बच्चों में करीब 180,000 मामले
इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जंगलों और भूमि में लगी आग से प्रभावित सात प्रांतों और 63 जिलों व शहरों में श्वसन संक्रमण के 401,586 मामले दर्ज किए हैं। इनमें नौ साल और उससे कम उम्र के बच्चों की हिस्सेदारी कुल मामलों की करीब 45% है। यह कुल संख्या 2 नवंबर, 2026 को पश्चिमी इंडोनेशियाई समय के अनुसार शाम 4 बजे तक पहुंची, जब उस दिन 3,906 नए मामले जुड़े।
विषय-सूची
- बच्चों में करीब 180,000 मामले
- स्वास्थ्य आपातस्थिति कैसे बढ़ी
- सबसे ज्यादा बोझ किन पर?
- मध्य कालीमंतन के दो इलाकों में हवा खतरनाक
- प्रांतीय रुझानों पर स्थानीय स्तर पर ध्यान क्यों जरूरी
- ऑक्सीजन और चिकित्सा सुविधा तक पहुंच
- लाखों मास्क और व्यापक देखभाल नेटवर्क
- गांवों में आश्रय और मोबाइल सेवाओं की मांग
- स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आग बुझाने का काम जारी
- मुख्य बिंदु
मंत्रालय की प्रवक्ता विड्यावती ने 4 नवंबर को पूर्वी जकार्ता स्थित राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी, जिसे बीएनपीबी के नाम से जाना जाता है, में ये आंकड़े पेश किए। स्वास्थ्य आपातस्थिति सुमात्रा और कालीमंतन के कुछ हिस्सों में फैली है। वहां लंबे समय से लगी आग ने समुदायों को धुएँ के संपर्क में ला दिया है और क्लीनिकों, अस्पतालों तथा आपातकालीन आपूर्तियों पर लगातार दबाव बढ़ाया है।
3 नवंबर को वायु निगरानी में कोटावरिंगिन तिमूर और पालंगकराया में हवा की स्थिति खतरनाक पाई गई। पूर्वी कालीमंतन में श्वसन संक्रमण के मामले बढ़ रहे थे। विड्यावती ने इस प्रांत को खास चिंता का विषय बताया, जबकि कई अन्य प्रांतों में मामलों में गिरावट दर्ज की गई।
सरकार ने करीब 3.8 मिलियन मास्क वितरित किए हैं और ऑक्सीजन उपकरण, चिकित्सा कर्मियों तथा रेफरल अस्पतालों की व्यवस्था की है। इसके बाद एक सांसद ने गांवों में अधिक मोबाइल चिकित्सा सेवाएं और धुएँ से सुरक्षित कमरे बनाने की मांग की। इससे उन निवासियों की स्थिति पर ध्यान गया जो इलाज से दूर रहते हैं या बाहर काम करने से बच नहीं सकते।
स्वास्थ्य आपातस्थिति कैसे बढ़ी
मंत्रालय के पहले के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त से 21 सितंबर के बीच छह प्रांतों और प्रभावित 63 जिलों में श्वसन संक्रमण के करीब 175,000 मामले सामने आए थे। मंत्रालय के प्रवक्ता बर्टन पंजैतान ने कहा था कि इस संख्या में पांच साल से कम उम्र के बच्चों के 40,363 मामले शामिल हैं।
2 नवंबर तक कुल मामले सितंबर के आंकड़े से करीब 226,586 बढ़कर लगभग 129% अधिक हो गए। निगरानी का दायरा भी छह से बढ़कर सात प्रांतों तक पहुंच गया। कुल आंकड़ों की तुलना करते समय इस बदलाव को ध्यान में रखना जरूरी है: बाद के आंकड़े में अधिक प्रांतों के साथ-साथ बीमारी के दर्ज किए गए अतिरिक्त सप्ताह भी शामिल हैं।
मुख्य तारीखों से पता चलता है कि आग बुझाने, स्वास्थ्य निगरानी और अतिरिक्त सुरक्षा की मांगें किस तरह आगे बढ़ीं:
- जून 2026 से: शुष्क मौसम ने सुमात्रा और कालीमंतन में आग को और भड़काया।
- 18 अगस्त से 21 सितंबर: मंत्रालय ने छह प्रांतों में श्वसन संक्रमण के करीब 175,000 मामले दर्ज किए।
- 2 नवंबर, शाम 4 बजे: सात प्रांतों में कुल मामले 401,586 तक पहुंचे।
- 3 नवंबर, सुबह 9 बजे: वायु निगरानी में दो जिलों या शहरों की हवा खतरनाक और अन्य 15 की अस्वास्थ्यकर पाई गई।
- 4 नवंबर: विड्यावती ने स्वास्थ्य के ताजा आंकड़े और जवाबी उपायों की घोषणा की।
- 5 नवंबर: सांसद असेप रोमी रोमाया ने बेहतर चिकित्सा सेवाओं और धुएँ से सुरक्षा की मांग की।
सबसे ज्यादा बोझ किन पर?
शून्य से पांच साल तक के बच्चों में 91,913 मामले दर्ज किए गए, जबकि छह से नौ साल के बच्चों में 87,704 मामले सामने आए। दोनों समूहों को मिलाकर 179,617 मामले हुए, जो मंत्रालय के कुल मामलों का करीब 44.7% है।
60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में 56,092 मामले दर्ज किए गए। इस समूह को नौ साल और उससे कम उम्र के बच्चों के साथ जोड़ने पर कुल 235,709 मामले होते हैं, जो दर्ज किए गए सभी संक्रमणों का करीब 58.7% है। ये आंकड़े बताते हैं कि स्वास्थ्य अधिकारी छोटे बच्चों और बुजुर्ग निवासियों पर खास ध्यान क्यों दे रहे हैं।
मंत्रालय ने 590 गर्भवती महिलाओं, अस्थमा से पीड़ित 1,530 लोगों और बाहर काम करने वाले 8,086 श्रमिकों की विशेष निगरानी की भी पहचान की। इन श्रेणियों में ऐसे लोग शामिल हैं जिनके संपर्क या स्वास्थ्य स्थितियों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। अस्थमा के मामलों की विरोधाभासी संख्या 3,530 भी प्रकाशित हुई थी, लेकिन मंत्रालय ने इस अंतर को स्पष्ट नहीं किया।
बाहर काम करने वाले श्रमिकों के सामने व्यावहारिक कठिनाई है: धुएँ से बचने के लिए उन्हें अपनी रोजी-रोटी की जगह छोड़नी पड़ सकती है। अस्थमा से पीड़ित लोगों की श्वसन नलिकाओं में पहले से सूजन आ सकती है और वे संकरी हो सकती हैं, जिससे प्रदूषित हवा एक अतिरिक्त चिंता बन जाती है। गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग भी मंत्रालय के सुरक्षा प्रयासों में प्रमुखता से शामिल हैं।
सितंबर के पहले के आंकड़ों में पांच साल से कम उम्र की श्रेणी थी, जबकि नवंबर के आंकड़ों में शून्य से पांच साल की उम्र का उल्लेख है। इसलिए इन दोनों आयु समूहों के बीच वृद्धि की सटीक दर बताने के बजाय, दोनों अवधियों में छोटे बच्चों पर पड़े भारी बोझ की तुलना करना अधिक उचित है।
मध्य कालीमंतन के दो इलाकों में हवा खतरनाक
इंडोनेशिया के वायु प्रदूषण मानक सूचकांक, यानी आईएसपीयू, के अनुसार 3 नवंबर को सुबह 9 बजे कोटावरिंगिन तिमूर जिले में पीएम2.5 सूचकांक 580 और पालंगकराया में 348 दर्ज किया गया। दोनों इलाकों को खतरनाक श्रेणी में रखा गया। अन्य 15 जिलों और शहरों में हवा अस्वास्थ्यकर थी।
पीएम2.5 से आशय हवा में मौजूद 2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे महीन कणों से है। इनका आकार छोटा होने के कारण ये फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। आईएसपीयू के जरिए घोषित आंकड़े सूचकांक रीडिंग हैं, जो प्रदूषण के माप को ऐसी श्रेणियों में बदलते हैं जो स्वास्थ्य जोखिम का स्तर बताती हैं।
पूर्वी कालीमंतन के पश्चिम कुताई जिले में 2 नवंबर की सुबह पीएम2.5 का सूचकांक 164 था, जो अस्वास्थ्यकर श्रेणी में आता है। यह स्थानीय रीडिंग उस प्रांत में प्रदूषण का ठोस माप देती है, जहां अधिकारियों को श्वसन संबंधी बीमारियों में बढ़ोतरी की खास चिंता थी।
ये रीडिंग खास जगहों और समय की स्थिति बताती हैं। बाहर समय बिताना सुरक्षित है या नहीं, यह तय करने वाले निवासियों के लिए स्थानीय वायु श्रेणी प्रासंगिक बनी रहती है, भले ही पूरे प्रांत में संक्रमण के मामले घटने लगे हों।
प्रांतीय रुझानों पर स्थानीय स्तर पर ध्यान क्यों जरूरी
विड्यावती की 4 नवंबर की ब्रीफिंग के अनुसार, मध्य कालीमंतन, दक्षिण सुमात्रा और रियाउ में श्वसन संक्रमण के मामले घट रहे थे। पूर्वी कालीमंतन और पश्चिम कालीमंतन में बढ़ोतरी दर्ज की गई। ब्रीफिंग के एक विरोधाभासी विवरण में पश्चिम कालीमंतन को उन प्रांतों में रखा गया था जहां मामले घट रहे थे; पूर्वी कालीमंतन को लगातार बिगड़ते हालात वाला बताया गया।
विड्यावती ने पूर्वी कालीमंतन में स्वास्थ्य केंद्रों पर कड़ी निगरानी और तैयारी का आह्वान किया। मध्य कालीमंतन यह भी दिखाता है कि स्वास्थ्य के अलग-अलग संकेतक अलग समय पर बदल सकते हैं: वहां संक्रमण के मामले घट रहे थे, जबकि कोटावरिंगिन तिमूर और पालंगकराया में हवा अब भी खतरनाक थी।
कई इलाकों के रोजाना के स्थानीय आंकड़े भी दिए गए। रियाउ में एक दिन में करीब 23 मामलों का उच्चतम स्तर दर्ज किया गया था, पश्चिम कालीमंतन में रोजाना छह मामलों का उच्चतम स्तर था, जबकि दक्षिण कालीमंतन के स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना शून्य से चार मामले सामने आए। देशभर में जुड़े 3,906 मामलों के साथ इन छोटे स्थानीय आंकड़ों का दायरा स्पष्ट नहीं किया गया था।
दक्षिण कालीमंतन के बनजारबारू, रियाउ के पेकनबारू और पश्चिम कालीमंतन के पोंटियानक को निगरानी के दायरे में आने वाले घनी आबादी वाले इलाकों के रूप में चिन्हित किया गया। बड़े शहरी समुदायों और अन्य स्थानों पर बिगड़ते रुझानों की सेवा संबंधी जरूरतें अलग-अलग हैं। इसलिए आपूर्ति और कर्मचारियों को स्थानीय स्थितियों के मुताबिक तैनात करना जरूरी है।
ऑक्सीजन और चिकित्सा सुविधा तक पहुंच
सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की मदद के लिए रियाउ में 10 ऑक्सीजन केंद्र स्थापित किए गए हैं। विड्यावती ने कहा कि मंत्रालय की चिंता सिर्फ केंद्रों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी है कि इलाज की जरूरत वाले लोग वास्तव में उन तक पहुंच पाएं।
स्वास्थ्य मंत्रालय की प्रवक्ता के रूप में विड्यावती ने कहा कि सहायता तक पहुंच जवाबी कार्रवाई का एक अहम हिस्सा है:
"हमारी चिंता सिर्फ ऑक्सीजन केंद्रों की उपलब्धता को लेकर नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि जिन लोगों को ऑक्सीजन सहायता की जरूरत है, खासकर सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोग, वे आसानी से इसका लाभ ले सकें," उन्होंने कहा।
एक्यूट रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन, जिसे अंग्रेजी में अक्सर एआरआई और इंडोनेशियाई में आईएसपीए कहा जाता है, सांस के मार्ग को प्रभावित करने वाले संक्रमणों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला व्यापक शब्द है। धुआँ इन मार्गों में जलन पैदा कर सकता है और सांस की मौजूदा समस्याओं को बढ़ा सकता है। निमोनिया फेफड़ों को प्रभावित करने वाला संक्रमण है और इसमें अधिक गहन चिकित्सा देखभाल की जरूरत हो सकती है।
विड्यावती ने आगाह किया कि कुछ जगहों पर मामलों में गिरावट आने का मतलब गंभीर बीमारी पर ध्यान कम करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और अन्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को देखभाल की जरूरत वाले समूहों में रखा:
"हमें सतर्कता कम नहीं करनी चाहिए। निमोनिया एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसके लिए चिकित्सा देखभाल जरूरी है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों जैसे संवेदनशील समूहों को," उन्होंने कहा।
लाखों मास्क और व्यापक देखभाल नेटवर्क
मंत्रालय ने दक्षिण कालीमंतन, मध्य कालीमंतन, पश्चिम कालीमंतन, पूर्वी कालीमंतन, जांबी, रियाउ और दक्षिण सुमात्रा में करीब 3.8 मिलियन मास्क वितरित किए हैं। ये सात प्रांत स्वास्थ्य संबंधी हालिया जवाबी कार्रवाई का भौगोलिक केंद्र हैं।
अन्य सहायता में 280 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, 939 ऑक्सीजन सिलेंडर और मेडिकल दस्तानों के 41,000 जोड़े शामिल हैं। कंसंट्रेटर आसपास की हवा खींचकर अधिक सांद्रता वाला ऑक्सीजन देता है, जबकि सिलेंडर में ऑक्सीजन जमा रहती है। मरीजों को अतिरिक्त ऑक्सीजन की जरूरत होने पर दोनों चिकित्सा देखभाल में मदद कर सकते हैं।
मंत्रालय ने सुरक्षा उपकरण, एयर प्यूरिफायर, दवाएं, विटामिन, पूरक आहार और अन्य चिकित्सा आपूर्तियां भी भेजीं। विड्यावती ने कहा कि सहायता अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों की जरूरत के अनुसार दी गई, जिसमें अधिक जोखिम और इलाज की मांग वाले स्थानों पर खास ध्यान रखा गया।
तैयार किए गए देखभाल नेटवर्क में 1,691 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 360 रेफरल अस्पताल, 87 जनस्वास्थ्य प्रयोगशालाएं और पब्लिक सेफ्टी सेंटर 119 सेवा शामिल हैं। डॉक्टरों, नर्सों, दाइयों, फार्मासिस्टों, पोषण कर्मियों और एंबुलेंस चालकों को जवाबी कार्रवाई में लगाया गया है।
निवासियों के लिए इस नेटवर्क की व्यावहारिक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि शुरुआती संपर्क से इलाज तक पहुंचने का रास्ता कितना आसान है: पास की सेवा ढूंढना, जांच करवाना और जरूरत पड़ने पर अस्पताल पहुंचना। ये आंकड़े व्यापक जवाबी प्रयास दिखाते हैं, जबकि मोबाइल देखभाल की मांग उन समुदायों पर केंद्रित है जहां इन केंद्रों तक आसानी से पहुंचना संभव नहीं।
गांवों में आश्रय और मोबाइल सेवाओं की मांग
नेशनल अवेकनिंग पार्टी से इंडोनेशियाई संसद के आयोग IX के सदस्य असेप रोमी रोमाया ने 5 नवंबर को मंत्रालय से धुंध से प्रभावित समुदायों के लिए सेवाएं मजबूत करने का आग्रह किया। उनकी मांगों में दवाएं, रेस्पिरेटर मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सा कर्मचारी शामिल थे।
असेप ने स्वास्थ्य शिविरों और मोबाइल चिकित्सा सेवाओं को दूरदराज के इलाकों, खासकर उन जगहों पर प्राथमिकता देने की मांग की जहां श्वसन संबंधी मामले अब भी बढ़ रहे थे। चिकित्सा दलों को निवासियों के करीब ले जाने से प्रभावित समुदायों और स्थापित स्वास्थ्य केंद्रों के बीच की दूरी कम होगी।
उन्होंने बाहर काम करने वाले श्रमिकों और आसपास के निवासियों को मुफ्त रेस्पिरेटर मास्क समान रूप से वितरित करने की मांग भी की। रेस्पिरेटर महीन वायु कणों को छानने के लिए बनाए जाते हैं। उनकी मांग इस तरह की सुरक्षा पर केंद्रित थी, जबकि मंत्रालय ने 3.8 मिलियन मास्क बांटने की जानकारी दी थी, लेकिन उनके प्रकार नहीं बताए थे।
असेप ने कहा कि गांव और पड़ोस के अधिकारियों को संवेदनशील निवासियों के लिए एयर कंडीशनिंग और एयर प्यूरिफायर वाले कमरे तैयार करने चाहिए। ऐसे कमरों में अस्थमा से पीड़ित और बुजुर्ग लोग धुआँ घना होने पर शरण ले सकेंगे। उनके प्रस्ताव अतिरिक्त कदम उठाने की मांग थे; इन्हें लागू करने की कोई समयसीमा घोषित नहीं की गई।
स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ आग बुझाने का काम जारी
आपातस्थिति के शुरुआती दौर में घोषित सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंडोनेशिया ने अगस्त से आग बुझाने के लिए 64 विमान और 54,394 कर्मियों को तैनात किया। जून से बनी शुष्क परिस्थितियों ने सुमात्रा और कालीमंतन में आग फैलने में मदद की थी और धुएँ का असर मलेशिया तथा सिंगापुर तक भी पहुंचा।
जापान ने कालीमंतन में अभियानों के लिए तीन सीएच-47 चिनूक हेलीकॉप्टरों और करीब 180 सैन्य कर्मियों की मदद दी, जिनमें विमान चालक दल और सहायक कर्मचारी शामिल थे। इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल आग वाले इलाकों पर पानी गिराने के लिए किया गया।
जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स का पोत जेएस कुनिसाकी जापानी उपकरणों और कर्मियों को लेकर आया। जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, केतापांग के पास समुद्र में उसकी तैनाती से दो स्थानों से आग बुझाने के अभियान चलाना संभव हुआ।
स्वास्थ्य संबंधी कार्रवाई का तात्कालिक काम आग बुझाने से अलग है: धुएँ के संपर्क को कम करना और पहले से बीमार लोगों का इलाज करना। विड्यावती ने यह भी आगाह किया कि धुआँ और धूल आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं। उन्होंने निवासियों को संपर्क से बचने और आंखों में दर्द या खुजली होने पर उन्हें न मलने की सलाह दी।
कुल मिलाकर यह ऐसी आपातस्थिति है जिसमें अलग-अलग इलाकों में हालात अलग रफ्तार से सुधर रहे हैं। कुछ प्रांतों में संक्रमण के मामले घटे हैं, लेकिन मध्य कालीमंतन में खतरनाक प्रदूषण, पूर्वी कालीमंतन में बीमारी का बढ़ना और प्रभावित बच्चों की बड़ी संख्या चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच तथा धुएँ से सुरक्षा को जवाबी कार्रवाई के केंद्र में बनाए हुए हैं।
मुख्य बिंदु
- स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2 नवंबर, 2026 तक सात प्रांतों और 63 जिलों व शहरों में श्वसन संक्रमण के 401,586 मामले दर्ज किए।
- नौ साल और उससे कम उम्र के बच्चों में 179,617 मामले थे, जो कुल का करीब 44.7% है।
- 3 नवंबर को कोटावरिंगिन तिमूर और पालंगकराया में हवा की रीडिंग खतरनाक थी; अन्य 15 जिलों और शहरों में हवा अस्वास्थ्यकर थी।
- पूर्वी कालीमंतन में मामलों का बढ़ता रुझान स्वास्थ्य केंद्रों पर कड़ी निगरानी और बेहतर तैयारी की मांग का कारण बना।
- मंत्रालय ने करीब 3.8 मिलियन मास्क वितरित किए और ऑक्सीजन उपकरण, चिकित्सा दल तथा स्वास्थ्य केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया।
- अतिरिक्त मांगों में दूरदराज के समुदायों के लिए मोबाइल देखभाल, मुफ्त रेस्पिरेटर और धुएँ से सुरक्षित गांवों के कमरे शामिल हैं।






