55 लाख डॉलर की सड़क चीनी सीमा तक पहुंची
अफगानिस्तान ने उत्तर-पूर्वी बदख्शां प्रांत से होते हुए चीन की सीमा तक 121 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क का उद्घाटन किया है। इस मार्ग पर 36.5 करोड़ अफगानी खर्च हुए, जिसे लगभग 55 लाख डॉलर बताया गया है। इसका उद्देश्य अफगान व्यापारियों को पड़ोसी देशों से होकर गुजरने वाले पारगमन का विकल्प देना है। यह सड़क बोरोघिल सीमा क्षेत्र, जिसे ब्रोघिल भी लिखा जाता है, से दूरदराज के वाखान जिले में चीनी सीमा की ओर जाती है।
विषय-सूची
- 55 लाख डॉलर की सड़क चीनी सीमा तक पहुंची
- यह सड़क क्या संभव बनाती है, और क्या नहीं
- परियोजना का विकास कैसे हुआ
- व्यापार के आंकड़े बड़ा असंतुलन दिखाते हैं
- काबुल पाकिस्तान के विकल्प क्यों चाहता है
- चीन की भागीदारी से दर्रा खुलने की गारंटी नहीं
- पहाड़ी परिस्थितियों में नियमित आवाजाही असली कसौटी
- वाखान दूसरे मार्गों का पूरक होगा, उनका विकल्प नहीं
- आर्थिक लाभ का आकलन करने से पहले क्या जरूरी है
- मुख्य बिंदु
सीमा तक पहुंचने और उसे वाणिज्यिक यातायात के लिए खोलने के बीच का अंतर इस परियोजना के लिए अहम है। उद्घाटन संबंधी विवरणों में अफगानिस्तान में बनी सड़क पूरी होने की बात है, न कि किसी चालू अंतरराष्ट्रीय मालवाहक सीमा चौकी की। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के अप्रैल 2025 के एक अध्ययन के अनुसार, वाखजीर दर्रे पर चीन की कोई सीमा शुल्क सुविधा नहीं है। अध्ययन में यह भी कहा गया है कि गलियारे के विकास के आर्थिक औचित्य को लेकर बीजिंग सशंकित है।
उद्घाटन घोषणाओं के अनुसार, निर्माण दो साल पहले शुरू हुआ था। समारोह की तारीख को लेकर खबरों में मतभेद है: दो खबरें इसे रविवार को हुआ बताती हैं, जबकि एक अन्य में 4 अक्टूबर की तारीख दी गई है, लेकिन वर्ष नहीं बताया गया। सड़क की लंबाई भी अलग-अलग बताई गई है: कहीं 121 किलोमीटर, तो कहीं 121 किलोमीटर से अधिक। इन दोनों विसंगतियों से मुख्य उपलब्धि नहीं बदलती, यानी सीमा तक सड़क पहुंच गई है। हालांकि, इन विवरणों से उद्घाटन की एक निश्चित तारीख स्थापित नहीं होती।
अफगानिस्तान के ग्रामीण पुनर्वास और विकास मंत्री अब्दुल लतीफ मंसूर ने समारोह में कहा कि इस परियोजना का रणनीतिक, राजनीतिक और आर्थिक महत्व है। उन्होंने देश की इंजीनियरिंग क्षमता का भी उल्लेख किया:
"अफगानिस्तान के इस्लामी अमीरात ने ऐसी सार्वजनिक परियोजनाओं को प्राथमिकता दी है, खासकर उन प्रांतों में जिन्हें इनकी सबसे अधिक जरूरत है। कोई विदेशी इंजीनियर या सलाहकार नहीं है; सभी इंजीनियर अफगान हैं," मंसूर ने कहा।
बदख्शां के गवर्नर रहमतुल्लाह नजीब ने इसे 45 साल के युद्ध के बाद एक दूरदराज के क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया। हालांकि, इसका वाणिज्यिक महत्व अफगानिस्तान के निर्माण स्थल से बाहर के फैसलों और बुनियादी ढांचे पर निर्भर करेगा।
यह सड़क क्या संभव बनाती है, और क्या नहीं
वाखान कॉरिडोर अफगानिस्तान का वह भूभाग है जो उत्तर में ताजिकिस्तान और दक्षिण में पाकिस्तान के बीच स्थित है और चीन के शिनजियांग क्षेत्र तक पहुंचता है। यहां सड़क बनने से सीमा तक भौतिक पहुंच संभव होती है। व्यापार गलियारा खोलने के लिए दोनों देशों को यातायात की अनुमति देनी होगी, सामान की जांच और प्रक्रिया करनी होगी तथा संपर्क परिवहन सेवाएं उपलब्ध करानी होंगी।
अयजाज़ वानी का 21 अप्रैल 2025 को प्रकाशित ओआरएफ इश्यू ब्रीफ, संख्या 796, वाखजीर दर्रे को इस गलियारे तक चीन का एकमात्र पहुंच बिंदु बताता है और शिनजियांग के ताशकुर्गन को निकटतम बड़ा शहर मानता है। अध्ययन के अनुसार, बीजिंग पहाड़ी भूभाग के कारण इस विकास को आर्थिक रूप से अव्यवहार्य मानता है और उसे आर्थिक अवसरों से अधिक सुरक्षा जोखिम दिखाई देते हैं।
यह किसी शोध संस्थान का आकलन है, उद्घाटन के साथ जारी चीन सरकार की कोई नई घोषणा नहीं। फिर भी, इससे काबुल की महत्वाकांक्षाओं और सीमा संचालन के लिए पुष्ट समझौते के बीच का अंतर सामने आता है। उद्घाटन संबंधी खबरों में चीनी सीमा शुल्क संचालन, नियमित माल ढुलाई या चीन की ओर संपर्क सड़क सेवा शुरू होने की कोई तारीख तय नहीं की गई है।
इसलिए इस सड़क को अफगानिस्तान की बुनियादी ढांचा संबंधी उपलब्धि के रूप में देखना चाहिए। इसे चालू अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग बताना उपलब्ध जानकारी से आगे जाना होगा।
परियोजना का विकास कैसे हुआ
सीधा मार्ग बनाने की कोशिशें कई सरकारों, वित्तपोषण प्रस्तावों और निर्माण चरणों के दौरान आगे बढ़ी हैं। पुरानी खबरों में लगभग 49 या 50 किलोमीटर के हिस्सों का जिक्र है, जबकि उद्घाटन संबंधी विवरणों में 121 किलोमीटर लंबी सड़क बताई गई है। संभव है कि ये आंकड़े अलग-अलग हिस्सों या परियोजना चरणों से जुड़े हों, लेकिन इन विवरणों में उनका विस्तृत मिलान प्रकाशित नहीं किया गया है।
- 1963: ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, अफगानिस्तान और चीन ने औपचारिक सीमा समझौता किया, लेकिन कोई आधिकारिक सीमा चौकी स्थापित नहीं हुई।
- 2017: चीन ने उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान में बुनियादी ढांचे के लिए लगभग 9 करोड़ डॉलर देने का वादा किया। इसमें फाइबर ऑप्टिक संपर्क और वाखान सड़क का एक हिस्सा शामिल था। एक विवरण में इस वादे को 9 करोड़ डॉलर से अधिक बताया गया है।
- 2021: वाखान के रास्ते इश्काशिम जिले को शिनजियांग से जोड़ने वाली सड़क की योजनाओं की घोषणा हुई। ओआरएफ अध्ययन के अनुसार, सुरक्षा चिंताओं के कारण 50 किलोमीटर लंबी लिटिल पामीर सड़क पर काम बाद में रोक दिया गया।
- सितंबर 2023: तालिबान अधिकारियों ने 50 किलोमीटर के हिस्से के पुनर्निर्माण की घोषणा की। इसकी लागत 51.6 लाख डॉलर बताई गई और वित्तपोषण ग्रामीण पुनर्वास एवं विकास मंत्रालय ने किया।
- जनवरी 2024: अधिकारियों ने सड़क को लगभग पूरा बताया। आर्थिक मामलों के उप प्रधानमंत्री मुल्ला बरादर ने 2 जनवरी को कहा कि निर्माण जारी है।
- अगस्त और दिसंबर 2024: खबरों में बताई गई यात्राओं और कूटनीतिक बैठकों से गलियारे पर फिर ध्यान गया। इनमें गृह मंत्री सिराजुद्दीन हक्कानी और चीनी राजदूत झाओ शिंग के बीच बातचीत शामिल थी।
- नवीनतम उद्घाटन: अधिकारियों ने 36.5 करोड़ अफगानी की लागत से बोरोघिल से चीनी सीमा तक कच्चे मार्ग के पूरा होने की घोषणा की।
प्रगति की एक पुरानी खबर में पांच महीने का काम, 49 किलोमीटर का हिस्सा और उस हिस्से का लगभग 40 प्रतिशत काम पूरा होने का जिक्र था। ये उस समय की प्रगति के विवरण हैं, इस बात का प्रमाण नहीं कि बाद में बताई गई 121 किलोमीटर की परियोजना पहले ही पूरी हो गई थी। इसी तरह, पुराने डॉलर-आधारित अनुमानों को उद्घाटन में बताई गई लागत के साथ जोड़ने से पहले यह जानना जरूरी है कि क्या उनके बजट में दोहराव है।
व्यापार के आंकड़े बड़ा असंतुलन दिखाते हैं
वाखान के पक्ष में सबसे मजबूत आर्थिक तर्क उस बाजार तक पहुंच है जिसके साथ अफगानिस्तान पहले से व्यापार करता है। ओआरएफ ब्रीफ के अनुसार, 2023 में द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब डॉलर का था, जो 2022 से 125 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि दर के आधार पर 2022 का कुल व्यापार लगभग 57.8 करोड़ डॉलर बैठता है। यह आंकड़ा 1.3 अरब डॉलर को 2.25 से विभाजित करके निकाला गया है।
2023 में चीन को अफगानिस्तान का निर्यात सिर्फ 6.4 करोड़ डॉलर था, जो द्विपक्षीय व्यापार का लगभग 4.9 प्रतिशत है। ब्रीफ के अनुसार, इन निर्यातों में लगभग 90 प्रतिशत छिलके वाले चीड़ के मेवे थे। निर्यात के आंकड़े पर यह हिस्सा लागू करने से इस एक उत्पाद श्रेणी का मूल्य लगभग 5.76 करोड़ डॉलर बैठता है।
ये आंकड़े बताते हैं कि केवल नया मार्ग बनने से व्यापार संतुलित नहीं हो सकता। अफगानिस्तान को सिर्फ चीनी आयात लाना आसान बनाने के बजाय, वहां बिकने वाले सामान की मात्रा और विविधता बढ़ानी होगी। कृषि उत्पाद, रत्न, खनिज और हस्तशिल्प वाखान के आर्थिक पक्ष में पहचाने गए संभावित निर्यातों में शामिल हैं, लेकिन ऐसा कोई अनुमान उपलब्ध नहीं है जो बताए कि सड़क से अतिरिक्त व्यापार कितना बढ़ेगा।
ओआरएफ अध्ययन के अनुसार, दिसंबर 2024 से बीजिंग ने अफगान उत्पादों को 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच दी है। आयात शुल्क हटने से बाजार तक पहुंच बेहतर हो सकती है, लेकिन इससे परिवहन लागत, उत्पाद संबंधी जरूरतें या सीमा प्रक्रियाएं खत्म नहीं होतीं। वाखान इस पूरी कड़ी के सिर्फ एक हिस्से को संबोधित करेगा।
काबुल पाकिस्तान के विकल्प क्यों चाहता है
अफगानिस्तान के लिए यह परियोजना अपनी सीमाओं से बाहर होने वाली बाधाओं पर निर्भरता घटाने से भी जुड़ी है। पाकिस्तान के साथ व्यापार के मुख्य रास्ते तोरखम और चमन हैं। पाकिस्तान के बंदरगाह समुद्री व्यापार तक पहुंच देते हैं। बार-बार होने वाली बंदियों से अफगान व्यापारियों को नुकसान हुआ है और ईरान, मध्य एशिया तथा चीन से होकर जाने वाले मार्गों के पक्ष में तर्क मजबूत हुआ है।
ओआरएफ ब्रीफ में जनवरी 2024 में तोरखम सीमा चौकी दस दिन बंद रहने का उल्लेख है और दूसरी सीमा चौकियों पर लंबे प्रतिबंधों का भी जिक्र है। इसमें इन बाधाओं को उग्रवाद, सीमा सुरक्षा और पाकिस्तान में अफगान नागरिकों की मौजूदगी को लेकर काबुल और इस्लामाबाद के बीच बिगड़ते संबंधों से जोड़ा गया है।
पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान उसकी सुरक्षा के लिए खतरों को बने रहने दे रहा है। काबुल इन आरोपों को खारिज करता है। ब्रीफ के अनुसार, तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद पहले 21 महीनों में पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों में 73 प्रतिशत वृद्धि हुई। इसमें खैबर पख्तूनख्वा में 2021 के 572 और 2024 के 2,173 मामले भी दिए गए हैं, जो लगभग 280 प्रतिशत की वृद्धि है।
इसी अध्ययन के अनुसार, पाकिस्तान करीब 8 लाख अफगानों को वापस भेज चुका था और उसने जनवरी 2025 में 30 लाख अन्य को निर्वासित करने की योजना को मंजूरी दी। इन घटनाक्रमों से काबुल के विकल्प तलाशने की राजनीतिक तात्कालिकता समझ आती है, हालांकि वे यह साबित नहीं करते कि वाखान में स्थापित सीमा चौकियों की जगह लेने लायक माल ढुलाई हो सकती है।
चीन की भागीदारी से दर्रा खुलने की गारंटी नहीं
चीन ने तालिबान प्रशासन से व्यापक संपर्क बनाए रखा है। ओआरएफ ब्रीफ के अनुसार, अगस्त 2021 से फरवरी 2024 के बीच तालिबान ने 80 देशों के साथ 1,382 कूटनीतिक बैठकें कीं। इनमें चीन की 215 बैठकें थीं, जो कुल का लगभग 15.6 प्रतिशत है।
इस संबंध में निवेश और सुरक्षा, दोनों शामिल हैं। ब्रीफ में 2023 के एक अनुबंध का उल्लेख है, जिसके तहत शिनजियांग सेंट्रल एशिया पेट्रोलियम एंड गैस कंपनी ने तीन साल में 55 करोड़ डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई। इसमें तालिबान अधिकारियों के उस बयान का अलग से जिक्र है, जिसमें चीनी पक्ष की 10 अरब डॉलर के लिथियम निवेश में रुचि बताई गई थी। यह अफगान अधिकारियों के हवाले से बताई गई रुचि है, न कि पूरा हो चुका निवेश या वाखान के लिए वित्तपोषण की प्रतिबद्धता।
चीन की चिंताओं में ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत शामिल हैं। पाकिस्तान में चीनी कर्मचारियों और परियोजनाओं पर खतरों को लेकर भी उसे चिंता है। ओआरएफ का विश्लेषण कहता है कि बीजिंग वाखान को शिनजियांग तक व्यस्त वाणिज्यिक सीमा चौकी बनाने के बजाय सुरक्षा अवरोधक के रूप में देखना पसंद कर सकता है।
खबरों में 2022 की शुरुआत में वाखान के अफगान हिस्से में कथित पाकिस्तानी और चीनी गतिविधियों तथा उसके बाद तालिबान की प्रतिक्रिया का भी जिक्र है। इन खबरों में कथित सीमा गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि या साझा आधिकारिक व्याख्या नहीं दी गई है। इन्हें क्षेत्रीय बदलाव का प्रमाण नहीं मानना चाहिए।
व्यावहारिक स्तर पर तनाव साफ है: काबुल यातायात और निवेश चाहता है, जबकि शोध आकलन के अनुसार बीजिंग सुरक्षा और व्यावसायिक लाभ, दोनों को लेकर सतर्क है। लगातार कूटनीतिक संपर्क से अपने आप यह अंतर दूर नहीं होता।
पहाड़ी परिस्थितियों में नियमित आवाजाही असली कसौटी
ओआरएफ ब्रीफ के अनुसार, वाखान लगभग 350 किलोमीटर लंबा और 20 से 60 किलोमीटर चौड़ा है। यहां 110 गांव और करीब 12,000 लोग रहते हैं। सीमा क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 5,000 मीटर की ऊंचाई पर है। एक अन्य विवरण में वाखजीर दर्रे की ऊंचाई करीब 4,900 मीटर बताई गई है।
भौगोलिक आंकड़ों में अन्य जगहों पर भी अंतर है। मूल आर्थिक अध्ययन अफगानिस्तान और चीन के बीच सीमा की लंबाई 96 किलोमीटर बताता है, जबकि ओआरएफ इसे लगभग 75 किलोमीटर बताता है। चौड़ाई के अनुमान भी अलग हैं; मूल अध्ययन में यह 16 से 66 किलोमीटर दी गई है। माप का कोई साझा तरीका उपलब्ध न होने पर इन्हें अलग-अलग विवरण के रूप में पेश करना चाहिए, न कि एक-दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल होने वाले सटीक आंकड़ों के रूप में।
परिवहन की बाधाएं अधिक स्पष्ट हैं। भारी बर्फबारी, कड़ाके की ठंड, हिमस्खलन और भूस्खलन यात्रा रोक सकते हैं और निर्माण का मौसम छोटा कर सकते हैं। ऊंचे पहाड़ी सीमावर्ती इलाके तक कच्ची सड़क पहुंचने का अर्थ यह नहीं कि वहां पूरे साल भरोसेमंद आवाजाही संभव है।
अफगानिस्तान को पुल, संचार व्यवस्था, माल ढुलाई सुविधाएं, सीमा शुल्क क्षमता और रखरखाव के इंतजाम भी चाहिए होंगे। बैंकिंग सेवाएं और माल बीमा महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि व्यापारियों को आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान करने और नुकसान या देरी का जोखिम संभालने में सक्षम होना होगा। उद्घाटन के साथ सत्यापित माल ढुलाई क्षमता, मौसम के अनुसार संचालन कार्यक्रम या रखरखाव बजट की जानकारी नहीं दी गई।
वाखान दूसरे मार्गों का पूरक होगा, उनका विकल्प नहीं
प्रस्तावित मार्ग का उद्देश्य उन कई क्षेत्रीय परियोजनाओं से अलग है जिन्हें अक्सर इसके साथ जोड़ा जाता है। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, यानी सीपेक, चीन के हितों को पाकिस्तान के परिवहन नेटवर्क और ग्वादर बंदरगाह से जोड़ता है। वाखान अफगानिस्तान को चीन से सीधा भूमि संपर्क देगा, लेकिन समुद्र तक सीधी पहुंच नहीं।
इस सड़क पर एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान 2025 में सीपेक को अफगानिस्तान तक बढ़ाने पर सहमत हुए। इससे वाखान के रास्ते सीधे पहुंच और पाकिस्तान के रास्ते पहुंच के बीच संभावित समानांतरता बनती है। इससे यह साबित नहीं होता कि एक मार्ग के कारण दूसरा अनावश्यक हो जाएगा। व्यापारी किस मार्ग को चुनेंगे, यह माल ढुलाई क्षमता, गंतव्य, विश्वसनीयता और कीमत पर निर्भर करेगा।
2018 में शुरू किया गया लापिस लाजुली मार्ग पश्चिम की ओर तुर्कमेनिस्तान, अजरबैजान, जॉर्जिया और तुर्किये से होते हुए यूरोपीय बाजारों तक जाता है। ईरान का चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान से होकर गुजरे बिना समुद्री व्यापार का विकल्प देता है। ये मार्ग ऐसी जरूरतें पूरी करते हैं जिन्हें शिनजियांग तक जाने वाली सड़क अकेले पूरा नहीं कर सकती।
तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत परियोजना, जिसे तापी के नाम से जाना जाता है, इससे अलग है: यह गैस पाइपलाइन की योजना है, सामान्य माल ढुलाई गलियारा नहीं। क्षेत्रीय सहयोग समझने के लिए इसकी तुलना वाखान से करना उपयोगी है, लेकिन प्रतिस्पर्धी माल ढुलाई क्षमता मापने के लिए नहीं।
चीन का अफगानिस्तान से एक और संपर्क पहले से है। ओआरएफ ब्रीफ के अनुसार, सितंबर 2022 में काशगर से कजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान के रास्ते हेरातन तक रेल सेवा शुरू हुई। इसलिए वाखान बिल्कुल नया द्विपक्षीय परिवहन संपर्क बनाने के बजाय पहले से मौजूद अप्रत्यक्ष मार्गों में एक सीधा विकल्प जोड़ेगा।
आर्थिक लाभ का आकलन करने से पहले क्या जरूरी है
एशियाई विकास बैंक की दिसंबर 2022 में प्रकाशित सीएआरईसी प्रदर्शन रिपोर्ट गलियारे के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए उपयोगी रूपरेखा देती है। यह 11 सदस्य देशों, जिनमें अफगानिस्तान और चीन शामिल हैं, के छह गलियारों में 2010 से 2020 तक व्यापार प्रक्रियाओं और परिवहन दक्षता की पड़ताल करती है।
रिपोर्ट कॉरिडोर परफॉर्मेंस मेजरमेंट एंड मॉनिटरिंग पद्धति का उपयोग करती है, जो यह आंकती है कि परिवहन मार्गों और सीमाओं से सामान वास्तव में कैसे गुजरता है। इसमें संरचनात्मक बाधाओं और कोविड-19 के कारण आए व्यवधानों की पड़ताल की गई है। यह वाखान की व्यवहार्यता का अध्ययन नहीं है और वहां बचत या व्यापार वृद्धि के किसी खास अनुमान की पुष्टि नहीं करती।
सड़क से जुड़े आर्थिक दावों के संदर्भ में यह अंतर महत्वपूर्ण है। भौगोलिक रूप से छोटा मार्ग भी धीमा या महंगा हो सकता है, अगर पहाड़ी रास्ते बंद हों, माल को बीच में दूसरे वाहनों में चढ़ाना पड़े या सीमा पर देरी हो। विश्वसनीय आकलन के लिए यात्रा समय, माल ढुलाई शुल्क, संचालन के मौसम और सीमा शुल्क के प्रदर्शन के आंकड़े चाहिए होंगे। वाखान में नियमित व्यापार के लिए इनमें से कोई भी जानकारी स्थापित नहीं है।
निर्माण और भविष्य की परिवहन सेवाएं बदख्शां में रोजगार पैदा कर सकती हैं। वाखान में राष्ट्रीय उद्यान का एक हिस्सा भी है और यहां पहले से घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते हैं। बेहतर पहुंच से स्थानीय व्यापार और पर्यटन को मदद मिल सकती है, लेकिन रोजगार या पर्यटकों की संख्या का कोई पूर्वानुमान पुष्ट नहीं हुआ है।
अगले सार्थक पड़ाव हैं: सीमा संचालन पर सहमति, चीनी सीमा शुल्क सुविधाएं, इस्तेमाल योग्य संपर्क बुनियादी ढांचा और वास्तविक वाणिज्यिक यातायात। इन कदमों के लिए कोई पुष्ट समयसीमा नहीं दी गई है। तब तक सड़क का सबसे स्पष्ट महत्व भौतिक पहुंच में सुधार और बातचीत के लिए नया विकल्प है, न कि मापा गया निर्यात बढ़ना या पारगमन से आय होना।
मुख्य बिंदु
- अफगानिस्तान ने वाखान में बोरोघिल से चीनी सीमा तक लगभग 121 किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क का उद्घाटन किया है।
- निर्माण की बताई गई लागत 36.5 करोड़ अफगानी, यानी लगभग 55 लाख डॉलर थी। काम उद्घाटन से दो साल पहले शुरू हुआ था।
- उद्घाटन की तारीख को लेकर खबरों में अंतर है: कहीं रविवार बताया गया है, तो कहीं वर्ष बताए बिना 4 अक्टूबर।
- अप्रैल 2025 के ओआरएफ ब्रीफ के अनुसार, वाखजीर दर्रे पर चीनी सीमा शुल्क सुविधाएं नहीं हैं। इसमें बीजिंग को मार्ग की आर्थिक और सुरक्षा लागत को लेकर सतर्क बताया गया है।
- 2023 में द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब डॉलर तक पहुंचा, लेकिन अफगान निर्यात केवल 6.4 करोड़ डॉलर था, यानी लगभग 4.9 प्रतिशत।
- पहाड़ी मौसम, सीमा प्रक्रियाएं, वित्तपोषण और संपर्क बुनियादी ढांचा तय करेंगे कि यह सड़क भरोसेमंद माल ढुलाई गलियारा बन पाएगी या नहीं।
- नियमित वाणिज्यिक सीमा संचालन शुरू होने की कोई पुष्ट तारीख तय नहीं हुई है।






