कैमरों का नेटवर्क बढ़ने के साथ पुलिस चेहरे की पहचान से खोज की तैयारी में
हांगकांग पुलिस इस महीने अपने स्मार्टव्यू निगरानी नेटवर्क में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चेहरे की पहचान शुरू करने और साल के अंत तक कम से कम चार शॉपिंग मॉल के कैमरे इससे जोड़ने की योजना बना रही है। पुलिस का कहना है कि ये व्यवस्थाएं स्थानीय निजता कानून के अनुरूप हैं। पुलिस के अनुसार, 31 अक्टूबर तक इस नेटवर्क ने 2024 में शुरू होने के बाद से 2,192 आपराधिक मामले सुलझाने और 2,831 गिरफ्तारियां करने में मदद की थी।
विषय-सूची
- कैमरों का नेटवर्क बढ़ने के साथ पुलिस चेहरे की पहचान से खोज की तैयारी में
- चेहरे की पहचान से तलाशी कैसे होगी
- परीक्षण के दौरान तलाशी में क्या हुआ?
- कौन-से शॉपिंग मॉल नेटवर्क से जुड़ेंगे?
- तलाशी को मंजूरी कौन देगा?
- वीडियो मिटने के बाद कौन-सी जानकारी बची रहेगी?
- नेटवर्क की सुरक्षा को लेकर पुलिस का कहना
- मौजूदा नेटवर्क से 60,000 कैमरों तक
- विस्तार की समय-सारणी और अब तक के नतीजे
- मुख्य बातें
इस विस्तार से अधिकारी चुनी हुई रिकॉर्डिंग में किसी चेहरे की तलाश कर सकेंगे या किसी संदिग्ध अथवा लापता व्यक्ति के जुड़े कैमरे में दिखने पर अलर्ट पा सकेंगे। पुलिस का कहना है कि इस तकनीक ने पहले ही मनोभ्रंश से पीड़ित 80 वर्ष से अधिक उम्र के एक व्यक्ति को लापता होने की सूचना मिलने के करीब 90 मिनट के भीतर खोजने और लूट के एक संदिग्ध को गिरफ्तार करने में मदद की है।
ऑपरेशंस ब्यूरो के वरिष्ठ अधीक्षक लेउंग मिंग-लेउंग ने कहा कि चेहरे की पहचान के इस्तेमाल के लिए इंस्पेक्टर या उससे वरिष्ठ पद के अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी। पुलिस ने इस्तेमाल से पहले और बाद की जांच, कैमरों तथा तलाशी की अवधि पर पाबंदियों और वीडियो व चेहरे की पहचान से जुड़े रिकॉर्ड के लिए अलग-अलग भंडारण अवधियों की जानकारी दी।
यह बदलाव पुलिस के लगाए कैमरों तक सीमित नहीं है। पुलिस के करीब 10,000 कैमरे पहले से लगे हैं और सरकारी विभागों तथा सार्वजनिक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे लगभग 10,000 कैमरों से भी नेटवर्क जुड़ा है। शॉपिंग मॉल के कैमरे जुड़ने से यह साझा नेटवर्क निजी प्रबंधन वाले परिसरों तक फैलेगा और अधिकारी हर जगह जाकर फुटेज लेने के बजाय अपने कार्यालयों से इसे हासिल कर सकेंगे।
पुलिस का लक्ष्य 2028 तक स्मार्टव्यू में करीब 60,000 कैमरे शामिल करना है। खरीदारों, निवासियों और यात्रियों के लिए तात्कालिक बदलाव यह है कि पुलिस अलग-अलग जगहों की रिकॉर्डिंग कितनी तेजी से खोज सकेगी, जिनमें दूसरी संस्थाओं द्वारा मूल रूप से जुटाई गई फुटेज भी शामिल है।
चेहरे की पहचान से तलाशी कैसे होगी
लेउंग ने बताया कि अधिकारी इस तकनीक का दो तरह से इस्तेमाल कर सकेंगे। बीते समय की रिकॉर्डिंग में तलाशी के दौरान पुलिस किसी व्यक्ति के चेहरे की विशेषताएं दर्ज करके सिस्टम से चुने हुए कैमरों की खास रिकॉर्डिंग या तय अवधि के फुटेज में उस व्यक्ति को खोजने को कहेगी। इससे अपराध के बाद किसी संदिग्ध की गतिविधियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
लाइव तलाशी में सिस्टम चुने हुए कैमरों की फीड पर उस व्यक्ति को खोजेगा जिसकी तस्वीर उसमें दर्ज की गई हो। पुलिस के अनुसार, किसी लापता बुजुर्ग के मामले में परिवार हाल की तस्वीर इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकता है। जुड़े कैमरे में व्यक्ति का पता चलने पर सिस्टम अलर्ट जारी करेगा।
चेहरे की पहचान करने वाला सॉफ्टवेयर किसी तस्वीर में चेहरे की विशेषताओं की तुलना संदर्भ तस्वीर में मौजूद विशेषताओं से करता है। इससे अधिकारियों को हाथ से जांचने के लिए फुटेज की मात्रा घट सकती है। इसके बाद अधिकारी संभावित मिलान से जुड़ी जगह और समय की जानकारी के आधार पर तलाश कर सकते हैं।
अधीक्षक रेमंड चेंग ने कहा कि यह सुविधा पुलिस के कैमरों और दूसरी संस्थाओं से जुड़ी फीड पर सक्रिय की जा सकती है। कंप्यूटिंग क्षमता यह सीमित करेगी कि एक ही समय में कितने कैमरों पर चेहरे की पहचान चल सकती है। हालांकि, किसी अभियान के लिए जरूरत पड़ने पर चुने हुए कैमरों पर लगातार विश्लेषण किया जा सकता है।
इस तरह स्मार्टव्यू के कैमरे चौबीसों घंटे काम कर सकते हैं, जबकि चेहरे की पहचान का इस्तेमाल खास तलाशी के लिए किया जाएगा। पुलिस ने कहा कि यह सुविधा सक्रिय आपराधिक जांच या उन लापता लोगों को खोजने के प्रयासों के दौरान शुरू की जाएगी जिन्हें अधिक जोखिम में माना जाता है; इसे हर कैमरे पर लगातार नहीं चलाया जाएगा।
परीक्षण के दौरान तलाशी में क्या हुआ?
मनोभ्रंश से पीड़ित 80 वर्ष से अधिक उम्र के एक व्यक्ति को देखभाल गृह से निकलने के बाद परीक्षण के दौरान खोज लिया गया। ऑपरेशंस ब्यूरो के मुख्य निरीक्षक लेउंग यिन-मान ने कहा कि उस व्यक्ति के पास न फोन था, न ऑक्टोपस कार्ड, इसलिए इन तरीकों से उसकी जगह का पता लगाना मुश्किल था।
मुख्य निरीक्षक के अनुसार, पुलिस ने उसकी तस्वीर स्मार्टव्यू में दर्ज की और सिस्टम ने करीब 20 मिनट में उसकी जगह पहचान ली। परिवार की सूचना से लेकर उसे खोजने तक कुल समय करीब डेढ़ घंटा था। ये दोनों आंकड़े उसी तलाशी के अलग-अलग चरणों को दर्शाते हैं।
पुलिस ने लूट की एक जांच का भी जिक्र किया, जिसमें संदिग्ध ने कई बार कपड़े बदले और वाहन भी बदले। अधिकारियों ने कहा कि स्मार्टव्यू ने उसके भागने के रास्ते का पता लगाने में मदद की और अपराध स्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर उसे एक घंटे से कुछ अधिक समय में गिरफ्तार कर लिया गया।
एक अन्य हालिया अभियान में हांगकांग-झुहाई-मकाऊ पुल के निरीक्षण बूथ से वाहन टकराने के बाद चालक का पीछा करते हुए तुएन मुन तक उसकी गतिविधियां देखी गईं। स्मार्टव्यू में स्वचालित नंबर प्लेट पहचान की सुविधा भी है। पुलिस के अनुसार, इसने फर्जी नंबर प्लेट इस्तेमाल करने वाले एक वाहन की पहचान करने में मदद की थी।
कौन-से शॉपिंग मॉल नेटवर्क से जुड़ेंगे?
पहले चरण में कम से कम चार मॉल जुड़ने की उम्मीद है: ताई कोक त्सुई का ओलंपियन सिटी, तुएन मुन टाउन प्लाजा, क्वाई चुंग शॉपिंग सेंटर और फानलिंग का सिएरा लाइफ। साल के अंत तक पहली कैमरा फीड जुड़ने की उम्मीद है।
मौजूदा कैमरों को जोड़ने से पुलिस को फुटेज तक अधिक सीधी पहुंच मिलेगी। पहले जिन अधिकारियों को कई परिसरों में जाकर रिकॉर्डिंग हासिल करने की व्यवस्था करनी पड़ती थी, वे स्मार्टव्यू के जरिये जुड़ी फीड देख सकेंगे। पुलिस ने कहा कि सिस्टम में शामिल किए गए मॉल के कैमरों पर भी चेहरे की पहचान उपलब्ध होगी।
लेउंग ने कहा कि मॉल पहले से ही सार्वजनिक सुरक्षा के लिए सुरक्षा कैमरे चलाते हैं। उनके मुताबिक, पुलिस के कानूनी सलाहकारों और व्यक्तिगत डेटा की निजता आयुक्त ने प्रस्तावित कनेक्शन का आकलन किया है और इसे निजता संबंधी आवश्यकताओं के अनुरूप माना है।
मॉल में पहले की तरह यह सूचना लगी रहेगी कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग हो रही है। पुलिस ने कहा कि न्याय विभाग की सलाह थी कि स्मार्टव्यू से कनेक्शन का खुलासा स्वैच्छिक होना चाहिए। अधिकारी मॉल से स्मार्टव्यू की सूचना लगाने का अनुरोध करेंगे, लेकिन हर कैमरे के नीचे ऐसा लेबल लगाना अनिवार्य नहीं होगा।
आगंतुकों के लिए रिकॉर्डिंग जारी होने की सूचना और यह बताने वाली सूचना कि फुटेज पुलिस नेटवर्क से जुड़ी है, अलग-अलग जानकारी देती हैं। पुलिस द्वारा बताई गई व्यवस्था के तहत स्मार्टव्यू से जुड़ी अतिरिक्त सूचना लगाना मॉल संचालक की पसंद पर निर्भर करेगा।
तलाशी को मंजूरी कौन देगा?
लेउंग ने कहा कि अधिकारियों को बताना होगा कि स्मार्टव्यू की जरूरत क्यों है, किन कैमरों और रिकॉर्डिंग अवधियों को शामिल किया जाएगा और इंस्पेक्टर या उससे वरिष्ठ अधिकारी से मंजूरी लेनी होगी। निर्धारित पदों पर तैनात प्रशिक्षित कर्मचारी आवेदन प्रस्तुत करेंगे।
वरिष्ठ अधीक्षक ने मंजूरी देने में मार्गदर्शन करने वाले सवाल बताए:
"हम पहले पूछते हैं कि क्या अपराध सुलझाने के लिए स्मार्टव्यू का इस्तेमाल जरूरी है। कितने कैमरों और कितनी फुटेज की जांच होनी चाहिए? क्या इसका दायरा जांच के उद्देश्यों के अनुरूप है? किसी भी आवेदन को मंजूरी देने से पहले इन बातों पर फैसला होना चाहिए," लेउंग ने कहा।
पुलिस ने कहा कि इस्तेमाल के बाद की समीक्षा में जांचा जाएगा कि असल तलाशी दी गई अनुमति के अनुरूप थी या नहीं, जिसमें देखे गए कैमरों की संख्या भी शामिल है। फुटेज तक पहुंचने से पहले अधिकारियों को दो आंतरिक परीक्षाएं भी पास करनी होंगी।
लेउंग ने कहा कि स्मार्टव्यू का इस्तेमाल चार वैधानिक उद्देश्यों तक सीमित है: राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा, अपराध रोकना और उसका पता लगाना, सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना। उन्होंने कहा कि कैमरे सार्वजनिक स्थानों पर लगे हैं और संचालन प्रक्रियाएं स्वतंत्र निजता प्रभाव आकलन तथा निजता आयुक्त से परामर्श के बाद तय की गई हैं।
शुरू होने की कोई निश्चित तारीख, प्रकाशित सटीकता दर या चेहरे के गलत मिलान से निपटने की विस्तृत प्रक्रिया नहीं बताई गई। यह समझने के लिए ये जानकारियां अहम हैं कि कंप्यूटर का अलर्ट जांच की दिशा कैसे बनता है और कार्रवाई से पहले अधिकारी उसकी पुष्टि कैसे करते हैं।
वीडियो मिटने के बाद कौन-सी जानकारी बची रहेगी?
पुलिस ने सामान्य वीडियो और चेहरे की पहचान से तैयार जानकारी के लिए अलग-अलग भंडारण अवधि बताई। लेउंग ने कहा कि फुटेज 30 दिनों बाद अपने आप मिटा दी जाएगी, जबकि व्यवस्था के अन्य विवरणों में अधिकतम अवधि 31 दिन बताई गई है।
चेहरे की तस्वीरें और उनसे जुड़ी जानकारी 180 दिनों तक रखी जा सकती है। पुलिस ने बताया कि इस जानकारी में जगह, तारीख, समय और चेहरे की विशेषताएं शामिल हैं। मेटाडेटा किसी रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारी होती है, जैसे तस्वीर कहां और कब ली गई।
इसलिए चेहरे की पहचान का रिकॉर्ड मूल वीडियो नियमित रूप से मिटाए जाने के बाद भी खोजा जा सकता है। वीडियो के लिए बताई गई 30 दिन की अवधि के हिसाब से 180 दिन की सीमा छह गुना लंबी है। इस अंतर से पुलिस को किसी व्यक्ति की दर्ज मौजूदगी की जांच के लिए अधिक समय मिलेगा।
पुलिस ने कहा कि भंडारण की व्यवस्था जांच की जरूरतों, लागत और कानूनी आवश्यकताओं के बीच संतुलन रखती है। उसके विवरण के मुताबिक, जहां फुटेज को सुरक्षित रखना जनहित में हो, वहां उसे सामान्य अवधि से आगे भी रखा जा सकता है।
नेटवर्क की सुरक्षा को लेकर पुलिस का कहना
लेउंग ने कहा कि स्मार्टव्यू एक समर्पित फाइबर नेटवर्क पर चलता है, जिसे केवल पुलिस के इस्तेमाल के लिए बिछाया गया है। पुलिस ने अपने सिस्टम और बाहरी संस्थाओं से जुड़े कैमरों के बीच फायरवॉल के जरिये अलगाव, कमजोरियों की नियमित जांच और सरकारी सुरक्षा मानकों के अनुपालन की भी जानकारी दी।
फायरवॉल नेटवर्कों के बीच आने-जाने वाले डेटा को नियंत्रित करता है। इस व्यवस्था में इसका उद्देश्य बाहरी कैमरा सिस्टम और पुलिस नेटवर्क के बीच कनेक्शन को नियंत्रित करना है। समर्पित फाइबर पुलिस को डेटा भेजने के लिए अपना आरक्षित मार्ग देता है।
पुलिस ने कहा कि इन उपायों से हैकिंग या जानकारी चोरी होने का जोखिम कम है। मॉल के सिस्टम जुड़ने से प्रबंधित किए जाने वाले कनेक्शनों की संख्या फिर भी बढ़ेगी; सरकारी विभागों और सार्वजनिक संगठनों से पहले से स्थापित कनेक्शन इसके अतिरिक्त होंगे। सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय सिस्टम और बाहरी फीड के उसमें आने वाले रास्तों, दोनों पर लागू होगी।
मौजूदा नेटवर्क से 60,000 कैमरों तक
स्मार्टव्यू 2024 में उन जगहों पर ध्यान देते हुए शुरू हुआ था जहां अपराध दर और पैदल आवाजाही अधिक थी। अब पुलिस दूसरे चरण को व्यापक बता रही है, जिसका उद्देश्य परिवहन सुविधाओं, रिहायशी इलाकों और अन्य सार्वजनिक स्थानों में मौजूद कमियों को दूर करना है।
कवरेज वाले या विस्तार के लिए चिन्हित स्थानों में एमटीआर की सुविधाएं, हांगकांग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, काई तक स्पोर्ट्स पार्क, सुरंगें, प्रमुख सड़कें, सार्वजनिक आवासीय परिसर, मनोरंजन स्थल और सीमा नियंत्रण चौकियां शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि दूसरे चरण में नए कैमरे लगाने और मौजूदा सिस्टम जोड़ने के जरिये हर साल करीब 20,000 कैमरे शामिल किए जाएंगे।
फिलहाल लगे या जुड़े करीब 20,000 कैमरे 2028 के 60,000 के लक्ष्य का लगभग एक-तिहाई हैं। तीसरे चरण में 2028 से 2031 के बीच 6,500 और कैमरे जोड़े जाएंगे, जिनमें विकसित हो रहा नॉर्दर्न मेट्रोपोलिस क्षेत्र भी शामिल है। इससे नियोजित कुल संख्या करीब 66,500 हो जाएगी।
पहले के 4.07 अरब हांगकांग डॉलर के विस्तार प्रस्ताव में मार्च 2031 तक नए उपकरणों और सिस्टम एकीकरण के काम पर खर्च की योजना दी गई थी। इसमें यह अनुमान भी था कि सालाना परिचालन खर्च 2026-27 वित्त वर्ष के 72.926 मिलियन हांगकांग डॉलर से बढ़कर 2036-37 से आगे 243.119 मिलियन हांगकांग डॉलर हो जाएगा।
ताजा घोषणा में ध्यान नेटवर्क के आकार से हटकर इस बात पर है कि अधिकारी इसका इस्तेमाल कैसे कर सकेंगे। अधिक कैमरों से तलाशी के लिए ज्यादा जगहें मिलेंगी; चेहरे की पहचान से चुनी हुई फीड में किसी खास व्यक्ति को ढूंढने का तरीका मिलेगा।
विस्तार की समय-सारणी और अब तक के नतीजे
पुलिस ने 31 अक्टूबर तक स्मार्टव्यू की मदद से 2,192 मामले सुलझाने और 2,831 गिरफ्तारियां करने का श्रेय नेटवर्क को दिया। इनमें हत्या, लूट और आगजनी की जांचें शामिल थीं। ये आंकड़े नेटवर्क शुरू होने के बाद के काम के हैं, जबकि चेहरे की पहचान शुरू करने की योजना से पहले उसका परीक्षण जारी था।
पुलिस की बताई समय-सारणी यह है:
- 2024: स्मार्टव्यू ने काम शुरू किया; शुरुआत में उन जगहों को लक्ष्य बनाया गया जहां अपराध दर और पैदल आवाजाही अधिक थी।
- 31 अक्टूबर: पुलिस ने नेटवर्क की मदद से 2,192 मामले सुलझाने और 2,831 गिरफ्तारियां दर्ज कीं।
- इस महीने: पुलिस की योजना चेहरे की पहचान औपचारिक रूप से शुरू करने की है।
- साल के अंत तक: शॉपिंग मॉल के पहले कैमरा कनेक्शन जुड़ने की उम्मीद है।
- 2028 तक: नेटवर्क में करीब 60,000 कैमरे शामिल करने का लक्ष्य है।
- 2028 से 2031 के बीच: नॉर्दर्न मेट्रोपोलिस में कवरेज सहित 6,500 और कैमरे लगाने की योजना है।
परिवारों के लिए, किसी जोखिमग्रस्त लापता व्यक्ति की तलाश का यह परीक्षण तेजी से खोजे जाने का ठोस उदाहरण है। मॉल और परिवहन सुविधाओं से गुजरने वाले लोगों के लिए, विस्तार का अर्थ है कि एक ही पुलिस सिस्टम के जरिये अधिक रिकॉर्डिंग तक पहुंच संभव होगी, जबकि चेहरे की पहचान के रिकॉर्ड सामान्य वीडियो की तुलना में काफी लंबे समय तक रखे जा सकते हैं।
मुख्य बातें
- पुलिस की इस महीने स्मार्टव्यू में चेहरे की पहचान शुरू करने की योजना है; साल के अंत तक मॉल के पहले कैमरे जुड़ने की उम्मीद है।
- तलाशी के लिए इंस्पेक्टर या उससे वरिष्ठ अधिकारी की मंजूरी और इस्तेमाल के बाद समीक्षा जरूरी होगी।
- चुने हुए कैमरों पर चेहरे का लगातार विश्लेषण चल सकता है, लेकिन कंप्यूटिंग क्षमता की सीमा के कारण पूरे नेटवर्क पर एक साथ इसका इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
- वीडियो आम तौर पर 30 से 31 दिन तक रखा जाएगा; चेहरे की तस्वीरें और उनसे जुड़ी जानकारी 180 दिनों तक रखी जा सकती है।
- पुलिस का कहना है कि मॉल को नेटवर्क से जोड़ना निजता कानून के अनुरूप है, जबकि स्मार्टव्यू की अतिरिक्त सूचनाएं लगाना स्वैच्छिक होगा।
- नेटवर्क को 2028 तक करीब 60,000 और 2031 तक 66,500 कैमरों तक बढ़ाने का लक्ष्य है।






