तीन जिलों में 184.86 मिलियन रुपये वितरित
नेपाल ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित 4,108 परिवारों को 45,000 रुपये प्रति परिवार दिए हैं। करीब 1,400 अन्य परिवारों के भुगतान की तैयारी की जा रही है, जिनकी जानकारियों की अभी जांच हो रही है। विश्व खाद्य कार्यक्रम की सहायता से किए गए भुगतान की कुल राशि 184.86 मिलियन रुपये है।
विषय-सूची
- तीन जिलों में 184.86 मिलियन रुपये वितरित
- भुगतान में शामिल सहायता
- परिवारों की जांच क्यों जरूरी है
- अगस्त से अक्टूबर तक जारी पुनर्बहाली
- भुगतान के पीछे तबाही का पैमाना
- तंबुओं में रह रहे लोगों की पहली जरूरत आश्रय
- चार जिलों तक फैली आवास योजना
- शिक्षा, शोक और राहत तक पहुंच
- नकद सहायता से आगे रेड क्रॉस की मदद
- मुख्य बातें
प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद कार्यालय ने बताया कि स्थानीय सरकारों के समन्वय से एकल खिड़की प्रणाली के जरिए यह राशि वितरित की गई। इसका मतलब है कि एजेंसियां परिवारों की पहचान और भुगतान एक ही प्रक्रिया के माध्यम से समन्वित करती हैं। इसका उद्देश्य एक ही सहायता का दो बार भुगतान रोकना और किसी अन्य पात्र परिवार को सहायता से वंचित होने से बचाना है।
यह वितरण 11 स्थानीय सरकारी क्षेत्रों में किया गया है: रसुवा में पांच, नुवाकोट में चार और धादिंग में दो। अधिकारियों ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद वे घोषणा के तीन दिनों के भीतर बाकी परिवारों को भुगतान करना चाहते हैं।
विस्थापित परिवारों को आवास के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है और इसी बीच यह नकद सहायता मिली है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यकारी प्रमुख धर्मराज उप्रेती ने छह महीने के भीतर अस्थायी आवास और तीन साल के भीतर स्थायी घर बनाने का लक्ष्य बताया है। नुवाकोट में दशैं आने तक परिवार तंबुओं में रह रहे थे। कुछ लोगों ने कहा कि भोजन की तुलना में आश्रय उनकी सबसे तात्कालिक जरूरत बन गया है।
भुगतान में शामिल सहायता
उप्रेती ने कहा कि सरकार ने प्रभावित परिवारों को पांच महीने तक हर महीने 15,000 रुपये देने का फैसला किया है। उन्होंने आने वाले तीन महीनों के लिए 45,000 रुपये की सहायता का भी उल्लेख किया। घोषित मासिक दर के अनुसार, 45,000 रुपये तीन महीने की बुनियादी सहायता के बराबर हैं।
पांचों महीने पूरी बुनियादी राशि पाने वाले परिवार को कुल 75,000 रुपये मिलेंगे। घोषित व्यवस्था के तहत चार से अधिक सदस्यों वाले परिवारों को हर अतिरिक्त सदस्य के लिए 2,000 रुपये भी दिए जाएंगे।
करीब 1,400 परिवारों के लंबित भुगतानों के लिए प्रति परिवार 45,000 रुपये की दर से 63 मिलियन रुपये और चाहिए होंगे। पूरी हो चुकी राशि के साथ यह भुगतान दौर करीब 5,508 परिवारों के लिए कुल लगभग 247.86 मिलियन रुपये का होगा।
इसलिए तात्कालिक काम काफी बड़ा है: बाकी परिवारों के रिकॉर्ड की पुष्टि करना और उन्हें राशि पहुंचाना। व्यापक पुनर्बहाली के लिए आवास, स्कूलों और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच और विस्थापित समुदायों के सुरक्षित रूप से रहने की जगह तय करना भी जरूरी है।
परिवारों की जांच क्यों जरूरी है
केंद्रीय और जिला मानसून प्रतिक्रिया कमान चौकियों की 9 अक्टूबर की संयुक्त बैठक में प्रभावित परिवारों की पहचान और सत्यापन तेज करने पर सहमति बनी। बैठक में केंद्रीय प्रतिक्रिया ढांचे और नकद वितरण वाले तीनों जिलों के अधिकारी शामिल हुए।
सरकार ने स्थानीय अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों को आपदा-संवेदनशील सामाजिक सुरक्षा तथा राहत वितरण मानक, 2024 का पालन करने का निर्देश दिया है। नेपाली कैलेंडर में इन्हें 2081 के मानक कहा गया है। इन निर्देशों का उद्देश्य दोहरे भुगतान को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र परिवार को सहायता मिले।
रेड क्रॉस और अन्य विकास भागीदारों ने भी नकद सहायता देने में रुचि जताई है। समन्वय जरूरी है, क्योंकि एक ही जगह पर कई संगठन परिवारों की मदद कर सकते हैं, जबकि विस्थापित निवासी अब अपने गृह जिले से बाहर रह रहे हो सकते हैं।
नुवाकोट से प्रशासनिक चुनौती की एक मिसाल मिलती है। रसुवा से विस्थापित लोग वहां रह रहे हैं, लेकिन नुवाकोट के मुख्य जिला अधिकारी शंभु प्रसाद रेग्मी ने कहा कि उनके आधिकारिक कागजी काम रसुवा प्रशासन संभाल रहा है। उनकी समस्याओं में मदद के लिए स्थानीय स्तर पर रसुवा संपर्क कार्यालय स्थापित किया गया है।
अगस्त से अक्टूबर तक जारी पुनर्बहाली
बाढ़ की प्रतिक्रिया अब बचाव और आपात आश्रय से आगे बढ़कर नकद सहायता और पुनर्वास की योजना तक पहुंच गई है। प्रमुख तारीखों से पता चलता है कि कुछ परिवार पहले ही कितने समय से घर से दूर हैं:
- 26 अगस्त: बाढ़ के कारण लोग विस्थापित हुए। इनमें बेत्रावती के परिवार भी शामिल थे, जो बाद में स्वारडांडा में तंबुओं में रहने लगे।
- 26 सितंबर, जिसे असोज 10 के रूप में दर्ज किया गया: एक सरकारी अपडेट में बचाव, राहत और नुकसान के आकलन के पहले महीने का विवरण दिया गया।
- 9 अक्टूबर, जिसे असोज 23 के रूप में दर्ज किया गया: केंद्रीय और जिला मानसून प्रतिक्रिया कमान चौकियों ने परिवारों की पहचान, सत्यापन और पुनर्बहाली तेज करने पर सहमति जताई।
- 14 अक्टूबर: बेत्रावती के करीब 25 परिवार तंबुओं में रह रहे थे, जबकि अधिकारियों ने बताया कि आवास की प्रक्रियाएं अभी जारी थीं।
सरकार ने अस्थायी आवास के लिए छह महीने और स्थायी आवास के लिए तीन साल का लक्ष्य घोषित किया है। इन बदलावों को पूरा करने की कोई कैलेंडर तारीख नहीं दी गई है।
भुगतान के पीछे तबाही का पैमाना
सरकार के सितंबर के राहत अपडेट में बताया गया कि तबाही सिर्फ घरों तक सीमित नहीं थी। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण तथा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों का हवाला देते हुए, इसमें प्रतिक्रिया के उस चरण तक 1,453 लोगों की मौत, 5,550 लोगों के लापता होने और 13,795 लोगों को बचाए जाने का उल्लेख था।
उसी अपडेट के अनुसार, तलाशी, बचाव, राहत और संबंधित सेवाओं के लिए 20,477 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। त्वरित क्षति और जरूरत आकलन में नुकसान 408.28 अरब रुपये से अधिक आंका गया, जबकि पुनर्निर्माण और पुनर्वास की जरूरत 723.3152 अरब रुपये बताई गई।
त्वरित क्षति और जरूरत आकलन में यह अनुमान लगाया जाता है कि आपदा ने क्या-क्या नष्ट किया और पुनर्बहाली के लिए कितने संसाधनों की जरूरत होगी। सरकार के इन दो आंकड़ों के अनुसार, पुनर्बहाली की अनुमानित जरूरत दर्ज नुकसान से करीब 1.77 गुना थी।
अपडेट में 7,570 निजी घरों, 48 सार्वजनिक इमारतों, 18 स्कूलों, सात स्वास्थ्य केंद्रों और 30 सांस्कृतिक धरोहर स्थलों को नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई। इसमें 69 किलोमीटर सड़कों, वाहनों के लिए बने 37 पुलों, जिनमें से 33 बह गए, और 68 झूला पुलों को नुकसान पहुंचने का भी उल्लेख था।
कुल 759 मेगावाट क्षमता वाली 13 जलविद्युत परियोजनाएं और 24 मेगावाट क्षमता वाले पांच सौर संयंत्र प्रभावित हुए। फसलों, पशुधन और मछली पालन के 1,806 हेक्टेयर क्षेत्र, 17 बैंक शाखाओं और 4,800 कारोबारों को भी नुकसान पहुंचा। इसलिए जीवन फिर से संवारने की कोशिश कर रहे परिवारों को आवास के नुकसान के साथ-साथ सेवाओं और आजीविका के प्रभावित होने की समस्या भी झेलनी पड़ रही है।
तंबुओं में रह रहे लोगों की पहली जरूरत आश्रय
14 अक्टूबर को नुवाकोट के स्वारडांडा में बेत्रावती के करीब 25 परिवार अब भी तंबुओं में रह रहे थे। निवासी भोजन, बर्तन और खाना पकाने की व्यवस्था साझा कर रहे थे। कुछ परिवारों के सदस्य स्वारडांडा, बतार और काठमांडू के बीच आ-जा रहे थे।
बिदुर नगरपालिका के वार्ड 10 में बेत्रावती निवासी नारायणमान डंगोल ने 26 अगस्त को घर छोड़ने के बाद के हालात का वर्णन किया:
दशैं आ गया है, लेकिन हम अब भी तंबुओं में हैं। दिन में अंदर बहुत गर्मी होती है और रात में ओस गिरती है।
एक अन्य स्थानीय निवासी शशि डंगोल ने कहा कि भोजन का भंडार करीब छह महीने चल सकता है। उनकी प्राथमिकता ऐसी जगह पाने की थी जहां परिवार अपने घर और जमीन से जुड़े रह सकें।
शशि डंगोल ने बताया कि नकद भुगतान से सभी की आवास समस्या क्यों हल नहीं हुई:
हम अपना गांव नहीं छोड़ सकते और रिश्तेदारों के यहां जाकर रहने की भी कोई जगह नहीं है। जो लोग 15,000 रुपये देकर कमरा किराए पर नहीं ले सकते, वे अब भी तंबुओं में रह रहे हैं।
रेग्मी ने पुष्टि की कि बेत्रावती के करीब 25 परिवार अब भी तंबुओं में रह रहे थे। उन्होंने कहा कि रसुवा से विस्थापित 380 से अधिक लोग भी बिदुर नगरपालिका के वार्ड 5 में तंबुओं में रह रहे थे, जहां अधिकारियों ने राहत सामग्री और आश्रय की सामग्री उपलब्ध कराई थी।
जिला प्रशासन के अनुसार, 15,000 रुपये की सहायता पाने वाले अधिकतर लोग राहत केंद्र छोड़कर अपने इंतजाम से रहने लगे थे। कुछ बेत्रावती निवासियों ने पुनर्वास पैकेज का इंतजार करते हुए यह भुगतान लेने से इनकार कर दिया था।
चार जिलों तक फैली आवास योजना
उप्रेती ने कहा कि स्थायी आवास की व्यवस्था से पहले रसुवा, नुवाकोट, गोरखा और धादिंग के 5,116 परिवारों के लिए अस्थायी आवास बनाए जाएंगे। यह आवास कार्यक्रम चार जिलों को कवर करता है, जबकि घोषित 45,000 रुपये का वितरण तीन जिलों में है।
व्यावहारिक फैसलों में यह तय करना शामिल है कि परिवार कहां रहेंगे और रसुवा से विस्थापित लोग वहां लौटेंगे या नुवाकोट में ही रहेंगे। रेग्मी ने कहा कि इन मुद्दों पर चर्चा जारी है। रसुवा के मुख्य जिला अधिकारी कमल प्रसाद पांडे ने कहा कि स्थानीय सरकारों ने संभावित पुनर्वास स्थलों के प्रस्ताव दिए हैं और अस्थायी तथा स्थायी आवास की प्रक्रियाएं जारी हैं।
रसुवा के पांच राहत केंद्रों में अब भी 218 लोग रह रहे थे। ये केंद्र सीड्स, भीमसेनस्थान माध्यमिक विद्यालय, कोमेन माध्यमिक विद्यालय, लिंगलिंग कानिग छोलिंग मठ और गणेश माध्यमिक विद्यालय में थे।
इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग के प्रोफेसर संजय उप्रेती ने कहा कि पुनर्वास में इंजीनियरिंग और आपदा जोखिमों के साथ सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक जरूरतों को भी ध्यान में रखना चाहिए। बेत्रावती के लोगों की चिंताएं इस मुद्दे को स्पष्ट करती हैं: नए घर परिवारों की आजीविका और समुदाय से उनके जुड़ाव के अनुकूल भी होने चाहिए।
शिक्षा, शोक और राहत तक पहुंच
तिमुरे स्थित नेपाल राष्ट्रिय बेसिक स्कूल के प्रधानाध्यापक फुर्बु दोर्जे ने कहा कि स्कूल के 10 विद्यार्थी लापता हैं और उसकी इमारत पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। उन्होंने कक्षाएं कैसे चलेंगी और पढ़ाई की परिस्थितियां कैसी होंगी, इस बारे में अनिश्चितता जताई।
पांडे के अनुसार, नीलकंठ माध्यमिक विद्यालय को विद्यार्थियों, जिनमें बाढ़ से विस्थापित बच्चे भी शामिल हैं, के छात्रावास में बदल दिया गया है। जब उन्होंने इन व्यवस्थाओं का विवरण दिया, तब दशैं के बाद विस्थापित निवासी कहां रहेंगे, इस पर चर्चा जारी थी।
तिमुरे निवासी छेदिन डोलमा ने कहा कि बाढ़ के बाद लोग अब भी भय में जी रहे हैं। एक अन्य निवासी नामग्याल घाले ने पूरी तरह विस्थापित होने और यह न जानने की बात कही कि कहां जाएं। रसुवा के पत्रकार निराजन पौडेल ने बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता सहित परिवार के पांच सदस्यों को खो दिया और आपदा के 50 दिन बाद भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी।
लापता परिजनों वाले परिवारों को कानूनी और वित्तीय बाधाओं का भी सामना करना पड़ता है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता के अनुसार, 10 अक्टूबर को जारी नेपाल के मृत्यु घोषणा संबंधी सुधार का उद्देश्य आपदा के मामलों में प्रतीक्षा अवधि घटाकर 45 दिन करना था। इस बदलाव की खबर में बाद में लापता लोगों की संख्या 5,285 बताई गई, जबकि सितंबर के सरकारी अपडेट में यह संख्या 5,550 दर्ज थी।
मृत्यु प्रमाणपत्र से परिजनों को शोक सहायता लेने, बीमा का दावा करने, पेंशन पाने या संपत्ति हस्तांतरित करने में मदद मिल सकती है। विस्थापित परिवारों के लिए वित्तीय सहायता हासिल करने की प्रक्रिया में नागरिक पंजीकरण और परिवारों का सत्यापन, दोनों शामिल हैं।
नकद सहायता से आगे रेड क्रॉस की मदद
सितंबर के सरकारी अपडेट के अनुसार, नेपाल रेड क्रॉस धादिंग के 198 और नुवाकोट के 262 परिवारों को पहले ही नकद सहायता दे चुका था, यानी कुल 460 परिवारों को। अपडेट में यह भी बताया गया कि इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस एंड रेड क्रिसेंट सोसाइटीज के आपदा प्रतिक्रिया आपात कोष से 1.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मंजूरी दी गई। यह मंजूरी उसके महासचिव और मुख्य कार्यकारी जगन चापागाईं के समन्वय के बाद मिली।
यह कोष बचाव, आश्रय सामग्री, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और स्वच्छता सामग्री सहित तात्कालिक प्रतिक्रिया में मदद करता है। रेड क्रॉस के आंकड़े बताते हैं कि जरूरतें मौजूदा नकद वितरण से कहीं अधिक हैं।
अपडेट के अनुसार, रेड क्रॉस की जल, स्वच्छता और सफाई संबंधी सहायता 2,200 परिवारों तक पहुंची। इसमें 1,710 लोगों को मानसिक स्वास्थ्य या मनोसामाजिक सहायता मिलने और 1,239 लोगों को आपात क्लिनिक सेवाएं मिलने की जानकारी भी थी। मनोसामाजिक सहायता लोगों को आपदा के बाद मानसिक परेशानी, शोक और जीवन में आए व्यवधान से निपटने में मदद करती है।
संगठन ने करीब 2,000 परिवारों को खाद्य सहायता, सुरक्षित स्थानों के जरिए 1,189 बच्चों को सेवाएं और 17 सूचना या सहायता डेस्क उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी। समुदायों से करीब 350 शिकायतें, सवाल, अनुरोध और सुझाव मिले थे।
नेपाल की अगली तात्कालिक प्रतिबद्धता सत्यापन पूरा करना और बाकी करीब 1,400 परिवारों को भुगतान करना है। दीर्घकालीन प्रतिबद्धताओं में परिवारों को आपात आश्रयों से बाहर निकालना, शिक्षा और सेवाएं बहाल करना तथा घोषित समयसीमा के भीतर आवास उपलब्ध कराना शामिल है।
मुख्य बातें
- विश्व खाद्य कार्यक्रम की सहायता से 4,108 परिवारों को प्रति परिवार 45,000 रुपये मिले। कुल राशि 184.86 मिलियन रुपये है।
- करीब 1,400 अन्य परिवार सत्यापन और भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।
- नकद वितरण रसुवा, नुवाकोट और धादिंग के 11 स्थानीय सरकारी क्षेत्रों में किया गया है।
- सरकार की चार जिलों के 5,116 परिवारों के लिए छह महीने में अस्थायी और तीन साल में स्थायी आवास देने की योजना है।
- बेत्रावती के करीब 25 परिवार और रसुवा से विस्थापित 380 से अधिक लोग नुवाकोट में तंबुओं में रह रहे थे।
- स्कूलों की तबाही, लापता परिजनों और आजीविका में व्यवधान का असर परिवारों की पुनर्बहाली की जरूरतों पर बना हुआ है।






