आईटी शेयरों में तेजी और कर समीक्षा की उम्मीद से सेंसेक्स 1,109 अंक उछला

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Sensex Jumps 1,109 Points as IT Rally and Tax Review Hopes Lift Indian Stocks

देर से हुई खरीदारी से सेंसेक्स 73,000 के पार

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयरों में तेजी आई। सेंसेक्स 1,109.10 अंक यानी 1.54% चढ़कर 73,033.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 358.60 अंक यानी 1.60% बढ़कर 22,721.95 पर पहुंच गया। इस तेजी की अगुवाई प्रौद्योगिकी शेयरों ने की। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कराधान को लेकर निवेशकों की चिंताएं सुनने की इच्छा जताई, जिससे आखिरी घंटे में बाजार को एक और सहारा मिला।

विषय-सूची
  1. देर से हुई खरीदारी से सेंसेक्स 73,000 के पार
  2. तेजी ने कैसे पकड़ी रफ्तार
  3. कर पर चर्चा से उम्मीदें बढ़ीं, लेकिन कोई वादा नहीं
  4. प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय से सबसे बड़ी बढ़त
  5. निवेशकों की संपत्ति के आंकड़ों का असल मतलब
  6. आरबीआई के उपायों के बाद रुपये में सुधार
  7. तेल, महंगाई और विदेशी बिकवाली का दबाव कायम
  8. व्यापक शेयर बाजार से मिले-जुले संकेत
  9. अस्थिरता घटी, लेकिन टिकाऊ बदलाव की पुष्टि नहीं
  10. मुख्य बातें

इस तेजी से सूचीबद्ध शेयरों का मूल्य 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक बढ़ा, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में सटीक बढ़ोतरी के आंकड़े अलग हैं। अधिकांश रिपोर्टों के अनुसार, कारोबार के अंत में बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 470 लाख करोड़ रुपये था। सोमवार को लगभग 0.7% की गिरावट के बाद आई इस तेजी के साथ रुपया मजबूत हुआ, तेल की कीमतों में नरमी आई और प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय को लेकर धारणा बेहतर हुई।

उम्मीदों और फैसलों के बीच अंतर अहम है: सीतारमण ने पूंजीगत लाभ कर या प्रतिभूति लेनदेन कर में कटौती अथवा उसे हटाने की घोषणा नहीं की। निवेशकों ने किसी तय नीतिगत बदलाव के बजाय समीक्षा की संभावना पर प्रतिक्रिया दी।

अंतिम बेंचमार्क आंकड़े सेंसेक्स के 72,988.54 और निफ्टी के 22,702 के क्लोजिंग ऑक्शन स्तर से ऊंचे थे। इन स्तरों पर क्रमशः 1,063.86 और 338.70 अंक की बढ़त दिखी थी। ज्यादातर क्लोजिंग रिपोर्टों में सेंसेक्स 73,033.78 और निफ्टी 22,721.95 पर बंद होने की बात कही गई, इसलिए सत्र के लिए ये सबसे स्पष्ट संदर्भ आंकड़े हैं।

तेजी जोरदार थी, लेकिन सभी हिस्सों में समान नहीं रही। छोटी कंपनियों के कई सूचकांक कमजोर बने रहे, पिछले सत्र में विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे थे और दैनिक गिरावट के बावजूद ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था। इस सत्र ने राहत तो दी, लेकिन हालिया गिरावट के पीछे के दबाव दूर नहीं हुए।

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तेजी ने कैसे पकड़ी रफ्तार

कारोबार की शुरुआत लगभग बिना बदलाव के हुई, हालांकि शुरुआती दिशा को लेकर रिपोर्टों में मतभेद हैं। एक रिपोर्ट में दोनों बेंचमार्क करीब 30 अंक नीचे बताए गए। दूसरी रिपोर्ट के अनुसार, सेंसेक्स पिछले बंद स्तर लगभग 71,924 से थोड़ा ऊपर 71,951 पर खुला, जबकि निफ्टी लगभग 22,363 के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 22,364 पर खुला।

प्रौद्योगिकी शेयरों में खरीदारी बढ़ने के साथ बाजार की दिशा और स्पष्ट हुई। दोपहर करीब 1:30 बजे सेंसेक्स 531.87 अंक चढ़कर 72,456.55 पर था, जबकि निफ्टी 174.45 अंक बढ़कर 22,537.80 पर पहुंच गया था। करीब 2:30 बजे सेंसेक्स 72,600 के आसपास कारोबार कर रहा था, फिर बंद होने से पहले तेजी और बढ़ गई।

  • शनिवार: भारतीय रिजर्व बैंक ने डॉलर की मांग को संभालने और रुपये को सहारा देने के उपायों की घोषणा की।
  • सोमवार: मुद्रा पर और पाबंदियां लगाई गईं। शेयरों में गिरावट आई और विदेशी निवेशक शुद्ध विक्रेता बने रहे।
  • मंगलवार सुबह: बेंचमार्क लगभग स्थिर शुरुआत के साथ कारोबार करने लगे, जबकि प्रौद्योगिकी शेयर चढ़े और रुपया मजबूत हुआ।
  • मंगलवार दोपहर: पूंजीगत लाभ और लेनदेन करों को लेकर निवेशकों की चिंताओं पर सीतारमण की चर्चा के बाद बढ़त और मजबूत हुई।
  • मंगलवार का कारोबार समाप्त: सेंसेक्स 73,000 और निफ्टी 22,700 के ऊपर बंद हुआ।

सोमवार को निफ्टी के बंद स्तर को लेकर भी रिपोर्टें अलग-अलग हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया कि सूचकांक संभलकर 22,500 के ऊपर पहुंचा, जबकि मंगलवार के अंतिम आंकड़ों और 358.60 अंक की बताई गई बढ़त से पिछले बंद स्तर 22,363.35 निकलता है। ये दोनों विवरण एक ही क्लोजिंग स्तर को नहीं दर्शा सकते।

कर पर चर्चा से उम्मीदें बढ़ीं, लेकिन कोई वादा नहीं

नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में सीतारमण ने माना कि भारतीय और विदेशी निवेशकों ने दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर यानी एलटीसीजी को लेकर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने प्रतिभूति लेनदेन कर यानी एसटीटी और अलग-अलग परिसंपत्ति वर्गों पर समान कर व्यवस्था लागू करने की बहस पर भी चर्चा की।

एलटीसीजी उन निवेशों से हुए मुनाफे पर लागू होता है जिन्हें तय पात्रता अवधि से अधिक समय तक रखा गया हो। अल्पकालिक पूंजीगत लाभ कर यानी एसटीसीजी उन निवेशों से हुए मुनाफे पर लगता है जिन्हें इससे कम समय में बेच दिया जाए। एसटीटी अलग है: यह निवेशक के मुनाफे पर नहीं, बल्कि कुछ निर्दिष्ट प्रतिभूति लेनदेन पर लगाया जाता है। इनमें से किसी एक कर में बदलाव से बाकी करों में अपने आप बदलाव नहीं होगा।

केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि बजट की तैयारी के दौरान वे यह संकेत क्यों नहीं देंगी कि कौन-से प्रस्ताव स्वीकार किए जा सकते हैं:

हम बजट के बेहद करीब हैं और इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। ऐसे में मेरे लिए यह कहना शायद ठीक समय नहीं होगा कि मैं किन बातों पर विचार करूंगी और किन पर नहीं।

उनकी यह टिप्पणी इक्विटी पर कर व्यवस्था की समीक्षा की मांगों के बाद आई। 2024 के बजट में इक्विटी पर एलटीसीजी दर बढ़ाकर 12.5% कर दी गई थी। एसबीआई रिसर्च की इकोरैप रिपोर्ट में भी इक्विटी पर एलटीसीजी कर खत्म करने और शेयर रखने की अवधि बढ़ाकर दो या तीन साल करने की मांग की गई। यह एक शोध संबंधी सिफारिश थी, सरकार का फैसला नहीं।

रिपोर्टों में अगली केंद्रीय बजट प्रस्तुति को, जिसके फरवरी में आने की उम्मीद है, नीतिगत फैसले से जुड़ा कार्यक्रम बताया गया है। कर संबंधी फैसले की कोई तय तारीख, परामर्श की समयसीमा या विशिष्ट प्रस्ताव घोषित नहीं किया गया।

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प्रौद्योगिकी कंपनियों की आय से सबसे बड़ी बढ़त

निफ्टी आईटी सूचकांक 5% से अधिक चढ़ा। सुबह के कारोबार में भी इसमें 3% से ज्यादा की बढ़त थी और शुरुआत में इसके सभी दस घटक शेयर ऊपर थे। बाद की बढ़त को अलग-अलग रिपोर्टों में 5.22% और 5.5% बताया गया, लेकिन इस अंतर को स्पष्ट नहीं किया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 के बाद सूचकांक की यह सबसे बड़ी दैनिक बढ़त थी।

तिमाही नतीजों के बाद एचसीएलटेक तेजी में सबसे आगे रहा। मुनाफे में सुधार, ऑर्डर बुकिंग और उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवाओं से होने वाली आय को खरीदारी लौटने की वजह बताया गया। हालिया नतीजों के बाद टीसीएस भी चढ़ा, जबकि इंफोसिस और टेक महिंद्रा में भी तेजी आई।

शेयरों की सटीक बढ़त के आंकड़े अलग-अलग रिपोर्टों में भिन्न हैं। एक क्लोजिंग आंकड़े के अनुसार, एचसीएलटेक 8.42%, टीसीएस 6.79%, टेक महिंद्रा 4.93% और इंफोसिस 4.13% चढ़े। दूसरी रिपोर्ट में इनकी बढ़त क्रमशः 8.28%, 6.59%, 4.90% और 4.44% बताई गई। दोनों रिपोर्टें एक ही रुझाना दिखाती हैं: बड़ी सॉफ्टवेयर सेवा कंपनियों में व्यापक तेजी।

चोलामंडलम सिक्योरिटीज में इक्विटी रिसर्च प्रमुख धर्मेश कांत ने कहा कि हालिया नतीजों से इस क्षेत्र को लेकर अधिक सकारात्मक नजरिया रखने के आधार मिले हैं:

एक्सेंचर, टीसीएस और एचसीएलटेक के तिमाही नतीजे बताते हैं कि आईटी कंपनियों की आय वृद्धि को लेकर सबसे बुरी चिंताएं शायद अब पीछे छूट चुकी हैं।

छोटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयर भी चढ़े। एमफैसिस 5.18%, कोफोर्ज 4.46% और पर्सिस्टेंट 3.86% बढ़े, जबकि नतीजों से पहले टाटा एलेक्सी 5% से अधिक चढ़ा। हालांकि, मंगलवार की उछाल के बाद भी साल की शुरुआत से निफ्टी आईटी सूचकांक की गिरावट अलग-अलग रिपोर्टों में 21.2% या 23% बताई गई। इस तेजी से बड़ी गिरावट का केवल एक हिस्सा ही वापस मिला।

निवेशकों की संपत्ति के आंकड़ों का असल मतलब

अक्सर बताई जाने वाली 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़त बाजार पूंजीकरण में हुई वृद्धि है, निवेशकों को मिली नकदी नहीं। बाजार पूंजीकरण, मौजूदा कीमतों पर बकाया शेयरों का मूल्य होता है। इसमें बढ़त से निवेश के घोषित मूल्य में इजाफा होता है, लेकिन निवेशकों को मुनाफा तभी मिलता है जब वे अपने खरीद मूल्य से अधिक पर शेयर बेचें।

सबसे विस्तृत गणना के अनुसार, बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मूल्य सोमवार के 4,65,91,974.21 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,70,07,567.40 करोड़ रुपये हो गया। इन आंकड़ों का अंतर 4,15,593.19 करोड़ रुपये, यानी करीब 4.16 लाख करोड़ रुपये है। एक लाख करोड़ रुपये 1 ट्रिलियन रुपये के बराबर होता है।

अन्य रिपोर्टों में बढ़त 4.12 लाख करोड़ या 4.62 लाख करोड़ रुपये बताई गई, जबकि एक अन्य रिपोर्ट में इसे करीब 5 लाख करोड़ रुपये पर गोल किया गया। 4.62 लाख करोड़ रुपये के अनुमान में सोमवार का आधार 465.45 लाख करोड़ और मंगलवार का कुल मूल्य 470.07 लाख करोड़ रुपये लिया गया है।

सोमवार का एक अलग आंकड़ा 4,65,16,690 करोड़ रुपये बताया गया, जिसे सेंसेक्स की कंपनियों का बाजार मूल्य कहा गया। यह विवरण दूसरी जगहों पर इस्तेमाल किए गए बीएसई की सभी सूचीबद्ध कंपनियों के व्यापक आंकड़े से मेल नहीं खाता, इसलिए दोनों कुल आंकड़ों की सीधे तुलना नहीं की जानी चाहिए। शुरुआती मूल्यों में अंतर के कारण संपत्ति में हुई सटीक बढ़त तय नहीं की जा सकती।

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आरबीआई के उपायों के बाद रुपये में सुधार

डॉलर की मांग से दबाव कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के उपायों का आकलन करते हुए रुपया मजबूत हुआ। यह पिछले बंद स्तर 95.78 के मुकाबले 62 पैसे चढ़कर प्रति डॉलर 95.16 पर खुला। शुरुआती कारोबार की एक अन्य रिपोर्ट में 82 पैसे की बढ़त के साथ रुपया 94.96 पर बताया गया।

क्लोजिंग आंकड़ों में कम एकरूपता है। एक रिपोर्ट में अस्थायी क्लोजिंग स्तर 95.30 बताया गया, जो 48 पैसे की बढ़त है; दूसरी में 40 पैसे की बढ़त के साथ 95.38 का आंकड़ा दिया गया। एक अन्य रिपोर्ट में 95.28 बताया गया, लेकिन उसे अंतिम क्लोजिंग स्तर नहीं कहा गया। मंगलवार को रुपये की बढ़त लगातार दूसरा सत्र थी या तीसरा, इस पर भी रिपोर्टें अलग हैं।

आरबीआई के उपायों में तीन सरकारी तेल कंपनियों के लिए डॉलर आपूर्ति की विशेष व्यवस्था, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव पर पाबंदियां और कुछ मुद्रा अनुबंधों के लिए 20% नकद आरक्षित रखने की अनिवार्यता शामिल थी। तेल कंपनियों को अलग से डॉलर उपलब्ध कराने से नियमित बाजार में उनकी डॉलर खरीद की जरूरत घट सकती है।

सोमवार को घोषित अतिरिक्त पाबंदियों के तहत विदेशी ग्राहकों के लिए रुपये में गैर-डिलीवरी योग्य डेरिवेटिव अनुबंधों का इस्तेमाल केवल जोखिम से बचाव तक सीमित कर दिया गया। ये अनुबंध रुपये की वास्तविक डिलीवरी के बिना मुद्रा के उतार-चढ़ाव के आधार पर लेनदेन करने देते हैं। जोखिम से बचाव का अर्थ मौजूदा जोखिम को कम करने के लिए वित्तीय अनुबंध का इस्तेमाल करना है, न कि केवल कीमतों में बदलाव पर दांव लगाना।

एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जातिन त्रिवेदी ने कहा कि मुद्रा में टिकाऊ सुधार विदेशी संस्थागत निवेश के प्रवाह, कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर के व्यापक उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगा। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने भी सौदों की स्थिति कम होने, डॉलर की कमजोरी, सस्ते कच्चे तेल और शेयर बाजार में उछाल को सहायक कारक बताया।

तेल, महंगाई और विदेशी बिकवाली का दबाव कायम

मंगलवार के कारोबार में ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत घटी, लेकिन रिपोर्टों में इसके भाव 104.55 से 105.87 डॉलर प्रति बैरल तक रहे। एक रिपोर्ट में करीब 1.2% गिरावट के साथ भाव 105.40 डॉलर बताया गया, जबकि दूसरी में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। ये आंकड़े हालिया ऊंचाई से राहत दिखाते हैं, ऊर्जा की कीमतों के सस्ता होने की स्थिति नहीं।

अमेरिकी कच्चे तेल का भाव 1.5% गिरकर 92.34 डॉलर प्रति बैरल बताया गया, जबकि अन्य रिपोर्टों में यह 93 डॉलर से नीचे था। रूस से ऊर्जा की अतिरिक्त आपूर्ति की उम्मीदों से बाजार की धारणा को बल मिला। रिपोर्टों में क्षेत्रीय ऊर्जा आपूर्ति मार्गों पर नए सुरक्षा जोखिमों का भी जिक्र था, जिससे कीमतों में गिरावट टिकने को लेकर भरोसा सीमित रहा।

भारत के लिए महंगा आयातित तेल डॉलर की मांग बढ़ा सकता है और कीमतों पर दबाव डाल सकता है। सितंबर की खुदरा महंगाई दर 5.54% बताई गई, जिससे आरबीआई के ब्याज दर संबंधी फैसलों पर नजर बनी रही। अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में नरमी से कुछ राहत मिली: 10 वर्षीय ट्रेजरी प्रतिफल 5.2% से नीचे आया, जबकि दो वर्षीय प्रतिफल 4.8% से नीचे चला गया।

विदेशी बिकवाली एक और बाधा बनी रही। विदेशी निवेशकों ने सोमवार को भारतीय शेयरों में 1,708 करोड़ रुपये की बिकवाली की। यह लगातार तेरहवां सत्र था जब वे शुद्ध विक्रेता रहे। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आंकड़ों के हवाले से अक्टूबर में निकासी 45,416 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि सितंबर में यह 35,861 करोड़ रुपये थी।

इस हिसाब से अक्टूबर की बताई गई निकासी सितंबर की कुल निकासी से 9,555 करोड़ रुपये, यानी करीब 26.6% अधिक है। यह तुलना खास तौर पर इसलिए उल्लेखनीय है कि अक्टूबर का आंकड़ा पूरे महीने का नहीं, बल्कि सबसे हालिया रिपोर्ट की अवधि का था। केवल मंगलवार की तेजी से यह साबित नहीं होता कि विदेशी बिकवाली का रुख पलट गया है।

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व्यापक शेयर बाजार से मिले-जुले संकेत

तेजी प्रौद्योगिकी क्षेत्र से आगे भी फैली। विभिन्न क्षेत्रीय सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी 2.48%, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसयू बैंक 1.46%, एफएमसीजी 1.40%, ऑटो 1.23%, मेटल 1.17% और बैंक 1.03% चढ़े। एचयूएल 2.94% और ट्रेंट 2.61% बढ़े।

कारोबार के दौरान बाजार की चौड़ाई बदली और अलग-अलग सूचकांकों में भिन्न रही। दोपहर की एक रिपोर्ट में 16 प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में से 14 ऊपर थे, जबकि क्लोजिंग की एक रिपोर्ट में कहा गया कि केवल निफ्टी फार्मा 0.05% गिरकर बंद हुआ। पहले के आंकड़ों में छोटी कंपनियों के सूचकांक गिर रहे थे, लेकिन एक अन्य क्लोजिंग रिपोर्ट में निफ्टी स्मॉलकैप 100 में मामूली बढ़त और निफ्टी मिडकैप 100 में 1% से अधिक की तेजी दिखाई गई।

ये आंकड़े अलग-अलग शेयर समूहों और कारोबार के अलग-अलग समय से जुड़े हैं, इसलिए इनके आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि बाजार के हर हिस्से में समान सुधार हुआ। मित्सुबिशी यूएफजे फाइनेंशियल ग्रुप की हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावित योजना की खबरों के बीच श्रीराम फाइनेंस 6.31% चढ़ा। एनपीसीआई के यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट को दिवाली तक टालने के फैसले की रिपोर्ट के बाद तेज उतार-चढ़ाव के बीच पेटीएम और मोबिक्विक बढ़त पर बंद हुए। मर्चेंट डिस्काउंट रेट, भुगतान स्वीकार करने से जुड़ा शुल्क है।

गिरावट भी साफ दिखी। कर्ज देने पर मार्जिन को लेकर चिंताओं के बीच आरबीएल बैंक 7% से अधिक गिरा, जबकि कारोबार की लाभप्रदता के आंकड़े अनुमानों से कमजोर रहने के बाद आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ 3% से अधिक टूटा। क्लोजिंग की एक रिपोर्ट में कोटक महिंद्रा बैंक, इटरनल, मारुति सुजुकी और मैक्स हेल्थकेयर भी गिरावट में रहे।

अस्थिरता घटी, लेकिन टिकाऊ बदलाव की पुष्टि नहीं

शेयर बाजार में संभावित अस्थिरता मापने वाला इंडिया वीआईएक्स तेजी बढ़ने के साथ नीचे आया। दोपहर के आसपास यह करीब 14.82 पर था, जो लगभग 4% की गिरावट थी; बाद में यह 7.94% गिरकर 14.04 पर आ गया। एक अन्य रिपोर्ट में दैनिक गिरावट 7.41% बताई गई। वीआईएक्स का नीचे आना कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव कम होने का संकेत देता है, नुकसान न होने की गारंटी नहीं।

भारत की तेजी के उलट दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5.78%, जापान का निक्केई 225 1.93% और ताइवान का वेटेड सूचकांक 1.99% गिरा। सिंगापुर और हांगकांग में मामूली बढ़त रही। क्षेत्रीय बिकवाली के साथ चिप शेयरों और वैश्विक एआई निवेश में तेजी के टिकाऊपन को लेकर चिंताओं का जिक्र किया गया।

विकास दर के अनुमानों से भी सकारात्मक संकेत मिला। खबरों के अनुसार, आईएमएफ ने भारत के वित्त वर्ष 2026-27 का विकास अनुमान जुलाई के 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया। अक्टूबर की विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट के एक अलग विवरण में 2026 और 2027, दोनों वर्षों के लिए 7% वृद्धि का अनुमान दिया गया। इन समयावधियों का उल्लेख अलग है और इन्हें एक जैसा अनुमान नहीं मानना चाहिए।

तकनीकी विश्लेषकों ने निफ्टी के लिए कई संभावित स्तर बताए। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नागराज शेट्टी ने 22,800 का स्तर बताया, जबकि रेलिगेयर ब्रोकिंग के अजीत मिश्रा ने पहले 22,900 और उसके बाद 23,000 से 23,200 के स्तर का जिक्र किया। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के नंदीश शाह ने 23,100 से 23,150 के बीच प्रतिरोध स्तर बताया। ये चार्ट पर आधारित आकलन हैं, बाजार के तयशुदा नतीजे नहीं।

कैशदकेओस डॉट कॉम के जय बाला ने शुक्रवार तक लगातार खरीदारी और सप्ताह का बंद स्तर 22,900 से ऊपर देखने की बात कही। मंगलवार को निफ्टी 22,721.95 पर बंद हुआ, इसलिए यह कसौटी पूरी नहीं हुई। आने वाले कंपनियों के नतीजे, मुद्रा की चाल और तेल की कीमतें इस बात की ठोस कसौटी होंगी कि तेजी जारी रहती है या नहीं।

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मुख्य बातें

  • सेंसेक्स 1,109.10 अंक बढ़कर 73,033.78 पर बंद हुआ; निफ्टी 358.60 अंक चढ़कर 22,721.95 पर पहुंचा।
  • प्रौद्योगिकी कंपनियों के नतीजों से निफ्टी आईटी सूचकांक में 5% से अधिक की बढ़त आई।
  • सीतारमण ने कर पर चर्चा का स्वागत किया, लेकिन एलटीसीजी, एसटीसीजी या एसटीटी में बदलाव की घोषणा नहीं की।
  • निवेशकों की संपत्ति में बताई गई बढ़त 4.12 लाख करोड़ रुपये से लेकर करीब 5 लाख करोड़ रुपये तक रही।
  • आरबीआई के उपायों के बाद रुपया मजबूत हुआ, हालांकि क्लोजिंग दर के आंकड़े अलग-अलग हैं।
  • 100 डॉलर से ऊपर का तेल, सितंबर की 5.54% महंगाई और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली दबाव बने रहे।
  • छोटी कंपनियों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा और बाजार में टिकाऊ बदलाव की पुष्टि नहीं हुई।
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