संसद ने 313 अनुच्छेदों को मंजूरी दी, लेकिन लागू होने के लिए इंतजार करना होगा
इंडोनेशिया की प्रतिनिधि सभा ने 6 अक्टूबर, 2026 को रोजगार संरक्षण कानून को मंजूरी दी। इसमें बर्खास्तगी के सख्त नियम, अस्थायी अनुबंधों की चार साल की अधिकतम अवधि और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए संरक्षण शामिल हैं। इस कानून में 23 अध्याय और 313 अनुच्छेद हैं, लेकिन मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि ये प्रावधान तुरंत लागू हो जाएंगे।
विषय-सूची
- संसद ने 313 अनुच्छेदों को मंजूरी दी, लेकिन लागू होने के लिए इंतजार करना होगा
- अदालत की समय-सीमा से तय हुई विधायी प्रक्रिया
- अस्थायी अनुबंध कुल चार साल तक, सिर्फ दो साल नहीं
- आउटसोर्सिंग पर पाबंदियों की अलग-अलग व्याख्याएं
- बर्खास्तगी के आधार सीमित, विच्छेद भुगतान बढ़ेगा
- विच्छेद निधि से देनदारियों के वित्तपोषण का तरीका बदलेगा
- वेतन बदलावों में जीवन-यापन की लागत को जगह
- छुट्टी, दिव्यांगता अधिकार और प्रशिक्षुता पर ध्यान
- प्लेटफॉर्म श्रमिकों के संरक्षण से कर्मचारी का दर्जा तय नहीं होता
- भागीदारी और कानून लागू करने को लेकर यूनियनों में मतभेद
- लागत का आकलन करने से पहले नियोक्ताओं को स्पष्टता चाहिए
- क्या जानना जरूरी है
सरकार के अनुसार, कानून के अधिनियमन और राजपत्र में प्रकाशन के बाद एक साल की संक्रमण अवधि होगी। इसे पूरी तरह 6 अक्टूबर, 2027 तक लागू करने का लक्ष्य है। नए वेतन प्रावधानों से 2028 के न्यूनतम वेतन तय करने में मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है। इसकी सटीक शुरुआती तारीख संसद में मतदान से नहीं, बल्कि राजपत्र में प्रकाशन से तय होगी।
इन बदलावों को लेकर एक बुनियादी अनिश्चितता बनी हुई है: 6 से 8 अक्टूबर के बीच कई यूनियनों और नियोक्ता प्रतिनिधियों की टिप्पणियों के समय अंतिम पाठ सार्वजनिक नहीं किया गया था। इसलिए कुछ विस्तृत दावे प्रसारित हो रहे मसौदों या प्रतिभागियों के ब्योरे पर आधारित हैं, न कि प्रकाशित अंतिम कानून पर।
श्रम मंत्री यासिएरली ने कानून को रोजगार संरक्षण और कंपनियों की परिचालन क्षमता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश बताया। मतदान के बाद संसद में उन्होंने कहा:
यह विधेयक श्रमिकों के बुनियादी अधिकारों की रक्षा और व्यवसायों की स्थिरता के बीच संतुलन दर्शाता है।
व्यावहारिक कसौटी सिर्फ बढ़ा हुआ मुआवजा नहीं होगा। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी बर्खास्तगियां अब भी जायज रहेंगी, क्या अनुबंध और आउटसोर्सिंग पर लगी पाबंदियां नियमों से बचने के रास्ते रोकेंगी, और क्या निरीक्षक तथा अदालतें बढ़े हुए अधिकारों को लागू करा सकेंगी।
अदालत की समय-सीमा से तय हुई विधायी प्रक्रिया
यह मतदान जकार्ता में 2026–2027 संसदीय वर्ष के पहले सत्र की नौवीं पूर्ण बैठक में हुआ। संसद के आठ दलों ने विधेयक को मंजूरी दी। यह संवैधानिक न्यायालय के फैसले संख्या 168/PUU-XXI/2023 से तय समय-सीमा समाप्त होने से करीब तीन हफ्ते पहले हुआ।
31 अक्टूबर, 2024 को सुनाए गए उस फैसले में सांसदों को रोजगार संबंधी प्रावधानों को रोजगार सृजन कानून संख्या 6, 2023 से अलग करने और दो साल के भीतर एक अलग श्रम कानून बनाने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने अनुबंध, आउटसोर्सिंग, वेतन, काम के घंटे, बर्खास्तगी और रोजगार से जुड़े अन्य मामलों के 21 प्रावधानों में भी बदलाव किए थे।
मुख्य तारीखों से पता चलता है कि संसदीय प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ी:
- 31 अक्टूबर, 2024: संवैधानिक न्यायालय ने दो साल के भीतर अलग रोजगार कानून बनाने का आदेश दिया।
- 27 अगस्त, 2026: प्रतिनिधि सभा ने विधेयक को अपनी पहल के रूप में अपनाया।
- 1 सितंबर, 2026: राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने सरकार की वार्ता टीम नियुक्त करने के लिए पत्र जारी किया।
- 14 सितंबर–4 अक्टूबर, 2026: संयुक्त विचार-विमर्श हुआ और आयोग IX में सहमति के साथ समाप्त हुआ।
- 6 अक्टूबर, 2026: प्रतिनिधि सभा ने पूर्ण बैठक में कानून को मंजूरी दी।
- 6 अक्टूबर, 2027: राजपत्र में प्रकाशन की तारीख के अधीन, कानून को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य है।
- 2028: नए वेतन नियमों से न्यूनतम वेतन तय करने की प्रक्रिया प्रभावित होने की उम्मीद है।
मंत्री की प्रस्तुति के एक विवरण में तारीख 5 अक्टूबर बताई गई है, जबकि अन्य जगहों पर मंजूरी की तारीख लगातार 6 अक्टूबर दी गई है। संसद से मंजूरी मिलने और अधिनियमित कानून का अंतिम पाठ बाद में प्रकाशित होने के बीच भी अंतर है।
अस्थायी अनुबंध कुल चार साल तक, सिर्फ दो साल नहीं
उपलब्ध विवरण के अनुसार, निश्चित अवधि का रोजगार समझौता, जिसे PKWT कहा जाता है, पहले दो साल के लिए हो सकता है। इसके बाद अधिकतम दो बार विस्तार किया जा सकता है, हर बार एक साल तक। इस तरह कुल अधिकतम अवधि चार साल होगी। सीमा को सिर्फ दो साल बताने से विस्तार की अवधि छूट जाती है।
यह रोजगार सृजन ढांचे के तहत पांच साल की सीमा से एक साल कम है, यानी 20 प्रतिशत की कमी। फिर भी यह कानून संख्या 13, 2003 में बताई गई तीन साल की कुल अवधि से एक साल अधिक है। उस कानून में शुरुआती दो साल और एक साल तक के एक विस्तार की अनुमति थी।
इंडोनेशिया के श्रमिक संघ परिसंघ के अध्यक्ष आंडी गानी नेना वेआ ने कहा कि चार साल की सीमा यूनियनों की एक साल की मांग से कम है। इंडोनेशियाई ट्रेड यूनियन परिसंघ और लेबर पार्टी के अध्यक्ष सैद इकबाल ने कहा कि चार साल बाद भी जिन श्रमिकों की जरूरत बनी रहे, उन्हें स्थायी कर्मचारी बनाया जाना चाहिए।
विवरण AHP के मसौदा विश्लेषण से लिया गया है, जिसमें 27 अगस्त के मसौदे को 2 अक्टूबर की स्थिति के अनुसार देखा गया था। इसमें कुल चार साल की अवधि, अपेक्षाकृत जल्दी पूरा होने वाले काम के लिए अलग से दो साल की सीमा, अनुबंध खत्म होने से कम-से-कम सात दिन पहले लिखित विस्तार सूचना और शर्तें पूरी न करने वाले अनुबंधों को स्थायी रोजगार में स्वतः बदलने का प्रावधान बताया गया था। ये विवरण मसौदे से जुड़े हैं और अंतिम कानून से इनकी पुष्टि जरूरी है।
आउटसोर्सिंग पर पाबंदियों की अलग-अलग व्याख्याएं
मुख्य विवरण के अनुसार, आउटसोर्सिंग पांच सहायक सेवाओं तक सीमित होगी: सफाई, श्रमिकों के लिए भोजन, सुरक्षा, खनन और पेट्रोलियम में सहायक सेवाएं तथा श्रमिक परिवहन। इसका उद्देश्य कंपनी की उत्पादन प्रक्रिया से सीधे जुड़े कामों के लिए बाहरी श्रमिकों के इस्तेमाल को सीमित करना है।
मसौदे के विश्लेषण में एक महत्वपूर्ण अपवाद का उल्लेख था। एक अलग प्रावधान उत्पादन से सीधे न जुड़े कामों की आउटसोर्सिंग की अनुमति देता था, जिससे लगता है कि पांच श्रेणियां पूरी सूची नहीं थीं। यह तय करने के लिए कि व्यापक अनुमति अंतिम कानून में भी बनी रही या नहीं, प्रकाशित अंतिम पाठ देखना होगा।
श्रेणियों की गिनती पर भी अलग-अलग विवरण हैं। सैद इकबाल ने चार सामान्य श्रेणियों का जिक्र किया और कहा कि खनन, पेट्रोलियम तथा सरकारी कंपनियों के लिए अलग व्यवस्थाएं होंगी। उनके अनुसार, प्रभावित कंपनियों को आउटसोर्स की गई सहायक सेवाओं के प्रबंधन के लिए सहायक कंपनियां या ऐसी ही व्यावसायिक इकाइयां बनानी होंगी। यासिएरली ने भी सरकारी कंपनियों में आउटसोर्सिंग के लिए सहायक इकाइयों की व्यवस्था का उल्लेख किया।
रोजगार के दो संबंधों में फर्क करना जरूरी है। आंडी गानी ने कहा कि आउटसोर्स किए गए श्रमिक आउटसोर्सिंग कंपनी के स्थायी कर्मचारी बनेंगे। मसौदे में अलग से यह प्रावधान था कि उत्पादन से सीधे जुड़े काम करने वाले श्रमिक उन्हें काम पर लगाने वाली कंपनी के कर्मचारी बनेंगे। ये अलग-अलग स्थितियां हैं, जरूरी नहीं कि परस्पर विरोधी दावे हों।
मसौदे के तहत, आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर विवाद होने और बातचीत विफल रहने पर श्रमिक श्रम निरीक्षक से जांच कराने का अनुरोध कर सकते थे और निष्कर्षों की पुष्टि के लिए जिला अदालत जा सकते थे। आउटसोर्सिंग के मौजूदा नियमों में श्रम मंत्री का विनियम संख्या 7, 2026 भी शामिल है, जो 30 अप्रैल, 2026 से प्रभावी है।
बर्खास्तगी के आधार सीमित, विच्छेद भुगतान बढ़ेगा
अगस्त के मसौदे में बर्खास्तगी के 14 आधार सूचीबद्ध थे, लेकिन दक्षता से जुड़े दो आधार शामिल नहीं थे: वास्तविक वित्तीय नुकसान और संभावित वित्तीय नुकसान को रोकना। यह कहना ज्यादा सटीक है कि कंपनियों के लिए आर्थिक कारणों से श्रमिकों को बर्खास्त करना पूरी तरह असंभव नहीं होगा। कंपनी बंद होना, दिवालियापन और मसौदे में बताई गई अन्य परिस्थितियां बनी हुई थीं।
नियोक्ता और श्रमिक के बीच बातचीत से पहले रोकथाम के कदम उठाना कानूनी शर्त बन जाता। इनमें ओवरटाइम या काम के घंटे कम करना, श्रमिकों को अस्थायी रूप से काम से रोकना, अस्थायी अनुबंधों को न बढ़ाकर खत्म होने देना और समय से पहले सेवानिवृत्ति की पेशकश करना शामिल था। मसौदे में यह स्पष्ट नहीं था कि हर कदम को क्रमवार आजमाना अनिवार्य होगा या नहीं।
विच्छेद भुगतान के कई गुणक बढ़ाए जाने थे। लगातार नुकसान के बाद कंपनी बंद होने, अप्रत्याशित परिस्थितियों, दिवालियापन और चेतावनी पत्रों के बाद उल्लंघन समेत कुछ कारणों के लिए भुगतान मूल पात्रता के 0.5 गुना से बढ़ाकर एक गुना किया जाता। विलय और नियोक्ता के कदाचार के कुछ मामलों में यह एक गुने से बढ़कर दो गुना होता।
सेवानिवृत्ति का गुणक 1.75 से बढ़कर दो गुना होना था, यानी करीब 14.3 प्रतिशत की वृद्धि। ये गुणक विच्छेद भुगतान के हिस्से पर लागू होते हैं, रोजगार खत्म होने पर देय हर भुगतान पर अपने आप नहीं। मसौदे के विश्लेषण के अनुसार, इन बदलावों से सेवा अवधि के लिए मिलने वाला अलग भुगतान नहीं बदलता।
कुछ विवरणों में कहा गया है कि न्यूनतम गुणक एक होगा और पहले का 0.5 गुना वाला दर हट जाएगा। मसौदे का विश्लेषण बढ़ोतरी को बर्खास्तगी के खास आधारों से जोड़ता है, इसलिए अंतिम पाठ देखे बिना इसे सभी पर लागू पात्रता नहीं मानना चाहिए। त्रिसक्ति विश्वविद्यालय में श्रम कानून विशेषज्ञ एलॉयसियस उवियोनो ने संवैधानिक न्यायालय की उस शर्त का भी उल्लेख किया कि बातचीत विफल होने के बाद विवादित बर्खास्तगी पर औद्योगिक विवाद निपटान संस्था के बाध्यकारी फैसले तक इंतजार करना होगा।
विच्छेद निधि से देनदारियों के वित्तपोषण का तरीका बदलेगा
प्रस्तावित विच्छेद भुगतान गारंटी, यानी जामिनान पेसांगोन, के तहत नियोक्ताओं को भविष्य के भुगतान के लिए निधि में योगदान करना होगा। मसौदे के अनुसार, अगर निधि से मिलने वाला भुगतान श्रमिक के कानूनी हक से कम हुआ, तो अंतर की जिम्मेदारी नियोक्ता की रहेगी। अधिक रकम होने पर वह नियोक्ता को लौटा दी जाएगी।
यह मुख्य रूप से वित्तपोषण की व्यवस्था है और इससे अलग सवाल है कि बर्खास्त श्रमिक को कितनी रकम मिलनी चाहिए। योगदान की दर और संचालन की व्यवस्था सरकारी विनियम के लिए छोड़ी गई थी। रोजगार हानि बीमा, जिसे JKP कहा जाता है, एक अलग संरक्षण है और इसे नई विच्छेद योजना से नहीं मिलाना चाहिए।
सैद इकबाल ने अनुबंध और आउटसोर्स किए गए श्रमिकों के लिए एक और पात्रता का जिक्र किया: सेवा के हर साल के लिए एक महीने का वेतन, जो चार साल बाद चार महीने तक पहुंचेगा। उन्होंने इसकी तुलना स्थायी कर्मचारी के मूल विच्छेद भुगतान से की, जो नौ या उससे अधिक साल की सेवा के बाद नौ महीने तक होता है। अंतिम पाठ प्रकाशित होने तक ये उनके बताए विवरण हैं। इनमें मौजूदा अनुबंध मुआवजे से संबंध भी स्पष्ट होना बाकी है।
कुछ अन्य आकलन कम अनुकूल हैं। इंडोनेशियाई ट्रेड यूनियन संगठन के महासचिव टिम्बोएल सिरेगर ने कहा कि कानून में पहले मिलने वाला आवास और चिकित्सा मुआवजा हटा दिया गया है, जिसकी गणना 15 प्रतिशत की दर से होती थी। अंतिम प्रावधानों और तुलना के लिए इस्तेमाल किए गए कानूनी आधार से इस दावे की भी पुष्टि जरूरी है।
वेतन बदलावों में जीवन-यापन की लागत को जगह
यह कानून न्यूनतम वेतन, कंपनी के वेतन ढांचे और वेतनमान, ओवरटाइम, खास परिस्थितियों में भुगतान और कटौतियों से जुड़े प्रावधान करता है। श्रम मंत्रालय की औद्योगिक संबंध और सामाजिक सुरक्षा महानिदेशक इंदाह अंग्गोरो पुत्री ने कहा कि सांख्यिकी इंडोनेशिया (BPS) वेतन परिषदों से परामर्श करके एक नया सम्मानजनक जीवन-यापन जरूरत सर्वेक्षण करेगी।
सम्मानजनक जीवन-यापन जरूरत, जिसे KHL कहा जाता है, उन लागतों का आकलन करती है जिनसे पता चलता है कि कमाई से उचित जीवन स्तर बनाए रखना संभव है या नहीं। सर्वेक्षण शामिल करने से अपने आप यह तय नहीं होता कि वेतन कितने प्रतिशत बढ़ेगा। राष्ट्रीय श्रमिक संघ परिसंघ के अध्यक्ष रिस्तादी ने कहा कि सूत्र में अब भी महंगाई, आर्थिक वृद्धि और सूचकांक शामिल हैं, जबकि KHL को एक विचार के रूप में जोड़ा गया है।
गदजाह माडा विश्वविद्यालय में श्रम कानून की व्याख्याता और सेंटर ऑफ इकोनॉमिक एंड लॉ स्टडीज की शोधकर्ता नबियला रिस्फा इज्जती ने 2026 का न्यूनतम वेतन तय करने वाले 36 प्रांतों के एक तुलनात्मक आंकड़े का जिक्र किया। इनमें पांच प्रांतों का वेतन KHL से ऊपर और 31 का नीचे था। यानी करीब 14 प्रतिशत ऊपर और 86 प्रतिशत नीचे। उन्होंने सरकारी विनियम संख्या 49, 2025 में 0.5–0.9 की सूचकांक सीमा का भी उल्लेख किया।
अगस्त के मसौदे में क्षेत्रीय न्यूनतम वेतन से कम-से-कम 5 प्रतिशत अधिक क्षेत्रीय न्यूनतम वेतन और उसकी सालाना समीक्षा का प्रावधान था। इसमें श्रमिक प्रतिनिधियों के साथ कंपनी के वेतन ढांचे पर बातचीत भी जरूरी थी। इन मसौदा प्रावधानों को अंतिम कानून की पुष्टि के बिना निश्चित दायित्व के रूप में पेश नहीं करना चाहिए।
श्रमिकों और नियोक्ताओं की मांगें अलग थीं। इंडोनेशियाई ट्रेड यूनियन परिसंघ ने 7.5–9.5 प्रतिशत वेतन वृद्धि की मांग की, जबकि इंडोनेशियाई नियोक्ता संघ ने हर दो साल में वेतन समायोजन का प्रस्ताव दिया। इनमें से किसी मांग से यह साबित नहीं होता कि कौन-सी वृद्धि मंजूर की गई। सरकार को उम्मीद है कि नया ढांचा 2028 के न्यूनतम वेतन का मार्गदर्शन करेगा।
छुट्टी, दिव्यांगता अधिकार और प्रशिक्षुता पर ध्यान
उपलब्ध विवरण के अनुसार, कानून में हफ्ते में 40 घंटे काम का नियम बरकरार है। इसमें पांच दिन तक रोज आठ घंटे या छह दिन के कार्यक्रम में रोज सात घंटे काम शामिल है। इंडोनेशिया के संयुक्त श्रमिक परिसंघ की राष्ट्रीय श्रमिक परिषद की अध्यक्ष जुमिसिह ने बहस के दौरान प्रस्तावित 45 घंटे के कार्य-सप्ताह पर सवाल उठाए थे। यह चिंता इस बात का प्रमाण नहीं है कि 45 घंटे का मानक मंजूर हुआ।
महिला श्रमिकों को दो दिन तक मासिक धर्म अवकाश और तीन महीने का मातृत्व अवकाश मिलेगा। खास परिस्थितियों में मातृत्व अवकाश तीन महीने और बढ़ाया जा सकेगा। कानून में अवकाश के दौरान वेतन संरक्षण और गर्भपात से जुड़े संरक्षण भी शामिल हैं।
दिव्यांगता संबंधी प्रावधानों में रोजगार तक पहुंच, सुगम्यता, उचित सुविधाएं और समान व्यवहार शामिल हैं। कंपनियों को डिप्लोमा या अन्य निजी दस्तावेज रोकने से प्रतिबंधित किया जाएगा। सामाजिक सुरक्षा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कवरेज, कार्यस्थल दुर्घटना और मृत्यु लाभ, वृद्धावस्था बचत, पेंशन, JKP और विच्छेद गारंटी शामिल हैं।
प्रशिक्षुता के लिए अवधि की सीमा, भत्ता, सुरक्षा संरक्षण, कार्यस्थल दुर्घटना और मृत्यु बीमा तथा प्रमाणपत्र का प्रावधान होगा। आंडी गानी ने छात्रों और हाल में पढ़ाई पूरी करने वालों की पात्रता का जिक्र किया और नए स्नातकों के लिए छह महीने की अवधि बताई। एक अन्य विवरण में छह महीने की अवधि को अधिक व्यापक रूप से लागू बताया गया है। इसकी सटीक सीमा की पुष्टि जरूरी है।
सैद इकबाल ने चेताया कि प्रशिक्षुओं के काम के घंटों पर स्पष्टता न होने से कंपनियां नियमित नौकरियों की जगह सस्ती प्रशिक्षण व्यवस्था ला सकती हैं। यासिएरली ने 7 अक्टूबर को कहा कि प्रशिक्षुता का मकसद सस्ते श्रम के जरिए श्रमिकों की जगह लेना नहीं है। कानून BNSP के जरिए कौशल प्रमाणन को भी मजबूत करता है। BNSP को एक स्वतंत्र निकाय बताया गया है, जो सीधे राष्ट्रपति को रिपोर्ट करता है।
प्लेटफॉर्म श्रमिकों के संरक्षण से कर्मचारी का दर्जा तय नहीं होता
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले श्रमिकों, जिनमें ड्राइवर और फ्रीलांसर शामिल हैं, को उचित कमाई, कार्यस्थल सुरक्षा, साझेदारी एकतरफा खत्म करने या अकाउंट बंद करने के खिलाफ संरक्षण और आपत्ति दर्ज कराने की व्यवस्था मिलेगी। अगस्त के मसौदे में सामाजिक सुरक्षा, यूनियन बनाने के अधिकार और काम आवंटित करने, प्रदर्शन का आकलन करने तथा भुगतान तय करने वाले एल्गोरिदम में पारदर्शिता भी शामिल थी।
एल्गोरिदम में पारदर्शिता इसलिए अहम है क्योंकि कोई ऐप ऐसे फैसले कर सकता है जो श्रमिक की आय या काम तक उसकी पहुंच तय करें। हालांकि इन संरक्षणों को मान्यता देने से हर प्लेटफॉर्म श्रमिक अपने आप कर्मचारी नहीं बन जाएगा।
इंडोनेशिया में अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स की प्रबंध निदेशक डोना प्रियादी ने श्रमिकों के वर्गीकरण को अनसुलझा मुद्दा बताया। उन्होंने साझेदार के रूप में काम करने वाले ग्रैब और गो-जेक ड्राइवरों का उदाहरण दिया। मसौदे में साझेदारी का उल्लेख संकेत देता था कि यह मॉडल जारी रह सकता है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि हर दायित्व कानूनी रूप से किसका होगा।
अनौपचारिक श्रमिकों को भी स्पष्ट मान्यता दी गई है। नबियला ने इस विस्तार का स्वागत किया, लेकिन सवाल उठाया कि क्या उचित और न्यायसंगत मुआवजे का प्रावधान वेतन जैसी लागू की जा सकने वाली कानूनी कसौटी बनाता है। मसौदे में काम के घंटे, पेशागत जोखिम और परिचालन लागत को ध्यान में रखने का प्रस्ताव था। इसमें कमजोर श्रमिकों के लिए कम-से-कम दुर्घटना और मृत्यु लाभ वाली योजना में सरकारी योगदान सहायता भी शामिल थी।
भागीदारी और कानून लागू करने को लेकर यूनियनों में मतभेद
आयोग IX की उपाध्यक्ष पुत्री सारी ने कहा कि कानून बनाते समय परामर्श और सुनवाई हुई। रिस्तादी के अनुसार, पिछली श्रम सुधार प्रक्रियाओं की तुलना में यूनियनों को भागीदारी के ज्यादा अवसर मिले। जुमिसिह ने इससे अलग बात कही। उनके अनुसार, चर्चाएं बंद कमरे में हुईं और नियमों से उनके अनुमान में 13.5 करोड़ श्रमिक प्रभावित होने के बावजूद उनके परिसंघ को मसौदा नहीं मिला।
आंडी गानी ने कहा कि यूनियनों की करीब 90 प्रतिशत मांगें मान ली गईं और उनका गठबंधन संवैधानिक न्यायालय में कानून को चुनौती नहीं देगा। इंडोनेशियाई श्रमिक संघ की अध्यक्ष मिराह सुमिरात ने शुरुआत में मंजूरी का स्वागत किया, लेकिन कहा कि उनका संगठन प्रावधानों की समीक्षा करेगा और लागू करने वाले नियमों पर नजर रखेगा। 8 अक्टूबर को उन्होंने ऐसी आउटसोर्सिंग व्यवस्था के खिलाफ चेताया जिसमें श्रमिक सस्ते और असुरक्षित बने रहते हैं।
कानून में अधिक निरीक्षक, श्रमिकों या कंपनियों की संख्या के अनुपात में कर्मचारी तैनाती, निगरानी समिति, संसदीय समीक्षा, कड़े दंड और राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय रोजगार आंकड़ों के एकीकरण का प्रस्ताव है। रिस्तादी ने बताया कि कानून लागू करने की क्षमता क्यों अहम है:
अब तक सीमित कर्मचारियों, अधिकारों और सुविधाओं के कारण श्रम निरीक्षण की प्रभावशीलता बाधित रही है।
एलॉयसियस ने चेताया कि कंपनियां बर्खास्तगी से जुड़े दायित्वों से बचने के लिए श्रमिकों पर दबाव डालकर उनसे दिखावटी रूप से स्वैच्छिक इस्तीफा दिलवा सकती हैं। उन्होंने श्रम मानकों के उल्लंघन की शिकायतों में अंतर बताया, जो मंत्री के विनियम संख्या 11, 2026 के तहत LAPOR MENAKER के जरिए स्थानीय श्रम अधिकारियों के पास जा सकती हैं, और भुगतान विवादों में, जिनके लिए बातचीत, मध्यस्थता या सुलह और आगे चलकर औद्योगिक संबंध अदालत का सहारा लेना पड़ सकता है।
बहुत कुछ कार्यपालिका के नियमों पर निर्भर है। नबियला और सेंटर ऑफ इकोनॉमिक एंड लॉ स्टडीज के अनुसार, कम-से-कम 47 अनुच्छेदों में सरकारी विनियमों और 15 में मंत्री स्तरीय विनियमों के लिए नियम बनाने का अधिकार छोड़ा गया है। मसौदे के विश्लेषण में मौजूदा अनुबंधों, आउटसोर्सिंग व्यवस्थाओं और पहले से जारी बर्खास्तगी की प्रक्रिया पर अनसुलझे सवाल भी बताए गए।
लागत का आकलन करने से पहले नियोक्ताओं को स्पष्टता चाहिए
इंडोनेशियाई नियोक्ता संघ की अध्यक्ष शिंटा कमदानी ने 8 अक्टूबर को कहा कि पूरा पाठ देखे बिना वे कानून का आकलन नहीं कर सकतीं। रोजगार मामलों के अध्यक्ष बॉब आजम ने भी स्वीकार किया कि उन्हें कानून की पूरी जानकारी नहीं है। इंडोनेशियाई चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के उपाध्यक्ष एरविन अक्सा ने कहा कि इन बदलावों से रोजगार सृजन ढांचे के तहत उपलब्ध लचीलापन घटता है।
नियोक्ता संघ के तुलनात्मक आंकड़ों के अनुसार, पांच साल की सेवा वाले श्रमिक को इंडोनेशिया में आठ महीने के वेतन के बराबर विच्छेद भुगतान मिलता है, जबकि थाईलैंड में छह और मलेशिया में 3.3 महीने के बराबर। अनुमानित मासिक श्रम लागत इंडोनेशिया में 413 अमेरिकी डॉलर, मलेशिया में 414 डॉलर और वियतनाम में 245 डॉलर थी। ये नियोक्ता संघ के अनुमान हैं, नए कानून के प्रभावों की गणना नहीं। इंडोनेशिया का अनुमान वियतनाम से 168 डॉलर, यानी करीब 69 प्रतिशत, अधिक है।
नियोक्ता संघ ने इंडोनेशिया में नियोक्ताओं की अतिरिक्त लागत वेतन का 18.6 प्रतिशत आंकी। यह वियतनाम के 21.5 प्रतिशत से कम, लेकिन मलेशिया के 14.95 प्रतिशत और थाईलैंड के 5 प्रतिशत से अधिक है। नीति प्राथमिकताओं से 2.2 करोड़ औपचारिक नौकरियां पैदा हो सकने का उसका दावा एक अनुमान है, स्थापित नतीजा नहीं।
इंडोनेशियाई वस्त्र संघ के अध्यक्ष जेमी कार्तिवा सस्त्रात्माजा ने कहा कि नए कपड़ा श्रमिकों को छह से नौ महीने के प्रशिक्षण की जरूरत होती है। उन्होंने आपूर्ति पर दबाव का भी उल्लेख किया: कच्चा माल देने वाले तीन प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से सिर्फ एक काम कर रहा था, जबकि बाकी दो में मरम्मत का काम चल रहा था। ऐसी परिस्थितियों में भर्ती या उत्पादन में आए बदलावों का कारण सिर्फ श्रम कानून को मानना मुश्किल है।
फिलहाल, नए नियम लागू होने तक सरकारी विनियम संख्या 35, 2021 संक्रमण अवधि में संदर्भ बना रहेगा। कंपनियों से रोजगार समझौतों, आंतरिक नियमों और सामूहिक समझौतों की समीक्षा करने को कहा जा रहा है। लेकिन अंतिम पाठ उपलब्ध न होने, योगदान दरें तय न होने और संक्रमण व्यवस्था के अनसुलझे रहने से अनुपालन लागत पर पक्के निष्कर्ष निकालना मुश्किल है।
क्या जानना जरूरी है
- संसद ने 6 अक्टूबर, 2026 को 23 अध्यायों और 313 अनुच्छेदों वाले कानून को मंजूरी दी।
- अस्थायी अनुबंधों की कुल अवधि दो विस्तारों समेत चार साल तक सीमित बताई गई है।
- बर्खास्तगी के नियम सख्त होंगे। कुछ खास आधारों पर विच्छेद भुगतान बढ़ेगा और नियोक्ता-वित्तपोषित गारंटी की व्यवस्था होगी।
- आउटसोर्सिंग पर पाबंदियों, प्रशिक्षुता की सीमा और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के दर्जे पर अंतिम पाठ में स्पष्टीकरण जरूरी है।
- कानून को अक्टूबर 2027 तक लागू करने का लक्ष्य है। नए न्यूनतम वेतन नियम 2028 से लागू होने की उम्मीद है।
- यूनियनों और नियोक्ताओं ने बताया कि अंतिम प्रकाशित पाठ उनके पास नहीं है। कई विवरण लागू करने वाले नियमों की प्रतीक्षा में हैं।






