107 मिनट में ग्रिड बहाल, लेकिन बिजली की कमी बनी रही
मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:43 बजे ग्रिड में व्यवधान के बाद बांग्लादेश का बिजली उत्पादन 5,370 मेगावाट घट गया। इससे पूर्वी ढाका, चट्टोग्राम के कुछ हिस्सों और अन्य इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। पावर ग्रिड बांग्लादेश पीएलसी ने कहा कि दोपहर 2:30 बजे तक सभी ट्रांसमिशन लाइनें और ग्रिड सबस्टेशन फिर से चालू हो गए थे, लेकिन बिजली संयंत्रों के दोबारा शुरू होने के दौरान बिजली कटौती बार-बार जारी रही।
विषय-सूची
- 107 मिनट में ग्रिड बहाल, लेकिन बिजली की कमी बनी रही
- किन इलाकों में बिजली गुल हुई?
- कैसे आगे बढ़ा व्यवधान
- ग्रिड बहाल होने पर भी कटौती क्यों जारी रही
- गैस से बिजली उत्पादन में सबसे बड़ी गिरावट
- पावर ग्रिड की जांच को पांच कार्यदिवस
- दूसरी समिति में व्यापक प्रतिनिधित्व
- शाम तक निवासियों को बार-बार बिजली कटौती झेलनी पड़ी
- पिछली विफलताओं से जांच का काम स्पष्ट
- मुख्य बातें
दो जांचों की घोषणा की गई: पावर ग्रिड की आंतरिक जांच समिति को पांच कार्यदिवस में रिपोर्ट देनी है और पावर डिवीजन की समिति को दो सप्ताह में। दोनों को व्यवधान का कारण पता लगाने और ऐसी विफलता दोबारा रोकने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी गई है।
व्यवधान को मेघनाघाट-हरिपुर ट्रांसमिशन कॉरिडोर के आसपास आई खराबी से जोड़ा गया। पावर ग्रिड के प्रबंधक एबीएम बदरुद्दोजा खान ने कहा कि व्यापक व्यवधान से बचाव के लिए उस कॉरिडोर के आसपास कुछ फीडर लाइनें एहतियातन काट दी गई थीं। पावर डिवीजन ने शुरुआत में समस्या को यांत्रिक खराबी बताया, जबकि डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सटीक कारण की जांच अभी जारी है।
पावर ग्रिड के आंकड़ों के अनुसार, बिजली उत्पादन दोपहर में करीब 14,719 मेगावाट से गिरकर लगभग 1 बजे 9,349 मेगावाट रह गया। यह करीब 36.5 प्रतिशत की गिरावट थी, यानी घटना से पहले बन रही बिजली के एक-तिहाई से भी अधिक की कमी।
ट्रांसमिशन नेटवर्क चालू होने के बाद भी उपभोक्ताओं को बिजली की कमी का सामना करना पड़ा। दोपहर 3 बजे, ग्रिड बहाली की घोषणा के आधे घंटे बाद, बिजली कटौती 3,488 मेगावाट तक पहुंच गई, जो उस सप्ताह का सबसे ऊंचा स्तर था। बिजली कटौती का मतलब है कि मांग पूरी करने के लिए उपलब्ध आपूर्ति कम होने पर कुछ उपभोक्ताओं की बिजली जानबूझकर काटना।
किन इलाकों में बिजली गुल हुई?
भुलता, हरिपुर, सिद्धिरगंज, गुलशन, रामपुरा, उलोन और मोतीझील शुरुआती व्यवधान से प्रभावित इलाकों में शामिल थे। चट्टोग्राम के कुछ हिस्सों में भी बिजली कटौती हुई। पावर डिवीजन ने इसे देश के दक्षिण-पूर्व में आंशिक ग्रिड विफलता बताया।
सचिवालय, हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और बिजली भवन समेत महत्वपूर्ण सरकारी और न्यायिक परिसरों की बिजली चली गई। इस तरह व्यवधान का असर आवासीय इलाकों के साथ-साथ सार्वजनिक प्रशासन और अदालतों के भवनों पर भी पड़ा।
बाद में निवासियों ने मोगबाजार, मालिबाग, पंथपथ, शांति नगर और ग्रीन रोड में बार-बार बिजली जाने की बात कही। इन बयानों से शुरुआती बिजली कटौती से आगे की स्थिति सामने आई: कुछ उपभोक्ताओं की बिजली बहाल हुई, लेकिन उत्पादन घटने से जूझती व्यवस्था में फिर चली गई।
पावर डिवीजन और पावर ग्रिड ने हुई असुविधा के लिए माफी मांगी। उनकी बहाली संबंधी घोषणाओं में ट्रांसमिशन नेटवर्क को फिर चालू करने पर जोर था, जबकि बिजली संयंत्रों को चरणबद्ध तरीके से सेवा में लौटाया जा रहा था।
कैसे आगे बढ़ा व्यवधान
पहले घंटे में बिजली उत्पादन में तेज गिरावट आई। दोपहर के दौरान ट्रांसमिशन नेटवर्क बहाल हो गया, लेकिन उपलब्ध बिजली इतनी कम रही कि सभी को लगातार आपूर्ति नहीं की जा सकी।
- 27 अक्टूबर, दोपहर: पावर ग्रिड के आंकड़ों में बिजली उत्पादन करीब 14,719 मेगावाट दर्ज किया गया।
- दोपहर 12:43 बजे: ग्रिड व्यवधान से पूर्वी ढाका, चट्टोग्राम के कुछ हिस्सों और अन्य इलाकों में आपूर्ति बाधित हुई।
- करीब 1 बजे: उत्पादन घटकर 9,349 मेगावाट रह गया।
- दोपहर 2 बजे: बिजली कटौती 3,154 मेगावाट थी।
- दोपहर 2:30 बजे: पावर ग्रिड ने घोषणा की कि ग्रिड बहाली पूरी हो गई है और सभी ट्रांसमिशन लाइनें तथा सबस्टेशन चालू हैं।
- दोपहर 3 बजे: बिजली कटौती 3,488 मेगावाट तक पहुंच गई, जो सप्ताह का सबसे ऊंचा स्तर था।
- शाम 4 बजे: बहाली जारी रहने के साथ बिजली कटौती घटकर 2,356 मेगावाट रह गई।
शुरुआती व्यवधान से ग्रिड बहाली पूरी होने तक एक घंटा 47 मिनट लगे। हालांकि, घरों के लिए वास्तविक बहाली इस बात पर भी निर्भर थी कि बिजली संयंत्र फिर से चालू हों और ट्रांसमिशन उपकरण उपलब्ध हों।
दोपहर 3 से 4 बजे के बीच बिजली कटौती 1,132 मेगावाट, यानी करीब 32 प्रतिशत घट गई। इस सुधार के बाद भी उपभोक्ताओं को 2,356 मेगावाट की आपूर्ति नहीं मिल रही थी।
ग्रिड बहाल होने पर भी कटौती क्यों जारी रही
पावर ग्रिड ने कहा कि लाइनें और सबस्टेशन चालू होने के बाद बिजली संयंत्रों को चरणों में फिर शुरू किया जा रहा था। उसे उम्मीद थी कि अधिक उत्पादन इकाइयों के काम शुरू करने और बिजली उत्पादन बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर बिजली कटौती घटेगी।
ट्रांसमिशन ग्रिड बिजली संयंत्रों से बिजली उन जगहों तक पहुंचाता है जहां इसकी जरूरत होती है। सबस्टेशन नेटवर्क के हिस्सों को जोड़ते हैं और वोल्टेज बदलते हैं, ताकि बिजली आगे भेजी जा सके। इन मार्गों को बहाल करने से बिजली का प्रवाह फिर शुरू होता है; इसकी आपूर्ति के लिए जनरेटरों का भी चालू होना जरूरी है।
बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि कुछ संयंत्र पूरी तरह बंद हो गए थे, जबकि कुछ ने अपना काम केवल आंशिक रूप से रोका था। प्रभावित संयंत्रों में बिबियाना, समिट के संयंत्र और बोर्ड के दो संयंत्र शामिल थे। बंद इकाइयों को दोबारा शुरू करने में समय लगा।
बिजली वितरण कंपनियों ने कहा कि वे कमी संभालने के लिए बिजली कटौती कर रही थीं। घरों के लिए इसका मतलब था कि चालू कनेक्शन होने के बावजूद आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद हो सकती है, क्योंकि पूरी व्यवस्था में उपलब्ध बिजली पर्याप्त नहीं थी।
दोपहर के आंकड़े बताते हैं कि शुरुआती तकनीकी बहाली के बाद भी असर क्यों बना रहा। दोपहर 2:30 बजे नेटवर्क को बहाल घोषित किया गया, फिर भी 3 बजे दर्ज की गई कमी 2 बजे से अधिक थी। ट्रांसमिशन की बहाली और बिजली उत्पादन की बहाली अलग-अलग गति से हो रही थी।
गैस से बिजली उत्पादन में सबसे बड़ी गिरावट
पावर ग्रिड के आंकड़ों में दिए गए उत्पादन वर्गों में गैस से चलने वाले संयंत्रों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज हुई। उनका उत्पादन दोपहर में 4,382 मेगावाट से घटकर 1 बजे 1,734 मेगावाट रह गया, यानी करीब 60 प्रतिशत की कमी।
इसी अवधि में कोयले से बिजली उत्पादन 4,863 मेगावाट से घटकर 2,947 मेगावाट रह गया, यानी करीब 39 प्रतिशत की गिरावट। तेल से चलने वाले संयंत्रों का उत्पादन 2,746 मेगावाट से घटकर 2,174 मेगावाट रह गया, जो करीब 21 प्रतिशत की कमी थी।
अकेले गैस से बिजली उत्पादन में 2,648 मेगावाट की कमी आई। यह दर्ज की गई 5,370 मेगावाट की राष्ट्रीय गिरावट का लगभग आधा हिस्सा था, इसलिए आपूर्ति बहाल करने के लिए गैस संयंत्रों का दोबारा चालू होना विशेष रूप से अहम था।
भारत के अडानी संयंत्र से मिली बिजली इसके उलट 909 मेगावाट से बढ़कर 917 मेगावाट हो गई। आयात की एक अन्य श्रेणी 941 मेगावाट पर अपरिवर्तित रही। अडानी से अतिरिक्त 8 मेगावाट की आपूर्ति घरेलू उत्पादन में हुई हजारों मेगावाट की कमी के मुकाबले बहुत कम थी।
मेगावाट किसी खास समय पर पैदा या आपूर्ति की जा रही बिजली की दर को मापता है। ये आंकड़े बताते हैं कि व्यवधान के दौरान व्यवस्था का उपलब्ध उत्पादन कितनी तेजी से बदला, न कि पूरे दिन में कुल कितनी बिजली खपत हुई।
पावर ग्रिड की जांच को पांच कार्यदिवस
पावर ग्रिड ने पांच सदस्यीय समिति बनाई, जिसकी अध्यक्षता ट्रांसमिशन-2 की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे मुख्य अभियंता सैयद इबादुल्लाह हैदर अली करेंगे। समिति को पांच कार्यदिवस के भीतर अपने निष्कर्ष, टिप्पणियां और सिफारिशें सौंपने का निर्देश दिया गया है।
यूटिलिटी ने समिति को अचानक हुई विफलता का वास्तविक कारण पता लगाने और उसकी पुनरावृत्ति रोकने के उपाय सुझाने की जिम्मेदारी दी है। इस तरह उसका काम घटना की जांच के साथ-साथ ग्रिड संचालन या सुरक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलावों पर भी केंद्रित है।
मेघनाघाट-हरिपुर के आसपास एहतियाती तौर पर बिजली काटे जाने के बारे में खान का बयान उस घटनाक्रम का अहम हिस्सा है जिसकी जांच की जाएगी। ट्रांसमिशन मार्ग के आसपास समस्या आने के बाद व्यवधान को फैलने से रोकने के लिए कुछ कनेक्शन जानबूझकर काटे गए थे।
आंतरिक जांच में मूल खराबी, सुरक्षा के लिए की गई इन कार्रवाइयों और बिजली उत्पादन इकाइयों के बंद होने के बीच संबंध स्पष्ट करना होगा। बहाली के दौरान पावर ग्रिड और बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड कारण पता लगाने में जुटे थे।
दूसरी समिति में व्यापक प्रतिनिधित्व
पावर डिवीजन ने भी पांच सदस्यीय समिति बनाई, जिसकी अध्यक्षता अतिरिक्त सचिव के. एम. अली रेजा करेंगे। उसके कार्यालय आदेश में पैनल को दक्षिण-पूर्व में हुई आंशिक ग्रिड विफलता की जांच और सिफारिशें सौंपने के लिए दो सप्ताह दिए गए हैं।
सदस्यों में योजना और विकास के जिम्मेदार पावर ग्रिड के पूर्व कार्यकारी निदेशक एमडी आमिर खस्रू और बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के सिस्टम प्रोटेक्शन एंड टेस्टिंग कमीशनिंग डिवीजन के पर्यवेक्षण अभियंता एमडी अतीकुर रहमान शामिल हैं।
बांग्लादेश यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, जिसे बीयूईटी के नाम से जाना जाता है, के इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग विभाग का एक प्रतिनिधि भी समिति में है। पावर ग्रिड के संचालन और रखरखाव के कार्यकारी निदेशक एमडी अब्दुल मोनेम चौधरी सदस्य सचिव हैं।
पावर डिवीजन की समिति जरूरी समझने पर अतिरिक्त सदस्यों को शामिल कर सकती है। उसकी घोषित जिम्मेदारियों में कारण का पता लगाना, रोकथाम के ठोस उपाय सुझाना और ग्रिड सुरक्षा पर सलाह देना शामिल है।
दोनों समितियों के अध्यक्ष, समय-सीमा और संस्थागत जिम्मेदारियां अलग-अलग हैं। पावर ग्रिड की समिति यूटिलिटी के भीतर की जांच है, जबकि पावर डिवीजन के पैनल में सरकार, यूटिलिटी, बिजली उत्पादन और विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि शामिल हैं। दोनों समितियों को कारण पता लगाने के साथ-साथ रोकथाम के उपाय सुझाने का भी जिम्मा दिया गया है।
शाम तक निवासियों को बार-बार बिजली कटौती झेलनी पड़ी
शांति नगर की निवासी नसीमा अख्तर ने बताया कि दोपहर के व्यवधान के बाद बिजली थोड़ी देर के लिए लौटी और फिर चली गई। उनके बयान से पता चलता है कि मुख्य नेटवर्क बहाल होने के बाद भी जारी कमी ने उपभोक्ताओं को प्रभावित किया।
अख्तर ने कहा:
दोपहर से बार-बार बिजली जा रही है। थोड़ी देर बाद आती है, फिर चली जाती है। इस तरह करीब एक घंटे तक बिजली नहीं रहती।
काठलबागान के निवासी नजमुल हक ने भी बताया कि शाम शुरू होने के बाद कई बार बिजली गई। राजधानी के अन्य हिस्सों के निवासियों ने भी वितरण कंपनियों द्वारा कमी संभाले जाने के दौरान इसी तरह की कटौती की बात कही।
उनके अनुभव यूटिलिटी द्वारा बताई गई संचालन स्थिति से मेल खाते हैं: ट्रांसमिशन लाइनें उपलब्ध थीं, लेकिन बिजली संयंत्रों को फिर चालू किया जा रहा था। उपभोक्ताओं के लिए बहाली का सबसे उपयोगी पैमाना यह था कि बिजली लगातार बनी रहे, न कि मुख्य ग्रिड उपकरण दोबारा चालू कर दिए गए हों।
पिछली विफलताओं से जांच का काम स्पष्ट
4 अक्टूबर 2022 को बांग्लादेश में ग्रिड की बड़ी विफलता हुई थी, जब पूर्वी ग्रिड ठप हो गया था। ढाका, चट्टोग्राम, सिलहट और मैमनसिंह के बड़े हिस्सों में कई घंटों तक बिजली नहीं थी। इसके बाद हुई जांच के आधार पर ग्रिड संचालन के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी।
1 नवंबर 2014 को देशव्यापी विफलता के कारण बांग्लादेश करीब 12 घंटे तक बिजली के बिना रहा था। 27 अक्टूबर की घटना से देश का एक हिस्सा प्रभावित हुआ। ट्रांसमिशन की बहाली 107 मिनट में पूरी हुई, हालांकि उसके बाद भी बिजली की कमी बनी रही।
नई जांच समितियों से रोकथाम के ठोस उपाय सुझाने को कहा गया है। उस दिन के आंकड़े संचालन संबंधी चुनौती को स्पष्ट करते हैं: ट्रांसमिशन कॉरिडोर के आसपास खराबी के बाद देश में बिजली उत्पादन एक-तिहाई से अधिक घट गया और नेटवर्क को दोबारा चालू करने में उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध बिजली आपूर्ति बहाल करने से कम समय लगा।
अगले तय कदमों में पावर ग्रिड की रिपोर्ट पांच कार्यदिवस और पावर डिवीजन की समिति की रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर सौंपना शामिल है। इनकी जांच से तकनीकी घटनाक्रम स्पष्ट होने और ग्रिड सुरक्षा मजबूत करने के उपाय सामने आने की उम्मीद है।
मुख्य बातें
- व्यवधान 27 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:43 बजे शुरू हुआ और इससे पूर्वी ढाका, चट्टोग्राम के कुछ हिस्से तथा अन्य इलाके प्रभावित हुए।
- पावर ग्रिड ने कहा कि एक घंटा 47 मिनट बाद, दोपहर 2:30 बजे तक ट्रांसमिशन बहाली पूरी हो गई थी।
- दोपहर में उत्पादन करीब 14,719 मेगावाट से घटकर लगभग 1 बजे 9,349 मेगावाट रह गया, यानी करीब 36.5 प्रतिशत की गिरावट।
- बिजली संयंत्रों के चरणबद्ध तरीके से दोबारा शुरू होने के दौरान दोपहर 3 बजे बिजली कटौती 3,488 मेगावाट तक पहुंच गई।
- पावर ग्रिड की आंतरिक समिति को रिपोर्ट देने के लिए पांच कार्यदिवस और पावर डिवीजन की समिति को दो सप्ताह मिले हैं।
- दोनों जांच समितियों को कारण पता लगाने और ऐसी विफलता रोकने के उपाय सुझाने हैं।






