जांच में चीन की अंग प्रत्यारोपण व्यवस्था पर सीसीपी का नियंत्रण सामने आया

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Investigation Maps CCP Control Across China's Organ Transplant System

18 अस्पतालों में प्रत्यारोपण क्षेत्र के 19 नेता

चीन की शोधकर्ता सारा कुक की जांच के अनुसार, 2020 से 2025 के दौरान चीन के 18 अस्पतालों में अंग प्रत्यारोपण के 19 सर्जन या केंद्र निदेशक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के सदस्य थे। इनमें से छह अस्पतालों में पार्टी सचिव या उप सचिव के पद पर भी थे, यानी चिकित्सा जिम्मेदारियों के साथ उनके पास वरिष्ठ राजनीतिक अधिकार भी थे।

विषय-सूची
  1. 18 अस्पतालों में प्रत्यारोपण क्षेत्र के 19 नेता
  2. अस्पतालों में अंतिम फैसला किसका होता है?
  3. राष्ट्रीय निगरानी भी उसी पदानुक्रम के अधीन
  4. अंग निकालने की व्यवस्था कैसे चलती है
  5. आवाज उठाने पर डॉक्टर के साथ क्या होता है?
  6. निष्कर्षों में शिनजियांग और फालुन गोंग का जिक्र क्यों है
  7. 2015 के सुधार के दावे से ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों तक
  8. अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ रहा है
  9. जांच की सिफारिशें
  10. मुख्य बिंदु

ये मामले 12 प्रांतों या नगरपालिकाओं में फैले हैं। ये इंटरनेशनल कोएलिशन टू एंड ट्रांसप्लांट अब्यूज इन चाइना (ETAC) की प्रकाशित रिपोर्ट, Chinese Communist Party Control: The Party's Hold on China's Medical Profession and Transplant Sector, का हिस्सा हैं। रिपोर्ट का मुख्य निष्कर्ष उन संस्थानों पर नियंत्रण को लेकर है, जिनकी जिम्मेदारी यह जांचना है कि दान किए गए अंग कहां से आए हैं: अस्पतालों, अंग खरीद संगठनों और निगरानी तंत्र के बड़े हिस्से का संचालन उसी पार्टी पदानुक्रम के अधीन है।

जांच में 2016 की राष्ट्रीय अंगदान एवं प्रत्यारोपण समिति की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सदस्य सूची की भी पड़ताल की गई। इसमें समिति के 33 सदस्यों में से सीसीपी के 17 पुष्ट सदस्य मिले, यानी आधे से कुछ अधिक। इनमें चीन की रेड क्रॉस सोसायटी के तीन प्रतिनिधि और केंद्रीय सैन्य आयोग के लॉजिस्टिक्स सपोर्ट विभाग के दो प्रतिनिधि शामिल थे।

चीन ने 2015 में घोषणा की थी कि वह अंगों के स्रोत के रूप में कैदियों का इस्तेमाल बंद करेगा और स्वैच्छिक दान पर निर्भर रहेगा। कुक की जांच देखती है कि इस वादे को लागू करने और उसकी जांच करने वाले संस्थानों के पास उल्लंघनों को उजागर करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता है या नहीं।

ETAC की रेड फ्लैग्स खोजी श्रृंखला की पहली कड़ी के रूप में 20 अक्टूबर को प्रकाशित यह अध्ययन चीनी अस्पतालों की वेबसाइटों, सरकारी दस्तावेजों, अकादमिक शोधपत्रों और लियाओनिंग प्रांत के एक पूर्व डॉक्टर के साक्षात्कार पर आधारित है। इस श्रृंखला में 2020 से 2025 के बीच प्रत्यारोपण में संभावित दुरुपयोग के संकेतों की जांच की गई है।

इन 19 लोगों की प्रोफाइल लक्षित शोध के आधार पर चुनी गईं, न कि किसी यादृच्छिक सर्वेक्षण से। इनमें हाल ही में मृत दो लोग भी शामिल हैं। निष्कर्ष दस्तावेजों में दर्ज व्यक्तियों और संस्थानों का विवरण देते हैं; प्रत्यारोपण क्षेत्र के नेताओं में सीसीपी सदस्यों का राष्ट्रीय अनुपात अब भी अज्ञात है।

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अस्पतालों में अंतिम फैसला किसका होता है?

जांच में वर्णित प्रशासनिक ढांचे में पार्टी सचिवों का स्थान अस्पताल निदेशकों और क्लिनिकल नेतृत्व से ऊपर है। उनका अधिकार कार्मिक मामलों, अनुशासन और संस्थान के बड़े फैसलों तक फैला है। अस्पताल निदेशक चिकित्सा सेवाओं का प्रबंधन कर सकता है, जबकि पार्टी नेतृत्व उन फैसलों को नियंत्रित करता है जो सेवाओं के संचालन और उनका नेतृत्व करने वालों को तय करते हैं।

अध्ययन के अनुसार, 2018 में जारी सीसीपी केंद्रीय समिति के निर्देशों ने सरकारी अस्पतालों में इस व्यवस्था को मजबूत किया। कुक का कहना है कि राजनीतिक अधिकार प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया में फैला हुआ है: संभावित दाता की पहचान से लेकर अंग हासिल करने, नैतिक चिंताओं की समीक्षा, अंगों के आवंटन और सर्जरी तक।

सीसीपी में शामिल होने वाले डॉक्टर पार्टी के आजीवन सदस्यता की शपथ भी लेते हैं। इसमें पार्टी के फैसलों को लागू करना, अनुशासन का पालन करना, पार्टी के रहस्यों की रक्षा करना और "पार्टी से कभी विश्वासघात न करने" का वादा शामिल है। जांच का तर्क है कि राजनीतिक दायित्वों को लागू कराने के तंत्र पेशेवर चिकित्सा कर्तव्यों के मुकाबले अधिक सख्त हो सकते हैं।

ETAC के अंतरराष्ट्रीय सलाहकार बोर्ड की अध्यक्ष वेंडी रॉजर्स ने कहा कि पार्टी के प्रति निष्ठा की मांग डॉक्टरों की नैतिक जिम्मेदारियों पर हावी हो सकती है। उनकी चिंता व्यावहारिक है: यदि किसी चिकित्सक को लगता है कि मरीज या दाता के साथ दुर्व्यवहार हुआ है, तो उसे यह बात ऐसे संस्थान के भीतर उठानी होगी जहां राजनीतिक नेता करियर और अनुशासन पर भी नियंत्रण रखते हैं।

राष्ट्रीय निगरानी भी उसी पदानुक्रम के अधीन

राष्ट्रीय अंगदान एवं प्रत्यारोपण समिति की स्थापना 2013 में स्वास्थ्य अधिकारियों और चीन की रेड क्रॉस सोसायटी ने राज्य परिषद की निगरानी में की थी। इसकी जिम्मेदारियों में चाइना ऑर्गन ट्रांसप्लांट रिस्पॉन्स सिस्टम की निगरानी शामिल है, जो अंगों के आवंटन के लिए इस्तेमाल होने वाला केंद्रीय डिजिटल मंच है।

2016 की सदस्य सूची में प्रत्यारोपण सर्जन और स्वास्थ्य के पूर्व उप मंत्री हुआंग जिएफू समिति के अध्यक्ष थे। फरवरी 2026 के एक प्रकाशन में भी उन्हें अध्यक्ष बताया गया। कुक की जांच में उनकी सीसीपी सदस्यता और पार्टी की केंद्रीय समिति के वैकल्पिक सदस्य के रूप में उनकी पूर्व भूमिका का भी उल्लेख है।

दान प्रक्रिया में चीन की रेड क्रॉस सोसायटी को एक तीसरे पक्ष के रूप में पेश किया गया है। जांच इसे पार्टी नेतृत्व के अधीन, राज्य की निगरानी वाले संगठन के रूप में वर्णित करती है। उसकी संस्थागत स्थिति अहम है, क्योंकि दाता की सहमति की जांच करने के लिए कुछ गलत होने पर अस्पतालों और अधिकारियों को चुनौती देने की क्षमता जरूरी है।

पेशेवर संगठन भी इसी तरह काम करते हैं। जांच में चीनी चिकित्सा संघ के अध्यक्ष झाओ युपेई और 2021 में नियुक्त सभी 15 उपाध्यक्षों को सीसीपी सदस्य बताया गया है। इसमें चाइनीज मेडिकल डॉक्टर एसोसिएशन में अंतर्निहित पार्टी नेतृत्व का भी उल्लेख है। इसलिए ये संस्थाएं उस राजनीतिक ढांचे के भीतर काम करती हैं जो उन डॉक्टरों की निगरानी करता है, जिनके आचरण का आकलन करने की जिम्मेदारी इन्हें दी जा सकती है।

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अंग निकालने की व्यवस्था कैसे चलती है

जांच में देखे गए आंकड़ों के अनुसार, 2022 में चीन में 180 से अधिक मान्यता प्राप्त प्रत्यारोपण अस्पतालों के लिए 118 अंग खरीद संगठन काम कर रहे थे। अंग खरीद संगठन, जिसे अक्सर OPO कहा जाता है, दाताओं की पहचान और प्रत्यारोपण के लिए अंग निकालने की प्रक्रिया का समन्वय करता है।

अध्ययन के अनुसार, चीन के OPO स्वतंत्र कानूनी संस्थाओं के रूप में नहीं, बल्कि अस्पतालों के भीतर काम करते हैं। इसलिए उनका प्रबंधन अस्पताल नेतृत्व और उसकी पार्टी समिति के दायरे में आता है। हुआंग 2014 में स्थापित चाइना OPO एलायंस के संस्थापक प्रमुख भी थे।

अमेरिका से तुलना संस्थागत ढांचे में एक ठोस अंतर दिखाती है। जांच में अमेरिका के 54 स्वतंत्र गैर-लाभकारी OPO का उल्लेख है, जिनकी संचालन संरचनाएं प्रत्यारोपण अस्पतालों से अलग हैं और जिन्हें संघीय जांच या प्रमाणन रद्द होने का सामना करना पड़ सकता है। चीन के 118 संगठन अस्पताल व्यवस्था के भीतर काम कर रहे थे।

अंग प्राप्त करने की प्रक्रिया को प्रत्यारोपण सर्जरी से अलग रखने से हितों के बुनियादी टकराव को संभालने में मदद मिल सकती है: किसी मरीज के लिए अंग तलाशने वालों को संभावित दाता से जुड़े हर फैसले पर नियंत्रण नहीं होना चाहिए। कुक का तर्क है कि चीन में साझा आदेश-श्रृंखला के कारण एक ही संस्थानों के भीतर जरूरत से ज्यादा अधिकार केंद्रित हैं।

अस्पतालों की नैतिकता समितियां भी इसी श्रृंखला का हिस्सा हैं। इन समितियों का काम यह जांचना है कि चिकित्सा गतिविधियां सहमति और कमजोर लोगों की सुरक्षा समेत नैतिक आवश्यकताओं पर खरी उतरती हैं या नहीं। जांच उनकी स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है और सदस्यों के बारे में सीमित सार्वजनिक जानकारी तथा सार्थक समीक्षा में आने वाली व्यावहारिक बाधाओं की ओर इशारा करती है।

आवाज उठाने पर डॉक्टर के साथ क्या होता है?

जांच के अनुसार, अनैच्छिक रूप से अंग हासिल किए जाने का संदेह होने पर डॉक्टर को सबसे पहले अस्पताल के पार्टी-नियंत्रित अधिकार ढांचे का सामना करना पड़ेगा। संस्थान से बाहर चिंता उठाने पर पार्टी अनुशासन, लियूझी निगरानी व्यवस्था के तहत हिरासत या राज्य के रहस्य उजागर करने के आरोप लग सकते हैं।

लियूझी चीन की निगरानी जांचों में इस्तेमाल की जाने वाली हिरासत की एक व्यवस्था है। कुक की रिपोर्ट हिरासत और गोपनीयता कानूनों के तहत आरोपों के खतरे को उस दबाव का हिस्सा बताती है, जो चिकित्सा कर्मियों को कदाचार की रिपोर्ट करने से रोक सकता है।

लियाओनिंग प्रांत के एक पूर्व आंतरिक चिकित्सा डॉक्टर, जो अब चीन से बाहर रहते हैं, ने जांच के लिए दिए साक्षात्कार में इस डर का वर्णन किया। नाम न बताए गए डॉक्टर ने कहा:

अगर आप खुद बोलने की हिम्मत करेंगे, तो अगली बार गायब होने वाले आप होंगे।

जांच में 2002 की एक घटना का भी जिक्र है, जिसमें टूटी हुई श्रोणि की हड्डी वाले फालुन गोंग अभ्यासी को अस्पताल लाया गया था। उस विवरण के अनुसार, अधिकारियों ने जरूरी इलाज रोक दिया और कर्मचारियों से मरीज की मौजूदगी छिपाने को कहा। कुक इस घटना का इस्तेमाल यह दिखाने के लिए करती हैं कि राजनीतिक आदेश सीधे चिकित्सा देखभाल में दखल दे सकते हैं।

इसलिए संभावित मुखबिर के सामने रोजगार, निजी सुरक्षा और पेशेवर कर्तव्य अलग-अलग दिशाओं में खींच सकते हैं। रिपोर्ट ऐसी सुरक्षा की मांग करती है जिससे डॉक्टर अपने संस्थान के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की मंजूरी पर निर्भर हुए बिना संदिग्ध दुर्व्यवहार की रिपोर्ट कर सकें।

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निष्कर्षों में शिनजियांग और फालुन गोंग का जिक्र क्यों है

वेन हाओ और यांग यिनिंग उन प्रत्यारोपण अधिकारियों में शामिल हैं जिनकी पहचान शिनजियांग में की गई है, जहां बड़ी संख्या में उइगरों को हिरासत में रखा गया है। जांच उनकी संस्थागत भूमिकाओं को हिरासत में रखे लोगों की चिकित्सा जांच और राज्य के नियंत्रण में बंद लोगों की असुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के साथ रखती है।

अध्ययन में पहचाने गए चार अन्य अधिकारी उन इलाकों के बड़े अस्पतालों में काम करते थे, जो फालुन गोंग अभ्यासियों के व्यापक उत्पीड़न से जुड़े हैं। फालुन गोंग ध्यान, व्यायाम और नैतिक शिक्षाओं पर आधारित एक आध्यात्मिक अभ्यास है। सीसीपी ने 1999 में इस आंदोलन के खिलाफ अभियान शुरू किया था।

झेजियांग प्रांत के प्रमुख प्रत्यारोपण सर्जन झेंग शुसेन झेजियांग प्रांतीय एंटी-कल्ट एसोसिएशन में नेतृत्व का पद भी संभाल चुके हैं। यह संगठन फालुन गोंग के खिलाफ अभियान में शामिल है। उनकी प्रोफाइल एक वरिष्ठ सर्जिकल भूमिका को ऐसे राजनीतिक संगठन में भागीदारी से जोड़ती है, जो उस समूह को निशाना बनाता है जिसे चाइना ट्रिब्यूनल ने दबाव के जरिए अंग लिए जाने का प्रमुख स्रोत बताया था।

जांच की चिंता संस्थागत पहुंच, राजनीतिक अधिकार और हिरासत में रखे कमजोर लोगों के मेल को लेकर है। इसके प्रस्तावित उपायों में दाता की सहमति और अंग हासिल करने के रिकॉर्ड की अधिक बारीकी से जांच, तथा चिकित्सा कर्मियों को सजा के डर के बिना गलत कामों की रिपोर्ट करने की क्षमता देना शामिल है।

2015 के सुधार के दावे से ट्रिब्यूनल के निष्कर्षों तक

स्वैच्छिक दान पर निर्भर रहने के चीन के वादे ने अंतरराष्ट्रीय प्रत्यारोपण चिकित्सा के साथ उसके नए सिरे से बने संबंधों को आकार दिया है। जबरन अंग निकालने के आरोपों की जांच के बाद चाइना ट्रिब्यूनल ने अतीत की प्रथाओं पर इससे बिल्कुल अलग आकलन दिया।

यह ट्रिब्यूनल ETAC द्वारा गठित एक स्वतंत्र जन-न्यायाधिकरण था, न कि सरकारी अदालत। इसने 2019 में अपने निष्कर्षों की घोषणा की और मार्च 2020 में पूरा फैसला प्रकाशित किया। इसका निष्कर्ष था कि अंतरात्मा के कैदियों से जबरन अंग निकालने की घटनाएं बड़े पैमाने पर हुई थीं और फालुन गोंग अभ्यासी इसका प्रमुख स्रोत थे। इसने हिरासत में रखे उइगरों की चिकित्सा जांच के सबूत और अंगों के संभावित स्रोत के रूप में उनके इस्तेमाल की चिंताओं का भी उल्लेख किया।

मुख्य घटनाक्रम एक दशक से अधिक समय में हुए:

  • 2013: चीन की राष्ट्रीय अंगदान एवं प्रत्यारोपण समिति की स्थापना हुई।
  • 2015: चीनी अधिकारियों ने अंगों के स्रोत के रूप में कैदियों का इस्तेमाल बंद करने और स्वैच्छिक दान की ओर बढ़ने की घोषणा की।
  • 2016: राष्ट्रीय समिति की सार्वजनिक सूची में 33 सदस्य थे; बाद में कुक की जांच में इनमें से 17 को सीसीपी सदस्य बताया गया।
  • 2018: सीसीपी के निर्देशों ने सरकारी अस्पतालों में पार्टी नेतृत्व को मजबूत किया।
  • 2019 और मार्च 2020: चाइना ट्रिब्यूनल ने अपने निष्कर्षों की घोषणा की और बाद में पूरा फैसला प्रकाशित किया।
  • 2022: ग्लोबल राइट्स कंप्लायंस ने चीन से जुड़े प्रत्यारोपण सहयोग के जोखिमों पर कानूनी मार्गदर्शन प्रकाशित किया।
  • फरवरी 2026: एक प्रकाशन में हुआंग जिएफू को राष्ट्रीय प्रत्यारोपण समिति का अध्यक्ष बताया गया।

कुक का अध्ययन सुधार की घोषणा और ट्रिब्यूनल की कार्यवाही के बाद काम कर रहे संस्थानों पर केंद्रित है। इसका मुख्य तर्क है कि राजनीतिक नियंत्रण और जानकारी सामने लाने वालों के लिए कमजोर सुरक्षा अब भी अंगों के स्रोत की विश्वसनीय जांच में बाधा हैं।

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अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ रहा है

18 अगस्त को घोषित इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ ऑर्गन मेडिसिन का गठन लगातार जारी अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव का उदाहरण है। इसकी पहली ऑनलाइन बैठक में छह देशों के 20 चीनी डॉक्टर और 20 अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल हुए।

हुआंग जिएफू और ट्रांसप्लांटेशन सोसायटी के अध्यक्ष, अमेरिकी सर्जन जॉन फंग को मानद अध्यक्ष बनाया गया। ऐसे समय में यह पहल चीन की प्रत्यारोपण व्यवस्था की प्रमुख हस्तियों को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ जोड़ती है, जब अंग हासिल करने और स्वतंत्र निगरानी से जुड़े सवाल बहस के केंद्र में हैं।

ETAC के अध्ययन की लेखिका और शोधकर्ता सारा कुक ने निष्कर्षों के साथ जारी बयान में अपनी चिंता इस तरह बताई:

जिन संस्थाओं को चीनी अधिकारी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिखावटी तौर पर स्वतंत्र या 'तीसरे पक्ष' के रूप में पेश करते हैं, वे वास्तव में उसी पार्टी-नियंत्रित व्यवस्था की कड़ियां हैं।

विदेशी अस्पतालों, विश्वविद्यालयों, पत्रिकाओं और चिकित्सा संगठनों के सामने सर्जनों को प्रशिक्षण देने, शोध स्वीकार करने, विशेषज्ञता साझा करने और संस्थागत साझेदारी करने से जुड़े ठोस फैसले हैं। अंतरराष्ट्रीय कानूनी फर्म ग्लोबल राइट्स कंप्लायंस की 2022 की कानूनी सलाहकार रिपोर्ट और नीतिगत मार्गदर्शन में चीन से जुड़े प्रत्यारोपण सहयोग के कानूनी और मानवाधिकार जोखिमों को पहले ही रेखांकित किया गया था।

जांच की सिफारिशें

ETAC सीसीपी के राजनीतिक अधिकार को क्लिनिकल फैसलों से अलग करने, पारदर्शी निगरानी व्यवस्था बनाने और गलत काम उजागर करने वालों की सुरक्षा करने की मांग करता है। ये प्रस्ताव जांच में पहचानी गई केंद्रीय कमजोरी को दूर करने का प्रयास करते हैं: दुर्व्यवहार की रिपोर्ट और जांच करने वाले संस्थान उसी राजनीतिक पदानुक्रम को जवाबदेह हैं।

विदेशी सरकारों के लिए रिपोर्ट ऐसे कानूनों की सिफारिश करती है जो अंगों की तस्करी में शामिल लोगों पर प्रतिबंध और वीजा पाबंदियां लगाने, लक्षित प्रतिबंध लागू करने और मुखबिरों की सहायता करने में सक्षम हों। इसमें चीनी प्रत्यारोपण चिकित्सकों की भूमिकाओं और संस्थागत संबंधों का आकलन करते समय उनकी सीसीपी संबद्धता की जांच का प्रस्ताव भी है।

चिकित्सा संगठनों से कहा गया है कि वे संभावित साझेदारों की वैज्ञानिक योग्यता के साथ-साथ उनके प्रशासनिक ढांचे की भी जांच करें। प्रत्यारोपण सहयोग के मामले में इसका मतलब है यह पूछना कि दाता की सहमति की पुष्टि कौन करता है, शिकायतों की जांच कौन कर सकता है और क्या अस्पताल की अपनी आदेश-श्रृंखला से बाहर रिकॉर्ड की जांच संभव है।

अंगों का इंतजार कर रहे मरीज ऐसी व्यवस्था पर निर्भर हैं जो दाताओं और अंग पाने वालों, दोनों की सुरक्षा करे। जांच उन संस्थानों को जिम्मेदार ठहराती है जो साझेदारी की मंजूरी देते हैं और नैतिक कार्यप्रणाली का प्रमाणन करते हैं, ताकि वे सहमति, अंग निकालने और जवाबदेही के बारे में सत्यापित किए जा सकने वाले जवाब मांगें।

मुख्य बिंदु

  • ETAC की जांच में 12 प्रांतों या नगरपालिकाओं के 18 अस्पतालों में प्रत्यारोपण क्षेत्र के नेताओं में सीसीपी के 19 सदस्य मिले।
  • इनमें से छह लोगों के पास अस्पतालों में पार्टी के वरिष्ठ पद भी थे।
  • 2016 की राष्ट्रीय प्रत्यारोपण समिति की सार्वजनिक सूची में शामिल 33 लोगों में से 17 के सीसीपी सदस्य होने की पुष्टि हुई।
  • 2022 में चीन में 180 से अधिक मान्यता प्राप्त प्रत्यारोपण अस्पतालों के लिए 118 अस्पताल-आधारित अंग खरीद संगठन काम कर रहे थे।
  • चीन ने 2015 में स्वैच्छिक अंगदान की ओर बढ़ने की घोषणा की थी। बाद में चाइना ट्रिब्यूनल ने निष्कर्ष निकाला कि बड़े पैमाने पर जबरन अंग निकाले गए थे।
  • जांच स्वतंत्र निगरानी, मुखबिरों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रत्यारोपण साझेदारियों की अधिक बारीकी से जांच की मांग करती है।
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