दो उत्तरी परियोजनाओं में खनन को बिजली उत्पादन से जोड़ा गया
अफगानिस्तान के तालिबान प्रशासन ने अज़ीज़ी ग्रुप के साथ 30 वर्षों के लिए दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनके तहत जौज़जान प्रांत में प्राकृतिक गैस का दोहन, बगलान प्रांत में कोयला खनन और बिजली उत्पादन किया जाएगा। प्रत्येक परियोजना से लगभग 1,000 मेगावाट बिजली पैदा करने का लक्ष्य है। खान एवं पेट्रोलियम मंत्री हिदायतुल्लाह बदरी ने गैस परियोजना में नियोजित निवेश 275 मिलियन डॉलर बताया।
विषय-सूची
- दो उत्तरी परियोजनाओं में खनन को बिजली उत्पादन से जोड़ा गया
- 275 मिलियन डॉलर का गैस समझौता क्या कवर करता है
- बगलान का कोयला बिजली का दूसरा स्रोत
- 2,000 मेगावाट का क्या अर्थ होगा
- समझौतों के पीछे निवेश का एक बड़ा प्रस्ताव
- सौर परियोजनाओं के निर्माण से एक और पहल जुड़ी
- रोजगार, खनिज अपशिष्ट और पर्यावरणीय नुकसान
- घोषणाओं का घटनाक्रम
- मुख्य बिंदु
समझौतों पर 4 नवंबर 2026 को काबुल स्थित सरकारी मीडिया एवं सूचना केंद्र में आर्थिक मामलों के उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर अखुंद की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। हस्ताक्षरकर्ताओं में खान एवं पेट्रोलियम मंत्रालय, सरकारी कंपनियों का सामान्य निदेशालय और अज़ीज़ी ग्रुप शामिल थे।
परियोजनाओं में जौज़जान का जंगल-ए-कलान प्राकृतिक गैस क्षेत्र और बगलान के पुल-ए-खुमरी में कोयला खनन क्षेत्र शामिल हैं। दोनों की नियोजित बिजली उत्पादन क्षमता मिलाकर लगभग 2,000 मेगावाट है। आर्थिक मामलों के उप प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा कि परियोजनाओं का उद्देश्य घरेलू बिजली उत्पादन बढ़ाना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना और आर्थिक विकास को समर्थन देना है।
अफगानिस्तान बिजली के लिए आयात पर काफी निर्भर है। देश के भीतर अधिक बिजली पैदा करने से कारोबारों और घरों को आपूर्ति का एक और स्रोत मिल सकता है। हालांकि, ग्राहकों तक बिजली पहुंचाने के लिए उसे ट्रांसमिशन लाइनों और स्थानीय वितरण नेटवर्क से भी गुजारना होगा।
कार्यालय ने अनुमान लगाया कि दोनों परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 5,000 नौकरियां पैदा होंगी। प्रत्यक्ष नौकरियां परियोजनाओं के भीतर होंगी, जबकि अप्रत्यक्ष रोजगार उन व्यवसायों के जरिए मिलेगा जो सामान और सेवाएं उपलब्ध कराएंगे। बरादर ने मंत्रालयों और अन्य संस्थानों से समझौतों को लागू करने में अज़ीज़ी ग्रुप के साथ सहयोग करने का आग्रह किया।
275 मिलियन डॉलर का गैस समझौता क्या कवर करता है
बदरी ने कहा कि जंगल-ए-कलान गैस क्षेत्र 3,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक में फैला है और अमू दरिया तेल एवं गैस बेसिन का हिस्सा है। बेसिन एक बड़ा भूवैज्ञानिक क्षेत्र होता है, जहां चट्टानों की परतों में तेल या प्राकृतिक गैस हो सकती है। समझौते के तहत 30 वर्षों तक खोज और दोहन किया जाएगा।
खोज में भूमिगत गैस का पता लगाना और उसका आकलन करना शामिल है, जबकि दोहन से गैस को सतह पर लाया जाता है। इन गतिविधियों को बिजली उत्पादन से जोड़ने का अर्थ है कि परियोजना ईंधन की आपूर्ति के साथ उसे बिजली में बदलने का काम भी करेगी। बदरी ने कहा कि ठेका लेने वाली कंपनी प्राकृतिक गैस से 1,000 मेगावाट बिजली पैदा करेगी।
मंत्री ने कहा कि प्रशासन को निकाली गई गैस का 75% हिस्सा और 15% रॉयल्टी मिलेगी। रॉयल्टी प्राकृतिक संसाधन के दोहन के अधिकार के बदले किया जाने वाला भुगतान है। कंपनी के नियोजित निवेश के साथ-साथ ये दोनों प्रावधान तय करते हैं कि गैस परियोजना से सरकारी प्राधिकरणों को क्या लाभ मिलेगा।
बदरी ने अनुमान लगाया कि गैस परियोजना से करीब 2,000 नौकरियां पैदा होंगी। यह संख्या दोनों समझौतों के तहत अनुमानित लगभग 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों का दो-पांचवां हिस्सा है। हालांकि, घोषणाओं में प्रत्येक परियोजना के लिए रोजगार की श्रेणियों का तुलनीय ब्योरा नहीं दिया गया।
बगलान का कोयला बिजली का दूसरा स्रोत
बगलान समझौते में पुल-ए-खुमरी के 111 वर्ग किलोमीटर के कोयला खनन क्षेत्र को शामिल किया गया है और इसकी अवधि भी 30 वर्ष है। सरकार की घोषणा के मुताबिक, कोयला परियोजना की बिजली उत्पादन क्षमता गैस परियोजना के लगभग बराबर, यानी 1,000 मेगावाट होगी।
कोयला और गैस एक ही लक्ष्य तक पहुंचने के अलग-अलग रास्ते हैं। दोनों ईंधन जलाकर बिजली पैदा की जा सकती है, लेकिन हर ईंधन के लिए उपयुक्त उपकरण जरूरी हैं। इसलिए समझौतों में दो तरह की गतिविधियां शामिल हैं: जमीन से संसाधन निकालना और बिजली उत्पादन के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करना।
बदरी की घोषित 275 मिलियन डॉलर की निवेश राशि जौज़जान की गैस परियोजना पर लागू होती है। कोयला अनुबंध का मूल्य और दोनों समझौतों की कुल लागत सार्वजनिक नहीं की गई। अधिकारियों ने निर्माण की समय-सारणी या बिजली उत्पादन शुरू होने की तारीख भी नहीं बताई और न ही गैस रॉयल्टी की गणना का आधार समझाया। इन जानकारियों से खर्च का पैमाना, आपूर्ति का समय और गैस से होने वाली आय की व्यवस्था स्पष्ट होगी।
2,000 मेगावाट का क्या अर्थ होगा
दोनों परियोजनाओं की संयुक्त नियोजित क्षमता लगभग 2,000 मेगावाट, यानी 2 गीगावाट है। क्षमता से आशय उस बिजली की मात्रा से है जो कोई उत्पादन केंद्र एक समय में पैदा कर सकता है। एक महीने या साल में वह कितनी बिजली देगा, यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि वह कितनी बार चलता है, ईंधन उपलब्ध है या नहीं और रखरखाव कब होता है।
बिजली आयात पर अफगानिस्तान की निर्भरता के कारण घरेलू उत्पादन योजनाओं का व्यावहारिक महत्व है। अफगान उपभोक्ताओं के नजदीक पैदा की गई बिजली से देश के पास आपूर्ति के अधिक विकल्प हो सकते हैं। घरों के लिए इसका लाभ यह है कि जरूरत के समय बिजली कनेक्शन तक पहुंचे; कारोबारों के लिए इसका अर्थ है उपकरण चलाने और कामकाज जारी रखने के लिए बिजली उपलब्ध होना।
इसलिए ट्रांसमिशन और वितरण भी व्यापक ऊर्जा चुनौती का हिस्सा हैं। ट्रांसमिशन बिजली को लंबी दूरी तक पहुंचाता है, जबकि वितरण स्थानीय नेटवर्क के जरिए उसे ग्राहकों तक ले जाता है। घरेलू बिजली उत्पादन बढ़ाने की राह में सीमित बुनियादी ढांचा और निवेश की बाधाएं अब भी मौजूद हैं, भले ही ईंधन संसाधन उपलब्ध हों।
समझौतों के पीछे निवेश का एक बड़ा प्रस्ताव
अज़ीज़ी एनर्जी ने अगस्त 2025 में तालिबान प्रशासन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें पूरे अफगानिस्तान में 10,000 मेगावाट बिजली पैदा करने, ट्रांसमिशन और वितरण के लिए 10 अरब डॉलर के निवेश का प्रस्ताव था। हाल के गैस और कोयला समझौते इसी व्यापक संदर्भ का हिस्सा हैं।
समझौता ज्ञापन पक्षों के इरादों को दर्ज करता है। नवंबर के समझौतों में विशिष्ट परियोजनाओं, स्थानों और अनुबंध की शर्तों का ब्योरा है। इनकी कुल नियोजित क्षमता 2,000 मेगावाट है, जो अगस्त के प्रस्ताव में बताई गई 10,000 मेगावाट क्षमता का पांचवां हिस्सा है। इससे कंपनी की देशव्यापी महत्वाकांक्षा के मुकाबले उत्तर की इन दो परियोजनाओं का आकार समझा जा सकता है।
निवेश के आंकड़े अलग-अलग दायरे वाले हैं: व्यापक प्रस्तावित बिजली पहल के लिए 10 अरब डॉलर और जौज़जान गैस परियोजना के लिए 275 मिलियन डॉलर। बड़े प्रस्ताव में बिजली पैदा करने वाले केंद्रों के साथ उसे पहुंचाने और वितरित करने वाले नेटवर्क भी शामिल हैं।
सौर परियोजनाओं के निर्माण से एक और पहल जुड़ी
अज़ीज़ी ग्रुप के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिरवैस अज़ीज़ी ने कहा कि कंपनी प्राकृतिक गैस के दोहन, कोयला खनन और बिजली उत्पादन समेत अफगानिस्तान की परियोजनाओं के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि गजनी प्रांत और काबुल के नग़लू तथा बरीकाब क्षेत्रों में सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर काम पहले ही शुरू हो चुका है।
इन स्थानों से कंपनी की घोषित बिजली गतिविधियां उत्तर के गैस और कोयला क्षेत्रों से आगे तक फैली हैं। सौर पैनल सूरज की रोशनी से बिजली पैदा करते हैं, जबकि जौज़जान और बगलान की योजनाएं निकाले गए ईंधन पर निर्भर हैं। दोनों तकनीकों के लिए अलग-अलग उपकरण चाहिए और उनके संचालन के तरीके भी अलग हैं। इसलिए हर परियोजना का प्रकार और स्थान इस बात के लिए अहम है कि उससे उपभोक्ताओं को बिजली कैसे मिल सकेगी।
हस्ताक्षर से पहले बरादर ने अज़ीज़ी और उनके प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर शुरू हो चुकी और तैयार की जा रही परियोजनाओं पर चर्चा की। बरादर ने कहा कि निवेश और आर्थिक परियोजनाओं की शुरुआत ऐसे महत्वपूर्ण कदम हैं जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और बेरोजगारी घटाने में मदद कर सकते हैं।
रोजगार, खनिज अपशिष्ट और पर्यावरणीय नुकसान
सरकार के रोजगार अनुमान के अनुसार, बिजली आपूर्ति के अलावा परियोजनाओं का एक और उद्देश्य है। करीब 5,000 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियों से परियोजनाओं और उन्हें सेवाएं देने वाले व्यवसायों के जरिए आय पैदा होगी। यह अनुमान परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर है।
अधिकारियों ने अज़ीज़ी ग्रुप से खनन कार्यों में आधुनिक उपकरण और तकनीक इस्तेमाल करने का आग्रह किया, ताकि खनिज अपशिष्ट घटे और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचे। खनिज अपशिष्ट में दोहन के दौरान निकाली गई या पीछे छूट गई सामग्री शामिल होती है। संसाधन किस तरह निकाले जाते हैं, इससे इस्तेमाल के लिए उपलब्ध मात्रा और खनन से होने वाला नुकसान, दोनों प्रभावित होते हैं।
गैस समझौते में दोहन को उत्पादन के सार्वजनिक हिस्से और रॉयल्टी से भी जोड़ा गया है। इस तरह बिजली, रोजगार और संसाधनों से होने वाली आय, प्रशासन के अनुमानित तीन अलग-अलग लाभ हैं। इन्हें हासिल करने के लिए खनन और बिजली उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों को समझौतों से आगे बढ़ाकर चालू सुविधाओं में बदलना होगा।
घोषणाओं का घटनाक्रम
ऊर्जा योजनाएं एक साल से अधिक समय में आगे बढ़ी हैं। शुरुआत व्यापक निवेश प्रस्ताव से हुई और फिर नामित गैस व कोयला क्षेत्रों के लिए समझौते हुए। प्रमुख पड़ाव इस प्रकार हैं:
- अगस्त 2025: अज़ीज़ी एनर्जी ने देशभर में 10,000 मेगावाट बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण के लिए 10 अरब डॉलर के निवेश का प्रस्ताव रखने वाले समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- नवंबर 2026 के हस्ताक्षर से पहले: बरादर ने मिरवैस अज़ीज़ी और उनके प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर जारी परियोजनाओं और नियोजित विकास कार्यों पर चर्चा की।
- 4 नवंबर 2026: मंत्रालय, सरकारी कंपनियों के निदेशालय और अज़ीज़ी ग्रुप ने काबुल में 30 वर्षों की अवधि वाले समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- नवंबर की घोषणा के समय: अज़ीज़ी ने कहा कि गजनी और काबुल के नग़लू तथा बरीकाब क्षेत्रों में सौर परियोजनाओं का निर्माण जारी है।
नए समझौतों से प्रशासन और अज़ीज़ी ग्रुप को उत्तर की बिजली परियोजनाएं विकसित करने के लिए विशिष्ट संसाधन क्षेत्र मिलते हैं। उपभोक्ताओं और संभावित कर्मचारियों के लिए आगे के व्यावहारिक कदम निर्माण, भर्ती और अंततः बिजली उत्पादन केंद्रों को बिजली नेटवर्क से जोड़ना हैं।
मुख्य बिंदु
- अज़ीज़ी ग्रुप ने जौज़जान में गैस दोहन, बगलान में कोयला खनन और बिजली उत्पादन के लिए 30 वर्षों के समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
- प्रत्येक परियोजना की क्षमता लगभग 1,000 मेगावाट तय की गई है, जिससे कुल नियोजित क्षमता 2,000 मेगावाट होती है।
- मंत्री हिदायतुल्लाह बदरी ने जंगल-ए-कलान गैस परियोजना में 275 मिलियन डॉलर के नियोजित निवेश की घोषणा की।
- बदरी के अनुसार, प्रशासन को निकाली गई गैस का 75% हिस्सा और 15% रॉयल्टी मिलेगी।
- अधिकारियों ने दोनों परियोजनाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 5,000 नौकरियां पैदा होने का अनुमान जताया।
- कोयला अनुबंध का मूल्य, निर्माण की समय-सारणी और बिजली उत्पादन शुरू होने की तारीखें घोषित नहीं की गईं।
- अज़ीज़ी ने गजनी और काबुल के दो क्षेत्रों में निर्माणाधीन सौर परियोजनाओं की भी जानकारी दी।






