दो सपाट चम्मच, छह माप और 3,50,000 डॉलर का समझौता
राहुल अग्रवाल ने शार्क टैंक यूएसए में पॉलीगॉन्स के लिए अपनी कंपनी की 7% हिस्सेदारी के बदले 3,50,000 डॉलर मांगे। वह निवेशक लोरी ग्रीनर और अभिनेता-निर्माता मिंडी कलिंग से इसी रकम के बदले 8% इक्विटी और सलाहकार हिस्सेदारी के रूप में अतिरिक्त 2% का समझौता लेकर निकले। उनकी प्रस्तुति दो ऐसे मापने वाले चम्मचों पर केंद्रित थी, जो मुड़कर महज 2.8 मिलीमीटर मोटे हो जाते हैं।
विषय-सूची
- दो सपाट चम्मच, छह माप और 3,50,000 डॉलर का समझौता
- चम्मच सपाट सतह को मापने के औजार में कैसे बदलते हैं
- कॉलेज की चुनौती, जिसका जवाब तीन दिन में मिला
- पहले स्केच से विनिर्माण ज्यादा कठिन क्यों था
- 2016 के फंडरेजर से टीवी प्रस्तुति तक
- बिक्री के आंकड़े कारोबार के बारे में क्या बताते हैं
- निवेशकों ने कीमत पर कैसे बातचीत की
- कलिंग ने निवेश क्यों करना चाहा और हर्जावेक पीछे क्यों हटे
- पुरस्कार, नकली उत्पाद और अगले उत्पाद
- मुख्य बातें
अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान में 2014 में पढ़ाई के दौरान यह विचार विकसित करने वाले भारतीय औद्योगिक डिजाइनर ने 40 लाख डॉलर की कुल बिक्री वाला कारोबार पेश किया। कंपनी के खुलासों के मुताबिक, टीवी पर आने से पहले पॉलीगॉन्स 110 से अधिक देशों में 2,00,000 से ज्यादा इकाइयां बेच चुका था।
सीजन 18 के एपिसोड 4 के रूप में पहचाना गया यह एपिसोड 14 अक्टूबर, 2026 को प्रसारित हुआ। अग्रवाल ने कहा कि वह कार्यक्रम में आने से करीब दो महीने पहले अमेरिका आए थे और न्यू जर्सी में रहते थे।
निवेश को लेकर बातचीत ने एक स्थापित उत्पाद को बड़ा मंच दिया। साथ ही, इसकी सादगी के पीछे की कठिन मेहनत भी सामने आई: विकास में करीब तीन साल लगे, निर्माता सात बार बदले गए और शिपिंग शुरू करने से पहले चीन के 16 दौरे करने पड़े। कारोबार बढ़ने के बावजूद, 2016 के शुरुआती क्राउडफंडिंग अभियान के कुछ समर्थक अब भी अपने चम्मचों का इंतजार कर रहे थे।
अग्रवाल की कहानी में एक उपयोगी आविष्कार, चुनौतीपूर्ण विनिर्माण प्रक्रिया और पुराने ऑर्डर पूरे करते हुए कारोबार बढ़ाने की कोशिश, तीनों शामिल हैं। टीवी पर हुआ निवेश समझौता पूरा होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए निवेशकों ने स्क्रीन पर जो पेशकश की, उसका सबसे स्पष्ट ब्यौरा यही समझौता है।
चम्मच सपाट सतह को मापने के औजार में कैसे बदलते हैं
पॉलीगॉन्स के दो लचीले औजार छह पारंपरिक मापने वाले चम्मचों की जगह लेते हैं। तय निशानों पर दबाने से हर औजार का आकार बदल जाता है और उसमें अलग-अलग मात्रा मापी जा सकती है। इसके लिए दूसरे बर्तन की जरूरत नहीं पड़ती।
बड़ा औजार आधा बड़ा चम्मच, एक बड़ा चम्मच या दो बड़े चम्मच मापता है। छोटा औजार चौथाई छोटा चम्मच, आधा छोटा चम्मच या एक छोटा चम्मच मापता है। इस तरह, पारंपरिक छह चम्मचों के मुकाबले एक तिहाई औजारों से छह माप मिलते हैं।
इस डिजाइन की प्रेरणा ओरिगामी से मिली है, जो कागज मोड़कर आकार बनाने की जापानी कला है। यहां मोड़ने से सपाट सतह गीली या सूखी सामग्री रखने के लिए छोटा पात्र बन जाती है। भंडारण के लिए चम्मच फिर सपाट हो जाते हैं और उनसे चिपचिपी सामग्री निकालना भी आसान होता है।
इनमें खाद्य-उपयोग योग्य थर्मोप्लास्टिक, पानी को दूर रखने वाला सिलिकॉन और अंदर जड़े नियोडिमियम चुंबक शामिल हैं। थर्मोप्लास्टिक ऐसा प्लास्टिक है जिसे गर्मी से आकार दिया जा सकता है; नियोडिमियम चुंबक छोटे लेकिन शक्तिशाली होते हैं। इन चुंबकों से सपाट चम्मच फ्रिज पर चिपकाए जा सकते हैं।
खाना बनाने वालों के लिए मुख्य बदलाव डिजिटल नहीं, बल्कि व्यावहारिक है: दराज में कम बिखरे औजार, हर चम्मच से कई माप और सफाई के लिए पूरी तरह खुल जाने वाली सतह। अग्रवाल ने यह भी दिखाया कि एक चम्मच का इस्तेमाल दूसरे चम्मच में सामग्री समतल करने के लिए कैसे किया जा सकता है।
कॉलेज की चुनौती, जिसका जवाब तीन दिन में मिला
अग्रवाल को इस विचार की शुरुआत राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के एक वरिष्ठ छात्र की चुनौती से मिली। उस वरिष्ठ ने कहा कि चम्मच अपने अंतिम रूप तक पहुंच चुका है और उसमें सुधार की गुंजाइश बहुत कम है।
पॉलीगॉन्स डिजाइन के संस्थापक अग्रवाल ने समस्या में अपनी दिलचस्पी से जुड़ी एक अप्रत्याशित बात याद की:
मैं खाना तक नहीं बनाता।
यह बात उनके मन में रह गई। तीन दिन के भीतर उन्होंने एक सपाट औजार का मूल विचार विकसित कर लिया, जिसे मोड़कर अलग-अलग मापों में बदला जा सकता था। इस विचार को ग्राहकों के लिए तैयार करने में परीक्षण, बदलाव और विनिर्माण के कई साल लगे।
पहले स्केच से विनिर्माण ज्यादा कठिन क्यों था
अग्रवाल ने निवेशकों को बताया कि छोटे, एक-दूसरे में जुड़ने वाले कब्जों के कारण उत्पादन मुश्किल था। इन कब्जों को औजार को मनचाहे आकार में मोड़ने और बार-बार वापस सपाट करने लायक होना था।
उत्पाद विकसित करने में करीब तीन साल लगे। शिपिंग शुरू करने से पहले निर्माता सात बार बदले गए और चीन के 16 दौरे किए गए। लंबी प्रक्रिया से समझ आता है कि कुछ ही दिनों में आए विचार को पूरा होने में सालों क्यों लगे।
डिजाइन की चुनौती यह थी कि बड़े पैमाने पर बनी हर इकाई में मोड़ने की क्रिया भरोसेमंद रहे। मापने वाले चम्मच का आकार एकसमान होना जरूरी है, क्योंकि उसी से तय होता है कि उसमें कितनी सामग्री आएगी। इसलिए उत्पादन की छोटी-छोटी बातें भी उत्पाद के मुख्य काम को प्रभावित करती हैं।
अग्रवाल ने कहा कि मांग बढ़ने के साथ उत्पादन की गति अब भी बाधा बनी हुई थी। इससे निवेश का व्यावहारिक मकसद प्रचार से आगे जाता है: कारोबार को ग्राहकों की जरूरत पूरी करने लायक भंडार चाहिए, ताकि ऑर्डर आपूर्ति से आगे न निकल जाएं।
2016 के फंडरेजर से टीवी प्रस्तुति तक
शार्क टैंक से काफी पहले पॉलीगॉन्स के पास ग्राहक और वित्तीय समर्थन था। 2016 के उसके किकस्टार्टर अभियान में 36,863 समर्थक जुड़े और 10 लाख डॉलर से अधिक जुटाए गए। समर्थकों ने उत्पाद को उत्पादन में लाने के लिए पैसे देने का वादा किया था; वादे के तहत मिलने वाले पुरस्कारों में चम्मचों के सेट भी शामिल थे।
कंपनी के विकास और बिक्री के पड़ाव एक दशक से अधिक समय में फैले हैं:
- 2014: अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान में पढ़ाई के दौरान अग्रवाल ने शुरुआती विचार विकसित किया।
- 2016: किकस्टार्टर अभियान में 36,863 समर्थक जुड़े और 10 लाख डॉलर से अधिक जुटाए गए।
- 12 अक्टूबर, 2026: कंपनी की घोषणा में 110 से अधिक देशों में बिक्री, अंतरराष्ट्रीय डिजाइन पुरस्कार और व्यापक ऑनलाइन पहुंच का जिक्र किया गया।
- 14 अक्टूबर, 2026: पॉलीगॉन्स शार्क टैंक यूएसए के सीजन 18, एपिसोड 4 में दिखाई दिया।
- अक्टूबर 2026: कंपनी ने कहा कि शुरुआती क्राउडफंडिंग समर्थकों में से दस में नौ से अधिक को उनके सेट मिल चुके थे।
पॉलीगॉन्स ने कहा कि वह हर सप्ताह समर्थकों के बाकी ऑर्डर भेज रहा था और बचे हुए लोगों से डिलीवरी की जानकारी की पुष्टि करने के लिए संपर्क कर रहा था। इंतजार कर रहे लोगों के लिए उसने खास ओरिजिन ऑरेंज रंग भी पेश किया।
बिक्री के आंकड़े कारोबार के बारे में क्या बताते हैं
अग्रवाल ने निवेशकों को बताया कि पॉलीगॉन्स की कुल बिक्री 40 लाख डॉलर रही, जिसमें पिछले साल की बिक्री 12.5 लाख डॉलर थी। इसका मतलब है कि प्रस्तुति तक दर्ज कुल बिक्री का करीब 31% हिस्सा पिछले साल आया, जो दिखाता है कि कारोबार का बड़ा हिस्सा अपेक्षाकृत हाल में बना।
उन्होंने करीब 2,10,000 डॉलर को मुनाफा बताया और कहा कि 40,000 डॉलर व्यापार मेलों और अन्य कारोबारी गतिविधियों में फिर से लगाए गए। प्रस्तुति के एक ब्यौरे में 2,10,000 डॉलर के आंकड़े को बिक्री भी बताया गया है, हालांकि विस्तृत वित्तीय चर्चा में सालाना बिक्री 12.5 लाख डॉलर बताई गई है। अग्रवाल के मुनाफे वाले ब्यौरे के आधार पर 2,10,000 डॉलर, सालाना आमदनी का करीब 17% है।
अग्रवाल ने कहा कि वह खुद को करीब 500 डॉलर प्रति माह वेतन देते थे। उनका निजी वेतन कंपनी की बताई गई आमदनी या मुनाफे से काफी कम था। आमदनी बिक्री से कारोबार को मिलने वाला पैसा है; खर्च निकालने के बाद बची रकम मुनाफा होती है। संस्थापक का वेतन उनके काम के बदले अलग भुगतान है।
प्रस्तुति में एक सेट की लागत करीब 7 से 7.50 डॉलर बताई गई, जबकि बिक्री कीमत आम तौर पर 25 से 29 डॉलर के बीच थी। ग्राहक अधिग्रहण लागत, यानी एक ग्राहक पाने पर औसतन होने वाला खर्च, करीब 7.50 डॉलर था। 25 डॉलर की कीमत, 7 डॉलर की विनिर्माण लागत और 7.50 डॉलर की अधिग्रहण लागत मानें, तो ऑर्डर पूरा करने, बिक्री शुल्क और प्रशासन जैसे अन्य खर्चों से पहले 10.50 डॉलर बचते हैं।
पॉलीगॉन्स अमेजन, टिकटॉक शॉप और अपनी वेबसाइट के जरिए बेचता था। इन माध्यमों से उसे खरीदारों तक पहुंचने के कई रास्ते मिलते हैं। लागत के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि विनिर्माण लागत और खुदरा कीमत के बीच बड़ा अंतर होना, कमाई का हिसाब लगाने की सिर्फ शुरुआत है।
निवेशकों ने कीमत पर कैसे बातचीत की
अग्रवाल की शुरुआती मांग, 7% हिस्सेदारी के बदले 3,50,000 डॉलर, कंपनी का मूल्य 50 लाख डॉलर तय करती थी। केविन ओ'लेरी ने शुरुआत में उतनी ही रकम के बदले 15% हिस्सेदारी की पेशकश की, फिर ग्रीनर और कलिंग की प्रतिस्पर्धी पेशकश के बाद अपनी मांग घटाकर 10% कर दी।
अग्रवाल ने ग्रीनर और कलिंग से 8% इक्विटी और सलाहकार हिस्सेदारी के रूप में 2% पर बातचीत की। सलाहकार हिस्सेदारी उस इक्विटी हिस्से को कहते हैं जो सलाह और समर्थन से जुड़ा होता है। दोनों हिस्से मिलाकर कंपनी का 10% बनते हैं।
अंतिम शर्तों से मूल्यांकन के दो आंकड़े निकलते हैं, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि किस हिस्सेदारी को आधार बनाया जाए। 3,50,000 डॉलर को 8% निवेश हिस्सेदारी से भाग देने पर मूल्य करीब 43.75 लाख डॉलर बनता है। सलाहकार हिस्सेदारी समेत पूरे 10% को गिनने पर प्रभावी मूल्यांकन 35 लाख डॉलर होता है। सौदे के ब्यौरों में दोनों आंकड़े दिखने की वजह यही है।
खबरों के मुताबिक, बातचीत से तय पैकेज में भंडार के लिए 5,00,000 डॉलर की क्रेडिट लाइन भी शामिल थी। क्रेडिट लाइन से कारोबार जरूरत पड़ने पर तय सीमा तक उधार ले सकता है। यह 3,50,000 डॉलर के इक्विटी निवेश से अलग है और उधार ली गई रकम चुकानी होगी।
अग्रवाल के लिए इस बातचीत में नकदी, भंडार के लिए संभावित वित्तपोषण और कारोबारी मदद की पेशकश करने वाले निवेशक शामिल थे। ग्रीनर और कलिंग को ऐसे उत्पाद वाली कंपनी में हिस्सेदारी मिलती, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बिक्री पहले से थी और जिसे कैमरे पर आसानी से दिखाया जा सकता था।
कलिंग ने निवेश क्यों करना चाहा और हर्जावेक पीछे क्यों हटे
अतिथि निवेशक के रूप में आईं कलिंग ने इस उत्पाद को भारतीय खाना पकाने के अपने अनुभव से जोड़ा। उन्होंने छल्ले से जुड़े पारंपरिक चम्मचों को संभालने की परेशानी का जिक्र किया:
मुझे भारतीय खाना बनाना बहुत पसंद है। जब मुझे इन लटकते, छनछनाते छोटे चम्मचों के कंगन को पहनना पड़ता है, तो मुझे बहुत झुंझलाहट होती है। मुझे लगता है कि यह वाकई बेहद सूझबूझ वाला है।
कलिंग ने कहा कि वह खुद इस उत्पाद का इस्तेमाल कर सकती हैं और अपने सोशल मीडिया फॉलोअर्स को दिखा सकती हैं। यह दिलचस्पी ऐसे औजार के लिए खास मायने रखती थी, जिसकी मोड़ने वाली प्रणाली को छोटे वीडियो में दिखाया जा सकता है।
निवेशक रॉबर्ट हर्जावेक ने डिजाइन की तारीफ की, लेकिन खरीदारों को प्रीमियम कीमत चुकाने के लिए राजी करने की चुनौती के कारण निवेश से मना कर दिया। उन्होंने प्रस्तुति के दौरान अपनी चिंता समझाई:
मुझे लगता है कि आपको लोगों को इसके बारे में समझाना होगा। यह महंगे दर्जे का डिजाइन उत्पाद है। इसका बाजार होगा, लेकिन आपको ऐसी चीज से मुकाबला करना होगा जिसकी कीमत एक डॉलर है, इसलिए मैं इसमें निवेश नहीं करूंगा।
दोनों प्रतिक्रियाएं पॉलीगॉन्स के सामने कारोबारी चुनौती को उजागर करती हैं। कलिंग ने एक उपयोगी वस्तु देखी, जिसे वह दिखाना चाहती थीं। हर्जावेक का ध्यान सस्ते पारंपरिक विकल्प पर था। पॉलीगॉन्स को लोगों को समझाना होगा कि सीमित जगह में रखा जा सकना, लचीले माप और मोड़ने वाला डिजाइन बहुत अधिक कीमत के लायक क्यों हैं।
पुरस्कार, नकली उत्पाद और अगले उत्पाद
कंपनी के खुलासों के मुताबिक, पॉलीगॉन्स को 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय डिजाइन पुरस्कार मिले हैं और इसे मोमा डिजाइन स्टोर ने चुना है। हाल के सम्मानों में 2026 एज़ेड अवॉर्ड्स में अपनी श्रेणी का जनमत पुरस्कार शामिल था।
12 अक्टूबर की कंपनी घोषणा के मुताबिक, चम्मचों के वीडियो को बिना विज्ञापन के प्रचार पर पैसा खर्च किए 50 करोड़ से अधिक बार देखा गया। कंपनी ने यह भी कहा कि उसने नकली उत्पादों की 4,600 से अधिक लिस्टिंग हटवाईं।
ये आंकड़े डिजाइन की पहुंच और बिक्री के माध्यमों की सुरक्षा के लिए जरूरी काम, दोनों को दिखाते हैं। ऑनलाइन आसानी से प्रदर्शित किया जा सकने वाला उत्पाद दुनिया भर के ग्राहकों को आकर्षित कर सकता है, लेकिन नकल के चलते विनिर्माण और ऑर्डर पूरे करने के साथ कारोबार पर एक और जिम्मेदारी आती है।
अग्रवाल के पास मोड़कर रखे जा सकने वाले मापने के कप, कीप और सपाट पावर स्ट्रिप के प्रोटोटाइप थे। उन्होंने निवेशकों से कहा कि दूसरे घरेलू उत्पादों की श्रेणियों में जाने से पहले रसोई के उत्पादों की रेंज बढ़ाई जाएगी।
निवेशकों को पॉलीगॉन्स की व्यापक महत्वाकांक्षा समझाते हुए अग्रवाल ने उन उत्पादों के पीछे का साझा विचार बताया:
हम ऐसे उत्पाद बनाने के कारोबार में हैं, जिनकी जरूरत न होने पर वे नजर न आएं।
फिलहाल काम ज्यादा ठोस है: उत्पादन बढ़ाना, क्राउडफंडिंग के बाकी समर्थकों को डिलीवरी पूरी करना और टीवी से मिले ध्यान को ऐसी बिक्री में बदलना जिसे कंपनी पूरा कर सके। चम्मच उस कॉलेज की चुनौती से बहुत आगे निकल चुके हैं जिसने उन्हें प्रेरित किया था; आगे की राह इस बात पर निर्भर करती है कि कारोबार भी डिजाइन जितना ही भरोसेमंद बन पाए।
मुख्य बातें
- राहुल अग्रवाल ने लोरी ग्रीनर और मिंडी कलिंग से 8% इक्विटी और 2% सलाहकार हिस्सेदारी के बदले 3,50,000 डॉलर के टीवी पर हुए समझौते को स्वीकार किया।
- पॉलीगॉन्स के दो औजारों में छह माप मिलते हैं और वे सपाट होकर 2.8 मिलीमीटर मोटे रह जाते हैं।
- अग्रवाल ने 40 लाख डॉलर की कुल बिक्री बताई, जिसमें पिछले साल 12.5 लाख डॉलर की बिक्री शामिल थी।
- कंपनी के खुलासे के मुताबिक, 110 से अधिक देशों में 2,00,000 से ज्यादा इकाइयां बिकीं और उसे 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय डिजाइन पुरस्कार मिले।
- शिपिंग शुरू करने से पहले उत्पाद को विकसित करने में करीब तीन साल लगे, निर्माता सात बार बदले गए और चीन के 16 दौरे किए गए।
- अक्टूबर 2026 तक शुरुआती क्राउडफंडिंग समर्थकों में से दस में नौ से अधिक को उनके सेट मिल चुके थे और आगे की डिलीवरी जारी थी।
- निवेश पूरा होने की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है।






