रूस के कोयला टर्मिनलों पर अक्टूबर में बढ़ी हलचल
अक्टूबर में कम से कम 13 उत्तर कोरियाई जहाज रूस के नाखोदका बंदरगाह पर 14 बार आते-जाते दर्ज किए गए। इनमें से कम से कम नौ कोयला टर्मिनलों के पास दिखाई दिए। जहाजों की इस आवाजाही ने उस मार्ग पर फिर से जांच-पड़ताल बढ़ा दी है, जिसका इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के बावजूद रूस के रास्ते उत्तर कोरियाई कोयले की ढुलाई के लिए पहले किया गया था।
विषय-सूची
- रूस के कोयला टर्मिनलों पर अक्टूबर में बढ़ी हलचल
- कौन से जहाजों का पता चला?
- कोयले पर संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध वास्तव में क्या कहता है
- निर्यात की सीमा से पूर्ण प्रतिबंध तक
- नाखोदका का पुराना मार्ग
- खोल्म्स्क से पता चलता है कि माल जहाज बदलकर कैसे जा सकता था
- बड़े जहाज क्यों मायने रखते हैं
- हथियारों की चिंता कहां से जुड़ती है
- मुख्य बिंदु
मरीनट्रैफिक के जहाज-ट्रैकिंग डेटा के विश्लेषण में रिपोर्टिंग वर्ष की शुरुआत से नवंबर की शुरुआत तक 17 उत्तर कोरियाई जहाजों के नाखोदका के 20 चक्कर दर्ज किए गए। इनमें से 70% चक्कर अक्टूबर में हुए। साल भर का कुल आंकड़ा पिछले वर्ष के 33 चक्करों से कम था। इसलिए तत्काल चिंता पूरे साल में बढ़ोतरी नहीं, बल्कि अक्टूबर में गतिविधियों का केंद्रित होना है।
जहाजों का आकार भी काफी बड़ा था। उनकी दर्ज की गई कुल वहन क्षमता 204,065 टन तक पहुंची, जिसे विश्लेषण में पिछले साल के आंकड़े से 49 गुना बताया गया। जहाजों की औसत लंबाई 56 मीटर से बढ़कर 123 मीटर हो गई। पहले इस मार्ग पर दिखने वाले छोटे मछली पकड़ने और रेफ्रिजरेटेड जहाजों की जगह अब बड़े मालवाहक जहाजों ने ले ली है।
रूस के प्रशांत क्षेत्र प्रिमोर्स्की में स्थित नाखोदका से कोयले का निर्यात होता है। उत्तर कोरियाई जहाजरानी गतिविधियों में इस बंदरगाह के सामने आने से कई संभावित वजहों पर सवाल उठे हैं: उत्तर कोरियाई कोयले को रूसी बताकर भेजना, सामान के बदले रूसी कोयले की ढुलाई करना, या दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ने के साथ दूसरे माल की आवाजाही।
इन जहाजों में क्या माल था, भुगतान की व्यवस्था कैसी थी और इन खास यात्राओं का हथियारों की खेप से कोई संबंध था या नहीं, यह अब भी अज्ञात है। मुख्य सवाल यह है कि जहाज क्या ले जा रहे थे और व्यापार की व्यवस्था किसने की थी, खासकर तब जब इसमें पहले से प्रतिबंधों के दायरे में रहे जहाज शामिल थे।
कौन से जहाजों का पता चला?
नाखोदका के आसपास जिन जहाजों का पता चला, उनमें संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के दायरे में आया पुक डे बोंग, दक्षिण कोरिया के प्रतिबंधों के दायरे में आया टोक सोंग और अमेरिकी वित्त मंत्रालय के प्रतिबंधों के दायरे में आया कुम सोंग 7 शामिल थे। उन बोंग 2 और म्योंग सिन ने भी वहां अपने स्थान के संकेत प्रसारित किए। अमेरिका पहले इन जहाजों की पहचान अवैध कोयला व्यापार और जहाजों के बीच माल के हस्तांतरण के सिलसिले में कर चुका है।
ये प्रतिबंध अलग-अलग प्राधिकरणों ने लगाए हैं। संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध व्यवस्था के तहत लागू होता है, जबकि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के प्रतिबंध उनके अपने राष्ट्रीय उपायों के तहत लगाए गए हैं। इन प्राधिकरणों द्वारा पहचाने गए जहाजों की मौजूदगी बंदरगाह की गतिविधियों की जांच की जरूरत को और बढ़ाती है।
अक्टूबर में पता चले 13 उत्तर कोरियाई जहाजों में से कम से कम नौ कोयला टर्मिनलों के पास थे। यानी करीब दस में से सात जहाज इस वस्तु को संभालने वाली सुविधाओं के नजदीक थे। इसी जमावड़े से समझ आता है कि कोयले का व्यापार प्रमुख चिंता क्यों है।
कुछ जहाजों ने अपने स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) के संकेतों में भी हेरफेर किया हो सकता है। एआईएस के जरिए जहाज अपनी पहचान, स्थिति, गति और दिशा जैसी जानकारी प्रसारित करते हैं। बंदरगाह प्राधिकरण और वाणिज्यिक ट्रैकिंग सेवाएं इन संदेशों से जहाजों की आवाजाही पर नजर रखती हैं।
संकेतों में हेरफेर से जहाज अपनी वास्तविक स्थिति से अलग जगह पर दिखाई दे सकता है। इसलिए उसके मार्ग की पुष्टि के लिए बंदरगाह के रिकॉर्ड और अन्य सबूतों की जांच जरूरी हो सकती है, खासकर जब जांचकर्ताओं को जानबूझकर जानकारी छिपाने का संदेह हो।
कोयले पर संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध वास्तव में क्या कहता है
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 5 अगस्त 2017 को प्रस्ताव 2371 अपनाया। इसने पहले की सीमित व्यवस्था की जगह उत्तर कोरियाई कोयले के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया। सुरक्षा परिषद का कोयला खरीद रिकॉर्ड प्रतिबंध और पहले की व्यवस्था के तहत दर्ज व्यापार के आंकड़े, दोनों प्रस्तुत करता है।
सुरक्षा परिषद के अनुसार, प्रस्ताव के अनुच्छेद 8 में कहा गया है कि उत्तर कोरिया:
अपने क्षेत्र से या अपने नागरिकों के जरिए अथवा अपने ध्वज वाले जहाजों या विमानों का इस्तेमाल करके, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोयले की आपूर्ति, बिक्री या हस्तांतरण नहीं करेगा
इस प्रावधान के तहत देशों को अपने नागरिकों या अपने जहाजों अथवा विमानों के जरिए उत्तर कोरिया से कोयला खरीदने पर भी रोक लगानी होगी, चाहे कोयला उत्तर कोरिया के क्षेत्र से आया हो या नहीं। इसका दायरा उत्तर कोरियाई खदान से सीधे विदेशी खरीदार तक जाने वाली खेप तक सीमित नहीं है।
नाखोदका के संदिग्ध व्यापार पर नजर रखने वाले पाठकों के लिए व्यावहारिक बात यह है कि बंदरगाह बदलने या माल पर नया लेबल लगाने से उत्तर कोरियाई कोयले पर लगे प्रतिबंध हटते नहीं हैं। इस प्रावधान में नागरिकों, जहाजों और अप्रत्यक्ष हस्तांतरण का जिक्र होने के कारण विक्रेता, ढुलाई करने वाले और खरीदार की पहचान भी मायने रखती है।
निर्यात की सीमा से पूर्ण प्रतिबंध तक
अगस्त 2017 के प्रतिबंध से पहले, 2016 के प्रस्ताव 2321 ने वर्ष 2017 के लिए उत्तर कोरिया के कोयला निर्यात को 400,870,018 डॉलर या 7.5 मिलियन मीट्रिक टन तक सीमित किया था। इनमें से जो सीमा पहले पूरी होती, वही लागू होती। इसलिए कोई देश अधिकतम मात्रा से काफी कम कोयला भेजने के बावजूद तय वित्तीय सीमा तक पहुंच सकता था।
सुरक्षा परिषद के रिकॉर्ड में 2017 के लिए कोयले की खरीद 413,555,897.24 डॉलर और 4,828,327.60 मीट्रिक टन दर्ज है। ये रकम मूल्य सीमा का 103.16% और मात्रा सीमा का 64.38% थीं। दर्ज मूल्य वित्तीय सीमा से करीब 12.69 मिलियन डॉलर अधिक था, जबकि मात्रा तय सीमा के दो-तिहाई से भी कम थी।
संयुक्त राष्ट्र के इसी रिकॉर्ड के अनुसार, 2016 में 2,001,634.43 मीट्रिक टन कोयले की खरीद हुई, जिसकी कीमत 183,890,154.99 डॉलर थी। ये आंकड़े उस व्यापार से होने वाली बड़ी कमाई दिखाते हैं, जिसे प्रतिबंध सीमित करना चाहते थे।
घटनाक्रम इसलिए अहम है क्योंकि रूस के बंदरगाहों से पहले की खेपें सीमा व्यवस्था से पूर्ण प्रतिबंध में बदलाव के आसपास हुई थीं:
- 30 नवंबर 2016: प्रस्ताव 2321 के तहत कोयले की खरीद की सीमाएं तय की गईं, जिनमें 2017 की सीमाएं भी शामिल थीं।
- 5 अगस्त 2017: प्रस्ताव 2371 ने उत्तर कोरियाई कोयले के निर्यात और सदस्य देशों की ओर से उसकी खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया।
- अगस्त और सितंबर 2017: जहाजरानी और बंदरगाह रिकॉर्ड में उत्तर कोरियाई कोयले की खेपें नाखोदका और खोल्म्स्क पहुंचती दर्ज हुईं।
- अक्टूबर 2017: जहाजरानी क्षेत्र के एक पश्चिमी स्रोत ने कहा कि रूस के रास्ते भेजी गई कुछ खेपें दक्षिण कोरिया और जापान पहुंचीं।
- जनवरी 2018: इन मार्गों के विस्तृत ब्यौरे सार्वजनिक हुए। साथ ही रूस ने इनकार किया कि उसके बंदरगाह पारगमन केंद्र के रूप में इस्तेमाल हुए।
नाखोदका का पुराना मार्ग
पश्चिमी यूरोप की खुफिया एजेंसियों के तीन सूत्रों ने बताया कि अगस्त 2017 के प्रतिबंध के बाद कम से कम तीन मौकों पर उत्तर कोरियाई कोयला नाखोदका या खोल्म्स्क के रास्ते दक्षिण कोरिया या जापान पहुंचा। उनके ब्यौरों ने मौजूदा चिंता को एक ठोस ऐतिहासिक संदर्भ दिया: पहले रूसी घाटों की पहचान ऐसी जगहों के रूप में की गई थी, जहां माल को विदेश भेजने से पहले एक जहाज से दूसरे पर लादा जा सकता था।
नाखोदका में रूसी बंदरगाह नियंत्रण दस्तावेजों के अनुसार, पलाऊ के ध्वज वाला जियान फू 17,415 टन कोयला लेकर आया था। यह 3 अगस्त 2017 को उत्तर कोरिया के नाम्पो से रवाना हुआ था। जहाज ने एलएलसी पोर्ट लिवाडिया के संचालित बर्थ नंबर 4 का इस्तेमाल किया और 18 अगस्त को वहां से रवाना हुआ। उसका उत्तर कोरिया से प्रस्थान 5 अगस्त के प्रतिबंध से पहले हुआ था।
बंदरगाह के दस्तावेजों के मुताबिक, एक और जहाज 16 अगस्त को इसी बर्थ पर पहुंचा, उसने 20,500 टन कोयला लादा और 24 अगस्त को दक्षिण कोरिया के उल्सान के लिए रवाना हुआ। खुफिया सूत्रों ने बताया कि रूसी बंदरगाह का यह मार्ग उत्तर कोरियाई कोयले को विदेशी खरीदारों तक पहुंचाने का जरिया था।
जियान फू ने समुद्र में रहते हुए 24 जुलाई से 2 अगस्त के बीच अपने ट्रैकिंग संकेत प्रसारित करना भी बंद कर दिया था। कुछ परिस्थितियों में जहाजों के कप्तान ट्रांसमीटर बंद कर सकते हैं, लेकिन इसके चलते यात्रा का वह हिस्सा सार्वजनिक ट्रैकिंग में दर्ज नहीं हुआ।
रूस ने उस समय आरोपों को खारिज किया था। उत्तर कोरिया में रूस के दूतावास के एक अधिकारी, जिनका नाम नहीं बताया गया, ने जनवरी 2018 में कहा:
रूस उत्तर कोरिया से कोयला नहीं खरीदता और न ही तीसरे देशों को कोयला पहुंचाने का पारगमन केंद्र है।
रूस के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने 3 नवंबर 2017 को सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति से यह भी कहा था कि मॉस्को प्रतिबंधों का पालन कर रहा है। इन बयानों में 2017 में लगाए गए व्यापार संबंधी आरोपों का जवाब दिया गया था।
खोल्म्स्क से पता चलता है कि माल जहाज बदलकर कैसे जा सकता था
जापान के उत्तर में रूस के सखालिन द्वीप पर स्थित खोल्म्स्क दूसरे मार्ग का हिस्सा था। रूसी बंदरगाह नियंत्रण और जहाज ट्रैकिंग डेटा में दर्ज है कि उत्तर कोरियाई जहाजों से वहां कोयला उतारा गया और बाद में चीनी कंपनियों द्वारा संचालित जहाजों से उसे आगे भेजा गया।
रुंग रा 2 ने 1 अगस्त से 12 सितंबर 2017 के बीच तीन बार बंदरगाह पर आकर 15,542 टन कोयला उतारा। उल जी बोंग 6 ने दो चक्करों में 10,068 टन और उतारा: एक बार 3 अगस्त को और दूसरी बार 1 से 8 सितंबर के बीच। दोनों जहाजों से उतारे गए माल का कुल वजन 25,610 टन था। ये आवाजाही 5 अगस्त के प्रतिबंध से पहले और बाद, दोनों समय हुई।
सखालिन के बंदरगाह प्रशासन के एक सूत्र ने कहा कि बाद में यह कोयला उन जहाजों पर लादा गया, जिनके बंदरगाह दस्तावेजों में गंतव्य उत्तर कोरिया दर्ज था। लेकिन ट्रैकिंग डेटा में ये जहाज दक्षिण कोरिया के पोहांग और इंचियोन जाते दिखे।
बाद में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने उल जी बोंग 6 के मालिक पर प्रतिबंध लगाए। यह कार्रवाई प्रतिबंध लागू होने के बाद 5 सितंबर को खोल्म्स्क में उत्तर कोरियाई कोयला पहुंचाने के लिए की गई। यह मामला दिखाता है कि जांचकर्ता सिर्फ अंतिम जहाज के प्रस्थान बंदरगाह को क्यों नहीं देखते: खरीदार तक पहुंचने से पहले माल कई जहाजों और दस्तावेजों से होकर गुजर सकता है।
बड़े जहाज क्यों मायने रखते हैं
नाखोदका में छोटे मछली पकड़ने और रेफ्रिजरेटेड जहाजों की जगह बड़े मालवाहक जहाजों के आने से इस मार्ग पर ले जाए जा सकने वाले माल का पैमाना बदल गया है। जहाजों की औसत लंबाई 56 मीटर से बढ़कर 123 मीटर हो गई, जबकि दर्ज की गई कुल डेडवेट टनेज 204,065 टन तक पहुंच गई।
डेडवेट टनेज, जिसे आम तौर पर डीडब्ल्यूटी कहा जाता है, जहाज की अधिकतम भार-वहन क्षमता मापता है। इसमें माल, ईंधन, पानी और जरूरी सामान शामिल होते हैं। नाखोदका का यह आंकड़ा दर्ज किए गए जहाजों की वहन क्षमता बताता है; वास्तव में किस तरह का कितना माल ले जाया गया, यह जानने के लिए लदान के रिकॉर्ड जरूरी होंगे।
उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के विशेषज्ञों के पैनल के पूर्व सदस्य नील वॉट्स ने कोयले की ढुलाई के दो संभावित तरीकों की बात कही। उत्तर कोरिया अपना कोयला रूस के रास्ते रूसी बताकर भेज सकता है, या उसके जहाज अनाज अथवा हथियारों के बदले रूसी कोयले की ढुलाई कर सकते हैं।
वॉट्स ने पहले भी उत्तर कोरिया द्वारा कोयले की उत्पत्ति छिपाने या लंबी यात्राओं के लिए ईंधन हासिल करने के वास्ते रूसी बंदरगाहों के इस्तेमाल की ओर इशारा किया। सेजोंग इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता पीटर वार्ड ने भी उत्तर कोरियाई कोयले की उत्पत्ति छिपाने को एक संभावित वजह माना।
इन संभावनाओं में व्यापार की अलग-अलग व्यवस्थाएं शामिल हैं। पहली स्थिति में मकसद यह छिपाना होगा कि कोयला कहां से आया। दूसरी में उत्तर कोरियाई कारोबारी ढुलाई की सेवा देंगे और बदले में भुगतान हासिल करेंगे, संभवतः पैसे के बजाय सामान के रूप में। माल के मालिक और भुगतान की पहचान से यह तय करने में मदद मिलेगी कि इनमें से कौन-सी व्यवस्था लागू थी, अगर कोई थी तो।
हथियारों की चिंता कहां से जुड़ती है
डोंगसियो विश्वविद्यालय में रूस मामलों के विशेषज्ञ क्रिस मंडे ने कहा कि बड़े जहाज तेल, अनाज और यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियारों समेत कई तरह का माल ले जा सकते हैं। जहाजों का आकार बढ़ने से अलग-अलग तरह के व्यापार की गुंजाइश बनती है। इसीलिए इस बदलाव ने कोयला टर्मिनलों से आगे भी ध्यान खींचा है।
हथियारों से जुड़ी संभावित व्यवस्थाएं भी अलग-अलग दिशाओं में हो सकती हैं। वॉट्स ने ढुलाई की सेवाओं के बदले उत्तर कोरिया को हथियार दिए जाने की संभावना जताई। वहीं, छिपे हुए माल को लेकर चिंता में यूक्रेन में इस्तेमाल के लिए रूस भेजे जाने वाले हथियार भी शामिल हैं। ऐसी किसी भी आवाजाही की पुष्टि के लिए माल की जांच और खेप से जुड़े दस्तावेज जरूरी होंगे।
अक्टूबर में नाखोदका में हुई आवाजाही तीन ठोस घटनाक्रमों को एक साथ सामने लाती है: कम समय में बार-बार यात्राएं, कोयला टर्मिनलों के पास दिखाई देने वाले जहाज और दर्ज की गई कहीं अधिक वहन क्षमता। कई जहाजों पर पहले से लगे प्रतिबंध इस गतिविधि की जांच करने की एक और वजह हैं।
पुराने मार्ग दिखाते हैं कि क्षेत्र के बंदरगाहों और खरीदारों के लिए दांव पर क्या है। रूस में उतारे गए कोयले को आगे भेजने से पहले दूसरे जहाज पर लादा जा सकता है। इसलिए प्रतिबंध लागू कराने के लिए माल की सही उत्पत्ति बताना और उसका रिकॉर्ड रखना अहम है। उत्तर कोरिया के लिए इन संदिग्ध व्यवस्थाओं से निर्यात आय या सामान मिल सकता है; रूस के लिए इससे उसके प्रशांत बंदरगाहों पर फिर से जांच बढ़ती है।
मुख्य बिंदु
- अक्टूबर में कम से कम 13 उत्तर कोरियाई जहाजों ने नाखोदका के 14 दर्ज चक्कर लगाए। नवंबर की शुरुआत तक दर्ज 20 चक्करों में से 70% इसी महीने हुए।
- अक्टूबर में कम से कम नौ जहाज कोयला टर्मिनलों के पास दिखाई दिए और कई जहाज पहले से प्रतिबंधों के दायरे में थे।
- दर्ज की गई कुल वहन क्षमता 204,065 टन तक पहुंची, जबकि जहाजों की औसत लंबाई 56 मीटर से बढ़कर 123 मीटर हो गई।
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2371 ने 5 अगस्त 2017 को उत्तर कोरियाई कोयले के निर्यात और सदस्य देशों की ओर से उसकी खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया।
- पहले लगाए गए आरोपों के अनुसार, उत्तर कोरियाई कोयला नाखोदका और खोल्म्स्क के रास्ते दक्षिण कोरिया और जापान भेजा गया। रूस ने पारगमन केंद्र के रूप में काम करने से इनकार किया।
- कोयले की उत्पत्ति छिपाना, ढुलाई की सेवाएं देना और हथियारों का माल ले जाना चर्चा में शामिल संभावित वजहें हैं; हाल में पता चली यात्राओं में क्या माल था, इसकी पहचान नहीं हुई है।






