निगरानी में कम जहाज़, मिसाइलों की खुफिया जानकारी पर तीखी बहस
नौसेना ने कर्मचारियों की कमी और समुद्र में लंबे समय तक अभियान चलाने के दबाव का हवाला देते हुए अनुरोध किया था। इसके बाद दक्षिण कोरिया ने सितंबर 2025 में पूर्वी सागर में एजिस विध्वंसक जहाज़ की लगातार तैनाती रोक दी। इस फैसले से सेना के भीतर इस बात पर विवाद शुरू हो गया है कि उत्तर कोरिया की लगातार विविध होती मिसाइलों के बारे में सियोल कितनी विस्तृत जानकारी जुटा सकता है।
विषय-सूची
- निगरानी में कम जहाज़, मिसाइलों की खुफिया जानकारी पर तीखी बहस
- नौसेना ने तैनाती का तरीका क्यों बदला
- लगातार परीक्षणों से निगरानी का काम जटिल
- 4 नवंबर की मिसाइलों की पहचान करना क्यों कठिन था
- ज़मीनी रडार और जहाज़ों से मिलने वाली अलग-अलग जानकारी
- सहयोगी देशों की चेतावनी संबंधी जानकारी से रक्षा नेटवर्क को मदद
- विश्लेषकों के लिए बार-बार किए गए अवलोकन क्यों अहम
- फैसले में खुफिया जानकारी और चालक दल पर दबाव के बीच संतुलन
- मुख्य बातें
इस बदलाव को मंजूरी देने वाले ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ (JCS) का कहना है कि ज़मीनी रडार और अमेरिका तथा जापान के साथ खुफिया सहयोग से मिसाइलों का पता लगाने, उनकी निगरानी करने और रक्षा तैयारियों को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। मिसाइल डेटा का विश्लेषण करने वाले सैन्यकर्मियों का कहना है कि समुद्र में स्थायी निगरानी न होने से उत्तर कोरियाई हथियारों की जानकारी लगातार जुटाना कठिन हो गया है।
दक्षिण कोरिया के पास फिलहाल चार एजिस विध्वंसक जहाज़ हैं। ये उन्नत रडार से लैस युद्धपोत लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइलों का पता लगा और उनकी निगरानी कर सकते हैं। लगातार तैनाती खत्म होने से ये जहाज़ प्रक्षेपण देखने के लिए कब उपलब्ध होंगे, यह बदलता है; निगरानी बल से उन्हें हटाया नहीं गया है।
व्यावहारिक सवाल यह है कि जहाज़ों और चालक दल पर दबाव घटाते हुए दक्षिण कोरिया उत्तर कोरियाई मिसाइलों का अध्ययन करने के पर्याप्त अवसर कैसे बनाए रख सकता है। दक्षिण कोरियाई क्षेत्र के लिए खतरा बनी मिसाइल का पता लगाना और समुद्र के ऊपर परीक्षण उड़ान का विस्तृत रिकॉर्ड जुटाना आपस में जुड़े काम हैं, लेकिन इनके लिए अलग-अलग मात्रा में जानकारी चाहिए।
नौसेना ने तैनाती का तरीका क्यों बदला
नौसेना ने सितंबर 2025 में पूर्वी सागर में लगातार तैनाती खत्म करने की अनुमति के लिए JCS से अनुरोध किया था। इसकी वजह कर्मचारियों की कमी और युद्धपोतों को लंबे समय तक समुद्र में रखने का परिचालन संबंधी दबाव था। लगातार तैनाती का प्रस्ताव रखे जाने के समय नौसेना के पास तीन एजिस विध्वंसक जहाज़ थे, जबकि अब चार हैं।
तैनाती रोकने के बाद कथित तौर पर यह योजना थी कि उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण की तैयारी के संकेत मिलने पर एजिस विध्वंसक जहाज़ भेजा जाएगा। इस तरह लगातार मौजूदगी बनाए रखने के बजाय, संभावित परीक्षणों के आसपास समुद्री निगरानी केंद्रित की जाती।
इस व्यवस्था से परिचित एक सैन्य अधिकारी के अनुसार, उत्तर कोरिया ने स्पष्ट पूर्व संकेत दिए बिना मिसाइलें दागना बढ़ा दिया है। चेतावनी के संकेत मिलने पर तैनाती का यह तरीका तभी कारगर है, जब जहाज़ को उपयोगी निगरानी स्थिति में पहुंचने के लिए वे संकेत पर्याप्त समय पहले मिलें।
बेड़े में एक जहाज़ बढ़ा है, लेकिन बदलाव के अनुरोध के लिए नौसेना ने कर्मचारियों की कमी और लगातार अभियान चलाने के दबाव के साथ-साथ जहाज़ों की संख्या को भी वजह बताया था। जहाज़ों की संख्या बढ़ने पर भी उन्हें समुद्र में रखने के लिए चालक दल और संसाधनों की जरूरत होती है।
लगातार परीक्षणों से निगरानी का काम जटिल
अक्टूबर के आखिर और नवंबर 2026 की शुरुआत में उत्तर कोरिया ने कई तरह के हथियारों और कथित वारहेड क्षमताओं का परीक्षण किया। इन परीक्षणों से दक्षिण कोरियाई विश्लेषकों को अलग-अलग उड़ान पैटर्न का अध्ययन करना पड़ा, जिनमें बैलिस्टिक मिसाइलें, क्रूज़ मिसाइलें और विमानों पर हमला करने के लिए बने हथियार शामिल थे।
बैलिस्टिक मिसाइल आम तौर पर शुरुआती संचालित उड़ान के बाद चापाकार मार्ग पर चलती है, जबकि क्रूज़ मिसाइल लगातार प्रणोदन और वायुगतिकीय उत्थापन के सहारे वायुमंडल में उड़ती है। सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ज़मीन के ऊपर मौजूद लक्ष्य को भेदने के लिए बनाई जाती है। रडार गतिविधि दर्ज कर सकता है, लेकिन हथियार की पहचान के लिए उसकी गति, ऊंचाई, मार्ग और अन्य विशेषताओं का विश्लेषण भी जरूरी है।
हाल के परीक्षणों का क्रम इस प्रकार रहा:
- सितंबर 2025: दक्षिण कोरिया ने पूर्वी सागर में एजिस विध्वंसक जहाज़ों की लगातार तैनाती रोकने के नौसेना के अनुरोध को मंजूरी दी।
- 29 अक्टूबर, 2026: उत्तर कोरिया ने अपने 600 मिमी के विशाल बहु-रॉकेट प्रक्षेपकों से कई रॉकेट दागे।
- 31 अक्टूबर: प्योंगयांग ने दावा किया कि उसने क्लस्टर वारहेड वाली सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया।
- 2 नवंबर: उत्तर कोरिया ने कहा कि उसने सामरिक क्रूज़ मिसाइल पर क्लस्टर वारहेड और हथियार की ऊर्ध्वाधर हमले वाली उड़ान विशेषताओं का आकलन किया।
- 4 नवंबर: दक्षिण हामग्योंग प्रांत के सोंडोक इलाके से पूर्वी सागर की ओर कई मिसाइलें दागी गईं।
- 5 नवंबर: उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी ने नई सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल के परीक्षण और लंबी दूरी की सामरिक क्रूज़ मिसाइलों से जुड़ी फायरिंग कवायद का वर्णन किया।
क्लस्टर वारहेड एक विस्फोटक चार्ज के बजाय कई छोटे हथियार छोड़ने के लिए बनाया जाता है। उत्तर कोरिया के बयानों में 31 अक्टूबर और 2 नवंबर के परीक्षणों को इस क्षमता के आकलन के तौर पर पेश किया गया। दक्षिण कोरियाई विश्लेषकों के लिए इन वारहेड को ले जाने वाली मिसाइलों का उड़ान व्यवहार भी जुटाई जाने वाली जानकारी का एक हिस्सा है।
4 नवंबर की मिसाइलों की पहचान करना क्यों कठिन था
JCS ने शुरुआत में 4 नवंबर को दागे गए प्रक्षेपास्त्रों को बैलिस्टिक मिसाइलें कहने के बजाय सिर्फ मिसाइल बताया। दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी अधिकारियों ने कई संभावनाओं की जांच की, जिनमें कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और क्रूज़ मिसाइलें शामिल थीं।
एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों की दूरी और उड़ान विशेषताओं में समानता हो सकती है। प्रक्षेपण का कोण और ऊंचाई भी उड़ान मार्ग बदल सकते हैं, जिससे रडार के अवलोकनों के आधार पर पहचान करना कठिन हो जाता है।
प्योंगयांग इलाके से 12 अक्टूबर को हुए मिसाइल प्रक्षेपणों के बाद भी दक्षिण कोरिया को और विश्लेषण करना पड़ा था। उस समय JCS ने कई बैलिस्टिक मिसाइलों की पहचान की थी, जिनमें से कम से कम एक ने 900 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की थी। दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी अधिकारी उनकी विशिष्टताओं की जांच जारी रखे हुए थे।
एक सैन्य अधिकारी ने आगाह किया कि यह स्पष्ट नहीं है कि लगातार तैनात एजिस विध्वंसक जहाज़ से 4 नवंबर के प्रक्षेपणों की तुरंत पहचान हो पाती या नहीं। मिसाइल विश्लेषकों की चिंता इससे व्यापक है: समुद्री रडार से अवलोकन जुटाने के कम अवसर मिलने पर समय के साथ हथियारों का अध्ययन करने के लिए उनके पास कम जानकारी रह सकती है।
ज़मीनी रडार और जहाज़ों से मिलने वाली अलग-अलग जानकारी
JCS का कहना है कि ज़मीन पर लगे रडार दक्षिण कोरियाई क्षेत्र की ओर आने वाली मिसाइलों का पता लगा सकते हैं और पूर्वी सागर की ओर दागी गई मिसाइलों की उड़ान के बड़े हिस्से पर नज़र रख सकते हैं। स्थिर रडार केंद्र भरोसेमंद ढंग से काम करते हैं और सटीक निगरानी देते हैं; वे निगरानी नेटवर्क का निरंतर हिस्सा हैं।
मिसाइल जितनी दूर जाती है, पृथ्वी की वक्रता रडार के अवलोकन को सीमित कर सकती है, खास तौर पर उड़ान के आखिरी चरणों में। सरल शब्दों में, रडार की नज़र क्षितिज तक सीमित होती है: दूर की कोई वस्तु उसकी दृष्टि-रेखा से बाहर जा सकती है।
जहाज़ अपनी निगरानी की जगह बदल सकता है। एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि बेहतर कवरेज वाली जगह पर जाकर समुद्री रडार इस तरह उड़ान के बारे में अतिरिक्त जानकारी जुटा सकता है। लगातार तैनाती खत्म करने को लेकर चिंतित अधिकारियों के अनुसार, जहाज़ों की यही गतिशीलता उनका सबसे अहम लाभ है।
अधिकारी ने कहा कि पूर्वी सागर के ऊपर परीक्षण उड़ान के हर हिस्से पर नज़र रखे बिना भी दक्षिण कोरिया अपने क्षेत्र के लिए खतरा बनी मिसाइलों का जवाब देने के लिए जरूरी जानकारी हासिल कर सकता है। रक्षा कर्मियों को खतरे की दिशा और उसकी गतिविधि के बारे में समय पर जानकारी चाहिए। हथियारों का विश्लेषण करने वाले लोग ऐसे विस्तृत अवलोकन भी चाहते हैं जिनसे वे पूरी उड़ान के दौरान मिसाइल के प्रदर्शन का पुनर्निर्माण कर सकें।
सहयोगी देशों की चेतावनी संबंधी जानकारी से रक्षा नेटवर्क को मदद
JCS के अनुसार, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के बीच वास्तविक समय में मिसाइल चेतावनी संबंधी जानकारी साझा करना निगरानी की सीमाओं को पूरा करने का एक तरीका है। वॉशिंगटन और टोक्यो के साथ खुफिया सहयोग से दक्षिण कोरिया के अपने सेंसरों के अलावा जानकारी का एक और स्रोत मिलता है।
साझा चेतावनी नेटवर्क तीनों देशों को एक ही रडार के अवलोकनों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जानकारियां साझा करने देता है। उनके अलग-अलग निगरानी स्थान प्रक्षेपण की अधिक संपूर्ण तस्वीर बनाने और संभावित खतरों पर फैसले लेने में मदद कर सकते हैं।
तीनों सरकारें उत्तर कोरिया के प्रति व्यापक नीति पर भी समन्वय करती रही हैं। अटलांटा में 30 अक्टूबर की राजनयिक वार्ता में उनके विदेश मंत्रियों ने उत्तर कोरिया के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन दोहराया और साथ ही बातचीत तथा संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को लागू करने का समर्थन किया।
JCS का रुख है कि देश के भीतर रडार कवरेज और सहयोगी देशों के साथ साझेदारी मिलकर निगरानी की तैयारी बनाए रखते हैं। एजिस डेटा का विश्लेषण करने वाले कर्मियों की चिंता अधिक सीमित है: मिसाइलों की विशेषताओं का आकलन करने के लिए इस्तेमाल होने वाले विस्तृत समुद्री अवलोकनों की नियमित उपलब्धता।
विश्लेषकों के लिए बार-बार किए गए अवलोकन क्यों अहम
एजिस रडार डेटा का विश्लेषण करने वाली एक ज़मीनी सैन्य इकाई में तैनात अधिकारी ने कहा कि तैनाती रोकने से लगातार समुद्री निगरानी की जानकारी जुटाना कठिन हुआ है। अधिकारी के अनुसार, भविष्य के खतरों की तैयारी के लिए विश्लेषकों को मिसाइलों की दूरी, उड़ान मार्ग और दूसरी विशेषताओं का रिकॉर्ड लगातार जुटाते रहना होगा।
बार-बार किए गए अवलोकनों से विश्लेषक एक प्रक्षेपण की दूसरे से तुलना कर सकते हैं। जब उत्तर कोरिया अलग-अलग हथियारों का परीक्षण करता है या उड़ान का तरीका बदलता है, तो पहले से जमा अधिक रिकॉर्ड नए व्यवहार का आकलन करने के लिए उन्हें ज्यादा जानकारी देता है। उड़ान मार्ग से आशय हवा में मिसाइल के रास्ते से है।
नवंबर के परीक्षणों का क्रम इस काम का पैमाना दिखाता है। कम समय में विश्लेषक बड़े रॉकेटों, कथित क्लस्टर वारहेड, क्रूज़ मिसाइलों और नई सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से जुड़े प्रक्षेपणों की जांच कर रहे थे। हर प्रकार की पहचान के लिए अलग विश्लेषण करना पड़ता है।
इन कर्मियों के लिए एजिस गश्त का एक लाभ यह है कि अप्रत्याशित प्रक्षेपण के समय जहाज़ पहले से मौजूद हो सकता है। समुद्र में मौजूद जहाज़ तुरंत अपने स्थान से अवलोकन जुटा सकता है, जबकि पहले से मिली चेतावनी के आधार पर तैनाती इस बात पर निर्भर करती है कि प्रक्षेपण से पहले तैयारी के संकेत मिल जाएं।
फैसले में खुफिया जानकारी और चालक दल पर दबाव के बीच संतुलन
समुद्री और ज़मीनी रडार के अंतर बताने वाले वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के अनुसार, एजिस विध्वंसक जहाज़ को लगातार तैनात रखने में भारी परिचालन लागत और कर्मचारियों की जरूरत होती है। नौसेना का अनुरोध छोटे बेड़े पर इन दबावों को दर्शाता है।
सेना को लगातार गश्त से मिलने वाली अतिरिक्त उड़ान जानकारी और उसे बनाए रखने के लिए जरूरी संसाधनों के बीच संतुलन बनाना होगा। कर्मचारियों की कमी इस हिसाब को खास तौर पर ठोस बनाती है: निगरानी अभियान जारी रखने के लिए उन्नत उपकरणों के साथ लोगों की भी जरूरत है।
इसलिए दक्षिण कोरिया की बहस में दो परिचालन प्राथमिकताएं शामिल हैं। JCS खतरे का पता लगाने और उसकी निगरानी करने वाले नेटवर्क की पर्याप्तता का बचाव कर रहा है। मिसाइल विश्लेषक उत्तर कोरिया के भविष्य में इस्तेमाल किए जा सकने वाले हथियारों को समझने के लिए अवलोकनों का अधिक नियमित प्रवाह चाहते हैं।
तैनाती में बदलाव के बाद एजिस विध्वंसक जहाज़ निगरानी अभियानों के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन पूर्वी सागर में उनकी लगातार मौजूदगी खत्म हो गई है। इसका मुख्य असर यह है कि निरंतर खुफिया जानकारी जुटाने और जहाज़ों तथा चालक दल को तैनात रखने की लागत के बीच संतुलन बदल गया है।
मुख्य बातें
- नौसेना के अनुरोध के बाद दक्षिण कोरिया ने कर्मचारियों की कमी और परिचालन दबाव का हवाला देते हुए सितंबर 2025 में पूर्वी सागर में एजिस विध्वंसक जहाज़ों की लगातार तैनाती रोक दी।
- नौसेना के पास फिलहाल चार एजिस विध्वंसक जहाज़ हैं, जो लंबी दूरी से बैलिस्टिक मिसाइलों की निगरानी करने वाले रडार से लैस हैं।
- JCS का कहना है कि ज़मीनी रडार और अमेरिका तथा जापान के साथ सहयोग से मिसाइल निगरानी और रक्षा तैयारियां बनी रहती हैं।
- एजिस रडार डेटा का विश्लेषण करने वाले कर्मियों का कहना है कि समुद्री निगरानी के विस्तृत अवलोकन लगातार जुटाना कठिन हो गया है।
- उत्तर कोरिया के 4 नवंबर के प्रक्षेपणों के बाद कई संभावित मिसाइल प्रकारों की जांच की गई। बाद में प्योंगयांग ने सतह से हवा में मार करने वाली और क्रूज़ मिसाइलों से जुड़ी गतिविधियों का वर्णन किया।
- सेना लगातार गश्त से मिलने वाली अतिरिक्त खुफिया जानकारी और परिचालन लागत तथा चालक दल पर पड़ने वाले दबाव के बीच संतुलन बना रही है।






