3,600 करोड़ नेपाली रुपये के निवेश के बाद भी भैरहवा हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का सूखा

पढ़ने में 14 मिनट
Bhairahawa Airport Faces International Flight Drought After NPR 36 Billion Investment

नियमित अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवा के बिना तैयार हवाई अड्डा

भैरहवा स्थित गौतम बुद्ध अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 16 मई, 2022 को उद्घाटन के बाद से अब तक 69,377 अंतरराष्ट्रीय यात्री आवाजाही दर्ज की गई है। फिर भी, हालिया विवरण के अनुसार यहां साढ़े छह महीने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें नहीं हैं। इस बीच सार्वजनिक निवेश में लगभग 36 अरब नेपाली रुपये खर्च किए जा चुके हैं और कर्मचारियों, उपकरणों तथा रखरखाव पर लगातार खर्च हो रहा है।

विषय-सूची
  1. नियमित अंतरराष्ट्रीय विमानन सेवा के बिना तैयार हवाई अड्डा
  2. शुरुआती उम्मीदों से बार-बार उड़ानों में रुकावट तक
  3. यात्री आंकड़े क्या बताते हैं
  4. सार्वजनिक खर्च निर्माण लागत से कहीं अधिक
  5. निजी निवेश का अनुमान 8,000 करोड़ से 10,000 करोड़ नेपाली रुपये से अधिक तक
  6. सस्ती उड़ानें ही काफी क्यों नहीं
  7. मौसम और पहुंच मार्ग अलग-अलग बाधाएं हैं
  8. अस्थायी रूप से बदले गए मार्गों से कारोबार को मदद मिली, पर स्थायी बाजार नहीं बना
  9. कारोबार पर दबाव जारी, उड़ानें फिर शुरू होने की पुष्टि नहीं
  10. मुख्य बिंदु

दर्ज की गई आखिरी अंतरराष्ट्रीय सेवा थाई एयरएशिया की 25 मार्च, 2026 की बैंकॉक उड़ान थी। इस उड़ान से 14 यात्री भैरहवा पहुंचे और 106 यात्री बैंकॉक लौटे। हवाई अड्डे के सूचना अधिकारी पवन अग्रहरि बनिया ने बताया कि किसी भी विमानन कंपनी ने नया अंतरराष्ट्रीय उड़ान कार्यक्रम जमा नहीं किया है। 12 अक्टूबर को दिल्ली से प्रस्तावित चार्टर उड़ान को मंजूरी नहीं मिली थी।

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का ठप होना और हवाई अड्डे का पूरी तरह बंद होना अलग बातें हैं। अन्य विवरणों में घरेलू सेवाओं का उल्लेख है, जिन्हें राजस्व का एक स्रोत भी बताया गया है। तात्कालिक समस्या नियमित अंतरराष्ट्रीय सेवाओं का अभाव है। इस हवाई अड्डे का उद्देश्य लुंबिनी को विदेशी पर्यटकों से जोड़ना और काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विकल्प देना था।

इसी उम्मीद में कारोबारियों ने होटल, रेस्तरां, परिवहन सेवाओं और अन्य व्यवसायों में निवेश किया। अब उनकी चिंता खाली टर्मिनल तक सीमित नहीं है: बैंक ऋण लेकर किए गए निवेश का भुगतान जारी रखना पड़ रहा है, जबकि जिन यात्रियों की उम्मीद थी, वे नहीं आ रहे।

शुरुआती उम्मीदों से बार-बार उड़ानों में रुकावट तक

राष्ट्रीय गौरव की इस परियोजना का निर्माण जनवरी 2015 में शुरू हुआ। सात साल से अधिक समय बाद हवाई अड्डा खुला, लेकिन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की अलग-अलग अवधियां कभी भरोसेमंद नियमित कार्यक्रम में नहीं बदल सकीं। अहम पड़ाव महत्वाकांक्षा के पैमाने और उसके बाद आई रुकावटों, दोनों को दिखाते हैं:

  • जनवरी 2015: अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परियोजना का निर्माण शुरू हुआ।
  • 16 मई, 2022: हवाई अड्डे का वाणिज्यिक परिचालन के लिए उद्घाटन हुआ।
  • नवंबर 2024: त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की क्षमता बढ़ाने के काम के दौरान कुछ अंतरराष्ट्रीय सेवाएं भैरहवा आईं। कुछ दिनों में चार या पांच उड़ानें पहुंचीं या रवाना हुईं।
  • 25 मार्च, 2026: थाई एयरएशिया ने आखिरी दर्ज अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालित की, जिसमें 14 यात्री पहुंचे और 106 रवाना हुए।
  • 12 अक्टूबर: दिल्ली से चार्टर उड़ान का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन हालिया विवरण के समय मंजूरी लंबित थी।

एक पुराने विवरण में बताया गया था कि सितंबर से नवंबर के बीच पांच विमानन कंपनियां सेवाएं दे रही थीं: जजीरा एयरवेज, फ्लाईदुबई, थाई एयरएशिया, कतर एयरवेज और नेपाल एयरलाइंस। इसके बाद इन कंपनियों ने गर्मियों के मौसम के लिए सेवाएं वापस ले लीं। वहां दी गई सापेक्ष तारीखें इतनी स्पष्ट नहीं हैं कि हर घटनाक्रम को बाद के 2026 के कालक्रम में रखा जा सके।

विज्ञापन

यह फर्क इसलिए अहम है ताकि अलग-अलग उड़ान रुकावटों को एक ही लगातार बंदी न मान लिया जाए। खासकर काठमांडू में परिचालन संबंधी बाधाएं आने पर भैरहवा ने अलग-अलग समय पर विमानन कंपनियों को आकर्षित किया है। लेकिन उन अस्थायी परिस्थितियों से स्वतंत्र, नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ान कार्यक्रम यहां कायम नहीं हो पाया है।

यात्री आंकड़े क्या बताते हैं

हालिया संचयी आंकड़ों के अनुसार यहां 1,222 निर्धारित और चार्टर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित हुईं, जिनसे 31,932 यात्री पहुंचे और 37,445 रवाना हुए। पहुंचने वालों से 5,513 अधिक यात्री रवाना हुए। कुल 69,377 यात्री आवाजाही में यह लगभग 54 प्रतिशत है। ये हवाई अड्डे से होकर हुई यात्राएं हैं, जरूरी नहीं कि इनमें 69,377 अलग-अलग लोग शामिल हों।

थाई एयरएशिया की आखिरी सेवा में यात्रियों की आवाजाही का अंतर कहीं अधिक था: 14 यात्रियों के पहुंचने की तुलना में 106 रवाना हुए। एक उड़ान से किसी मार्ग की लाभप्रदता तय नहीं की जा सकती, और विमान की सीट क्षमता भी नहीं बताई गई है। हालांकि, यह दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय सेवा का आकलन सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि वह नेपाल में कितने पर्यटक लेकर आती है।

एक अलग विवरण में नवंबर में 4,279, दिसंबर में 3,878 और जनवरी में 1,365 यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई। इसके बाद फरवरी में यह संख्या 6,779 और मार्च में 7,034 रही। जनवरी का आंकड़ा नवंबर से लगभग 68 प्रतिशत कम था, जबकि मार्च में यह जनवरी से पांच गुने से अधिक हो गया। जनवरी की गिरावट का एक कारण सर्दियों का कोहरा बताया गया।

इसके बाद की समय-सारिणी इस सुधार को कायम नहीं रख सकी। हवाई अड्डे के महाप्रबंधक प्रताप बाबू तिवारी ने बताया कि गर्मियों का कार्यक्रम शुरू होने पर विमानन कंपनियों ने भैरहवा के लिए स्लॉट का आवेदन नहीं किया। स्लॉट किसी विमान के आने या रवाना होने के लिए तय किया गया समय होता है। आवेदन और पुष्ट सेवाएं न होने पर पिछले महीनों में यात्रियों की बढ़ती संख्या के बावजूद उड़ानें जारी नहीं रह सकीं।

सार्वजनिक खर्च निर्माण लागत से कहीं अधिक

प्रमुख विवरण में सार्वजनिक खर्च लगभग 36 अरब नेपाली रुपये बताया गया है। इसमें 500 बीघा जमीन अधिग्रहित करने के लिए 22 अरब नेपाली रुपये का मुआवजा शामिल है। इन आंकड़ों के आधार पर कुल खर्च में भूमि मुआवजे की हिस्सेदारी लगभग 61 प्रतिशत थी। बाकी 14 अरब नेपाली रुपये रनवे, नियंत्रण टावर, अन्य बुनियादी ढांचे और उपकरणों पर खर्च किए गए।

निवेश की कुल राशि पर रिपोर्टों में अंतर है। एक अन्य अनुमान में सरकारी खर्च लगभग 35 अरब नेपाली रुपये बताया गया है। नेपाल उद्योग वाणिज्य महासंघ के केंद्रीय सदस्य राजेश कुमार अग्रवाल ने लगभग 40 अरब नेपाली रुपये का आंकड़ा दिया और कहा कि बुनियादी ढांचे का लगातार विस्तार होने से लागत बढ़ रही है। इन अनुमानों को खर्च के एकसमान माप के तौर पर नहीं देखना चाहिए।

विज्ञापन

सरकार एशियाई विकास बैंक से लिए गए रियायती ऋण पर ब्याज भी चुका रही है। रियायती ऋण की शर्तें सामान्य वाणिज्यिक उधारी से बेहतर होती हैं, लेकिन हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानें न होने से कर्ज का भुगतान नहीं रुकता। ब्याज दर, बकाया राशि या सालाना कर्ज भुगतान का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है।

परिचालन लागत के आंकड़े भी अलग-अलग विवरणों में भिन्न हैं। हालिया विवरण में 100 से अधिक स्थायी, अस्थायी और अनुबंधित कर्मचारियों का उल्लेख है। सालाना परिचालन और प्रशासनिक खर्च 80 मिलियन नेपाली रुपये से अधिक बताया गया है। एक अन्य विवरण में नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के 141 कर्मचारी, सुरक्षा बल के 422 कर्मी और नेपाल पुलिस की अतिरिक्त सहायता बताई गई है। इसके साथ सालाना परिचालन खर्च 350 मिलियन और राजस्व 250 मिलियन नेपाली रुपये दर्ज है, यानी सालाना 100 मिलियन नेपाली रुपये का घाटा। तारीखों और लेखा-सीमाओं का अंतर इन आंकड़ों में कुछ फर्क समझा सकता है, लेकिन इनका मिलान नहीं किया गया है।

निजी निवेश का अनुमान 8,000 करोड़ से 10,000 करोड़ नेपाली रुपये से अधिक तक

सिद्धार्थ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष नेत्र प्रसाद आचार्य ने अनुमान लगाया कि स्थानीय कारोबारियों ने हवाई अड्डे से जुड़े उद्यमों में लगभग 80 अरब नेपाली रुपये का निवेश किया है। इसमें भैरहवा, तिलोत्तमा, लुंबिनी और बुटवल के होटल और रेस्तरां, साथ ही बढ़ती मांग की उम्मीद में खरीदी गई संपत्तियां शामिल हैं।

पर्यटन कारोबारी और नेपाल टूर एंड ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन की लुंबिनी शाखा के पूर्व अध्यक्ष सागर अधिकारी ने निजी निवेश को सरकारी खर्च के दोगुने से अधिक बताया। उन्होंने बताया कि कारोबारियों ने क्यों निवेश किया:

"निजी क्षेत्र ने इस भरोसे निवेश किया कि हवाई अड्डा सुचारु रूप से चलेगा, नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू होंगी और लुंबिनी में पर्यटकों की आवक तेजी से बढ़ेगी। लेकिन नियमित उड़ानें लंबे समय तक बंद रहने से हमें अपेक्षित लाभ नहीं मिला," उन्होंने कहा।

एसोसिएशन की लुंबिनी प्रदेश शाखा के पूर्व अध्यक्ष विष्णु शर्मा के एक पुराने अनुमान में निजी निवेश 100 अरब नेपाली रुपये से अधिक बताया गया था। ये कारोबारी प्रतिनिधियों के अनुमान हैं, किसी एक लेखापरीक्षित कुल राशि के आंकड़े नहीं। इनके दायरे और तारीखें अलग-अलग हैं, इसलिए इन्हें जोड़कर नुकसान का सटीक माप नहीं निकाला जा सकता।

जोखिम में पड़ा निवेश और पहले से हो चुका नुकसान भी अलग बातें हैं। होटल में कमरों की उपलब्धता और इस्तेमाल, बकाया ऋण, कारोबार बंद होने या संपत्तियों के मूल्य में कमी के कोई समेकित आंकड़े नहीं हैं। फिर भी, बैंक से उधार लेकर निवेश करने वाले कारोबारियों को कर्ज चुकाना जारी रखना पड़ता है, जबकि जिस बाजार की उम्मीद थी, वह अनिश्चित बना हुआ है। लुंबिनी प्रदेश में महासंघ के अध्यक्ष ठाकुर कुमार श्रेष्ठ ने कहा कि निवेशकों ने सरकार के आश्वासनों पर भरोसा किया था और हवाई अड्डे को चालू करने की मांग की।

विज्ञापन

सस्ती उड़ानें ही काफी क्यों नहीं

विमानन कंपनियों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने पार्किंग और विमान ईंधन पर रियायतें दी हैं। तिवारी ने बताया कि उनके विवरण में शामिल अवधि के दौरान अप्रैल से ईंधन की कीमतों और यात्री सेवा शुल्क में कटौती लागू हुई। पहले प्रोत्साहनों में शुरुआती वर्ष के दौरान हवाई अड्डे के कई शुल्कों पर पूरी छूट और ग्राउंड हैंडलिंग शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती शामिल थी।

ग्राउंड हैंडलिंग में विमान के जमीन पर रहने के दौरान जरूरी सेवाएं आती हैं, जैसे सामान संभालना और उड़ान की तैयारी। इन शुल्कों में कटौती से विमानन कंपनी की लागत कम हो सकती है। लेकिन इससे यात्रियों की अलग समस्या दूर नहीं होती: नेपाल से रवाना होने से पहले कागजी कार्रवाई के लिए उन्हें काठमांडू जाना पड़ता है।

सिद्धार्थ होटल एसोसिएशन नेपाल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष किशोर जोशी ने वीजा सेवाओं, अनापत्ति पत्र, चिकित्सकीय जांच, बीमा और भर्ती एजेंसियों की कमी को समस्या बताया। हवाई अड्डे के अन्य अधिकारियों और कारोबारी प्रतिनिधियों ने भी यही दिक्कत बताई। प्रवासी श्रमिकों के लिए श्रम स्वीकृति और जरूरी चिकित्सकीय जांच रवाना होने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं, वैकल्पिक सेवाएं नहीं।

हालिया विवरण के अनुसार, दो साल पहले श्रम कार्यालय, स्वास्थ्य जांच, वीजा कार्यालय और आपातकालीन पासपोर्ट सेवाएं स्थापित करने के फैसले लगातार तीन सरकारों के कार्यकाल में लागू नहीं हुए। तिवारी के विवरण में मंत्रिमंडल के विकेंद्रीकरण संबंधी फैसले को पिछले वर्ष जुलाई का बताया गया है। तारीखें अलग तरह से दी गई हैं, लेकिन दोनों विवरणों में कहा गया है कि जिन सेवाओं का वादा किया गया था, वे शुरू नहीं हुईं।

इसका व्यावहारिक नतीजा साफ है: जिस यात्री को पहले काठमांडू जाना हो, वह भैरहवा तक एक और यात्रा करने के बजाय काठमांडू से ही रवाना होना चुन सकता है। सिर्फ हवाई अड्डे पर रियायतें देने से यह असुविधा दूर नहीं होगी।

मौसम और पहुंच मार्ग अलग-अलग बाधाएं हैं

पहले उड़ानों में एक रुकावट सर्दियों के घने कोहरे और कम दृश्यता से जुड़ी थी। उड़ानों का मार्ग बदलने के बाद जजीरा एयरवेज काठमांडू लौट गई, जबकि वापसी की घोषित तारीखें 15 जनवरी से खिसककर फरवरी के पहले सप्ताह तक पहुंच गईं। उस विवरण में अंतरराष्ट्रीय उड़ानें एक महीने तक बंद रहने की बात थी। यह बाद में बताई गई साढ़े छह महीने की अनुपस्थिति से अलग घटना थी।

उस समय हवाई अड्डे के महाप्रबंधक गोविंदा दाहाल ने कहा था कि मौसम ही एकमात्र कारण नहीं था। हवाई अड्डे पर इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) था, लेकिन सीमा से निकटता के कारण उसके इस्तेमाल के लिए भारत की अनुमति जरूरी बताई गई थी। आईएलएस रेडियो संकेतों के जरिए रनवे की ओर आते विमान का मार्गदर्शन करता है और कम दृश्यता में पायलटों को उतरने में मदद देता है।

नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के पूर्व महानिदेशक राजकुमार छेत्री ने भारत से उपयुक्त प्रवेश मार्ग न होने का मुद्दा भी उठाया था। उन्होंने कहा कि सिमरा के रास्ते आने वाले विमानों को नौ से 10 मिनट अतिरिक्त लगते हैं, जिससे परिचालन लागत बढ़ती है। ये पुराने बयान परिचालन संबंधी बाधाओं की पहचान करते हैं; इनसे यह साबित नहीं होता कि बाद में कूटनीतिक या तकनीकी इंतजामों से वे बाधाएं दूर हो गईं।

विज्ञापन

व्यावसायिक मांग एक अलग चिंता बनी रही। बिज एयरवेज ने भैरहवा और अबू धाबी के बीच सप्ताह में तीन उड़ानें शुरू करने की योजना पर्याप्त कारोबार न होने की बात कहते हुए वापस ले ली। उस अवधि में जजीरा एयरवेज और हिमालय एयरलाइंस ने भी अपना परिचालन काठमांडू स्थानांतरित कर दिया। छेत्री ने कहा कि विमानन कंपनियों को बनाए रखने के लिए पर्याप्त यात्री संख्या जरूरी है:

"सप्ताह में तीन या चार उड़ानों के सहारे कोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो सकता। कारोबार नहीं होगा तो विमानन कंपनियां वापस नहीं आएंगी," छेत्री ने कहा।

अस्थायी रूप से बदले गए मार्गों से कारोबार को मदद मिली, पर स्थायी बाजार नहीं बना

नवंबर 2024 में त्रिभुवन हवाई अड्डे की क्षमता बढ़ाने से जुड़ी गतिविधियों ने स्थानीय कारोबारियों को उस मांग की झलक दी, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। एक दिन में कई अंतरराष्ट्रीय विमान आने या रवाना होने से छोटे होटलों, टैक्सियों और ऑटो रिक्शा को फायदा हुआ। सेवाएं बंद होते ही उनसे जुड़ा कारोबार फिर कमजोर पड़ गया।

तिवारी ने काठमांडू में भीड़ बढ़ने पर भैरहवा को विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा। इससे यात्रियों की आवाजाही बढ़ सकती है और त्रिभुवन पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन कभी-कभार मार्ग बदलने और यात्रियों तथा कारोबारियों की योजना के मुताबिक चलने वाली नियमित सेवाओं में फर्क है। कोई होटल ऐसे विमान के भरोसे बुकिंग नहीं बढ़ा सकता, जिसे कभी यहां भेजा जाए और कभी नहीं।

पर्यटन को लेकर दलीलों में लुंबिनी का बुद्ध जन्मस्थल होना केंद्रीय महत्व रखता है। पहले के एक विवरण में सिद्धार्थ होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश श्रेष्ठ ने पर्यटन के समन्वित विकास और बौद्ध पर्यटन स्थलों से संपर्क बढ़ाने की अपील की थी। उन्होंने श्रीलंका, थाईलैंड, म्यांमार, मंगोलिया, वियतनाम और चीन का नाम लिया था। ये प्रस्तावित बाजार थे, पुष्ट विमान मार्ग नहीं।

एक अलग रिपोर्ट में बताया गया है कि फ्लाईदुबई ने 23 सितंबर को बोइंग 737 मैक्स 8 विमान से दुबई से पोखरा के लिए दैनिक उड़ानें शुरू कीं, हालांकि वर्ष स्पष्ट नहीं किया गया है। इस घटनाक्रम से भैरहवा के कारोबारियों की उम्मीदें फिर बढ़ीं। इससे यह साबित नहीं होता कि दोनों हवाई अड्डों पर मांग या परिचालन परिस्थितियां समान हैं, और भैरहवा के लिए ऐसी कोई सेवा घोषित नहीं हुई।

कारोबार पर दबाव जारी, उड़ानें फिर शुरू होने की पुष्टि नहीं

स्थानीय कारोबारी समूहों ने नियमित उड़ानों की मांग के लिए ज्ञापन, बैठकें, प्रदर्शन और संसदीय अपील की हैं। सिद्धार्थनगर के कारोबारियों ने 15 दिनों तक धरना दिया और फिर अपनी मांगें लेकर काठमांडू में संघीय अधिकारियों से मिले। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सीमा शुल्क कार्यालय बंद करने और टिकट सेवाएं रोकने की धमकी दी, लेकिन विवरणों से यह साबित नहीं होता कि ये धमकियां अमल में लाई गईं।

विज्ञापन

प्रतिनिधिमंडलों ने पूर्व प्रधानमंत्रियों केपी शर्मा ओली, पुष्प कमल दाहाल और शेर बहादुर देउबा के सामने हवाई अड्डे की समस्याएं उठाईं। हालिया विवरण के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के नेतृत्व वाली सरकार से स्थानीय कारोबारियों की उम्मीदें फिर बढ़ी हैं। प्रतिनिधियों ने एक बार फिर प्रधानमंत्री और पर्यटन मंत्री से संपर्क किया है। किसी विमानन कंपनी के साथ पक्के समझौते या काम पूरा करने की समय-सीमा की जानकारी नहीं दी गई है।

चैंबर के अध्यक्ष आचार्य ने सरकार से कम से कम एक नियमित विमानन कंपनी सुनिश्चित करने की अपील की है। यह मांग सिर्फ हवाई अड्डे को चालू घोषित करने से अधिक सीमित और मापने योग्य है: निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय संपर्क अब भी नहीं है।

अगली अनिश्चित घटना 12 अक्टूबर को प्रस्तावित दिल्ली चार्टर उड़ान है। इसकी मंजूरी लंबित थी और मंजूरी मिल जाने पर भी इससे नियमित मार्ग स्थापित नहीं होगा। यात्रियों के लिए जरूरी सेवाएं कब शुरू होंगी, अंतरराष्ट्रीय उड़ान कार्यक्रम कब बहाल होगा या पुराने विवरणों में बताई गई परिचालन समस्याओं पर कब फैसला होगा, इसकी कोई तारीख नहीं दी गई है।

मूल समस्या हवाई अड्डे की तैयारी और उसके इस्तेमाल के बीच की खाई है। नेपाल ने एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए भुगतान किया है, कारोबारियों ने उसके आसपास निवेश किया है और कर्मचारी उसकी सुविधाओं का रखरखाव कर रहे हैं। नियमित उड़ानों के लिए ऐसे यात्रियों की जरूरत है जो भैरहवा से आसानी से रवाना हो सकें, परिचालन परिस्थितियां व्यावहारिक हों और विमानन कंपनियां अस्थायी मार्ग परिवर्तन से आगे भी सेवाएं जारी रखने को तैयार हों।

मुख्य बिंदु

  • हालिया विवरण के अनुसार, थाई एयरएशिया की 25 मार्च, 2026 की सेवा के बाद से साढ़े छह महीने से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें नहीं हैं।
  • 1,222 निर्धारित और चार्टर उड़ानों में कुल 69,377 अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की आवाजाही दर्ज की गई है।
  • निर्माण लागत का प्रमुख अनुमान 36 अरब नेपाली रुपये है, जिसमें 22 अरब नेपाली रुपये भूमि मुआवजे के हैं; अन्य अनुमान अलग हैं।
  • कारोबारी प्रतिनिधियों के अनुसार निजी निवेश लगभग 80 अरब नेपाली रुपये या उससे अधिक है, लेकिन नुकसान की कोई समेकित राशि तय नहीं है।
  • यात्रा और प्रवासन सेवाओं की कमी, मौसम के कारण पहले आई रुकावटों और पहुंच मार्गों से जुड़ी चिंताओं ने नियमित परिचालन को जटिल बनाया है।
  • अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिर शुरू होने की पुष्टि नहीं है। 12 अक्टूबर को प्रस्तावित दिल्ली चार्टर की मंजूरी लंबित थी।
यह लेख शेयर करें

आपको यह भी पसंद आ सकता है