कम फसल से चावल उत्पादन पर दबाव
स्टैटिस्टिक्स इंडोनेशिया (बीपीएस) के अनुसार, इंडोनेशिया में 2026 में 3.311 करोड़ टन चावल उत्पादन का अनुमान है। यह 2025 के मुकाबले 15.9 लाख टन यानी 4.57% कम है। सालाना अनुमान ऐसे समय आया है जब फसल कटाई का रकबा घट रहा है और अधिकारियों ने चेताया है कि अल नीनो से जुड़ा सूखा कुछ क्षेत्रों में धान की फसल को प्रभावित कर रहा है।
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बीपीएस ने जनवरी से दिसंबर तक देश में धान उत्पादन 5.745 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है, जो 4.57% कम है। फसल कटाई का रकबा 1.078 करोड़ हेक्टेयर रहने का अनुमान है, यानी 4.80% की गिरावट। इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश के कुल उत्पादन पर मुख्य दबाव कटाई तक पहुंचने वाले कम रकबे का है।
सितंबर में गिरावट सालाना अनुमान से कहीं तेज रही। उस महीने चावल उत्पादन 28.1 लाख टन रहने का अनुमान था, जो सितंबर 2025 से 18.25% कम है। बीपीएस को आशंका है कि साल की आखिरी तिमाही तक यह कमजोरी जारी रहेगी। इस दौरान चावल उत्पादन 16.32% घटकर 50.1 लाख टन रहने का अनुमान है।
किसानों की तात्कालिक चिंता यह है कि क्या फसलों को कटाई तक पहुंचने के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। चावल खरीदने वाले परिवारों और कारोबारियों के लिए ये आंकड़े घरेलू खेतों से आने वाली आपूर्ति में कमी का संकेत हैं। दिसंबर तक फसल की स्थिति और कटाई के समय में बदलाव के साथ उत्पादन के अनुमान संशोधित हो सकते हैं।
धान और चावल के आंकड़े अलग क्यों हैं
बीपीएस उत्पादन को दो चरणों में मापता है। धान खेत से काटा गया अनाज है, जो अभी भूसी से ढका होता है। प्रसंस्करण के बाद भूसी और बाहरी परतें हटाने से चावल मिलता है। इसी वजह से धान का अनुमानित उत्पादन 5.745 करोड़ टन, चावल के 3.311 करोड़ टन के अनुमान से अधिक है।
धान के आंकड़ों में जीकेजी का इस्तेमाल होता है। यह इंडोनेशियाई शब्द gabah kering giling का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ है मिलिंग के लिए पर्याप्त रूप से सुखाया गया धान। एक तय स्थिति में मापने से सांख्यिकीविदों को नमी के अंतर के असर के बिना फसल की तुलना करने में मदद मिलती है।
चावल उत्पादन में अनुमानित गिरावट और 15.9 लाख टन की बताई गई कमी के आधार पर 2025 का उत्पादन लगभग 3.470 करोड़ टन बैठता है। यानी 2026 में इंडोनेशिया, पिछले साल के हर 100 टन के मुकाबले करीब 95.4 टन चावल पैदा करेगा। यह तुलना सालाना कमी का पैमाना केवल कुल राष्ट्रीय आंकड़ों से अधिक आसानी से बताती है।
सितंबर में तेज गिरावट
बीपीएस के केएसए क्षेत्र नमूना पद्धति से किए गए आकलन के अनुसार, सितंबर में फसल कटाई का रकबा 9.1 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि सितंबर 2025 में यह 11.3 लाख हेक्टेयर था। 19.40% की इस गिरावट का मतलब है कि महीने के दौरान करीब 2.2 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में कटाई हुई।
वितरण और सेवा सांख्यिकी के लिए बीपीएस के उप प्रमुख अतेंग हार्तोनो ने 2 नवंबर को जकार्ता में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सितंबर के उत्पादन अनुमान पेश किए। धान उत्पादन 48.8 लाख टन जीकेजी रहने का अनुमान था, जो एक साल पहले के 59.7 लाख टन से 18.29% कम है। इसका अर्थ है कि एक ही महीने में धान उत्पादन करीब 10.9 लाख टन घटा।
चावल उत्पादन भी लगभग इसी दर से घटकर अनुमानित 28.1 लाख टन रह गया। फसल कटाई के रकबे और उत्पादन में करीब-करीब समान गिरावट इस नतीजे को समझाती है: जब काफी कम जमीन पर कटाई हुई, तो देश ने काफी कम अनाज जुटाया।
जनवरी से सितंबर तक फसल कटाई का रकबा 92.4 लाख हेक्टेयर रहा, जो 2025 की इसी अवधि से 2.23% कम है। सितंबर में इससे कहीं बड़ी प्रतिशत गिरावट दिखाती है कि उस अवधि के अंत में हालात कितनी तेजी से बिगड़े, हालांकि बीपीएस ने कहा कि जनवरी से अगस्त के दौरान कुल धान उत्पादन बढ़ा था।
आखिरी तिमाही में बड़ी कमी का अनुमान
बीपीएस का अनुमान है कि अक्टूबर से दिसंबर तक 15.4 लाख हेक्टेयर में कटाई होगी, जो 2025 की इसी तिमाही से 17.75% कम है। धान उत्पादन 86.9 लाख टन जीकेजी रहने का अनुमान है, यानी 16.30% की गिरावट। वहीं चावल उत्पादन 50.1 लाख टन रहने का अनुमान है, जो 16.32% कम है।
सालाना चावल उत्पादन के अनुमानित कुल में आखिरी तिमाही की हिस्सेदारी लगभग 15.1% होगी। यह गणना 3.311 करोड़ टन में से 50.1 लाख टन के आधार पर की गई है। सालाना गिरावट में इस तिमाही का योगदान इससे कहीं बड़ा होगा।
तिमाही के अनुमानित चावल उत्पादन और उसकी प्रतिशत गिरावट के आधार पर अक्टूबर से दिसंबर 2025 के दौरान उत्पादन लगभग 59.9 लाख टन था। इसलिए अनुमानित कमी करीब 9.8 लाख टन होगी, यानी बताई गई 15.9 लाख टन की सालाना गिरावट का लगभग 62%। ये गणनाएं बीपीएस के पूर्णांकित आंकड़ों पर आधारित हैं, लेकिन बताती हैं कि साल के आखिरी महीने कुल नतीजे के लिए इतने अहम क्यों हैं।
अधिकारियों ने पानी की कमी को गिरावट से जोड़ा
अतेंग ने उत्पादन में अनुमानित गिरावट का कारण अल नीनो और धान की फसलों के लिए पानी की स्थिति को बताया। उन्होंने इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी (बीएमकेजी) की जानकारी का हवाला दिया, जिसके अनुसार 2026 में अल नीनो की स्थिति 2023 के मुकाबले अधिक गंभीर होने की आशंका थी।
अल नीनो जलवायु का एक पैटर्न है, जिसमें उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में सतही पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इससे समुद्र से दूर के क्षेत्रों में भी बारिश का पैटर्न बदल सकता है। इंडोनेशिया में बारिश कम होने से खेतों में पानी की कमी हो सकती है, खासकर वहां जहां फसलें भरोसेमंद सिंचाई के बजाय बारिश पर अधिक निर्भर हैं।
बीपीएस ने कहा कि कुछ इलाकों में सूखा धान की फसलों को प्रभावित कर रहा है और साल के अंत तक इसका असर अधिक स्पष्ट होने की आशंका है। फसल की बढ़त के दौरान पानी की उपलब्धता अहम होती है: धान बोए जाने के बाद भी खेत में अनाज पकने और कटाई के लिए तैयार होने तक अनुकूल स्थितियां जरूरी हैं।
बीपीएस ने कीटों के हमले, बाढ़ और किसानों के कटाई कार्यक्रम में बदलाव को भी ऐसे कारकों में गिनाया जो उसके अनुमानों को बदल सकते हैं। कटाई का समय अहम है, क्योंकि अलग महीने में फसल काटने से उस महीने का कुल उत्पादन बदल जाता है। दिसंबर के पार कटाई का समय खिसकने से यह भी बदल सकता है कि उत्पादन किस कैलेंडर वर्ष में दर्ज होगा।
पहले के अनुमानों में भी गिरावट के संकेत
अप्रैल के अनुमान में 2026 के शुरुआती महीनों के दौरान चावल उत्पादन में कम गिरावट दिखाई गई थी। 1 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अतेंग ने कहा था कि जनवरी से मई तक चावल उत्पादन 1.657 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह 2025 की इसी अवधि से करीब 3.8 लाख टन यानी 2.22% कम था।
वितरण और सेवा सांख्यिकी के लिए बीपीएस के उप प्रमुख के तौर पर बोलते हुए अतेंग ने उत्पादन में अनुमानित कमजोरी को धान के आउटलुक से जोड़ा:
"मार्च-मई 2026 के लिए संभावित धान उत्पादन में गिरावट का अनुमान है, जिससे कुल चावल उत्पादन प्रभावित होगा," अतेंग ने कहा।
बीपीएस ने मार्च से मई तक धान उत्पादन 2.068 करोड़ टन जीकेजी रहने का अनुमान लगाया था, जो 11.12% कम था। जनवरी से मई तक फसल कटाई का रकबा 53.5 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान था, यानी 2.35% की गिरावट।
फरवरी में रुझान उलट था। उस महीने धान उत्पादन 50.5 लाख टन जीकेजी रहा, जो फरवरी 2025 से 27.41% अधिक था। महीने-दर-महीने की यह तेज बढ़ोतरी, मार्च से मई के लिए कमजोर अनुमान और जनवरी से अगस्त के दौरान दर्ज बाद की वृद्धि दिखाते हैं कि वर्ष के दौरान उत्पादन में उतार-चढ़ाव रहा।
उत्पादन का अनुमान कैसे बदला
बीपीएस की 2026 की घोषणाएं अलग-अलग अवधियों से जुड़ी हैं। कुछ आंकड़े पूरी हो चुकी कटाई के हैं, जबकि अन्य आगे होने वाली फसल का अनुमान हैं। प्रमुख तारीखें और अवधियां इस प्रकार हैं:
- 1 अप्रैल: बीपीएस ने जनवरी से मई तक चावल उत्पादन 1.657 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया, जो एक साल पहले से 2.22% कम था।
- जनवरी से अगस्त: बीपीएस ने बाद में कहा कि 2025 की इसी अवधि के मुकाबले कुल धान उत्पादन बढ़ा था।
- सितंबर: फसल कटाई का रकबा 19.40% घटा, जबकि अनुमानित धान उत्पादन 18.29% और चावल उत्पादन 18.25% घटा।
- 2 नवंबर: अतेंग ने सितंबर के आंकड़े पेश किए और अल नीनो से जुड़े आगे के दबाव की चेतावनी दी।
- अक्टूबर से दिसंबर: बीपीएस ने चावल उत्पादन 50.1 लाख टन रहने का अनुमान लगाया, जो 16.32% कम है। इससे सालाना अनुमान 3.311 करोड़ टन बनता है।
शुरुआती अनुमान पांच महीनों का था, जबकि सालाना अनुमान पूरे वर्ष का है। हर आंकड़े को उसकी अवधि के साथ देखने से बदलते रुझान को समझना आसान होता है: वर्ष के कुछ हिस्सों में कमजोरी के बावजूद अलग-अलग महीनों में सुधार हो सकता है।
मक्के में भी गिरावट, लेकिन कुल उत्पादन बढ़ा
सितंबर में कृषि क्षेत्र की सुस्ती का असर मक्के पर भी पड़ा। बीपीएस के अनुसार, मक्के की फसल कटाई का रकबा 2.1 लाख हेक्टेयर रहा, जो सितंबर 2025 से 3.59% कम है। उत्पादन 13 लाख टन रहने का अनुमान था, यानी 6.46% की गिरावट।
मक्के के आंकड़े में 14% नमी वाला सूखा छिला दाना शामिल है। नमी का स्तर तय रखने से तुलना के लिए एक समान आधार मिलता है, क्योंकि नमी वाले दाने का वजन अधिक होता है, भले ही उसमें उपयोगी सूखे पदार्थ की मात्रा लगभग समान हो।
इसके बावजूद जनवरी से सितंबर तक मक्का उत्पादन 1.316 करोड़ टन रहा, जो 2025 की इसी अवधि से 2.73% अधिक है। इस तरह सितंबर की गिरावट के बावजूद आखिरी महीनों में प्रवेश करते समय मक्के के कुल उत्पादन में बढ़ोतरी बनी हुई थी।
चावल के लिए सालाना परिदृश्य कमजोर है और उत्पादन में 15.9 लाख टन की कमी का अनुमान है। बाकी फसल की कटाई के लिए अहम सवाल यह है कि बोए गए क्षेत्र में से कितना हिस्सा कटाई तक पहुंचता है और उन खेतों से कितना अनाज मिलता है। कीमतें, सार्वजनिक भंडार और आयात से जुड़े फैसले भी खरीदारों के लिए उपलब्ध आपूर्ति को प्रभावित करेंगे; बीपीएस के उत्पादन आंकड़े इस तस्वीर का कृषि उत्पादन वाला हिस्सा बताते हैं।
मुख्य बातें
- इंडोनेशिया में 2026 का चावल उत्पादन 3.311 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो 2025 से 15.9 लाख टन यानी 4.57% कम है।
- सालाना फसल कटाई का रकबा 1.078 करोड़ हेक्टेयर रहने का अनुमान है, जो 4.80% कम है।
- सितंबर में चावल उत्पादन 28.1 लाख टन रहने का अनुमान था, जो 18.25% कम है।
- अक्टूबर से दिसंबर तक चावल उत्पादन 50.1 लाख टन रहने का अनुमान है, जो 16.32% कम है।
- बीपीएस ने अनुमानित गिरावट को अल नीनो और कुछ क्षेत्रों में फसलों को प्रभावित कर रही पानी की कमी से जोड़ा।
- फसल की स्थिति, कीट, बाढ़, सूखा और कटाई के कार्यक्रम में बदलाव से अनुमान बदल सकते हैं।
- सितंबर में मक्का उत्पादन घटा, लेकिन जनवरी से सितंबर तक इसका कुल उत्पादन पिछले साल से 2.73% अधिक रहा।






