एफएम प्रसारण पर रोक से 54 लाख लोगों तक पहुंचने वाली सेवा प्रभावित
अफगानिस्तान के तालिबान अधिकारियों ने देशभर के एफएम रेडियो केंद्रों से बीबीसी के प्रसारण निलंबित कर दिए हैं। इससे ऐसे प्रसारक का स्थानीय प्रसारण माध्यम बंद हो गया है, जिसके मुताबिक वह 54 लाख लोगों तक पहुंचता है, जो वयस्क आबादी के 20% से अधिक है। पश्तो, दरी और अंग्रेजी में उसके कार्यक्रम शॉर्टवेव और मीडियम वेव रेडियो, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और उपग्रह के जरिए जारी हैं।
विषय-सूची
- एफएम प्रसारण पर रोक से 54 लाख लोगों तक पहुंचने वाली सेवा प्रभावित
- अधिकारियों ने उल्लंघनों का हवाला दिया, पर उनकी पहचान नहीं की
- एक डॉक्यूमेंट्री का साक्षात्कार संभावित वजह बताया गया
- श्रोता अब भी क्या सुन सकते हैं
- वैकल्पिक माध्यमों से पहुंच क्यों सीमित हो सकती है
- शैक्षणिक प्रसारण भी प्रभावित
- मीडिया पर वर्षों से बढ़ते प्रतिबंधों के बीच निलंबन
- लंबे समय से जारी सेवा, बहाली की तारीख नहीं
- मुख्य बातें
बीबीसी ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को आई खबरों में दिए बयानों में निलंबन की पुष्टि की और कहा कि वह अधिकारियों के साथ स्थिति पर चर्चा कर रहा है। तालिबान के सूचना एवं संस्कृति मंत्रालय ने बार-बार नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया, लेकिन अपने फैसले के पीछे के प्रसारण, नियमों या घटनाओं की पहचान नहीं की।
इस कार्रवाई का असर केवल समाचार बुलेटिनों पर नहीं पड़ा है। बीबीसी की अफगान सेवा में उन लड़कियों के लिए शैक्षणिक कार्यक्रम भी शामिल हैं, जिन्हें माध्यमिक विद्यालयों में जाने से रोक दिया गया है। उसकी अफगान सेवा 1981 से चल रही है। 2022 में अमेरिका के दो मीडिया संस्थानों पर प्रतिबंध के बाद, इसे अफगानिस्तान के भीतर अब भी प्रसारण करने वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठन बताया गया था।
एफएम प्रसारण निलंबित करने और सेवा बंद करने में फर्क है। बीबीसी अब भी अफगान दर्शकों के लिए कार्यक्रम बना और वितरित कर रहा है। जो माध्यम बंद हुआ है, वह स्थानीय एफएम ट्रांसमीटरों के जरिए इन कार्यक्रमों को सुनने का है। अब श्रोताओं को रेडियो के दूसरे बैंड या डिजिटल और उपग्रह सेवाओं पर निर्भर रहना होगा।
अधिकारियों ने उल्लंघनों का हवाला दिया, पर उनकी पहचान नहीं की
तालिबान सरकार के सूचना एवं संस्कृति मंत्रालय के प्रवक्ता खुबैब गुफरान ने स्थानीय मीडिया को दिए बयान में निलंबन को अस्थायी बताया। उनकी व्याख्या में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बीबीसी पर किन नियमों को तोड़ने का आरोप है।
बीबीसी मीडिया संस्थान द्वारा बार-बार किए गए कुछ उल्लंघनों के कारण फिलहाल देशभर में उसकी गतिविधि निलंबित करने का फैसला किया गया है।
अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण, प्रसारण बहाल करने की तारीख या एफएम प्रसारण फिर शुरू करने की शर्तें घोषित नहीं की गई हैं। बयान से यह स्थायी प्रतिबंध के बजाय निलंबन लगता है, लेकिन इसमें श्रोताओं और प्रसारक के लिए कोई समयसीमा नहीं दी गई है।
घोषणा के दिन को लेकर खबरों में अंतर है। एक खबर के मुताबिक इसकी घोषणा सोमवार को हुई, जबकि 13 अक्टूबर 2026 की तारीख वाली कई खबरों में कहा गया है कि बीबीसी ने मंगलवार को कार्रवाई की पुष्टि की। इन खबरों से यह तय नहीं होता कि हर एफएम केंद्र ने प्रसारण ठीक किस समय बंद किया। हालांकि, वे इस मुख्य घटनाक्रम पर सहमत हैं कि निलंबन पूरे अफगानिस्तान में लागू है।
एक डॉक्यूमेंट्री का साक्षात्कार संभावित वजह बताया गया
एक अलग खबर में तालिबान की नाराजगी को काबुल के पतन की बरसी पर बनी बीबीसी की हालिया डॉक्यूमेंट्री से जोड़ा गया है। उस खबर में जिन अनाम लोगों का हवाला दिया गया, उन्होंने पूर्व तालिबान गवर्नर बताए गए अब्दुल्ला सरहदी के साक्षात्कार को विवाद की एक संभावित वजह बताया।
खबरों के मुताबिक, साक्षात्कार में सरहदी ने ऐतिहासिक बुद्ध प्रतिमाओं को नष्ट करने की जिम्मेदारी स्वीकार की और कहा कि उन्हें अपने फैसले पर पछतावा नहीं है। खबर में इसे पहली बार बताया गया जब उन्होंने उस जिम्मेदारी को स्वीकार किया।
इस संभावित संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से इस साक्षात्कार को एफएम प्रसारण निलंबित करने का आधार नहीं बताया है और बीबीसी के बयान से भी यह साबित नहीं होता कि इसी वजह से फैसला लिया गया। इसलिए इस आरोप को प्रसारण निलंबित होने की पुष्ट खबर से अलग रखा जाना चाहिए।
इस फर्क के कारण सार्वजनिक स्पष्टीकरण में एक बड़ी कमी बनी हुई है। अधिकारियों ने संबंधित सामग्री या नीति बताए बिना प्रसारक पर उल्लंघनों का आरोप लगाया है। किसी डॉक्यूमेंट्री पर आपत्ति की खबर अपने आप में रेडियो सेवा के खिलाफ कार्रवाई की औपचारिक वजह साबित नहीं करती।
श्रोता अब भी क्या सुन सकते हैं
बीबीसी का कहना है कि वह वितरण के दूसरे माध्यमों से तीनों भाषाओं में अफगान दर्शकों तक पहुंच रहा है। बीबीसी के एक प्रवक्ता ने प्रसारक का रुख और अधिकारियों के साथ उसकी बातचीत के बारे में बताया।
अफगानिस्तान भर में लाखों लोग सटीक खबरों और जानकारियों के लिए बीबीसी पर निर्भर हैं और हम स्थिति का समाधान निकालने के लिए अधिकारियों के साथ काम कर रहे हैं।
शॉर्टवेव और मीडियम वेव प्रसारण उपलब्ध हैं। ये एफएम से अलग रेडियो फ्रीक्वेंसी पर चलते हैं और इंटरनेट कनेक्शन के बिना भी श्रोताओं तक पहुंच सकते हैं। हालांकि, प्रसारण सुनने के लिए उपयुक्त रेडियो, प्रसारण का समय और सिग्नल की स्थिति मायने रखती है। केवल एफएम वाला रेडियो इन दूसरे बैंड पर प्रसारण नहीं पकड़ सकता।
ऑनलाइन और उपग्रह के जरिए प्रसारण भी जारी है। सेवा जारी रहने से जुड़ी खबरों के मुताबिक, बीबीसी दरी और पश्तो के फेसबुक पेजों पर रेडियो सामग्री उपलब्ध है। इन विकल्पों का मतलब है कि बीबीसी की सामग्री अफगानिस्तान से पूरी तरह हटाई नहीं गई है।
हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि पहले एफएम पर सुनने वाला हर व्यक्ति अब भी प्रसारण सुन सकता है। ऐसा कोई विवरण जारी नहीं किया गया है कि बीबीसी के कितने श्रोता एफएम पर निर्भर थे, कितनों के पास दूसरे बैंड वाला रेडियो है या कितने लोग अन्य माध्यमों के लिए जरूरी उपकरण और कनेक्टिविटी का खर्च उठा सकते हैं।
वैकल्पिक माध्यमों से पहुंच क्यों सीमित हो सकती है
बीबीसी के मुताबिक, अफगानिस्तान में उसके 54 लाख श्रोताओं तक पहुंचने का आंकड़ा उसकी पहुंच बताता है, उन लोगों की सत्यापित संख्या नहीं जिन्हें अब सेवा नहीं मिल रही। खबरों के अनुसार, उसकी साप्ताहिक पहुंच वयस्क आबादी के पांचवें हिस्से से अधिक है। अलग-अलग प्लेटफॉर्म के श्रोताओं का विवरण न होने के कारण एफएम निलंबन से सीधे प्रभावित लोगों की संख्या का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
दर्शकों की संख्या के विवरण भी अलग-अलग हैं। एक खबर में ऐसी भाषा इस्तेमाल की गई है जिसका अर्थ है कि करोड़ों लोग इस प्रसारक पर निर्भर हैं, जबकि बीबीसी ने 54 लाख का अधिक विशिष्ट आंकड़ा दिया है। उस खबर में बड़े आंकड़े के समर्थन में कोई अलग माप नहीं दिया गया है, इसलिए उसे प्रसारक के बताए आंकड़े की जगह नहीं लेना चाहिए।
अफगानिस्तान के बड़े हिस्सों में बिजली की कमी, अधिक लागत और कम साक्षरता को डिजिटल माध्यमों तक पहुंच में बाधा बताया गया है। कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उपलब्ध हैं, लेकिन ऑनलाइन कार्यक्रम मौजूद होने का मतलब यह नहीं कि पहले एफएम सुनने वाला हर व्यक्ति उसे सुन सकता है।
देश के संचार नेटवर्क भी बाधित हुए हैं। 2025 के संचार बंदी के दौरान 29 सितंबर से 1 अक्टूबर तक करीब 48 घंटों के लिए इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई थीं। इससे परिवारों का संपर्क, कारोबार और जानकारी तक पहुंच बाधित हुई थी। वह मौजूदा एफएम निलंबन से अलग घटना है, लेकिन यह दिखाती है कि ऑनलाइन प्रसारण को रेडियो सुनने का भरोसेमंद विकल्प नहीं माना जा सकता।
शैक्षणिक प्रसारण भी प्रभावित
बीबीसी के अफगान कार्यक्रमों में उन लड़कियों के लिए शैक्षणिक सामग्री शामिल है, जिन्हें माध्यमिक विद्यालयों में जाने से रोक दिया गया है। इसलिए एफएम प्रसारण न मिल पाने से सार्वजनिक मामलों की खबरों के साथ-साथ पाठों तक पहुंच भी प्रभावित हो सकती है।
ऑडियो कार्यक्रम उन लोगों तक पहुंच सकते हैं जिन्हें समाचार पेज पढ़ने या वीडियो देखने की जरूरत नहीं होती। जहां साक्षरता, कनेक्टिविटी या घर के संसाधन दूसरे विकल्पों को सीमित करते हैं, वहां रेडियो की व्यावहारिक भूमिका है। शॉर्टवेव और मीडियम वेव पर प्रसारण जारी रहने से एक विकल्प बना हुआ है, लेकिन श्रोताओं के पास इन बैंड को पकड़ने वाला रेडियो होना जरूरी है।
शैक्षणिक कार्यक्रमों के श्रोताओं की अलग संख्या जारी नहीं की गई है। एफएम पर इन्हें सुनने वाली लड़कियों की संख्या या अब किसी दूसरे प्लेटफॉर्म पर जा सकने वाली लड़कियों की गिनती भी प्रकाशित नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी पहुंच घटने को लेकर चिंता का आधार देती है, लेकिन प्रभावित छात्राओं की संख्या का अनुमान नहीं।
बीबीसी ने यह घोषणा नहीं की है कि उसकी शैक्षणिक सामग्री बंद हो रही है। तात्कालिक सवाल प्रसारण माध्यम का है: क्या एफएम पर कार्यक्रम सुनने वाली लड़कियां और परिवार उन्हें कहीं और सुन पाएंगे।
मीडिया पर वर्षों से बढ़ते प्रतिबंधों के बीच निलंबन
यह फैसला अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में लौटने के बाद से मीडिया पर बढ़ते नियंत्रण के बीच आया है। खबरों के अनुसार, प्रतिबंधों से घटनाओं की कवरेज, जानकारी तक पहुंच और प्रसारकों द्वारा दी जा सकने वाली सामग्री प्रभावित होती है। कुछ मीडिया संस्थानों ने काम करना बंद कर दिया है।
प्रसारण नियमों ने भी दर्शकों के सुनने और देखने की सामग्री बदल दी है। संगीत का प्रसारण नहीं होता, तालिबान की वापसी से पहले की तुलना में स्क्रीन पर महिलाओं की मौजूदगी कम है और महिलाएं अब पुरुषों के साथ प्रसारण में नहीं दिखतीं। महिला पत्रकारों पर पाबंदियों से यह भी प्रभावित होता है कि मीडिया में कौन काम कर सकता है और कार्यक्रमों में कौन दिख सकता है।
अफगानिस्तान पत्रकार केंद्र ने रेडियो स्टेशनों पर लगी पाबंदियों का दस्तावेजीकरण किया है, जिनमें स्टेशन बंद करना और प्रसारण निलंबित करना शामिल है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने गंभीर दमन, सेंसरशिप और सुरक्षा दबाव को पत्रकारों के निर्वासन तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में कमी की वजह बताया है।
बीबीसी पर लगी रोक का दायरा अफगानिस्तान में बड़े श्रोता वर्ग वाली एक अंतरराष्ट्रीय सेवा तक पहुंच गया है। एफएम नेटवर्क से बाहर उसके प्रसारण जारी रहने से कुछ श्रोताओं की पहुंच बनी हुई है, लेकिन घरेलू प्रसारण माध्यम का नुकसान इसकी भरपाई नहीं करता।
लंबे समय से जारी सेवा, बहाली की तारीख नहीं
मुख्य तारीखें दिखाती हैं कि मौजूदा निलंबन मीडिया तक पहुंच में आई कमी का हिस्सा कैसे है:
- 1981: बीबीसी की अफगान सेवा शुरू हुई।
- अगस्त 2021: तालिबान सत्ता में लौटा, जिसके बाद मीडिया और महिला पत्रकारों पर व्यापक पाबंदियां लगीं।
- 2022: अमेरिका के दो मीडिया संस्थानों को अफगानिस्तान में काम करने से प्रतिबंधित किया गया। इसके बाद बीबीसी को देश के भीतर प्रसारण करने वाला एकमात्र अंतरराष्ट्रीय समाचार संगठन बताया गया।
- 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2025: देशव्यापी इंटरनेट और फोन बंदी से संचार बाधित हुआ।
- 13 अक्टूबर 2026: कई खबरों में बीबीसी द्वारा एफएम निलंबन की पुष्टि दर्ज की गई, हालांकि एक अन्य खबर में घोषणा सोमवार को होने की बात कही गई।
बीबीसी का कहना है कि वह स्थिति का समाधान निकालने के लिए अधिकारियों के साथ काम कर रहा है। एफएम प्रसारण बहाल करने पर किसी सहमति की घोषणा नहीं हुई है और बातचीत या सार्वजनिक फैसले की कोई समयसीमा भी नहीं बताई गई है।
कुछ सवाल अब भी अनसुलझे हैं: किन कथित उल्लंघनों के कारण निलंबन हुआ, क्या प्रसारण फिर शुरू करने से पहले अधिकारी बदलाव की मांग करेंगे और यह रुकावट कितने समय तक चलेगी। इस बीच, प्रसारक बाकी माध्यमों से कार्यक्रम जारी रखे हुए है। अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे पता चले कि ये माध्यम उसके पहले के एफएम श्रोताओं में से कितनों तक पहुंच बनाए रख सकते हैं।
मुख्य बातें
- तालिबान अधिकारियों ने पूरे अफगानिस्तान में बीबीसी के एफएम प्रसारण निलंबित कर दिए हैं।
- मंत्रालय ने बार-बार उल्लंघनों का हवाला दिया, लेकिन उनकी पहचान नहीं की और प्रसारण बहाल करने की तारीख नहीं बताई।
- बीबीसी के मुताबिक, अफगानिस्तान में उसकी पहुंच 54 लाख लोगों तक है, जो वयस्क आबादी के 20% से अधिक है।
- पश्तो, दरी और अंग्रेजी में कार्यक्रम शॉर्टवेव, मीडियम वेव, ऑनलाइन और उपग्रह के जरिए जारी हैं।
- माध्यमिक विद्यालयों में जाने से रोकी गई लड़कियों के लिए शैक्षणिक सामग्री भी पहुंच घटने से प्रभावित सेवा का हिस्सा है।
- एक डॉक्यूमेंट्री के साक्षात्कार से जुड़ा कथित संबंध अब भी अपुष्ट है।
- बीबीसी निलंबन पर अधिकारियों से चर्चा कर रहा है, लेकिन समाधान की घोषणा नहीं हुई है।






