सत्ता से जुड़ा कोट पुलिस के निशाने पर आया
नवंबर 2021 में निवासियों ने बताया कि उत्तर कोरियाई पुलिस ने खरीदारों और बाजार के विक्रेताओं से चमड़े के ट्रेंच कोट जब्त किए। यह कार्रवाई आम लोगों को नेता किम जोंग उन की नकल करने से रोकने की कोशिश बताई गई। दक्षिण प्योंगान प्रांत में प्योंगसोंग शहर के एक निवासी ने कहा कि अधिकारियों ने नेता के पहनावे की नकल को उनके अधिकार को चुनौती देने के रूप में देखा।
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ये कोट महंगे थे। असली चमड़े के एक कोट की कीमत कथित तौर पर करीब 170,000 उत्तर कोरियाई वॉन थी, जबकि कृत्रिम चमड़े के कोट की कीमत लगभग 80,000 वॉन थी। 2018 में बताई गई 4,000 वॉन की औसत मासिक तनख्वाह के मुकाबले, ये कीमतें क्रमशः करीब 42.5 महीने और 20 महीने के मूल वेतन के बराबर थीं। बचत करके या कारोबार से कमाई कर कोट खरीदने वाले लोगों के लिए उसे बाहर पहनने पर गंवाने का जोखिम था।
2019 में टेलीविजन पर एक उपस्थिति के दौरान किम ने ट्रेंच कोट के इस अंदाज को लोकप्रिय बनाने में मदद की। शुरुआत में अमीर खरीदार चीन से आयात किए गए असली चमड़े के कोट खरीदते थे। इसके बाद घरेलू कपड़ा निर्माताओं ने नकली चमड़े से सस्ती नकलें बनाईं और नेतृत्व से जुड़ा यह पहनावा आम बाजारों तक पहुंच गया।
कार्रवाई का विस्तृत विवरण दो निवासियों ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए दिया। उनमें प्योंगसोंग के वह निवासी भी शामिल थे, जिनका 21 नवंबर 2021 को साक्षात्कार हुआ था। उन्होंने बताया कि विक्रेताओं, निर्माताओं और कोट पहनने वाले लोगों को निशाना बनाकर जब्तियां की गईं। उनके बयानों के साथ सार्वजनिक रूप से जारी कोई कानूनी दस्तावेज, देशव्यापी कार्रवाई के आंकड़े या रोक खत्म होने की तारीख नहीं थी। इसलिए इस प्रतिबंध का सटीक दायरा और अवधि स्पष्ट नहीं है।
जनवरी की परेड क्यों अहम थी
जनवरी 2021 में वर्कर्स पार्टी की आठवीं कांग्रेस से जुड़ी सैन्य परेड ने इस अंदाज का प्रचार और बढ़ा दिया। प्योंगसोंग के निवासी के मुताबिक, किम वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चमड़े के कपड़ों में नजर आए। दर्शकों तक यह संदेश पहुंचा कि यह राजनीतिक पदानुक्रम के शीर्ष पर पहने जाने वाले कपड़े हैं।
निवासी ने कहा कि किम की बहन किम यो जोंग और अन्य प्रभावशाली महिलाएं भी चमड़े के कोट पहनती थीं। उनकी तस्वीरों और सार्वजनिक उपस्थिति से महिलाओं में भी इस पहनावे की दिलचस्पी बढ़ी। इससे उस बाजार का दायरा और बढ़ा, जिसमें पहले ही युवा पुरुष आकर्षित हो चुके थे।
सुरक्षा कारणों से नाम गुप्त रखने का अनुरोध करने वाले प्योंगसोंग निवासी ने बताया कि इन सार्वजनिक प्रस्तुतियों से इस कपड़े का आकर्षण कैसे बदल गया:
तो अब चमड़े का कोट शक्तिशाली महिलाओं का प्रतीक भी बन गया है,
कपड़ा कारोबारियों ने इस मांग पर प्रतिक्रिया दी। निवासी के मुताबिक, सितंबर 2021 से निजी विक्रेताओं ने व्यापारिक कंपनियों के अधिकारियों से कृत्रिम चमड़ा आयात करने को कहा, ताकि स्थानीय निर्माता किम और अन्य अधिकारियों के कोट की नकल कर सकें।
कारोबारी सिलसिला सीधा था: टेलीविजन ने इस डिजाइन को लोकप्रिय बनाया, व्यापारियों ने सामग्री जुटाई, कपड़ा निर्माताओं ने उसकी नकल तैयार की और विक्रेताओं ने तैयार कोट बाजार में पहुंचाए। पुलिस की कथित कार्रवाई ने इस सिलसिले को कई जगह बाधित कर दिया।
पुलिस क्या लागू कर रही थी, इस बारे में निवासियों ने क्या कहा
प्योंगसोंग में पुलिस ने कथित तौर पर विक्रेताओं और सार्वजनिक रूप से कोट पहनने वाले लोगों, दोनों से कोट जब्त करना शुरू कर दिया। उत्तर-पश्चिम के उत्तर प्योंगान प्रांत के एक अन्य निवासी ने बताया कि अधिकारी उन कंपनियों के पीछे पड़े थे जो किम के कपड़ों से काफी मिलते-जुलते कोट बना रही थीं।
प्योंगसोंग के निवासी ने कहा कि अधिकारियों ने इस रोक को पार्टी के उस निर्देश के रूप में समझाया, जो तय करता है कि ये कपड़े कौन पहन सकता है। उनके बयान के मुताबिक, मुद्दा चमड़े का होना नहीं, बल्कि डिजाइन का नेता से जुड़ा होना था।
निवासी ने बताया कि जब लोगों ने जब्ती पर सवाल उठाए तो पुलिस ने उन्हें यह जवाब दिया:
शिकायतों पर पुलिस जवाब देती है कि सर्वोच्च गरिमा के कपड़ों जैसी डिजाइन वाले कपड़े पहनना 'सर्वोच्च गरिमा के अधिकार को चुनौती देने की अशुद्ध प्रवृत्ति' है। उन्होंने आम लोगों को चमड़े के कोट न पहनने का निर्देश दिया, क्योंकि यह तय करना पार्टी के निर्देश का हिस्सा है कि इन्हें कौन पहन सकता है,
"सर्वोच्च गरिमा" किम के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला सम्मानसूचक संबोधन है। अधिकारियों के हवाले से कही गई इस भाषा ने रोजमर्रा की खरीदारी को राजनीतिक मुद्दा बना दिया: नेता के कपड़ों जैसा कोट पहनने को उनकी छवि से जुड़े दर्जे पर अनधिकृत दावा माना जा सकता था।
निवासियों ने इस तर्क और संपत्ति के बारे में अपनी समझ के बीच सीधा टकराव बताया। उन्होंने बाजार में बिक रहे कपड़ों के लिए पैसे दिए थे और उम्मीद की थी कि वे उन्हें पहन सकेंगे।
आयात से लेकर स्थानीय नकल तक फैशन कैसे पहुंचा
किम का ट्रेंच कोट फैशनेबल होने से पहले भी उत्तर कोरिया में चमड़े की जैकेटों का चलन था। उत्तर प्योंगान के निवासी ने उनकी लोकप्रियता की शुरुआत 2000 के दशक की शुरुआत से जोड़ी। उस समय दक्षिण कोरियाई फिल्में प्रांतीय शहरों में पहुंच रही थीं और अभिनेता जांग डोंग-गन की चमड़े की जैकेट ने लोगों का ध्यान खींचा था।
निवासी ने कहा कि आयातित तैयार जैकेट और उत्तर कोरिया में बने कपड़े बाजारों में बिकते रहे। बाद में किम की सार्वजनिक उपस्थिति से मांग लंबे ट्रेंच कोट की ओर मुड़ गई।
यह इतिहास बताता है कि फैशन खरीदारों तक दो अलग रास्तों से पहुंचा। दक्षिण कोरियाई मनोरंजन ने चमड़े की जैकेटों को लोकप्रिय बनाया, जबकि उत्तर कोरिया के अपने नेतृत्व की सार्वजनिक प्रस्तुतियों ने चमड़े के ट्रेंच कोट को आकर्षक बनाया। दोनों तरह की मांग पूरी करने के लिए व्यापारियों ने सामान जुटाया।
निवासियों के बयानों में बताए गए मुख्य पड़ाव ये थे:
- 2000 के दशक की शुरुआत: प्रांतीय शहरों में दक्षिण कोरियाई फिल्मों के प्रसार के साथ चमड़े की जैकेटें लोकप्रिय हुईं।
- 2019: चमड़े के ट्रेंच कोट में किम की टेलीविजन उपस्थिति से ऐसे ही कपड़ों की मांग बढ़ी।
- जनवरी 2021: पार्टी की आठवीं कांग्रेस से जुड़ी सैन्य परेड में किम और वरिष्ठ अधिकारी चमड़े के कोट में नजर आए।
- अप्रैल 2021: सरकारी व्यापारिक कंपनियों के जरिये कुछ गुप्त समुद्री व्यापार फिर शुरू होने की खबर आई।
- सितंबर 2021: नेतृत्व के कोट की नकल बनाने के लिए व्यापारियों ने कृत्रिम चमड़ा आयात करने की मांग की।
- नवंबर 2021: निवासियों ने बताया कि पुलिस ने कोट जब्त किए और हूबहू नकल बनाने वाले कारोबारों को निशाना बनाया।
यह सिलसिला समझाता है कि कार्रवाई केवल कपड़े पहनने वाले लोगों तक सीमित क्यों नहीं रही। 2021 के आखिर तक कारोबारियों ने सामग्री जुटाने और मांग के अनुरूप पहचाने जाने वाले अंदाज के कोट बनाने में पैसा लगा दिया था।
एक कोट की कीमत कितनी थी?
असली चमड़े के कोट कथित तौर पर करीब 170,000 वॉन में बिकते थे, जबकि कृत्रिम चमड़े के कोट की कीमत 80,000 वॉन थी। यानी असली चमड़े का कोट दोगुने से थोड़ा अधिक महंगा था। कृत्रिम चमड़ा ऐसा निर्मित पदार्थ है जिसे जानवरों की खाल जैसा बनाया जाता है। इससे उत्पादक कम कीमत पर मिलता-जुलता रूप दे सकते हैं।
बताई गई डॉलर कीमतों के मुताबिक, असली चमड़े के कोट की कीमत करीब 34 डॉलर और नकली चमड़े के कोट की लगभग 16 डॉलर थी। उस समय बताई गई वेतन दरों के मुकाबले सस्ता विकल्प भी बड़ी खरीदारी था।
बुनियादी आय के बारे में दिए गए बयानों में डॉलर के अलग-अलग अनुमान थे: एक के मुताबिक 2018 में औसत मासिक वेतन 4,000 वॉन, यानी करीब 0.66 डॉलर था, जबकि दूसरे में बुनियादी आय करीब 4 डॉलर और बोनस समेत सालाना कमाई 201 डॉलर बताई गई। इन आंकड़ों में वेतन को अलग-अलग तरह से बताया गया है और डॉलर में बदलने के लिए अलग दरों का इस्तेमाल हुआ है। वॉन में बताई गई कीमत और तनख्वाह के आधार पर, कृत्रिम चमड़े के कोट की कीमत औसत बुनियादी वेतन के 20 महीनों के बराबर थी, जबकि असली चमड़े का कोट 42.5 महीने के वेतन जितना था।
अलग से दिए गए 201 डॉलर के सालाना कमाई के अनुमान के आधार पर, 34 डॉलर का कोट साल की आय का करीब 17 प्रतिशत, यानी पूरे साल में औसतन लगभग दो महीने की कमाई के बराबर था। 16 डॉलर का कोट करीब 8 प्रतिशत के बराबर था।
खरीदार के लिए जब्ती का मतलब पहले से भुगतान की गई महंगी चीज गंवाना था। विक्रेता या कपड़ा निर्माता के लिए इसका मतलब माल गंवाना या साफ दिख रही मांग के जवाब में बनाए गए डिजाइन को बेच न पाना था।
सामग्री जुटाने वाली व्यापारिक कंपनियां
उत्तर प्योंगान के निवासी के मुताबिक, उत्तर कोरियाई उद्यमियों ने सरकारी व्यापारिक कंपनियों के जरिये कपड़े का ऑर्डर देकर कोट की सामग्री जुटाई। ये कंपनियां निजी मांग को आयातित सामान से जोड़ती थीं।
जनवरी 2020 में कोविड-19 महामारी की शुरुआत पर उत्तर कोरिया और चीन के बीच सामान्य व्यापार रोक दिया गया था। खबरों के मुताबिक, सरकारी कंपनियों ने अप्रैल 2021 में कुछ गुप्त समुद्री व्यापार फिर शुरू किया, जिससे सीमा प्रतिबंधों के बावजूद कारोबारियों को सामान जुटाने का रास्ता मिला।
बताया गया कि एक चीनी सीमा-शुल्क दस्तावेज में 2021 के दौरान उत्तर कोरिया के विभिन्न कपड़ों के आयात का रिकॉर्ड था, जिसमें कृत्रिम चमड़े के कई दर्जन मीटर भी शामिल थे। यह जानकारी निवासियों के उस बयान से मेल खाती है कि कोट की लोकप्रियता बढ़ने पर कपड़ा निर्माता स्थानीय उत्पादन के लिए सामग्री तलाश रहे थे।
सरकारी व्यापारिक कंपनियों और निजी कपड़ा कारोबारों की आपूर्ति शृंखला में अलग-अलग भूमिकाएं थीं। उद्यमी कंपनियों के जरिये सामग्री मांगते थे, निर्माता उससे कोट बनाते थे और बाजार के विक्रेता तैयार माल खरीदारों तक पहुंचाते थे। इसके बाद पुलिस की जब्ती से तैयार माल भी जोखिम में पड़ गया।
इसलिए कथित कार्रवाई ने केवल फैशनेबल पहनावे को प्रभावित नहीं किया। इसकी चपेट में एक छोटा कारोबारी नेटवर्क आया, जिसके लोगों ने कपड़ा मंगाने, कपड़े बनाने और उन्हें बाजार तक पहुंचाने में पैसा लगाया था।
खरीदारों ने अपनी संपत्ति के नुकसान पर सवाल उठाए
प्योंगसोंग के निवासी के मुताबिक, पुलिस द्वारा कोट ले जाने पर युवा पुरुषों ने विरोध किया। उनकी आपत्ति सीधी थी: उन्होंने कपड़े अपने पैसों से खरीदे थे।
निवासी ने जब्ती पर उनकी प्रतिक्रिया बताई:
युवा पुरुष विरोध करते हुए कहते हैं कि उन्होंने कोट अपने पैसों से खरीदे हैं और उन्हें ले जाने की कोई वजह नहीं है,
उत्तर प्योंगान के निवासी ने भी बताया कि लोग सवाल उठाते थे कि चमड़े का कोट चुनना राजनीतिक रूप से आपत्तिजनक क्यों माना जाना चाहिए। इन शिकायतों ने पुलिस के हवाले से दिए गए वफादारी के तर्क के सामने कार्रवाई की व्यावहारिक कीमत रख दी।
2021 में इससे पहले विदेशी सांस्कृतिक प्रभाव के खिलाफ अभियान के तहत मुलेट हेयरकट और स्किनी जींस पर रोक की खबरें भी आई थीं। चमड़े के कोट जब्त करने का बताया गया कारण अधिक विशिष्ट था: निवासियों के मुताबिक, अधिकारियों को ऐसे कपड़ों पर आपत्ति थी जो नेता की छवि की नकल करते थे।
किम और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कोट पहनकर उन्हें आकर्षक बनाया। व्यापारियों ने उस मांग के लिए सामान जुटाया और ग्राहकों ने तैयार कपड़ों के पैसे दिए। इसके बाद हुई कथित कार्रवाई ने सत्ता के दिखने वाले एक प्रतीक को केवल उन लोगों के लिए आरक्षित कर दिया जिन्हें उसे प्रदर्शित करने की अनुमति थी। इसका खर्च आम खरीदारों और कारोबारियों को उठाना पड़ा।
मुख्य बातें
- निवासियों ने नवंबर 2021 में चमड़े के कोट जब्त किए जाने की जानकारी दी। विस्तृत बयान प्योंगसोंग और उत्तर प्योंगान प्रांत से आए।
- पुलिस ने कथित तौर पर किम जोंग उन के पहनावे की नकल पर पार्टी के निर्देश का हवाला दिया।
- 2019 में और जनवरी 2021 की परेड में किम की सार्वजनिक उपस्थिति से चमड़े के ट्रेंच कोट लोकप्रिय हुए।
- किम यो जोंग और अन्य प्रभावशाली महिलाओं ने महिलाओं में भी इस अंदाज की लोकप्रियता बढ़ाई।
- असली चमड़े के कोट की कीमत कथित तौर पर 170,000 वॉन थी, जबकि कृत्रिम चमड़े के कोट 80,000 वॉन में बिकते थे।
- कार्रवाई में कथित तौर पर कोट पहनने वालों, विक्रेताओं और नेता के कोट की हूबहू नकल बनाने वाले निर्माताओं को निशाना बनाया गया।
- इन बयानों में सार्वजनिक कानूनी दस्तावेज या प्रतिबंध की स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई।






