2024 की उम्मीदवारी के पीछे की योग्यता पर शिकायत
शोधकर्ता बोनातुआ सिलालाही ने 23 अक्टूबर, 2026 को इंडोनेशिया के उपराष्ट्रपति गिब्रान राकाबुमिंग राका और आम चुनाव आयोग (KPU) के खिलाफ चुनाव निगरानी एजेंसी, बावास्लू में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने एजेंसी से 2003 से 2007 तक के UTS इनसर्च के अकादमिक कैलेंडरों की जांच करने को कहा। शिकायत में यह सवाल उठाया गया है कि क्या 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए पंजीकरण करते समय गिब्रान ने न्यूनतम शिक्षा की शर्त पूरी की थी।
विषय-सूची
- 2024 की उम्मीदवारी के पीछे की योग्यता पर शिकायत
- अकादमिक कैलेंडर में बोनातुआ को क्या मिला
- चुनाव की किन शर्तों को चुनौती दी जा रही है?
- गिब्रान के समर्थकों ने समकक्षता आकलन का बचाव किया
- प्रमाणपत्र तक पहुंच अदालत का मुद्दा कैसे बनी
- अदालती कार्यवाही और शिकायत के रास्ते अलग हैं
- एक अलग मुकदमे में मंत्रालय के प्रमाणपत्र को चुनौती
- प्रमाणन से ताजा शिकायत तक की घटनाएं
- विदेश में पढ़ाई की मान्यता ही मुख्य कसौटी
- मुख्य बिंदु
विवाद का केंद्र एक खास सवाल है: ऑस्ट्रेलिया के एक संस्थान में पढ़ाई को इंडोनेशिया में माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के समकक्ष कैसे माना गया। इंडोनेशिया के शिक्षा मंत्रालय द्वारा 2019 में जारी प्रमाणपत्र के अनुसार, गिब्रान ने 2006 में UTS इनसर्च में कक्षा 12 पूरी की और उनका ज्ञान इंडोनेशिया के व्यावसायिक माध्यमिक विद्यालय के स्नातक के बराबर था। बोनातुआ का तर्क है कि संस्थान के अकादमिक कैलेंडर में अलग-अलग तरह के पाठ्यक्रमों का वर्णन है।
गिब्रान के समर्थक इस आकलन का बचाव करते हुए कहते हैं कि अधिकारियों ने कई संस्थानों में उनकी पढ़ाई की अवधि, अंकों और पाठ्यक्रम पर विचार किया था। शिकायत में KPU की सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा, मंत्रालय के प्रमाणपत्र को लेकर अदालत में एक अलग चुनौती भी चल रही है।
इस विवाद का असर उस चुनाव तक जाता है जिसमें प्रबोवो सुबियांतो और गिब्रान ने 14 फरवरी, 2024 को 58.6 प्रतिशत वोट, यानी 9.62 करोड़ से अधिक मत हासिल किए थे। दोनों ने उसी वर्ष 20 अक्टूबर को पदभार संभाला। बोनातुआ अब बावास्लू से पंजीकरण के लिए जमा किए गए शिक्षा संबंधी दस्तावेजों और उन्हें स्वीकार करने के आयोग के फैसले, दोनों की जांच करने को कह रहे हैं।
उनकी शिकायत में अकादमिक कैलेंडर, राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों को तय करने वाला KPU का 2023 का निर्णय संख्या 1632, संवैधानिक न्यायालय का एक फैसला और उनकी अपनी जांच का ब्यौरा देने वाली किताब शामिल है। शिकायत वाले दिन शाम 5:20 बजे तक बावास्लू सदस्य पुआदी ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया था।
अकादमिक कैलेंडर में बोनातुआ को क्या मिला
बोनातुआ का कहना है कि गिब्रान के जीवनवृत्त में 2004 से 2007 तक UTS इनसर्च में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के समकक्ष शिक्षा दर्ज है। उन्होंने 2003 से 2007 तक के संस्थान के अकादमिक कैलेंडरों की जांच की और 2005 के कैलेंडर को नमूने के तौर पर इस्तेमाल किया।
उनके अनुसार, उस कैलेंडर में पांच कार्यक्रम सूचीबद्ध हैं: अंग्रेजी पाठ्यक्रम, डिप्लोमा पाठ्यक्रम, फाउंडेशन स्टडीज सर्टिफिकेट, स्टडी टूर और अंग्रेजी भाषा। उनका कहना है कि इनमें से किसी का भी स्पष्ट रूप से कक्षा 12 के रूप में उल्लेख नहीं है, जबकि शिक्षा प्रमाणपत्र में यही शब्दावली इस्तेमाल की गई है।
बोनातुआ चाहते हैं कि बावास्लू जांच करे कि ये कार्यक्रम गिब्रान की उम्मीदवारी के लिए स्वीकार की गई योग्यता से कैसे जुड़े हैं। उनका तर्क शिक्षा के वर्गीकरण के साथ-साथ उसका वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों पर भी सवाल उठाता है।
फाउंडेशन या पाथवे कार्यक्रम आम तौर पर छात्र को आगे की पढ़ाई के लिए तैयार करता है। समकक्षता का आकलन एक अलग सवाल का जवाब देता है: छात्र की पूरी की गई पढ़ाई इंडोनेशिया की शिक्षा प्रणाली के किस स्तर के बराबर है। गिब्रान के मामले में अधिकारियों ने यह दूसरा निष्कर्ष कैसे निकाला, इसी पर विवाद है।
बोनातुआ यह भी कहते हैं कि कैलेंडर उस राय का समर्थन करते हैं जिसका श्रेय वे कैनबरा में इंडोनेशिया के शिक्षा अटाशे को देते हैं। उनके मुताबिक, अटाशे ने कहा था कि पाथवे में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के समकक्ष औपचारिक शिक्षा के बजाय तैयारी या भाषा की पढ़ाई शामिल थी। अटाशे की स्थिति का यह वर्णन बोनातुआ के बयान के जरिए सामने आया है।
चुनाव की किन शर्तों को चुनौती दी जा रही है?
आम चुनावों पर 2017 के कानून संख्या 7 की धारा 169(r) के अनुसार, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को कम से कम वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, इस्लामी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, उसके समकक्ष व्यावसायिक विद्यालय या समान स्तर के किसी अन्य विद्यालय की पढ़ाई पूरी करनी चाहिए।
बोनातुआ का तर्क है कि KPU को पहले यह तय करना चाहिए था कि गिब्रान ने शिक्षा का यह मानक पूरा किया है या नहीं, और उसके बाद धारा 227 के तहत जरूरी प्रशासनिक साक्ष्यों की जांच करनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि आयोग ने बुनियादी शर्त पूरी मान ली और सीधे धारा 227(l) के तहत शिक्षा प्रमाणपत्र मांगने लगा।
KPU के 2023 के विनियम संख्या 19 की धारा 18(3) भी उनकी शिकायत का एक मुद्दा है। संवैधानिक न्यायालय की कार्यवाही के दौरान न्यायाधीश साल्दी इस्रा ने KPU से 2023 में उस नियम में किए गए बदलाव से जुड़े रिकॉर्ड मांगे थे, जो विदेश में पढ़े कुछ उम्मीदवारों से जरूरी स्नातक दस्तावेजों के बारे में था।
व्यावहारिक सवाल सीधा है: उम्मीदवार ने कौन-सी शिक्षा पूरी की और उसे मान्यता देने के लिए अधिकारियों ने किन साक्ष्यों का इस्तेमाल किया? बोनातुआ का आरोप है कि KPU ने जरूरी जांच जानबूझकर छोड़ दी या उसे ठीक से नहीं किया। आयोग के खिलाफ ये उनके आरोप हैं।
बोनातुआ ने सुझाव दिया है कि गिब्रान इंडोनेशिया में वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के समकक्ष योग्यता पाने का रास्ता, पाकेत C, अपनाएं। यह बोनातुआ का सुझाया उपाय है; इस शिकायत के सिलसिले में गिब्रान को यह रास्ता अपनाने का निर्देश देने वाला कोई आदेश घोषित नहीं हुआ है।
गिब्रान के समर्थकों ने समकक्षता आकलन का बचाव किया
मिलितान गिब्रान नुसंतारा समर्थक समूह के अध्यक्ष आंदी अजवान का कहना है कि गिब्रान ने शिक्षा संबंधी शर्त पूरी की थी। आंदी के मुताबिक, प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा महानिदेशालय द्वारा लागू तीन मानदंडों के आधार पर आकलन किया गया था: पढ़ाई की अवधि, अंकपत्र और पाठ्यक्रम।
आंदी का कहना है कि आकलन में सिंगापुर के ऑर्किड पार्क सेकेंडरी स्कूल, UTS इनसर्च और मैनेजमेंट डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ सिंगापुर (MDIS) में गिब्रान की पढ़ाई पर विचार किया गया। KPU के रिकॉर्ड के अनुसार, गिब्रान 2002 से 2004 तक ऑर्किड पार्क में पढ़े थे और उसके बाद UTS इनसर्च गए।
MDIS ने पुष्टि की है कि गिब्रान ने 2007 से 2010 तक वहां पूर्णकालिक पढ़ाई की और उन्नत डिप्लोमा के साथ मार्केटिंग में ऑनर्स सहित विज्ञान स्नातक की डिग्री पूरी की। यह डिग्री ब्रिटेन के ब्रैडफोर्ड विश्वविद्यालय ने प्रदान की थी। मौजूदा पात्रता विवाद MDIS में दाखिले से पहले की उनकी शिक्षा और उसे माध्यमिक विद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के समकक्ष मानने के आधार पर केंद्रित है।
आंदी का कहना है कि बोनातुआ के साक्ष्य गिब्रान के शिक्षा दस्तावेजों को अमान्य नहीं करते। वे यह भी कहते हैं कि संवैधानिक न्यायालय द्वारा पिछली याचिका को सुनवाई योग्य न मानने के बाद मामला कानूनी तौर पर निपट चुका है।
इंडोनेशियाई सॉलिडैरिटी पार्टी के केंद्रीय राजनीतिक प्रभाग के प्रमुख बेस्टारी बारुस का रुख भी इससे मिलता-जुलता है। उनका कहना है कि विदेश में मिली शिक्षा का आकलन करते समय पाठ्यक्रम और पढ़ाई के वर्षों में अंतर को ध्यान में रखना चाहिए। इंडोनेशिया में प्राथमिक विद्यालय के छह साल, जूनियर माध्यमिक विद्यालय के तीन साल और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के तीन साल हर विदेशी शिक्षा प्रणाली से सीधे मेल नहीं खाते।
प्रमाणपत्र तक पहुंच अदालत का मुद्दा कैसे बनी
पूर्व उप कानून मंत्री डेनी इंद्रायना और 11 अन्य याचिकाकर्ताओं ने शिक्षा संबंधी चुनौती संवैधानिक न्यायालय में दायर की। उन्होंने सवाल उठाया कि मंत्रालय के 2019 के प्रमाणपत्र के आधार में कौन-से रिकॉर्ड थे और क्या उन रिकॉर्डों से साबित होता था कि गिब्रान ने चुनाव की शर्त पूरी की थी।
केंद्रीय सूचना आयोग ने 11 मार्च को फैसला दिया कि प्रमाणपत्र और उसके सहायक रिकॉर्ड सार्वजनिक जानकारी हैं और उनका खुलासा किया जाना चाहिए। बोनातुआ को 16 अप्रैल को शिक्षा मंत्रालय से प्रमाणपत्र मिला। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आकलन के पीछे के कुछ दस्तावेज अब भी उनके पास नहीं थे।
2011 से 2014 तक उप कानून एवं मानवाधिकार मंत्री रहे डेनी ने 21 सितंबर, 2026 को हुई सुनवाई में अदालत को बताया कि गिब्रान की शिक्षा से जुड़ी जानकारी रोकी गई थी। उनका तर्क था कि चुनौती के आधार वाली जानकारी आम चुनाव विवाद दायर करने की सामान्य समय-सीमा बीतने के बाद सामने आई।
डेनी ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष इन शब्दों में रखा:
इस मामले में, गिब्रान ने शिक्षा संबंधी शर्त पूरी नहीं की थी, इसकी जानकारी और समझ हमें बाद में ही मिली,
राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को आम तौर पर KPU की घोषणा के तीन दिनों के भीतर अदालत में चुनौती देनी होती है। याचिकाकर्ताओं ने समय-सीमा के काफी बाद याचिका दायर करने के बावजूद सुनवाई की मांग की। उन्होंने अदालत से गिब्रान का शपथ ग्रहण रद्द करने और ऐसी नई प्रक्रिया कराने को कहा जिसमें प्रबोवो दो उम्मीदवार नामित करें और जन परामर्श सभा उनमें से किसी एक को चुने।
न्यायाधीश साल्दी इस्रा ने बावास्लू से पात्रता जांच की प्रक्रिया समझाने को कहा और नियम में बदलाव से जुड़े KPU के रिकॉर्ड मांगे। KPU आयुक्त इधाम होलिक ने कहा कि आयोग पात्रता तय करने के अपने निष्कर्ष के समर्थन में दस्तावेज पेश करेगा। अगली सुनवाई 23 सितंबर के लिए तय की गई थी।
अदालती कार्यवाही और शिकायत के रास्ते अलग हैं
बोनातुआ ने अपनी बावास्लू शिकायत के साथ 6 अक्टूबर, 2026 का संवैधानिक न्यायालय का फैसला शामिल किया। आंदी का बचाव कुछ हद तक इस कथन पर आधारित है कि पिछली याचिका को सुनवाई योग्य नहीं माना गया था। डेनी गिब्रान को पद से हटाने सहित कार्रवाई की मांग जारी रखे हुए हैं।
डेनी ने उनसे मिली जानकारी का हवाला देते हुए यह भी आरोप लगाया है कि गिब्रान UTS इनसर्च में कई विषयों में असफल रहे थे। उन्होंने संसद से कार्रवाई करने की मांग की और राष्ट्रपति प्रबोवो से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। इस आरोप के साथ विषयों के नाम, अंक या अंकपत्र का ब्यौरा नहीं दिया गया।
बोनातुआ की नई शिकायत चुनाव उल्लंघन की रिपोर्ट दर्ज कराने की प्रक्रिया के तहत है। उन्होंने चुनाव कानून की धारा 454(6) का हवाला दिया है, जिसके तहत कथित उल्लंघन की जानकारी मिलने से सात कार्यदिवसों के भीतर शिकायत दर्ज करानी होती है। उनका तर्क है कि नए मिले कैलेंडर साक्ष्य अब शिकायत दर्ज करने का आधार देते हैं।
बावास्लू को शिकायत की समय-सीमा और उसके विषयवस्तु का आकलन करना होगा। बोनातुआ ने उससे KPU से उम्मीदवार के सभी रिकॉर्ड सीधे मंगाने और प्रारंभिक जांच में जरूरी पाए जाने पर गिब्रान को तलब करने का आग्रह किया है।
वे यह भी चाहते हैं कि चुनावी अपराध के किसी भी संकेत को गक्कुमदु को भेजा जाए। यह एकीकृत चुनाव कानून प्रवर्तन निकाय है, जिसमें बावास्लू, पुलिस और अभियोजक शामिल हैं। शिकायत स्वीकार करने, समन जारी करने या मामला आगे भेजने का कोई फैसला घोषित नहीं हुआ था और अगली जांच की तारीख भी नहीं दी गई थी।
एक अलग मुकदमे में मंत्रालय के प्रमाणपत्र को चुनौती
जकार्ता की प्रशासनिक अदालत ने 22 अक्टूबर, 2026 को गिब्रान को एक अन्य मामले में शामिल होने की अनुमति दी। यह बोनातुआ की बावास्लू शिकायत से एक दिन पहले की बात है। मामला संख्या 255/G/2026/PTUN.JKT के तहत दायर किया गया था। इसे मर्सी सिहोम्बिंग ने 2019 में जारी स्कूल पूरा करने के प्रमाणपत्र को लेकर दायर किया था।
प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्रालय इस मामले में मुख्य प्रतिवादी है। गिब्रान दूसरे हस्तक्षेपकारी प्रतिवादी के तौर पर शामिल हुए, जिससे कार्यवाही में अपने हितों का बचाव करने के लिए उन्हें औपचारिक भूमिका मिली।
न्यायाधीशों ने उन्हें आरोपों का जवाब देने और साक्ष्य पेश करने की अनुमति दी। साथ ही, उन्होंने गिब्रान के पक्ष को पहले से चल रही जांच में देरी न करने का निर्देश दिया।
गिब्रान के वकील मुहम्मद रुल्यांदी ने तीसरे पक्ष को अपने कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने की अनुमति देने के आधार के रूप में प्रशासनिक अदालतों पर 1986 के कानून संख्या 5 की धारा 83 का हवाला दिया। इस मामले में प्रमाणपत्र जारी करने की मंत्रालय की प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल है, जबकि बोनातुआ की बावास्लू शिकायत चुनावी पात्रता और सत्यापन से संबंधित है।
प्रमाणन से ताजा शिकायत तक की घटनाएं
यह विवाद चुनाव से कई साल पहले जारी प्रमाणपत्र को लेकर रिकॉर्ड की मांगों, अदालती कार्यवाही और हालिया शिकायत से जुड़ा है। प्रमुख घटनाक्रम इस प्रकार हैं:
- 2019: शिक्षा मंत्रालय ने एक प्रमाणपत्र जारी कर गिब्रान की UTS इनसर्च की पढ़ाई को इंडोनेशिया के व्यावसायिक माध्यमिक विद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के समकक्ष माना।
- 14 फरवरी, 2024: प्रबोवो और गिब्रान ने 9.62 करोड़ से अधिक वोटों के साथ राष्ट्रपति चुनाव जीता।
- 20 अक्टूबर, 2024: दोनों ने राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला।
- 11 मार्च और 16 अप्रैल: केंद्रीय सूचना आयोग ने प्रमाणपत्र और सहायक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का आदेश दिया; इसके बाद बोनातुआ को प्रमाणपत्र मिला।
- 21 सितंबर, 2026: संवैधानिक न्यायालय ने पात्रता आकलन को लेकर KPU और बावास्लू से सवाल किए। अगली सुनवाई 23 सितंबर के लिए तय की गई थी।
- 6 अक्टूबर, 2026: संवैधानिक न्यायालय के उस फैसले की तारीख, जिसे बोनातुआ ने अपनी शिकायत के साथ शामिल किया।
- 22 अक्टूबर, 2026: जकार्ता की प्रशासनिक अदालत ने प्रमाणपत्र के मुकदमे में गिब्रान को हस्तक्षेप करने की अनुमति दी।
- 23 अक्टूबर, 2026: बोनातुआ ने गिब्रान और KPU के खिलाफ बावास्लू में शिकायत दर्ज कराई।
बोनातुआ ने अपनी किताब, गिब्रान का प्रमाणपत्र भी मौजूद नहीं, अनुभवजन्य शोध के नतीजे, भी जमा की। उनका कहना है कि इसमें जांच के तहत सिंगापुर के MDIS और ऑर्किड पार्क सेकेंडरी स्कूल के उनके दौरे दर्ज हैं।
विदेश में पढ़ाई की मान्यता ही मुख्य कसौटी
बेस्टारी का कहना है कि नागरिकों को संदिग्ध उल्लंघनों की शिकायत करने का संरक्षित अधिकार है। उनका तर्क है कि शिक्षा दस्तावेजों को स्वीकार करने के फैसले को चुनौती देने के लिए KPU अधिक उपयुक्त संस्था है और नियमों में राष्ट्रीय शिक्षा प्रणालियों के बीच अंतर का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उनकी चिंता ठोस है: विदेश में पढ़ने वाले इंडोनेशियाई नागरिक ऐसी योग्यताएं लेकर लौट सकते हैं जिनके नाम और संरचना देश की स्कूल योग्यताओं से अलग हों। इस विवाद में राष्ट्रपति पद की पात्रता के मामले के केंद्र में इन योग्यताओं का आकलन आ गया है।
बेस्टारी का यह भी आरोप है कि गिब्रान की शिक्षा को बार-बार चुनौती देना एक राजनीतिक अभियान का हिस्सा है और इससे सरकार की वैधता को नुकसान पहुंच सकता है। इसके विपरीत, बोनातुआ और डेनी संस्थानों पर उम्मीदवारी की दोबारा जांच करने और उसकी मंजूरी के पीछे के रिकॉर्ड सार्वजनिक करने का दबाव बना रहे हैं।
गिब्रान के पाठ्यक्रमों, अंकों और पाठ्यचर्या को मंत्रालय के 2019 के आकलन से जोड़ने वाले रिकॉर्ड अब इन कार्यवाहियों का मुख्य मुद्दा हैं। बावास्लू से KPU के सत्यापन की जांच करने को कहा जा रहा है, जबकि प्रशासनिक अदालत प्रमाणपत्र पर विचार कर रही है और गिब्रान सीधे अपनी ओर से बचाव कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु
- बोनातुआ सिलालाही ने 23 अक्टूबर, 2026 को गिब्रान और KPU के खिलाफ बावास्लू में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने 2003 से 2007 तक के UTS इनसर्च अकादमिक कैलेंडरों का हवाला दिया।
- उन्होंने चुनाव कानून की धारा 169(r) के तहत न्यूनतम शिक्षा की शर्त गिब्रान द्वारा पूरी किए जाने के तरीके को चुनौती दी है।
- मंत्रालय के 2019 के प्रमाणपत्र में शिक्षा को इंडोनेशिया के व्यावसायिक माध्यमिक विद्यालय की पढ़ाई पूरी करने के समकक्ष माना गया था।
- गिब्रान के समर्थकों का कहना है कि आकलन में कई संस्थानों में पढ़ाई की अवधि, अंकपत्र और पाठ्यक्रम पर विचार किया गया था।
- जकार्ता की प्रशासनिक अदालत ने 22 अक्टूबर, 2026 को प्रमाणपत्र के अलग मुकदमे में गिब्रान को शामिल होने की अनुमति दी।
- बावास्लू ने नई शिकायत पर कोई फैसला या जांच की तारीख घोषित नहीं की थी।






