दो ऐतिहासिक शहरों के बीच तेज़ रास्ता
उज़्बेकिस्तान समरकंद और बुखारा के बीच टोल हाईवे बनाने की योजना बना रहा है, जिससे यात्रा का समय करीब पांच घंटे से घटकर 90 मिनट हो सकता है। सीमेंट-कंक्रीट सतह वाली प्रस्तावित सड़क पर राष्ट्रपति शावकत मिर्ज़ियोयेव की 4 नवंबर को बुखारा क्षेत्र की यात्रा के दौरान चर्चा हुई। बैठक में हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए नई रेलवे लाइन और जल सेवाओं में बड़े निवेश पर भी बात हुई।
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राष्ट्रपति के प्रेस सचिव शेरज़ोद असदोव ने कहा कि अधिकारियों को सड़क और रेलवे परियोजनाओं की मास्टर प्लान पूरी करने और संभावित साझेदारों के साथ बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया गया है। मास्टर प्लान किसी परियोजना की व्यापक रूपरेखा और संगठन तय करता है तथा अधिक विस्तृत इंजीनियरिंग और वित्तपोषण व निर्माण पर चर्चा का आधार देता है।
प्रस्तावित यात्रा समय से हर तरफ़ के सफ़र में साढ़े तीन घंटे बचेंगे, यानी मौजूदा पांच घंटे के अनुमान से 70% की कमी। आने-जाने की यात्रा करने वाले व्यक्ति को, अगर दोनों सफ़र नियोजित समय में पूरे हों, तो सड़क पर कुल सात घंटे कम बिताने पड़ेंगे।
यह हाईवे बुखारा के लिए कहीं अधिक व्यापक पहल-पैकेज का हिस्सा है। बैठक में मिर्ज़ियोयेव ने प्रस्तावित निवेश के पैमाने और निवासियों पर उसके अपेक्षित असर का ज़िक्र किया।
"हम 30 अरब डॉलर की नई पहलों के साथ आए हैं, जो बुखारा की अर्थव्यवस्था और लोगों के रोज़मर्रा के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएंगी," मिर्ज़ियोयेव ने कहा।
30 अरब डॉलर का आंकड़ा क्षेत्र के लिए पेश की गई व्यापक पहलों को समेटता है। बैठक में चर्चा की गई परिवहन और जल परियोजनाओं के बजट और समय-सीमा अलग-अलग हैं; कुछ पर काम शुरू हो चुका है, जबकि अन्य अभी योजना के चरण में हैं।
प्रारंभिक प्रस्ताव से साझेदारों के साथ बातचीत तक
समरकंद–बुखारा टोल सड़क की योजना की पहली घोषणा जनवरी 2025 में हुई थी। तुर्की की निर्माण कंपनी आईसी इचताश इनशात ने हाईवे के विकास में भाग लेने के लिए उज़्बेकिस्तान की राजमार्ग समिति के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे।
समझौता ज्ञापन में पक्षों के साथ मिलकर काम करने के इरादे को दर्ज किया जाता है। 4 नवंबर की बैठक में घोषित अगले कदमों में मास्टर प्लान पूरी करना और संभावित साझेदारों के साथ बातचीत शुरू करना शामिल था। इससे प्रस्ताव को अधिक विस्तृत विकास-ढांचे की ओर आगे बढ़ाया जाएगा।
इस टोल सड़क का इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों से शुल्क लिया जाएगा। यात्रियों के लिए व्यावहारिक रूप से इसका मतलब होगा कि अपेक्षित समय-बचत के बदले भुगतान करना। लोग कितनी बार इस रास्ते का इस्तेमाल कर पाएंगे, यह शुल्क की राशि पर निर्भर करेगा।
घोषणा में सड़क खुलने की तारीख, टोल दर, हाईवे की कुल लागत या विस्तृत मार्ग का उल्लेख नहीं किया गया। प्रस्तावित रेलवे के लिए निर्माण की समय-सारणी या यात्रा समय भी नहीं बताया गया। इन्हीं जानकारियों से तय होगा कि निवासी नए संपर्क मार्गों का इस्तेमाल कब कर सकेंगे और उनकी यात्रा का खर्च कितना होगा।
सड़क और रेल की योजना साथ-साथ
समरकंद और बुखारा को हाई-स्पीड ट्रेनों के अनुकूल बनाई जाने वाली नई रेलवे लाइन से भी जोड़ा जाएगा। अधिकारियों को परिवहन के दोनों साधनों की योजना पूरी करने को कहा गया है, जिससे सड़क और रेल प्रस्ताव एक ही क्षेत्रीय परिवहन चर्चा का हिस्सा बनते हैं।
90 मिनट का लक्ष्य प्रस्तावित सड़क यात्रा के लिए है। रेलवे एक अलग परियोजना है, जिसका उद्देश्य शहरों के बीच यात्रा का एक और विकल्प देना है। इसका डिज़ाइन, सेवा व्यवस्था और अंतिम समय-सारणी यात्रियों के लिए उपलब्ध विकल्प तय करेगी।
परिवारों, कामगारों और कारोबारों के लिए सड़क यात्रा छोटी होने से एक ही दिन में आना-जाना आसान हो सकता है। जो लोग गाड़ी नहीं चलाते, उनके लिए यात्री रेल एक और विकल्प दे सकती है। लाभ इस बात पर निर्भर करेंगे कि परियोजनाएं कैसे पूरी होती हैं, पहुंच-बिंदु कहां बनाए जाते हैं और उपयोगकर्ताओं को कितना भुगतान करना पड़ता है।
अन्य राजमार्गों के लिए तय पड़ाव
बुखारा के परिवहन कार्यक्रम में मौजूदा सड़कों पर काम भी शामिल है। क्षेत्र से गुजरने वाले ए-380 राजमार्ग का पुनर्निर्माण 2026 में पूरा करने की समय-सारणी है। एम-37 राजमार्ग के 69 किलोमीटर हिस्से पर काम 2027 में शुरू होने का कार्यक्रम है।
एम-37 परियोजना की अनुमानित लागत 200 मिलियन डॉलर है और इसमें बुखारा शहर के आसपास 4.5 किलोमीटर का बाईपास शामिल है। बाईपास वाहनों को शहर की सड़कों से गुज़ारे बिना उसके आसपास से निकलने का रास्ता देता है। इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह आसपास के सड़क नेटवर्क से कैसे जुड़ता है।
घोषित प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:
- जनवरी 2025: समरकंद–बुखारा टोल हाईवे की योजनाओं की पहली घोषणा हुई।
- 4 नवंबर: मिर्ज़ियोयेव ने बुखारा में सड़क और रेलवे प्रस्तावों पर चर्चा की और अधिकारियों को मास्टर प्लान पूरी करने तथा साझेदारों के साथ बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया।
- 2026: बुखारा क्षेत्र से गुजरने वाले ए-380 के पुनर्निर्माण को पूरा करने की समय-सारणी है।
- 2027: 69 किलोमीटर के एम-37 परियोजना और बुखारा के आसपास बाईपास का काम शुरू होने का कार्यक्रम है।
ए-380 और एम-37 के पड़ाव काम के अलग-अलग चरणों से जुड़े हैं: पहले के लिए काम पूरा करने का और दूसरे के लिए निर्माण शुरू करने का। इसलिए इन मार्गों के किनारे रहने वाले लोगों को नियोजित सुधारों के पूरा होने के लिए अलग-अलग अवधि तक इंतज़ार करना होगा।
परिवहन से आगे तक जल निवेश
बैठक में पेयजल और सीवरेज भी प्रमुख विषय रहे। एशियाई अवसंरचना निवेश बैंक के सहयोग से 385 मिलियन डॉलर की परियोजना पर पहले से काम चल रहा है, जबकि दूसरे चरण के लिए 248 मिलियन डॉलर जुटाए जाने की उम्मीद है।
दोनों राशियां मिलाकर 633 मिलियन डॉलर होती हैं। दूसरा चरण इस संयुक्त राशि का करीब 39% है, इसलिए प्रस्तावित अतिरिक्त वित्तपोषण कार्यक्रम का एक बड़ा हिस्सा है। पहली परियोजना पर काम जारी है; दूसरे चरण के लिए वित्तपोषण मिलने की उम्मीद है।
मिर्ज़ियोयेव ने कहा कि निवासी जल अवसंरचना में सुधार का इंतज़ार कर रहे थे और अधिकारियों को काम तेज़ करने का निर्देश दिया। घरों के लिए इस कार्यक्रम का संबंध दो बुनियादी सेवाओं से है: साझा आपूर्ति नेटवर्क के ज़रिए पेयजल पहुंचाना और सीवर पाइपों से अपशिष्ट जल बाहर ले जाना।
जल निवेश से क्षेत्रीय कार्यक्रम को परिवहन की महत्वाकांक्षाओं के साथ-साथ घरों से जुड़ा सीधा आयाम भी मिलता है। तेज़ यात्रा शहरों के बीच आवाजाही बदलेगी, जबकि जल और सीवर कनेक्शन घरों और मोहल्लों के रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करेंगे।
निवासियों के लिए जल लक्ष्यों का मतलब
इन परियोजनाओं से 17 लाख लोगों की पेयजल आपूर्ति में सुधार और 7,75,000 निवासियों को केंद्रीकृत सीवरेज सेवाओं से जोड़ने की उम्मीद है। ये दोनों आंकड़े अलग-अलग सेवाओं को दर्शाते हैं, इसलिए कार्यक्रम की पहुंच का आकलन करते समय इन्हें अलग-अलग देखना चाहिए।
क्षेत्र की आबादी में केंद्रीकृत पेयजल की पहुंच 80% से बढ़कर 95% होने का अनुमान है। सरल शब्दों में, लक्ष्य हर 100 में से करीब 80 निवासियों को सेवा देने से बढ़ाकर 95 निवासियों तक पहुंचना है।
यह 15 प्रतिशत अंक की वृद्धि है। इससे केंद्रीकृत नेटवर्क से बाहर रहने वाले लोगों का हिस्सा 20% से घटकर 5% रह जाएगा, यानी तीन-चौथाई की कमी। 17 लाख लोगों की आपूर्ति में सुधार के लिए पहले से जुड़े निवासियों के लिए भी काम करना पड़ सकता है, क्योंकि घोषित लक्ष्य में सेवा सुधार के साथ-साथ अधिक लोगों तक पहुंच बढ़ाना भी शामिल है।
सीवरेज का लक्ष्य एक अलग ज़रूरत को पूरा करता है। 7,75,000 निवासियों को साझा अपशिष्ट जल नेटवर्क से जोड़ने का मतलब घरों और अन्य इमारतों से सीवेज इकट्ठा करने के लिए इस्तेमाल होने वाले ढांचे का विस्तार करना होगा। पेयजल पाइप पानी घरों तक लाते हैं; सीवर पाइप अपशिष्ट जल बाहर ले जाते हैं।
अगले कदम: योजना और काम पूरा करना
अधिकारियों के सामने अब कई अलग-अलग काम हैं: सड़क और रेलवे की मास्टर प्लान पूरी करना, संभावित साझेदारों के साथ बातचीत करना, जल परियोजना के दूसरे चरण के लिए वित्तपोषण जुटाना और घोषित निर्माण पड़ावों वाली परियोजनाओं को आगे बढ़ाना। हर काम इस बात को प्रभावित करेगा कि वादे के मुताबिक लाभ निवासियों तक कब पहुंचेंगे।
निकट अवधि का सबसे स्पष्ट परिवहन पड़ाव 2026 में ए-380 पुनर्निर्माण पूरा करने का निर्धारित लक्ष्य है, जिसके बाद 2027 में एम-37 का काम शुरू करने की योजना है। नए समरकंद–बुखारा संपर्क मार्ग के लिए फिलहाल तत्काल काम परियोजना की योजना और बातचीत का है।
मुख्य बातें
- प्रस्तावित टोल हाईवे से समरकंद–बुखारा यात्रा पांच घंटे से घटकर 90 मिनट हो सकती है, जिससे यात्रा समय में 70% की बचत होगी।
- शहरों के बीच हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए नई रेलवे लाइन की भी योजना है।
- अधिकारियों को मास्टर प्लान पूरी करने और संभावित साझेदारों के साथ बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
- ए-380 का पुनर्निर्माण 2026 में पूरा करने का कार्यक्रम है; 200 मिलियन डॉलर की एम-37 परियोजना 2027 में शुरू होने वाली है।
- 385 मिलियन डॉलर की जल परियोजना पर काम जारी है और दूसरे चरण के लिए 248 मिलियन डॉलर मिलने की उम्मीद है।
- जल कार्यक्रम का लक्ष्य 17 लाख लोगों की आपूर्ति में सुधार करना और 7,75,000 निवासियों को सीवर कनेक्शन देना है।






