये नेटवर्क शुल्क हैं; कारोबारियों को बिजली की खरीद कीमत और अन्य वाणिज्यिक लागतों का भी हिसाब रखना होगा।
मसौदे में न्यूनतम लेनदेन घरेलू कारोबार के लिए 5 मेगावाट और सीमा पार कारोबार के लिए 10 मेगावाट प्रस्तावित था। पात्र सुविधाओं में 33 किलोवोल्ट या उससे अधिक क्षमता वाले ग्रिड से जुड़े कम से कम 5 मेगावाट के जलविद्युत संयंत्र और कम से कम 1 मेगावाट के कैप्टिव संयंत्र शामिल थे। कैप्टिव संयंत्र मुख्य रूप से अपने मालिक के इस्तेमाल के लिए बिजली पैदा करता है।
मसौदे में अनुबंधों को तीन अवधियों में बांटा गया था: 24 घंटे से एक साल तक, एक साल से अधिक और पांच साल तक, तथा पांच साल से अधिक। इसमें निर्यात से पहले घरेलू मांग को प्राथमिकता दी गई थी, हालांकि सरकार की अनुमति वाली परियोजनाओं और एनईए के जरिए होने वाले निर्यात को अपवाद रखा गया था।
आयोग छह संचालन प्रक्रियाओं को अंतिम रूप दे रहा है। पहले के प्रावधानों के तहत निर्देश मंजूर होने के 120 दिनों के भीतर प्रक्रियाओं और समझौतों के मसौदे प्रकाशित करने की जिम्मेदारी एनईए के सिस्टम ऑपरेशंस विभाग को दी गई थी। मीटरिंग, बिजली का समय-निर्धारण, भुगतान निपटान और वादा की गई तथा आपूर्ति की गई बिजली के बीच अंतर के नियम, बिजली कारोबार चलाने के लिए जरूरी कामों का हिस्सा हैं।
बिजली खरीद समझौते उपयोगी आपूर्ति को प्राथमिकता देंगे
अक्टूबर 2026 के सुधार अपडेट के अनुसार, 16,000 मेगावाट से अधिक क्षमता वाली प्रस्तावित परियोजनाएं बिजली खरीद समझौतों (पीपीए) की प्रतीक्षा कर रही हैं। पीपीए वह अनुबंध है जो तय करता है कि खरीदार किसी परियोजना की बिजली किन शर्तों पर खरीदेगा। निर्माण और वित्तपोषण की योजना बनाने के लिए परियोजना डेवलपरों को अनुमानित आय की व्यवस्था चाहिए।
एनईए बोर्ड के सदस्य अंशु किरण शाही की अगुवाई वाली एक उपसमिति ने नए पीपीए शुरू करने के लिए प्रस्तावित मानदंड सौंपे हैं। सिफारिशों में तकनीकी तैयारी, पारेषण बुनियादी ढांचे तक पहुंच और वित्तीय समापन शामिल हैं। वित्तीय समापन वह चरण है जब किसी परियोजना के वित्तपोषण की व्यवस्था सुनिश्चित हो जाती है। इन्हें लागू करने के लिए एनईए बोर्ड का फैसला होना बाकी है।
श्रेष्ठ का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था में उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो शुष्क मौसम की शामों में अधिक मांग पूरी कर सकें, सूखे महीनों में बिजली दें, मासिक उत्पादन स्थिर रखें और जिनकी पारेषण नेटवर्क तक पहुंच हो। जिन परियोजनाओं के लिए वाणिज्यिक संचालन शुरू होने तक बिजली निर्यात की व्यवस्था हो सकेगी, उन्हें भी प्राथमिकता मिलेगी।
ये मानदंड बिजली उत्पादन के समय को प्रणाली की जरूरतों से जोड़ते हैं। जलविद्युत परियोजना का सालाना उत्पादन मायने रखता है, लेकिन खास घंटों और उन महीनों में भी बिजली चाहिए जब नदियों में पानी का प्रवाह कम होता है। इन अवधियों में बिजली देने वाला संयंत्र प्रणाली की ऐसी जरूरतों को पूरा कर सकता है जिन्हें केवल उसकी स्थापित क्षमता से नहीं समझा जा सकता।
श्रेष्ठ का कहना है कि आगे के फैसलों में राज्य की वित्तीय देनदारियों, निजी निवेशकों के हितों और आर्थिक प्रभावों पर विचार होगा। यह वित्त वर्ष 2025/26 के बजट प्रस्ताव को लेकर हुए विवाद के बाद हो रहा है, जिसमें टेक-ऑर-पे अनुबंधों के बजाय टेक-एंड-पे अनुबंधों का इस्तेमाल करने की बात थी। मोटे तौर पर, टेक-एंड-पे में भुगतान वास्तव में ली गई बिजली से जुड़ा होता है, जबकि टेक-ऑर-पे में खरीदार बिजली न लेने पर भी तय मात्रा का भुगतान करने के लिए बाध्य हो सकता है।
आईपीपीएएन के अध्यक्ष गणेश कार्की ने सुधारों की शुरुआत का स्वागत करते हुए पीपीए पर तेजी से फैसले लेने की मांग की है। डेवलपरों को उम्मीद थी कि लंबित समझौते 180 दिनों के भीतर पूरे हो जाएंगे। उन्होंने छह महीने बाद भी प्रगति न होने की आलोचना की।
27 परियोजनाओं को समयसीमा में राहत
एनईए ने राहत के पहले चरण में कुल 540.47 मेगावाट की 27 परियोजनाओं के आवश्यक वाणिज्यिक संचालन की तारीख (आरसीओडी) बढ़ाई है। आरसीओडी वह सहमत समयसीमा है जिसके भीतर संयंत्र को वाणिज्यिक संचालन शुरू करना होता है। देरी होने पर डेवलपर को अनुबंध के उल्लंघन का जोखिम हो सकता है।
श्रेष्ठ की घोषणा और सुधारों के विस्तृत ब्योरे में 540.47 मेगावाट का आंकड़ा दिया गया है; उन्हीं 27 परियोजनाओं के लिए 4,540.47 मेगावाट का बड़ा आंकड़ा भी सामने आया था। विस्तृत ब्योरे में इन समयसीमाओं को कुल 8,292 मेगावाट की 320 परियोजनाओं वाली निर्माण श्रृंखला का हिस्सा बताया गया है।
प्राधिकरण ने निर्माण की प्रगति और पीपीए की शर्तों के आधार पर इन 320 परियोजनाओं को चार श्रेणियों में बांटा है। श्रेणी सी की परियोजनाओं को डिफॉल्ट नोटिस मिल रहे हैं, जो अनुबंध संबंधी दायित्व पूरे न होने की औपचारिक चेतावनी हैं। समयसीमा में बढ़ोतरी पूरी होने के करीब पहुंची परियोजनाओं को दी जा रही है, न कि सभी परियोजनाओं को समान रूप से।
डेवलपरों को बाढ़, भूस्खलन, पारेषण लाइनों की कमी, स्थानीय रुकावटों और कोविड-19 के बाद की आर्थिक कठिनाइयों से जुड़ी देरी का सामना करना पड़ा है। पात्र परियोजनाओं को संशोधित समयसीमा से संचालन तक पहुंचने के लिए अधिक समय मिलेगा, जबकि परियोजनाओं का वर्गीकरण राहत को उनकी प्रगति से जोड़ेगा।
पिछले वित्त वर्ष में नेपाल ने 942 मेगावाट के लक्ष्य के मुकाबले ग्रिड में 561 मेगावाट जोड़ा। यह लक्ष्य का करीब 60 प्रतिशत था, यानी 381 मेगावाट की कमी रह गई। ये आंकड़े बताते हैं कि अनुबंधों और लाइसेंसिंग में बदलाव के साथ-साथ संयंत्रों को पूरा करना और उन्हें नेटवर्क से जोड़ना अगला जरूरी काम है।
पारेषण विस्तार से संयंत्र खरीदारों से जुड़ेंगे
400 किलोवोल्ट क्षमता वाली हेटौड़ा-ढल्केबर-इनरुवा पारेषण लाइन का हेटौड़ा खंड लगभग पूरा हो गया है। श्रेष्ठ का कहना है कि एनईए दशैं के बाद इसमें बिजली चालू करने की योजना बना रहा है। किसी लाइन को ऊर्जीकृत करने का मतलब है उसे वोल्टेज देना, ताकि वह सेवा में लाई जा सके।
400 किलोवोल्ट क्षमता वाली बाह्रबीसे-लप्सीफेदी लाइन का निर्माण पूरा हो चुका है। बाह्रबीसे और न्यू खिम्ती सबस्टेशन भी पूरे हो गए हैं और आंशिक रूप से चालू किए जा चुके हैं। सबस्टेशन बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं और वोल्टेज स्तर बदलते हैं, ताकि नेटवर्क के अलग-अलग हिस्से आपस में जुड़ सकें।
220 किलोवोल्ट की मर्कीचौक-भरतपुर लाइन, 132 किलोवोल्ट की ढल्केबर-बलगंगा लाइन और 132 किलोवोल्ट की लालबंदी-सलेमपुर लाइन संबंधित सबस्टेशनों के साथ चालू हो गई हैं। बालकोट और दहाचोक सबस्टेशन तथा चंद्रपुर-सुखदेवचौक और लहान-सुखीपुर लाइनों पर काम शुरू हो गया है। मंत्रालय की छह महीने की समीक्षा में चालू वित्त वर्ष के भीतर 12 और पारेषण लाइनें पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
करीब 145 किलोमीटर लंबी और अनुमानित 20 अरब नेपाली रुपये की लागत वाली 400 किलोवोल्ट पश्चिम सेती पारेषण लाइन के जरिए निजी निवेश लाने की कोशिश हो रही है। इस सार्वजनिक-निजी भागीदारी परियोजना के लिए एक अलग कंपनी पंजीकृत की गई है। एनईए ने चार पारेषण लाइनों के लिए निजी और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है।
नेपाल और भारत के बीच सहमत क्षमता बढ़ोतरी से बिजली आयात के लिए 400 मेगावाट की वृद्धि होगी, यानी 1,000 मेगावाट से 40 प्रतिशत अधिक। निर्यात क्षमता में 550 मेगावाट की बढ़ोतरी होगी, यानी 1,100 मेगावाट से 50 प्रतिशत अधिक। इस विस्तारित संपर्क का इस्तेमाल करने के लिए कारोबारियों को फिर भी संबंधित नेटवर्क पहुंच और लेनदेन की मंजूरी लेनी होगी।
भंडारण और नवीकरणीय ऊर्जा भी सुधारों का हिस्सा
मंत्रालय जलाशय वाली जलविद्युत परियोजनाओं को 50 साल के लाइसेंस देने के लिए बिजली नियमावली, 1993 में संशोधन की तैयारी कर रहा है। जलाशयों में पानी जमा किया जा सकता है, जिससे संयंत्र बिजली उत्पादन का समय अधिक लचीले ढंग से तय कर सकते हैं। श्रेष्ठ का कहना है कि लंबे लाइसेंस से लगातार आपूर्ति में मदद करने और निचले इलाकों में बाढ़ नियंत्रित करने वाली परियोजनाओं में निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
मंत्रालय बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बीईएसएस) के लिए बिजली खरीद दरों और दिशानिर्देशों पर भी काम कर रहा है। बैटरियां उपलब्ध उत्पादन के समय बिजली जमा कर सकती हैं और बाद में आपूर्ति कर सकती हैं, जिससे ग्रिड को सौर उत्पादन और मांग में बदलाव संभालने में मदद मिलती है। दरों पर चर्चा जारी है।
छह महीने की समीक्षा में लघु और सूक्ष्म जलविद्युत परियोजनाओं से 693 किलोवाट, सौर मिनी-ग्रिड से 841 किलोवाट और संस्थानों में कुल 18,575.30 किलोवाट की छतों पर सौर ऊर्जा स्थापना का ब्योरा दर्ज है। इसमें 315 सौर सिंचाई पंप लगाने का भी उल्लेख है, जो बिजली विकास को कृषि उपयोग से जोड़ता है।
नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता विधेयक प्रतिनिधि सभा में पंजीकृत किया गया है, जबकि जलस्रोत विधेयक मंत्रिमंडल को सौंपा गया है। बिजली और सिंचाई विधेयकों के मसौदों पर विचार-विमर्श चल रहा है। उपभोक्ता टैरिफ दिशानिर्देश और पारेषण शुल्क की गणना के मानक जारी किए गए हैं। पारेषण और वितरण के लिए खुली पहुंच का निर्देश भी तैयार किया गया है।
सिंचाई और बाढ़ के बाद बहाली भी एजेंडे में
सिक्टा में 13 किलोमीटर नहर जोड़ी गई है, जिससे 1,300 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई पहुंची है। इसकी 27 निविदाओं में से 11 के लिए अनुबंधों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और निर्माण शुरू हो गया है। अन्य परियोजनाओं में महाकाली में 1,155 हेक्टेयर, बदकापथ में 610, बबई में 600 और रानी जमरा कुलरिया में 150 हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र जोड़ा गया है। इन पांच परियोजनाओं ने मिलकर 3,815 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ाई है।
मंत्रालय का लक्ष्य अगले दो वित्त वर्षों में बबई और भेरी-बबई डायवर्जन बहुउद्देशीय परियोजना पूरी करना है। सुनकोशी-मरिन के सिविल निर्माण के लिए नई निविदाएं तकनीकी मूल्यांकन से गुजरकर वित्तीय मूल्यांकन तक पहुंच गई हैं। कुछ दिनों में अनुबंध पर हस्ताक्षर का लक्ष्य है। रानी जमरा कुलरिया और राजापुर में दूरस्थ मापन तकनीक से जल प्रवाह की निगरानी शुरू हो गई है।
बाढ़ के बाद बहाली भी बिजली कार्यक्रम का हिस्सा है। क्षतिग्रस्त कोहलपुर-सुर्खेत लाइन पर आपातकालीन बहाली प्रणाली लगाई गई है। श्रेष्ठ का कहना है कि राष्ट्रीय पारेषण प्रणाली को भारी नुकसान के बावजूद एनईए के कर्मचारियों और तकनीशियनों ने बिजली आपूर्ति बनाए रखी।
रसुवा और नुवाकोट में 26 अगस्त की बाढ़ के बाद लापता हुए एनईए कर्मचारियों के छह परिवारों को राहत मिली है। एनईए बोर्ड ने प्रत्येक परिवार को तत्काल 500,000 नेपाली रुपये देने की मंजूरी दी। इसके अलावा, कर्मचारी के पद से जुड़ी शुरुआती मूल वेतन राशि का आधा छह महीने तक दिया जाएगा।
मंत्रालय ने प्रमुख नदियों के लिए बाढ़ पूर्वानुमान की अवधि तीन से बढ़ाकर पांच दिन और छोटी नदियों में अचानक आने वाली बाढ़ का पूर्वानुमान 24 से बढ़ाकर 48 घंटे कर दिया है। संभावित प्रभाव बताने वाले पूर्वानुमान 15 स्थानीय सरकारी क्षेत्रों में जारी किए जा रहे हैं और 16 अन्य क्षेत्रों में उनका परीक्षण चल रहा है। ये उपाय बिजली और सिंचाई सेवाओं में रुकावट कम करने तथा बुनियादी ढांचे की बहाली के प्रयासों के साथ चल रहे हैं।
मुख्य बातें
- ग्यारह कंपनियों ने आशय पत्र के लिए आवेदन किया है। शुरुआती दस्तावेज दशैं से पहले जारी करने का लक्ष्य है।
- निजी कारोबार के पूर्ण लाइसेंस के लिए कानूनी संशोधन और नियामकीय व्यवस्थाएं जरूरी हैं; निर्यात के लिए भारत की मान्यता और मंजूरी भी चाहिए।
- पीपीए के नए मानदंड परियोजना की तैयारी, पारेषण नेटवर्क तक पहुंच और जरूरत के समय भरोसेमंद आपूर्ति को प्राथमिकता देते हैं।
- सुधारों के विस्तृत ब्योरे में समयसीमा बढ़ाई गई 27 परियोजनाओं की क्षमता 540.47 मेगावाट बताई गई है।
- भारत के साथ सहमत पारेषण क्षमता बढ़कर आयात के लिए 1,400 मेगावाट और निर्यात के लिए 1,650 मेगावाट हो जाएगी।
- वित्त वर्ष 2026/27 में ग्रिड तक अल्पकालीन पहुंच का शुल्क 0.57 नेपाली रुपये प्रति यूनिट और मध्यम तथा लंबी अवधि की पहुंच का शुल्क 413,000 नेपाली रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह है।
- नीति को बिजली बिक्री में बदलने के लिए पारेषण निर्माण, भंडारण के नियम और बिजली संयंत्रों को पूरा करना जरूरी अगले कदम हैं।






