महीनों से चल रहे कानूनी मामलों पर चर्चा के लिए मिले 40 मिनट
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोमवार को रावलपिंडी की अदियाला जेल में अपने वकील बैरिस्टर सलमान सफदर से करीब 40 मिनट मुलाकात की। इससे उनके बीच सीधे संपर्क का सात महीने का अंतराल खत्म हुआ। इस दौरान कानूनी मामले, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और उनकी पार्टी के भीतर मतभेद लगातार बढ़ते रहे हैं।
विषय-सूची
- महीनों से चल रहे कानूनी मामलों पर चर्चा के लिए मिले 40 मिनट
- सफदर ने दंपति से किन मुद्दों पर बात की
- अदालत के निर्देशों में बार-बार उठा मुलाकात का मुद्दा
- कई मामलों से रिहाई की कोशिश जटिल
- आंखों के इलाज और परिवार से संपर्क को लेकर चिंता
- पार्टी के भीतर बहस से रिहाई की रणनीति ठप
- पार्टी ने हिरासत और कथित छापों को चुनौती दी
- सुरक्षा और LPG की कीमतें भी चर्चा में
- मुख्य बातें
सफदर ने बताया कि मुलाकात शाम करीब 4:30 बजे शुरू हुई। इसमें खान की पत्नी बुशरा बीबी भी मौजूद थीं, जिनसे वह 11 महीने से नहीं मिले थे। दोनों ने उन्हें कानूनी मामलों पर नए निर्देश दिए और जेल में अपने स्वास्थ्य तथा रहने की परिस्थितियों के बारे में बताया।
74 वर्षीय खान अगस्त 2023 से हिरासत में हैं। उनकी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी (PTI) ने कहा कि यह मुलाकात अदालतों से उन तक पहुंच की व्यवस्था करने का अनुरोध करने वाली कई अर्जियों के बाद हुई। इस मुलाकात से उनके मामलों को संभाल रहे वकील से फिर संपर्क हुआ, लेकिन सफदर ने कहा कि सभी कानूनी मुद्दों पर चर्चा के लिए मिला समय पर्याप्त नहीं था।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब PTI की राजनीतिक समिति अपने संस्थापक की रिहाई सुनिश्चित करने की रणनीति पर सहमति नहीं बना सकी। सदस्यों ने दो दिन के भीतर फिर बैठक करने की योजना बनाई, जबकि नेतृत्व के प्रदर्शन और पार्टी के भीतर अनुशासन संबंधी नोटिस पर बहस में उनकी चर्चा का कुछ समय लगा।
खान से मुलाकात का मुद्दा उनकी आंखों की रोशनी को लेकर चिंताओं और परिवार से मुलाकात, व्यायाम, पढ़ने की सामग्री तथा जेल की अन्य सुविधाओं के बारे में अदालत के निर्देशों के पालन से भी जुड़ा है। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने मंगलवार और गुरुवार को सप्ताह में दो बार मुलाकात की अनुमति दी है, फिर भी हाल के महीनों में परिवार के सदस्यों और पार्टी नेताओं तक पहुंच पर कड़े प्रतिबंध रहे हैं।
सफदर ने दंपति से किन मुद्दों पर बात की
सफदर खान के वकील के रूप में इस ताजा मुलाकात में शामिल हुए और बुशरा बीबी भी मौजूद थीं। PTI के केंद्रीय सूचना सचिव शेख वकास अकरम ने कहा कि चर्चा राजनीतिक मुद्दों के बजाय अदालती कार्यवाही और मामलों को संभालने के निर्देशों पर केंद्रित रही।
सफदर ने X पर एक पोस्ट में मुलाकात का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा कि दोनों कैदियों ने उन्हें अपनी परिस्थितियों की जानकारी दी और निर्देश दिए:
सभी मामलों और कानूनी मुद्दों को कवर करने के लिए यह बैठक पर्याप्त नहीं थी। दोनों ने मुझे अपने स्वास्थ्य और रहने की परिस्थितियों के बारे में बताया और कुछ कानूनी मामलों तथा मुकदमों के संबंध में नए निर्देश दिए।
वकील ने उन निर्देशों का विवरण नहीं दिया। अकरम ने मुलाकात की अवधि करीब 40 से 45 मिनट बताई और कहा कि इतने लंबे अंतराल के बाद कई मामलों पर चर्चा के लिए यह समय बहुत कम था।
खान और बुशरा बीबी पर एक से अधिक मामलों में दोषसिद्धि के साथ-साथ अन्य लंबित मुकदमे भी हैं। इसलिए इस मुलाकात में अपीलों, अदालती अर्जियों और कानूनी जवाबों के बारे में अलग-अलग फैसले लेने थे। सफदर के बयान से संकेत मिलता है कि कुछ निर्देश मिले, जबकि समय की कमी के कारण अन्य मुद्दों पर बात नहीं हो सकी।
सफदर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पहले भी खान से अदालत की सहायता के लिए नियुक्त व्यक्ति (एमिकस) के रूप में मिल चुके हैं। यह भूमिका किसी आरोपी के अपने वकील की भूमिका से अलग है। वकील का काम गोपनीय निर्देश लेना और मुवक्किल का मामला तैयार करना भी होता है।
अदालत के निर्देशों में बार-बार उठा मुलाकात का मुद्दा
इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने खान और बुशरा बीबी से मुलाकात के मामले में कई बार हस्तक्षेप किया है। उसके निर्देशों में कानूनी परामर्श के साथ-साथ दंपति को जिन परिस्थितियों में रखा गया है, वे भी शामिल हैं।
18 जून को अदालत ने इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल को निर्देश दिया कि सात दिनों के भीतर कानूनी वकील से मुलाकात सुनिश्चित की जाए। इसका उद्देश्य कानूनी औपचारिकताएं पूरी करना और 19 करोड़ पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट मामले में दोषसिद्धियों के खिलाफ अपील दायर करना था।
2 सितंबर को अदालत ने अदियाला जेल प्रशासन को सार्थक मानवीय संपर्क, परिवार से मुलाकात, व्यायाम, पढ़ने की सामग्री और अन्य सुविधाएं देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि कानूनन जेल में रखने का मतलब यह नहीं कि मानवीय गरिमा से टाली जा सकने वाली वंचना की अनुमति मिल जाती है।
मुलाकात को लेकर विवाद के मुख्य घटनाक्रम:
- 10 फरवरी: खान के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सफदर ने उनसे मुलाकात की।
- अप्रैल: इस्लामाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद सफदर ने कानूनी परामर्श किया। उनकी पिछली सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट की गई मुलाकात 8 अप्रैल की बताई गई है, हालांकि उस मुलाकात के लिए 9 अप्रैल की तारीख भी दी गई है।
- 18 जून: इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने सात दिनों के भीतर दंपति को कानूनी वकील से मिलवाने का निर्देश दिया।
- 2 सितंबर: अदालत ने मानवीय संपर्क, परिवार से मुलाकात और जेल की सुविधाओं को लेकर निर्देश जारी किए।
- सोमवार: बार-बार अनुरोध किए जाने के बाद सफदर ने खान और बुशरा बीबी से करीब 40 मिनट मुलाकात की।
बार-बार दायर की गई अर्जियां दिखाती हैं कि मुलाकात तक पहुंच खुद एक लगातार बना हुआ कानूनी मुद्दा है। अदालत ने मुलाकातों का कार्यक्रम तय किया है, जबकि वकील और परिजन इन्हें सुनिश्चित कराने के लिए आदेश मांगते रहे हैं।
कई मामलों से रिहाई की कोशिश जटिल
खान की कैद कई मामलों से जुड़ी है, जिनमें आरोप और कानूनी प्रक्रिया के चरण अलग-अलग हैं। 2023 में उन्हें तोशाखाना के जरिए मिले उपहारों का ब्योरा छिपाने के मामले में तीन साल की सजा सुनाई गई थी। तोशाखाना पाकिस्तान में सरकारी अधिकारियों को मिले उपहारों के प्रबंधन की व्यवस्था है।
19 करोड़ पाउंड के अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में खान और बुशरा बीबी को 14-14 साल की सजा भी सुनाई गई। इस मामले में दंपति को सजा सुनाए जाने के दिन, 17 जनवरी 2025 को बुशरा बीबी को गिरफ्तार किया गया था।
20 दिसंबर 2025 को तोशाखाना-II मामले में एक और दोषसिद्धि हुई। आरोप सऊदी अरब की आधिकारिक यात्रा के दौरान सऊदी युवराज की ओर से दिए गए बुल्गारी आभूषण सेट को गैरकानूनी रूप से अपने पास रखने से संबंधित थे।
इस दोषसिद्धि में जेल की सजा खान के लिए 10 साल और बुशरा बीबी के लिए सात साल बताई गई है, जबकि 17 साल की सजा की जानकारी भी सामने आई है। इस ताजा मुलाकात की सार्वजनिक जानकारी में सजा का सटीक ब्योरा स्पष्ट नहीं है।
खान पर 9 मई 2023 के विरोध प्रदर्शनों और दंगों से जुड़े आतंकवाद निरोधक कानून के तहत मुकदमे भी लंबित हैं। ये कार्यवाही उपहारों और अल-कादिर ट्रस्ट से जुड़ी दोषसिद्धियों से अलग हैं।
इसलिए PTI को रिहाई सुनिश्चित करने के लिए किसी एक मामले के बजाय कई कानूनी कार्यवाहियों पर ध्यान देना होगा। दोषसिद्धि को अपील के जरिए चुनौती दी जा सकती है, जिसमें उच्च अदालत से फैसले की समीक्षा करने को कहा जाता है। जून के मुलाकात संबंधी आदेश में कानूनी परामर्श को दंपति की अपील दायर करने की क्षमता से सीधे जोड़ा गया था।
आंखों के इलाज और परिवार से संपर्क को लेकर चिंता
सोमवार की मुलाकात में खान का स्वास्थ्य भी चर्चा का विषय रहा, हालांकि PTI ने कहा कि बैठक का मुख्य उद्देश्य कानूनी मामलों पर बात करना था। उनकी दाहिनी आंख की केंद्रीय रेटिनल शिरा में अवरोध (CRVO) की जानकारी जनवरी के आखिर में सार्वजनिक हुई।
CRVO तब होता है जब रेटिना से रक्त को बाहर ले जाने वाली मुख्य शिरा अवरुद्ध हो जाती है। रेटिना आंख के पीछे मौजूद प्रकाश-संवेदी ऊतक है। शिरा में अवरोध से रक्तस्राव और सूजन हो सकती है, जिससे दृष्टि प्रभावित होती है।
खान का सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) में आंख का उपचार किया गया है। उनके परिवार ने उन्हें उनकी पसंद के अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग की है।
PTI की राजनीतिक समिति ने उन खबरों पर चिंता जताई कि खान और बुशरा बीबी को अस्पताल ले जाया जा सकता है। उसने खान के इलाज से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू करने, परिवार को उनके स्वास्थ्य की जानकारी देने और परिजनों को उनसे मिलने की अनुमति देने की मांग की।
समिति की मांगों में इलाज को परिवार की पहुंच से जोड़ा गया है: परिजन खान की स्थिति की जानकारी के साथ उनसे मिलने की अनुमति भी चाहते हैं। सफदर की मुलाकात में दंपति को वकील से सीधे अपने स्वास्थ्य के बारे में बताने का मौका मिला, लेकिन बातचीत के बाद कोई विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी जारी नहीं की गई।
पार्टी के भीतर बहस से रिहाई की रणनीति ठप
PTI की राजनीतिक समिति ने दो दिन के भीतर फिर बैठक करने पर सहमति जताई। बैठक का एकमात्र एजेंडा खान की रिहाई सुनिश्चित करने का तरीका होगा। यह फैसला तीखी बहस के बाद लिया गया, जिसके चलते पार्टी साझा रणनीति तय नहीं कर सकी।
मलिक आमिर डोगर समेत कुछ सदस्यों ने PTI अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान से सवाल-जवाब किए और उनके प्रदर्शन पर असंतोष जताया। खबरों के अनुसार, महासचिव सलमान अकरम राजा ने पार्टी के एक समूह पर संसदीय दल यानी PTI के निर्वाचित विधायकों को अनुचित महत्व देने का आरोप लगाया।
नूर-उल-हक कादरी ने राजा से नरम भाषा इस्तेमाल करने का आग्रह किया। इस बहस से यह मतभेद उजागर हुआ कि खान के जेल में रहते हुए पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व और संसद में उसके प्रतिनिधि कितना प्रभाव रखें।
एक अन्य विवाद सीनेटर मशाल यूसुफजई को प्रस्तावित स्पष्टीकरण नोटिस को लेकर था। ऐसे नोटिस में पार्टी सदस्य से उसके आचरण को लेकर उठे सवालों का जवाब मांगा जाता है। प्रतिभागियों ने काफी समय इस बात पर चर्चा की कि नोटिस कौन जारी करे, लेकिन कोई भी इसकी जिम्मेदारी लेने पर सहमत नहीं हुआ।
उप महासचिव फिरदौस शमीम नकवी ने नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया। अकरम ने भी मना करते हुए कहा कि प्रवक्ता के तौर पर उनकी भूमिका बयान जारी करने की है। इसके बाद सदस्यों ने सवाल उठाया कि गौहर या राजा यह मामला क्यों नहीं संभाल रहे।
अगली बैठक से PTI को अपनी रणनीति तय करने का निकट भविष्य में मौका मिलेगा। फिलहाल पार्टी ने खान की रिहाई को अपना लक्ष्य बताया है, लेकिन व्यावहारिक रणनीति पर फैसला नहीं हुआ है।
पार्टी ने हिरासत और कथित छापों को चुनौती दी
PTI की समिति ने खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री, प्रांतीय विधानसभा अध्यक्ष और अन्य सांसदों को हिरासत में लेने की निंदा की। उसने उनकी हिरासत को गैरकानूनी बताया और कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को हिरासत में रखना जनता के जनादेश की अनदेखी है।
समिति ने पूर्व संघीय मंत्री उमर अयूब खान, शेर अली अरबाब, शाह अहमद और अन्य नेताओं के घरों पर कथित छापों तथा वहां हुई तोड़फोड़ की भी निंदा की। उसने पार्टी कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर परेशान किए जाने और उनके घरों पर छापों को लेकर चिंता जताई।
इन आरोपों के साथ समिति ने सांसद आदिल बजाई, PTI के अन्य सदस्यों और लोक व्यवस्था बनाए रखने के कानून के तहत हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की मांग की। सांसद (MNA) पाकिस्तान की नेशनल असेंबली का सदस्य होता है।
लोक व्यवस्था बनाए रखने का कानून अधिकारियों को सार्वजनिक व्यवस्था के आधार पर एहतियाती हिरासत का आदेश देने की अनुमति देता है। PTI ने आपराधिक कार्यवाही से जुड़ी गिरफ्तारियों के साथ-साथ अपने सदस्यों के खिलाफ इस अधिकार के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।
समिति ने कहा कि अदालत के आदेश से रिहाई मिलने के बाद पार्टी के कुछ नेताओं को फिर गिरफ्तार कर लिया गया। उसका तर्क था कि राजनीतिक मतभेदों के कारण प्रताड़ना नहीं होनी चाहिए और उसने अदालती फैसलों का सम्मान करने की मांग की। ये बयान हिरासत और कथित छापों पर PTI का पक्ष बताते हैं।
सुरक्षा और LPG की कीमतें भी चर्चा में
PTI की समिति ने आतंकवाद और घरेलू खर्चों पर भी बात की, जिससे चर्चा खान की कैद से आगे बढ़ी। उसने बढ़ते आतंकवाद को बड़ी चुनौती बताते हुए गंभीर और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत जताई।
समिति ने कहा कि लोगों की जान और संपत्ति की सुरक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। उसने यह भी कहा कि आतंकवाद-रोधी उपायों का इस्तेमाल राजनीतिक प्रताड़ना के लिए नहीं होना चाहिए। इस तरह उसने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को पार्टी सदस्यों के साथ व्यवहार पर अपनी आपत्तियों से जोड़ा।
रहने-सहने की लागत पर PTI ने दावा किया कि 238 रुपये प्रति किलोग्राम में खरीदी जा रही तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) को 700 रुपये तक में बेचा जा रहा है। LPG का इस्तेमाल खाना पकाने और गर्मी के लिए होता है, इसलिए इसकी ऊंची कीमतें घरेलू खर्च सीधे बढ़ा सकती हैं।
समिति के बताए दोनों आंकड़ों के बीच 462 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर है। 700 रुपये का खुदरा मूल्य, बताए गए 238 रुपये के खरीद मूल्य का करीब 2.94 गुना है। समिति ने इस अंतर की जांच और अत्यधिक मुनाफे के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
PTI ने बिजली और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में राहत तथा जरूरी वस्तुओं की लागत घटाने के उपायों की भी मांग की। इन मांगों से घरेलू बजट भी पार्टी के एजेंडे में शामिल हो गया है, जिसमें कैदियों से मुलाकात और कानूनी कार्यवाही के मुद्दे पहले से हैं। वहीं खान की रिहाई के लिए तत्काल अभियान को लेकर पार्टी नेतृत्व में मतभेद बने हुए हैं।
मुख्य बातें
- सलमान सफदर ने इमरान खान से करीब सात महीने बाद सीधे मुलाकात की। बैठक लगभग 40 मिनट चली।
- बुशरा बीबी भी बैठक में शामिल हुईं। 11 महीने में सफदर के साथ उनकी यह पहली मुलाकात थी।
- दंपति ने स्वास्थ्य, जेल की परिस्थितियों और कानूनी निर्देशों पर चर्चा की। सफदर ने कहा कि सभी मामलों को कवर करने के लिए समय पर्याप्त नहीं था।
- इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने वकीलों और परिवार के सदस्यों से मुलाकात तथा जेल की सुविधाओं को लेकर बार-बार निर्देश दिए हैं।
- आंतरिक मतभेदों के चलते सहमति न बन पाने के बाद PTI ने खान की रिहाई पर चर्चा के लिए दो दिन के भीतर राजनीतिक समिति की अगली बैठक करने की योजना बनाई है।
- पार्टी ने चिकित्सकीय सुविधा की मांग की, हिरासत और कथित छापों को चुनौती दी तथा LPG और अन्य घरेलू खर्चों पर कार्रवाई की मांग की।






