नेपाल में बाढ़ के सर्वेक्षण में निजी संपत्ति का नुकसान 79.17 अरब रुपये, परिवार पुनर्निर्माण की जगह चुनने पर विचार कर रहे

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Nepal Flood Survey Puts Private Property Damage at Rs79.17 Billion as Families Weigh Where to Rebuild

भूमि का नुकसान और तबाह घर तय कर रहे हैं पुनर्बहाली की दिशा

नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग ने 26 अगस्त, 2026 को रसुवा और भोटेकोशी में आई बाढ़ से निजी संपत्ति को हुए शुरुआती नुकसान का अनुमान 79.17 अरब रुपये लगाया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा भूमि का है। आयोग के घरेलू सर्वेक्षण के अनुसार, रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा के 15 स्थानीय निकाय क्षेत्रों में 32,872 लोग प्रभावित हुए।

विषय-सूची
  1. भूमि का नुकसान और तबाह घर तय कर रहे हैं पुनर्बहाली की दिशा
  2. व्यापक आपदा का अनुमान इससे कहीं बड़ा क्यों है
  3. प्रभावित लोगों की सबसे बड़ी संख्या नुवाकोट में
  4. तबाह हुई जमीन से पुनर्निर्माण और मुश्किल
  5. ज्यादातर क्षतिग्रस्त संरचनाएं दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सकतीं
  6. परिवार स्थायी आवास के लिए अलग-अलग विकल्प चाहते हैं
  7. खेतों और दुकानों ने कमाई के साधन खोए
  8. बिजली, सड़कें और सार्वजनिक सेवाएं बढ़ा रही हैं बोझ
  9. कर्ज, कानूनी कागजात और सुरक्षा अब भी जरूरी मुद्दे
  10. मुख्य बातें

निष्कर्षों के मुताबिक, घरों को 69.57 अरब रुपये और कारोबार तथा प्रतिष्ठानों को 9.60 अरब रुपये का नुकसान हुआ। शुरुआती सारांशों में कुल नुकसान 7.917 अरब रुपये बताया गया था, जिसमें घरों का हिस्सा 6.957 अरब रुपये और प्रतिष्ठानों का 960 मिलियन रुपये था। सर्वेक्षण के विस्तृत नेपाली विवरण में बड़े आंकड़े दोहराए गए हैं, जिनमें भूमि और आवास के नुकसान का ब्योरा भी शामिल है।

पुनर्निर्माण की जगह तय कर रहे परिवारों के लिए सबसे अहम आंकड़े आश्रय से जुड़े हैं। क्षतिग्रस्त 4,151 संरचनाओं में से 2,989 पूरी तरह नष्ट हो गईं और 3,194 को इस्तेमाल के लायक नहीं पाया गया। स्थायी आवास को लेकर पूछे गए 3,067 परिवारों में से 797 अपने बाढ़ से पहले वाले घर लौटना चाहते थे, जबकि 939 ने सरकार की ओर से दी गई जमीन को प्राथमिकता दी।

सर्वेक्षण तबाह संपत्ति की गिनती और समुदाय को फिर से बसाने के बीच की दूरी भी उजागर करता है। परिवारों ने खेत, जमा किया हुआ भोजन, पशु, वाहन और घरेलू सामान खोए। कारोबारियों ने परिसर और उपकरण गंवाए, जबकि उन्हें बैंक की किस्तें चुकानी पड़ रही हैं। 2015 के भूकंप के बाद विस्थापित हुए कुछ लोग इस बाढ़ में फिर बेघर हो गए और अब नुवाकोट में अस्थायी आश्रयों में रह रहे हैं।

जानकारी जुटाने के लिए आयोग ने 156 तकनीकी और प्रशासनिक कर्मचारियों वाली 58 टीमें तैनात कीं। व्यापक आकलन का काम जारी रहने के कारण उसके निष्कर्ष अभी शुरुआती हैं। इस आकलन में बुनियादी ढांचे, आर्थिक गतिविधियों, सार्वजनिक सेवाओं और पर्यावरण को हुए नुकसान का ब्योरा भी शामिल होगा।

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व्यापक आपदा का अनुमान इससे कहीं बड़ा क्यों है

सरकार के पहले के त्वरित क्षति और आवश्यकता आकलन (आरडीएनए) में आपदा का कुल प्रभाव 408.29 अरब रुपये और पुनर्बहाली की जरूरत 723.32 अरब रुपये आंकी गई थी। उस आकलन में चितवन समेत पांच जिले शामिल थे और घरेलू सर्वेक्षण के मुकाबले संपत्तियों तथा आर्थिक नुकसान का दायरा कहीं व्यापक था।

आपातकालीन फैसलों के लिए शुरुआती अनुमान तैयार करने में त्वरित आकलन सरकारी रिकॉर्ड, मानचित्रों और उपग्रह तस्वीरों का इस्तेमाल करता है। आपदा के बाद की विस्तृत आवश्यकता आकलन प्रक्रिया में घर-घर जाकर सर्वेक्षण और इंजीनियरों के निरीक्षण शामिल होते हैं, ताकि यह तय किया जा सके कि क्या दोबारा बनाना है और उस पर कितना खर्च आएगा।

भौतिक नुकसान में दुकान, घर या बिजलीघर जैसी नष्ट या क्षतिग्रस्त संपत्ति का मूल्य शामिल होता है। आर्थिक नुकसान में उन संपत्तियों के काम न करने के दौरान होने वाली आय की हानि आती है। पुनर्बहाली की जरूरतों में सेवाओं और आजीविका को बहाल करने का खर्च शामिल है, जिसमें दोबारा बसाई गई बस्तियों और बुनियादी ढांचे को अधिक सुरक्षित बनाने के उपाय भी आते हैं।

आरडीएनए में पुनर्बहाली का 723.32 अरब रुपये का अनुमान, क्षति और आर्थिक नुकसान के 408.29 अरब रुपये के अनुमान से करीब 1.8 गुना है। घरेलू सर्वेक्षण में निजी संपत्ति का कुल नुकसान सीमित दायरे का है। इसमें सड़क, जलविद्युत और अन्य क्षेत्रों के आकलन शामिल नहीं हैं, जिनका ब्योरा अभी तैयार किया जा रहा है।

आकलन और पुनर्बहाली की प्रक्रिया कई हफ्तों तक चली:

  • 26 अगस्त, 2026: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी गलियारे में आई बाढ़ ने बस्तियों, कारोबारों और बुनियादी ढांचे को तबाह कर दिया।
  • 13 सितंबर: सरकार ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन को शामिल करते हुए त्वरित आकलन जारी किया।
  • 17 अक्टूबर: चार जिलों में हुए नुकसान का ब्योरा देने वाले घरेलू सर्वेक्षण के विस्तृत शुरुआती निष्कर्ष सामने आए।
  • 19 अक्टूबर: नुवाकोट के बड़ा चौतारा में अस्थायी आश्रय में रह रहे लोगों ने आवास और काम को लेकर जारी अनिश्चितता बताई।

प्रभावित लोगों की सबसे बड़ी संख्या नुवाकोट में

घरेलू सर्वेक्षण में सीधे प्रभावित दर्ज किए गए 32,872 लोगों में से 17,954 नुवाकोट में हैं, यानी करीब 55 प्रतिशत। इसके बाद रसुवा में 9,676, धादिंग में 4,584 और गोरखा में 658 लोग प्रभावित हुए।

सर्वेक्षण में 16,714 प्रभावित पुरुष, 16,080 महिलाएं और 78 ऐसे लोग दर्ज हैं जिनका लिंग किसी अन्य श्रेणी में दर्ज किया गया या जिसका उल्लेख नहीं किया गया। चारों जिलों में कुल 6,817 प्रभावित परिवार और 499 कारोबार या प्रतिष्ठान सूचीबद्ध हैं। इनकी संयुक्त संख्या 7,316 है।

नुवाकोट में प्रभावित परिवारों और प्रतिष्ठानों की संख्या 4,164 थी। इसकी तुलना में रसुवा में 1,977, धादिंग में 1,052 और गोरखा में 123 थे। कारोबार के नुकसान की तालिकाओं में अलग से 1,638 प्रतिष्ठान दर्ज हैं। इस आंकड़े और सर्वेक्षण की संयुक्त कुल संख्या में शामिल 499 प्रतिष्ठानों के बीच संबंध स्पष्ट नहीं किया गया है।

नुवाकोट में क्षतिग्रस्त संरचनाओं की संख्या भी सबसे अधिक, 2,256 थी। रसुवा में 1,236, धादिंग में 630 और गोरखा में 29 संरचनाएं क्षतिग्रस्त हुईं। इस संकेंद्रण के चलते नुवाकोट में आवास सहायता, मरम्मत और स्थानीय व्यापार बहाल करने की जरूरत खास तौर पर अधिक होगी।

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तबाह हुई जमीन से पुनर्निर्माण और मुश्किल

भूमि को हुए नुकसान से 3,610 परिवार प्रभावित हुए और 507.97 हेक्टेयर जमीन को क्षति पहुंची। सर्वेक्षण के विस्तृत आंकड़ों में इसका मूल्य करीब 35.44 अरब रुपये आंका गया है। यह निजी संपत्ति के कुल 79.17 अरब रुपये के नुकसान का लगभग 45 प्रतिशत है, जिससे भूमि नुकसान का सबसे बड़ा दर्ज घटक बनती है।

निजी घरों के नीचे की जमीन को अनुमानित 13.26 अरब रुपये का नुकसान हुआ, जबकि भवन निर्माण में किए गए निवेश की क्षति 11.95 अरब रुपये आंकी गई। क्षतिग्रस्त संरचनाएं 54.65 हेक्टेयर जमीन पर थीं।

जिस परिवार का घर ढह गया है, उसे फिर से बनाने के लिए धन और सामग्री की जरूरत हो सकती है। लेकिन जिस परिवार का भूखंड भी कट गया हो, मलबे में दब गया हो या आगे बाढ़ के खतरे में हो, उसे एक और फैसला करना पड़ता है: क्या नया घर बनाने के लिए कोई उपयुक्त जगह है? आयोग के दर्ज किए गए आवास संबंधी विकल्पों से यह फैसला पुनर्बहाली की योजना का केंद्र बन जाता है।

विस्तृत निष्कर्षों में 2,330 परिवारों की नकदी, कीमती वस्तुओं, सांस्कृतिक वस्तुओं और पुरातात्विक सामग्री के नुकसान का मूल्य 5.02 अरब रुपये आंका गया है। 3,187 परिवारों के स्थायी घरेलू सामान को 1.45 अरब रुपये का नुकसान हुआ, जबकि 2,769 परिवारों के अस्थायी घरेलू सामान का नुकसान 663.5 मिलियन रुपये था।

घरेलू वाहनों को हुए नुकसान से 1.24 अरब रुपये और जुड़े। इसमें 1,115 परिवारों के 1,423 वाहन शामिल थे। कुल मिलाकर, नुकसान घर की दीवारों से कहीं आगे तक जाता है: इसमें बचत, परिवहन और रोजमर्रा की जिंदगी फिर शुरू करने के लिए जरूरी सामान भी शामिल हैं।

ज्यादातर क्षतिग्रस्त संरचनाएं दोबारा इस्तेमाल नहीं हो सकतीं

आयोग के विस्तृत निष्कर्षों में 3,067 संपत्ति मालिकों की 4,151 क्षतिग्रस्त संरचनाएं दर्ज हैं। शुरुआती सारांश में मालिकों की संख्या 3,967 बताई गई थी। इन संरचनाओं में 2,792 घर, 651 ट्रस ढांचे, 263 अस्थायी आश्रय, 288 पशुशालाएं और भंडारण या पारंपरिक सहायक इमारतें तथा 142 अन्य संरचनाएं शामिल थीं। 15 संरचनाओं का प्रकार दर्ज नहीं था।

कुल 2,989 संरचनाएं पूरी तरह नष्ट हुईं, यानी 72.01 प्रतिशत। अन्य 508 मिट्टी और कीचड़ में दब गईं, 302 को आंशिक नुकसान पहुंचा, 141 झुक गईं और 192 को मामूली नुकसान हुआ। 19 के लिए नुकसान की श्रेणी दर्ज नहीं थी।

इंजीनियरों ने 3,194 संरचनाओं, यानी 76.95 प्रतिशत, को इस्तेमाल के लायक नहीं पाया। शुरुआती अनुमान में यह संख्या कम, 3,104 थी, हालांकि प्रतिशत वही था। 3,194 का विस्तृत आंकड़ा सभी 4,151 संरचनाओं में बताए गए हिस्से से मेल खाता है।

बड़ी मरम्मत के बाद केवल 332 संरचनाओं का इस्तेमाल दोबारा किया जा सकता था और मामूली मरम्मत के बाद 320 का। 97 संरचनाएं बिना मरम्मत के इस्तेमाल योग्य थीं, जबकि 208 की दोबारा इस्तेमाल की स्थिति दर्ज नहीं थी। इन आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर मालिकों को साधारण मरम्मत के बजाय नई संरचनाएं बनानी होंगी।

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परिवार स्थायी आवास के लिए अलग-अलग विकल्प चाहते हैं

आयोग ने 3,067 प्रभावित परिवारों से पूछा कि वे स्थायी रूप से कहां रहना चाहते हैं। करीब आधे, यानी 49.59 प्रतिशत, अपने पुराने ठिकाने या अपनी किसी दूसरी जमीन पर लौटना चाहते थे। इस कुल संख्या में कई अलग-अलग विकल्प शामिल हैं।

797 परिवार, यानी 25.99 प्रतिशत, अपने पुराने ठिकाने पर लौटना चाहते थे। अन्य 565 परिवार, यानी 18.42 प्रतिशत, अपने जिले में दूसरी जगह मौजूद अपनी जमीन का इस्तेमाल करना चाहते थे। 159 परिवार, यानी 5.18 प्रतिशत, नेपाल में कहीं और अपनी जमीन पर जाने के पक्ष में थे।

एक बड़े समूह ने सरकारी सहायता को प्राथमिकता दी। 939 परिवार, यानी 30.62 प्रतिशत, सरकार की ओर से दी गई ऐसी जमीन पर जाना चाहते थे जिस पर उनका मालिकाना हक नहीं होगा। अन्य 590 परिवार, यानी 19.24 प्रतिशत, सरकार की ओर से व्यवस्थित सामुदायिक आवास चाहते थे। 17 परिवारों ने कोई प्राथमिकता नहीं बताई।

इन विकल्पों से स्पष्ट है कि आवास के लिए एक ही समाधान के बजाय कई कार्यक्रमों की जरूरत होगी। निजी जमीन पर घर बनाने में सहायता, किसी दूसरे भूखंड तक पहुंच और सामुदायिक आवास अलग-अलग जरूरतों को पूरा करेंगे। विस्तृत विवरण में 3,067 परिवारों के लिए आवास निर्माण की लागत करीब 12 अरब रुपये बताई गई है। व्यापक क्षेत्र के लिए आरडीएनए में आवास पुनर्बहाली की लागत करीब 95.83 अरब रुपये आंकी गई है।

खल्टे के निवासी नांगसी और सिंहबीर तामांग बताते हैं कि स्थायी ठिकाना क्यों जरूरी है। 2015 के भूकंप के बाद भूस्खलन के खतरे से बचने के लिए उनका समुदाय पहाड़ी गांवों से दूसरी जगह चला गया था। करीब 250 परिवार नदी किनारे की बस्ती में बस गए, शुरुआत में इसे अस्थायी व्यवस्था माना गया था। अगस्त की बाढ़ ने खल्टे को बहा दिया और उन्हें फिर पलायन करना पड़ा।

19 अक्टूबर तक नुवाकोट के बड़ा चौतारा में 511 लोग आश्रय लिए हुए थे, जिनमें 212 बच्चे थे। नांगसी और सिंहबीर दान में मिले तंबू से निकलकर टिन की छत वाले कमरे में रहने लगे थे, लेकिन वे वहां कितने समय तक रह पाएंगे, इसकी अनिश्चितता रोज की चिंता बनी हुई थी।

खेतों और दुकानों ने कमाई के साधन खोए

2,951 परिवारों की खड़ी फसलों को 232.1 मिलियन रुपये का नुकसान हुआ। 1,876 परिवारों में जमा खाद्य सामग्री का नुकसान 104.1 मिलियन रुपये तक पहुंचा, जबकि पशुपालन, मुर्गीपालन और मछलीपालन को हुए नुकसान से 1,011 परिवार प्रभावित हुए और इसकी कुल लागत 214.2 मिलियन रुपये थी।

परिवारों ने 664 बड़े पशु, 4,601 छोटे पशु, 63,633 पक्षी और 24,508 किलोग्राम मछली गंवाई। कारोबारों ने अलग से 130 बड़े पशु, 2,058 छोटे पशु, 153,052 पक्षी और 28,150 किलोग्राम मछली खोई। इन कारोबारियों के लिए पशुओं और उत्पादन सुविधाओं को दोबारा खड़ा करना आय फिर से शुरू करने का हिस्सा है।

कारोबार संबंधी तालिकाओं में थोक और खुदरा व्यापारियों की 774, आवास और खाद्य सेवा प्रतिष्ठानों की 337, कृषि, वानिकी और मत्स्यपालन कारोबारों की 166 तथा अन्य सेवा प्रदाताओं की 136 इकाइयां दर्ज हैं। इस ब्योरे में शामिल 1,638 प्रतिष्ठानों में से ज्यादातर इन्हीं क्षेत्रों के हैं। कारोबारों के 403 वाहनों को भी 940 मिलियन रुपये का नुकसान हुआ।

देवीघाट में जूते की दुकान के मालिक गोपाल बहादुर शार्की ने बाढ़ में दुकान तबाह होने के बाद मलबे के बीच अस्थायी दुकान फिर खोल ली। उन्होंने काम पर लौटने की वजह बताई:

अब जिंदा रहने के लिए मैं यहां इस हालात में अपनी दुकान चला रहा हूं,

व्यापक आरडीएनए के मुताबिक, करीब 4,800 कारोबारों को नुकसान पहुंचा। इसमें व्यवधान के दौरान हुई आय की हानि समेत वाणिज्यिक नुकसान और आर्थिक हानि कुल करीब 146.19 अरब रुपये आंकी गई, जबकि वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के पुनर्निर्माण की लागत 45.45 अरब रुपये बताई गई।

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बिजली, सड़कें और सार्वजनिक सेवाएं बढ़ा रही हैं बोझ

त्वरित आकलन में आपदा के अनुमानित प्रभाव का करीब 300 अरब रुपये हिस्सा निजी कारोबारों, परिवारों और निजी स्वामित्व वाले बुनियादी ढांचे पर पड़ा। राष्ट्रीय योजना आयोग के संयुक्त सचिव और आरडीएनए के समन्वयक अर्जुन भंडारी ने बताया कि भौतिक नुकसान का बड़ा हिस्सा कहां हुआ:

भौतिक नुकसान का ज्यादातर हिस्सा निजी उद्यमों, निजी आवास, जलविद्युत परियोजनाओं, स्कूलों, वाहनों और संचार बुनियादी ढांचे को हुआ है,

तेरह जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुईं, जिनमें से आठ निजी स्वामित्व वाली थीं। पांच सौर संयंत्रों को भी नुकसान पहुंचा। आकलन में संचालनरत या निर्माणाधीन परियोजनाओं समेत 759 मेगावाट क्षमता प्रभावित बताई गई और जलविद्युत तथा पारेषण को हुए नुकसान का अनुमान करीब 151 अरब रुपये लगाया गया।

आरडीएनए में गल्छी, त्रिशूली और रसुवागढ़ी गलियारे में 69 किलोमीटर सड़क को नुकसान भी दर्ज किया गया। परिवहन संपर्क टूटने से कारोबारों के लिए सामान और ग्राहक जुटाना कठिन होता है, जबकि पहुंच मार्गों की क्षति से ऊर्जा परियोजनाओं की मरम्मत भी मुश्किल हो जाती है।

सार्वजनिक सेवाओं में 18 स्कूलों के 56 प्रभावित भवन और 308 कक्षाओं या कमरों को नुकसान शामिल है। इनमें से 156 कमरे पूरी तरह और 152 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए। सात स्वास्थ्य सुविधाएं प्रभावित हुईं, जिनमें चार स्वास्थ्य चौकियां पूरी तरह नष्ट हो गईं।

बैंकिंग और संचार सेवाएं भी बाधित हुईं। 12 बैंकों और वित्तीय संस्थानों की 17 शाखाओं को नुकसान पहुंचा। नेपाल टेलिकम के तीन और एनसेल के एक टावर को भी क्षति हुई। प्रभावित बस्तियों को फिर से रहने और व्यापार के लायक बनाने के लिए इन सेवाओं को बहाल करना भी जरूरी है।

कर्ज, कानूनी कागजात और सुरक्षा अब भी जरूरी मुद्दे

परिसर गंवा चुके कारोबारियों को बैंक की किस्तों की चिंता बनी हुई है। मंत्रिमंडल ने पुनर्बहाली के पहले चरण के उपायों को मंजूरी दी, जिनमें नए वाणिज्यिक वाहनों और मालवाहक गाड़ियों पर सीमा शुल्क में छूट, कर राहत और रियायती सुविधाएं शामिल हैं। घोषित उपायों में यह पूरी समय-सारिणी नहीं दी गई है कि अलग-अलग कर्जदारों को सहायता कब मिलेगी।

लापता परिजनों वाले परिवारों के सामने आर्थिक पुनर्बहाली की एक और बाधा है। नेपाल में अक्टूबर में शुरू की गई मृत्यु घोषणा की छोटी प्रक्रिया का उद्देश्य आपदा प्रभावित परिवारों को 45 दिन बाद कानूनी मान्यता हासिल करने का रास्ता देना था। मृत्यु का पंजीकरण शोक सहायता, बीमा, पेंशन और संपत्ति हस्तांतरण तक पहुंच तय कर सकता है।

बड़ा चौतारा में प्रभावित लोगों ने आवास और काम गंवाने के साथ-साथ परिजनों के लापता होने की बात भी बताई। इसलिए उनकी जरूरतें एक साथ कई व्यवस्थाओं से जुड़ी हैं: आश्रय का आवंटन, पहचान और संपत्ति के रिकॉर्ड, वित्तीय सहायता और शोक के समय सहयोग।

अभियानकर्ताओं ने भोटेकोशी और त्रिशूली बाढ़ प्रभावित जिलों में मानव तस्करी के खिलाफ खास सतर्कता बरतने की मांग भी की है। आपदाओं में विस्थापित महिलाओं और बच्चों को आवास तथा आजीविका बाधित होने के बीच ज्यादा जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। नुवाकोट के पुलिस उपाधीक्षक इकबाल हवारी ने इस चिंता पर एक साक्षात्कार में हिस्सा लिया।

आयोग अभी व्यापक आवश्यकता आकलन तैयार कर रहा है और इसके पूरा होने की तारीख नहीं बताई गई है। उसका अगला काम सत्यापित नुकसान, परिवारों की प्राथमिकताओं और विभिन्न क्षेत्रों की पुनर्बहाली लागत को व्यावहारिक वित्तपोषण फैसलों से जोड़ना है। प्रभावित लोगों के लिए अभी सबसे जरूरी है रहने की स्थिर जगह और कमाई का भरोसेमंद साधन।

मुख्य बातें

  • विस्तृत शुरुआती सर्वेक्षण में निजी संपत्ति का नुकसान 79.17 अरब रुपये बताया गया है, हालांकि शुरुआती सारांशों में इससे कम कुल राशि भी दी गई थी।
  • घरेलू सर्वेक्षण में चार जिलों के 32,872 प्रभावित लोग दर्ज हैं; इनमें करीब 55 प्रतिशत नुवाकोट के हैं।
  • 507.97 हेक्टेयर भूमि को हुए नुकसान का मूल्य 35.44 अरब रुपये आंका गया है।
  • क्षतिग्रस्त 4,151 संरचनाओं में से 2,989 पूरी तरह नष्ट हुईं और 3,194 को इस्तेमाल के लायक नहीं पाया गया।
  • स्थायी आवास के बारे में पूछे गए 3,067 परिवारों में से 797 अपने पुराने ठिकाने पर लौटना चाहते थे, 939 सरकार की ओर से दी गई जमीन को और 590 सामुदायिक आवास को प्राथमिकता देते थे।
  • व्यापक त्वरित आकलन में पांच जिलों के लिए आपदा का प्रभाव 408.29 अरब रुपये और पुनर्बहाली की जरूरत 723.32 अरब रुपये आंकी गई है।
  • आवास, कारोबार का कर्ज, बाधित सेवाएं और कानूनी कागजात पुनर्बहाली के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।
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