निवेश और कुशल श्रमिकों से जुड़ा व्यापार लक्ष्य
भारत और रूस 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर और आपसी निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं। रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने 24 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित एक साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने आर्थिक लक्ष्यों को एक व्यावहारिक प्रस्ताव से जोड़ा: रूसी उद्योग की जरूरतों के अनुरूप नौकरियों के लिए भारतीय श्रमिकों को प्रशिक्षित करना।
विषय-सूची
- निवेश और कुशल श्रमिकों से जुड़ा व्यापार लक्ष्य
- प्रतिबद्धताएं कैसे विकसित हुईं
- भारत अधिक संतुलित व्यापार क्यों चाहता है
- 50 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य में क्या शामिल है
- भुगतान और बाजार तक पहुंच के लिए व्यावहारिक समझौते जरूरी
- परिवहन मार्ग व्यापार योजना का हिस्सा
- भारत ने रूसी उद्योग के लिए श्रमिकों को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव दिया
- विस्तार को किन उद्योगों से गति मिल सकती है?
- 2030 तक अधिकारियों को क्या करना होगा
- मुख्य बातें
कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संबंधों की समीक्षा के बाद अपने मंत्रालयों और एजेंसियों को सहयोग बढ़ाने का निर्देश दिया। नेताओं ने ब्रिक्स बिजनेस समिट में भी हिस्सा लिया और इनोपरोम-इंडिया का दौरा किया, जिसे राजदूत ने नई दिल्ली में आयोजित पहली रूसी औद्योगिक प्रदर्शनी बताया।
100 अरब डॉलर का लक्ष्य जुलाई 2024 में मॉस्को में की गई प्रतिबद्धताओं पर आधारित है और दिसंबर 2025 में पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इसकी फिर पुष्टि की गई थी। इन आधिकारिक समझौतों से पता चलता है कि दोनों सरकारें क्या बदलना चाहती हैं: भारतीय निर्यात बढ़ाना, भुगतान आसान बनाना, परिवहन मार्गों में सुधार करना और कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना।
व्यवसायों के लिए मुख्य चुनौती राजनीतिक निर्देशों को ऐसी वस्तुओं में बदलना है जिनकी आपूर्ति हो, जिनका भुगतान मिले और जिनसे जुड़ी परियोजनाएं चालू हों। भारतीय श्रमिकों के लिए इस प्रस्ताव से रूसी औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण के जरिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
प्रतिबद्धताएं कैसे विकसित हुईं
मोदी और पुतिन ने 8 और 9 जुलाई, 2024 को मॉस्को में हुए शिखर सम्मेलन के बाद नौ आर्थिक प्राथमिकताएं तय कीं। उनके 2030 आर्थिक वक्तव्य में व्यापार को 100 अरब डॉलर से अधिक करने, रूस को भारतीय आपूर्ति बढ़ाने और निवेश गतिविधियों को फिर गति देने का लक्ष्य रखा गया।
दिसंबर 2025 के शिखर सम्मेलन के वक्तव्य में संशोधित व्यापार लक्ष्य 100 अरब डॉलर बताया गया और 2030 तक भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास कार्यक्रम को अपनाए जाने का स्वागत किया गया। कुमार की अक्टूबर 2026 की टिप्पणियों में इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दिए गए नए निर्देशों का उल्लेख है।
- 8 और 9 जुलाई, 2024: मॉस्को शिखर सम्मेलन में नौ प्राथमिकताएं तय की गईं और 2030 तक व्यापार को 100 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखा गया।
- 4 और 5 दिसंबर, 2025: नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में 100 अरब डॉलर के लक्ष्य की फिर पुष्टि की गई और कुशल श्रमिकों की आवाजाही से जुड़े समझौतों का स्वागत किया गया।
- 12 और 13 सितंबर, 2026: कुमार के अनुसार, नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन ने द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की।
- 24 अक्टूबर, 2026: कुमार के साक्षात्कार में व्यापार, निवेश और कार्यबल से जुड़ी योजनाओं की रूपरेखा दी गई।
भारत अधिक संतुलित व्यापार क्यों चाहता है
भारतीय निर्यात आधिकारिक योजना का अहम हिस्सा है। 2024 और 2025, दोनों के वक्तव्यों में अधिक संतुलित व्यापार संबंधों की बात कही गई है, जिसके तहत भारत रूस को अधिक वस्तुओं की आपूर्ति करेगा और औद्योगिक तथा तकनीकी सहयोग भी मजबूत होगा।
यूक्रेन में रूस के युद्ध और मॉस्को पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा, खासकर भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल का आयात बढ़ाने से। नए आर्थिक कार्यक्रम का लक्ष्य संबंधों को व्यापक बनाना है, ताकि भारतीय उत्पादकों को रूस में बेचने के अधिक अवसर मिलें और ऊर्जा सहित अन्य स्थापित क्षेत्रों में सहयोग भी बना रहे।
दोनों सरकारों के दिसंबर 2025 के वार्षिक शिखर सम्मेलन वक्तव्य में इस साझा लक्ष्य का वर्णन इन शब्दों में किया गया है:
भारत के रूस को निर्यात बढ़ाने, औद्योगिक सहयोग मजबूत करने और नई तकनीकी तथा निवेश साझेदारियां बनाने सहित
इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए कंपनियों को ग्राहकों तक पहुंच और सुचारू व्यापारिक परिस्थितियों की जरूरत होगी। इसी वक्तव्य में सीमा शुल्क, अन्य व्यापार प्रतिबंधों, परिवहन संबंधी समस्याओं, भुगतान व्यवस्थाओं और बीमा को ऐसे क्षेत्र बताया गया है जिनमें कार्रवाई जरूरी है।
50 अरब डॉलर के निवेश लक्ष्य में क्या शामिल है
कुमार ने 2030 तक आपसी निवेश का लक्ष्य 50 अरब डॉलर बताया। निवेश का मतलब किसी व्यवसाय या परियोजना में पैसा लगाना है, जैसे कारखाना, ऊर्जा परियोजना या संयुक्त स्वामित्व वाली कंपनी। व्यापार में सीमाओं के पार खरीद-बिक्री शामिल होती है। ये दोनों लक्ष्य अलग-अलग तरह की आर्थिक गतिविधियों का वर्णन करते हैं।
2024 के आर्थिक वक्तव्य में कंपनियों को सहायक कंपनियों और औद्योगिक क्लस्टरों के जरिए एक-दूसरे के बाजारों में प्रवेश करने में मदद देने का प्रस्ताव था। औद्योगिक क्लस्टर ऐसे क्षेत्र होते हैं जहां संबंधित व्यवसाय एक-दूसरे के पास काम करते हैं। वक्तव्य में नई संयुक्त कंपनियों के लिए अनुकूल कर व्यवस्थाओं और डिजिटल तकनीक, अनुसंधान तथा शिक्षा में निवेश की भी बात कही गई।
दिसंबर 2025 में मोदी और पुतिन ने अधिकारियों को निवेश को बढ़ावा देने और उसकी सुरक्षा के लिए समझौते पर बातचीत तेज करने का निर्देश दिया। ऐसे समझौते में ऐसे नियम तय होंगे जिनसे विदेश में निवेश करते समय निवेशकों का भरोसा बढ़ सके।
व्यावहारिक एजेंडे में मौजूदा ऊर्जा निवेश को प्रभावित करने वाली चिंताओं का समाधान करने के साथ-साथ नई परियोजनाओं को प्रोत्साहित करना भी शामिल है। बड़े निवेश पर विचार कर रही कंपनी को परियोजना के पूरे जीवनकाल में सुचारू संचालन की परिस्थितियां चाहिए, शुरुआती निवेश से लेकर उत्पादन और आय प्राप्त होने तक।
भुगतान और बाजार तक पहुंच के लिए व्यावहारिक समझौते जरूरी
भारत और रूस ने दिसंबर 2025 में अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में द्विपक्षीय भुगतान व्यवस्था को विकसित करना जारी रखने पर सहमति जताई। सरल शब्दों में, भुगतान निपटान वह प्रक्रिया है जिसके जरिए खरीदार का पैसा विक्रेता तक पहुंचता है और लेन-देन पूरा होता है।
दोनों सरकारों ने राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों, वित्तीय संदेश प्रणालियों और केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा के मंचों को आपस में जोड़ने पर विचार-विमर्श जारी रखने पर भी सहमति जताई। भुगतान प्रणालियां पैसा हस्तांतरित करती हैं, जबकि वित्तीय संदेश प्रणालियां वह निर्देश पहुंचाती हैं जिनकी बैंकों को हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जरूरत होती है। प्रणालियों को परस्पर अनुकूल बनाने का अर्थ है उन्हें एक साथ काम करने में सक्षम करना।
बीमा भी आधिकारिक सूची का हिस्सा है। वस्तुओं का परिवहन करने वाले व्यवसायों को नुकसान से सुरक्षा चाहिए, जबकि बीमा कंपनियां खुद भी दूसरी बीमा कंपनियों से कवरेज ले सकती हैं। इस प्रथा को पुनर्बीमा कहते हैं। दिसंबर के वक्तव्य में दोनों क्षेत्रों में परस्पर स्वीकार्य समाधान खोजने की बात कही गई है।
भारत और यूरेशियन आर्थिक संघ वस्तुओं को शामिल करने वाले मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में भी काम कर रहे हैं। ऐसा समझौता भाग लेने वाली अर्थव्यवस्थाओं के बीच शुल्क और अन्य व्यापार प्रतिबंधों को कम कर सकता है। दिसंबर के वक्तव्य में निवेश सुरक्षा पर काम के साथ-साथ जारी बातचीत का उल्लेख है, न कि ऐसे समझौते का जिसे व्यवसाय तुरंत इस्तेमाल कर सकें।
परिवहन मार्ग व्यापार योजना का हिस्सा
तीन परिवहन मार्ग 2024 की आर्थिक प्राथमिकताओं और दिसंबर 2025 के शिखर सम्मेलन वक्तव्य, दोनों में शामिल हैं: अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा, चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा और उत्तरी समुद्री मार्ग।
दोनों सरकारें इन मार्गों को मजबूत करने के लिए बेहतर लॉजिस्टिक्स संपर्क और पर्याप्त बुनियादी ढांचा क्षमता चाहती हैं। व्यापार गलियारा उन बंदरगाहों, रेलवे, सड़कों और माल संभालने वाली सुविधाओं को जोड़ता है जिनसे माल एक बाजार से दूसरे बाजार तक पहुंचता है। इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करती है कि ये अलग-अलग चरण कितनी अच्छी तरह एक साथ काम करते हैं।
जुलाई 2024 के वक्तव्य में वस्तुओं की आवाजाही आसान बनाने के लिए डिजिटल सीमा शुल्क प्रणालियों का भी आह्वान किया गया था। सीमा शुल्क प्रक्रियाओं से तय होता है कि खेपों की घोषणा, जांच और सीमा पर मंजूरी कैसे होगी। इस चरण में देरी से डिलीवरी का समय प्रभावित हो सकता है, भले ही जहाज और रेलगाड़ियां उपलब्ध हों।
रूस के सुदूर पूर्व और आर्कटिक क्षेत्रों के लिए 2024 से 2029 तक का अलग सहयोग ढांचा है। दिसंबर के वक्तव्य में वहां कृषि, ऊर्जा, खनन, श्रम, हीरे, दवा उद्योग और समुद्री परिवहन को सहयोग के क्षेत्रों के रूप में बताया गया है। नेताओं ने ध्रुवीय जलक्षेत्र में चलने वाले जहाजों के लिए विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने के समझौते का भी स्वागत किया।
भारत ने रूसी उद्योग के लिए श्रमिकों को प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव दिया
कुमार ने कहा कि रूस में विदेशी श्रमिकों के कोटे में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 25 से 30 प्रतिशत है। दूसरे शब्दों में, यह कोटे का लगभग एक चौथाई से तीन-दसवां हिस्सा है। उन्होंने कोटे की कुल संख्या या इसके अंतर्गत आने वाले भारतीय श्रमिकों की संख्या नहीं बताई।
राजदूत ने कहा कि भारत रूस की जरूरतों के अनुसार योग्य श्रमिक उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। नई दिल्ली ने प्रस्ताव दिया है कि रूस भारत में शैक्षणिक केंद्र स्थापित करे या मौजूदा संस्थानों के साथ मिलकर रूसी उद्योगों के लिए विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करे।
कुमार ने इस प्रस्ताव को भारत की करीब 1.5 अरब की आबादी और युवा कार्यबल से जोड़ा। उन्होंने कार्यबल की औसत उम्र 29 वर्ष बताई और कहा कि श्रमिक आबादी का लगभग 69 प्रतिशत हैं। उन्होंने कहा कि भारत देश में और विदेशों में रोजगार के लिए कुशल कर्मियों को प्रशिक्षित करता है।
इस प्रस्ताव में प्रशिक्षण को मांग से जोड़ा गया है: रूसी नियोक्ता अपनी जरूरत के कौशल बताएंगे और भारत के संस्थान लोगों को उन भूमिकाओं के लिए तैयार कर सकते हैं। दिसंबर 2025 के शिखर सम्मेलन वक्तव्य में कुशल श्रमिकों की आवाजाही से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर का पहले ही उल्लेख किया गया था, जिससे इस सहयोग को सरकारी ढांचा मिलता है।
संभावित श्रमिकों के लिए अगले व्यावहारिक सवाल होंगे कि इसमें कौन-से संस्थान शामिल होंगे, किन योग्यताओं की जरूरत होगी और कौन-सी नौकरियां उपलब्ध होंगी। कुमार का प्रस्ताव इस प्रक्रिया में भर्ती से पहले प्रशिक्षण को केंद्र में रखता है।
विस्तार को किन उद्योगों से गति मिल सकती है?
ऊर्जा साझेदारी का एक प्रमुख हिस्सा बनी हुई है। दिसंबर 2025 के वक्तव्य में तेल और तेल उत्पादों, रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल तकनीकों, तेल क्षेत्र की सेवाओं, तरलीकृत प्राकृतिक गैस और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस के बुनियादी ढांचे, कोयला तकनीक और परमाणु परियोजनाओं में सहयोग का उल्लेख है।
उर्वरक इस औद्योगिक संबंध को सीधे भारतीय कृषि से जोड़ते हैं। नेताओं ने लंबे समय तक भारत को भरोसेमंद आपूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में उठाए गए कदमों का स्वागत किया और संभावित संयुक्त उपक्रमों पर चर्चा की। 2024 की प्राथमिकताओं में कृषि उत्पादों और खाद्य पदार्थों का व्यापार बढ़ाने के साथ-साथ आपूर्ति को प्रभावित करने वाले पशु और पौध स्वास्थ्य संबंधी प्रतिबंध हटाने पर काम करने की भी बात थी।
विनिर्माण योजनाओं में परिवहन इंजीनियरिंग, वाहन उत्पादन, जहाज निर्माण और अंतरिक्ष शामिल हैं। दोनों सरकारें मानकों, मापन और अनुरूपता आकलन के तरीकों को भी करीब लाना चाहती हैं। अनुरूपता आकलन उन जांचों को कहते हैं जिनसे यह साबित होता है कि कोई उत्पाद जरूरी विनिर्देशों पर खरा उतरता है। अधिक अनुकूलता से निर्माताओं के लिए दूसरे बाजार में आपूर्ति करना आसान हो सकता है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य सेवा भी शामिल है। जुलाई 2024 के वक्तव्य में दवाओं और उन्नत चिकित्सा उपकरणों पर सहयोग, रूस में भारतीय चिकित्सा संस्थानों की शाखाएं खोलने की संभावना का अध्ययन और योग्य चिकित्सा कर्मियों की भर्ती का प्रस्ताव था। प्रौद्योगिकी एजेंडे में संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान और उन्नत तकनीकों पर काम करने वाली कंपनियों के कर्मचारियों के लिए इंटर्नशिप शामिल हैं।
2030 तक अधिकारियों को क्या करना होगा
जुलाई 2024 के वक्तव्य में व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग पर रूसी-भारतीय अंतर-सरकारी आयोग को समन्वय की भूमिका दी गई थी। मोदी और पुतिन ने इसे नौ प्राथमिकताओं का अध्ययन करने और अगली बैठक में प्रगति का आकलन करने का निर्देश दिया।
इसके बाद दिसंबर 2025 के वक्तव्य में आयोग के 25वें और 26वें सत्रों के नतीजों का स्वागत किया गया। इसमें नवंबर 2024 में नई दिल्ली और अगस्त 2025 में मॉस्को में हुए कारोबारी मंचों का भी उल्लेख था। सितंबर 2026 की चर्चाओं के बारे में कुमार के बयान में मंत्रालयों और एजेंसियों को सहयोग बढ़ाने का एक और निर्देश शामिल है।
आधिकारिक एजेंडे में 2030 की समयसीमा से पहले प्रगति मापने के कई ठोस पैमाने हैं: रूस को भारतीय निर्यात में वृद्धि, व्यापार प्रतिबंधों में कमी, सुचारू भुगतान, मजबूत परिवहन संपर्क और नई निवेश परियोजनाएं। श्रमिकों की आवाजाही से जुड़े समझौते और प्रस्तावित प्रशिक्षण साझेदारियां इन वाणिज्यिक लक्ष्यों को मानवीय आयाम देती हैं।
इन बदलावों को एक साथ काम करना होगा। किसी उत्पादक को खरीदार मिल सकता है, लेकिन फिर भी उसे भरोसेमंद मार्ग, उपयुक्त बीमा, उत्पाद की मंजूरी और भुगतान के माध्यम की जरूरत होगी। सरकारों की अपनी कार्यसूची में भी इन आवश्यकताओं की पूरी श्रृंखला दिखाई देती है।
2024 से भारत और रूस लगातार शिखर सम्मेलनों में व्यापार लक्ष्य को दोहराते आए हैं। अब तत्काल काम अपनाए गए आर्थिक कार्यक्रम और नए राजनीतिक निर्देशों को ऐसी व्यवस्थाओं में बदलना है जिनका निर्यातक, निवेशक, प्रशिक्षण संस्थान और श्रमिक उपयोग कर सकें।
मुख्य बातें
- भारत और रूस का लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। दिसंबर 2025 के शिखर सम्मेलन वक्तव्य में इसकी फिर पुष्टि की गई।
- राजदूत विनय कुमार ने 2030 तक आपसी निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य भी बताया।
- दोनों सरकारें भारतीय निर्यात बढ़ाना, औद्योगिक सहयोग मजबूत करना और भुगतान, परिवहन तथा बीमा से जुड़ी बाधाएं कम करना चाहती हैं।
- बातचीत में यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ वस्तुओं के व्यापार समझौते और निवेश सुरक्षा समझौते पर चर्चा शामिल है।
- कुमार ने कहा कि रूस के विदेशी श्रमिकों के कोटे में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 25 से 30 प्रतिशत है।
- भारत ने रूसी उद्योग के लिए विशेषज्ञ तैयार करने हेतु रूसी संस्थानों के साथ प्रशिक्षण साझेदारी का प्रस्ताव दिया है।






