होर्मुज़ पर बातचीत जारी, सियोल विमान भेजने पर विचार कर रहा
दक्षिण कोरिया होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री गश्ती विमान भेजने पर विचार कर रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वाई सुंग-लाक ने 29 अक्टूबर, 2026 को संसदीय लेखा-परीक्षा के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के निर्देशों के तहत युद्ध में भागीदारी से इनकार किया।
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वाई ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी है, लेकिन सरकार ने तैनाती पर कोई फैसला नहीं किया है। जलमार्ग से सुरक्षित आवागमन के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों में योगदान देने के तरीकों पर विचार करते हुए सियोल कई विकल्पों की समीक्षा कर रहा है, जिनमें विमान भेजना भी शामिल है।
इस चर्चा में चेओंघे नौसैनिक इकाई के परिचालन क्षेत्र को जलडमरूमध्य के निकट ओमान की खाड़ी तक बढ़ाने की संभावना भी शामिल है। इससे इकाई के कानूनी अधिकार-क्षेत्र, संसदीय मंजूरी और व्यावहारिक तैयारियों से जुड़े सवाल उठेंगे। साथ ही मुख्य राजनीतिक सवाल भी रहेगा: युद्ध से बाहर रहते हुए दक्षिण कोरिया क्या योगदान दे सकता है।
दक्षिण कोरिया के लिए दांव पर सिर्फ वॉशिंगटन के साथ सैन्य सहयोग नहीं है। उसकी अर्थव्यवस्था ऊर्जा की उन आपूर्तियों पर बहुत निर्भर है, जो होर्मुज़ से होकर आती हैं। यह वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की खेपों का एक प्रमुख मार्ग है। वहां व्यवधान होने पर खरीदारों को ईंधन जुटाने में मुश्किल हो सकती है, भले ही उत्पादकों के पास आपूर्ति उपलब्ध हो।
फरवरी में अमेरिका और इज़राइल के ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू करने के बाद से ईरान ने जलडमरूमध्य से आवागमन पर नियंत्रण की कोशिश की है और उन जहाजों पर हमले किए हैं, जिनके बारे में उसका आरोप है कि वे बिना अनुमति वहां से गुजर रहे थे। इस पृष्ठभूमि में सांसदों ने सवाल उठाया कि क्या नौवहन की सुरक्षा के नाम पर चलाया गया अभियान दक्षिण कोरियाई बलों को संघर्ष में झोंक सकता है।
वाई ने सरकार का यह रुख दोहराया कि वह युद्ध या युद्धक कार्रवाइयों में हिस्सा लिए बिना आवागमन की स्वतंत्रता में योगदान देगी। उन्होंने यह भी कहा कि वॉशिंगटन के साथ जारी बातचीत में कोई खास नई प्रगति नहीं हुई है।
गश्ती विमान क्या योगदान दे सकता है
समुद्री गश्ती विमान समुद्र में गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाया जाता है। उसके उपकरणों और तय किए गए मिशन के आधार पर वह जहाजों का पता लगाने, समुद्री यातायात पर नजर रखने और जानकारी जहाजों या कमान केंद्रों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है। बड़े क्षेत्र में निगरानी करने की उसकी क्षमता उसे किसी एक जहाज के साथ चलने वाले नौसैनिक सुरक्षा जहाज से अलग बनाती है।
वाई ने पुष्टि की कि विमान भेजने के प्रस्ताव पर विचार किया गया है। उन्होंने किसी स्वीकृत मिशन की घोषणा नहीं की। विमान का प्रकार, संचालन अड्डा, कर्मियों की संख्या, तैनाती की तारीख और विस्तृत कार्य अभी तय नहीं किए गए हैं या सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
इन फैसलों से तय होगा कि व्यवहार में दक्षिण कोरिया का योगदान कैसा दिखेगा। आसपास के जलक्षेत्र में जानकारी जुटाने वाले विमान की जिम्मेदारियां उस जहाज से अलग होंगी, जो खतरे वाले मार्ग से वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षा देते हुए ले जाए। दोनों ही स्थितियों में कर्तव्यों और खतरे की स्थिति में प्रतिक्रिया के बारे में स्पष्ट निर्देश जरूरी होंगे।
सियोल किस विकल्प पर विचार कर रहा है, यह बताते हुए वाई ने कहा कि जापान और अन्य देश भी गश्ती विमान संचालित करते हैं। उनका मुख्य संदेश यही रहा कि दक्षिण कोरिया संभावित योगदानों की पड़ताल कर रहा है और सरकार ने अभी कोई फैसला नहीं किया है।
बहस में चेओंघे इकाई क्यों शामिल है
राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय चेओंघे इकाई के संचालन क्षेत्र को सोमालिया के तट से लगे अदन की खाड़ी से ओमान की खाड़ी तक बढ़ाने की समीक्षा कर रहा है। समीक्षा में समुद्री गश्ती विमान और अन्य क्षमताएं जोड़ने पर भी विचार शामिल है।
चेओंघे, जिसे औपचारिक रूप से सोमालिया समुद्री जहाज सुरक्षा कार्यदल कहा जाता है, मार्च 2009 में स्थापित हुआ था। यह समुद्री डकैती के खिलाफ अभियान चलाता है, जहाजों को सुरक्षा देता है, सुरक्षित आवागमन में मदद करता है और विदेशों में दक्षिण कोरियाई नागरिकों की रक्षा करता है। उसका मौजूदा काम होर्मुज़ के आसपास विकल्पों पर विचार करते समय सियोल को एक पहले से स्थापित समुद्री बल उपलब्ध कराता है।
अदन की खाड़ी और ओमान की खाड़ी अलग-अलग परिचालन क्षेत्र हैं। होर्मुज़ की ओर इकाई की पहुंच बढ़ाने के लिए यह तय करना होगा कि वह कहां काम कर सकती है और वहां उसे क्या करने की अनुमति होगी। इकाई की तैनाती बढ़ाने के लिए संसदीय सहमति मांगने से पहले मंत्रालय इन बदलावों पर विचार कर रहा है।
सांसदों ने चिंता जताई कि चेओंघे की भूमिका बढ़ाने या विमान भेजने से दक्षिण कोरिया युद्ध में खिंच सकता है, भले ही उसकी नीति युद्ध में शामिल न होने की हो। इसीलिए मिशन की शब्दावली और कर्मियों को दिए जाने वाले निर्देश बहस के केंद्र में हैं।
संविधान के तहत संसद की भूमिका
दक्षिण कोरिया के संविधान के अनुच्छेद 60, खंड 2 के तहत विदेश में सशस्त्र बल भेजने के लिए राष्ट्रीय सभा की सहमति जरूरी है। इसलिए राष्ट्रपति अकेले विदेश में सैनिकों की तैनाती का फैसला नहीं कर सकते; सिद्धांततः सरकार को पहले संसदीय मंजूरी लेनी होती है।
पिछले वर्ष स्वीकृत चेओंघे तैनाती प्रस्ताव में अदन की खाड़ी को उसका परिचालन क्षेत्र बताया गया था। उसमें एक आकस्मिक प्रावधान भी था, जिसके तहत दक्षिण कोरियाई नागरिकों की सुरक्षा के लिए की जाने वाली गतिविधियों में अन्य जलक्षेत्र शामिल किए जा सकते थे।
यह प्रावधान आपात स्थिति में सरकार को कुछ गुंजाइश देता है। ओमान की खाड़ी की ओर विस्तार की योजना के लिए सरकार को तैनाती बढ़ाने वाले प्रस्ताव में भौगोलिक बदलाव शामिल करना होगा और सभा की सहमति लेनी होगी। इससे विस्तारित मिशन को स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा।
विदेश भेजे जाने वाले कर्मियों के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है। तैनाती का अधिकार-क्षेत्र उनके काम की सीमाएं तय करता है: वे कहां काम कर सकते हैं, उनकी मौजूदगी का उद्देश्य क्या है और मिशन के लिए किस बल को तैनात किया जाएगा। संसदीय निगरानी से सांसदों को प्रस्ताव मंजूर करने से पहले उसकी लागत और खतरे के जोखिम की जांच करने का मौका भी मिलता है।
प्रस्ताव से तैनाती तक का रास्ता
दक्षिण कोरिया में मंजूरी की प्रक्रिया सरकार की नीतिगत समीक्षा से शुरू होती है। इसके बाद मंत्रिमंडल में विचार-विमर्श, राष्ट्रपति की मंजूरी, राष्ट्रीय सभा की सहमति और तैनाती की तैयारियां होती हैं। इसलिए सियोल और वॉशिंगटन के बीच बातचीत लंबी घरेलू प्रक्रिया का एक हिस्सा है।
रक्षा मंत्रालय संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ, सशस्त्र बलों और विदेश मंत्रालय समेत अन्य एजेंसियों से राय जुटाता है। सैन्य योजनाकार प्रस्तावित बल, उसके परिचालन ढांचे, उपलब्ध कर्मियों, उपकरणों, आपूर्ति और बजट की जांच करते हैं। सरकार का सर्वेक्षण दल संभावित तैनाती स्थल के हालात का आकलन कर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद को रिपोर्ट दे सकता है।
संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों से बाहर के मिशन के लिए रक्षा मंत्रालय तैनाती प्रस्ताव तैयार करता है। मंत्रिमंडल में विचार-विमर्श और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद प्रस्ताव राष्ट्रीय सभा की राष्ट्रीय रक्षा समिति के पास जाता है और फिर पूर्ण बैठक में मतदान होता है।
मंजूरी के बाद विस्तृत तैयारियां होती हैं। संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ स्थानीय जरूरतों और अन्य बलों के साथ सहयोग की व्यवस्था करने के लिए समन्वय कर्मियों को भेज सकता है। सशस्त्र सेवाओं को प्रशिक्षण की योजना बनानी होती है, जबकि किसी भी विमान या जहाज के रखरखाव, आपूर्ति और परिचालन क्षेत्र तक पहुंचने की व्यवस्था तय करनी होती है।
दक्षिण कोरिया को विदेशों में कई तरह के मिशन चलाने का अनुभव है। चेओंघे के अलावा उसकी तैनातियों में संयुक्त अरब अमीरात में आख इकाई और लेबनान तथा दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा दे रही डोंगम्योंग और हानबिट इकाइयां शामिल हैं।
ऊर्जा सुरक्षा खाड़ी को दक्षिण कोरिया से जोड़ती है
होर्मुज़ से गुजरने वाली ऊर्जा पर दक्षिण कोरिया की निर्भरता बताती है कि तैनाती की बहस का तत्काल आर्थिक पहलू क्यों है। नौवहन की सुरक्षा से उन मालवाहक जहाजों की आवाजाही जुड़ी है, जो रिफाइनरियों, परिवहन प्रणालियों और कारोबार को चालू रखने में मदद करते हैं।
सियोल सैन्य क्षेत्र से बाहर भी आपूर्ति की व्यवस्थाओं पर काम कर रहा है। 16 अप्रैल तक दक्षिण कोरिया ने 2026 के अंत तक 27.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल और 21 लाख टन नेफ्था की आपूर्ति के लिए प्रतिबद्धताएं हासिल कर ली थीं। नेफ्था एक तेल उत्पाद है, जिसका इस्तेमाल रसायन और प्लास्टिक बनाने के कच्चे माल के रूप में होता है।
खाड़ी के उत्पादकों ने व्यवधानग्रस्त समुद्री मार्ग के बाहर कच्चे तेल को रखने की जगह तलाशते हुए अप्रैल के भंडारण अभियान के दौरान कोरियाई सुविधाओं के अधिक इस्तेमाल पर चर्चा शुरू की थी। दक्षिण कोरिया के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त भंडारण कार्यक्रम के तहत, कोरियाई सुविधाओं में रखा तेल विदेशी उत्पादकों के स्वामित्व में रहता है, जबकि सियोल को किराये से आय और आपात स्थिति में तेल खरीदने का प्राथमिक अधिकार मिलता है।
दक्षिण कोरिया तेल भंडारण क्षमता को लगभग 14 करोड़ बैरल से बढ़ाकर 16 करोड़ बैरल करने की भी समीक्षा कर रहा था। इससे घोषित क्षमता में 2 करोड़ बैरल, यानी करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि होगी। 27.3 करोड़ बैरल की आपूर्ति प्रतिबद्धताएं पूरे साल की डिलीवरी के लिए थीं, जबकि भंडारण के आंकड़े बताते थे कि सुविधाएं एक समय में कितना तेल रख सकती हैं।
भंडारण और समुद्री सुरक्षा आपूर्ति की समस्या के अलग-अलग पहलुओं से निपटते हैं। कोरिया में रखा तेल पहले से ही संकटग्रस्त मार्ग से बाहर और ग्राहकों के करीब है। सुरक्षित नौवहन से भविष्य की खेपों को गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी। होर्मुज़ में भूमिका पर सियोल का विचार वाणिज्यिक समझौतों और भंडार के जरिए आपूर्ति सुरक्षित करने की कोशिशों के साथ-साथ चल रहा है।
मौजूदा स्थिति तक कैसे पहुंचे
अक्टूबर की चर्चा संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने के प्रयासों के कई महीनों बाद हो रही है। प्रमुख घटनाक्रम जलडमरूमध्य में व्यवधान से लेकर भंडारण व्यवस्थाओं और सैन्य योगदान पर विचार तक का सिलसिला दिखाते हैं:
- फरवरी 2026: अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया। इसके बाद ईरान ने होर्मुज़ से आवागमन पर नियंत्रण की कोशिश की और उन जहाजों पर हमले किए, जिन पर उसने बिना अनुमति यात्रा करने का आरोप लगाया।
- 16 अप्रैल, 2026: दक्षिण कोरिया की ऊर्जा प्रतिक्रिया में साल के अंत तक की आपूर्ति प्रतिबद्धताएं और कोरियाई सुविधाओं में अधिक कच्चा तेल रखने को लेकर खाड़ी के उत्पादकों के साथ बातचीत शामिल थी।
- 29 अक्टूबर, 2026: वाई ने संसदीय लेखा-परीक्षा में कहा कि सियोल होर्मुज़ के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है, जिनमें समुद्री गश्ती विमान भी शामिल है। साथ ही उसने युद्ध में भागीदारी के खिलाफ अपनी नीति बरकरार रखी है।
वाई की टिप्पणियों से साफ है कि सरकार अभी विचार के चरण में है। व्यावहारिक चुनौती ऐसा योगदान तय करने की है, जो जहाजरानी में मदद करे, राष्ट्रपति के निर्देशों के अनुरूप हो और जरूरी घरेलू मंजूरी हासिल कर सके।
मुख्य बिंदु
- दक्षिण कोरिया होर्मुज़ के संभावित मिशन के लिए समुद्री गश्ती विमान भेजने पर विचार कर रहा है, लेकिन तैनाती को मंजूरी नहीं मिली है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वाई सुंग-लाक ने कहा कि वॉशिंगटन के साथ बातचीत जारी है और युद्ध में भागीदारी से इनकार किया गया है।
- रक्षा मंत्रालय ओमान की खाड़ी की ओर चेओंघे का परिचालन क्षेत्र बढ़ाने और उसकी क्षमताएं जोड़ने की समीक्षा कर रहा है।
- संविधान के तहत विदेश में बलों की तैनाती के लिए राष्ट्रीय सभा की सहमति जरूरी है।
- ऊर्जा पर निर्भरता के कारण होर्मुज़ से सुरक्षित आवागमन दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था की सीधी चिंता है।
- जहाजरानी में व्यवधान का जोखिम घटाने के लिए सियोल ने आपूर्ति प्रतिबद्धताएं और विस्तारित भंडारण व्यवस्थाएं भी की हैं।






