पाकिस्तान 17 सरकारी उपक्रमों के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ा, तीन हवाई अड्डों के निजी प्रबंधन की योजना

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Pakistan Advances Privatisation of 17 State Enterprises and Plans Private Management of Three Airports

नौ बिजली वितरक ताज़ा पहल के केंद्र में

पाकिस्तान नौ बिजली वितरण कंपनियों समेत 17 सरकारी उपक्रमों के निजीकरण पर काम कर रहा है। साथ ही, इस्लामाबाद, कराची और लाहौर के तीन प्रमुख हवाई अड्डों का निजी प्रबंधन सौंपने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री के निजीकरण सलाहकार और निजीकरण आयोग के अध्यक्ष मुहम्मद अली ने गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को इस्लामाबाद में CEO समिट में कार्यक्रम की रूपरेखा पेश की।

विषय-सूची
  1. नौ बिजली वितरक ताज़ा पहल के केंद्र में
  2. IESCO के लिए 10 संभावित खरीदार आगे बढ़े
  3. हवाई अड्डों के लिए खुली प्रतिस्पर्धा
  4. कृषि ऋण और बीमा की अलग-अलग प्रक्रियाएं
  5. 2024 से कार्यक्रम में आए बदलाव
  6. कुछ कारोबार बिक्री से बाहर रखे जा रहे हैं
  7. अली ने निजी निवेश को घरेलू बचत से जोड़ा
  8. वस्तु निर्यात से 11.6 अरब डॉलर अधिक धन भेजते हैं प्रवासी
  9. कर्मचारी भी निवेश योजना का हिस्सा
  10. मुख्य बिंदु

बिजली कंपनियों से जुड़े सौदे ठोस चरण में पहुंच गए हैं: आयोग के बोर्ड ने इस्लामाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड (IESCO) के निजीकरण की प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए 10 इच्छुक पक्षों को मंज़ूरी दी है। बैंकिंग और बीमा से जुड़े सौदे भी आगे बढ़ रहे हैं। इनमें ज़रई तरक़्क़ियाती बैंक लिमिटेड (ZTBL) में कृषि ऋण को बनाए रखने के लिए प्रस्तावित बदलाव और स्टेट लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान के लिए पसंदीदा वित्तीय सलाहकार समूह का चयन शामिल है।

हवाई अड्डों के लिए अलग रास्ता अपनाया जा रहा है। सरकार प्रबंधन अनुबंधों या वाणिज्यिक रियायतों पर विचार कर रही है, जिनके तहत निजी कंपनियां तय शर्तों के अनुसार सुविधाओं का संचालन करेंगी। सरकार का आधिकारिक रुख है कि घरेलू और विदेशी निवेशकों को खुली बोली के ज़रिये प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए।

अली ने इन सौदों को एक व्यापक आर्थिक कार्यक्रम का हिस्सा बताया, जो भरोसेमंद बिजली, निजी निवेश, निर्यात और कार्यबल के कौशल को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को 2022 और 2023 में गंभीर आर्थिक और राजकोषीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था और अब विकास को बनाए रखने के लिए सुधारों को लगातार लागू करना ज़रूरी है।

घरों, कारोबारों, किसानों और यात्रियों के लिए यह कार्यक्रम रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली सेवाओं से जुड़ा है: बिजली आपूर्ति, कृषि ऋण, बीमा और हवाई अड्डों का संचालन। अब तक घोषित फैसले निवेशकों की पात्रता, सौदों की रूपरेखा और सलाहकारों से संबंधित हैं। सौदों को पूरा करने से पहले आगे का काम अभी बाकी है।

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IESCO के लिए 10 संभावित खरीदार आगे बढ़े

इस्लामाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड (IESCO), फैसलाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी लिमिटेड (FESCO) और गुजरांवाला इलेक्ट्रिक पावर कंपनी लिमिटेड (GEPCO) बिजली वितरकों का पहला समूह हैं, जिन्हें निजीकरण के लिए चुना गया है। आम तौर पर DISCOs कहलाने वाली ये कंपनियां स्थानीय नेटवर्क के ज़रिये घरों और कारोबारों तक बिजली पहुंचाती हैं और ग्राहकों से भुगतान वसूलती हैं।

IESCO के लिए मंज़ूरी पाने वाले 10 पक्षों में तुर्किये की तीन ऊर्जा कंपनियां शामिल हैं: Aktor Elektrik Enerji Yatirimlari, Genvera Enerji और Cengiz Enerji। पाकिस्तानी पक्षों में Engro Energy, Sapphire Fibers, Novatex और Bestway Cement शामिल हैं। इनके अलावा Artistic Milliners, Hub Power Holding और Hasnaat Brothers Construction के नेतृत्व वाले समूह भी हैं।

मंज़ूरी प्राप्त निवेशकों को अगली प्रक्रिया में वर्चुअल डेटा रूम तक पहुंच मिलेगी। यह कारोबारी रिकॉर्ड का एक सुरक्षित संग्रह होता है, जिसे संभावित खरीदार किसी कंपनी के वित्त, संचालन और देनदारियों को समझने के लिए देखते हैं, ताकि तय कर सकें कि वे क्या पेशकश करेंगे। इस जांच को समुचित पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) कहा जाता है।

बोर्ड ने Artistic Milliners समूह के अतिरिक्त सदस्यों को भी मंज़ूरी दी। यह समूह पहले ही FESCO सौदे के लिए पात्र ठहर चुका था। इसके समूह में Lake City Holdings, Fatima Capital, Din Ventures और Fazal Cloth Mills शामिल हैं। इस व्यवस्था से पहले समूह की बिजली कंपनियों से जुड़े सौदों में भागीदारी संभव होती है, बशर्ते हर बिक्री की शर्तें पूरी हों।

अली ने किफायती और भरोसेमंद ऊर्जा को अपनी प्रमुख आर्थिक प्राथमिकताओं में रखा। बिजली वितरण उनके कार्यक्रम के दो हिस्सों को जोड़ता है: सरकारी कारोबारों का पुनर्गठन और उन परिस्थितियों में सुधार जिनमें दूसरी कंपनियां वस्तुओं का उत्पादन करती हैं, कर्मचारियों को रोज़गार देती हैं और निर्यात ऑर्डर हासिल करने के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं।

हवाई अड्डों के लिए खुली प्रतिस्पर्धा

निजीकरण आयोग के हवाई अड्डा कार्यक्रम के बयान में, जिसे प्रेस विज्ञप्ति संख्या 02/2026 के रूप में जारी किया गया, पुष्टि की गई है कि इस्लामाबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सक्रिय निजीकरण कार्यक्रम में शामिल हो गया है। इसके साथ कराची के जिन्ना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और लाहौर के अल्लामा इक़बाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की प्रक्रियाएं भी जारी हैं।

आयोग ने प्रबंधन अनुबंधों और लंबी अवधि की वाणिज्यिक रियायतों को संभावित व्यवस्थाओं के रूप में बताया है। प्रबंधन अनुबंध के तहत किसी संचालक को तय गतिविधियां चलाने की ज़िम्मेदारी दी जाती है। रियायत में एक निश्चित अवधि के लिए संचालन और वाणिज्यिक अधिकार दिए जाते हैं और ज़िम्मेदारियां अनुबंध में निर्धारित होती हैं।

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नवंबर 2025 में सरकार ने तीनों हवाई अड्डों के लिए सरकारों के बीच बातचीत से तय होने वाली व्यवस्था के बजाय खुली बोली अपनाने का फैसला किया। आयोग ने कहा कि निवेशकों की मज़बूत दिलचस्पी के कारण यह बदलाव किया गया और पात्र स्थानीय तथा विदेशी निवेशकों को भाग लेने के समान अवसर मिलेंगे।

आयोग ने संयुक्त अरब अमीरात के साथ हवाई अड्डे के समझौते से जुड़े दावों पर भी सफाई दी। उसने कहा कि इस्लामाबाद या अन्य दोनों हवाई अड्डों के लिए ऐसा कोई पट्टा कभी हस्ताक्षरित नहीं हुआ। बातचीत में UAE, तुर्किये और सऊदी अरब की संस्थाओं के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय पक्ष भी शामिल थे।

सरकार के घोषित उद्देश्यों में बेहतर सेवा, अधिक राजस्व, बुनियादी ढांचे का उन्नयन और निजी निवेश शामिल हैं। यात्रियों के लिए ये लक्ष्य हवाई अड्डों की सुविधाओं और संचालन की गुणवत्ता से जुड़े हैं। संचालक के सटीक कर्तव्य क्या होंगे और उसके प्रदर्शन का आकलन कैसे किया जाएगा, यह अंतिम अनुबंध पर निर्भर करेगा।

कृषि ऋण और बीमा की अलग-अलग प्रक्रियाएं

ZTBL के सौदे की रूपरेखा कृषि ऋण देने में बैंक की भूमिका को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है। निजीकरण आयोग के बोर्ड ने प्रधानमंत्री के निर्देशों के बाद सौदे की संरचना और पुनर्गठन योजना में बदलावों को मंज़ूरी दी, ताकि निजीकरण के बाद भी बैंक का ध्यान कृषि और किसान वित्तपोषण पर बना रहे।

किसानों के लिए यह शर्त अहम है, क्योंकि प्रस्तावित सौदा बैंक के स्वामित्व के साथ-साथ उसके उद्देश्य को जारी रखने से भी जुड़ा है। मंज़ूर की गई रूपरेखा का लक्ष्य संस्थान के स्वामित्व और संगठन के तरीके में बदलाव करते हुए कृषि वित्त को उसकी प्रमुख भूमिका बनाए रखना है।

स्टेट लाइफ अभी सलाहकार नियुक्ति के चरण में है। बोर्ड ने वित्तीय सलाहकार नियुक्त करने के लिए Deutsche Bank के नेतृत्व वाले समूह को सबसे ऊंची रैंकिंग वाला उम्मीदवार चुना और वित्तीय सलाहकार सेवा समझौते पर बातचीत के लिए एक समिति गठित की। सलाहकार सौदे की तैयारी और संरचना बनाने तथा बिक्री प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने में मदद करता है।

घोषित कदमों में IESCO के लिए निवेशकों की समुचित पड़ताल और स्टेट लाइफ के लिए सलाहकार अनुबंध पर बातचीत शामिल है। इन सौदों और हवाई अड्डों की व्यवस्थाओं के लिए पूरा होने की तारीखें, अंतिम कीमतें और विस्तृत शर्तें नहीं बताई गईं।

2024 से कार्यक्रम में आए बदलाव

प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने 14 मई 2024 को सरकार की निजीकरण नीति का दायरा बढ़ाते हुए रणनीतिक श्रेणी में आने वाले उपक्रमों को छोड़कर सभी सरकारी उपक्रमों के निजीकरण की योजना घोषित की। पहले की नीति का ध्यान घाटे में चल रहे कारोबारों पर था। विस्तारित नीति के तहत सरकारी स्वामित्व वाले वाणिज्यिक कारोबार भी समीक्षा के दायरे में आ गए।

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2024 में बताई गई सूची में 25 संस्थाएं और परिसंपत्तियां थीं। इनमें पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस, मैनहैटन का रूज़वेल्ट होटल, दो बीमा कंपनियां, चार बिजलीघर और बिजली उत्पादन तथा वितरण की 10 कंपनियां शामिल थीं। इनमें से दो बिजलीघरों की क्षमता 1,200 मेगावाट से अधिक थी। उस समय सरकार फर्स्ट विमेन बैंक और UAE के बीच सरकारों के स्तर पर एक सौदे पर भी चर्चा कर रही थी।

मुख्य चरणों से पता चलता है कि नीति व्यापक घोषणा से आगे बढ़कर अलग-अलग सौदों के फैसलों तक कैसे पहुंची:

  • 14 मई 2024: शरीफ़ ने रणनीतिक उपक्रमों को छोड़कर सरकारी उपक्रमों के निजीकरण की घोषणा की और घाटे में चल रहे कारोबारों को प्राथमिकता दी।
  • नवंबर 2025: सरकार ने तीनों हवाई अड्डों के संचालन की व्यवस्था के लिए खुली बोली अपनाने का फैसला किया।
  • 1 दिसंबर 2025: निजीकरण आयोग के बोर्ड ने तीन उपक्रमों को कार्यक्रम में जोड़ने और दो अन्य को हटाने की सिफारिश की।
  • 2026 के हवाई अड्डा बयान में: आयोग ने इस्लामाबाद हवाई अड्डे को सक्रिय कार्यक्रम में शामिल किए जाने की पुष्टि की।
  • 22 अक्टूबर 2026: अली ने इस्लामाबाद CEO समिट में 17 उपक्रमों और तीन हवाई अड्डों के निजी प्रबंधन से जुड़े काम की रूपरेखा पेश की।

2024 का आंकड़ा कार्यक्रम की सूची में शामिल संस्थाओं और परिसंपत्तियों से संबंधित था, जबकि अली का ताज़ा आंकड़ा उन उपक्रमों का है जिन पर आयोग काम कर रहा है। आयोग यह भी समीक्षा करता रहा है कि कौन-से कारोबार सौदे के लिए उपयुक्त हैं। इस तरह कार्यक्रम की संरचना तय करना भी एक सक्रिय नीतिगत फैसला है।

कुछ कारोबार बिक्री से बाहर रखे जा रहे हैं

आयोग के दिसंबर के बोर्ड बयान में इस जांच प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। अली की अध्यक्षता में 1 दिसंबर 2025 को हुई 243वीं बैठक में बोर्ड ने मंत्रालयों से भेजे गए 15 उपक्रमों के निवेश समिति के आकलन पर विचार किया।

इनमें से केवल तीन को कार्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश के लिए मंज़ूरी मिली: Saindak Metals Limited, Pakistan Minerals Development Corporation और National Insurance Company Limited। बाकी 12 उपक्रम निजीकरण के लिए अनुपयुक्त पाए गए। यानी इस समीक्षा में जांचे गए उपक्रमों में से केवल पांचवां हिस्सा कार्यक्रम में शामिल किए जाने की दिशा में आगे बढ़ा।

बोर्ड ने Sindh Engineering Limited और Utility Stores Corporation को कार्यक्रम से हटाने की भी अलग से सिफारिश की। Sindh Engineering 2007–08 से निष्क्रिय थी और उसकी एकमात्र मूर्त परिसंपत्ति ज़मीन थी, जिस पर मुकदमे चल रहे थे। सरकार के फैसले के बाद Utility Stores ने कामकाज बंद कर दिया था और उसकी देनदारियां परिसंपत्तियों से काफी अधिक थीं।

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आयोग ने कहा कि बिक्री के लिए अनुपयुक्त उपक्रमों के मामले में मंत्रालय परिसमापन समेत दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। परिसमापन का अर्थ किसी संगठन को बंद करना और उसकी परिसंपत्तियों तथा कर्ज़ का निपटारा करना है। दिसंबर के फैसले दिखाते हैं कि निजीकरण कार्यक्रम में उन कारोबारों पर भी निर्णय लेना पड़ता है जो काम करना बंद कर चुके हैं या जिनकी देनदारियां बिक्री को जटिल बनाती हैं।

अली ने निजी निवेश को घरेलू बचत से जोड़ा

अली ने अपने आर्थिक प्रस्तावों को TRUST नामक पांच हिस्सों वाले ढांचे में रखा: प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों को प्राथमिकता देना, सुधारों को जारी रखना, निजी पूंजी के रास्ते खोलना, निर्यात बढ़ाना और प्रतिभा का विकास करना। उनका तर्क था कि इन प्राथमिकताओं पर एक साथ आगे बढ़ना ज़रूरी है।

प्रधानमंत्री के निजीकरण सलाहकार मुहम्मद अली ने इस दृष्टिकोण में भरोसे और नीतिगत निरंतरता को केंद्रीय बताया:

विकास का रहस्य एक शब्द में है: भरोसा।

अली के हवाले से दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान की घरेलू बचत सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 14% थी, जबकि बांग्लादेश में यह 34% और भारत में 30% थी। GDP किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापता है। बचत दर बताती है कि इस मूल्य का कितना हिस्सा खर्च होने के बजाय बचाया जाता है।

इन आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान की बचत दर बांग्लादेश से 20 प्रतिशत अंक और भारत से 16 अंक कम थी। अली ने अधिक बचत के ज़रिये निवेश को वित्तपोषित करने के साथ-साथ विदेशी निवेश बढ़ाने और नए कारोबारों को समर्थन देने के पक्ष में यह तुलना पेश की।

उन्होंने आर्थिक गतिविधियों का बेहतर लेखा-जोखा रखने की भी मांग की, ताकि उसका अधिक हिस्सा कर प्रणाली के दायरे में आए। उनका घोषित लक्ष्य पहले से कर चुकाने वाले लोगों और कारोबारों पर बोझ बढ़ाए बिना कर आधार को व्यापक बनाना था। उनके अनुसार, निजीकरण और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी से कारोबारों तथा बुनियादी ढांचे में पूंजी और विशेषज्ञता लाई जा सकती है, जबकि ज़रूरी सेवाओं के लिए सार्वजनिक संसाधन उपलब्ध होंगे।

वस्तु निर्यात से 11.6 अरब डॉलर अधिक धन भेजते हैं प्रवासी

अली ने कहा कि विदेशों में काम करने वाले लोगों ने पिछले वित्त वर्ष में पाकिस्तान को करीब 41.6 अरब डॉलर भेजे, जबकि वस्तुओं के निर्यात से करीब 30 अरब डॉलर की कमाई हुई। दोनों के बीच का अंतर 11.6 अरब डॉलर था: प्रवासी धन प्रेषण वस्तु निर्यात से करीब 39% अधिक था।

प्रवासी धन प्रेषण वह रकम है जो विदेश में काम करने वाले लोग अपने घर भेजते हैं। वस्तु निर्यात में दूसरे देशों के ग्राहकों को बेचे जाने वाले उत्पाद शामिल होते हैं। दोनों से पाकिस्तान में विदेशी मुद्रा आती है, लेकिन अली का तर्क था कि निरंतर विकास के लिए घरेलू उत्पादन और अधिक मूल्य वाले निर्यात को मज़बूत करना ज़रूरी है।

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कृषि और खाद्य प्रसंस्करण, कपड़ा और परिधान, तथा सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटल सेवाएं वे क्षेत्र थे जिन्हें उन्होंने प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को उन गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए जिनमें पहले से मज़बूती हो, जिनकी अंतरराष्ट्रीय मांग हो, जिनसे बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा हो सके और विदेशी मुद्रा कमाई जा सके।

अली ने चीन, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और बांग्लादेश को ऐसी अर्थव्यवस्थाओं के उदाहरण के रूप में पेश किया जिन्होंने अपनी मज़बूतियों के आधार पर विकास किया और नीतियों की दिशा लगातार एक जैसी रखी। उनका प्रस्ताव निर्यात वृद्धि को बिजली कार्यक्रम से जोड़ता है: उत्पादकों को भरोसेमंद ऊर्जा के साथ निवेश और ऐसे कर्मचारियों की ज़रूरत है जो ग्राहकों की मांग पूरी कर सकें।

कर्मचारी भी निवेश योजना का हिस्सा

शिक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण अली के ढांचे में प्रतिभा विकास का हिस्सा थे। उन्होंने उद्योग की ज़रूरतों से अधिक जुड़ा प्रशिक्षण देने की मांग की और कहा कि मशीनरी तथा पूंजी विदेश से हासिल की जा सकती है, लेकिन पाकिस्तान को अपना कार्यबल भी तैयार करना होगा।

उनके प्रस्तावों में महिलाएं भी शामिल थीं। अली ने कौशल विकास और रोज़गार तक महिलाओं की पहुंच बढ़ाने की मांग की और कहा कि उनकी अधिक भागीदारी से उत्पादकता तथा प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा। उन्होंने इन उपायों के साथ नए कारोबारों को समर्थन देने और पाकिस्तानी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में विस्तार के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी कही।

कार्यक्रम का पैमाना सरकार की प्राथमिकताओं को समझने में मदद करता है। 2024 की नीतिगत चर्चा के दौरान उद्धृत अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों के अनुसार, 2019 में सरकारी उपक्रमों की परिसंपत्तियां GDP का 44% थीं और उनमें से लगभग आधे उपक्रम उस वर्ष घाटे में चल रहे थे। ये ऐतिहासिक आंकड़े सार्वजनिक कारोबार क्षेत्र के बड़े आकार को दर्शाते हैं, जबकि बोर्ड के ताज़ा फैसले बताते हैं कि निवेशकों का चयन करने, संस्थानों के कामकाज को बनाए रखने और यह तय करने के लिए व्यावहारिक स्तर पर क्या काम हो रहा है कि कौन-से सौदे आगे बढ़ सकते हैं।

इसलिए पाकिस्तान की मौजूदा पहल में कई काम शामिल हैं: कारोबारों का स्वामित्व निजी हाथों में देना, हवाई अड्डों के निजी संचालन की व्यवस्था करना, वित्तीय संस्थानों का पुनर्गठन और बिक्री के लिए अनुपयुक्त उपक्रमों को बंद करना। अली का व्यापक आर्थिक तर्क है कि निरंतर विकास के लिए इन बदलावों के साथ भरोसेमंद ऊर्जा, मज़बूत निर्यात, निवेश और कौशल भी ज़रूरी हैं।

मुख्य बिंदु

  • निजीकरण आयोग नौ बिजली वितरकों समेत 17 सरकारी उपक्रमों पर काम कर रहा है।
  • IESCO के निजीकरण में आगे बढ़ने के लिए 10 इच्छुक पक्ष पात्र ठहरे हैं, जिनमें तुर्किये की तीन ऊर्जा कंपनियां शामिल हैं।
  • इस्लामाबाद, कराची और लाहौर के हवाई अड्डों के लिए खुली प्रतिस्पर्धा के ज़रिये निजी संचालन की व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं।
  • ZTBL की संशोधित सौदा योजना का लक्ष्य कृषि ऋण को बनाए रखना है; स्टेट लाइफ वित्तीय सलाहकार की नियुक्ति की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
  • दिसंबर 2025 की समीक्षा में तीन उपक्रमों को शामिल करने और Sindh Engineering तथा Utility Stores को हटाने की सिफारिश की गई।
  • अली ने निजीकरण को निवेश, निर्यात, भरोसेमंद बिजली, तकनीकी कौशल और महिलाओं के लिए अधिक रोज़गार अवसरों से जोड़ा।
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