दो परीक्षणों में बड़े क्षेत्र पर विस्फोट फैलाने और ऊपर से हमले की क्षमता जोड़ी गई
उत्तर कोरिया ने कहा कि उसने 2 नवंबर, 2026 को क्लस्टर वारहेड से लैस एक रणनीतिक क्रूज़ मिसाइल का परीक्षण किया। उसका दावा है कि यह हथियार करीब 5 से 6 हेक्टेयर क्षेत्र को तबाह कर सकता है। मिसाइल प्रशासन ने ऊपर से हमला करने की मिसाइल की क्षमता का भी परीक्षण किया। इससे हथियार विकास का वह प्रयास आगे बढ़ा, जिसमें इसके ठीक दो दिन पहले सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल के वारहेड का परीक्षण शामिल था।
विषय-सूची
- दो परीक्षणों में बड़े क्षेत्र पर विस्फोट फैलाने और ऊपर से हमले की क्षमता जोड़ी गई
- फैलाव वाला वारहेड क्या करता है?
- ऊपर से हमले का परीक्षण भी क्यों?
- नवंबर का परीक्षण अक्टूबर के प्रक्षेपण के बाद
- वारहेड की चार श्रेणियों की योजना
- दावों में विश्लेषकों को किन लक्ष्यों के संकेत दिखते हैं?
- पता लगाने और तैयारी पर दक्षिण कोरिया ने क्या कहा
- सहयोगी देशों के अभ्यासों की आलोचना के बीच हथियार विकास
- कम घरेलू प्रचार के साथ सार्वजनिक संदेश
- मुख्य बातें
3 नवंबर को की गई घोषणा में दो अलग-अलग क्षमताओं का उल्लेख था: छोटे विस्फोटकों को बड़े क्षेत्र में फैलाना और लक्ष्य तक पहुंचने के अंतिम चरण में मिसाइल का रास्ता बदलना। मिसाइल प्रशासन के वारहेड संस्थान ने क्लस्टर वारहेड का आकलन किया, जबकि उसके क्रूज़ मिसाइल सिस्टम अनुसंधान संस्थान ने ऊपर से हमले वाली उड़ान की विशेषताओं का आकलन किया।
वर्कर्स पार्टी के केंद्रीय सैन्य आयोग के सदस्य और पार्टी की केंद्रीय समिति के प्रथम उप विभाग निदेशक जनरल किम जोंग-सिक ने परीक्षणों का निर्देशन किया। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन के इनमें शामिल होने की कोई खबर नहीं दी गई।
परीक्षण कहां किया गया, यह नहीं बताया गया। विनाश के दायरे और ऊपर से हमला करने की पूरी क्षमता हासिल करने के उत्तर कोरिया के दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के अधिकारी विस्तृत विश्लेषण कर रहे थे।
फैलाव वाला वारहेड क्या करता है?
उत्तर कोरिया इस उपकरण को फैलाव वाला वारहेड कहता है। यह क्लस्टर वारहेड है: एक बड़ा कंटेनर, जिसमें छोटे विस्फोटक उपकरण होते हैं। इन्हें सबम्यूनिशन कहा जाता है और छोड़े जाने के बाद ये पूरे क्षेत्र में फैल जाते हैं। विस्फोट का पूरा असर एक जगह केंद्रित करने के बजाय यह हथियार उसे कई जगहों पर बांट देता है।
मिसाइल प्रशासन ने क्रूज़ मिसाइल के वारहेड को मध्यम आकार का बताया। उसके वारहेड संस्थान ने कहा कि परीक्षण से पुष्टि हुई कि यह 5 से 6 जोंगबो क्षेत्र को तबाह कर सकता है। कोरियाई भूमि माप की एक इकाई जोंगबो करीब 5 से 6 हेक्टेयर के बराबर है।
एक जोंगबो करीब 9,917 वर्ग मीटर होता है। इस हिसाब से दावा किया गया क्षेत्र करीब 49,585 से 59,502 वर्ग मीटर है, जिसे अक्सर सात या आठ फुटबॉल मैदानों के बराबर बताया जाता है। यह आंकड़ा उस क्षेत्र से संबंधित है जिसे वारहेड प्रभावित कर सकता है; घोषणा में उसके भीतर मौजूद सबम्यूनिशन की संख्या नहीं बताई गई।
मिसाइल प्रशासन के आकलन में कथित विनाशकारी प्रभाव का वर्णन इन शब्दों में किया गया:
क्रूज़ मिसाइल पर लगा मध्यम आकार का फैलाव वाला वारहेड पांच से छह हेक्टेयर के लक्ष्य क्षेत्र को राख में बदल सकता है।
बड़े क्षेत्र में विस्फोटक फैलाने वाला हथियार एक ही समय में कई वाहनों, उपकरणों के ठिकानों या सैनिकों के समूहों को निशाना बना सकता है। इसी फैलाव से हमले वाले क्षेत्र में या उसके पास मौजूद आम लोगों के लिए भी खतरा पैदा होता है।
ऊपर से हमले का परीक्षण भी क्यों?
क्रूज़ मिसाइल सिस्टम अनुसंधान संस्थान ने कहा कि उसने उस क्षेत्र की प्राकृतिक और भौगोलिक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए मिसाइल की अंतिम चरण में रास्ता बदलने की क्षमता में सुधार किया है, जहां हथियार का इस्तेमाल किया जाएगा। अंतिम चरण में दिशा बदलने का मतलब है लक्ष्य तक पहुंचने से ठीक पहले मिसाइल की उड़ान के आखिरी हिस्से में उसका रास्ता बदलना।
संस्थान का दावा है कि इन सुधारों से मिसाइल की ऊपर से हमला करने की क्षमता पूरी हो गई है। आसान शब्दों में, लक्ष्य के पास अपेक्षाकृत कम ऊंचाई पर पहुंचने वाली मिसाइल अपना रास्ता बदलकर तेजी से नीचे की ओर आ सकती है, बजाय इसके कि वह मुख्य रूप से बगल से पहुंचे।
कोरिया डिफेंस एंड सिक्योरिटी फोरम के महासचिव शिन जोंग-वू ने इस क्षमता को भूमिगत ठिकानों और सुरंगों के प्रवेश द्वारों पर हमले की कोशिश बताया, जहां क्षैतिज या तिरछे रास्ते से पहुंचना मुश्किल होता है। उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से नीचे आती मिसाइल टकराने से पहले अधिक रफ्तार हासिल कर सकती है।
घोषणा के साथ जारी तस्वीरों के बारे में कहा गया कि उनमें समुद्र के ऊपर फैलते सबम्यूनिशन और तोपखाने के ठिकानों या गोला-बारूद के भंडार जैसी संरचनाओं की ओर लगभग सीधे नीचे आती मिसाइल दिखाई गई है। शिन ने अनुमान लगाया कि ये मिसाइलें हवासल क्रूज़ मिसाइल परिवार की थीं।
नवंबर का परीक्षण अक्टूबर के प्रक्षेपण के बाद
उत्तर कोरिया की ताजा घोषणा 31 अक्टूबर को सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल के क्लस्टर वारहेड के परीक्षण के बाद आई। दोनों परीक्षणों में अलग-अलग तरह की मिसाइलों पर एक ही व्यापक वारहेड अवधारणा आजमाई गई, हालांकि उनके लिए विनाश के अलग-अलग क्षेत्र बताए गए।
यह घटनाक्रम चार दिनों में हुआ:
- 31 अक्टूबर, 2026: किम जोंग-सिक के निर्देशन में उत्तर कोरिया ने सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल के क्लस्टर वारहेड का परीक्षण किया।
- 1 नवंबर: उत्तर कोरिया ने घोषणा की कि पहले वाला वारहेड करीब 12 से 13 हेक्टेयर क्षेत्र को तबाह कर सकता है।
- 2 नवंबर: मिसाइल प्रशासन ने क्रूज़ मिसाइल के क्लस्टर वारहेड और ऊपर से हमला करने की क्षमता के परीक्षण किए।
- 3 नवंबर: उत्तर कोरिया ने ताजा परीक्षणों की घोषणा की और दक्षिण कोरिया ने कहा कि अमेरिका के साथ विस्तृत आकलन किया जा रहा है।
पहले वाले बैलिस्टिक मिसाइल वारहेड को स्टैंडर्ड टाइप 2 कहा गया था। उत्तर कोरिया का दावा था कि यह 12 से 13 जोंगबो, यानी करीब 12 से 13 हेक्टेयर क्षेत्र को तबाह कर सकता है। इसके मुकाबले क्रूज़ मिसाइल के वारहेड का दावा किया गया क्षेत्र 5 से 6 हेक्टेयर था। यानी पहले वाला क्षेत्र लगभग दोगुना बड़ा था।
बाद में दक्षिण कोरिया की सेना ने कहा कि उसने 31 अक्टूबर को उत्तरी प्योंगान प्रांत के जोंगजू इलाके से पीला सागर की ओर मिसाइल दागे जाने का पता लगाया था। पहले प्रक्षेपण की यह भौगोलिक जानकारी उत्तर कोरिया ने 2 नवंबर के क्रूज़ मिसाइल परीक्षण के लिए नहीं दी।
वारहेड की चार श्रेणियों की योजना
मिसाइल प्रशासन ने फैलाव वाले वारहेड को चार श्रेणियों में बांटने की व्यापक योजना बताई है, जिनमें मानक और विशेष प्रयोजन वाले संस्करण शामिल हैं। उसके निदेशक ने कहा कि 2026 के अंत से पहले इकाइयां अपने मिशन और लक्ष्य की विशेषताओं के अनुसार वारहेड चुन सकेंगी।
सेना की इकाइयों के लिए इसका मतलब होगा कि हर हमले में एक ही प्रकार के वारहेड का इस्तेमाल करने के बजाय अलग-अलग वारहेड में से चुनाव किया जा सकेगा। घोषित समय-सारणी के मुताबिक साल का अंत इस कार्यक्रम का अगला निर्धारित पड़ाव है।
कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन के वरिष्ठ शोधार्थी होंग मिन ने कहा कि स्टैंडर्ड टाइप 2 और मध्यम आकार जैसे नामों से संकेत मिलता है कि उत्तर कोरिया अलग-अलग मिसाइल प्रकारों के लिए वारहेड के आकार और क्षमता को मानकीकृत करने की कोशिश कर सकता है।
अक्टूबर और नवंबर के परीक्षणों की तुलना से इस विकास प्रयास की एक ठोस तस्वीर मिलती है: उत्तर कोरिया बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों के लिए अलग-अलग आकार के वारहेड का सार्वजनिक रूप से वर्णन कर रहा है, साथ ही लक्ष्य तक मिसाइल के पहुंचने के तरीके में बदलाव भी बता रहा है। इन घोषणाओं में विस्फोटक पेलोड और उसे पहुंचाने वाली प्रणाली, दोनों के विकल्प शामिल हैं।
दावों में विश्लेषकों को किन लक्ष्यों के संकेत दिखते हैं?
क्यूंगनाम विश्वविद्यालय के इंस्टिट्यूट फॉर फार ईस्टर्न स्टडीज के प्रोफेसर लिम यूल-चुल ने क्लस्टर वारहेड की घोषणाओं को दक्षिण कोरिया के उन प्रमुख बंदरगाहों और हवाई अड्डों को बाधित करने का संदेश बताया, जहां संकट के दौरान अमेरिकी सैन्य संसाधन जुटाए जा सकते हैं।
हवाई अड्डे, ईंधन और गोला-बारूद के भंडार तथा बिखरे हुए उपकरणों वाले ठिकाने ऐसे हथियार के संभावित सैन्य लक्ष्य हैं, जिसे विस्फोटक फैलाने के लिए बनाया गया है। ऊपर से आने वाला हमला एक अलग मकसद पूरा करता है: यह किसी खास इमारत या प्रवेश द्वार पर ऐसे कोण से हमला कर सकता है, जहां कम ऊंचाई से आने वाला सीधा रास्ता आसानी से न पहुंचे।
शिन के आकलन में भूमिगत ठिकानों और सुरंगों के प्रवेश द्वारों पर ध्यान था। लिम ने बड़े सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल को सीमित करने पर जोर दिया। इन दोनों व्याख्याओं से समझ आता है कि उत्तर कोरिया ने वारहेड से प्रभावित होने वाले क्षेत्र और मिसाइल की उड़ान की अंतिम दिशा, दोनों को क्यों रेखांकित किया।
बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलों का इस्तेमाल रक्षकों के सामने उड़ान के अलग-अलग तरीके भी पेश करता है। बैलिस्टिक मिसाइलें क्रूज़ मिसाइलों से अलग रास्ते पर चलती हैं। क्रूज़ मिसाइलें कम ऊंचाई पर उड़ सकती हैं और भूभाग के हिसाब से रास्ता बदल सकती हैं। अलग-अलग दिशाओं और ऊंचाइयों से पहुंचने वाले हथियारों का तालमेल वायु रक्षा प्रणालियों के सामने एक साथ निगरानी के लिए खतरों की संख्या बढ़ा सकता है।
पता लगाने और तैयारी पर दक्षिण कोरिया ने क्या कहा
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रवक्ता जांग दो-यंग ने कहा कि दक्षिण कोरियाई और अमेरिकी सेनाएं उत्तर कोरिया की गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही हैं। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया के पास करीब 20 साल पहले विकसित सटीक मारक क्षमताएं और उनसे जुड़ी हथियार प्रणालियां पहले से हैं और वे इस्तेमाल के लिए तैयार हैं।
जॉइंट चीफ्स ने 2 नवंबर के परीक्षण के समय अलग से इसकी घोषणा नहीं की थी। जानकारी सार्वजनिक करने के बारे में पूछे जाने पर जांग ने कहा कि अलग-अलग प्रक्षेपणों का पता लगने की पुष्टि करने से दक्षिण कोरिया की निगरानी क्षमताओं का खुलासा हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य संसाधनों और उनकी विशेषताओं का विवरण रोकना एक रणनीतिक फैसला था।
दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपणों का पता चलने पर अक्सर तुरंत घोषणा करता है, जबकि क्रूज़ मिसाइल गतिविधियों का खुलासा वास्तविक समय में हमेशा नहीं किया जाता। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उत्तर कोरिया पर लगे प्रतिबंधों में बैलिस्टिक मिसाइल प्रक्षेपण शामिल हैं।
जांग ने बताया कि क्रूज़ मिसाइलें अपेक्षाकृत धीमी गति से और कम ऊंचाई पर उड़ती हैं तथा भूभाग के अनुसार अपना रास्ता तय करती हैं। अगर उन्हें उत्तर कोरिया के काफी अंदरूनी हिस्से से दागा जाए, तो उनका पता लगाना कठिन हो सकता है, क्योंकि भूभाग और पृथ्वी की वक्रता से सेंसरों की नजर सीमित हो जाती है।
प्रवक्ता ने कहा कि दक्षिण कोरिया अपने क्षेत्र की ओर दागी गई क्रूज़ मिसाइलों का पता लगा सकता है और जवाब दे सकता है। उनकी टिप्पणियों में दूरस्थ इलाकों पर निगरानी की सीमाओं का स्पष्टीकरण और दक्षिण की रक्षा के लिए सेना की तैयारी का भरोसा, दोनों शामिल थे।
सहयोगी देशों के अभ्यासों की आलोचना के बीच हथियार विकास
उत्तर कोरिया ने इन परीक्षणों को अपने युद्धक तंत्र की ताकत बढ़ाने के मकसद से नियमित वैज्ञानिक अनुसंधान बताया। मिसाइल प्रशासन के निदेशक जांग चांग-हा ने अलग-अलग हथियारों के विकास को देश की रक्षा और बाहरी खतरों को रोकने के लिए जरूरी बताया।
मिसाइल प्रशासन के बयान में यह बात इस तरह कही गई:
विभिन्न प्रकार की हथियार प्रणालियों का विकास पहले से कहीं अधिक जरूरी है। इसकी वजह यह है कि हमारी सशस्त्र सेनाओं को देश की सुरक्षा करनी चाहिए और हर तरह के खतरे रोकने चाहिए।
ये परीक्षण दक्षिण कोरिया, अमेरिका और जापान के सैन्य अभ्यासों पर उत्तर कोरिया की आलोचना के बीच हुए। किम जोंग-सिक ने आयरन मेस की निंदा की। यह अभ्यास 29 सितंबर से 2 अक्टूबर तक हुआ था और इसमें अमेरिकी परमाणु बलों तथा दक्षिण कोरिया की पारंपरिक सेनाओं के संयुक्त इस्तेमाल का अभ्यास किया गया था।
उत्तर कोरिया के एक सैन्य टिप्पणीकार ने कीन स्वॉर्ड की भी आलोचना की। यह अमेरिका और जापान का अभ्यास 19 से 29 अक्टूबर के बीच पूरे जापान में हुआ था। आलोचना में जापान के टाइप 25 सतह से जहाज पर मार करने वाले मिसाइल लॉन्चर की भागीदारी को खास तौर पर निशाना बनाया गया।
होंग मिन ने कहा कि किम जोंग उन की सीधी भागीदारी को प्रमुखता दिए बिना हथियार विकास जारी रखना उत्तर कोरिया की बाहरी तनाव को संभालने की कोशिश हो सकती है। हाल के दोनों वारहेड परीक्षणों का निर्देशन किम जोंग-सिक ने किया, जबकि किम जोंग उन के किसी भी परीक्षण में शामिल होने की खबर नहीं दी गई।
कम घरेलू प्रचार के साथ सार्वजनिक संदेश
उत्तर कोरिया ने बाहरी संचार माध्यमों से परीक्षणों की घोषणा की, जबकि 2 नवंबर की घटना वर्कर्स पार्टी के अखबार रोडोंग सिनमुन जैसे घरेलू माध्यमों में नहीं दिखाई गई। 31 अक्टूबर के क्लस्टर वारहेड परीक्षण का भी उन घरेलू प्रकाशनों में जिक्र नहीं था।
प्रचार में कथित सैन्य क्षमताओं पर जोर दिया गया: बड़े लक्ष्य क्षेत्र को कवर करना, ऊपर से हमला करना और इकाइयों को अलग-अलग वारहेड में से चुनाव की सुविधा देना। दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया में उसकी मौजूदा सटीक मारक हथियार प्रणालियों, निगरानी की कार्यप्रणाली और तैयारी पर जोर था। तत्काल नतीजा सैन्य क्षमता को लेकर एक के बाद एक परस्पर विरोधी सार्वजनिक बयान रहे, जबकि दक्षिण कोरिया और अमेरिका का संयुक्त आकलन जारी था।
मुख्य बातें
- उत्तर कोरिया ने कहा कि उसने 2 नवंबर, 2026 को क्रूज़ मिसाइल के क्लस्टर वारहेड और ऊपर से हमला करने वाली उड़ान विशेषताओं का परीक्षण किया।
- उसके वारहेड संस्थान का दावा है कि मध्यम आकार का वारहेड करीब 5 से 6 हेक्टेयर क्षेत्र को तबाह कर सकता है।
- 31 अक्टूबर को परीक्षण किए गए सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल के वारहेड का दावा किया गया विनाश क्षेत्र करीब 12 से 13 हेक्टेयर था।
- दोनों परीक्षणों का निर्देशन जनरल किम जोंग-सिक ने किया। किम जोंग उन के शामिल होने की खबर नहीं दी गई।
- उत्तर कोरिया की योजना है कि 2026 के अंत तक इकाइयों के लिए फैलाव वाले वारहेड की चार श्रेणियां उपलब्ध हों।
- दक्षिण कोरिया ने कहा कि वह अमेरिका के साथ विस्तृत विश्लेषण कर रहा है और उसके पास जवाब देने की क्षमता है।






