अक्टूबर में हुईं साल की दो-पांचवें से अधिक मौतें
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के अनुसार, बांग्लादेश में अक्टूबर 2026 में डेंगू से 174 लोगों की मौत हुई। यह साल का सबसे घातक महीना रहा और 31 अक्टूबर तक देश में मृतकों की कुल संख्या 419 हो गई। साल के दो महीने अभी बाकी हैं, लेकिन मौतों का आंकड़ा 2025 में पूरे साल दर्ज 413 मौतों से पहले ही अधिक हो चुका है।
विषय-सूची
- अक्टूबर में हुईं साल की दो-पांचवें से अधिक मौतें
- मौतों का आंकड़ा कैसे बढ़ा
- सातों डिवीजनों में अस्पताल में भर्ती
- पिछले वर्षों के आंकड़े क्या बताते हैं
- मरीज गंभीर हालत में अस्पताल क्यों पहुंच रहे हैं
- समीक्षा में भर्ती से पहले देरी का संकेत
- बार-बार संक्रमण से बढ़ता है खतरा
- नवंबर में राहत सीमित क्यों हो सकती है
- परिवार और स्वास्थ्य सेवाएं अभी क्या कर सकती हैं
- मुख्य बातें
31 अक्टूबर को सुबह 8:00 बजे समाप्त हुए 24 घंटों में अस्पतालों ने डेंगू के 1,633 और मरीजों को भर्ती किया। इस दौरान एक मरीज की मौत हुई। देशभर में 6,236 मरीज अस्पताल में भर्ती थे। इससे इलाज की लगातार बनी मांग का पता चलता है। डॉक्टरों ने चेताया कि कई लोग गंभीर जटिलताओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।
अक्टूबर में हुई 174 मौतें सितंबर की 148 मौतों से 26 अधिक थीं, यानी करीब 18 प्रतिशत की वृद्धि। दोनों महीनों में कुल 322 मौतें हुईं, जो साल की कुल मौतों का लगभग 77 प्रतिशत है। अकेले अक्टूबर में करीब 42 प्रतिशत मौतें हुईं।
ये आंकड़े दो गंभीर समस्याओं को सामने लाते हैं: मच्छर संक्रमण फैलाना जारी रखे हुए हैं, जबकि जांच और इलाज में देरी के कारण कुछ मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं। डेंगू से हुई 119 मौतों की समीक्षा में पाया गया कि एक-तिहाई से अधिक मरीजों की मौत अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर हुई।
जहांगीरनगर विश्वविद्यालय के कीट-विज्ञानी कबिरुल बशर का अनुमान है कि नवंबर तक संक्रमण फैलता रहेगा और इसमें उल्लेखनीय सुधार दिसंबर में होने की संभावना है। परिवारों के लिए इसका मतलब है कि मौसम के शुष्क होने के बावजूद मच्छरों से बचाव और समय पर चिकित्सा सहायता लेना तुरंत जरूरी है।
मौतों का आंकड़ा कैसे बढ़ा
DGHS के मासिक आंकड़ों में साल की पहली छमाही के बाद तेज बढ़ोतरी दिखती है। जनवरी और फरवरी में दो-दो मौतें हुईं। मार्च और अप्रैल में कोई मौत दर्ज नहीं हुई, जबकि मई में एक और जून में 13 मौतें हुईं।
जुलाई में मौतों की संख्या बढ़कर 36 और अगस्त में 43 हो गई, फिर सितंबर में उछलकर 148 पर पहुंच गई। अक्टूबर में कुल 174 मौतों के साथ यह बढ़ोतरी जारी रही। मासिक आंकड़ों का योग देशभर में हुई कुल 419 मौतों के बराबर है।
- जनवरी से जून 2026: डेंगू से 18 मौतें दर्ज की गईं।
- जुलाई और अगस्त: 79 और लोगों की मौत हुई।
- सितंबर: 148 मौतें दर्ज हुईं, जो उससे पहले के आठ महीनों की कुल मौतों से अधिक थीं।
- 30 अक्टूबर: अक्टूबर में हुई 173 मौतों समेत कुल मृतकों की संख्या 418 थी।
- 31 अक्टूबर: एक और मौत से साल की कुल संख्या 419 और महीने की संख्या 174 हो गई।
सितंबर और अक्टूबर में मिलाकर जनवरी से अगस्त तक दर्ज 97 मौतों से तीन गुने से अधिक मौतें हुईं। साल के आखिरी हिस्से में मौतों का इस तरह सिमटना बताता है कि डॉक्टर और मच्छर विशेषज्ञ नवंबर में सावधानियां ढीली न करने की चेतावनी क्यों दे रहे हैं।
सातों डिवीजनों में अस्पताल में भर्ती
नवीनतम दैनिक अपडेट में ढाका डिवीजन में अस्पताल में भर्ती हुए 1,633 नए मरीजों में से 604 दर्ज किए गए, जो किसी भी डिवीजन में सबसे अधिक थे। इसके बाद चट्टोग्राम में 281, बरिशाल में 234 और खुलना में 228 मरीज भर्ती हुए।
राजशाही में 149, मयमनसिंह में 70 और रंगपुर में 67 मरीज भर्ती हुए। उस रिपोर्टिंग अवधि में सिलहट में कोई नया मरीज भर्ती नहीं हुआ।
दैनिक कुल मरीजों में ढाका का हिस्सा करीब 37 प्रतिशत था। बाकी डिवीजनों में मिलाकर 1,029 मरीज भर्ती हुए, यानी करीब 63 प्रतिशत। इसलिए डेंगू के इलाज की मांग राजधानी के डिवीजन से कहीं आगे तक फैली हुई थी और बांग्लादेश के बड़े हिस्से के अस्पतालों में मरीज पहुंच रहे थे।
देशभर में 31 अक्टूबर तक डेंगू के 135,000 मरीज अस्पताल में भर्ती हो चुके थे। इनमें से 128,345 को छुट्टी दे दी गई थी, 6,236 का इलाज जारी था और 419 मरीजों की मौत हुई थी। इन तीनों आंकड़ों का योग भर्ती हुए कुल मरीजों के बराबर है।
अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या से चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंचने वाले मरीजों का बोझ पता चलता है। जिन लोगों को बुखार है, लेकिन वे घर पर हैं या जिनकी अभी तक जांच नहीं हुई है, उन्हें भी चिकित्सकीय सलाह मिलनी चाहिए, खासकर तब जब उनकी हालत बिगड़ने लगे।
पिछले वर्षों के आंकड़े क्या बताते हैं
अक्टूबर तक बांग्लादेश में डेंगू से हुई 419 मौतों के साथ 2026 का आंकड़ा पूरे 2025 में दर्ज 413 मौतों से अधिक हो गया है। 2025 में देश में डेंगू के 102,861 संक्रमण दर्ज हुए थे, जबकि 2026 में अब तक 135,000 मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की खबर है। यह संख्या 32,139 अधिक है।
DGHS के बताए सालाना मृत्यु आंकड़ों में 2026 अब बांग्लादेश में 2000 में डेंगू का पहला प्रकोप दर्ज होने के बाद से तीसरे स्थान पर है। इससे अधिक मौतें 2023 में 1,705 और 2024 में 575 दर्ज हुई थीं।
2023 के प्रकोप में 321,179 मरीज अस्पताल पहुंचे थे, जो इस साल अक्टूबर तक दर्ज भर्ती मरीजों की संख्या से दोगुने से भी अधिक है। 2024 में अधिकारियों ने 101,214 मरीज और 575 मौतें दर्ज की थीं। इससे पहले सालाना मौतों का आंकड़ा 2022 में 281 और 2019 में 179 था।
2023 में बांग्लादेश में डेंगू का प्रसार भौगोलिक रूप से भी व्यापक रहा था। ढाका के बाहर मरीजों की संख्या ढाका में मरीजों की संख्या से दोगुने से अधिक थी, जबकि 58 प्रतिशत मौतें राजधानी के दो सिटी कॉरपोरेशन क्षेत्रों में दर्ज हुई थीं। इस साल के दैनिक भर्ती आंकड़े भी ढाका डिवीजन के बाहर इलाज की काफी मांग दिखाते हैं।
मरीज गंभीर हालत में अस्पताल क्यों पहुंच रहे हैं
ढाका के शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निदेशक मिर्जा गोलाम सरवर ने बताया कि वहां डेंगू के 279 मरीजों का इलाज चल रहा था, जिनमें से 67 को एक ही दिन में भर्ती किया गया था। उन्होंने कहा कि मरीजों का रक्तचाप इतना कम था कि कभी-कभी उसे मापना भी संभव नहीं होता था, साथ ही उनके रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा था।
इसी अस्पताल के एसोसिएट प्रोफेसर एचएम नजमुल अहसान ने देखभाल के लिए पहुंचने वाले कई मरीजों की हालत का वर्णन किया:
"हम देख रहे हैं कि काफी संख्या में मरीज शॉक की हालत में पहुंच रहे हैं। उनका रक्तचाप मापा नहीं जा पा रहा और रक्त में ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है," उन्होंने कहा।
शॉक एक आपातकालीन चिकित्सा स्थिति है, जिसमें रक्त संचार इतना कमजोर हो जाता है कि अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। गंभीर डेंगू में छोटी रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ का रिसाव हो सकता है, जिससे शरीर में प्रवाहित हो रहे तरल की मात्रा घट जाती है। तत्काल इलाज न मिलने पर अंगों को नुकसान पहुंच सकता है।
अहसान ने कहा कि मरीज को अस्पताल पहुंचाने, आपातकालीन जांच और भर्ती में देरी से अंगों को स्थायी नुकसान का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने लिवर, गुर्दे, फेफड़ों और हृदय से जुड़ी जटिलताएं देखी थीं। इनमें मायोकार्डाइटिस भी शामिल है, जिसका अर्थ है हृदय की मांसपेशियों में सूजन।
अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में गंभीर जटिलताएं अधिक आम थीं। इस प्रवृत्ति के कारणों को समझने के लिए अभी और अध्ययन की जरूरत है।
समीक्षा में भर्ती से पहले देरी का संकेत
महामारी विज्ञान, रोग नियंत्रण और अनुसंधान संस्थान ने अपने निदेशक काजी अहमद जकी के नेतृत्व में डेंगू से हुई 119 मौतों की समीक्षा की। एक-तिहाई से अधिक मरीजों की मौत अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर हुई, और कई मरीजों को बीमारी की जांच कराने में कम से कम तीन दिन की देरी हुई थी।
समीक्षा में डेंगू शॉक सिंड्रोम को मौत का प्रमुख कारण पाया गया, जो 62.5 प्रतिशत मामलों में जिम्मेदार था। निष्कर्ष बताते हैं कि मौतें घटाने के प्रयासों में बीमारी की जल्द पहचान और इलाज तक त्वरित पहुंच को प्राथमिकता देनी होगी।
जकी ने कहा कि अस्पताल की मृत्यु समीक्षा समितियां अलग-अलग मामलों की जांच करती हैं और अपने निष्कर्ष DGHS की रोग नियंत्रण इकाई को भेजती हैं। वे इलाज की गुणवत्ता, जांच में देरी, भर्ती से पहले मरीज की हालत और मरीज के लिए अनुपयुक्त दवाओं के इस्तेमाल का आकलन करती हैं।
जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ मुश्तुक हुसैन ने गंभीर रूप से बीमार होने के बाद बड़े अस्पतालों पर निर्भर रहने के बजाय लोगों के रहने की जगह के पास अधिक देखभाल उपलब्ध कराने की अपील की। उन्होंने मौजूदा प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं में डेंगू की मुफ्त जांच शुरू करने का सुझाव दिया, ताकि जोखिम वाले मरीजों को अस्पताल में इलाज के लिए भेजा जा सके।
मुश्तुक ने कम आय वाले लोगों के सामने आने वाली एक व्यावहारिक बाधा का भी जिक्र किया: कुछ लोग बुखार होने के बावजूद काम जारी रखते हैं, क्योंकि वे काम छोड़ने का खर्च नहीं उठा सकते। जल्दी जांच, स्थानीय स्तर पर निगरानी और समय पर रेफरल से इन मरीजों को जटिलताएं पैदा होने से पहले इलाज मिलने की बेहतर संभावना होगी।
बार-बार संक्रमण से बढ़ता है खतरा
मेडिसिन विशेषज्ञ एबीएम अब्दुल्ला ने बार-बार डेंगू संक्रमण होने और जांच तथा इलाज में देरी को गंभीर बीमारी और मौतों के प्रमुख कारण बताया। उन्होंने लोगों से कहा कि बुखार और बदन दर्द होने पर हालत बिगड़ने का इंतजार करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें और जांच कराएं।
डेंगू वायरस के चार मुख्य प्रकार हैं, जिन्हें सीरोटाइप कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश में चारों प्रकार फैल रहे थे। एक प्रकार के संक्रमण से ठीक होने के बाद व्यक्ति दूसरे प्रकार से संक्रमित हो सकता है। बाद के संक्रमण में गंभीर बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है।
अहसान ने कहा कि डेंगू वायरस का टाइप 3, यानी DENV-3, गंभीर मामलों में योगदान दे सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वायरस के एक ही प्रकार के भीतर मौजूद भिन्नताएं बीमारी की गंभीरता को प्रभावित कर सकती हैं।
ढाका के 33 वर्षीय निवासी फैसल फरदौस के परिवार के लिए बार-बार संक्रमण चिंता का विषय बन गया है। 2017 और 2024 में डेंगू होने के बाद वे अक्टूबर 2026 की शुरुआत में फिर बीमार पड़ गए। उन्हें और उनकी पत्नी, दोनों को अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ी। अपने अनुभव के बारे में बताते समय वे घर पर स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे।
अक्टूबर के अपडेट के समय तक बांग्लादेश ने डेंगू का टीका शुरू नहीं किया था। अधिकारी टीकाकरण को दीर्घकालीन उपाय के रूप में विचाराधीन रखे हुए थे, लेकिन इसे शुरू करने की कोई तारीख नहीं दी गई थी।
नवंबर में राहत सीमित क्यों हो सकती है
जहांगीरनगर विश्वविद्यालय के मच्छर विशेषज्ञ बशर का अनुमान है कि नवंबर तक डेंगू का प्रसार जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मौतें अक्टूबर की रफ्तार से बढ़ना शायद बंद हो जाएं, लेकिन संक्रमण में तत्काल कमी सीमित रहने की संभावना है।
पहले हुई बारिश से बने मच्छरों के प्रजनन स्थल लगातार खतरे की एक वजह हैं। घरों के आसपास और दूसरे बर्तनों में जमा पानी, बारिश रुकने के बाद भी रह सकता है, जिससे मच्छरों के लार्वा विकसित होकर वयस्क मच्छर बन सकते हैं। इसलिए कुछ दिन शुष्क रहने पर भी इन प्रजनन स्थलों को खाली करना जरूरी है।
बशर ने मच्छरों के प्रजनन का मौसम लंबा होने का एक कारण जलवायु परिवर्तन से जुड़े बारिश और आर्द्रता के बदलावों को बताया। ऐसी परिस्थितियां डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छरों को अधिक समय तक सक्रिय रहने देती हैं।
दिसंबर में अधिक सुधार होने का बशर का अनुमान संक्रमण फैलने की परिस्थितियों से जुड़ा पूर्वानुमान है। नवंबर में अस्पतालों और समुदायों को संक्रमण जारी रहने की अवधि का सामना करना होगा। इसलिए भारी बारिश के बाद थोड़े समय के अभियान के बजाय मच्छरों पर लगातार नियंत्रण जरूरी है।
परिवार और स्वास्थ्य सेवाएं अभी क्या कर सकती हैं
DGHS ने लोगों को अपने घरों के आसपास जमा पानी हटाने, दिन में सोते समय मच्छरदानी लगाने और बुखार होने पर तुरंत अस्पताल से संपर्क करने की सलाह दी। एडीज मच्छर दिन में सक्रिय रहते हैं, इसलिए दिन के आराम के दौरान बचाव भी डेंगू की रोकथाम का हिस्सा है।
बशर ने घरों के अंदर और बाहर, खासकर जहां पानी जमा हो, मच्छरों पर नियंत्रण मजबूत करने की अपील की। अब्दुल्ला ने भी लोगों से मच्छरों के प्रजनन स्थल हटाने और लक्षण दिखने पर तुरंत इलाज लेने का आग्रह किया।
स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मौतों की समीक्षा और अस्पतालों के विवरण से कुछ व्यावहारिक जरूरतें सामने आती हैं: जांच की सुलभ सुविधा, मरीज के गंभीर रूप से बीमार होने से पहले निगरानी और जरूरत पड़ने पर उसे जल्दी अस्पताल पहुंचाना। मुश्तुक के प्रस्तावित तंत्र में स्थानीय क्लीनिक, बीच के स्तर की देखभाल और विशेषज्ञ अस्पताल एक-दूसरे से जुड़े होंगे। गहन चिकित्सा उन मरीजों के लिए होगी जिन्हें इसकी जरूरत है।
अस्पतालों पर खसरे के उसी समय फैले प्रकोप का भी दबाव था, जिसके बारे में खबर थी कि इससे 1,200 से अधिक लोगों की मौत हुई है। डेंगू के मरीजों ने कर्मचारियों, बिस्तरों और इलाज की मांग को और बढ़ाया। वहीं, 31 अक्टूबर को केवल डेंगू के 6,236 मरीज अस्पताल में भर्ती थे।
तत्काल प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं: घरों के आसपास मच्छरों के प्रजनन को कम करना, बुखार शुरू होने और चिकित्सकीय जांच के बीच का समय घटाना और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को जल्दी इलाज दिलाना।
मुख्य बातें
- बांग्लादेश में अक्टूबर 2026 में डेंगू से 174 मौतें दर्ज हुईं और 31 अक्टूबर तक इस साल की कुल संख्या 419 हो गई।
- सितंबर और अक्टूबर में मिलाकर 322 मौतें हुईं, जो इस साल की कुल मौतों का लगभग 77 प्रतिशत है।
- नवीनतम 24 घंटों में अस्पतालों ने 1,633 मरीज भर्ती किए, जबकि देशभर में 6,236 मरीजों का इलाज जारी था।
- 119 मौतों की समीक्षा में पाया गया कि एक-तिहाई से अधिक मरीजों की मौत अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर हुई।
- डॉक्टरों ने गंभीर मामलों में इलाज में देरी और बार-बार संक्रमण को बड़ी चिंता बताया।
- नवंबर तक संक्रमण जारी रहने का अनुमान है, जबकि दिसंबर में अधिक सुधार की संभावना जताई गई है।
- स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों से जमा पानी हटाने, मच्छरों से बचाव करने और बुखार होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की अपील की।






