औद्योगिक पट्टी में सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार
परिधान श्रमिकों द्वारा 30,000 टका न्यूनतम मासिक वेतन की मांग के बीच बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने 5 नवंबर 2026 को ढाका और आसपास के औद्योगिक जिलों में 33 प्लाटून तैनात कीं। निगरानी के लिए लाइव ड्रोन, कर्मियों के शरीर पर लगे कैमरों और बख्तरबंद वाहनों का इस्तेमाल किया गया।
विषय-सूची
- औद्योगिक पट्टी में सुरक्षा व्यवस्था का विस्तार
- प्लाटून कहां तैनात हैं
- निगरानी अभियान कैसे काम करता है
- प्रदर्शनों का घटनाक्रम
- आशुलिया में फिर फैक्ट्रियां बंद
- गाज़ीपुर और फतुल्लाह की सड़कों पर शांति
- श्रमिक 30,000 टका क्यों चाहते हैं
- वेतन बोर्ड ने क्या वादा किया है
- मौतें, गिरफ्तारियां और व्यवधान की कीमत
- मुख्य बिंदु
उसी दिन जारी BGB की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 12 प्लाटून गाज़ीपुर, 11 सावर और आशुलिया, सात नारायणगंज और तीन मीरपुर में तैनात की गईं। बल के मुख्यालय में एक निगरानी प्रकोष्ठ स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ चौबीसों घंटे अभियान का समन्वय कर रहा है।
सुरक्षा अभियान का विस्तार ऐसे समय हुआ है जब नवगठित परिधान वेतन बोर्ड ने वादा किया है कि संशोधित वेतन दिसंबर से लागू होगा और श्रमिकों को बढ़ी हुई राशि जनवरी 2027 में मिलेगी। वेतन वृद्धि की राशि घोषित नहीं की गई है।
श्रमिकों को फिलहाल न्यूनतम 12,500 टका मासिक वेतन मिलता है। उनकी 30,000 टका की मांग से महीने में 17,500 टका की वृद्धि होगी, यानी 140 प्रतिशत का इजाफा। नए वेतन पर बातचीत के लिए औपचारिक प्रक्रिया बनाए जाने के बावजूद फैक्ट्रियों में काम बंद होना, राजमार्गों की नाकेबंदी और झड़पें जारी हैं।
5 नवंबर को औद्योगिक पट्टी के अलग-अलग इलाकों में हालात अलग रहे। गाज़ीपुर और नारायणगंज के फतुल्लाह में अपेक्षाकृत शांति रही, जबकि आशुलिया में नए सिरे से हुई झड़पों के बाद फैक्ट्रियों में छुट्टी घोषित की गई। सड़कें फिर खुलने और प्रदर्शन थमने के बाद भी सुरक्षा गश्त जारी रही।
प्लाटून कहां तैनात हैं
गाज़ीपुर और सावर-आशुलिया में BGB की 33 में से 23 प्लाटून तैनात हैं, जो कुल तैनाती का लगभग 70 प्रतिशत है। दोनों इलाकों में परिधान फैक्ट्रियों की बड़ी तादाद है और यहां की सड़कों से श्रमिक, मालवाहक वाहन और अन्य यात्री गुजरते हैं।
BGB के 3 नवंबर के बयान में 12 प्लाटून का उल्लेख था: 10 गाज़ीपुर के शफीपुर, कालीकैर और कोनाबाड़ी इलाकों में तथा दो नारायणगंज के चाशारा में। उस समय बल ने कहा था कि वह आशुलिया और मीरपुर पर भी कड़ी निगरानी रख रहा है।
इसके बाद BGB के जनसंपर्क अधिकारी मोहम्मद शरीफुल इस्लाम ने तैनाती की जानकारी देते हुए 24 प्लाटून की सूची दी थी, जिनमें पांच सावर-आशुलिया, 13 गाज़ीपुर और छह नारायणगंज में थीं। 5 नवंबर के बयान में कुल संख्या 33 बताई गई। उसमें तैनाती का बंटवारा बदल गया था और मीरपुर के लिए अलग से प्लाटून आवंटित की गई थीं।
प्लाटून एक सैन्य इकाई है, जिसका आकार अलग-अलग हो सकता है। BGB ने कुल कर्मियों की संख्या नहीं बताई, इसलिए तैनाती के आंकड़े इकाइयों की जानकारी देते हैं, ड्यूटी पर मौजूद सदस्यों की सटीक संख्या नहीं।
बख्तरबंद कार्मिक वाहक (APC) और दंगा नियंत्रण वाहन (RCV) भी तैनात किए गए हैं। BGB ने कहा कि उसके अभियान का उद्देश्य फैक्ट्रियों और अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा करना, जन सुरक्षा बनाए रखना और औद्योगिक गतिविधियों को सामान्य रखने में मदद करना है।
निगरानी अभियान कैसे काम करता है
ड्रोन महत्वपूर्ण सड़कों, चौराहों और संवेदनशील माने गए स्थानों की लाइव तस्वीरें भेज रहे हैं। BGB कर्मियों के शरीर पर लगे कैमरे एक और नजरिया देते हैं और जमीन पर तैनात सदस्यों की स्थिति से घटनाएं दिखाते हैं।
BGB के 3 नवंबर के बयान के अनुसार, मुख्यालय के कर्मचारी दोनों तरह की फुटेज सीधे देख रहे थे। केंद्रीय प्रकोष्ठ उभरते हालात का आकलन कर सकता है, इकाइयों के बीच समन्वय कर सकता है और अभियान संबंधी निर्देश जारी कर सकता है। 5 नवंबर की घोषणा में पुष्टि की गई कि निगरानी अभियान 24 घंटे जारी है।
BGB ने यह भी कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए कर्मियों के शरीर पर लगे कैमरों की फुटेज पर नजर रखी जा रही है। इससे पर्यवेक्षकों को यह जांचने का अवसर मिलता है कि सुरक्षा अभियान कैसे चलाए जा रहे हैं। वहीं, हवाई निगरानी से भीड़ और सड़क के हालात पर नजर रखी जाती है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी अभियान में शामिल हैं। गाज़ीपुर में BGB के साथ कार्यकारी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं, जबकि औद्योगिक पुलिस, जिला पुलिस और महानगर पुलिस ने सड़कें खुलवाने और फैक्ट्री इलाकों की सुरक्षा के लिए काम किया है।
तत्काल प्राथमिकताओं में फैक्ट्रियों के प्रवेश द्वारों तक पहुंच खुली रखना, हिंसा का जवाब देना और ढाका-टांगाइल तथा ढाका-मयमनसिंह राजमार्गों जैसे मार्गों पर यातायात बनाए रखना शामिल है। इन सड़कों से उन फैक्ट्रियों से कहीं आगे तक लोग और सामान आते-जाते हैं, जहां से वेतन विवाद शुरू हुआ।
प्रदर्शनों का घटनाक्रम
प्रदर्शनों की ताजा लहर शनिवार, 31 अक्टूबर को शुरू हुई और कई विनिर्माण केंद्रों तक फैल गई। श्रमिकों ने अधिक वेतन के साथ ब्लैकलिस्ट करने और छंटनी खत्म करने की मांग की। ब्लैकलिस्ट करने का मतलब है कुछ श्रमिकों को रोजगार से बाहर रखना, जिससे उनके लिए दूसरी फैक्ट्री में नौकरी पाना मुश्किल हो सकता है।
पिछले कुछ दिनों में प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार रहे:
- 1 नवंबर: सरकार ने वेतन बोर्ड बनाया। बांग्लादेश परिधान निर्माता एवं निर्यातक संघ के अनुसार, प्रदर्शनों से 529 फैक्ट्रियों में उत्पादन बाधित हुआ।
- 2 नवंबर: गाज़ीपुर, सावर-आशुलिया और नारायणगंज में प्रदर्शन और सड़क नाकेबंदी फैल गई। औद्योगिक पुलिस-1 ने पुष्टि की कि सावर और आशुलिया की 264 फैक्ट्रियों में छुट्टी घोषित की गई।
- 3 नवंबर: BGB ने गाज़ीपुर और नारायणगंज में 12 प्लाटून तैनात करने की घोषणा की। लाइव ड्रोन और बॉडी कैमरों से निगरानी भी की जा रही थी।
- 4 नवंबर: वेतन बोर्ड की पहली बैठक हुई और घोषणा की गई कि दिसंबर के संशोधित वेतन का भुगतान जनवरी में होगा। इसके बाद और झड़पें हुईं तथा फैक्ट्रियां बंद रहीं।
- 5 नवंबर: BGB ने 33 प्लाटून तैनात करने की घोषणा की। गाज़ीपुर और फतुल्लाह में हालात अपेक्षाकृत शांत रहे, जबकि आशुलिया के कुछ हिस्सों में अशांति जारी रही।
उद्योग प्रतिनिधियों ने 2 नवंबर को प्रभावित फैक्ट्रियों की संख्या लगभग 670 बताई, जबकि BGMEA की गिनती 679 थी। इससे एक दिन पहले 529 फैक्ट्रियां प्रभावित हुई थीं, जो दिखाता है कि विवाद कितनी तेजी से फैला।
पुलिस और स्थानीय प्रशासकों ने अलग-अलग जिलों और दिनों के आंकड़े भी दिए हैं। ये स्थानीय आंकड़े बंदी के बदलते हालात बताते हैं: कुछ फैक्ट्रियां फिर खुलीं, जबकि अन्य ने आगे की झड़पें रोकने के लिए छुट्टी घोषित की।
आशुलिया में फिर फैक्ट्रियां बंद
औद्योगिक पुलिस-1 के अधीक्षक मोहम्मद मोमिनुल इस्लाम भुइयां ने कहा कि अस्थिरता और आगे अशांति की आशंका के कारण 5 नवंबर को सावर और आशुलिया की 1,863 फैक्ट्रियों में से 70 ने छुट्टी घोषित की। यह दोनों इलाकों की लगभग 3.8 प्रतिशत फैक्ट्रियां हैं। 2 नवंबर को यहां 264 फैक्ट्रियां बंद होने की पुष्टि हुई थी।
श्रमिकों ने सुबह करीब 8:30 बजे जमगोरा में अब्दुल्लापुर-बाइपाइल सड़क रोक दी। पुलिस ने रास्ता खुलवाने की कोशिश की, जिसके बाद पीछा करने की घटनाएं हुईं, पुलिस के एक वाहन को नुकसान पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और साउंड ग्रेनेड इस्तेमाल किए गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुबह करीब 9:30 बजे लगभग 400 से 500 लोगों की भीड़ ने दोशाईद में फैब्रिका निट कॉम्पोजिट के दो गेट तोड़ दिए। इसके बाद फैक्ट्री ने छुट्टी घोषित कर दी। आसपास की कई फैक्ट्रियों ने भी ऐसा ही किया।
कुछ श्रमिकों ने कहा कि कार्यस्थल के बाहर प्रदर्शनों में शामिल होने से इनकार करने पर उन्हें पीटा गया। इस दबाव ने उन कर्मचारियों के लिए एक और जोखिम पैदा किया जो यह तय करने की कोशिश कर रहे थे कि काम पर बने रहें, वेतन अभियान में शामिल हों या घर लौट जाएं।
5 BGB की ढाका बटालियन के कमांडर लेफ्टिनेंट कर्नल तैमूर हसन खान ने कहा कि हालात पिछले दिनों की तुलना में बेहतर थे और उनके अपडेट में शामिल इलाकों में यातायात सामान्य रूप से चल रहा था। उन्होंने सावर और आशुलिया में पांच प्लाटून का जिक्र किया था; BGB मुख्यालय के बाद के बयान में इन इलाकों के लिए 11 प्लाटून आवंटित की गईं।
गाज़ीपुर और फतुल्लाह की सड़कों पर शांति
हालात सुधरने से पहले गाज़ीपुर में लगातार पांच दिन तक प्रदर्शन, सड़क नाकेबंदी और झड़पें हुई थीं। 5 नवंबर को दोपहर 3 बजे तक वहां श्रमिकों के किसी प्रदर्शन की खबर नहीं थी और ढाका-टांगाइल तथा ढाका-मयमनसिंह राजमार्गों पर यातायात सामान्य था।
गाज़ीपुर औद्योगिक पुलिस के अधीक्षक मोहम्मद अमजद हुसैन ने कहा कि पुलिस राजमार्ग खुले रखने की कोशिश कर रही थी। जिन कुछ फैक्ट्रियों ने पहले छुट्टी घोषित की थी, वे बंद रहीं। अंसार और ग्राम रक्षा दल के महानिदेशक मेजर जनरल अब्दुल मोतालेब सज्जाद महमूद के अनुसार, गाज़ीपुर में अंसार की 10 प्लाटून भी तैनात की गईं: छह बुधवार को और चार गुरुवार को।
गुरुवार सुबह फतुल्लाह की मुख्य सड़कें भी श्रमिकों के प्रदर्शन और नाकेबंदी से मुक्त थीं। यहां तीन दिन तक अशांति रही थी। महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस, BGB और औद्योगिक पुलिस तैनात रही। बख्तरबंद वाहन और पानी की बौछार करने वाली गाड़ियां प्रमुख सड़कों पर गश्त कर रही थीं।
फतुल्लाह में प्रदर्शन कुतुबैल-काठेरपूल इलाके में मेट्रो निटिंग, पालमल गारमेंट्स और अबीर फैशन के श्रमिकों के बीच शुरू हुए और फिर ढाका-नारायणगंज लिंक रोड पर शिबू मार्केट तक फैल गए।
बार-बार हुई नाकेबंदी से यात्रियों, विद्यार्थियों, मरीजों और लंबी दूरी का सफर करने वालों की आवाजाही बाधित हुई। सार्वजनिक परिवहन रुकने पर कुछ लोगों को लंबी दूरी पैदल चलनी पड़ी। सप्ताह की शुरुआत में नारायणगंज-2 के सांसद नजरुल इस्लाम आजाद और जिला अधिकारियों की बातचीत से शिबू मार्केट में नाकेबंदी खत्म कराने में मदद मिली।
श्रमिक 30,000 टका क्यों चाहते हैं
परिधान क्षेत्र के न्यूनतम वेतन में पिछली बार दिसंबर 2023 में संशोधन हुआ था। श्रमिकों का कहना है कि अब उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा भोजन, किराया, परिवहन, बिजली और स्वास्थ्य देखभाल पर खर्च होता है। सितंबर में सालाना महंगाई दर 8.34 प्रतिशत थी, जिसमें खाद्य महंगाई 7.22 प्रतिशत और अन्य खर्चों की महंगाई 9.30 प्रतिशत रही।
महंगाई का अर्थ है कि कीमतें बढ़ रही हैं। वेतन स्थिर रहने और जरूरी सामान महंगा होने पर कर्मचारी पहले से कम खरीद पाता है, भले ही वेतन पर्ची पर लिखी रकम न बदली हो।
ढाका के पास वर्चुअल बॉटम्स लिमिटेड में सिलाई ऑपरेटर लैली बेगम, 37, महीने में करीब 15,000 टका कमाती हैं। ओवरटाइम के साथ उनकी कमाई 18,000 से 20,000 टका तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि बेटी, 15, और बेटा, 12, स्कूल छोड़ चुके हैं क्योंकि अब वह उनकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकतीं।
बेगम ने बताया कि उनके परिवार को भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है:
हम मुश्किल से दिन में एक बार ठीक से खाना जुटा पाते हैं। आज सुबह हमने सिर्फ मुरमुरे और बॉम्बे मिक्स [एक नमकीन] खाया। दोपहर के खाने के लिए कुछ नहीं था। आज रात ठीक से खाना मिल जाए, इस उम्मीद में हम भूखे रहे हैं। कल भी ऐसा ही था। अब हम इसी तरह गुजारा करते हैं।
उनका मासिक किराया 3,500 टका है, जो उनकी मूल कमाई का लगभग 23 प्रतिशत है। करीब 2,200 टका का एक रसोई गैस सिलेंडर उनकी कमाई का लगभग 15 प्रतिशत और ले लेगा। उन्होंने कहा कि खाना पकाने के लिए अब वह फेंके गए कागज और अन्य चीजें जलाने लगी हैं।
आशुलिया में काम करने वाले परिधान श्रमिक रसैल खान अपनी पत्नी, बच्चे, मां और छोटे भाई का खर्च उठाते हैं। उन्होंने कहा कि ओवरटाइम सहित 18,000 से 20,000 टका की कमाई पर्याप्त नहीं है। उन पर करीब 100,000 टका का कर्ज जमा हो गया है, जो इस आय सीमा की ऊपरी रकम के पांच महीने की कमाई के बराबर है।
विश्व बैंक के ढाका कार्यालय के पूर्व प्रमुख अर्थशास्त्री जाहिद हुसैन ने कहा कि लगातार महंगाई ने कम वेतन पाने वाले श्रमिकों की खरीद क्षमता घटा दी है। बहुत कम या बिल्कुल बचत न होने पर परिवार भोजन और अन्य जरूरी चीजों समेत रोजमर्रा के खर्च घटाने लगते हैं।
वेतन बोर्ड ने क्या वादा किया है
सरकार ने 1 नवंबर को परिधान क्षेत्र के वेतन की समीक्षा के लिए छह सदस्यों वाला बोर्ड बनाया। इस प्रक्रिया में श्रमिक और नियोक्ता प्रतिनिधि बातचीत करके नया न्यूनतम वेतन तय करेंगे; 30,000 टका की मांग अपने आप स्वीकार नहीं होगी।
4 नवंबर को पहली बैठक के बाद बोर्ड के अध्यक्ष बताए गए जिला एवं सत्र न्यायाधीश सैयद आजाद सुब्हानी ने कहा कि संशोधित वेतन संरचना दिसंबर से लागू होगी। उन्होंने बताया कि श्रमिकों को बढ़ी हुई राशि कब मिलेगी:
इसलिए, श्रमिकों को उनका बढ़ा हुआ वेतन जनवरी में मिलेगा,
बोर्ड ने कहा कि उसकी अगली बैठक में श्रमिकों, फैक्ट्री मालिकों और अन्य संगठनों के प्रस्तावों पर विचार होगा। उस बैठक की तारीख नहीं बताई गई। श्रमिक प्रतिनिधि बाबुल अख्तर ने कर्मचारियों से बातचीत जारी रहने के दौरान फैक्ट्रियों में लौटने की अपील की।
अख्तर ने सोमवार रात अन्य श्रमिक नेताओं से मुलाकात के बाद यह अपील की:
कृपया अपनी फैक्ट्रियों में लौट जाइए,
उन्होंने उचित वेतन के लिए दबाव बनाने का वादा भी किया और गिरफ्तार श्रमिकों की रिहाई तथा उनके खिलाफ मामले वापस लेने की मांग की। आशुलिया की परिधान श्रमिक आलिया अख्तर जैसे कर्मचारियों ने कहा है कि वे भुगतान की समय-सारणी के साथ वेतन वृद्धि की स्पष्ट राशि जानना चाहते हैं।
मौतें, गिरफ्तारियां और व्यवधान की कीमत
परिधान श्रमिक तौफीक हुसैन, 35, की 3 नवंबर को उत्तर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। अशांति के दौरान उन्हें चोट लगी थी। वह गाज़ीपुर की लैला स्टाइल्स लिमिटेड में काम करते थे। श्रम एवं रोजगार मंत्री अरिफुल हक चौधरी ने कहा कि उनकी मौत के जिम्मेदार लोगों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।
पुलिस प्रवक्ता कामरुम मुनीरा ने कहा कि प्रदर्शन शुरू होने के बाद से 58 अधिकारी घायल हुए हैं। श्रमिकों ने भी प्रदर्शनकारियों के घायल होने की कई घटनाओं का जिक्र किया। गाज़ीपुर और सावर में झड़पों की खबरें कवर कर रहे पत्रकार भी घायल हुए या उन पर हमला किया गया।
पुलिस ने कथित आगजनी, तोड़फोड़ और अन्य अपराधों को लेकर हजारों अज्ञात लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। नारायणगंज में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत दर्ज एक मामले में 21 लोगों और 1,000 से 1,500 अज्ञात लोगों के नाम शामिल हैं। फतुल्लाह पुलिस ने कहा कि छह हिरासत में लिए गए लोगों को पूछताछ के लिए सात दिन की पुलिस हिरासत मांगने के साथ अदालत में पेश किया गया।
गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया है कि प्रतिबंधित अवामी लीग के समर्थकों ने अशांति का फायदा उठाया। ढाका महानगर पुलिस ने कहा कि पिछले 24 घंटों में कथित संलिप्तता के चलते पार्टी से जुड़े 33 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मंत्री के व्यापक राजनीतिक आरोप के समर्थन में कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया गया।
सरकार के सूचना सलाहकार डॉ. जाहेद उर रहमान ने कहा कि पुलिस को कानून के मुताबिक काम करना चाहिए और हालात के अनुपात में बल का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने माना कि सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ फुटेज में बल का अनुपातहीन इस्तेमाल दिखाई देता है। अहमद ने कहा कि अधिकारियों को अत्यधिक बल इस्तेमाल न करने का निर्देश दिया गया है।
इस विवाद का असर ऐसे उद्योग पर पड़ रहा है जिसमें लगभग 40 लाख लोग काम करते हैं और जो बांग्लादेश की निर्यात आय का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पैदा करता है। कम श्रम लागत और पश्चिमी देशों के बड़े बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच ने बांग्लादेश को चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा परिधान निर्यातक बनाने में मदद की।
BGMEA के अधिकारी और क्यूट ड्रेस इंडस्ट्री लिमिटेड के प्रबंध निदेशक शेख हुसैन मुहम्मद मुस्तफिज ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को ऐसे दाम देने चाहिए जिनसे बेहतर वेतन देना संभव हो। उन्होंने चेताया कि फैक्ट्रियों पर बढ़ती उत्पादन लागत और प्रतिस्पर्धा का दबाव है। श्रमिकों के लिए फैक्ट्रियां बंद होने का मतलब ओवरटाइम की कमाई का नुकसान भी हो सकता है, जिससे बातचीत से वेतन बढ़ने का इंतजार करते समय उनकी आर्थिक मुश्किलें और बढ़ती हैं।
मुख्य बिंदु
- BGB ने 5 नवंबर को गाज़ीपुर, सावर-आशुलिया, नारायणगंज और मीरपुर में 33 प्लाटून तैनात करने की घोषणा की।
- लाइव ड्रोन फुटेज और कर्मियों के शरीर पर लगे कैमरों की BGB मुख्यालय से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है।
- श्रमिकों की मांग 30,000 टका मासिक न्यूनतम वेतन की है, जो 12,500 टका से 140 प्रतिशत अधिक है।
- वेतन बोर्ड का कहना है कि दिसंबर के संशोधित वेतन का भुगतान जनवरी 2027 में होगा; वृद्धि की राशि अभी तय नहीं हुई है।
- 5 नवंबर को गाज़ीपुर और फतुल्लाह में हालात अपेक्षाकृत शांत रहे, जबकि सावर और आशुलिया की 70 फैक्ट्रियों में छुट्टी घोषित की गई।
- एक श्रमिक की मौत, घायलों, गिरफ्तारियों और कमाई के नुकसान ने वेतन और कामकाजी हालात पर बातचीत की तात्कालिकता बढ़ा दी है।






