बजट फोन की बिक्री 47% गिरी, भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट दशक के निचले स्तर पर

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India Smartphone Shipments Hit Decade Low as Budget Phones Slump 47%

भारत के किफायती फोन बाजार पर सबसे अधिक मार

काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार, भारत में स्मार्टफोन शिपमेंट जुलाई से सितंबर 2026 के दौरान एक साल पहले की तुलना में 20% गिरा। मेमोरी चिप की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से डिवाइस महंगे हो गए और उपभोक्ताओं ने अपने फोन बदलने का फैसला टाल दिया। 20,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन की शिपमेंट 47% घटी, जिससे बाजार को पारंपरिक रूप से गति देने वाले किफायती डिवाइस पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ा।

विषय-सूची
  1. भारत के किफायती फोन बाजार पर सबसे अधिक मार
  2. चिप की लागत खरीदारी के फैसले क्यों बदल रही है
  3. बजट लॉन्च कम, महंगे विकल्प ज्यादा
  4. दिवाली से पहले शिपमेंट क्यों घटा
  5. बड़े प्रतिद्वंद्वियों के पीछे हटने से सैमसंग आगे
  6. बाजार सिमटने के बावजूद प्रीमियम लॉन्च को खरीदार
  7. चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी घटने से भारतीय ब्रांडों को जगह
  8. बिक्री के मौके को टिकाऊ कारोबार में बदलना
  9. त्योहारी बिक्री के बाद खरीदारों के सामने क्या होगा
  10. मुख्य बिंदु

ओमडिया ने बाजार में इससे भी बड़ी, 26% की गिरावट का अनुमान लगाया। शिपमेंट घटकर 3.58 करोड़ स्मार्टफोन रह गया, जो 2016 के बाद किसी तीसरी तिमाही का सबसे कम आंकड़ा है। दोनों शोध कंपनियों ने त्योहारी खरीदारी का मौसम शुरू होने के बावजूद तिमाही को मुश्किल बताया। निर्माताओं ने वितरण चैनलों में कम स्टॉक रखा और मुनाफा बचाने पर अधिक ध्यान दिया।

काउंटरपॉइंट के मंथली इंडिया स्मार्टफोन ट्रैकर के मुताबिक, सैमसंग ने नौ तिमाहियों बाद फिर पहला स्थान हासिल किया और शिपमेंट में उसकी हिस्सेदारी 17% रही। बड़े प्रतिस्पर्धियों द्वारा बजट मॉडल की अपनी पेशकश घटाने से भारतीय ब्रांडों को भी फायदा हुआ। हालांकि, सीमित बजट वाले खरीदारों के सामने कम किफायती नए मॉडल आए और कुछ मौजूदा विकल्पों की कीमतें बढ़ गईं।

काउंटरपॉइंट को 2026 में कुल शिपमेंट में करीब 13% गिरावट की आशंका है। त्योहारी बिक्री के बाद कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे 2027 में भी दबाव बना रहेगा। उपभोक्ताओं के लिए व्यावहारिक फैसला अब कठिन होता जा रहा है: ज्यादा खर्च करें, कम फीचर स्वीकारें या पुराने फोन को और लंबे समय तक इस्तेमाल करें।

चिप की लागत खरीदारी के फैसले क्यों बदल रही है

मेमोरी के पुर्जे स्मार्टफोन में ऐप चलाने और तस्वीरें, वीडियो तथा दूसरी फाइलें सहेजने में मदद करते हैं। इन पुर्जों की कीमत बढ़ने पर निर्माताओं को तय करना पड़ता है कि अतिरिक्त लागत का कितना हिस्सा वे खुद उठाएं, कीमत बढ़ाकर ग्राहकों पर डालें या डिवाइस के स्पेसिफिकेशन बदलकर उसकी भरपाई करें।

काउंटरपॉइंट रिसर्च के रिसर्च एनालिस्ट शुभम सिंह ने बताया कि भारत के सबसे बड़े ग्राहक वर्ग पर इस बढ़ोतरी का क्या असर पड़ रहा है:

पुर्जों की बढ़ती लागत से डिवाइस की कीमतें बढ़ीं। इससे किफायती होने पर दबाव बढ़ा और पारंपरिक जन-बाजार का वॉल्यूम इंजन कमजोर हुआ, खासकर 15,000 रुपये से कम कीमत वाले वर्ग में।

काउंटरपॉइंट के मुताबिक, उपभोक्ता ज्यादा सोच-समझकर खरीदारी कर रहे हैं और फोन बदलने के बीच का समय बढ़ा रहे हैं। 20,000 रुपये से कम कीमत वाले वर्ग में 47% गिरावट की एक वजह यह भी थी कि कीमतें बढ़ने के बाद मॉडल ऊंचे मूल्य वर्ग में पहुंच गए। जिस फोन की कीमत पहले खरीदार के बजट में आती थी, वह अब उससे बाहर हो सकता है, भले ही फीचर में कोई बड़ा सुधार न हुआ हो।

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निर्माताओं ने सस्ते डिवाइस की अपनी रेंज घटाई और ज्यादा 4G फोन तथा कम स्पेसिफिकेशन वाले मॉडल पेश किए। ओमडिया के प्रिंसिपल एनालिस्ट सन्यम चौरसिया ने कहा कि कंपनियां लागत नियंत्रित करने के लिए चार से पांच तिमाहियों से स्पेसिफिकेशन घटा रही हैं। ऐसे में खरीदारों को पहले जैसी कीमत बनाए रखने के लिए कम मेमोरी, स्टोरेज या दूसरे हार्डवेयर से समझौता करना पड़ सकता है।

बजट लॉन्च कम, महंगे विकल्प ज्यादा

टेकआर्क के लॉन्च आंकड़े बताते हैं कि उत्पादों का मिश्रण किस हद तक बदल गया है। 2026 की तीसरी तिमाही में 10,000 रुपये से कम कीमत वाले सिर्फ सात स्मार्टफोन मॉडल लॉन्च हुए। बाजार के दूसरे छोर पर, 1,00,000 रुपये या इससे अधिक कीमत वाले वेरिएंट की संख्या दूसरी तिमाही के पांच से बढ़कर तीसरी तिमाही में 26 हो गई।

एक ही तिमाही में महंगे वेरिएंट की संख्या पांच गुने से भी अधिक रही। टेकआर्क के मुताबिक, तुलनीय उत्पादों की लॉन्च कीमतें एक साल पहले की तुलना में 14% बढ़ीं। इससे प्रीमियम लॉन्च की बढ़ती संख्या से इतर कीमतों में हुई बढ़ोतरी का भी अंदाजा मिलता है।

एंट्री-लेवल कीमतों पर दबाव लावा के मामले में दिखता है। पुर्जों की लागत बढ़ने के बीच उसके शुरुआती 5G स्मार्टफोन की कीमत 7,999 रुपये से बढ़कर 14,499 रुपये हो गई। यह 6,500 रुपये या करीब 81% की बढ़ोतरी है। कंपनी ने कहा कि वह लागत संभालने के लिए पुर्जों के चयन में बदलाव, सॉफ्टवेयर सुधार और रणनीतिक तरीके से खरीद कर रही है।

काउंटरपॉइंट के मुताबिक, विकास के अवसर तेजी से प्रीमियम और अपर-मिडिल मूल्य वर्गों में केंद्रित होंगे। वहां निर्माता पुर्जों की लागत की भरपाई आसानी से कर सकते हैं, जबकि सस्ते वर्गों के खरीदारों के लिए बजट बढ़ाना मुश्किल है। नतीजतन, बाजार में महंगे विकल्प तो बढ़ रहे हैं, लेकिन बड़ी बिक्री का पारंपरिक आधार कमजोर हो रहा है।

दिवाली से पहले शिपमेंट क्यों घटा

स्मार्टफोन शिपमेंट में बिक्री चैनलों, जिनमें वितरक और खुदरा विक्रेता शामिल हैं, तक पहुंचने वाले डिवाइस गिने जाते हैं। ग्राहक बाद में खरीदारी करते हैं। इसलिए निर्माताओं का दुकानों में कितना स्टॉक भेजने का फैसला, उपभोक्ता मांग कमजोर होने के साथ-साथ तिमाही की गिरावट को समझने में मदद करता है।

काउंटरपॉइंट ने कहा कि ब्रांडों ने दिवाली से पहले मुनाफे की सुरक्षा, उत्पाद रेंज को सरल बनाने और कम इन्वेंटरी रखने को प्राथमिकता दी। ओमडिया ने यह भी कहा कि दिवाली देर से होने के कारण त्योहारी स्टॉक का कुछ हिस्सा अक्टूबर में आया, जो जुलाई से सितंबर की रिपोर्टिंग अवधि के बाहर है।

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खुदरा विक्रेताओं के सामने संतुलन की चुनौती थी: छुट्टियों की मांग पूरी करने लायक स्टॉक रखें, लेकिन इतना नहीं कि महंगी इन्वेंटरी बिना बिके रह जाए। कीमतों में बार-बार बदलाव से योजना बनाना मुश्किल हुआ, खासकर उन ब्रांडों के लिए जो किफायती मॉडल पर निर्भर हैं।

घटनाक्रम का क्रम दबाव बढ़ने की कहानी दिखाता है:

  • अप्रैल से जून 2026: ओमडिया के अनुसार, चीनी ब्रांडों की भारत के स्मार्टफोन बाजार में 71% हिस्सेदारी थी। इस दौरान टेकआर्क ने 1,00,000 रुपये या उससे अधिक कीमत वाले वेरिएंट के पांच लॉन्च गिने।
  • जुलाई से सितंबर 2026: ओमडिया ने 3.58 करोड़ यूनिट शिपमेंट का अनुमान लगाया, जबकि काउंटरपॉइंट ने 20,000 रुपये से कम कीमत वाले वर्ग में 47% गिरावट दर्ज की।
  • अक्टूबर 2026: बाजार आकलनों में त्योहारी स्टॉक को लेकर सतर्कता का जिक्र था और कुछ इन्वेंटरी अक्टूबर में जुटाई गई।
  • त्योहारी बिक्री के बाद: काउंटरपॉइंट को कीमतों पर नए दबाव और इसके बाद 2027 में मुश्किल बाजार की आशंका है।

बड़े प्रतिद्वंद्वियों के पीछे हटने से सैमसंग आगे

काउंटरपॉइंट के मुताबिक, सैमसंग की शिपमेंट हिस्सेदारी एक साल पहले के 13% से बढ़कर 17% हो गई। उसकी गैलेक्सी A सीरीज, ऑनलाइन और भौतिक दोनों दुकानों के जरिए बिक्री तथा अपेक्षाकृत सीमित कीमत बढ़ोतरी ने उसे बढ़त हासिल करने में मदद की। काउंटरपॉइंट ने कहा कि पांच सबसे बड़े ब्रांडों में सालाना शिपमेंट वृद्धि दर्ज करने वाला सैमसंग अकेला ब्रांड था।

वीवो, iQOO को छोड़कर, 16% हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा। एक साल पहले यह 20% थी। ओप्पो 12% के साथ उसके बाद रहा, जबकि एक साल पहले उसकी हिस्सेदारी 13% थी। शाओमी और पोको की संयुक्त हिस्सेदारी 12% रही; इनमें शाओमी की 8% और पोको की 4% थी। एप्पल की हिस्सेदारी 8% रही, जो पहले 9% थी।

ओमडिया के शिपमेंट अनुमान में सैमसंग के 67 लाख डिवाइस शामिल हैं, जिन्हें गैलेक्सी A07, A17 और A27 से समर्थन मिला। वीवो ने 64 लाख डिवाइस शिप किए, जो 34% की गिरावट है। ओमडिया ने इसे पांच सबसे बड़े ब्रांडों में सबसे बड़ी गिरावट बताया। ओप्पो ने 49 लाख डिवाइस शिप किए, जो 24% कम हैं, जबकि शाओमी ने 47 लाख डिवाइस शिप किए, जो 28% की गिरावट है।

वीवो को बार-बार कीमतें बढ़ने और एंट्री मॉडल की सीमित आपूर्ति का सामना करना पड़ा। ओप्पो की महंगी रेनो16 सीरीज ने उसे ऊंचे मूल्य वर्गों की ओर बढ़ने में मदद की, जबकि शाओमी को कीमत, RAM और स्टोरेज को लेकर मुश्किल फैसले करने पड़े। काउंटरपॉइंट के अनुसार, पोको समेत शाओमी अब भी 10,001 से 20,000 रुपये वाले वर्ग में आगे रहा।

काउंटरपॉइंट के मुताबिक, 20,000 रुपये से अधिक कीमत वाले वर्ग में ओप्पो की वृद्धि 100% से ज्यादा रही। उसका प्रदर्शन दिखाता है कि कोई ब्रांड महंगे डिवाइस में विस्तार कर सकता है, जबकि बजट फोन की बिक्री कमजोर होने से उसका कुल शिपमेंट घट सकता है।

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बाजार सिमटने के बावजूद प्रीमियम लॉन्च को खरीदार

काउंटरपॉइंट के मुताबिक, एप्पल की शुरुआती iPhone 18 Pro सीरीज की बिक्री लॉन्च के समय iPhone 17 Pro परिवार की तुलना में करीब 20% अधिक रही। पुराने iPhone 17 रेंज की मांग भी जारी रही, क्योंकि एप्पल ने अपने सभी उत्पादों की कीमतों में बदलाव किया।

ओमडिया ने एप्पल की तिमाही शिपमेंट 39 लाख डिवाइस आंकी। iPhone 16 और iPhone 17 की मांग, संभावित कीमत बढ़ोतरी से पहले स्टॉक जुटाना तथा तिमाही के आखिर में iPhone 18 Pro और Pro Max का आना इस आंकड़े में सहायक रहा। कैशबैक, एक्सचेंज बोनस और फाइनेंसिंग से खरीदारों को खरीद की लागत संभालने में मदद मिली।

पिक्सल 11 डिवाइस की मदद से गूगल का शिपमेंट 50% से अधिक बढ़ा, जबकि आईटेल की वृद्धि 88% रही। स्मार्टफोन चिपसेट में मीडियाटेक 45% हिस्सेदारी के साथ आगे रहा। सस्ते फोन पर मुनाफा बनाए रखने के तरीके तलाश रहे निर्माताओं के बीच यूनीसॉक ने फिर अपनी स्थिति मजबूत की।

ओमडिया के उपभोक्ता शोध में पाया गया कि भारत में करीब दस में से चार लोग उपयोगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फीचर के लिए अधिक भुगतान करने पर विचार करेंगे। इससे निर्माताओं को फोन अपग्रेड के लिए प्रोत्साहित करने की संभावित वजह मिलती है। हालांकि, दोनों ट्रैकरों के मुताबिक, फिलहाल खरीदारी के फैसले कीमत, फाइनेंसिंग और नए फोन की उपयोगिता से करीबी तौर पर जुड़े हैं।

चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी घटने से भारतीय ब्रांडों को जगह

ओमडिया के अनुमान में भारत के स्मार्टफोन शिपमेंट में चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी 68% रही, जो एक साल पहले 75% और पिछली तिमाही में 71% थी। काउंटरपॉइंट ने उनकी हिस्सेदारी 67% आंकी, जो 2019 की पहली तिमाही के बाद सबसे कम है। ओमडिया की सालाना तुलना में यह सात प्रतिशत अंक की गिरावट है।

काउंटरपॉइंट के उस आंकड़े के मुताबिक, जिसे Ai+ के मुख्य कार्यकारी माधव शेठ ने भी उद्धृत किया, भारतीय ब्रांडों की संयुक्त हिस्सेदारी 2% से बढ़कर 7% हो गई। इसी ट्रैकर से जुड़ा एक विरोधाभासी आंकड़ा उनकी हिस्सेदारी 3% से बढ़कर 15% बताता है, लेकिन अलग-अलग कुल आंकड़ों का कारण स्पष्ट नहीं करता। काउंटरपॉइंट के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा कि लावा और Ai+ का भारतीय ब्रांडों के योगदान में लगभग 95% हिस्सा था।

Ai+ सबसे तेजी से बढ़ने वाला ब्रांड रहा। उसका शिपमेंट 306% बढ़ा, यानी एक साल पहले के स्तर से चार गुने से थोड़ा अधिक हुआ। काउंटरपॉइंट ने इस बढ़ोतरी की वजह उत्पाद रेंज का विस्तार, बेहतर मार्केटिंग और अधिक दृश्यता बताई। ब्रांड जुलाई 2025 में लॉन्च हुआ था, इसलिए तुलना के लिए उसका शुरुआती आधार अपेक्षाकृत छोटा था।

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NxtQuantum Shift Technologies, जो Ai+ की संचालक कंपनी है, के मुख्य कार्यकारी माधव शेठ ने इस चुनौती को स्वीकार किया:

हमारा शुरुआती आधार अपेक्षाकृत छोटा है, इसलिए इस रफ्तार को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिर भी हम उस बड़े बदलाव का हिस्सा बनकर खुश हैं, जो भारतीय ब्रांडों के लिए स्थापित और सम्मानित वैश्विक कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा की जगह बना रहा है।

मिवी और बोल्ट ने सितंबर तिमाही में स्मार्टफोन बाजार में कदम रखा और 15,000 रुपये से कम कीमत वाले खरीदारों को लक्ष्य बनाया। लावा ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में उसकी बिक्री दोगुने से अधिक हो गई। घरेलू कंपनियां उन ग्राहकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जिनके पास स्थापित प्रतिस्पर्धियों की बजट रेंज घटने से कम विकल्प बचे हैं।

बिक्री के मौके को टिकाऊ कारोबार में बदलना

ओमडिया का अनुमान है कि छोटे घरेलू ब्रांड हर तिमाही करीब 3 से 5 लाख फोन शिप कर रहे थे। इस स्तर से आगे बढ़ने के लिए भरोसेमंद स्टॉक, अधिक व्यापक खुदरा मौजूदगी, विक्रेताओं के लिए व्यावहारिक मुनाफा और ज्यादा ग्राहकों की मदद करने वाली मरम्मत सेवाएं जरूरी हैं।

पाठक ने कहा कि पहली खरीद के बाद ग्राहकों को बनाए रखने के लिए उत्पाद विकास और सेवा अहम होंगे। उन्होंने जरूरतों को सीधे तौर पर बताया:

भारतीय ब्रांडों को अनुसंधान एवं विकास, उत्पाद गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर काम कर सकने वाली ग्राहक सेवा प्रणालियों में निवेश करना होगा।

भारत का विनिर्माण आधार घरेलू ब्रांडों के पास एक दशक पहले की तुलना में कहीं मजबूत नींव देता है। मोबाइल फोन उत्पादन 2014-15 के 18,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 6.27 लाख करोड़ रुपये हो गया। निर्यात करीब 1,500 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 2.59 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।

अगस्त में घोषित 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन विनिर्माण योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी। ब्रांडों पर केंद्रित इस योजना में पात्र कंपनियों को योग्य बिक्री पर 5% प्रोत्साहन, भारतीय डिजाइन और अनुसंधान के लिए अतिरिक्त 3% तथा घरेलू खरीद के लिए 1.5% तक प्रोत्साहन मिलेगा।

पात्रता में भारतीय स्वामित्व, प्रबंधन नियंत्रण, बौद्धिक संपदा और आंतरिक डिजाइन क्षमता की शर्तें शामिल हैं। लावा की योजना डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल, सर्किट बोर्ड तथा आवरण समेत पुर्जों में पांच साल के दौरान करीब 1,100 करोड़ रुपये निवेश करने की है। माइक्रोमैक्स की विनिर्माण इकाई भगवती प्रोडक्ट्स, हुआकिन के साथ मिलकर ग्रेटर नोएडा में संयंत्र लगाने की योजना बना रही है। इन निवेशों का संबंध फोन के पीछे के कारखानों और पुर्जों से है। इसके साथ ही बार-बार खरीद करने वाले ग्राहक जुटाने की अलग चुनौती भी है।

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त्योहारी बिक्री के बाद खरीदारों के सामने क्या होगा

2026 में बाजार में करीब 13% गिरावट का काउंटरपॉइंट का अनुमान ऊंची कीमतों के लगातार दबाव और फोन बदलने में हो रही देरी पर आधारित है। ओमडिया को 2027 में भी कम एकल-अंकीय प्रतिशत की गिरावट की आशंका है।

काउंटरपॉइंट के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक ने कहा कि लागत और त्योहारी खरीदारी के बाद आने वाली सामान्य सुस्ती, दोनों मिलकर बाजार पर दबाव डालेंगी:

त्योहारी मौसम के बाद की मौसमी सुस्ती दबाव बढ़ाएगी, जबकि पुर्जों की ऊंची लागत से त्योहारी बिक्री के बाद कीमतों में एक और दौर की बढ़ोतरी होने की आशंका है।

अलग-अलग निर्माताओं की अगली कीमत बढ़ोतरी की तारीख या रकम नहीं बताई गई। खुदरा कीमतें नए लॉन्च, बची हुई इन्वेंटरी, प्रतिस्पर्धा और प्रमोशन पर निर्भर करेंगी। पुराने मॉडल का स्टॉक निकालने के लिए छूट अब भी मिल सकती है।

अग्रिम ब्याज के बिना विज्ञापित किस्त योजनाएं, एक्सचेंज ऑफर और खुदरा विक्रेताओं के प्रमोशन की अहमियत बढ़ने की उम्मीद है। खराब हो चुके फोन को बदलने वाले उपभोक्ताओं के लिए इन ऑफरों से तुरंत चुकाई जाने वाली रकम कम हो सकती है या उसका भुगतान बांटा जा सकता है। मूल फैसला फिर भी साफ है: जब दुकानों तक कम किफायती मॉडल पहुंच रहे हों, तो कौन-सी कीमत, फीचर और सेवा का मेल परिवार के बजट में फिट बैठता है।

मुख्य बिंदु

  • काउंटरपॉइंट ने जुलाई से सितंबर 2026 में सालाना शिपमेंट में 20% गिरावट दर्ज की; ओमडिया ने 26% गिरावट के साथ 3.58 करोड़ फोन का अनुमान लगाया।
  • कीमतें बढ़ने और उपभोक्ताओं द्वारा अपग्रेड टालने के बीच 20,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन की शिपमेंट 47% घटी।
  • काउंटरपॉइंट के ट्रैकर में 17% हिस्सेदारी के साथ सैमसंग फिर आगे रहा।
  • चीनी ब्रांडों की हिस्सेदारी घटी, जबकि Ai+ का शिपमेंट 306% बढ़ा और भारतीय ब्रांडों की मौजूदगी मजबूत हुई।
  • काउंटरपॉइंट को भारत के स्मार्टफोन बाजार में 2026 में करीब 13% गिरावट और 2027 में भी दबाव की आशंका है।
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