वियतनाम में युवाओं की बेरोजगारी का संकट: 14 लाख युवा न रोजगार में, न शिक्षा में, न प्रशिक्षण में; श्रम बाजार की चुनौतियां बढ़ीं

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वियतनाम में युवाओं की बेरोजगारी का संकट: 14 लाख युवा न रोजगार में, न शिक्षा में, न प्रशिक्षण में; श्रम बाजार की चुनौतियां बढ़ीं

वियतनाम के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता

वियतनाम अपनी युवा आबादी से जुड़ी एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। 2025 की चौथी तिमाही में 15-24 वर्ष के लगभग 14 लाख युवा न तो रोजगार में थे, न शिक्षा में और न ही प्रशिक्षण में (NEET)। वित्त मंत्रालय के अधीन वियतनाम के सामान्य सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार, यह आंकड़ा देश की कुल युवा आबादी का 10.2 प्रतिशत है। ये आंकड़े वियतनाम के युवाओं के लिए सार्थक रोजगार के अवसर तलाशने में आ रही मुश्किलों को उजागर करते हैं और शिक्षा प्रणाली तथा श्रम बाजार की मांगों के बीच बढ़ती खाई दिखाते हैं।

विषय-सूची
  1. वियतनाम के भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता
  2. NEET की स्थिति को समझना
  3. वियतनाम में युवाओं के रोजगार संकट की विस्तृत तस्वीर
  4. लिंग और भौगोलिक असमानताएं
  5. क्षेत्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य
  6. वियतनाम में युवाओं की रोजगार चुनौती के मूल कारण
  7. सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत पहल
  8. आर्थिक प्रभाव और भविष्य के जोखिम
  9. वियतनाम के युवाओं के लिए आगे का रास्ता
  10. मुख्य बिंदु

वियतनाम के सामने एक विरोधाभासी स्थिति है: देश की अर्थव्यवस्था लगातार बढ़ रही है, लेकिन युवा आबादी को उत्पादक काम से जोड़ने में उसे कठिनाई हो रही है। यह जनसांख्यिकीय चुनौती ऐसे अहम मोड़ पर सामने आई है, जब देश को आबादी के बूढ़े होने की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भविष्य में श्रमिकों की कमी और सामाजिक सुरक्षा पर बढ़ते दबाव का "दोहरा बोझ" पैदा हो सकता है।

सामान्य सांख्यिकी कार्यालय ने पहले से करियर मार्गदर्शन देने और शिक्षा तथा व्यावसायिक प्रशिक्षण के स्पष्ट रास्ते बनाने की जरूरत पर जोर दिया है। इसके अलावा, एजेंसी ने प्रशिक्षण कार्यक्रमों को श्रम बाजार की वास्तविक मांग के अनुरूप बनाने के लिए स्कूलों और कारोबारों के बीच मजबूत संबंधों की अपील की है। तत्काल कदम न उठाए गए तो वियतनाम को अपने युवा कार्यबल का लाभ उठाने का अहम अवसर गंवाने का जोखिम है, क्योंकि जनसांख्यिकीय बदलाव देश के श्रम बाजार की तस्वीर को बुनियादी रूप से बदल सकते हैं।

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NEET की स्थिति को समझना

NEET का अर्थ है "न रोजगार में, न शिक्षा में, न प्रशिक्षण में" और यह उन युवाओं के अनुपात को बताता है जो किसी भी तरह के रोजगार, औपचारिक शिक्षा या प्रशिक्षण गतिविधियों से जुड़े नहीं हैं। इस सूचक में बेरोजगार या आर्थिक रूप से निष्क्रिय वे लोग शामिल हैं जो शिक्षा या प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं ले रहे। OECD और ILO की परिभाषाओं के अनुसार, शिक्षा में अंशकालिक या पूर्णकालिक औपचारिक कार्यक्रम शामिल हैं, जबकि रोजगार में वे सभी लोग आते हैं जिन्होंने संदर्भ सप्ताह के दौरान वेतन के लिए कम से कम एक घंटा काम किया हो या जो अस्थायी रूप से नौकरी से अनुपस्थित रहे हों।

यह सूचक युवाओं की भागीदारी का अहम पैमाना है और दुनिया भर के नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती पेश करता है। जब युवा लंबे समय तक काम और सीखने के अवसरों से कटे रहते हैं, तो उन्हें दीर्घकालिक बेरोजगारी, जीवनभर कम कमाई और सामाजिक बहिष्कार का अधिक जोखिम होता है। NEET दर किसी चुने हुए आयु वर्ग की आबादी के प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जाती है, जिससे यह अंतरराष्ट्रीय तुलना का एक मानकीकृत पैमाना बनती है।

NEET की स्थिति खास तौर पर इसलिए चिंताजनक है क्योंकि इसमें सिर्फ काम तलाश रहे युवा ही नहीं, बल्कि वे युवा भी शामिल हैं जो हताश होकर श्रम बाजार से पूरी तरह बाहर हो गए हों। यह छिपी हुई बेरोजगारी अक्सर शिक्षा प्रणालियों, श्रम बाजारों और सामाजिक नीतियों की गहरी संरचनात्मक समस्याओं को ढक देती है। NEET युवाओं की विशिष्ट परिस्थितियों और विशेषताओं को समझना ऐसे प्रभावी कदम तैयार करने के लिए जरूरी है जो उन्हें शिक्षा या रोजगार के रास्तों से फिर जोड़ सकें।

NEET की समस्या से निपटने के लिए सिर्फ रोजगार पैदा करना काफी नहीं है; इसके लिए व्यापक दृष्टिकोण चाहिए। इसमें शिक्षा की गुणवत्ता, श्रम बाजार की सूचना प्रणालियों, करियर मार्गदर्शन के तरीकों और सामाजिक सुरक्षा ढांचे की समीक्षा शामिल है। कई विशेषज्ञों का कहना है कि NEET केवल आर्थिक ही नहीं, सामाजिक चुनौती भी है, क्योंकि शिक्षा और काम से लंबे समय तक दूरी युवाओं के आत्मविश्वास, प्रेरणा और सामाजिक जुड़ाव पर स्थायी मनोवैज्ञानिक असर डाल सकती है।

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वियतनाम में युवाओं के रोजगार संकट की विस्तृत तस्वीर

वियतनाम के हालिया आंकड़े युवाओं के उत्पादक गतिविधियों से दूर होने की चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। 2025 की पहली तिमाही में NEET युवाओं की संख्या 13.5 लाख तक पहुंच गई, जो युवा आबादी का 10.4 प्रतिशत थी। 2024 की इसी अवधि की तुलना में यह संख्या 66,900 कम थी, लेकिन पिछली तिमाही से 84,400 अधिक थी। यह लगातार सुधार के बजाय युवाओं के रोजगार के तौर-तरीकों में उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।

2025 की शुरुआत में 15-24 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 7.93 प्रतिशत थी। वियतनाम के श्रम मंत्री दाओ नगोक जुंग ने क्षेत्रीय औसत से तुलना करते हुए इसे "स्वीकार्य आंकड़ा" बताया। दक्षिण-पूर्व एशिया में बेरोजगारी दर लगभग 9.5 प्रतिशत है, जिसकी वजह वैश्विक आर्थिक वृद्धि की धीमी रफ्तार और उत्पादन तथा कारोबारी गतिविधियों को प्रभावित करने वाली विभिन्न अस्थिरताएं हैं। हालांकि, ये समग्र दरें युवा आबादी के भीतर मौजूद बड़ी असमानताओं को छिपाती हैं।

मंत्री दाओ नगोक जुंग ने जोर देकर कहा कि वियतनाम की बेरोजगारी दर "स्वीकार्य सीमा के भीतर" है और खास तौर पर युवाओं की बेरोजगारी दर 7.92% है। उन्होंने इसकी तुलना क्षेत्रीय स्थिति से की, जहां दक्षिण-पूर्व एशिया में बेरोजगारी दर औसतन लगभग 9.5% है।

बेरोजगारी के आंकड़ों से आगे बढ़कर श्रम के कम इस्तेमाल का व्यापक पैमाना देखें तो चुनौतियां और स्पष्ट होती हैं। 2025 की चौथी तिमाही तक वियतनाम में 21.4 लाख लोग, यानी कार्यबल का 4 प्रतिशत, अपनी क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर रहे थे। इस समूह में बेरोजगार, अल्प-रोजगार वाले और वे लोग शामिल हैं जो श्रमबल से बाहर हैं, लेकिन काम करने के इच्छुक हैं। श्रम के कम इस्तेमाल की दर ग्रामीण इलाकों में 4.1 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.8 प्रतिशत रही। इससे पता चलता है कि कार्यबल की चुनौतियां शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि और ग्रामीण समुदायों को भी प्रभावित करती हैं।

सामान्य सांख्यिकी कार्यालय ने कहा कि सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में भी कार्यबल का एक हिस्सा अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाता और अर्थव्यवस्था को बड़े झटके लगने पर यह अनुपात अक्सर बढ़ जाता है। यह दर 2020 की पहली तिमाही से तेजी से बढ़ी, 2021 की तीसरी तिमाही में चरम पर पहुंची और फिर धीरे-धीरे घटकर लगभग 4 प्रतिशत के आसपास बनी रही। 2025 की चौथी तिमाही में कुल श्रम बाजार मोटे तौर पर स्थिर रहा, लेकिन अधिकारियों ने अल्प-रोजगार वाले लोगों की संख्या में मामूली बढ़ोतरी को चिंता का संकेत बताया। ऐसे लोगों की संख्या लगभग 7,84,000 तक पहुंच गई।

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लिंग और भौगोलिक असमानताएं

वियतनाम में NEET संकट सभी युवाओं को समान रूप से प्रभावित नहीं करता। ग्रामीण और शहरी इलाकों के साथ-साथ अलग-अलग लिंगों के बीच भी बड़ी असमानताएं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में NEET दर 11.7 प्रतिशत है, जो शहरों में दर्ज 8.2 प्रतिशत से काफी अधिक है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का यह अंतर वियतनाम की अर्थव्यवस्था में जारी बदलाव को दिखाता है: पारंपरिक कृषि रोजगार में गिरावट नई ग्रामीण संभावनाओं के उभरने से तेज रही है। नतीजतन युवा शहरों की ओर जा रहे हैं, जहां रोजगार पाने के लिए जरूरी कौशल या सामाजिक संपर्क उनके पास नहीं हो सकते।

लिंग के आधार पर असमानता भी इस चुनौती का एक पहलू है। युवा पुरुषों में NEET दर 8.3 प्रतिशत है, जबकि युवा महिलाओं में यह 12 प्रतिशत है। यह अंतर सामाजिक मान्यताओं के बने रहने, शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसरों तक असमान पहुंच और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर अलग-अलग अपेक्षाओं को दर्शाता है। वियतनाम की महिलाओं के लिए पारंपरिक भूमिकाओं और श्रम बाजार में भागीदारी के बीच संतुलन बनाना खास तौर पर कठिन है। ग्रामीण इलाकों में यह चुनौती अधिक है, जहां कृषि कार्य तेजी से मशीनीकृत हो रहा है और सेवा क्षेत्र की नौकरियां मुख्यतः शहरों में केंद्रित हैं।

शहरी-ग्रामीण और लैंगिक अंतर मिलकर कुछ समूहों को खास तौर पर असुरक्षित बनाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों की युवा महिलाओं को शिक्षा और रोजगार में सबसे बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है। अक्सर उन्हें स्थानीय अवसरों की कमी के साथ आवाजाही पर सामाजिक बंदिशें भी झेलनी पड़ती हैं। इन मिली-जुली मुश्किलों से निपटने के लिए ऐसी लक्षित नीतियां जरूरी हैं जो सभी के लिए एक ही उपाय अपनाने के बजाय अलग-अलग जनसमूहों की खास परिस्थितियों को ध्यान में रखें।

वियतनाम के आधिकारिक सरकारी पोर्टल के अनुसार, बुनियादी जरूरतों से वंचित युवाओं का अनुपात भी कुछ ऐसी ही तस्वीर दिखाता है: ग्रामीण क्षेत्रों में यह शहरी इलाकों से अधिक है और युवा महिलाओं में युवा पुरुषों से अधिक। ये असमानताएं बताती हैं कि शिक्षा और रोजगार से स्थायी रूप से कटने के सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचने के लिए क्षेत्र-विशेष और लैंगिक समानता को ध्यान में रखने वाले कदम जरूरी हैं।

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क्षेत्रीय और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

वियतनाम में युवाओं की बेरोजगारी की चुनौतियां, श्रम बाजार में युवाओं की व्यापक वैश्विक मुश्किलों का हिस्सा हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) का अनुमान है कि 2025 में वैश्विक युवा बेरोजगारी दर बढ़कर 12.4 प्रतिशत हो सकती है। इसके तहत लगभग 26 करोड़ युवाओं को NEET की श्रेणी में रखा जाएगा। निम्न-आय वाले देशों में यह दर लगभग 28 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है, जो कम विकसित अर्थव्यवस्थाओं में चुनौती की गंभीरता को दर्शाता है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चुनौतियां खास तौर पर गंभीर हैं। 2023 में 15.7 करोड़ युवा NEET की श्रेणी में थे, जो 2019 के 14.5 करोड़ से अधिक है। इसका अर्थ है कि क्षेत्र में हर पांच में से लगभग एक युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण से नहीं जुड़ा है। वियतनाम के चिंताजनक आंकड़ों के बावजूद, वहां NEET दर लगभग 10-10.4 प्रतिशत है, जो कई पड़ोसी देशों से बेहतर है। हालांकि, इससे सीधे प्रभावित युवाओं की मुश्किलें कम नहीं होतीं।

क्षेत्रीय तुलना से दक्षिण-पूर्व एशिया में युवाओं की भागीदारी से जुड़ी अलग-अलग स्थितियां सामने आती हैं। थाईलैंड में NEET दर 12.8 से 15 प्रतिशत के बीच है, जबकि इंडोनेशिया में यह 17-18 प्रतिशत है, जो उसे दक्षिण-पूर्व एशिया की सबसे अधिक NEET दर वाले देशों में शामिल करता है। फिलीपींस में भी NEET दर 12-13 प्रतिशत है, जो मुख्यतः गरीब शहरी इलाकों के युवाओं में केंद्रित है। ILO के आंकड़ों के अनुसार, चीन की NEET दर लगभग 15-17 प्रतिशत के बीच रहती है। यह वियतनाम से अधिक, लेकिन वैश्विक औसत से कम है।

ILO की 2026 की रोजगार और सामाजिक रुझान रिपोर्ट का अनुमान है कि वैश्विक बेरोजगारी दर 4.9 प्रतिशत पर बनी रहेगी, जो लगभग 18.6 करोड़ बेरोजगार लोगों के बराबर है। हालांकि, ये कुल आंकड़े अलग-अलग क्षेत्रों की स्थितियों और युवा आबादी के सामने मौजूद खास चुनौतियों को छिपाते हैं। 2026 में रोजगार वृद्धि का अनुमान आय के स्तर के अनुसार बहुत अलग है: उच्च-मध्यम आय वाले देशों में 0.5 प्रतिशत, निम्न-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं में 1.8 प्रतिशत और निम्न-आय वाले देशों में 3.1 प्रतिशत।

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वियतनाम में युवाओं की रोजगार चुनौती के मूल कारण

कई परस्पर जुड़े कारक वियतनाम की ऊंची NEET दर में योगदान देते हैं। शिक्षा प्रणाली और श्रम बाजार की मांग के बीच तालमेल न होना प्रमुख चिंता है। कई युवा ऐसी विशिष्ट कुशलताओं के बिना स्नातक होते हैं जिनकी नियोक्ताओं को जरूरत है। इससे एक विरोधाभास पैदा होता है: पद खाली रहते हैं, जबकि पढ़े-लिखे युवाओं को काम नहीं मिलता। व्यावसायिक शिक्षा को कम महत्व देना इस समस्या को बढ़ाता है, क्योंकि प्रतिष्ठा को प्राथमिकता देने वाले अकादमिक रास्ते उन तकनीकी पेशों से नहीं जुड़ पाते जहां श्रमिकों की कमी है।

डिजिटल बदलाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने वियतनाम के श्रम बाजार को नया रूप देना शुरू कर दिया है। इससे कुछ पारंपरिक शुरुआती स्तर की नौकरियां खत्म हो रही हैं, जबकि नए कौशलों की मांग बढ़ रही है। डिजिटल साक्षरता या विशेष तकनीकी प्रशिक्षण से वंचित युवा इन बदलावों के प्रति खास तौर पर असुरक्षित हैं। मंत्री जुंग ने कहा कि नियोक्ता लागत बचाने के लिए ऐसे अनुभवी कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो एक साथ कई काम कर सकें। इससे युवा कर्मचारियों के लिए तालमेल बिठाना कठिन हो रहा है और वे नौकरी में कटौती के जोखिम में हैं।

व्यवहार और सामाजिक परिस्थितियां भी अहम भूमिका निभाती हैं। खबरों के अनुसार, माता-पिता का जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार, ऑनलाइन दुनिया में पलायन पर निर्भरता और अनौपचारिक कर्ज के कारण कर्ज के चक्र में फंसना युवाओं के काम से दूर होने में योगदान देते हैं। कुछ युवा कम अवधि वाली, अधिक वेतन की नौकरियों के बजाय स्थिर और दीर्घकालिक पद पसंद करते हैं। इससे वे अस्थायी रूप से बेरोजगार रहते हैं और ऐसे आदर्श अवसरों की प्रतीक्षा करते हैं जो कौशल में गिरावट रोकने के लिए समय पर शायद न मिलें।

कोविड-19 महामारी के दूरगामी असर अब भी शिक्षा से काम की ओर सामान्य बदलाव में बाधा डाल रहे हैं। शैक्षणिक संस्थानों और नियोक्ताओं ने महामारी की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तरीके से खुद को ढाला, जिससे पढ़ाई और काम के अनुभव में ऐसी कमियां पैदा हुईं जिनका असर युवाओं पर असमान रूप से अधिक पड़ा। महामारी ने डिजिटल बदलाव को तेज किया और कारोबारी मॉडल बदले। इससे पारंपरिक शिक्षा के रास्ते रोजगार के उभरते अवसरों से कट गए।

वियतनाम के सामने जनसांख्यिकी से जुड़ी एक अनोखी चुनौती है: आबादी बूढ़ी हो रही है, जबकि युवा आबादी भी काफी बड़ी है। ILO श्रम बाजार में एक विरोधाभास की ओर इशारा करता है: विकसित अर्थव्यवस्थाएं आबादी के बूढ़े होने और श्रमबल की धीमी वृद्धि से जूझ रही हैं, जबकि निम्न-आय वाले देश तेज जनसंख्या वृद्धि को उत्पादक रोजगार में बदलने में संघर्ष कर रहे हैं। वियतनाम इन दोनों चुनौतियों के बीच खड़ा है। कुछ क्षेत्रों में युवा पीढ़ी का आकार घट रहा है, जबकि अन्य में युवाओं की बेरोजगारी ऊंची बनी हुई है।

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सरकार की प्रतिक्रिया और नीतिगत पहल

वियतनाम के अधिकारियों ने युवाओं के रोजगार की चुनौती की गंभीरता स्वीकार की है और कई नीतिगत कदम उठाने शुरू किए हैं। मंत्री जुंग ने युवाओं के रोजगार में सुधार के लिए कई उपायों की जानकारी दी। इनमें बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने वाले लचीले प्रशिक्षण कार्यक्रम और नवाचार तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए युवाओं के नेतृत्व वाले छोटे और मध्यम उद्यमों (SMEs) हेतु प्रोत्साहन शामिल हैं।

सरकार उद्यमिता को समर्थन देने वाली नीतियों के महत्व पर जोर देती है। इनमें रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता, प्रबंधन प्रशिक्षण और कर प्रोत्साहन शामिल हैं। बेरोजगारी बीमा को मंत्री जुंग ने युवाओं में लंबे समय तक बेरोजगारी रोकने वाला "सुरक्षा जाल" बताया। अधिकारियों ने घरेलू रोजगार के अवसर पैदा करने और सामान्य श्रम वाले कामों के लिए विदेशी कामगारों की भर्ती सीमित करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।

अधिकारियों ने NEET युवाओं के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने की अपील की है, ताकि लक्षित कदम बेहतर तरीके से उठाए जा सकें। इस डेटाबेस से सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों की पहचान करने और उन्हें शिक्षा या रोजगार से फिर जोड़ने के लिए बनाए गए कार्यक्रमों की प्रभावशीलता पर नजर रखने में मदद मिलेगी। तेजी से बदलती श्रम बाजार की मांगों के अनुसार ढल सकने वाले लचीले प्रशिक्षण कार्यक्रम जरूरी माने जा रहे हैं। साथ ही, व्यावसायिक शिक्षा को उत्पादक करियर का वैध रास्ता मानने के लिए सामाजिक सोच में बदलाव की जरूरत है।

काम से कटे युवाओं के लिए मनोवैज्ञानिक सहायता का विस्तार भी प्राथमिकता माना गया है। लंबे समय तक बेरोजगारी और शिक्षा से दूरी के मानसिक स्वास्थ्य पर असर को अनदेखा नहीं किया जा सकता। हताश युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और नौकरी दिलाने में मदद के साथ-साथ परामर्श और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली सहायता की भी जरूरत हो सकती है। काम से जुड़ने में आने वाली मनोवैज्ञानिक बाधाओं को दूर करना श्रम बाजार के पारंपरिक उपायों का अहम पूरक है।

सामान्य सांख्यिकी कार्यालय ने खास तौर पर शुरुआती करियर मार्गदर्शन पर ध्यान देने, व्यक्ति की क्षमताओं के अनुरूप शिक्षा और व्यावसायिक दिशा चुनने में सहायता देने तथा स्कूलों और कारोबारों के बीच संबंध मजबूत करने की सिफारिश की है। इन उपायों का मकसद युवाओं की औपचारिक शिक्षा पूरी होने से पहले ही उनके विकल्पों और उपलब्ध अवसरों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर उन्हें NEET की स्थिति में जाने से रोकना है।

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आर्थिक प्रभाव और भविष्य के जोखिम

वियतनाम में युवाओं की बेरोजगारी का आर्थिक असर केवल लोगों की व्यक्तिगत मुश्किलों तक सीमित नहीं है; इससे देश के विकास की संभावनाएं भी प्रभावित होती हैं। जनसांख्यिकीय अवसर की खिड़की बंद होने से पहले मौजूदा युवा कार्यबल का लाभ न उठा पाने पर भविष्य में आबादी के बूढ़े होने, गरीबी और अस्थिर सामाजिक सुरक्षा खर्च जैसी चुनौतियां सामने आएंगी। विश्व बैंक के अनुसार, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में रोजगार गरीबी से बाहर निकलने का सबसे प्रभावी रास्ता रहा है। 2010 से 2020 के बीच वियतनाम में गरीबी में आई लगभग पूरी कमी का कारण विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों से होने वाली श्रम आय में वृद्धि थी।

हालांकि, अतीत की उपलब्धियां भविष्य में सफलता की गारंटी नहीं हैं। विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि निर्यात और विनिर्माण पर आधारित वृद्धि, जो कभी इस क्षेत्र में रोजगार सृजन का प्रमुख चालक थी, अब स्वचालन और वैश्विक व्यापार के बदलते रुझानों की चुनौतियों का सामना कर रही है। साथ ही, डिजिटलीकरण और AI उद्योगों में उत्पादकता बढ़ाकर और उच्च मूल्य वाली सेवाओं तथा कौशल-प्रधान नौकरियों के नए अवसर खोलकर सेवा क्षेत्र को बदल रहे हैं। इस बदलाव के लिए शिक्षा प्रणालियों और युवा कामगारों, दोनों को बड़े पैमाने पर खुद को ढालना होगा।

ILO का अनुमान है कि दुनियाभर में लगभग 30 करोड़ कामगार अत्यधिक गरीबी में रह रहे हैं और प्रतिदिन 3 अमेरिकी डॉलर से कम कमाते हैं। अनौपचारिक रोजगार का दायरा लगातार बढ़ रहा है और 2026 तक इसके 2.1 अरब कामगारों तक पहुंचने की उम्मीद है। इनमें से कई के पास स्थिर नौकरी, श्रम अधिकार और सामाजिक सुरक्षा नहीं है। निम्न-आय वाले देशों में रोजगार की गुणवत्ता सुधारने की प्रगति धीमी है, जिससे कमजोर कामगार और पीछे छूट रहे हैं। प्रभावी कदम न उठाए गए तो वियतनाम के युवाओं को देश के आर्थिक विकास का लाभ मिलने के बजाय कामकाजी गरीबों की इस वैश्विक आबादी में शामिल होने का जोखिम है।

वैश्विक व्यापार में नीतिगत अनिश्चितता और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान वेतन पर दबाव डाल रहे हैं, खासकर यूरोप और एशिया में, जिसमें वियतनाम भी शामिल है। इन चुनौतियों के बावजूद, व्यापार दुनियाभर के लगभग 46.5 करोड़ कामगारों की आजीविका का सहारा बना हुआ है। इनमें से आधे से अधिक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हैं। बदलते व्यापारिक माहौल में वियतनाम की प्रतिस्पर्धा बनाए रखते हुए गुणवत्तापूर्ण घरेलू रोजगार के अवसर पैदा करना नीति निर्माताओं के लिए एक अहम संतुलन साधने जैसा है।

विश्व बैंक का अनुमान है कि अगले दशक में पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में लगभग 32 करोड़ लोग कामकाजी उम्र में पहुंचेंगे, जिससे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने के लिए श्रम बाजारों पर भारी दबाव पड़ेगा। लेकिन कई मध्यम-आय वाले देशों में आर्थिक वृद्धि धीमी होने से रोजगार सृजन पीछे रहने का अनुमान है: मौजूदा रुझान जारी रहे तो केवल लगभग 11 करोड़ नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। युवाओं पर इसका सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि उन्हें रोजगार में प्रवेश की अधिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है और उनके पास वह अनुभव नहीं होता जिसकी नियोक्ता लगातार अधिक मांग कर रहे हैं।

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वियतनाम के युवाओं के लिए आगे का रास्ता

वियतनाम में युवाओं की रोजगार चुनौती से निपटने के लिए कई मोर्चों पर समन्वित कार्रवाई जरूरी है। ILO ने सरकारों और कारोबारों से महिलाओं तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और श्रम उत्पादकता बढ़ाने वाली नीतियां अपनाने की अपील की है। इनमें कौशल, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में निवेश शामिल है। संगठन ने देशों से सार्वजनिक कर्ज, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और व्यापार संबंधी अनिश्चितता से पैदा होने वाले जोखिमों पर अधिक ध्यान देने का आह्वान भी किया है।

ILO की वैश्विक युवा रोजगार रुझान रिपोर्ट "युवा गारंटी" की पैरवी करती है। यह सक्रिय श्रम बाजार नीतियों का एक व्यापक पैकेज है, जिसका मकसद तय समयसीमा के भीतर सभी युवाओं के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण या रोजगार तक पहुंच सुनिश्चित करना है। यह तरीका समस्या के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से कदम उठाने की दिशा में बुनियादी बदलाव है। इसका लक्ष्य युवाओं के काम और शिक्षा से कटने के बाद समस्या सुलझाने के बजाय ऐसा होने से रोकना है।

ILO का कहना है कि "सम्मानजनक काम युवाओं के बेहतर भविष्य का टिकट है। और सामाजिक न्याय, समावेशन तथा शांति का पासपोर्ट है। उज्ज्वल भविष्य के अवसर पैदा करने का समय अभी है।" संगठन ने जोर दिया कि शिक्षा और सम्मानजनक रोजगार के समान अवसर न मिलने से लाखों युवा बेहतर भविष्य की संभावनाओं से वंचित हो रहे हैं।

वियतनाम के लिए खास सिफारिशों में पाठ्यक्रम को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए शिक्षा प्रदाताओं और नियोक्ताओं के बीच तालमेल मजबूत करना, काम के दौरान सीखने के अवसर बढ़ाना और करियर मार्गदर्शन सेवाओं में सुधार करना शामिल है। इसके अलावा, क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने के लिए ग्रामीण आर्थिक विकास में लक्षित निवेश और ग्रामीण शिक्षा प्रणालियों तथा शहरी श्रम बाजारों के बीच बेहतर संपर्क जरूरी है।

युवा उद्यमिता के लिए अनुकूल माहौल बनाना एक और अहम रणनीति है। कारोबार शुरू करने में युवाओं को अक्सर असमान रूप से बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें गारंटी के लिए संपत्ति की कमी, सीमित कारोबारी संपर्क और नियामकीय बोझ शामिल हैं। कारोबार पंजीकरण की प्रक्रियाओं को सरल बनाना, कर्ज तक पहुंच और मार्गदर्शन कार्यक्रम इन बाधाओं को दूर करने में मदद कर सकते हैं। इससे नए उद्यमों के जरिए रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिल सकता है।

आगे वियतनाम को एक जटिल जनसांख्यिकीय बदलाव से गुजरना होगा। वियतनाम जैसे बूढ़ी होती आबादी वाले देशों को तेजी से घटती कामकाजी उम्र की आबादी के अनुरूप अपने श्रम बाजार और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को एक साथ ढालना होगा। पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में हर साल 3.4 करोड़ लोग 65 वर्ष के होंगे, जिससे चुनौतियां और अवसर, दोनों पैदा होंगे। घटता कार्यबल आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकता है, लेकिन सही तैयारी और मानव पूंजी में निवेश से वियतनाम यह बदलाव सफलतापूर्वक संभाल सकता है और यह सुनिश्चित कर सकता है कि उसकी युवा आबादी की एक पूरी पीढ़ी अवसरों से वंचित न रह जाए।

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मुख्य बिंदु

  • 2025 की चौथी तिमाही में वियतनाम के 15-24 वर्ष के लगभग 14 लाख युवा NEET की श्रेणी में थे, जो युवा आबादी का 10.2% है
  • ग्रामीण क्षेत्रों में NEET दर (11.7%) शहरी क्षेत्रों (8.2%) से काफी अधिक है
  • युवा महिलाओं में काम और शिक्षा से कटे होने की दर 12% है, जबकि युवा पुरुषों में यह 8.3% है
  • दुनियाभर में 26 करोड़ युवा NEET की श्रेणी में हैं; निम्न-आय वाले देशों में यह दर 28% तक पहुंचने का अनुमान है
  • एशिया-प्रशांत क्षेत्र में 15.7 करोड़ युवा NEET की श्रेणी में हैं, यानी हर पांच में से एक युवा
  • वियतनाम की NEET दर (10-10.4%) इंडोनेशिया (17-18%) और थाईलैंड (12.8-15%) जैसे क्षेत्रीय पड़ोसियों से कम है
  • मुख्य कारणों में कौशल और बाजार की मांग के बीच बेमेल, डिजिटल बदलाव से पारंपरिक नौकरियों का खत्म होना और ग्रामीण-शहरी असमानताएं शामिल हैं
  • सरकार की प्रतिक्रिया में लचीले प्रशिक्षण कार्यक्रम, युवा उद्यमिता के लिए प्रोत्साहन और प्रस्तावित राष्ट्रीय NEET डेटाबेस शामिल हैं
  • विश्व बैंक का अनुमान है कि अगले दशक में पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में कामकाजी उम्र में पहुंचने वाले 32 करोड़ लोगों के लिए केवल 11 करोड़ नई नौकरियां पैदा होंगी
  • ILO ने "युवा गारंटी" की सिफारिश की है, जिसके तहत तय समयसीमा के भीतर सभी युवाओं को शिक्षा, प्रशिक्षण या रोजगार तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी
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