चार गैस क्षेत्र बिजली और उर्वरक उत्पादन के लिए आपूर्ति करते हैं
अफ़ग़ान गैस एंटरप्राइज़ के प्रमुख अख़्तर मोहम्मद मंसूर के अनुसार, अफ़ग़ानिस्तान के उत्तरी जौज़जान प्रांत में चार प्राकृतिक गैस क्षेत्र प्रतिदिन लगभग 650,000 घन मीटर गैस का उत्पादन कर रहे हैं। दो प्रमुख ग्राहकों को मिलाकर लगभग 600,000 घन मीटर गैस मिलती है: सरकारी मज़ार-ए-शरीफ़ उर्वरक एवं बिजली कंपनी उर्वरक उत्पादन के लिए 400,000 घन मीटर लेती है, जबकि बयात पावर बिजली उत्पादन के लिए 200,000 घन मीटर प्राप्त करती है।
विषय-सूची
- चार गैस क्षेत्र बिजली और उर्वरक उत्पादन के लिए आपूर्ति करते हैं
- रोज़ाना गैस आपूर्ति कहां जाती है
- पर्यावरणीय जोखिम कुओं तक सीमित नहीं
- सुरक्षा उपायों में वास्तव में क्या शामिल है
- सल्फर का उपचार एक प्रमुख तकनीकी मुद्दा
- उत्पादन के आंकड़ों के साथ तारीख और दायरा जरूरी
- दशकों पुराना ढांचा और अधूरी योजनाएं
- जोखिम की श्रेणियों से अधिक अहम है निगरानी
- पानी पर दबाव, वेतन और स्थानीय अनुभव
- मुख्य बिंदु
ये आंकड़े दिखाते हैं कि गैस का दोहन औद्योगिक गतिविधियों और बिजली आपूर्ति से कितनी निकटता से जुड़ा है। उनसे घोषित उत्पादन और इन दो ग्राहकों को की गई आपूर्ति के बीच लगभग 50,000 घन मीटर का अंतर भी सामने आता है। मंसूर ने यह नहीं बताया कि इस शेष मात्रा का आवंटन कैसे होता है। आंकड़े अनुमानित हैं, इसलिए इस अंतर को बर्बादी, रिसाव या अतिरिक्त उपलब्ध आपूर्ति का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
मंसूर का कहना है कि ख़्वाजा गोगरदक, यतिमताक, जरकदुक और शकरक में गैस का दोहन नियमित रूप से जारी है। गैस को पाइपलाइनों से भेजने से पहले संसाधित किया जाता है। यतिमताक में सात कुएं सक्रिय हैं, जहां लगभग 850 इंजीनियर और कर्मचारी काम करते हैं।
गैस खनन विशेषज्ञ मैवंद आर्या आगाह करते हैं कि इन लाभों को पाने के लिए खोज, ड्रिलिंग, दोहन और परिवहन के दौरान पानी, मिट्टी, हवा और अन्य पर्यावरणीय जोखिमों पर निरंतर ध्यान देना जरूरी है। आधिकारिक परियोजना दस्तावेज़ बिजली उत्पादन वाले चरण में अपेक्षित सुरक्षा उपायों की अधिक विस्तृत जानकारी देते हैं। इन दस्तावेज़ों में जोखिमों को प्रबंधनीय बताया गया है, लेकिन निगरानी, अपशिष्ट नियंत्रण और सुधारात्मक कार्रवाई की भी मांग की गई है। उनसे यह साबित नहीं होता कि दोहन कर रहे सभी चार गैस क्षेत्र फिलहाल हर पर्यावरणीय आवश्यकता पूरी कर रहे हैं।
रोज़ाना गैस आपूर्ति कहां जाती है
उर्वरक कंपनी को बयात पावर की आपूर्ति से दोगुनी गैस मिलती है। मंसूर के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनी को मिलने वाली मात्रा दैनिक क्षेत्रीय उत्पादन का लगभग 61.5% है, जबकि बयात पावर की हिस्सेदारी लगभग 30.8% है। दोनों नामित ग्राहक मिलकर रिपोर्ट किए गए 650,000 घन मीटर का लगभग 92.3% प्राप्त करते हैं।
ये हिस्से गैस की मात्रा बताते हैं, उर्वरक और बिजली उत्पादन के सापेक्ष आर्थिक मूल्य को नहीं। उर्वरक संयंत्र को दी गई गैस, बिजली बनाने के लिए जलाई जाने वाली गैस से अलग औद्योगिक प्रक्रिया में इस्तेमाल होती है। रिपोर्ट की गई आपूर्ति से यह भी साबित नहीं होता कि कंपनियां वास्तव में कितना उर्वरक या बिजली पैदा करती हैं।
मंसूर का कहना है कि बयात को अनुबंध के तहत गैस मिलती है। इसके परियोजना आकलन में राष्ट्रीय बिजली कंपनी द अफ़ग़ानिस्तान ब्रेशना शेरकत को 20 साल के बिजली खरीद समझौते के तहत बिजली बेचने की परिकल्पना की गई थी। यह व्यवस्था जौज़जान के दोहन ढांचे को सिर्फ़ कुओं के पास के घरों से नहीं, बल्कि व्यापक बिजली प्रणाली से जोड़ती है।
पर्यावरणीय जोखिम कुओं तक सीमित नहीं
आर्या पानी और वायु प्रदूषण, शोर और प्रकाश प्रदूषण, भूमि धंसने, जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के नुकसान की आशंका जताते हैं। भूमि धंसने का अर्थ है ज़मीन का नीचे बैठना या धसकना। उनकी चेतावनी गैस उत्पादन की पूरी शृंखला के बारे में है, केवल उस क्षण के बारे में नहीं जब कुएं से गैस निकाली जाती है।
वह प्रदूषण और संसाधनों की खपत के बीच अंतर भी बताते हैं। भूजल और सतही जल दूषित हो सकते हैं, जबकि पानी का इस्तेमाल स्थानीय जल आपूर्ति पर अलग दबाव डाल सकता है। संबंधित गतिविधियों से मिट्टी प्रदूषित या क्षरित हो सकती है। ये संभावित प्रभाव हैं जिन पर ध्यान देने की जरूरत है, न कि ऐसे निष्कर्ष कि जौज़जान में ये सभी पहले ही हो चुके हैं।
विश्व बैंक के माध्यम से प्रकाशित बयात के पर्यावरणीय आकलन में प्रस्तावित बिजली परियोजना में प्रदूषण के कई ठोस रास्तों की पहचान की गई है। निर्माण के दौरान तरल अपशिष्ट में दूषित वर्षाजल, स्वच्छता संबंधी अपशिष्ट जल, रासायनिक उप-उत्पाद और मशीनरी से निकलने वाले तरल शामिल हो सकते हैं। आकलन में चेतावनी दी गई है कि इन्हें ठीक से रोकने, साफ़ करने और निपटाने की व्यवस्था न हो तो ये मिट्टी, सतही जल और भूजल को प्रदूषित कर सकते हैं।
आकलन में वाहनों का धुआं, निर्माण मशीनरी और धूल को वायु गुणवत्ता से जुड़ी चिंताएं बताया गया है। रोशनी, यातायात, वनस्पति हटाने, शोर और आकस्मिक रिसाव से आवासों और प्रजातियों पर असर पड़ सकता है। इसके निष्कर्ष बयात बिजली परियोजना से संबंधित हैं, इसलिए इन्हें चार उत्पादक गैस क्षेत्रों की पूरी हो चुकी पर्यावरणीय जांच नहीं समझना चाहिए।
सुरक्षा उपायों में वास्तव में क्या शामिल है
मंसूर का कहना है कि तकनीकी कर्मचारी दोहन की निगरानी करते हैं और उपकरणों में समस्या आने पर कार्रवाई करते हैं। उनका यह भी कहना है कि दोहन शुरू होने से पहले आकलन किए गए थे और पर्यावरणीय मानकों के अनुसार आवासीय क्षेत्रों से दूरी तय की गई थी। उनके मुताबिक, ख़्वाजा गोगरदक और यतिमताक आवासीय क्षेत्रों से लगभग 15 किलोमीटर दूर हैं, जबकि जरकदुक और शकरक लगभग 20 किलोमीटर दूर हैं।
बयात आकलन में बिजली परियोजना को यतिमताक में, शेबरघान से लगभग 20 किलोमीटर पूर्व में और यतिमताक तथा जरकुदुक गैस क्षेत्रों के पास स्थित बताया गया है। एक अंश में कहा गया है कि निकटतम आवासीय बस्तियां 15 किलोमीटर से अधिक दूर हैं। दूसरे अंश में निकटतम आवासीय और कृषि क्षेत्रों को पश्चिम और उत्तर दिशा में 12 किलोमीटर से अधिक दूर बताया गया है। इसलिए दस्तावेज़ में दूरी के अलग-अलग विवरण हैं, और इनमें से किसी को भी दोहन स्थलों के सत्यापित मौजूदा नक्शे का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
आकलन में बिजली परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों को कम या मध्यम श्रेणी में रखा गया और अपशिष्ट जल, ठोस तथा ख़तरनाक कचरे और जल संसाधनों से जुड़े संचयी प्रभावों को बहुत कम होने का अनुमान दिया गया। ये परियोजना आकलन के दौरान किए गए पूर्वानुमान थे, संचालन के दौरान प्रदूषण न होने को साबित करने वाले माप नहीं।
इसकी सिफ़ारिशें घरों को दूर रखने से कहीं व्यापक हैं। इसमें हर पहचाने गए संभावित प्रभाव के लिए, कम आंका गया हो तब भी, जोखिम घटाने के उपाय और अप्रत्याशित समस्याएं पकड़ने के लिए निगरानी की मांग की गई है।
सल्फर का उपचार एक प्रमुख तकनीकी मुद्दा
मंसूर का कहना है कि गैस से हानिकारक पदार्थ अलग करके उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले जला दिए जाते हैं। वह इन पदार्थों की पहचान नहीं बताते, न ही उपचार उपकरणों का ब्योरा देते हैं या उस प्रक्रिया में जलाने से होने वाले उत्सर्जन के माप उपलब्ध कराते हैं।
एशियाई विकास बैंक के मज़ार परियोजना के क्षेत्रीय अवलोकन में एक अहम तकनीकी जानकारी दी गई है: शेबरघान गैस क्षेत्रों की गैस को अम्लीय बताया गया है, जिसमें सल्फर का स्तर ऊंचा है और जिसे अमीन संयंत्र में उपचारित करना जरूरी है। अम्लीय गैस वह गैस है जिसमें सल्फर यौगिक होते हैं, जिन्हें सुरक्षा और ईंधन गुणवत्ता की आवश्यकताएं पूरी करने के लिए हटाना पड़ता है। अमीन संयंत्र में रासायनिक घोल का इस्तेमाल कर उपयोगी ईंधन से अनचाही गैसें अलग की जाती हैं।
एडीबी दस्तावेज़ में 2014 में अमेरिकी सरकार की ओर से वित्तपोषित एक उपचार संयंत्र का उल्लेख है, जिसकी क्षमता प्रतिदिन एक मिलियन घन मीटर थी। उस आकलन के समय यह 20% क्षमता पर काम कर रहा था और इसमें सुधार की जरूरत थी। कैलिब्रेशन का काम 2020 की दूसरी तिमाही में पूरा होने की उम्मीद थी। ये ऐतिहासिक आंकड़े इसकी मौजूदा क्षमता या उपचार प्रदर्शन को साबित नहीं करते।
दूषित पदार्थों को अलग करने से गैस आपूर्ति सुरक्षित होती है, लेकिन अलग किए गए पदार्थों को जलाने की प्रक्रिया के लिए भी पर्यावरणीय नियंत्रण जरूरी है। न तो मंसूर का विवरण और न ही परियोजना की जानकारी इस गतिविधि से होने वाले उत्सर्जन की मौजूदा मात्रा या संरचना बताती है। यह अंतर महत्वपूर्ण है: आपूर्ति से पहले उपचार करना और उपचार के दौरान उत्सर्जन नियंत्रित करना अलग-अलग जिम्मेदारियां हैं।
उत्पादन के आंकड़ों के साथ तारीख और दायरा जरूरी
एडीबी के अवलोकन में शेबरघान गैस क्षेत्रों से प्रतिदिन 500,000 घन मीटर गैस मिलने की क्षमता बताई गई थी। मंसूर के बताए 650,000 घन मीटर उत्पादन से यह 150,000 अधिक है, यानी पहले के आंकड़े की तुलना में 30% का अंतर। यह पहले के संभावित उत्पादन के अनुमान और बाद में बताए गए उत्पादन की तुलना है, उत्पादन वृद्धि का सत्यापित माप नहीं।
उसी एडीबी दस्तावेज़ में अफ़ग़ान गैस एंटरप्राइज़ की उत्पादन क्षमता प्रतिदिन 1.6 मिलियन घन मीटर से अधिक बताई गई थी। क्षमता वह मात्रा है जितनी कोई इकाई बताई गई परिस्थितियों में उत्पादन कर सकती है; वास्तविक उत्पादन वह है जो वह वास्तव में करती है। उद्यम के इस आंकड़े को जौज़जान के चार नामित क्षेत्रों के दैनिक उत्पादन के बराबर नहीं माना जा सकता।
एडीबी ने अफ़ग़ानिस्तान में पहचाने गए 75 अरब घन मीटर गैस भंडार और उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान में अनदेखे, तकनीकी रूप से निकाले जा सकने वाले संसाधनों के 444 अरब घन मीटर के आकलन का भी उल्लेख किया। अनदेखे संसाधन उस गैस के अनुमान हैं जिसे उपलब्ध तकनीक से खोजा और निकाला जा सकता है; वे बिक्री के लिए तैयार प्रमाणित आपूर्ति नहीं हैं।
बयात परियोजना के पहले के विवरण में उत्तरी क्षेत्र के अनुमानित गैस संसाधन 15.7 ट्रिलियन घन फुट, यानी लगभग 445 अरब घन मीटर, बताए गए थे। यह एडीबी के संसाधन अनुमान के पैमाने के करीब है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि दस्तावेज़ों में ठीक वही भौगोलिक सीमाएं या संसाधन की परिभाषाएं इस्तेमाल की गई थीं।
दशकों पुराना ढांचा और अधूरी योजनाएं
जौज़जान की मौजूदा आपूर्ति दशकों में विकसित हुए बुनियादी ढांचे पर टिकी है। एडीबी का अवलोकन ख़्वाजा गोगरदक में प्राकृतिक गैस का दोहन 1967 में शुरू होने की बात कहता है और 1974 में बनी 89 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का वर्णन करता है, जो उत्तरी उर्वरक बिजली संयंत्र और अन्य ग्राहकों को आपूर्ति करती थी।
दस्तावेज़ के अनुसार, प्रस्तावित मज़ार बिजली परियोजना के लिए जरूरी गैस दबाव इस पाइपलाइन से नहीं मिल सकता था। शेबरघान से मज़ार तक 94.5 किलोमीटर लंबी नई पाइपलाइन निर्माणाधीन थी; 45 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका था और 2020 के अंत तक इसे पूरा करने की उम्मीद थी। यह पहले की योजना में दी गई समयसीमा थी, पाइपलाइन पूरी होने की पुष्टि नहीं।
मुख्य पड़ाव दिखाते हैं कि दोहन, नियमन और बिजली में निवेश किस तरह साथ-साथ आगे बढ़े:
- 1967: ख़्वाजा गोगरदक में प्राकृतिक गैस का दोहन शुरू हुआ।
- 1974: मौजूदा 89 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बनाई गई।
- 2009: अफ़ग़ानिस्तान ने अपना पहला हाइड्रोकार्बन कानून अपनाया।
- 2013: एडीबी ने शेबरघान के कुओं, जिनमें यतिमताक भी शामिल था, के पुनर्वास और गैस विकास की मास्टर योजना पर काम में सहायता की।
- अक्टूबर 2016: बयात एनर्जी ने अफ़ग़ान सरकार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- अप्रैल 2018: बयात को पहले परियोजना चरण की मंजूरी मिली और 40 मेगावाट बिजली के लिए बिजली खरीद समझौते पर हस्ताक्षर हुए।
- सितंबर 2018: हाइड्रोकार्बन कानून में संशोधन किया गया।
- मार्च 2019: संशोधित कानून के तहत स्वतंत्र तेल और गैस प्राधिकरण ने आधिकारिक रूप से काम शुरू किया।
बयात की मूल विकास योजना में तीन चरण, अनुमानित 250 मिलियन डॉलर का निवेश और अंततः 200 मेगावाट से अधिक क्षमता का प्रस्ताव था। पहला चरण 2019 में शुरू होने की उम्मीद थी। प्रस्तावित टरबाइन क्षमता 41 मेगावाट और अनुबंधित बिजली खरीद 40 मेगावाट, दो अलग-अलग माप थे। योजना से यह साबित नहीं होता कि तीनों चरण बनाए गए या प्रस्तावित पूरी क्षमता आज चालू है।
जोखिम की श्रेणियों से अधिक अहम है निगरानी
बयात आकलन में कम और मध्यम जोखिम की श्रेणियों के पीछे की विशिष्ट जांचों का ब्योरा दिया गया है। इसमें निर्माण के दौरान हर तिमाही और संचालन के दौरान हर साल पर्यावरण, सामाजिक पहलुओं, स्वास्थ्य और सुरक्षा का ऑडिट प्रस्तावित है। निर्माण के दौरान अपशिष्ट जल की साप्ताहिक जांच और संचालन के दौरान मासिक जांच की योजना थी; जरूरत पड़ने पर मिट्टी और पानी के परीक्षण भी किए जाने थे।
संचालन के दौरान वायु उत्सर्जन के लिए आकलन में संयंत्र के आसपास प्रदूषकों के फैलाव का मॉडल बनाने की मांग की गई है। इसमें अपेक्षा की गई है कि चिमनी से निकलने वाला उत्सर्जन नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और कणीय पदार्थ के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्त निगम के मानकों के अनुरूप हो। ये प्रदूषक वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए उपकरणों के डिजाइन संबंधी अपेक्षाओं के साथ वास्तविक संचालन के माप भी जरूरी हैं।
दस्तावेज़ में कर्मचारियों के संपर्क में आने वाले जोखिमों का भी उल्लेख है। इसमें निर्माण के दौरान 10 मीटर की दूरी पर शोर 83 से 87 डेसीबल होने का अनुमान लगाया गया और पास में काम करने वाले निर्माण श्रमिकों के लिए कान की सुरक्षा की मांग की गई। अलग से, इसमें आवासीय क्षेत्रों के लिए दिन में 55 और रात में 45 डेसीबल के शोर दिशानिर्देश दिए गए हैं, जिनका मापन एक घंटे के औसत के रूप में किया जाता है। मशीनरी के पास निर्माण के शोर का अनुमान किसी गांव में मापे गए शोर के बराबर नहीं है।
आकलन के विवरण में शिकायत निवारण व्यवस्था का भी उल्लेख है। इसमें 15 किलोमीटर के दायरे के गांवों के प्रतिनिधियों वाली स्थानीय समितियां शामिल थीं और अनसुलझी शिकायतें प्रांतीय समिति को भेजी जानी थीं। इन विवरणों से मौजूदा ऑडिट नतीजों, उत्सर्जन के माप या शिकायतों के निपटारे के परिणामों की पुष्टि नहीं होती।
पानी पर दबाव, वेतन और स्थानीय अनुभव
पर्यावरणीय आकलन में परियोजना को ऐसे क्षेत्र में रखा गया है जहां पानी पर व्यापक दबाव है। इसमें 1960 के बाद से अफ़ग़ानिस्तान के औसत वार्षिक तापमान में 0.6 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि का उल्लेख है और 2060 तक 1.4 से 4 डिग्री की अतिरिक्त वृद्धि का अनुमान दिया गया है। उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान के लिए इसमें लंबे समय में औसत वर्षा घटने के साथ सूखे और बाढ़ की घटनाएं अधिक होने का वर्णन है।
ये अनुमान इस बात का प्रमाण नहीं हैं कि गैस दोहन से स्थानीय जल संकट पैदा हुआ है। वे बताते हैं कि आर्या की पानी की खपत को लेकर चिंताओं पर, प्रदूषण के साथ-साथ, ध्यान देना क्यों जरूरी है। आकलन में परियोजना क्षेत्र की मिट्टी में बजरी, रेत, गाद और चिकनी मिट्टी की एक के बाद एक परतों का भी वर्णन है। इससे स्पष्ट होता है कि घरों से दूरी के आधार पर अनुमान लगाने के बजाय स्थल-विशिष्ट मिट्टी और पानी की जांच जरूरी है।
कर्मचारी उद्योग का एक दूसरा पहलू बताते हैं: आमदनी और रोज़गार। 45 वर्षीय मोहम्मद, जो एक साल से अधिक समय से गैस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, कहते हैं कि कर्मचारी हर पाली से पहले उपकरणों की जांच करते हैं और मशीनरी, वाहन तथा कुओं के लगातार चालू रहने के दौरान सतर्क रहते हैं। वह कुओं को परिवारों की आजीविका के लिए बेहद अहम बताते हैं:
हमारे लिए हर कुआं सिर्फ़ कुआं नहीं, एक परिवार की उम्मीद है।
50 वर्षीय अज़ीज़ कहते हैं कि ड्रिलिंग, निरीक्षण, दोहन, परिवहन और प्रसंस्करण में कई कर्मचारी, तकनीशियन और इंजीनियर शामिल होते हैं। वह अधिक निवेश और स्थानीय निवासियों के लिए ज़्यादा नौकरियों की मांग करते हैं। यतिमताक में 850 कर्मचारियों और इंजीनियरों की बताई गई संख्या को बयात आकलन में निर्माण के दौरान लगभग 70 नौकरियों के अनुमान के साथ नहीं जोड़ना चाहिए, क्योंकि ये आंकड़े अलग गतिविधियों और समयावधियों से जुड़े हैं।
पास के निवासी क़ुरबान मुराद का कहना है कि गैस से रोज़मर्रा की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिली है और उन्होंने दोहन से जुड़ी कोई खास स्वास्थ्य समस्या नहीं देखी। यतिमताक के निवासी रोज़ी भी घरेलू जरूरतों और आजीविका के लिए इसके लाभ बताते हैं। उनके अनुभव प्रासंगिक हैं, लेकिन व्यक्तिगत अवलोकन चिकित्सकीय निगरानी या पर्यावरणीय जांच की जगह नहीं ले सकते।
इसलिए मौजूदा स्थिति में एक ओर दर्ज औद्योगिक आपूर्ति है और दूसरी ओर ऐसे सुरक्षा उपाय हैं जिनके मौजूदा नतीजे स्थापित नहीं हैं। मंसूर नियमित उत्पादन और तकनीकी निगरानी की बात कहते हैं; आर्या ऐसे जोखिम बताते हैं जिन पर लगातार ध्यान देना जरूरी है; बयात आकलन में निगरानी और सुधारात्मक उपायों का ब्योरा है। इन विवरणों में मौजूदा पर्यावरणीय नतीजों को सार्वजनिक करने के लिए किसी नई सुनवाई, निरीक्षण की समयसीमा या जारी करने की तारीख की घोषणा नहीं की गई है।
मुख्य बिंदु
- जौज़जान के चार गैस क्षेत्र कथित तौर पर प्रतिदिन लगभग 650,000 घन मीटर गैस का उत्पादन करते हैं।
- मज़ार की उर्वरक कंपनी को प्रतिदिन लगभग 400,000 घन मीटर और बयात पावर को लगभग 200,000 घन मीटर गैस मिलती है।
- अफ़ग़ान गैस एंटरप्राइज़ के अनुसार, यतिमताक में सात सक्रिय कुएं और लगभग 850 इंजीनियर तथा कर्मचारी हैं।
- संभावित जोखिमों में पानी और मिट्टी का प्रदूषण, वायु उत्सर्जन, शोर, भूमि धंसना और जैव विविधता का नुकसान शामिल हैं।
- बयात आकलन में परियोजना के प्रभाव कम या मध्यम होने का अनुमान है, लेकिन जोखिम घटाने के उपाय, निगरानी और ऑडिट जरूरी बताए गए हैं।
- एडीबी के पहले के दस्तावेज़ सल्फर उपचार और पाइपलाइन क्षमता को अहम तकनीकी बाधाएं बताते हैं।
- कर्मचारी और निवासी आर्थिक लाभों का जिक्र करते हैं, जबकि मौजूदा पर्यावरणीय माप और ऑडिट के निष्कर्ष स्थापित नहीं हैं।






