अमेरिकी चुनाव के नतीजों से एआई निवेश को लेकर आशंकाएं गहराईं, निक्केई 60,000 से नीचे

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Nikkei Sinks Below 60,000 as U.S. Election Results Deepen AI Investment Fears

टोक्यो में एआई को लेकर चिंता पूरे बाजार में फैली

जापान का निक्केई स्टॉक एवरेज शुक्रवार, 6 नवंबर को कुछ समय के लिए 7% से अधिक लुढ़क गया। निवेशकों को आशंका थी कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) डेटा केंद्रों का निर्माण धीमा पड़ सकता है। सूचकांक सुबह के कारोबार के अंत तक कुछ संभला, लेकिन फिर भी 3,219.29 अंक यानी 5.27% गिरकर 57,858.61 पर रहा।

विषय-सूची
  1. टोक्यो में एआई को लेकर चिंता पूरे बाजार में फैली
  2. चुनाव से एआई निवेशक क्यों चिंतित हुए
  3. बिकवाली कैसे तेज हुई
  4. जापानी चिप आपूर्तिकर्ताओं को एक और झटका
  5. महंगे शेयरों के बीच मुनाफे पर संदेह
  6. अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला पर भी दबाव
  7. एशिया में गिरावट के बीच दक्षिण कोरिया में कारोबार रुका
  8. तेल और मुद्राओं ने अनिश्चितता की एक और परत जोड़ी
  9. गिरावट प्रौद्योगिकी क्षेत्र से आगे पहुंची
  10. मुख्य बिंदु

व्यापक टोपिक्स सूचकांक 213.89 अंक यानी 5.43% गिरकर 3,726.50 पर आ गया। टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज के प्राइम मार्केट में 90% से अधिक शेयरों में गिरावट आई। इस तरह सेमीकंडक्टर कंपनियों के नेतृत्व में शुरू हुई बिकवाली प्रौद्योगिकी क्षेत्र से कहीं आगे तक फैल गई।

निक्केई मई के बाद पहली बार 60,000 से नीचे आया और 13 अप्रैल के बाद के अपने सबसे निचले स्तर को छुआ। 22 जून को दर्ज 72,831.73 के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में सुबह कारोबार के अंत का स्तर करीब 20.6% नीचे था, जो पारंपरिक रूप से मंदी के बाजार की सीमा मानी जाती है।

निवेशक एक साथ दो दबावों का सामना कर रहे थे: एआई पर खर्च से पर्याप्त मुनाफा होने को लेकर संदेह और ईरान से जुड़े युद्ध को लेकर अनिश्चितता के बीच तेल कीमतों में उछाल। पहले दबाव से प्रौद्योगिकी कंपनियों की कमाई को लेकर उम्मीदों पर असर पड़ा। दूसरे ने ऊर्जा लागत की चिंताएं बढ़ाईं।

चुनाव से एआई निवेशक क्यों चिंतित हुए

मंगलवार को हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत से डेटा केंद्रों के विकास पर कड़ी निगरानी की उम्मीदें बढ़ीं। इसमें निर्माण पर सरकारी रोक लगाए जाने की संभावना भी शामिल थी। कुछ राज्यों में उम्मीदवारों ने बड़ी परियोजनाओं के खिलाफ प्रचार किया था, जबकि विभिन्न दलों के मतदाताओं ने एआई और बढ़ते बिजली बिलों पर चिंता जताई थी।

डेटा केंद्र ऐसी इमारतें हैं जिनमें जानकारी संग्रहित करने और डिजिटल सेवाएं चलाने वाले कंप्यूटर रखे जाते हैं। एआई के लिए इस्तेमाल होने वाली सुविधाओं को शक्तिशाली चिपों और बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है। इसलिए निर्माण में देरी के फैसले का असर चिप आपूर्तिकर्ताओं, उपकरण निर्माताओं और बिजली कंपनियों पर एक साथ पड़ सकता है।

निवेशक संभावित कड़ी पाबंदियों की आशंका पर प्रतिक्रिया दे रहे थे। किसी नए विशिष्ट नियम, निर्माण पर रोक या उसे लागू करने की तारीख की पहचान नहीं की गई थी। तत्काल चिंता यह थी कि कम अनुकूल राजनीतिक माहौल से अपेक्षित खर्च घट सकता है या उसमें देरी हो सकती है।

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नोमुरा सिक्योरिटीज कंपनी के इन्वेस्टमेंट कंटेंट विभाग की रणनीतिकार माकी सावादा ने बाजार में व्यापक प्रतिक्रिया का वर्णन किया:

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच जापानी शेयरों में व्यापक बिकवाली हुई,

चुनावों ने निवेश को लेकर उस बहस में राजनीतिक अनिश्चितता जोड़ दी, जो पहले से बाजारों को परेशान कर रही थी: क्या कंपनियां एआई के पीछे का बुनियादी ढांचा बनाने की लागत को उचित ठहराने लायक कमाई कर पाएंगी।

बिकवाली कैसे तेज हुई

4 नवंबर से दुनिया भर में एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर गिर रहे थे। इसके बाद गुरुवार को अमेरिका में भारी गिरावट का असर शुक्रवार को एशियाई कारोबार पर पड़ा। जापान और दक्षिण कोरिया में सबसे बड़ी गिरावटों में से कुछ दर्ज की गईं।

इस घटनाक्रम से पता चलता है कि अमेरिकी निर्माण परियोजनाओं को लेकर चिंताएं कितनी तेजी से दूसरे देशों के निर्माताओं और निवेशकों तक पहुंचीं:

  • 3 नवंबर: अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिली, जिससे डेटा केंद्रों के विकास पर निगरानी की उम्मीदें बढ़ीं।
  • 4 नवंबर: दुनिया भर में सेमीकंडक्टर और एआई से जुड़े अन्य शेयरों में बिकवाली फैल गई।
  • 5 नवंबर: फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 12.3% लुढ़क गया, जबकि जापानी चिप शेयरों में भी भारी गिरावट आई।
  • 6 नवंबर: निक्केई कुछ समय के लिए 7% से अधिक गिरा और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार में अस्थायी कारोबार रोक लगाई गई।

फिलाडेल्फिया सूचकांक में यह गिरावट मार्च 2020 के बाद कारोबार के दौरान की सबसे बड़ी गिरावट थी। गुरुवार को नैस्डैक कंपोजिट 5% से अधिक गिरा, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1,800 से अधिक अंक टूट गया। एस&पी 500 के लिए यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अप्रैल 2025 की शुल्क घोषणा के बाद का सबसे खराब कारोबारी सत्र रहा।

शुक्रवार को एशियाई कारोबार के दौरान अमेरिकी स्टॉक वायदा चढ़ा, जिससे पिछले सत्र के नुकसान के बाद कुछ राहत मिली। सुबह के निचले स्तर से टोक्यो के बाजार की आंशिक वापसी ने भी दिखाया कि कीमतें तेजी से बदल रही थीं, न कि लगातार एक ही दिशा में गिर रही थीं।

जापानी चिप आपूर्तिकर्ताओं को एक और झटका

शुक्रवार को जापान में एडवांटेस्ट, सॉफ्टबैंक ग्रुप और किओक्सिया के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। सुबह के कारोबार के दौरान एडवांटेस्ट करीब 9%, सॉफ्टबैंक ग्रुप 11% और किओक्सिया 10% गिरा।

गुरुवार को भी भारी बिकवाली हुई थी। उस दिन एडवांटेस्ट 15%, सेमीकंडक्टर उपकरण निर्माता लेसरटेक 14% और किओक्सिया 13% गिरा था। शुक्रवार की गिरावट में सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण और इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों की अहम भूमिका रही।

नुकसान तेजी से बढ़ा। 15% गिरावट से पहले 100 मूल्य वाला शेयर गिरकर 85 का रह जाएगा। इसके बाद 9% की एक और गिरावट उसे 77.35 पर ले आएगी। एडवांटेस्ट के बताए गए प्रतिशत बदलावों के आधार पर, दोनों कारोबारी अवधियों में कुल गिरावट करीब 22.7% बैठती है।

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जापान की हिस्सेदारी उत्पादन श्रृंखला के कई चरणों में है। उपकरण निर्माता उन ग्राहकों के निवेश पर निर्भर करते हैं जो चिप कारखाने बनाते हैं, जबकि मेमोरी आपूर्तिकर्ता उन चिपों की मांग पर निर्भर होते हैं जो कंप्यूटरों को डेटा संभालने में मदद करती हैं। एआई सुविधाओं का विस्तार धीमा होने से कई चरणों में ऑर्डर कमजोर पड़ सकते हैं। इससे समझ आता है कि निवेशकों ने अलग-अलग तरह की प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयर एक साथ क्यों बेचे।

महंगे शेयरों के बीच मुनाफे पर संदेह

निवेशक एआई से संभावित वृद्धि के आधार पर तय की गई कीमतों पर भी सवाल उठा रहे थे। प्रौद्योगिकी शेयर इस उम्मीद पर चढ़े थे कि बुनियादी ढांचे में बड़े निवेश से आगे चलकर पर्याप्त राजस्व और मुनाफा होगा।

किसी कंपनी का मूल्यांकन वह कीमत है जो निवेशक उसकी कमाई या अनुमानित वृद्धि जैसे पैमानों के आधार पर तय करते हैं। जब शेयर की कीमत तेजी से विस्तार की उम्मीद पर टिकी हो, तो उस विस्तार में संभावित देरी से निवेशक उसी शेयर के लिए काफी कम कीमत देने को तैयार हो सकते हैं।

ऊंची उधारी लागत ने पहले ही डेटा केंद्र परियोजनाओं के लिए वित्त जुटाना महंगा कर दिया था। राजनीतिक विरोध ने देरी का एक और संभावित कारण जोड़ दिया, जिससे निवेशकों को निर्माण की लागत और भविष्य की आय के समय, दोनों का फिर से आकलन करना पड़ा।

मुनाफा वसूली और संस्थागत निवेशकों की ओर से उधार लेकर बनाई गई पोजिशन घटाने से बिकवाली तेज हुई। उधारी घटाने की इस प्रक्रिया को अक्सर डिलीवरेजिंग कहा जाता है; इसमें फंड को तेजी से संपत्तियां बेचनी पड़ सकती हैं। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, खासकर तब जब दूसरे निवेशक भी वही निवेश छोड़ने की कोशिश कर रहे हों।

क्वालकॉम के सामने कारोबार से जुड़ी एक और चिंता थी: स्मार्टफोन चिप की बिक्री विश्लेषकों की उम्मीदों से कम रहने के बाद उसके शेयर करीब 10% गिर गए। उद्योग के इस हिस्से की कमजोरी ने उन सेमीकंडक्टर शेयरों पर दबाव और बढ़ाया, जो एआई खर्च को लेकर संदेह से पहले ही जूझ रहे थे।

अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला पर भी दबाव

अमेरिका में कारोबारी सत्र के दौरान एनविडिया, एडवांस्ड माइक्रो डिवाइसेज, कोरवीव और जीई वर्नोवा के शेयरों में तेज गिरावट आई। इन कंपनियों के अलग-अलग कारोबार दिखाते हैं कि डेटा केंद्रों की वृद्धि को लेकर उम्मीदें शेयर बाजार में कितनी दूर तक फैली थीं।

एनविडिया और एएमडी उन्नत कंप्यूटिंग में इस्तेमाल होने वाली चिपें बनाती हैं। कोरवीव क्लाउड सेवाओं के जरिये ग्राहकों को एआई चिपों तक पहुंच किराये पर देती है। जीई वर्नोवा बिजली उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े उपकरण बनाती है, इसलिए डेटा केंद्रों के विस्तार से बढ़ती मांग का उस पर भी असर पड़ता है।

इसलिए निर्माण की रफ्तार धीमी होने का असर एआई सॉफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों से आगे तक जा सकता है। इससे प्रोसेसर की खरीद, कंप्यूटिंग सेवाओं की मांग और बिजली उपकरणों के ऑर्डर प्रभावित हो सकते हैं।

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एनविडिया का बड़ा आकार उसके शेयर की कीमत को एस&पी 500 पर असामान्य रूप से प्रभावशाली बनाता है। इस सूचकांक में बड़ी कंपनियों को अधिक भार दिया जाता है, इसलिए एनविडिया के शेयर में 1% का बदलाव ज्यादातर छोटी कंपनियों में उतने ही बदलाव से ज्यादा असर डालता है। नतीजतन, कुछ बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों में भारी बिकवाली व्यापक बाजार सूचकांक को नीचे खींच सकती है।

एशिया में गिरावट के बीच दक्षिण कोरिया में कारोबार रुका

दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में 8.8% तक गिरकर 4,911.28 पर आ गया, जो फरवरी की शुरुआत के बाद का सबसे निचला स्तर था। गिरावट 8% से ज्यादा होने के बाद कोरिया एक्सचेंज ने सर्किट ब्रेकर लागू किया और शेयरों तथा डेरिवेटिव में कारोबार 20 मिनट के लिए रोक दिया।

सर्किट ब्रेकर बाजार में असाधारण रूप से तेज उतार-चढ़ाव को थामने के लिए लगाया जाने वाला अस्थायी विराम है। बाद में कारोबार फिर शुरू हुआ और कोस्पी ने अपने नुकसान का कुछ हिस्सा वापस पा लिया, हालांकि सत्र के दौरान वह काफी नीचे रहा।

सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स समेत बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों पर दबाव रहा। ताइवान का बेंचमार्क करीब 4.1% गिरा और ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के शेयर भी 4% से अधिक टूटे।

अन्य जगहों पर गिरावट कम थी, लेकिन व्यापक स्तर पर देखी गई। ऑस्ट्रेलिया का एस&पी/एएसएक्स 200 करीब 1% गिरा, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स इंडेक्स 2.4% नीचे आया और हांगकांग तथा मुख्यभूमि चीन के शेयर भी गिरे। जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान में विशेष रूप से तेज गिरावट ने एशियाई सेमीकंडक्टर कंपनियों को क्षेत्रीय बिकवाली के केंद्र में ला दिया।

तेल और मुद्राओं ने अनिश्चितता की एक और परत जोड़ी

निवेशकों ने ईरान से जुड़ी अनिश्चितता और ऊर्जा आपूर्ति के परिदृश्य पर विचार किया तो वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल फिर 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। ईंधन की बढ़ती लागत ने उन कंपनियों की चिंताएं और बढ़ाईं जो पहले से मांग और निवेश को लेकर सवालों का सामना कर रही थीं।

जापान अपनी ऊर्जा का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतें और येन दोनों मायने रखते हैं। डॉलर में तेल महंगा होने पर जापानी खरीदारों की लागत बढ़ती है। येन कमजोर होने से उन भुगतानों के लिए और अधिक जापानी मुद्रा की जरूरत पड़ सकती है।

टोक्यो में डॉलर कुछ समय के लिए 158 येन के ऊपरी दायरे तक मजबूत हुआ। दोपहर में इसका कारोबार 157.87 से 157.89 येन पर था, जबकि न्यूयॉर्क में यह 157.62 से 157.72 येन और गुरुवार देर से टोक्यो में 158.18 से 158.20 येन पर था।

ये आंकड़े दिखाते हैं कि तुलना का आधार क्यों मायने रखता है: दोपहर में डॉलर का भाव न्यूयॉर्क के भाव से ऊंचा, लेकिन टोक्यो में पिछली दोपहर के स्तर से नीचे था। यूरो का कारोबार करीब 1.1206 डॉलर और 176.91 से 176.93 येन पर हुआ।

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शेयर बाजारों में भारी गिरावट के साथ अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड भी नीचे आई। यह आम तौर पर इस बात का संकेत है कि निवेशक अपेक्षाकृत सुरक्षित सरकारी बॉन्ड की ओर जा रहे हैं। बॉन्ड की कीमतें और यील्ड विपरीत दिशाओं में चलती हैं, इसलिए पहले से जारी बॉन्ड की मांग बढ़ने पर आम तौर पर उनकी यील्ड घटती है।

गिरावट प्रौद्योगिकी क्षेत्र से आगे पहुंची

पिछले दिन कमजोर मुनाफे की रिपोर्ट के बाद टोयोटा के शेयरों में तेज गिरावट आई। कमाई के नतीजे जारी करने के बाद निन्टेंडो के शेयर भी गिरे, जबकि अपनी नई स्पाइडर-मैन फिल्म से मिले मजबूत नतीजों के बावजूद सोनी ग्रुप के शेयर नीचे आए।

सबसे बड़ी व्यक्तिगत गिरावटों जितना ही व्यापक असर भी मायने रखता था। प्राइम मार्केट के हर दस में से नौ से अधिक शेयर गिरने और टोपिक्स में 5.43% की कमी के साथ, निवेशक सिर्फ चिप कंपनियों तक सीमित न रहकर जापानी शेयर बाजार में अपनी हिस्सेदारी घटा रहे थे।

निक्केई का मंदी के बाजार की सीमा से नीचे जाना जून के बाद आए उलटफेर का पैमाना दिखाता है। इस शब्द का इस्तेमाल हाल के शिखर से कम से कम 20% गिरावट के लिए किया जाता है। 57,858.61 पर सूचकांक 22 जून के 72,831.73 के रिकॉर्ड से करीब 14,973 अंक नीचे था।

निवेशकों के लिए तत्काल असर कई बाजारों में निवेश की कीमत में तेज गिरावट के रूप में सामने आया। एआई बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियों के लिए ध्यान इस बात पर गया कि क्या अनुमानित निर्माण, उपकरणों की खरीद और वित्तपोषण उसी रफ्तार से आगे बढ़ेंगे, जिसे शेयर कीमतों में पहले से शामिल किया गया था।

मुख्य बिंदु

  • निक्केई 6 नवंबर को कुछ समय के लिए 7% से अधिक गिरा और सुबह का कारोबार 5.27% नीचे, 57,858.61 पर बंद किया।
  • टोपिक्स 5.43% गिरा, जबकि प्राइम मार्केट के 90% से अधिक शेयरों में गिरावट आई।
  • चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त से अमेरिका में डेटा केंद्रों के निर्माण पर पाबंदियों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी।
  • सुबह कारोबार के अंत में निक्केई 22 जून के अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 20.6% नीचे था।
  • दक्षिण कोरिया का कोस्पी 8.8% तक गिरा, जिसके बाद 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा।
  • 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर का तेल और ईरान को लेकर अनिश्चितता ने एआई निवेश से मिलने वाले मुनाफे पर संदेह के साथ दबाव बढ़ाया।
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