छाती की हड्डी को चीरे बिना नया हृदय
शीआन जियाओतोंग विश्वविद्यालय के प्रथम संबद्ध अस्पताल के सर्जनों ने 5 अक्टूबर को चीन का पहला रोबोट-सहायता प्राप्त न्यूनतम चीर-फाड़ वाला हृदय प्रत्यारोपण किया। उन्होंने एक बुजुर्ग व्यक्ति के खराब हो चुके हृदय को पसलियों के बीच लगभग 8 सेंटीमीटर के चीरे से निकालकर उसकी जगह नया हृदय लगाया। मरीज का बायां निलय इजेक्शन फ्रैक्शन केवल 19% था। उसे कोरोनरी धमनी रोग, पहले हुए छोटे मस्तिष्काघात और एम्फाइसीमा की समस्या भी थी।
विषय-सूची
- छाती की हड्डी को चीरे बिना नया हृदय
- मरीज की शल्य चिकित्सा में जोखिम असामान्य रूप से अधिक क्यों था
- छोटे चीरे की तैयारी
- पांच जोड़ से रक्त संचार बहाल
- शुरुआती सुधार क्या बताता है और क्या नहीं
- सऊदी अरब का ऑपरेशन तुलना का अलग आधार देता है
- इन पड़ावों का क्रम
- आगे के नतीजे तय करेंगे कि इस तकनीक की क्या भूमिका होगी
- मुख्य बातें
अस्पताल ने 9 अक्टूबर को एक प्रेस वार्ता में इस ऑपरेशन की घोषणा की और इसे दुनिया का इस तरह का तीसरा तथा चीन का पहला प्रत्यारोपण बताया। टीम में हृदय-वाहिका सर्जन यान यांग और ली योंगशिन शामिल थे। छाती की बीच की हड्डी को चीरकर किए जाने वाले पारंपरिक प्रत्यारोपण से अलग, इस प्रक्रिया में मुख्य छोटे चीरे और रोबोटिक उपकरणों के लिए दो अतिरिक्त छिद्रों का इस्तेमाल किया गया।
रक्त की आपूर्ति बहाल होने के बाद दाता हृदय धड़कने लगा। मरीज को हृदय शल्य चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई में वापस ले जाया गया और ऑपरेशन के दिन ही उसे यांत्रिक वेंटिलेशन से हटा दिया गया। एक अलग विवरण के अनुसार, यह 12 घंटे बाद हुआ और मरीज को पुनर्वास उपचार दिया जा रहा था।
यह उपलब्धि दिखाती है कि इस मरीज के लिए यह तरीका संभव था। लेकिन इससे अभी यह साबित नहीं होता कि बड़े मरीज समूह में इसके जोखिम या स्वास्थ्य लाभ पारंपरिक प्रत्यारोपण से किस तरह अलग हैं। अस्पताल ने शुरुआती सुधार को उत्साहजनक बताया है, लेकिन छुट्टी की तारीख या लंबे समय के नतीजे जारी नहीं किए हैं।
मरीज की शल्य चिकित्सा में जोखिम असामान्य रूप से अधिक क्यों था
मरीज की हालत कई महीनों से बिगड़ रही थी। शारीरिक गतिविधि के बाद उसे छाती में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ होती थी। इसके बाद छह महीने तक हृदय की कार्यक्षमता लगातार घटती गई। उपचार से पहले आखिरी महीने में लक्षण बहुत गंभीर हो गए: वह आराम से पीठ के बल नहीं लेट पाता था और उसके दोनों पैरों में बहुत सूजन थी।
19% इजेक्शन फ्रैक्शन का अर्थ है कि हर संकुचन के दौरान बायां निलय अपने भीतर के रक्त का कितना अनुपात बाहर निकालता है; इसका अर्थ यह नहीं कि हृदय का केवल इतना हिस्सा काम कर रहा था। लक्षणों के साथ यह बेहद कम माप हृदय की गंभीर रूप से कमजोर पंप करने की क्षमता दिखाता था। जांच में हृदय के कई वाल्वों से काफी रक्त रिसाव भी मिला।
अन्य बीमारियों ने फैसला और जटिल बना दिया था। कोरोनरी धमनी रोग ने हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को प्रभावित किया था; कई लैक्यूनर मस्तिष्काघात से मस्तिष्क के छोटे हिस्सों में पहले हुई चोट का संकेत मिला; और एम्फाइसीमा फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी थी। टीम ने निष्कर्ष निकाला कि दवाओं से उसकी बिगड़ती हालत अब पलटी नहीं जा सकती और प्रत्यारोपण ही उसे बचाने का आखिरी विकल्प था।
दाता हृदय की प्रतीक्षा के लिए मरीज का नाम चीन ऑर्गन ट्रांसप्लांट रिस्पॉन्स सिस्टम में दर्ज किया गया। छोटा चीरा चुनने से यह जरूरत खत्म नहीं हुई: ऑपरेशन अब भी अंग आवंटन और उपयुक्त दाता हृदय मिलने पर निर्भर था।
अस्पताल के हृदय-वाहिका अस्पताल के उप प्रमुख और हृदय शल्य चिकित्सा विभाग के निदेशक यान ने बताया कि पारंपरिक प्रत्यारोपण में छाती के बीच में 20 सेंटीमीटर से बड़ा चीरा लगाया जाता है और छाती की हड्डी को चीरना पड़ता है। इस मरीज के मामले में टीम को रक्तस्राव, छाती की हड्डी में संक्रमण और घाव भरने में देरी की आशंका खास तौर पर गंभीर लगी।
छोटे चीरे की तैयारी
रोबोटिक सहायता का इस्तेमाल करने के फैसले के लिए कई विभागों को मिलकर तैयारी करनी पड़ी। हृदय-वाहिका सर्जनों ने अंग प्राप्ति संगठन, एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर के कर्मचारियों, अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञों तथा हृदय शल्य चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई के साथ काम किया। उनकी योजना में ऑपरेशन, दाता हृदय की सुरक्षा और उसके तुरंत बाद की देखभाल शामिल थी।
त्रि-आयामी छवि पुनर्निर्माण और मॉडलों की मदद से टीम ने चीरे की जगह, उपकरणों की गति और दाता हृदय को अंदर पहुंचाने के तरीके का अभ्यास किया। ये बारीकियां अहम हैं, क्योंकि छोटा चीरा पहुंच सीमित करता है, भले ही रोबोट बड़ा करके देखने और उपकरणों को नियंत्रित ढंग से चलाने की सुविधा देता हो।
चिकित्सकों ने दाता अंग की सुरक्षा, उसकी रक्त वाहिकाओं को जोड़ने और शरीर के बाहर रक्त संचार बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार कीं। शरीर के बाहर रक्त संचार का अर्थ है कि सर्जनों के हृदय पर काम करते समय रक्त का प्रवाह शरीर के बाहर की व्यवस्था से बनाए रखा जाता है।
दाता अंग आवंटन की सूचना मिलते ही टीम ने रात में ऑपरेशन शुरू कर दिया। तैयारी का उद्देश्य सीमित जगह में प्रक्रिया को सुचारु रखना और दाता हृदय की सुरक्षा करना था, जिसे रक्त आपूर्ति के बिना अनिश्चित काल तक नहीं रखा जा सकता।
पांच जोड़ से रक्त संचार बहाल
मुख्य चीरा पसलियों के बीच लगाया गया और इसकी लंबाई लगभग 8 सेंटीमीटर थी। रोबोटिक भुजाओं को अंदर पहुंचाने के लिए छाती की दीवार में दो छोटे छिद्र किए गए। सर्जनों ने छाती की हड्डी नहीं चीरी। इस तरीके का उद्देश्य सामान्य बीच वाले चीरे से छाती खोलने के बजाय उसकी संरचना को सुरक्षित रखना था।
यह अब भी छाती के भीतर की बड़ी शल्य चिकित्सा थी। प्रक्रिया को छाती खोले बिना किया गया प्रत्यारोपण बताने का आशय पारंपरिक स्टर्नोटॉमी से बचना है, जिसमें छाती की हड्डी को चीरकर अलग किया जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि बिना चीरे या छाती की गुहा तक शल्य चिकित्सा पहुंच के हृदय बदल दिया गया।
बढ़े हुए त्रि-आयामी दृश्य की मदद से सर्जनों ने रोबोटिक उपकरणों को नियंत्रित किया और रोगग्रस्त हृदय को अलग कर निकालने, दाता हृदय को अंदर पहुंचाने तथा पांच शल्य जोड़ पूरे करने का काम किया। ये जोड़ बाएं आलिंद, फुफ्फुसीय धमनी, महाधमनी, ऊपरी वेना कावा और निचली वेना कावा के बीच बनाए गए।
इन जोड़ों से दाता हृदय में रक्त के आने-जाने के मार्ग बहाल हुए। वेना कावा शरीर से रक्त वापस लाती हैं, फुफ्फुसीय धमनी रक्त को फेफड़ों तक ले जाती है और महाधमनी रक्त को शरीर में पहुंचाती है। बाएं आलिंद का जोड़ फेफड़ों से लौटने वाले रक्त को दाता हृदय तक पहुंचाता है।
प्रक्रिया के दौरान टीम ने दाता हृदय को ठंडा रखकर सुरक्षित किया। महाधमनी में रक्त प्रवाह बहाल होने पर हृदय फिर धड़कने लगा। इस विवरण में रोबोटिक सहायता का मतलब है कि सर्जनों ने उपकरणों को चलाया; इसका अर्थ यह नहीं कि किसी स्वायत्त मशीन ने प्रत्यारोपण किया।
शुरुआती सुधार क्या बताता है और क्या नहीं
अस्पताल की घोषणा के अनुसार, ऑपरेशन के दिन ही मरीज की सांस की नली हटा दी गई थी। एक अन्य विवरण में कहा गया है कि यह ऑपरेशन के 12 घंटे बाद हुआ। दोनों बातें एक-दूसरे से मेल खाती हैं, हालांकि सटीक समय केवल दूसरे विवरण में दिया गया है। दोनों से यही पता चलता है कि यांत्रिक वेंटिलेशन अपेक्षाकृत जल्दी बंद किया गया, न कि मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो गया।
छाती की हड्डी न चीरने से कटने के बाद उसके जुड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। यान द्वारा बताए गए पारंपरिक चीरे के मुकाबले मुख्य चीरा भी काफी छोटा था: लगभग 8 सेंटीमीटर, जबकि पारंपरिक चीरा 20 सेंटीमीटर से बड़ा होता है। इन आंकड़ों के अनुसार मुख्य चीरा पारंपरिक चीरे की लंबाई के दो-पांचवें हिस्से से भी कम था, हालांकि रोबोटिक तरीके में दो अतिरिक्त छिद्र भी बनाने पड़े।
केवल चीरे की लंबाई से प्रत्यारोपण की कुल जटिलता नहीं मापी जा सकती। मरीज का हृदय निकालकर उसकी जगह नया हृदय लगाया गया, जटिल शल्य जोड़ बनाए गए और ऑपरेशन के बाद गहन निगरानी की गई। छोटे चीरे को इस बात का प्रमाण नहीं मानना चाहिए कि प्रत्यारोपण के सभी जोखिम खत्म हो गए हैं।
9 अक्टूबर की प्रेस वार्ता में यान ने छाती की संरचना सुरक्षित रखने को इसका मुख्य लाभ बताया। उनके बयान का चीनी से अनुवाद इस प्रकार है:
रोबोट-सहायता प्राप्त न्यूनतम चीर-फाड़ वाले हृदय प्रत्यारोपण का मुख्य लाभ छाती की अखंड संरचना को सुरक्षित रखना, शल्य आघात को काफी कम करना, स्वास्थ्य लाभ की अवधि घटाना और छाती की हड्डी में संक्रमण का जोखिम कम करना है।
ये टीम द्वारा बताए गए लाभ और लक्ष्य हैं। चीन के इस मरीज के मामले में जारी नतीजे सफल ऑपरेशन और उत्साहजनक शुरुआती सुधार का संकेत देते हैं। अस्पताल में रहने की अवधि, ऑपरेशन के बाद दर्द, रक्तस्राव या संक्रमण के आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं, जिनसे पारंपरिक प्रत्यारोपण के साथ सीधी तुलना की जा सके।
सऊदी अरब का ऑपरेशन तुलना का अलग आधार देता है
सऊदी अरब में इससे पहले की प्रक्रिया रियाद स्थित किंग फैसल स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में की गई थी। 25 फरवरी, 2025 को ऑनलाइन प्रकाशित एक अकादमिक विवरण में इसे पूरी तरह रोबोटिक ऑर्थोटोपिक हृदय प्रत्यारोपण बताया गया है। ऑर्थोटोपिक का अर्थ है कि दाता हृदय को प्राप्तकर्ता के हृदय की सामान्य शारीरिक जगह पर लगाया जाता है।
अस्पताल की टीम के रोबोटिक प्रत्यारोपण अध्ययन के अनुसार, मरीज 16 वर्षीय लड़का था। उसे नॉन-इस्कीमिक डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी के कारण दोनों निलयों में ऐसा हृदय-विफलता रोग था जो उपचार से नियंत्रित नहीं हो रहा था। आसान शब्दों में कहें तो इलाज के बावजूद हृदय के दोनों मुख्य पंपिंग कक्ष काम नहीं कर रहे थे। हृदय की मांसपेशी बढ़ी हुई और कमजोर थी, लेकिन इसकी बीमारी का कारण कोरोनरी धमनियों से अपर्याप्त रक्त आपूर्ति नहीं था।
इस मरीज की हालत गंभीर कोरोनरी, मस्तिष्क और फेफड़ों की बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्ग चीनी मरीज से काफी अलग थी। दोनों ऑपरेशन अलग-अलग चिकित्सकीय परिस्थितियों में इस तरीके के इस्तेमाल को दिखाते हैं, लेकिन इनके नतीजों की नियंत्रित तुलना नहीं करते और न ही यह बताते हैं कि किन मरीजों को सबसे अधिक फायदा होगा।
सऊदी टीम ने समयबद्ध तकनीकी प्रशिक्षण के तहत कई शवों पर इस तरीके का अभ्यास किया। अकादमिक सार के अनुसार, मरीज की सुरक्षा के लिए दाता अंग का इस्कीमिक समय सीमित रखना जरूरी था। इस्कीमिक समय वह अवधि है, जब दाता अंग को उसकी सामान्य रक्त आपूर्ति नहीं मिलती। इससे पता चलता है कि छोटे चीरे की तैयारी में पहुंच के साथ गति और अंग की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है।
सऊदी अध्ययन में इस्कीमिक समय कम, वेंटिलेशन 24 घंटे से कम, मरीज को जल्दी चलाना-फिराना, ऑपरेशन के बाद दर्द कम और अस्पताल में रहने की अवधि कम बताई गई है। इसके सार में इस्कीमिक समय या अस्पताल में रहने की अवधि के सटीक आंकड़े नहीं दिए गए। इसलिए वेंटिलेशन की सीमित जानकारी को छोड़कर इन नतीजों की चीनी मामले से संख्यात्मक तुलना नहीं की जा सकती।
इन पड़ावों का क्रम
घटनाक्रम से पता चलता है कि रोबोटिक प्रत्यारोपण अभी शुरुआती चरण में है। अस्पताल के अनुसार, सऊदी अरब और अमेरिका के बाद चीन इस तकनीक का इस्तेमाल करने वाला तीसरा देश है। अलग-अलग मामलों में शब्दावली समान नहीं है: सऊदी अरब का अकादमिक प्रकाशन इस प्रक्रिया को पूरी तरह रोबोटिक प्रत्यारोपण बताता है, जबकि चीन के ऑपरेशन का वर्णन रोबोट-सहायता प्राप्त न्यूनतम चीर-फाड़ वाले प्रत्यारोपण के रूप में किया गया है।
- 2024: सऊदी अरब में वह प्रक्रिया की गई जिसे दुनिया का पहला पूरी तरह रोबोटिक हृदय प्रत्यारोपण बताया गया।
- 25 फरवरी, 2025: रियाद के ऑपरेशन का अकादमिक विवरण ऑनलाइन प्रकाशित हुआ।
- 2025: अमेरिका में वह प्रक्रिया की गई जिसे उत्तरी अमेरिका का पहला प्रत्यारोपण बताया गया।
- 5 अक्टूबर: शीआन की टीम ने चीन का पहला रोबोट-सहायता प्राप्त न्यूनतम चीर-फाड़ वाला हृदय प्रत्यारोपण किया।
- 9 अक्टूबर: अस्पताल ने प्रेस वार्ता में ऑपरेशन और शुरुआती सुधार की घोषणा की।
चीन की घोषणा में 5 और 9 अक्टूबर की तारीखें दी गई हैं, लेकिन यहां प्रस्तुत विवरण में वर्ष नहीं बताया गया। सऊदी प्रकाशन की तारीख भी ऑपरेशन की तारीख से अलग है। इन तारीखों को अलग रखने से अकादमिक शोधपत्र के प्रकाशन को सर्जरी की उपलब्धि समझने की गलती नहीं होती।
आगे के नतीजे तय करेंगे कि इस तकनीक की क्या भूमिका होगी
यान ने कहा कि यह तरीका बुजुर्ग मरीजों और कई अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए एक और विकल्प दे सकता है, जिन्हें पारंपरिक सर्जरी में काफी जोखिम का सामना करना पड़ता है। चीन का यह मामला एक सावधानी से चुने गए मरीज में इस संभावना को दिखाता है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि इन समूहों के सभी लोगों के लिए रोबोटिक प्रत्यारोपण उपयुक्त है।
अभी कई ठोस जानकारियां उपलब्ध नहीं हैं। अस्पताल ने मरीज की सटीक उम्र, कुल ऑपरेशन समय, दाता अंग का इस्कीमिक समय, छुट्टी की तारीख या लंबे समय में नए हृदय की कार्यक्षमता का खुलासा नहीं किया है। घोषणा में मरीजों के तुलनात्मक समूह के नतीजे भी पेश नहीं किए गए। इन जानकारियों से यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि छोटे चीरे का रास्ता प्रत्यारोपण से समझौता किए बिना लगातार लाभ देता है या नहीं।
टीम का कहना है कि वह अपने न्यूनतम चीर-फाड़ वाले प्रत्यारोपण कार्यक्रम को बेहतर बनाने की योजना बना रही है। अगले ऑपरेशन, किसी चिकित्सकीय अध्ययन या आगे के नतीजे जारी करने की तारीख घोषित नहीं की गई है। फिलहाल सबसे ठोस निष्कर्ष इतना है: सर्जनों ने छाती की हड्डी को चीरने के बिना बुरी तरह विफल हो चुके हृदय को बदला और मरीज को जल्द ही वेंटिलेशन से हटा दिया गया।
मुख्य बातें
- शीआन में ऑपरेशन 5 अक्टूबर को हुआ और इसकी घोषणा 9 अक्टूबर को की गई।
- बुजुर्ग मरीज का इजेक्शन फ्रैक्शन 19% था और उसे कई गंभीर सहवर्ती बीमारियां थीं।
- सर्जनों ने लगभग 8 सेंटीमीटर का चीरा और रोबोट के लिए दो छिद्र इस्तेमाल किए तथा छाती की हड्डी को चीरने से बचा।
- पांच शल्य जोड़ों से दाता हृदय में रक्त संचार बहाल हुआ।
- मरीज को उसी दिन वेंटिलेशन से हटा दिया गया; एक अलग विवरण में 12 घंटे का समय दिया गया है।
- अस्पताल ने इस प्रक्रिया को चीन का पहला और दुनिया का इस तरह का तीसरा प्रत्यारोपण बताया है।
- लंबे समय के स्वास्थ्य लाभ के नतीजे और तुलनात्मक साक्ष्य जारी नहीं किए गए हैं।






